अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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प्रतिरोध (Resistance) भौतिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण गुण है, खासकर विद्युत (electricity) के संदर्भ में।
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प्रतिरोध किसी चालक पदार्थ का वह गुण है, जिसके कारण वह अपने में से होकर विद्युत धारा (Electric Current) के प्रवाह का विरोध करता है। इसे सरल शब्दों में विद्युत धारा के रास्ते में आने वाली रुकावट या अवरोध कह सकते हैं।
ओम के नियम (Ohm's Law) के अनुसार, प्रतिरोध (R) किसी चालक के दो सिरों के बीच के विभवांतर (V) और उसमें बह रही विद्युत धारा (I) के अनुपात के बराबर होता है:
R = {V}/{I}
किसी चालक का प्रतिरोध मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
ज़रूर, प्रतिरोध (Resistance) को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक चार हैं, जिन्हें एक सूत्र में भी व्यक्त किया जाता है।
किसी चालक (Conductor) का प्रतिरोध (R) निम्नलिखित चार कारकों पर निर्भर करता है:
प्रतिरोध चालक की लम्बाई के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होता है।
प्रतिरोध चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (मोटाई) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होता है।
प्रतिरोध चालक बनाने के लिए उपयोग किए गए पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है, जिसे प्रतिरोधकता (Resistivity, rho) कहते हैं।
तापमान का प्रभाव पदार्थ के प्रकार पर निर्भर करता है:
उपर्युक्त पहले तीन कारकों को मिलाकर प्रतिरोध का सूत्र (Formula) इस प्रकार बनता है:
R = rho {l}/{A}
जहाँ:
प्रतिरोधकता, जिसे विशिष्ट प्रतिरोध (Specific Resistance) भी कहते हैं, पदार्थ का एक बहुत ही महत्वपूर्ण आंतरिक गुण है।
यह गुण हमें बताता है कि कोई पदार्थ विद्युत धारा के प्रवाह का कितना दृढ़ता से विरोध करता है, चाहे वह पदार्थ कितना भी लम्बा या मोटा क्यों न हो।
प्रतिरोधकता (rho, जिसे ग्रीक अक्षर 'रो' से दर्शाते हैं) किसी पदार्थ का वह मूल गुण है जो केवल पदार्थ की प्रकृति (Material) और तापमान पर निर्भर करता है, न कि उसकी लम्बाई या अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर।
तकनीकी रूप से, प्रतिरोधकता किसी पदार्थ के एक एकांक लम्बाई (1 मीटर) और एकांक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (1 वर्ग मीटर) वाले चालक तार के प्रतिरोध के बराबर होती है।
हम जानते हैं कि प्रतिरोध (R) का सूत्र है:
R = rho {l}/{A}
जहाँ:
इस सूत्र को पुनर्व्यवस्थित (Rearrange) करने पर हमें प्रतिरोधकता का सूत्र मिलता है:
rho = {R × A}/{l}
मात्रक (SI Unit)
प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम-मीटर होता है, जिसे Omega cdot m से दर्शाया जाता है।
मात्रक की व्युत्पत्ति:
rho = {Omega × m^2}/{m} = Omega cdot m
प्रतिरोध पर तापमान का प्रभाव पदार्थ की प्रकृति (Nature of Material) पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से इसे तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
धातुओं में धनात्मक तापमान गुणांक (Positive Temperature Coefficient) होता है। इसका अर्थ है:
अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम) में ऋणात्मक तापमान गुणांक (Negative Temperature Coefficient) होता है। इसका अर्थ है:
मिश्र धातुओं (जैसे नाइक्रोम, मैंगनीन) का उपयोग अक्सर हीटिंग तत्वों में किया जाता है क्योंकि उनका प्रतिरोध तापमान परिवर्तन के साथ बहुत कम बदलता है।
ओम का नियम (Ohm's Law) विद्युत परिपथों (Electric Circuits) के सबसे मूलभूत और महत्वपूर्ण नियमों में से एक है।
यह नियम किसी चालक (Conductor) में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा, चालक के सिरों के बीच के विभवांतर (वोल्टेज) और उसके प्रतिरोध के बीच संबंध स्थापित करता है।
जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम (Georg Simon Ohm) द्वारा दिए गए इस नियम के अनुसार:
"यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे- तापमान, दाब, लम्बाई, क्षेत्रफल) स्थिर (अपरिवर्तित) रहें, तो चालक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर (Voltage, V) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (Current, I) के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होता है।"
परिभाषा के अनुसार, हम इसे इस प्रकार लिख सकते हैं:
{V}/{I}
समानुपाती (proportionality) के चिह्न को हटाने पर, एक स्थिरांक (Constant) आता है, जिसे प्रतिरोध (Resistance, R) कहते हैं।
V = I × R
इस सूत्र को निम्नलिखित तीन रूपों में लिखा जा सकता है, जो विद्युत परिपथों की गणना में बहुत उपयोगी होते हैं:
भौतिक राशि
सूत्र मात्रक
विभवांतर (Voltage, V)
V = I × R वोल्ट (Volt, V)
धारा (Current, I)
I = {V}/{R} एम्पीयर (Ampere, A)
प्रतिरोध (Resistance, R)
R = {V}/{I}
ओम (Ohm, Omega)
ओम के नियम का पालन करने वाले चालकों (जिन्हें ओमिक चालक कहा जाता है) के लिए, विभवांतर (V) और धारा (I) के बीच खींचा गया ग्राफ हमेशा एक सीधी रेखा (Straight Line) होता है जो मूल बिंदु से गुजरती है।
प्रतिरोध (Resistance) के लिए उपयोग होने वाले प्रमुख प्रतीक (Symbol) और मात्रक (Units) निम्नलिखित हैं:
|
विवरण |
प्रतीक (Symbol) |
इकाई (Unit) |
|---|---|---|
|
भौतिक राशि का प्रतीक |
R |
- |
|
SI मात्रक (SI Unit) |
- |
ओम (Ohm) |
|
SI मात्रक का प्रतीक |
- |
Omega (ओमेगा) |
|
अन्य मात्रक |
- |
वोल्ट प्रति एम्पीयर (Volt per Ampere, V/A) |
प्रतिरोध को भौतिकी और विद्युत परिपथों में अक्सर अक्षर R (अंग्रेजी शब्द Resistance से) द्वारा दर्शाया जाता है।
प्रतिरोध का अंतर्राष्ट्रीय मानक (SI) मात्रक ओम (Ohm) है।
ओम के नियम (R = V/I) के अनुसार, प्रतिरोध को वोल्ट प्रति एम्पीयर के रूप में भी परिभाषित किया जाता है:
1 Omega = {1 {वोल्ट} (V)}/{1 {एम्पीयर} (A)}
परिपथों में प्रतिरोध का मान अक्सर बहुत अधिक होता है, इसलिए बड़े मात्रकों का भी प्रयोग किया जाता है:
प्रतिरोध (Resistance) और प्रतिरोधकता (Resistivity) दोनों विद्युत से संबंधित मूलभूत अवधारणाएं हैं, लेकिन वे अलग-अलग चीजों को दर्शाती हैं।
इन दोनों के बीच मुख्य अंतरों को नीचे एक तालिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है:
|
अंतर का आधार |
प्रतिरोध (Resistance, R) |
प्रतिरोधकता (Resistivity, rho) |
|---|---|---|
|
परिभाषा |
यह किसी विशिष्ट वस्तु (जैसे एक तार) का वह गुण है जो उसमें विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। यह चालक का एक समग्र गुण है। |
यह किसी पदार्थ (Material) का वह आंतरिक और विशिष्ट गुण है जो उसकी विद्युत प्रतिरोध क्षमता को दर्शाता है। |
|
निर्भरता |
यह चालक के आकार और ज्यामिति (Shape and Size) पर निर्भर करता है: लम्बाई (l) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) पर। |
यह चालक के आकार और ज्यामिति (l और A) पर निर्भर नहीं करता है। यह केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है। |
|
सूत्र |
ओम के नियम से: R = {V}/{I} |
प्रतिरोध के सूत्र से: rho = {R × A}/{l} |
|
SI मात्रक |
ओम (Omega) |
ओम-मीटर (Omega cdot m) |
|
भौतिक महत्व |
यह उस रुकावट की वास्तविक मात्रा है जिसका सामना इलेक्ट्रॉनों को परिपथ के एक हिस्से में करना पड़ता है। |
यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ स्वभाव से कितना अच्छा या बुरा चालक है (जैसे तांबे की \rho कम है, इसलिए यह अच्छा चालक है)। |
आप इसे इस प्रकार याद रख सकते हैं:
तार की लम्बाई (Length) का प्रतिरोध (Resistance) पर सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
प्रतिरोध (R) चालक की लम्बाई (l) के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होता है।
इसका अर्थ है:
यदि आप तार की लम्बाई दुगुनी कर देते हैं (l to 2l), तो उसका प्रतिरोध भी दुगुना हो जाएगा (R to 2R)।
यदि आप तार की लम्बाई आधी कर देते हैं, तो प्रतिरोध भी आधा हो जाएगा।
{R}
यह संबंध मुक्त इलेक्ट्रॉनों (Free Electrons) के प्रवाह में आने वाली रुकावट के कारण होता है:
प्रतिरोध को दर्शाने वाला सूत्र इस संबंध की पुष्टि करता है:
R = rho {l}/{A}
जहाँ:
चूँकि लम्बाई (l) सूत्र में अंश (Numerator) में है, इसलिए l बढ़ने पर R भी बढ़ता है।
अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (Cross-sectional Area) का प्रतिरोध पर सीधा और विपरीत प्रभाव पड़ता है।
प्रतिरोध (R) चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होता है।
इसका अर्थ है:
{R = {1}/{A}}
आप इस संबंध को विद्युत धारा के प्रवाह को पानी के पाइप में पानी के प्रवाह से तुलना करके समझ सकते हैं:
प्रतिरोध का सूत्र इस संबंध की पुष्टि करता है:
R = rho {l}/{A}
जहाँ:
चूँकि क्षेत्रफल (A) सूत्र में हर (Denominator) में है, इसलिए A बढ़ने पर R घटता है और A घटने पर R बढ़ता है।
चालक (Conductor) वह पदार्थ होता है जो अपने में से होकर विद्युत धारा (Electric Current) को आसानी से प्रवाहित होने देता है।
चालक ऐसे पदार्थ होते हैं जिनमें बड़ी संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) या आवेश वाहक (Charge Carriers) मौजूद होते हैं। ये मुक्त आवेश वाहक ही विद्युत धारा के प्रवाह के लिए जिम्मेदार होते हैं।
विद्युत धारा के प्रवाह के आधार पर चालक कई प्रकार के होते हैं:
यह एक बहुत ही सीधा और महत्वपूर्ण संबंध है जिसके बारे में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
तार की लम्बाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना (Double) हो जाता है।
जैसा कि हम जानते हैं, प्रतिरोध (R) चालक की लम्बाई (l) के सीधे समानुपाती होता है:
{R l}
यदि किसी तार की मूल लम्बाई l_1 है और उसका मूल प्रतिरोध R_1 है।
यदि आप तार को बिना खींचे, एक ही मोटाई का एक और टुकड़ा जोड़कर उसकी लम्बाई दोगुनी कर देते हैं, तो नई लम्बाई l_2 = 2l_1 होगी।
इस स्थिति में, नया प्रतिरोध R_2 भी दोगुना हो जाएगा:
R_2 = 2 × R_1
इसका कारण यह है कि जब लम्बाई दोगुनी हो जाती है, तो इलेक्ट्रॉनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दोगुनी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे चालक के परमाणुओं के साथ उनकी टक्करों की संख्या भी लगभग दोगुनी हो जाती है। टक्करों में यह वृद्धि सीधे तौर पर विद्युत धारा के प्रवाह में दोगुना विरोध (प्रतिरोध) उत्पन्न करती है।
यदि प्रश्न यह होता कि "तार को खींचकर उसकी लम्बाई दोगुनी कर दी जाए", तो प्रतिरोध चार गुना हो जाता।
लेकिन,
आपके मूल प्रश्न का सीधा उत्तर है: लम्बाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाता है (यह मानते हुए कि मोटाई नहीं बदली गई है)।
प्रतिरोध का तापमान गुणांक (Temperature Coefficient of Resistance) एक महत्वपूर्ण भौतिक राशि है जो यह दर्शाती है कि किसी पदार्थ का प्रतिरोध, तापमान में परिवर्तन के साथ कितनी तेज़ी से बदलता है। इसे ग्रीक अक्षर alpha (अल्फा) से दर्शाया जाता है।
प्रतिरोध का तापमान गुणांक (alpha) को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
"प्रतिरोध का तापमान गुणांक किसी चालक के एकांक प्रतिरोध में, तापमान के एकांक परिवर्तन के कारण होने वाला प्रतिरोध परिवर्तन है।"
इसे आमतौर पर 0^circ C या किसी संदर्भ तापमान (T_0) पर मापा जाता है।
प्रतिरोध का तापमान गुणांक (alpha) का सूत्र निम्नलिखित है:
alpha = {R_T - R_0}/{R_0 × (T - T_0)}
जहाँ:
इस सूत्र से,
हम किसी भी तापमान (T) पर प्रतिरोध (R_T) की गणना कर सकते हैं, यदि संदर्भ तापमान (T_0) पर प्रतिरोध (R_0) और alpha ज्ञात हो:
R_T = R_0 [1 + alpha (T - T_0)]
प्रतिरोध के तापमान गुणांक का SI मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस (^circ C^{-1}) या प्रति केल्विन (K^{-1}) होता है।
alpha का मान यह निर्धारित करता है कि पदार्थ का प्रतिरोध, तापमान बढ़ने पर बढ़ेगा या घटेगा, जिससे पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
पदार्थ का प्रकार
alpha का मान
तापमान का प्रभाव
उदाहरण
धातु (चालक)
धनात्मक (Positive)
तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
ताँबा, एल्युमिनियम
अर्धचालक
ऋणात्मक (Negative)
तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है।
सिलिकॉन, जर्मेनियम
मिश्र धातु
बहुत कम धनात्मक (Very Low)
तापमान का प्रतिरोध पर प्रभाव बहुत कम होता है।
नाइक्रोम, मैंगनीन
प्रतिरोध के तापमान गुणांक (alpha) के आधार पर पदार्थों को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है, जो यह दर्शाता है कि तापमान बढ़ने पर उनका प्रतिरोध बढ़ेगा या घटेगा।
यहां धनात्मक और ऋणात्मक तापमान गुणांक (alpha) वाले पदार्थों के नाम दिए गए हैं:
इन पदार्थों का प्रतिरोध, तापमान बढ़ने पर बढ़ता है। इन्हें सामान्यतः चालक (Conductors) कहा जाता है।
|
श्रेणी |
उदाहरण |
कारण |
|---|---|---|
|
शुद्ध धातुएँ |
ताँबा (Copper) |
मुक्त इलेक्ट्रॉनों की टक्करें बढ़ती हैं। |
|
|
एल्युमीनियम (Aluminum) |
|
|
|
चाँदी (Silver) |
|
|
|
सोना (Gold) |
|
|
|
टंगस्टन (Tungsten) |
|
|
अधिकांश मिश्र धातुएँ |
नाइक्रोम (Nichrome) |
बहुत कम धनात्मक, जिससे प्रतिरोध लगभग स्थिर रहता है। |
|
|
मैंगनीन (Manganin) |
|
सभी शुद्ध धातुएँ धनात्मक तापमान गुणांक वाली होती हैं।
इन पदार्थों का प्रतिरोध, तापमान बढ़ने पर घटता है।
|
श्रेणी |
उदाहरण |
कारण |
|---|---|---|
|
अर्धचालक |
सिलिकॉन (Silicon) |
तापीय ऊर्जा से मुक्त आवेश वाहकों की संख्या में वृद्धि होती है। |
|
|
जर्मेनियम (Germanium) |
|
|
कुचालक (विद्युतरोधी) |
रबर (Rubber) |
|
|
|
कागज़ (Paper) |
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|
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लकड़ी (Wood) |
|
|
वैद्युत अपघट्य |
लवण का घोल (Salt Solution) |
गतिशीलता बढ़ने से आयनों का प्रवाह आसान हो जाता है। |
|
कार्बन |
ग्रेफाइट (Graphite) |
|
अर्धचालक, कुचालक (विद्युतरोधी), और वैद्युत अपघट्य आमतौर पर ऋणात्मक तापमान गुणांक प्रदर्शित करते हैं।
समांतर कनेक्शन (Parallel Connection) में समतुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) की गणना करने का एक विशिष्ट तरीका होता है।
समांतर कनेक्शन में प्रतिरोधों को एक-दूसरे के समानांतर जोड़ा जाता है, जिससे विद्युत धारा के प्रवाह के लिए कई रास्ते (Multiple Paths) उपलब्ध होते हैं।
समांतर कनेक्शन में, समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम (Reciprocal) परिपथ में जुड़े सभी अलग-अलग प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग (Sum of the reciprocals) के बराबर होता है।
यदि किसी परिपथ में R_1, R_2, R_3, dots, R_n प्रतिरोध समांतर क्रम में जुड़े हैं, तो समतुल्य प्रतिरोध (R_{eq} या R_p) के लिए सूत्र है:
{1}/{R_{eq}} = {1}/{R_1} + {1}/{R_2} + {1}/{R_3} + dots + {1}/{R_n}
समांतर कनेक्शन में समतुल्य प्रतिरोध का मान हमेशा परिपथ में जुड़े सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध (Smallest Individual Resistance) के मान से भी कम होता है।
उदाहरण के लिए, यदि आप 10 Omega और 5 Omega के दो प्रतिरोधों को समांतर क्रम में जोड़ते हैं, तो समतुल्य प्रतिरोध 5 Omega से भी कम आएगा।
यदि केवल दो प्रतिरोध R_1 और R_2 समांतर क्रम में जुड़े हों, तो आप गणना को आसान बनाने के लिए यह सूत्र उपयोग कर सकते हैं:
R_{eq} = {R_1 × R_2}/{R_1 + R_2}
मान लीजिए R_1 = 6 Omega और R_2 = 3 Omega हैं:
{1}/{R_{eq}} = {1}/{6} + {1}/{3} = {1+2}/{6} = {3}/{6} = {1}/{2}
तो, R_{eq} = 2 Omega. (जो सबसे छोटे प्रतिरोध 3 Omega से भी कम है)।
यह एक बहुत अच्छा और महत्वपूर्ण प्रश्न है।
उच्चतम प्रतिरोध (Maximum Resistance) हमेशा श्रृंखला संयोजन (Series Connection) से प्राप्त होता है।
श्रृंखला संयोजन में, प्रतिरोधों को एक के बाद एक जोड़ा जाता है, जिससे विद्युत धारा के प्रवाह के लिए केवल एक ही रास्ता होता है।
श्रृंखला संयोजन में, सभी व्यक्तिगत प्रतिरोध (Individual Resistances) सीधे जुड़ जाते हैं।
यदि R_1, R_2, R_3 श्रृंखला में जुड़े हैं:
R_{eq} = R_1 + R_2 + R_3 +
परिणामस्वरूप, समतुल्य प्रतिरोध का मान हमेशा परिपथ में जुड़े सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से भी अधिक होता है।
समानांतर संयोजन में, प्रतिरोधों को अलग-अलग रास्तों (शाखाओं) में जोड़ा जाता है, जिससे धारा के प्रवाह के लिए कई रास्ते खुल जाते हैं।
समांतर कनेक्शन में प्रतिरोधों के व्युत्क्रम (Reciprocals) का योग किया जाता है।
{1}/{R_{eq}} = {1}/{R_1} + {1}/{R_2} + {1}/{R_3} +
परिणामस्वरूप, समतुल्य प्रतिरोध का मान हमेशा परिपथ में जुड़े सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से भी कम होता है।
|
संयोजन (Connection) |
परिणामी प्रतिरोध |
उपयोग |
|---|---|---|
|
श्रृंखला (Series) |
अधिकतम (Maximum) |
प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए। |
|
समानांतर (Parallel) |
न्यूनतम (Minimum) |
प्रतिरोध को घटाने के लिए। |
1 ओम ({1 } Omega) प्रतिरोध विद्युत प्रतिरोध (electrical resistance) की SI इकाई है। इसका भौतिक अर्थ ओम के नियम (V=IR) से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है।
इसे सूत्र के रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
1 Omega = {1 { V}}/{1 { A}}
प्रतिरोध किसी चालक का वह गुण है जो उसमें से विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है।
सरल शब्दों में:
परिपथों में प्रयुक्त होने वाले प्रतिरोधकों (Resistors) को उनकी कार्यक्षमता और संरचना के आधार पर मुख्य रूप से दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
ये वे प्रतिरोधक होते हैं जिनका प्रतिरोध मान निश्चित होता है और इसे बदला नहीं जा सकता है। ये परिपथों में सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं, जैसे धारा को सीमित करने (current limiting), वोल्टेज विभाजित करने (voltage dividing) और भार (load) प्रबंधन के लिए।
संरचना के आधार पर निश्चित प्रतिरोधकों के प्रकार:
इन प्रतिरोधकों का मान आवश्यकतानुसार परिवर्तित किया जा सकता है। इनका उपयोग मुख्य रूप से परिपथों में धारा या वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
परिवर्तनीय प्रतिरोधकों के मुख्य प्रकार:
इन प्रतिरोधकों का मान किसी बाहरी भौतिक मात्रा पर निर्भर करता है:
थर्मिस्टर (Thermistor) दो शब्दों थर्मल (Thermal - तापीय) और रेज़िस्टर (Resistor - प्रतिरोधक) के संयोजन से बना है। यह एक विशेष प्रकार का प्रतिरोधक होता है जिसका प्रतिरोध मान तापमान में परिवर्तन के साथ बहुत तेज़ी से बदलता है।
यह एक अत्यधिक तापमान-संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक घटक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तापमान को मापने, नियंत्रित करने और परिपथों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है।
थर्मिस्टर आमतौर पर विभिन्न धातुओं के ऑक्साइड (जैसे निकिल, कोबाल्ट, ताँबा) के अर्धचालक (Semiconductor) पदार्थ से बने होते हैं। तापमान बदलने पर इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉन (free electrons) और होल (holes) की संख्या बहुत अधिक बदल जाती है, जिससे उनका प्रतिरोध अत्यधिक प्रभावित होता है।
थर्मिस्टर को उनके तापमान गुणांक (Temperature Coefficient) के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
|
प्रकार |
पूर्ण नाम |
ताप के साथ प्रतिरोध का संबंध |
मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
|
NTC |
नकारात्मक ताप गुणांक (Negative Temperature Coefficient) |
तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है |
तापमान संवेदन (Sensing), तापमान मापन, धारा सीमित करना (Inrush Current Limiting)। |
|
PTC |
धनात्मक ताप गुणांक (Positive Temperature Coefficient) |
तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है |
अति-धारा संरक्षण (Overcurrent Protection), रीसेट करने योग्य फ्यूज (Resettable Fuses), स्व-नियमन हीटर। |
थर्मिस्टर अपनी उच्च संवेदनशीलता, छोटे आकार और कम लागत के कारण कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं:
किसी विद्युत परिपथ (Electric Circuit) में प्रतिरोधक (Resistor) का मुख्य कार्य उसमें बहने वाली विद्युत धारा के प्रवाह को नियंत्रित करना और ऊर्जा का प्रबंधन करना होता है।
संक्षेप में, प्रतिरोधक परिपथ में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है:
यह प्रतिरोधक का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
रियोस्टैट (Rheostat) एक प्रकार का परिवर्तनीय प्रतिरोधक (Variable Resistor) होता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य किसी विद्युत परिपथ में प्रतिरोध को मैन्युअल रूप से समायोजित (Adjust Manually) करके उसमें बहने वाली विद्युत धारा (Current) के प्रवाह को नियंत्रित करना होता है।
रियोस्टैट को अक्सर धारा नियंत्रक भी कहा जाता है।
रियोस्टैट का निर्माण आमतौर पर एक सिरेमिक कोर के चारों ओर लिपटे हुए एक प्रतिरोधक तार (जैसे नाइक्रोम) का उपयोग करके किया जाता है।
रियोस्टैट विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त होते हैं जहाँ उच्च धारा (High Current) को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है:
चालकता (Conductance), जिसे G से दर्शाया जाता है, किसी पदार्थ या घटक का वह गुण है जो यह मापता है कि विद्युत धारा उसमें से कितनी आसानी से प्रवाहित हो सकती है।
यह विद्युत प्रतिरोध (R) की विपरीत (Reciprocal) राशि है।
मूल अर्थ: जबकि प्रतिरोध धारा के प्रवाह का विरोध करता है, चालकता उस प्रवाह का समर्थन करती है। जितना अधिक चालकत्व, उतनी ही कम बाधा और उतनी ही आसानी से धारा प्रवाहित होती है।
गणितीय संबंध: चालकता G और प्रतिरोध R के बीच सीधा गणितीय संबंध होता है:
G = {1}/{R}
ओम के नियम से संबंध: ओम के नियम (V=IR) को चालकता के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है।
चूंकि R = V/I,
इसलिए:
G = {1}/{R} = {I}/{V}
इसका अर्थ है कि एक निश्चित वोल्टेज (V) पर, परिपथ में बहने वाली धारा (I) चालकता (G) के सीधे आनुपातिक होती है।
चालकता की SI इकाई (International System of Units) सीमेंस (Siemens) है, जिसे \text{S} से दर्शाया जाता है।
चालकता (G) एक विशिष्ट घटक (जैसे एक प्रतिरोधक) की विशेषता है।
विशिष्ट चालकता (या केवल 'चालकता', जिसे /sigma या /kappa से दर्शाया जाता है) एक सामग्री का आंतरिक गुण है, जो उसके आयामों (लंबाई और क्षेत्रफल) पर निर्भर नहीं करता है।
यह विशिष्ट प्रतिरोधकता (rho) का व्युत्क्रम होती है:
/sigma = {1}/{rho}
इसकी SI इकाई सीमेंस प्रति मीटर ({S/m}) होती है।
चालकता (G) और प्रतिरोध (R) विद्युत परिपथों के दो मौलिक और एक दूसरे के विपरीत गुण हैं। वे किसी चालक में धारा के प्रवाह के प्रति पदार्थ की प्रतिक्रिया को मापने का काम करते हैं।
यहाँ दोनों के बीच मुख्य अंतरों को सारांशित किया गया है:
|
विशेषता |
प्रतिरोध (Resistance) - R |
चालकता (Conductance) - G |
|---|---|---|
|
मूल अवधारणा |
यह विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। |
यह विद्युत धारा के प्रवाह को समर्थन (आसानी से बहने की अनुमति) देता है। |
|
माप क्या करता है? |
यह मापता है कि पदार्थ धारा के प्रवाह में कितनी बाधा उत्पन्न करता है। |
यह मापता है कि पदार्थ धारा के प्रवाह में कितनी आसानी की अनुमति देता है। |
|
गणितीय संबंध |
इसे ओम के नियम से परिभाषित किया जाता है: R = {V}/{I} |
यह प्रतिरोध का व्युत्क्रम होता है: G = {1}/{R} ={I}/{V} |
|
SI इकाई |
ओम (Omega) |
सीमेंस ({S}) (या म्हो (mho)) |
|
उच्च मान का अर्थ |
उच्च प्रतिरोध का अर्थ है धारा का कम प्रवाह। (जैसे: इंसुलेटर) |
उच्च चालकता का अर्थ है धारा का अधिक प्रवाह। (जैसे: अच्छा चालक) |
इनके अनुरूप, जो सामग्री के आंतरिक गुण हैं, वे भी एक दूसरे के व्युत्क्रम (Reciprocal) होते हैं:
|
विशेषता |
प्रतिरोधकता (Resistivity) - rho |
विशिष्ट चालकता (Conductivity) -/ sigma |
|---|---|---|
|
मूल अवधारणा |
यह पदार्थ का विशिष्ट गुण है जो धारा के विरोध को मापता है, भले ही उसके आयाम (आकार और लंबाई) कुछ भी हों। |
यह पदार्थ का विशिष्ट गुण है जो धारा के समर्थन को मापता है। |
|
गणितीय संबंध |
rho = R {A}/{L} |
यह प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम है: sigma = {1}/{rho} |
|
SI इकाई |
ओम-मीटर (Omega cdot {m}) |
सीमेंस प्रति मीटर ({S/m}) |
संक्षेप में,
यदि आप एक प्रतिरोधक का उपयोग करते हैं, तो आपका लक्ष्य धारा को सीमित करना है; यदि आप एक चालक का उपयोग करते हैं, तो आपका लक्ष्य धारा को अधिकतम करना है। यह दोनों राशियाँ किसी परिपथ में धारा नियंत्रण की दो विपरीत अभिव्यक्तियाँ हैं।
अतिचालकता एक असाधारण भौतिक गुण है जिसमें कुछ पदार्थ एक विशिष्ट क्रांतिक ताप (Critical Temperature - T_c) से नीचे ठंडा किए जाने पर दो मुख्य घटनाएँ प्रदर्शित करते हैं:
जब कोई पदार्थ अतिचालक अवस्था में प्रवेश करता है, तो उसमें से विद्युत धारा बिना किसी प्रतिरोध या ऊर्जा के नुकसान (ऊष्मा के रूप में) के प्रवाहित हो सकती है।
यह अतिचालकता की पहचान करने वाली दूसरी महत्वपूर्ण घटना है।
अतिचालकता में क्रांति लाने की क्षमता है, और इसके वर्तमान उपयोगों में शामिल हैं:
कम प्रतिरोध और उच्च प्रतिरोध वाले पदार्थों को आमतौर पर उनकी विशिष्ट चालकता (sigma) या विशिष्ट प्रतिरोधकता (rho) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
सरल शब्दों में, कम प्रतिरोध वाले पदार्थ वे होते हैं जो विद्युत धारा को आसानी से बहने देते हैं, जबकि उच्च प्रतिरोध वाले पदार्थ वे होते हैं जो धारा के प्रवाह का पुरजोर विरोध करते हैं।
यहाँ इन दोनों प्रकार के पदार्थों का विवरण दिया गया है:
इन पदार्थों को चालक (Conductors) कहा जाता है। इनमें बड़ी संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बाहरी विद्युत क्षेत्र लगाने पर आसानी से गति करते हैं।
|
वर्ग |
पदार्थ (उदाहरण) |
विशिष्ट प्रतिरोधकता (rho) का स्तर |
मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
|
सर्वोत्तम चालक |
चाँदी (Silver) |
सबसे कम (approx 1.59×10^{-8} Omega cdot {m}) |
विशेष उच्च-प्रदर्शन वाले परिपथों, सटीक संपर्कों में। |
|
उत्कृष्ट चालक |
ताँबा (Copper) |
बहुत कम (approx 1.7×10^{-8} Omega cdot {m}) |
घरों और उद्योगों में वायरिंग, मोटर वाइंडिंग, PCB ट्रैक में। |
|
सामान्य चालक |
सोना (Gold) |
कम (approx 2.44×10^{-8} Omega cdot {m}) |
जंग-प्रतिरोधी विद्युत संपर्क, कनेक्टर पिन। |
|
|
एल्यूमीनियम (Aluminum) |
कम (approx 2.82×10^{-8} Omega cdot {m}) |
उच्च-वोल्टेज पारेषण लाइनें (Transmission lines), क्योंकि यह हल्का होता है। |
|
|
पीतल (Brass) |
मध्यम-कम |
कनेक्टर, स्विच, टर्मिनलों में। |
मुख्य रूप से बिजली के पारेषण (Transmission) और वायरिंग में ऊर्जा की हानि (जूल तापन के कारण) को कम करने के लिए।
इन पदार्थों को अचालक या कुचालक (Insulators) कहा जाता है। इनमें इलेक्ट्रॉन मजबूती से बंधे होते हैं और सामान्य परिस्थितियों में गति नहीं करते हैं।
|
वर्ग |
पदार्थ (उदाहरण) |
विशिष्ट प्रतिरोधकता (rho) का स्तर |
मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
|
उच्च प्रतिरोधक |
नाइक्रोम (Nichrome) (निकल और क्रोमियम का मिश्र धातु) |
उच्च (approx 110 × 10^{-8} Omega cdot {m}) |
हीटिंग तत्व (जैसे हीटर, टोस्टर), क्योंकि यह गर्म होने पर भी ऑक्सीकरण (Oxidation) का विरोध करता है। |
|
|
मैंगनीन (Manganin) |
उच्च (approx 44 × 10^{-8} Omega cdot {m}) |
सटीक प्रतिरोधक (Precision Resistors), क्योंकि इसका प्रतिरोध तापमान के साथ कम बदलता है। |
|
कुचालक (Insulators) |
पोर्सिलेन/सिरेमिक |
बहुत अधिक (approx 10^{10} - 10^{14} Omega cdot {m}) |
उच्च-वोल्टेज बिजली लाइनों में अवरोधक (Insulators)। |
|
|
रबर, प्लास्टिक (PVC) |
बहुत अधिक (approx 10^{13} - 10^{16} Omega cdot {m}) |
बिजली के तारों पर सुरक्षा कवच (Sheathing) और कवरिंग। |
|
|
कांच (Glass) |
बहुत अधिक (approx 10^{10} - 10^{14} Omega cdot {m}) |
विद्युत उपकरणों में इन्सुलेशन। |
उच्च प्रतिरोध क्यों आवश्यक है?
प्रतिरोधकों में रंग कोड (Color Code) एक मानकीकृत (Standardized) तरीका है जिसका उपयोग छोटे प्रतिरोधकों (विशेष रूप से कार्बन फ़िल्म और मेटल फ़िल्म प्रतिरोधकों) का प्रतिरोध मान (Omega), सहनशीलता (Tolerance), और कभी-कभी तापमान गुणांक (Temperature Coefficient) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
यह विधि इसलिए अपनाई गई है क्योंकि ये प्रतिरोधक इतने छोटे होते हैं कि उन पर संख्याएँ छापना कठिन होता है।
एक प्रतिरोधक पर आमतौर पर 4 या 5 रंगीन बैंड (पट्टी) होते हैं। प्रत्येक रंग एक संख्या, गुणक (Multiplier), या सहनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है।
A. 4-बैंड प्रतिरोधक (सबसे आम)
यह सबसे सामान्य प्रकार है और इसमें चार पट्टियाँ होती हैं:
B. 5-बैंड प्रतिरोधक (सटीकता के लिए)
इनका उपयोग अधिक सटीक प्रतिरोधकों (जैसे मेटल फ़िल्म प्रतिरोधकों) के लिए किया जाता है:
प्रतिरोधक के मान को पढ़ने के लिए आपको एक मानक रंग कोड सारणी की आवश्यकता होती है।
|
रंग |
अंक (Band 1, 2, 3) |
गुणक (Multiplier) (Band 3, 4) |
सहनशीलता (Tolerance) (Band 4, 5) |
|---|---|---|---|
|
काला (Black) |
0 |
10^0 (या × 1) |
- |
|
भूरा (Brown) |
1 |
10^1 (या × 10) |
pm 1 % |
|
लाल (Red) |
2 |
10^2 (या × 100) |
pm 2 % |
|
नारंगी (Orange) |
3 |
10^3 (या × 1000) |
- |
|
पीला (Yellow) |
4 |
10^4 |
- |
|
हरा (Green) |
5 |
10^5 |
pm 0.5 % |
|
नीला (Blue) |
6 |
10^6 |
pm 0.25 % |
|
बैंगनी (Violet) |
7 |
10^7 |
pm 0.1 % |
|
स्लेटी (Grey) |
8 |
10^8 |
pm 0.05 % |
|
सफेद (White) |
9 |
10^9 |
- |
|
सुनहरा (Gold) |
- |
10^{-1} (या × 0.1) |
pm 5 % |
|
चाँदी (Silver) |
- |
10^{-2} (या × 0.01) |
pm 10 % |
|
कोई नहीं (None) |
- |
- |
pm 20 % |
प्रतिरोध का मान इस सूत्र से निकाला जाता है:
{प्रतिरोध } R = ({पहला अंक} × 10 + {दूसरा अंक}) × {गुणक} pm {सहनशीलता}
उदाहरण (4-बैंड):
यदि रंग हैं भूरा, काला, लाल, सुनहरा
प्रतिरोधकों (Resistors) में रंग कोड एक मानक तरीका है जिसका उपयोग प्रतिरोधक के मान (Resistance Value) और उसकी सहनशीलता (Tolerance) को इंगित करने के लिए किया जाता है।
यह छोटे प्रतिरोधकों पर मान को सीधे संख्या में लिखने की तुलना में बहुत आसान होता है।
प्रतिरोधक पर अलग-अलग रंग की पट्टियाँ (बैंड्स) होती हैं, जिनमें से प्रत्येक एक विशेष मान, गुणक या सहनशीलता को दर्शाती है।
|
रंग |
अंक (Digit) |
गुणक (Multiplier) |
सहनशीलता (Tolerance) |
|---|---|---|---|
|
काला (Black) |
0 |
× 1 |
- |
|
भूरा (Brown) |
1 |
× 10 |
pm 1 % |
|
लाल (Red) |
2 |
× 100 |
pm 2 % |
|
नारंगी (Orange) |
3 |
× 1,000 |
- |
|
पीला (Yellow) |
4 |
× 10,000 |
- |
|
हरा (Green) |
5 |
× 100,000 |
pm 0.5 % |
|
नीला (Blue) |
6 |
× 1,000,000 |
pm 0.25 % |
|
बैंगनी (Violet) |
7 |
× 10,000,000 |
pm 0.1 % |
|
ग्रे (Grey) |
8 |
× 100,000,000 |
pm 0.05 % |
|
सफेद (White) |
9 |
× 1,000,000,000 |
- |
|
सुनहरा (Gold) |
- |
× 0.1 |
pm 5 % |
|
चाँदी (Silver) |
- |
× 0.01 |
pm 10 % |
|
कोई नहीं (None) |
- |
- |
pm 20 % |
आमतौर पर प्रतिरोधकों में 4, 5 या 6 बैंड होते हैं। 4-बैंड वाले प्रतिरोधक का उदाहरण:
उदाहरण:
अगर बैंड का क्रम पीला, बैंगनी, लाल, सुनहरा है:
मान की गणना: 47 × 100 = 4,700 Omega (ओम)
अंतिम मान: 4.7 k Omega (किलो-ओम) pm 5 %
क्या आप किसी विशिष्ट रंग कोड का मान जानना चाहेंगे या 5-बैंड वाले कोड के बारे में जानना चाहेंगे?
आपने एक बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीकी शब्द के बारे में पूछा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स में सहनशीलता (Tolerance) प्रतिरोधकों (Resistors) का एक महत्वपूर्ण गुण है।
सहनशीलता एक प्रतिशत मान है जो यह दर्शाता है कि प्रतिरोधक का वास्तविक प्रतिरोध मान (Actual Resistance Value), उसके अंकित/नाममात्र मान (Nominal/Stated Value) से अधिकतम कितना कम या अधिक हो सकता है।
संक्षेप में:
सहनशीलता = अंकित मान से वास्तविक मान में अधिकतम विचलन (Maximum Deviation)
1. विचलन का कारण
प्रतिरोधक बनाते समय, निर्माण प्रक्रिया में कुछ अनिवार्य कमियाँ (inherent imperfections) रह जाती हैं, जिसके कारण हर प्रतिरोधक का मान बिल्कुल वैसा नहीं हो सकता जो उस पर लिखा गया है। सहनशीलता यह सुनिश्चित करती है कि प्रतिरोधक का मान एक स्वीकार्य सीमा के भीतर रहे।
2. सहनशीलता का सूत्र
यदि R_{{nominal}} प्रतिरोधक का अंकित मान है, और T इसकी सहनशीलता प्रतिशत में है, तो वास्तविक प्रतिरोध मान R_{{actual}} की सीमा इस प्रकार होगी:
R_{{nominal}} - (R_{{nominal}} × {T}{100}) R_{{actual}} R_{{nominal}} + (R_{{nominal}} × {T}/{100})
3. उदाहरण
मान लीजिए आपके पास 100 Omega का एक प्रतिरोधक है जिसकी सहनशीलता pm 5 % है (यह सुनहरा बैंड दर्शाता है):
इसका अर्थ है कि कारखाने से निकलने वाला यह प्रतिरोधक 95 Omega से 105 Omega के बीच कोई भी मान धारण कर सकता है, और इसे अभी भी 100 Omega, pm 5 % का प्रतिरोधक माना जाएगा।
4. अनुप्रयोग (Application)
यह घटना विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current) कहलाती है, और इसके पीछे का विज्ञान बहुत ही सीधा है जिसे जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating) समझाता है।
प्रतिरोधक (Resistor) के गर्म होने का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनों और प्रतिरोधक के परमाणुओं के बीच होने वाली टक्करें (Collisions between electrons and atoms) हैं।
यह नियम बताता है कि एक प्रतिरोधक में कितनी ऊष्मा उत्पन्न होगी।
उत्पन्न ऊष्मा (H) की मात्रा तीन कारकों पर निर्भर करती है:
H = I^2 R t
जहाँ:
इस सूत्र से स्पष्ट है:
प्रतिरोध (Resistance) मापने के लिए कई विधियाँ और उपकरण उपलब्ध हैं। सबसे सामान्य और सुविधाजनक विधि ओममीटर या मल्टीमीटर का उपयोग करना है।
यहाँ प्रतिरोध को मापने के मुख्य तरीके दिए गए हैं:
यह सबसे सामान्य और व्यावहारिक तरीका है। अधिकांश डिजिटल मल्टीमीटर (Digital Multimeter) में प्रतिरोध मापने की सुविधा होती है, जिसे {Omega} (ओमेगा) प्रतीक से दर्शाया जाता है।
प्रक्रिया:
यदि आपको सर्किट में लगे किसी घटक का प्रतिरोध जानना है, तो आप ओम के नियम का उपयोग कर सकते हैं।
ओम के नियम का सूत्र है:
R = {V}/{I}
जहाँ:
प्रक्रिया:
उच्च परिशुद्धता (High Precision) वाले मापन के लिए, खासकर प्रयोगशालाओं में, व्हीटस्टोन ब्रिज का उपयोग किया जाता है। यह एक ब्रिज सर्किट होता है जिसमें एक अज्ञात प्रतिरोध को तीन ज्ञात प्रतिरोधों के साथ संतुलित (Balance) किया जाता है।
जब ब्रिज संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती), तो अज्ञात प्रतिरोध (R_x) की गणना इस सूत्र से की जाती है:
R = {V}/{I}
जहाँ:
प्रक्रिया:
उच्च परिशुद्धता (High Precision) वाले मापन के लिए, खासकर प्रयोगशालाओं में, व्हीटस्टोन ब्रिज का उपयोग किया जाता है। यह एक ब्रिज सर्किट होता है जिसमें एक अज्ञात प्रतिरोध को तीन ज्ञात प्रतिरोधों के साथ संतुलित (Balance) किया जाता है।
जब ब्रिज संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती), तो अज्ञात प्रतिरोध (R_x) की गणना इस सूत्र से की जाती है:
R_x = R_3 × {R_2}{R_1}
यह विधि अत्यंत सटीक रीडिंग देती है, खासकर मध्य-श्रेणी के प्रतिरोध मानों के लिए।
सारांश: आज के समय में, अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक कार्यों के लिए मल्टीमीटर सबसे आसान और विश्वसनीय उपकरण है।
व्हीटस्टोन ब्रिज (Wheatstone Bridge), जिसे व्हीटस्टोन सेतु भी कहा जाता है, एक विशिष्ट विद्युत परिपथ (Special Electrical Circuit) व्यवस्था है जिसका उपयोग उच्च परिशुद्धता (High Precision) के साथ किसी अज्ञात प्रतिरोध (Unknown Resistance) का मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
इसका आविष्कार सैमुएल हण्टर क्रिस्टी (Samuel Hunter Christie) ने 1833 में किया था, लेकिन इसे चार्ल्स व्हीटस्टोन (Charles Wheatstone) ने उन्नत और लोकप्रिय बनाया।
व्हीटस्टोन ब्रिज चार प्रतिरोधों की एक चतुर्भुज (Quadrilateral) के आकार की व्यवस्था होती है।
इस परिपथ में:
व्हीटस्टोन सेतु शून्य विक्षेप विधि (Null Deflection Method) या संतुलन अवस्था (Balanced Condition) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
यह सिद्धांत बताता है कि जब परिपथ संतुलित होता है, तो गैल्वेनोमीटर से होकर कोई विद्युत धारा (Current) प्रवाहित नहीं होती है।
संतुलन की शर्त (Condition for Balance):
जब गैल्वेनोमीटर में विक्षेप (Deflection) शून्य होता है, तो दो आसन्न भुजाओं (Adjacent Arms) के प्रतिरोधों का अनुपात शेष दो आसन्न भुजाओं के प्रतिरोधों के अनुपात के बराबर होता है:
{P}/{Q} = {R}/{S}
अज्ञात प्रतिरोध का मान ज्ञात करना:
यदि S अज्ञात प्रतिरोध (R_x) है, तो संतुलन की अवस्था में इसका मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है:
S = R × {Q}/{P}
एमीटर-वोल्टमीटर विधि (Ammeter-Voltmeter Method), जिसे ओम के नियम की विधि भी कहा जाता है, प्रतिरोध (Resistance) को मापने का एक सरल तरीका है। यद्यपि यह सीधी और सुलभ है, इसकी कुछ महत्वपूर्ण सीमाएँ (Limitations) हैं जिनके कारण उच्च सटीकता (High Accuracy) वाले मापन के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाता है।
यहां इस विधि की मुख्य सीमाएं दी गई हैं:
1. उपकरणों की अपूर्णता (Imperfection of Instruments)
यह विधि मानती है कि एमीटर और वोल्टमीटर दोनों आदर्श (Ideal) हैं, जो वास्तविक जीवन में नहीं होता:
ये अपूर्णताएँ सर्किट से अतिरिक्त धारा खींचती हैं या प्रतिरोधक पर वोल्टेज ड्रॉप को प्रभावित करती हैं, जिससे गणना किए गए प्रतिरोध मान में त्रुटि (Error) आती है।
2. मापन व्यवस्था का प्रभाव (Effect of Connection Arrangement)
प्रतिरोधक के साथ एमीटर और वोल्टमीटर को जोड़ने के दो तरीके हैं, और दोनों में से कोई भी पूर्णतः सटीक परिणाम नहीं देता:
(अ) एमीटर सीरीज में (Ammeter in Series) - उच्च प्रतिरोध (High Resistance) के लिए बेहतर
(ब) वोल्टमीटर पैरलल में (Voltmeter in Parallel) - निम्न प्रतिरोध (Low Resistance) के लिए बेहतर
3. बिजली की खपत (Power Dissipation)
जब हम मापन करते हैं, तो प्रतिरोधक गर्म हो जाता है (जैसा कि आपने पहले पूछा था)।
4. कम सटीकता (Lower Accuracy)
व्हीटस्टोन ब्रिज या ओममीटर जैसे उपकरणों की तुलना में, एमीटर-वोल्टमीटर विधि कम सटीक (Less Precise) है क्योंकि यह सीधे दो मापे गए मानों (V और I) के अनुपात पर निर्भर करती है, और इन दोनों मापों में व्यक्तिगत त्रुटियां अंतिम परिणाम में जुड़ जाती हैं।
इस कारण से,
जहां बहुत उच्च सटीकता की आवश्यकता होती है, जैसे कि प्रयोगशाला मापन, वहां व्हीटस्टोन ब्रिज विधि को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रतिरोधक (Resistor) बनाने के लिए कई अलग-अलग प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें उनकी निर्माण विधि, सामग्री के प्रकार और अंतिम अनुप्रयोग (Application) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
यहां प्रतिरोधक सामग्री के विभिन्न मुख्य प्रकार दिए गए हैं:
ये सबसे सामान्य और सस्ते प्रकार के प्रतिरोधक हैं।
(a) कार्बन कंपोजिशन प्रतिरोधक (Carbon Composition Resistors - CCR)
(b) कार्बन फिल्म प्रतिरोधक (Carbon Film Resistors)
ये कार्बन फिल्म प्रतिरोधकों का उन्नत संस्करण हैं और उच्च प्रदर्शन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
(a) धातु फिल्म प्रतिरोधक (Metal Film Resistors)
(b) धातु ऑक्साइड फिल्म प्रतिरोधक (Metal Oxide Film Resistors)
ये प्रतिरोधक उच्च शक्ति (High Power) अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
ये विशिष्ट कार्यों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं:
निष्कर्ष:
प्रतिरोधक सामग्री का चयन मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि सर्किट को कितनी सटीकता, कितनी बिजली क्षमता (Wattage), और कितना तापमान स्थिरता चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक परिपथों (Electronic Circuits) में प्रतिरोधक (Resistors) सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इनकी भूमिका कई मायनों में सर्किट के प्रवाह को नियंत्रित करने की होती है।
यहां इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में प्रतिरोधकों की मुख्य भूमिकाएँ दी गई हैं:
यह प्रतिरोधक का सबसे महत्वपूर्ण और मौलिक कार्य है।
प्रतिरोधक का उपयोग सर्किट में वोल्टेज को विभाजित (Divide) करने के लिए किया जा सकता है।
प्रतिरोधकों का उपयोग ऑडियो, रेडियो और अन्य सिग्नल की शक्ति (Amplitude) को घटाने या बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
संधारित्रों (Capacitors) के साथ मिलकर, प्रतिरोधक सर्किट को समय विलंब (Time Delay) या आवृत्ति-चयनात्मकता (Frequency Selectivity) प्रदान करते हैं।
डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स (Digital Electronics) में, इनका महत्वपूर्ण उपयोग है:
संक्षेप में,
प्रतिरोधक इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में संरक्षण, नियंत्रण, समायोजन और समय-निर्धारण के लिए आवश्यक हैं, जिससे सर्किट सही और सुरक्षित तरीके से काम कर सके।
ओम का नियम वोल्टेज (V), धारा (I), और प्रतिरोध (R) के बीच संबंध स्थापित करता है।
ओम के नियम के अनुसार:
नमस्ते! यह प्रश्न ओम के नियम (Ohm's Law) पर आधारित एक सीधा और सरल गणना है।
ओम का नियम वोल्टेज (V), धारा (I), और प्रतिरोध (R) के बीच संबंध स्थापित करता है।
ओम के नियम के अनुसार:
V = I × R
चूँकि आपको प्रतिरोध (R) ज्ञात करना है, इसलिए सूत्र को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा:
R = {V}/{I}
जहाँ:
आपके दिए गए मान:
सूत्र में मान रखने पर:
R = {10 V}/{2 A}
R = 5 Omega
यदि 10 V की बैटरी 2 A धारा प्रवाहित करती है, तो सर्किट का कुल प्रतिरोध 5 Omega (ओम) होगा।
क्या आप प्रतिरोध, धारा और वोल्टेज के संबंध को और अधिक स्पष्ट करने के लिए कोई आरेख देखना चाहेंगे?
वायर वाउंड रेसिस्टर (Wirewound Resistor) एक विशेष प्रकार का प्रतिरोधक होता है जिसे मुख्य रूप से उच्च शक्ति (High Power) वाले अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह उन जगहों पर इस्तेमाल होता है जहाँ सामान्य कार्बन या मेटल फिल्म रेसिस्टर ज़्यादा गर्म होकर खराब हो सकते हैं।
वायर वाउंड रेसिस्टर एक प्रतिरोधक होता है जिसका प्रतिरोध तत्व (Resistive Element) एक उच्च प्रतिरोधकता वाली धातु के तार को एक अचालक (Insulating) और ताप-प्रतिरोधी (Heat-Resistant) कोर के चारों ओर लपेट कर बनाया जाता है।
1. मुख्य सामग्री और निर्माण
|
घटक |
सामग्री |
भूमिका |
|---|---|---|
|
कोर (Core) |
सिरेमिक (Ceramic) या फाइबरग्लास |
यह तार को सहारा देता है और ऊष्मा (Heat) को प्रभावी ढंग से बाहर निकालता है। |
|
प्रतिरोधक तार (Resistive Wire) |
नाइक्रोम (Nichrome), मैंगनीन (Manganin) या कॉन्स्टैन्टन |
इन मिश्र धातुओं में उच्च प्रतिरोधकता होती है और वे तापमान बढ़ने पर स्थिर रहते हैं। |
|
कोटिंग (Coating) |
सिलिकॉन वार्निश या ग्लास एनैमल |
यह तार को नमी, धूल और क्षति से बचाता है और ऊष्मा को फैलाने में मदद करता है। |
2. प्रमुख विशेषताएँ
|
विशेषता |
विवरण |
कारण |
|---|---|---|
|
उच्च पावर रेटिंग |
ये 1 वाट से लेकर 1000 वाट तक या उससे अधिक की शक्ति को संभाल सकते हैं। |
धातु के तार और सिरेमिक कोर के कारण, जो ऊष्मा को कुशलता से संभालते हैं। |
|
बेहतरीन सटीकता |
अन्य प्रकारों की तुलना में तार के व्यास को बहुत सटीकता से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे इनकी सहनशीलता अक्सर \pm 1\% या उससे कम होती है। |
तार का सटीक गेज (Gauge) उपयोग किया जाता है। |
|
निम्न शोर |
इलेक्ट्रॉनिक शोर (Noise) का स्तर बहुत कम होता है। |
प्रतिरोध तार शुद्ध धातु का होता है। |
|
प्रेरक प्रभाव (Inductive Effect) |
यह इनकी सबसे बड़ी सीमा है। तार को कॉइल (Coil) के रूप में लपेटने के कारण, यह एक प्रेरक (Inductor) की तरह व्यवहार करता है। |
कॉइल में विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र बनता है। |
3. अनुप्रयोग (Applications)
संक्षेप में,
वायर वाउंड रेसिस्टर जहाँ ताकत की जरूरत होती है (उच्च धारा और वोल्टेज) वहाँ सबसे उपयुक्त होते हैं, लेकिन उच्च आवृत्ति वाले सर्किटों में उनके प्रेरक प्रभाव के कारण उनसे बचा जाता है।
कार्बन फिल्म प्रतिरोधक (Carbon Film Resistor - CFR), जिसे अक्सर संक्षिप्त रूप में CFR कहा जाता है, प्रतिरोधकों का एक बहुत ही सामान्य और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला प्रकार है।
यह कार्बन कंपोजिशन प्रतिरोधकों से अधिक आधुनिक और सटीक होते हैं, लेकिन मेटल फिल्म प्रतिरोधकों से कम सटीक होते हैं।
कार्बन फिल्म प्रतिरोधक का निर्माण एक विशिष्ट प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है:
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
लागत (Cost) |
कम। मेटल फिल्म प्रतिरोधकों की तुलना में सस्ते। |
|
सहनशीलता (Tolerance) |
मध्यम। आमतौर पर pm 5 % या pm 2 %। |
|
शोर (Noise) |
कम। कार्बन कंपोजिशन की तुलना में काफी कम शोर उत्पन्न करते हैं। |
|
स्थिरता (Stability) |
मध्यम। धातु फिल्म प्रतिरोधकों की तुलना में तापमान, नमी और उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरोध मान में थोड़ा अधिक परिवर्तन हो सकता है। |
|
पावर रेटिंग |
आमतौर पर 1 / 8 W से 1 W तक की निम्न से मध्यम पावर रेटिंग के लिए उपलब्ध होते हैं। |
कार्बन फिल्म प्रतिरोधक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे अच्छे प्रदर्शन और कम लागत का संतुलन प्रदान करते हैं।
यह प्रतिरोधक उन अनुप्रयोगों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है जहाँ उच्च सटीकता (जैसे 0.1 %) की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन कार्बन कंपोजिशन की तुलना में बेहतर स्थिरता वांछित होती है।
मेटल ऑक्साइड फिल्म रेसिस्टर (Metal Oxide Film Resistor - MOFR) भी प्रतिरोधकों का एक महत्वपूर्ण प्रकार है, जिसे अक्सर मेटल फिल्म प्रतिरोधक के एक विशिष्ट उप-प्रकार के रूप में देखा जाता है।
यह उच्च विश्वसनीयता, स्थिरता और विशेष रूप से उच्च तापमान पर बेहतर प्रदर्शन के लिए जाना जाता है।
मेटल ऑक्साइड रेसिस्टर का निर्माण कार्बन फिल्म प्रतिरोधकों के समान होता है, लेकिन यहाँ प्रतिरोधक सामग्री बदल जाती है:
मेटल ऑक्साइड प्रतिरोधक कई मायनों में सामान्य मेटल फिल्म प्रतिरोधकों से बेहतर हैं, खासकर गर्मी और विद्युत भार (Electrical Load) को संभालने में:
|
विशेषता |
विवरण |
मेटल फिल्म से तुलना |
|---|---|---|
|
तापमान गुणांक |
बहुत कम तापमान गुणांक (Low TCR)। तापमान बदलने पर भी प्रतिरोध मान बहुत स्थिर रहता है। |
मेटल फिल्म के समान ही स्थिर। |
|
उच्च तापमान पर स्थिरता |
ये {350^circ C} तक के उच्च तापमान पर भी स्थिर रूप से काम कर सकते हैं। |
मेटल फिल्म से बेहतर। |
|
पल्स लोड क्षमता |
ये क्षणिक उच्च वोल्टेज या शक्ति स्पंदन (Transient High Voltage or Power Pulses) को बेहतर ढंग से सहन कर सकते हैं। |
उच्च क्षमता। |
|
शोर |
इलेक्ट्रॉनिक शोर (Noise) का स्तर बहुत कम होता है। |
मेटल फिल्म के समान। |
|
सहनशीलता |
आमतौर पर pm 1 % से pm 5 % तक। |
मेटल फिल्म (pm 0.1 % तक) से कम सटीक। |
अपनी उच्च तापमान स्थिरता और पल्स क्षमता के कारण, मेटल ऑक्साइड प्रतिरोधक विशिष्ट और कठिन अनुप्रयोगों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प हैं:
संक्षेप में,
मेटल ऑक्साइड रेसिस्टर वे होते हैं जिन्हें तापमान या वोल्टेज की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उच्च विश्वसनीयता और स्थिरता की आवश्यकता होती है।
चालकों (Conductors) के लिए प्रतिरोध (Resistance) और तापमान (Temperature) के बीच एक सीधा और महत्वपूर्ण संबंध होता है।
सामान्य नियम यह है कि:
जब एक चालक (जैसे तांबा, एल्युमिनियम) का तापमान बढ़ता है, तो उसका विद्युत प्रतिरोध भी बढ़ता है।
इसे सकारात्मक तापमान गुणांक (Positive Temperature Coefficient - PTC) कहा जाता है।
यह संबंध मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन और परमाणु की गति के कारण होता है:
प्रतिरोध और तापमान के बीच इस संबंध को एक सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है:
R_T = R_0 [1 + alpha (T - T_0)]
जहाँ:
इंजीनियरिंग और सर्किट डिजाइन में यह संबंध बहुत महत्वपूर्ण है:
अपवाद:
यह प्रश्न प्रतिरोध और तापमान के संबंध (Temperature Coefficient of Resistance) पर आधारित है, जिसे आपने पिछले प्रश्न में पूछा था।
हम इस गणना के लिए निम्न सूत्र का उपयोग करेंगे:
R_T = R_0 [1 + alpha (T - T_0)]
जहाँ:
तापमान में अंतर (Delta T) ज्ञात करें:
Delta T = T - T_0 = 50^circ C - 0^circ C = 50^ circ C
सूत्र में मान रखें:
R_{50} = 10 [1 + 0.004 × (50 - 0)]
R_{50} = 10 [1 + 0.004 × 50]
कोष्ठक के अंदर गुणा करें:
0.004 × 50 = 0.2
कोष्ठक के अंदर जोड़ें:
R_{50} = 10 [1 + 0.2]
R_{50} = 10 [1.2]
अंतिम प्रतिरोध ज्ञात करें:
R_{50} = 12 Omega
50^ circ C पर तांबे के तार का प्रतिरोध 12 Omega (ओम) होगा।
यहां उन प्रमुख कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है जिनके कारण नाइक्रोम को हीटिंग एलिमेंट के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है:
संक्षेप में,
नाइक्रोम अपनी उच्च प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक और उत्कृष्ट संक्षारण प्रतिरोध के अद्वितीय संयोजन के कारण हीटिंग एलिमेंट के लिए सबसे आदर्श सामग्री है।
अन्य सामान्य उपयोग:
यह प्रश्न प्रतिरोधकों के समानांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination) पर आधारित है।
जब प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है, तो कुल (तुल्य) प्रतिरोध ({R_{eq}}) का व्युत्क्रम (Reciprocal) प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोधक के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।
तीन प्रतिरोधकों (R_1, R_2, R_3) के लिए, कुल प्रतिरोध का सूत्र है:
{1}/{R_{eq}} = {1}/{R_1} + {1}/{R_2} + {1}/{R_3}
आपके पास तीन प्रतिरोधक हैं, और प्रत्येक का मान 6 Omega है:
R_1 = 6 Omega
R_2 = 6 Omega
R_3 = 6 Omega
व्युत्क्रमों को जोड़ें:
{1}/{R_{eq}} = {1}/{6} + {1}/{6} + {1}/{6}
{1}/{R_{eq}} = {1 + 1 + 1}/{6}
{1}/{R_{eq}} = {3}/{6}
परिणाम को सरल करें:
{1}/{R_{eq}} = {1}/{2}
कुल प्रतिरोध (R_{eq}) ज्ञात करने के लिए व्युत्क्रम लें:
R_{eq} = 2 Omega
जब N संख्या में समान प्रतिरोधकों को समानांतर में जोड़ा जाता है, तो कुल प्रतिरोध ज्ञात करने का एक आसान सूत्र है:
R_{eq} = {R}/{N}
जहाँ:
R_{eq} = {6 Omega}/{3} = 2 Omega
तीनों 6 Omega के प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध 2 Omega (ओम) होगा।
ध्यान दें: समानांतर क्रम में, कुल प्रतिरोध हमेशा सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम होता है।
यह प्रश्न प्रतिरोधकों के श्रृंखला क्रम संयोजन (Series Combination) पर आधारित है।
जब प्रतिरोधकों को श्रृंखला (एक के बाद एक) क्रम में जोड़ा जाता है, तो कुल (तुल्य) प्रतिरोध ({R_{eq}}) ज्ञात करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिरोधों के मानों को सीधे जोड़ दिया जाता है।
तीन प्रतिरोधकों (R_1, R_2, R_3) के लिए, कुल प्रतिरोध का सूत्र है:
R_{eq} = R_1 + R_2 + R_3
आपके पास तीन प्रतिरोधक हैं, और प्रत्येक का मान 6 Omega है:
R_1 = 6 Omega
R_2 = 6 Omega
R_3 = 6 Omega
सूत्र में मान रखने पर:
R_{eq} = 6 Omega + 6 Omega + 6 Omega
R_{eq} = 18 Omega
तीनों 6 Omega के प्रतिरोधकों को श्रृंखला क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध 18 Omega (ओम) होगा।
ध्यान दें: श्रृंखला क्रम में, कुल प्रतिरोध हमेशा सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है।
यह एक बहुत ही व्यावहारिक और महत्वपूर्ण प्रश्न है। आदर्श रूप से (Ideally), ओम के नियम के अनुसार किसी चालक का प्रतिरोध स्थिर होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में (In Practice) यह कई कारकों के कारण स्थिर नहीं रह पाता।
चालक का प्रतिरोध मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों के कारण बदलता रहता है:
यह प्रतिरोध के स्थिर न रहने का सबसे प्रमुख कारण है।
तापमान बढ़ने पर चालक का प्रतिरोध भी बढ़ता है।
यदि चालक तार को खींचा जाता है, मोड़ा जाता है, या उस पर यांत्रिक बल (Mechanical Force) लगाया जाता है, तो उसका प्रतिरोध बदल सकता है।
समय के साथ, चालक की भौतिक और रासायनिक संरचना में धीरे-धीरे परिवर्तन हो सकते हैं:
यदि सर्किट में किसी भी प्रकार की अशुद्धियाँ (जैसे वेल्डिंग से या दोषपूर्ण कनेक्शन से) आ जाती हैं, तो वे चालक की प्रतिरोधकता को बदल सकती हैं, जिससे प्रतिरोध का मान स्थिर नहीं रहता।
निष्कर्ष:
हालाँकि हम गणनाओं में एक स्थिर प्रतिरोध मान का उपयोग करते हैं, लेकिन व्यावहारिक इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में, ये सभी कारक (विशेष रूप से तापमान) प्रतिरोध को एक गतिशील (Dynamic) घटक बनाते हैं।
उच्च प्रतिरोधकता (High Resistivity) वाली सामग्रियों के अनुप्रयोग (Applications) बहुत व्यापक हैं, खासकर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में। इन सामग्रियों की यह विशेषता उन्हें विशेष रूप से ऊष्मा उत्पन्न करने, धारा को सीमित करने, और मापन में सटीकता प्रदान करने के लिए आदर्श बनाती है।
यहाँ उच्च प्रतिरोधकता वाली सामग्रियों के मुख्य अनुप्रयोग दिए गए हैं:
यह शायद उच्च प्रतिरोधकता वाली सामग्रियों का सबसे आम और महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है।
प्रतिरोधकों के निर्माण के लिए ऐसी सामग्री आवश्यक है जो कम जगह में अधिक प्रतिरोध प्रदान कर सके।
मापन उपकरणों में प्रतिरोध को तापमान परिवर्तन से अप्रभावित रखना आवश्यक है।
हालांकि फ्यूज के तार की प्रतिरोधकता बहुत उच्च नहीं होती, लेकिन यह सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संक्षेप में,
उच्च प्रतिरोधकता वाली सामग्रियाँ हीटिंग, धारा नियंत्रण और सटीक मापन के लिए आवश्यक हैं क्योंकि वे उच्च विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में प्रभावी ढंग से परिवर्तित कर सकती हैं और स्थिरता बनाए रख सकती हैं।
यह प्रश्न प्रतिरोध की आयामों (Dimensions) पर निर्भरता पर आधारित है।
प्रतिरोध (R) की गणना निम्नलिखित सूत्र का उपयोग करके की जाती है:
R = rho {L}/{A}
जहाँ:
मान लीजिए मूल तार का प्रतिरोध R_{old} है।
R_{old} = rho {L}/{A}
तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ({A}) उसके व्यास ({d}) पर निर्भर करता है:
A = pi r^2 = pi ({d}/{2})^2 = {d^2}/{4}
A = pi r^2 = pi ({d}/{2})^2 = {d^2}/{4}
तो, मूल प्रतिरोध को व्यास के पदों में व्यक्त करने पर:
R_{old} = rho {L}/{{d^2}/{4}} = {4rho L}/{pi d^2}
अब, नई स्थिति में, हमें लंबाई (L) और व्यास (d) दोनों को दोगुना करना है:
नए तार का प्रतिरोध (R_{new}) ज्ञात करने पर:
R_{new} = rho {L_{new}}/{A_{new}} = rho {2L}/{{pi (2d)^2}/{4}}
विशिष्ट चालकता (Specific Conductivity) या केवल चालकता (Conductivity) को निम्नलिखित तरीके से परिभाषित किया जाता है:
किसी चालक के प्रति इकाई आयतन में विद्युत धारा संचालित करने की क्षमता को उसकी विशिष्ट चालकता कहते हैं।
यह उस सामग्री के प्रतिरोधकता (Resistivity) का व्युत्क्रम होती है। दूसरे शब्दों में, यह दर्शाती है कि कोई सामग्री कितनी आसानी से विद्युत धारा को अपने में से प्रवाहित होने देती है।
विशिष्ट चालकता को प्रायः ग्रीक अक्षर सिग्मा (sigma) या कभी-कभी कप्पा (kappa) से दर्शाया जाता है।
इसे प्रतिरोधकता (rho) के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है:
sigma = {1}/{rho}
जहाँ rho प्रतिरोधकता है।
इसका SI मात्रक सीमेंस प्रति मीटर (Siemens per meter, S/m) होता है।
इसे Omega^{-1} cdot m^{-1} (ओम इनवर्स मीटर इनवर्स) या मोह प्रति मीटर ({mho} / m) भी कहा जाता है।
विशिष्ट चालकता (Specific Conductivity) और चालकत्व (Conductance) में मुख्य अंतर यह है कि चालकत्व एक विशेष वस्तु या घटक का माप है, जबकि विशिष्ट चालकता एक सामग्री (पदार्थ) का मूलभूत गुण है।
दोनों के बीच के अंतर को निम्न तालिका से समझा जा सकता है:
|
विशेषता |
चालकत्व (Conductance) |
विशिष्ट चालकता (Specific Conductivity या Conductivity) |
|---|---|---|
|
प्रतीक |
G |
sigma (सिग्मा) या kappa (कप्पा) |
|
परिभाषा |
यह प्रतिरोध (R) का व्युत्क्रम है। यह मापता है कि कोई विशेष चालक (जैसे एक तार या कोई घटक) कितनी आसानी से धारा प्रवाहित होने देता है। |
यह प्रतिरोधकता (rho) का व्युत्क्रम है। यह मापता है कि कोई सामग्री (जैसे तांबा, चांदी) प्रति इकाई आयतन में कितनी आसानी से धारा प्रवाहित होने देती है। |
|
सूत्र |
G = {1}/{R} |
sigma = {1}/{rho} |
|
निर्भरता |
यह चालक के भौतिक आयामों (लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल) और पदार्थ की प्रकृति दोनों पर निर्भर करता है। |
यह केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है। यह चालक के आकार या ज्यामिति से स्वतंत्र होता है। |
|
SI मात्रक |
सीमेंस (Siemens, S) या मोह (Mho, \Omega^{-1}) |
सीमेंस प्रति मीटर ({S/m}) या मोह प्रति मीटर (Omega^{-1} \cdot m^{-1}) |
|
प्रकार |
यह एक विस्तृत गुण (Extensive Property) है क्योंकि यह वस्तु के आकार पर निर्भर करता है। |
यह एक अभिलाक्षणिक गुण (Intrinsic Property) है, जो पदार्थ का मूलभूत गुण है। |
यह प्रतिरोध (Resistance, R) ज्ञात करने का एक सीधा सवाल है, जिसके लिए आपको प्रतिरोधकता का सूत्र उपयोग करना होगा।
प्रतिरोध (R) की गणना प्रतिरोधकता (rho), लंबाई (L) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के संबंध का उपयोग करके की जाती है:
R = {rho × L}/{A}
जहाँ:
गणना करने से पहले, सुनिश्चित करें कि सभी मान SI इकाइयों (SI Units) में हैं।
मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ।
यह एक भौतिकी का प्रश्न है जिसमें आपको एक तार का प्रतिरोध (R) ज्ञात करना है, जिसके लिए तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता ( rho ), लंबाई (L), और अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल (A) दिया गया है।
सबसे पहले, आइए दिए गए मानों को SI इकाइयों में व्यवस्थित करें:
हमें क्षेत्रफल को {मीटर}^2 में बदलना होगा, क्योंकि 1 , {मिमी} = 10^{-3} , {मीटर}:
विद्युत चालकों (electrical conductors) में तांबा (Copper) और एल्युमीनियम (Aluminium) का उपयोग सबसे अधिक निम्नलिखित गुणों के कारण किया जाता है:
|
गुण (Property) |
तांबा (Copper) |
एल्युमीनियम (Aluminium) |
|---|---|---|
|
चालकता (Conductivity) |
बहुत उच्च (उत्कृष्ट) |
उच्च (तांबे से लगभग 61% कम) |
|
वजन (Weight) |
भारी |
बहुत हल्का (तांबे के वजन का लगभग एक-तिहाई) |
|
लागत (Cost) |
महंगा |
कम महंगा |
|
तन्यता और सामर्थ्य (Ductility & Strength) |
अधिक मजबूत और कम फैलता है |
कम मजबूत, तापमान परिवर्तन के साथ अधिक फैलता है |
|
उपयोग (Usage) |
घरों की वायरिंग, मोटर, ट्रांसफार्मर, इलेक्ट्रॉनिक्स, जहाँ कम जगह में अधिक करेंट चाहिए। |
ओवरहेड पावर लाइनें (Overhead Power Lines), लंबी दूरी के संचरण केबल (Transmission Cables), जहाँ हल्कापन महत्वपूर्ण है। |
निष्कर्ष:
तांबा को बेहतर सुरक्षा, टिकाऊपन और उच्च प्रदर्शन के लिए पसंद किया जाता है।
एल्युमीनियम को कम लागत और हल्के वजन के कारण बड़े और लंबी दूरी के विद्युत संचरण (power transmission) में उपयोग किया जाता है।
पोटेंशियोमीटर (जिसे हिंदी में विभवमापी भी कहते हैं) एक तीन सिरे वाला निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक घटक (three-terminal passive electronic component) है। इसे मुख्य रूप से एक परिवर्ती प्रतिरोध (Variable Resistor) के रूप में या विभव-विभाजक (Potential Divider) के रूप में उपयोग किया जाता है।
पोटेंशियोमीटर के तीन मुख्य भाग और इसका कार्य सिद्धांत निम्नलिखित है:
प्रतिरोधक ट्रैक (Resistive Track): यह एक स्थिर प्रतिरोध तत्व होता है जिसके दो सिरे (टर्मिनल) नियत (fixed) होते हैं। इन दो सिरों के बीच अधिकतम वोल्टेज लगाया जाता है।
वाइपर/स्लाइडिंग संपर्क (Wiper/Sliding Contact): यह तीसरा सिरा होता है जो प्रतिरोधक ट्रैक के साथ गति करता है (स्लाइड या रोटेट होता है)।
कार्य सिद्धांत (Principle): इसका कार्य सिद्धांत वोल्टेज डिवाइडर पर आधारित है।
पोटेंशियोमीटर के दो मुख्य उपयोग होते हैं:
1. एक मापक उपकरण के रूप में (As a Measuring Instrument - विभवमापी)
2. एक परिवर्ती प्रतिरोध/वोल्टेज नियंत्रक के रूप में (As a Variable Resistor/Voltage Controller)
एसी (प्रत्यावर्ती धारा) परिपथों में, "प्रतिरोध" (Resistance) शब्द का उपयोग दो अलग-अलग संदर्भों में किया जाता है, जिनका आवृत्ति (Frequency) पर प्रभाव भी अलग-अलग होता है:
एक शुद्ध प्रतिरोधक (Pure Resistor) के कारण उत्पन्न होने वाला प्रतिरोध सैद्धांतिक रूप से आवृत्ति पर निर्भर नहीं करता है।
प्रभाव: यदि परिपथ में केवल एक आदर्श प्रतिरोधक (R) लगा है, तो उसकी प्रतिरोधक क्षमता (R) एसी की आवृत्ति (f) बढ़ने या घटने पर अपरिवर्तित रहती है।
कारण: प्रतिरोध का मान तार की सामग्री (प्रतिरोधकता \rho), लंबाई (L), और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (A) पर निर्भर करता है:
R = rho {L}/{A}
इनमें से कोई भी कारक आवृत्ति पर निर्भर नहीं करता है।
एसी परिपथ में धारा के प्रवाह के प्रति कुल विरोध को प्रतिबाधा (Z) कहा जाता है। प्रतिबाधा में प्रतिरोध (R) के साथ-साथ प्रतिघात (Reactance - X) भी शामिल होता है, और यह प्रतिघात आवृत्ति पर सीधे निर्भर करता है।
Z = sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}
यहाँ X_L और X_C का आवृत्ति से संबंध निम्नलिखित है:
A. प्रेरकीय प्रतिघात (Inductive Reactance - X_L)
यह एक प्रेरक (Inductor - L) के कारण होता है।
B. धारितीय प्रतिघात (Capacitive Reactance - X_C)
यह एक संधारित्र (Capacitor - C) के कारण होता है।
प्रतिरोध (Resistance) और प्रतिबाधा (Impedance) दोनों ही विद्युत परिपथ में धारा के प्रवाह के विरोध को दर्शाते हैं, लेकिन उनके बीच मूलभूत अंतर यह है कि वे किस प्रकार की धारा (DC या AC) से संबंधित हैं और किन घटकों (Components) को शामिल करते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो:
विद्युत प्रतिरोध किसी चालक (Conductor) का वह मूल गुण है, जिसके कारण वह अपने में से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है या उसमें रुकावट डालता है।
जब इलेक्ट्रॉन किसी चालक में से गुजरते हैं, तो वे चालक के परमाणुओं और अन्य इलेक्ट्रॉनों से टकराते हैं, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। यही टकराव प्रतिरोध के रूप में प्रकट होता है, और इस प्रक्रिया में विद्युत ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
1. ओम के नियम के अनुसार परिभाषा:
ओम (Ohm) के नियम के अनुसार, किसी चालक के सिरों पर उत्पन्न विभवांतर (V) तथा उसमें प्रवाहित विद्युत धारा (I) के अनुपात को ही उस चालक का प्रतिरोध (R) कहते हैं।
सूत्र
R = {V}/{I}
2. SI मात्रक:
प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ohm) है, जिसे ग्रीक अक्षर Omega (ओमेगा) से दर्शाया जाता है।
1 { ओम} = 1 {{वोल्ट}}/{{एम्पीयर}}
किसी भी चालक का प्रतिरोध (R) निम्नलिखित चार मुख्य कारकों पर निर्भर करता है:
चालक की लंबाई (l): प्रतिरोध लंबाई के सीधे आनुपापातिक होता है। (जितना लंबा तार, उतना अधिक प्रतिरोध)।
R = l
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (जितना मोटा तार, उतना कम प्रतिरोध)।
R = {1}/{A}
चालक की प्रकृति (rho): प्रतिरोध चालक के पदार्थ पर निर्भर करता है, जिसे विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता (rho) कहते हैं। (जैसे, तांबे का प्रतिरोध एल्युमीनियम से कम होता है)।
तापमान: सामान्यतः धात्विक चालकों का प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर बढ़ता है।
इन कारकों को मिलाकर गणितीय सूत्र यह है:
R = rho {l}/{A}
विद्युत प्रतिबाधा (Z) एक व्यापक और महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसका उपयोग मुख्य रूप से प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) परिपथों में किया जाता है।
यह AC परिपथ में धारा के प्रवाह के कुल विरोध को दर्शाती है। प्रतिबाधा (Z) में केवल प्रतिरोध (R) ही शामिल नहीं होता, बल्कि यह प्रतिरोध और प्रतिघात (Reactance - X) के संयुक्त प्रभाव को प्रदर्शित करती है।
प्रतिबाधा (Z) दो मुख्य घटकों से मिलकर बनी होती है:
1. प्रतिरोध (Resistance - R)
2. प्रतिघात (Reactance - X)
प्रतिघात दो प्रकार का होता है:
प्रतिबाधा (Z) को प्रतिरोध (R) और शुद्ध प्रतिघात (X) के सदिश योग (Vector Sum) के रूप में परिभाषित किया जाता है, क्योंकि प्रतिरोध और प्रतिघात के प्रभाव एक-दूसरे से 90^\circ के कोण पर होते हैं।
गणितीय सूत्र:
Z = sqrt{R^2 + X^2}
जहां X = X_L - X_C
समिश्र संख्या (Complex Number) रूप:
Z = R + jX
(जहां j काल्पनिक इकाई है, जो यह दर्शाती है कि प्रतिघात का प्रभाव प्रतिरोध से 90^ circ आगे है)
प्रतिघात (X) वह विरोधी गुण है जो केवल प्रेरक (X_L) और संधारित्र (X_C) जैसे ऊर्जा-भंडारण (energy-storing) तत्वों द्वारा AC धारा के प्रवाह में डाला जाता है।
प्रकाश पर निर्भर प्रतिरोधक (Light Dependent Resistor - LDR), जिसे फोटोरेज़िस्टर (Photoresistor) भी कहा जाता है, एक निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक घटक (passive electronic component) है जिसका प्रतिरोध उस पर पड़ने वाले प्रकाश की तीव्रता के अनुसार बदलता रहता है।
यह एक प्रकार का अर्धचालक (Semiconductor) उपकरण है जो मुख्य रूप से कैडमियम सल्फाइड (Cadmium Sulphide - CdS) जैसे प्रकाश-संवेदी पदार्थ से बना होता है।
LDR का कार्य सिद्धांत फोटोकंडक्टिविटी (Photoconductivity) पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि यह प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करके अपनी विद्युत चालकता को बढ़ाता है।
संक्षेप में:
LDR अपनी प्रकाश संवेदनशीलता के कारण विभिन्न स्वचालन (Automation) और नियंत्रण प्रणालियों में उपयोग किए जाते हैं:
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