अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
Circuits, Voltage, Power, Frequency, Phase, DC, AC, Troubleshooting, Maintenance, Installation, Systems, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switch, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switchgear, Electronics, Renewable, Energy, Solar, Wind, Smart, Grid, Control, PID, Controller, PLC, SCADA, HMI, Electricity, Testing, Measurement, Drives, Wiring, Current, Electrical, Engineering, Electrician, Diagram, BJT, MOSFET,
सीढ़ी प्रोग्रामिंग में इंटरलॉकिंग
सीढ़ी प्रोग्रामिंग (Ladder Programming) में इंटरलाकिंग (Interlocking) एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसका उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि किसी प्रक्रिया में विशिष्ट ऑपरेशन एक निर्धारित क्रम में हों और कुछ विशेष स्थितियों को पूरा किए बिना अन्य ऑपरेशन शुरू न हों। इसका प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षा और नियंत्रण है।
इंटरलॉकिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
* सुरक्षा: इंटरलॉकिंग खतरनाक स्थितियों को रोकने में मदद करती है। उदाहरण के लिए, एक मशीन तब तक शुरू नहीं होगी जब तक उसके सभी सुरक्षा गार्ड अपनी जगह पर न हों।
* उपकरणों की सुरक्षा: यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण गलत तरीके से संचालित न हों, जिससे टूट-फूट या क्षति से बचा जा सके।
* प्रक्रिया की शुद्धता: यह प्रक्रियाओं को सही और कुशल तरीके से आगे बढ़ने के लिए बाध्य करता है।
सीढ़ी लॉजिक में इंटरलॉकिंग कैसे काम करती है?
सीढ़ी लॉजिक में, इंटरलॉकिंग आमतौर पर सीरीज़ कनेक्शन (Series Connection) में संपर्कों का उपयोग करके प्राप्त की जाती है। इसका मतलब है कि एक आउटपुट को सक्रिय करने के लिए कई शर्तों (इनपुट) को एक साथ संतुष्ट करना होगा।
आइए एक सरल उदाहरण देखें:
मान लीजिए हमें एक मोटर को चालू करना है, लेकिन इसके लिए दो शर्तें हैं:
* मोटर को चालू करने वाला बटन दबाया गया हो।
* ओवरलोड रिले ट्रिप न हुआ हो (यानी, मोटर पर अधिक भार न हो)।
इस स्थिति में, मोटर को चालू करने वाले कॉइल (आउटपुट) के लिए सीढ़ी लॉजिक में दो सामान्य रूप से खुले (Normally Open - NO) संपर्क श्रृंखला में जुड़े होंगे: एक बटन के लिए और एक ओवरलोड रिले के लिए।
---[ बटन का संपर्क ]---[ ओवरलोड रिले का संपर्क ]---( मोटर कॉइल )---
व्याख्या:
* [ बटन का संपर्क ]: यह संपर्क तभी बंद होगा जब बटन दबाया जाएगा।
* [ ओवरलोड रिले का संपर्क ]: यह संपर्क तभी बंद रहेगा जब ओवरलोड रिले सामान्य स्थिति में हो (ट्रिप न हुआ हो)।
* ( मोटर कॉइल ): यह कॉइल तभी ऊर्जावान होगा (मोटर चालू होगी) जब दोनों संपर्क बंद होंगे।
यदि इनमें से कोई भी संपर्क खुला है (जैसे बटन नहीं दबाया गया है, या ओवरलोड रिले ट्रिप हो गया है), तो मोटर कॉइल में बिजली नहीं जाएगी और मोटर चालू नहीं होगी।
इंटरलॉकिंग के प्रकार
इंटरलॉकिंग को मोटे तौर पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
* हार्डवेयर इंटरलॉकिंग (Hardware Interlocking): इसमें भौतिक तार या यांत्रिक घटक शामिल होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कुछ क्रियाएं केवल तभी हों जब कुछ शर्तें पूरी हों। यह अक्सर सुरक्षा-महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है।
* सॉफ्टवेयर इंटरलॉकिंग (Software Interlocking): इसमें पीएलसी (PLC) प्रोग्राम के भीतर लॉजिक का उपयोग किया जाता है ताकि यह नियंत्रित किया जा सके कि कौन सी क्रियाएं कब हो सकती हैं। सीढ़ी प्रोग्रामिंग में यही विधि सबसे आम है।
व्यावहारिक उदाहरण
* दो मोटरें (Motor 1 और Motor 2): आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि Motor 2 तब तक चालू न हो जब तक Motor 1 चालू न हो जाए। आप Motor 1 के आउटपुट कॉइल के सामान्य रूप से खुले संपर्क को Motor 2 के स्टार्ट लॉजिक के साथ श्रृंखला में जोड़ सकते हैं।
* दरवाजे और मशीनें: एक मशीन तब तक चालू नहीं होगी जब तक उसके सुरक्षा द्वार पूरी तरह से बंद न हों। आप दरवाजों पर लगे लिमिट स्विच के संपर्कों को मशीन के स्टार्ट लॉजिक के साथ इंटरलॉक कर सकते हैं।
सीढ़ी प्रोग्रामिंग में इंटरलॉकिंग प्रक्रिया नियंत्रण और स्वचालन प्रणालियों की विश्वसनीयता और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें