अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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सर्वो ड्राइव प्रोग्रामिंग, सर्वो मोटर को सटीक गति, स्थिति और टॉर्क नियंत्रण के लिए कमांड देने की प्रक्रिया है। यह औद्योगिक स्वचालन, रोबोटिक्स, सीएनसी मशीनों और अन्य अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण है जहाँ उच्च सटीकता और दोहराव की आवश्यकता होती है।
सर्वो ड्राइव के मूल सिद्धांत
सर्वो ड्राइव एक क्लोज-लूप कंट्रोल सिस्टम पर काम करता है। इसका मतलब है कि यह लगातार मोटर की वास्तविक स्थिति और गति को मापता है (एक एनकोडर का उपयोग करके) और इस जानकारी की तुलना वांछित कमांड से करता है। यदि कोई अंतर है, तो ड्राइव मोटर को बिजली समायोजित करता है ताकि त्रुटि को ठीक किया जा सके और मोटर वांछित प्रक्षेपवक्र का पालन करे।
इसके मुख्य घटक हैं:
* सर्वो मोटर: जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक गति में परिवर्तित करती है।
* एनकोडर: मोटर की वास्तविक स्थिति और गति का फीडबैक प्रदान करता है।
* नियंत्रक (Controller): अक्सर एक PLC (प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर) या एक समर्पित मोशन कंट्रोलर, जो वांछित कमांड उत्पन्न करता है और फीडबैक की तुलना करता है।
* पावर एम्पलीफायर/ड्राइव: जो नियंत्रक से संकेतों को बढ़ाता है और मोटर को चलाने के लिए आवश्यक शक्ति प्रदान करता है।
सर्वो ड्राइव के प्रमुख कार्य:
* स्थिति नियंत्रण (Position Control): मोटर को एक विशिष्ट स्थिति में ले जाना और उसे बनाए रखना।
* गति नियंत्रण (Speed Control): मोटर को एक विशिष्ट गति से चलाना।
* टॉर्क नियंत्रण (Torque Control): मोटर द्वारा लगाए गए बल को नियंत्रित करना।
सर्वो ड्राइव प्रोग्रामिंग कैसे करें?
सर्वो ड्राइव की प्रोग्रामिंग आमतौर पर कंट्रोलर (जैसे PLC) और ड्राइव के स्वयं के इंटरफ़ेस के माध्यम से की जाती है। यहाँ कुछ सामान्य चरण दिए गए हैं:
1. हार्डवेयर कनेक्शन
* सर्वो ड्राइव को पावर स्रोत से कनेक्ट करें।
* सर्वो मोटर को ड्राइव से कनेक्ट करें।
* एनकोडर फीडबैक तारों को ड्राइव से कनेक्ट करें।
* कंट्रोलर (PLC) को सर्वो ड्राइव के कंट्रोल इनपुट/आउटपुट से कनेक्ट करें। इसमें पल्स/दिशा सिग्नल, अलार्म सिग्नल, रीसेट सिग्नल आदि शामिल हो सकते हैं।
2. ड्राइव पैरामीटर सेटिंग
प्रत्येक सर्वो ड्राइव का अपना विशिष्ट सॉफ्टवेयर या कीपैड इंटरफ़ेस होता है जिसके माध्यम से विभिन्न पैरामीटर सेट किए जाते हैं। इन पैरामीटर्स में शामिल हैं:
* मोटर के स्पेसिफिकेशन्स: मोटर प्रकार, रेटेड करंट, एनकोडर प्रकार, पल्स प्रति क्रांति (PPR) आदि।
* नियंत्रण मोड: स्थिति, गति, या टॉर्क नियंत्रण।
* गेन ट्यूनिंग (Gain Tuning): यह ड्राइव के प्रतिक्रियाशील व्यवहार को निर्धारित करता है। इसमें आनुपातिक (proportional), इंटीग्रल (integral), और डेरिवेटिव (derivative) (PID) गेन शामिल हो सकते हैं। सही ट्यूनिंग स्थिरता और सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।
* सीमाएं: अधिकतम गति, अधिकतम टॉर्क, त्वरण/मंदी दर आदि।
* I/O मैपिंग: डिजिटल इनपुट/आउटपुट के कार्य को परिभाषित करना।
3. कंट्रोलर (PLC) प्रोग्रामिंग
सर्वो मोटर को नियंत्रित करने के लिए PLC या मोशन कंट्रोलर में लॉजिक लिखा जाता है। इसमें सामान्यतः निम्नलिखित निर्देश (Instructions) शामिल होते हैं:
* पल्स आउटपुट (Pulse Output): PLC से सर्वो ड्राइव को पल्स सिग्नल भेजे जाते हैं। प्रत्येक पल्स मोटर को एक छोटी सी मात्रा में स्थानांतरित करती है।
* दिशा नियंत्रण (Direction Control): एक अलग डिजिटल आउटपुट का उपयोग मोटर की घूर्णन दिशा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
* होमिंग (Homing): यह मोटर को एक ज्ञात संदर्भ स्थिति पर लाने की प्रक्रिया है।
* पोजीशनिंग (Positioning): मोटर को एक विशिष्ट गंतव्य स्थिति में ले जाने के लिए पल्स की संख्या और गति को नियंत्रित करना।
* जॉग ऑपरेशन (Jog Operation): मोटर को मैन्युअल रूप से आगे या पीछे चलाने के लिए।
* अलार्म हैंडलिंग (Alarm Handling): ड्राइव से आने वाले किसी भी त्रुटि या अलार्म सिग्नल को प्रबंधित करना।
4. ट्यूनिंग और परीक्षण
प्रारंभिक प्रोग्रामिंग के बाद, सिस्टम की ट्यूनिंग करना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि मोटर वांछित प्रदर्शन प्रदान करे, ओवरशूट, ऑसीलेशन या धीमी प्रतिक्रिया जैसे मुद्दों के बिना।
* मैनुअल ट्यूनिंग: ड्राइव के पैरामीटर को मैन्युअल रूप से समायोजित करके।
* ऑटो-ट्यूनिंग: कई आधुनिक सर्वो ड्राइव में ऑटो-ट्यूनिंग फ़ंक्शन होते हैं जो लोड की विशेषताओं का विश्लेषण करके स्वचालित रूप से गेन पैरामीटर को अनुकूलित करते हैं।
मुख्य बिंदु याद रखने योग्य
* PPR (पल्स पर रिवॉल्यूशन): यह एनकोडर की रिज़ॉल्यूशन को दर्शाता है, यानी एक पूर्ण क्रांति के लिए कितनी पल्स जनरेट होती हैं।
* पिच (Pitch): यदि सर्वो मोटर एक बॉल स्क्रू या अन्य रैखिक तंत्र से जुड़ी है, तो स्क्रू की पिच (एक क्रांति में तय की गई दूरी) को स्थिति गणना में ध्यान में रखना होगा।
* क्लोज-लूप सिस्टम: सर्वो ड्राइव का मुख्य लाभ इसका क्लोज-लूप नियंत्रण है, जो उच्च सटीकता और त्रुटि सुधार सुनिश्चित करता है।
सर्वो ड्राइव प्रोग्रामिंग के लिए विशिष्ट ड्राइव ब्रांड (जैसे डेल्टा, मित्सुबिशी, पैनासोनिक, यासीकावा) और उपयोग किए जा रहे PLC (जैसे सीमेंस, एलन-ब्रैडली, मित्सुबिशी, डेल्टा) के आधार पर विवरण भिन्न हो सकते हैं। हमेशा संबंधित मैनुअल और सॉफ्टवेयर का संदर्भ लें।
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