अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

एसी मोटर्स का सिद्धांत विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) पर आधारित है

 एसी मोटर्स का सिद्धांत विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) पर आधारित है

जो माइकल फैराडे द्वारा खोजा गया था। सरल शब्दों में, यह सिद्धांत बताता है कि जब एक चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होता है, तो एक चालक (कंडक्टर) में विद्युत धारा (current) उत्पन्न होती है, और जब एक विद्युत धारा प्रवाहित चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है।

एसी मोटर के मुख्य भाग:


 * स्टेटर (Stator): 

यह मोटर का स्थिर (stationary) हिस्सा होता है। इसमें वाइंडिंग (तारों के कुंडल) होते हैं जिनमें जब प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्रवाहित होती है, तो एक घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र (rotating magnetic field) उत्पन्न होता है।

 * रोटर (Rotor): 

यह मोटर का घूमने वाला (rotating) हिस्सा होता है। यह स्टेटर के घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र के अंदर स्थित होता है।

कार्य सिद्धांत को समझना:


 * घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण: 

जब प्रत्यावर्ती धारा (AC) स्टेटर की वाइंडिंग से गुजरती है, तो यह एक विशेष प्रकार का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जिसे "घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र" कहा जाता है। यह चुंबकीय क्षेत्र वास्तव में घूमता है, जैसे एक अदृश्य चुंबक मोटर के अंदर घूम रहा हो। तीन-फेज एसी मोटर में, यह घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र स्वाभाविक रूप से बनता है। सिंगल-फेज एसी मोटर में, इस घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र को बनाने के लिए अक्सर एक कैपेसिटर का उपयोग किया जाता है।

 * प्रेरण द्वारा धारा का उत्पादन: 

यह घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र रोटर के चालकों (कंडक्टरों) को "काटता" है। फैराडे के प्रेरण के नियम के अनुसार, जब एक चालक चुंबकीय क्षेत्र को काटता है, तो उस चालक में एक विद्युत धारा (प्रेरित धारा) उत्पन्न होती है।

 * बल का उत्पादन और गति: 

रोटर में उत्पन्न हुई यह प्रेरित धारा अब स्वयं एक चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। स्टेटर के घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र और रोटर के प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र के बीच परस्पर क्रिया होती है। लेन्ज़ के नियम (Lenz's Law) के अनुसार, प्रेरित धारा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया है। इसलिए, रोटर में उत्पन्न हुई धारा और उसका चुंबकीय क्षेत्र स्टेटर के घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र का विरोध करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप रोटर पर एक बल (टॉर्क) कार्य करता है। यह बल रोटर को घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में घुमाना शुरू कर देता है।

 * सिंक्रोनस और असिंक्रोनस का अंतर:


   * सिंक्रोनस मोटर: 

इस प्रकार की मोटर में रोटर बिल्कुल उसी गति (सिंक्रोनस स्पीड) पर घूमता है जिस गति से स्टेटर का घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र घूम रहा होता है। इनमें रोटर को बाहरी रूप से उत्तेजित किया जाता है।

   * असिंक्रोनस (इंडक्शन) मोटर: 

इस मोटर में रोटर की गति हमेशा स्टेटर के घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र की गति से थोड़ी कम होती है। यह "स्लिप" (slip) कहलाती है। यह स्लिप आवश्यक है क्योंकि यदि रोटर उसी गति पर घूमेगा जिस पर चुंबकीय क्षेत्र घूम रहा है, तो कोई सापेक्ष गति नहीं होगी, और कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी, जिससे कोई बल उत्पन्न नहीं होगा।

संक्षेप में, एसी मोटरें प्रत्यावर्ती धारा का उपयोग करके एक घूर्णन चुंबकीय क्षेत्र बनाती हैं, जो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के माध्यम से रोटर में धारा उत्पन्न करता है, और इस धारा के कारण रोटर पर बल कार्य करता है जिससे वह घूमने लगता है।


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