अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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ट्रांसफार्मर परीक्षण के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. रूटीन टेस्ट (Routine Tests)
ये वे परीक्षण होते हैं जो प्रत्येक निर्मित ट्रांसफार्मर इकाई पर उसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
* वाइंडिंग रेजिस्टेंस टेस्ट (Winding Resistance Test): यह ट्रांसफार्मर वाइंडिंग के DC प्रतिरोध को मापता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे डिज़ाइन विनिर्देशों को पूरा करते हैं और कोई ढीला कनेक्शन या क्षतिग्रस्त कंडक्टर नहीं हैं।
* टर्न रेशियो टेस्ट (Turns Ratio Test): यह जांचने के लिए कि ट्रांसफार्मर वाइंडिंग का टर्न अनुपात निर्दिष्ट डिज़ाइन अनुपात से मेल खाता है, प्राथमिक और द्वितीयक वाइंडिंग के बीच के अनुपात को मापता है।
* पोलैरिटी और फेज रिलेशन टेस्ट (Polarity and Phase Relation Test): यह उचित चरण संबंध सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिक और द्वितीयक वाइंडिंग के सही कनेक्शन को निर्धारित करता है।
* इंपीडेंस वोल्टेज और लोड लॉस टेस्ट (Impedance Voltage & Load Loss Test): यह दोष धाराओं को संभालने की क्षमता निर्धारित करने के लिए ट्रांसफार्मर की प्रतिबाधा को मापता है और लोड स्थितियों में होने वाले नुकसान (जैसे कॉपर लॉस) को भी मापता है।
* नो-लोड लॉस और एक्साइटेशन करंट टेस्ट (No-Load Loss & Excitation Current Test): यह ट्रांसफार्मर के कोर (लोहे) में होने वाले नुकसान और बिना लोड पर चलने वाले ट्रांसफार्मर द्वारा ली गई धारा को मापता है।
* इंसुलेशन रेजिस्टेंस टेस्ट (Insulation Resistance Test) (मेगर टेस्ट): यह ट्रांसफार्मर वाइंडिंग के इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई दोष या रिसाव पथ नहीं है। यह इन्सुलेशन की नमी सामग्री और गिरावट का पता लगाने में भी मदद करता है।
* डायइलेक्ट्रिक रूटीन टेस्ट (Dielectric Routine Test): इसमें अलग-अलग स्रोतों से AC वोल्टेज सहन परीक्षण और लघु-अवधि प्रेरित AC वोल्टेज सहन परीक्षण शामिल हैं, जो इन्सुलेशन की ताकत की जांच करते हैं।
* लीक टेस्टिंग (Leak Testing): लिक्विड-इमर्स्ड ट्रांसफार्मर में जोड़ों और गास्केट से रिसाव की जांच के लिए किया जाता है।
2. टाइप टेस्ट (Type Tests)
ये परीक्षण प्रोटोटाइप ट्रांसफार्मर पर उनके डिज़ाइन को सत्यापित करने और विभिन्न परिचालन स्थितियों के तहत उनके प्रदर्शन को मान्य करने के लिए किए जाते हैं। ये परीक्षण प्रत्येक इकाई पर नहीं किए जाते हैं, बल्कि एक विशिष्ट डिज़ाइन के पहले ट्रांसफार्मर पर किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
* टेंपरेचर राइज टेस्ट (Temperature Rise Test): यह ट्रांसफार्मर की क्षमता का मूल्यांकन करता है कि वह निर्दिष्ट तापमान सीमा को पार किए बिना पूर्ण-लोड स्थितियों के तहत गर्मी को कितनी अच्छी तरह खत्म करता है।
* डायइलेक्ट्रिक टाइप टेस्ट (Dielectric Type Tests): इसमें लाइटनिंग इम्पल्स टेस्ट (बिजली गिरने के प्रभावों का अनुकरण करने के लिए) और स्विचिंग इम्पल्स टेस्ट (स्विचिंग ऑपरेशन से होने वाले ओवरवोल्टेज के लिए) शामिल हैं।
* शॉर्ट-सर्किट विदस्टैंड टेस्ट (Short-Circuit Withstand Test): यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि ट्रांसफार्मर बिना किसी नुकसान के शॉर्ट-सर्किट स्थितियों का सामना कर सके।
* साउंड लेवल डिटरमिनेशन (Determination of Sound Level): यह ट्रांसफार्मर के संचालन के दौरान उत्पन्न ध्वनि स्तर को मापता है।
3. विशेष परीक्षण (Special Tests)
ये परीक्षण विशिष्ट आवश्यकताओं या अनुप्रयोगों के आधार पर किए जाते हैं, और इन्हें ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:
* डिजॉल्व्ड गैस इन ऑयल एनालिसिस (Dissolved Gas in Oil Analysis - DGA): यह ट्रांसफार्मर तेल में घुली हुई गैसों का विश्लेषण करता है ताकि आंतरिक दोषों का पता लगाया जा सके।
* फ्रीक्वेंसी रिस्पांस एनालिसिस (Frequency Response Analysis - FRA): यह ट्रांसफार्मर के वाइंडिंग और कोर की यांत्रिक अखंडता का आकलन करता है।
* पार्शियल डिस्चार्ज टेस्ट (Partial Discharge Test): यह ट्रांसफार्मर के इन्सुलेशन में छोटे दोषों का पता लगाता है जो समय के साथ बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।
* वाइब्रेशन एनालिसिस (Vibration Analysis): ट्रांसफार्मर के कंपन स्तरों का विश्लेषण कर आंतरिक समस्याओं का पता लगाना।
इन मुख्य श्रेणियों के अलावा, ट्रांसफार्मर के जीवनचक्र के विभिन्न चरणों (जैसे प्री-कमीशनिंग टेस्ट, पीरियडिक/कंडीशन मॉनिटरिंग टेस्ट, और इमरजेंसी टेस्ट) के दौरान भी परीक्षण किए जाते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रूप से और कुशलता से काम कर रहा है, सभी परीक्षण महत्वपूर्ण हैं।
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