अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
Circuits, Voltage, Power, Frequency, Phase, DC, AC, Troubleshooting, Maintenance, Installation, Systems, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switch, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switchgear, Electronics, Renewable, Energy, Solar, Wind, Smart, Grid, Control, PID, Controller, PLC, SCADA, HMI, Electricity, Testing, Measurement, Drives, Wiring, Current, Electrical, Engineering, Electrician, Diagram, BJT, MOSFET,
पीएलसी (प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर) विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिन्हें उनके आकार, कार्यक्षमता और डिज़ाइन के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:
1. संरचना के आधार पर:
* फिक्स्ड/कॉम्पैक्ट पीएलसी (Fixed/Compact PLC):
* इनमें सीपीयू, पावर सप्लाई और इनपुट/आउटपुट (I/O) सभी एक ही यूनिट में निर्मित होते हैं।
* ये आमतौर पर छोटे और लागत प्रभावी होते हैं, जो छोटे सिस्टम या उन अनुप्रयोगों के लिए आदर्श होते हैं जहाँ इनपुट और आउटपुट की संख्या अक्सर नहीं बदलती है।
* इनपुट/आउटपुट बिंदुओं की संख्या तय होती है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता।
* मॉड्यूलर पीएलसी (Modular PLC):
* ये अधिक लचीले होते हैं और इनमें अलग-अलग प्लग-इन मॉड्यूल होते हैं जैसे पावर, सीपीयू, I/O और संचार।
* आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार मॉड्यूल जोड़ या बदल सकते हैं, जिससे यह बड़े या बढ़ते सिस्टम के लिए उपयुक्त होता है।
* I/O क्षमता को आसानी से बढ़ाया जा सकता है।
* इनमें खराबी का पता लगाना और रखरखाव करना आसान होता है।
2. आकार और क्षमता के आधार पर:
* नैनो पीएलसी (Nano PLC):
* ये सबसे छोटे पीएलसी होते हैं, जिनमें आमतौर पर लगभग 15 I/O बिंदु होते हैं।
* इनका उपयोग बहुत ही सरल और छोटे अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है।
* माइक्रो पीएलसी (Micro PLC):
* ये नैनो पीएलसी से थोड़े बड़े होते हैं और इनमें आमतौर पर 20 से 32 I/O बिंदु होते हैं।
* ये छोटे मशीनों जैसे मोटर्स और कन्वेयर को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त होते हैं।
* स्मॉल पीएलसी (Small PLC):
* ये छोटे आकार की मशीनों को नियंत्रित करने के लिए होते हैं।
* इनमें पर्याप्त मेमोरी होती है और ये आमतौर पर सीमित I/O के साथ आते हैं।
* मीडियम पीएलसी (Medium PLC):
* ये काफी शक्तिशाली होते हैं और इनमें अधिक I/O क्षमता (आमतौर पर 2048 तक) और मेमोरी (32 KB तक) होती है।
* ये छोटे संयंत्रों या मध्यम आकार के स्वचालन परियोजनाओं को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं।
* लार्ज पीएलसी (Large PLC):
* इनमें सबसे अधिक I/O क्षमता (2048 से 8900 तक या अधिक) और बहुत अधिक मेमोरी होती है।
* ये बहुत बड़े और जटिल औद्योगिक स्वचालन प्रणालियों, जैसे कि पूरे उत्पादन संयंत्रों या बिजली उत्पादन टर्बाइनों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
3. आउटपुट प्रकार के आधार पर:
* रिले आउटपुट पीएलसी (Relay Output PLC):
* ये एसी और डीसी दोनों आउटपुट उपकरणों के लिए उपयुक्त होते हैं।
* ये पीएलसी और बाहरी उपकरणों के बीच विद्युत अलगाव प्रदान करते हैं।
* ट्रांजिस्टर आउटपुट पीएलसी (Transistor Output PLC):
* ये स्विचिंग ऑपरेशन के लिए ट्रांजिस्टर का उपयोग करते हैं और उच्च धाराओं को संभाल सकते हैं।
* इनका उपयोग माइक्रोप्रोसेसरों के भीतर किया जाता है।
* ट्रायैक आउटपुट पीएलसी (Triac Output PLC):
* ये मुख्य रूप से एसी आउटपुट उपकरणों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
* एनालॉग आउटपुट पीएलसी (Analog Output PLC):
* ये ऐसे उपकरण को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं जिन्हें नियंत्रण की विभिन्न डिग्री की आवश्यकता होती है, और निरंतर वोल्टेज या वर्तमान सिग्नल उत्पन्न करते हैं।
इन वर्गीकरणों के अलावा, पीएलसी को उनकी प्रोग्रामिंग भाषाओं (जैसे लेडर लॉजिक, स्ट्रक्चर्ड टेक्स्ट, फंक्शन ब्लॉक डायग्राम), या विशेष अनुप्रयोगों (जैसे सुरक्षा पीएलसी) के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें