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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

भारत में विद्युत से संबंधित नियमों और पंजीकरण प्रक्रियाओं को मुख्य रूप से विद्युत अधिनियम, 2003 (The Electricity Act, 2003) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस अधिनियम ने पहले के कानूनों, जैसे भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 और विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 को निरस्त कर दिया है।

 भारत में विद्युत से संबंधित नियमों और पंजीकरण प्रक्रियाओं को मुख्य रूप से विद्युत अधिनियम, 2003 (The Electricity Act, 2003) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस अधिनियम ने पहले के कानूनों, जैसे भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 और विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 को निरस्त कर दिया है। विद्युत अधिनियम, 2003 के मुख्य उद्देश्य:  * बिजली के उत्पादन, पारेषण (transmission), वितरण (distribution), व्यापार और उपयोग से संबंधित कानूनों को समेकित करना।  * बिजली उद्योग के विकास के लिए उपाय करना।  * इसमें प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।  * उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना।  * सभी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना।  * बिजली टैरिफ का युक्तिकरण करना। प्रमुख भारतीय विद्युत नियम और प्रावधान: यह अधिनियम बिजली क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है, जिनमें शामिल हैं:  * राष्ट्रीय विद्युत नीति (National Electricity Policy): केंद्र सरकार राज्य सरकारों के परामर्श से राष्ट्रीय विद्युत नीति तैयार करती है, जो बिजली क्षेत्र के विकास के लिए दिशानिर्देश प्रदान करती है। ...