अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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एनपीएन (NPN) ट्रांजिस्टर एक प्रकार का द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर (BJT) है जो इलेक्ट्रॉनिक्स में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। "NPN" नाम इसकी संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक P-प्रकार (P-type) अर्धचालक की पतली परत को दो N-प्रकार (N-type) अर्धचालकों की परतों के बीच "सैंडविच" किया जाता है।
संरचना:
एक एनपीएन ट्रांजिस्टर में तीन परतें और तीन टर्मिनल होते हैं:
* उत्सर्जक (Emitter - E): यह N-प्रकार की अत्यधिक डोपित (highly doped) परत होती है। इसका मुख्य कार्य आवेश वाहकों (इलेक्ट्रॉनों) को आधार में उत्सर्जित करना है। इसमें तीर का निशान हमेशा बाहर की ओर होता है, जो पारंपरिक करंट की दिशा (होल्स के प्रवाह की दिशा) को दर्शाता है।
* आधार (Base - B): यह P-प्रकार की बहुत पतली और हल्के से डोपित (lightly doped) परत होती है, जो उत्सर्जक और संग्राहक के बीच स्थित होती है। इसका मुख्य कार्य संग्राहक करंट को नियंत्रित करना है।
* संग्राहक (Collector - C): यह N-प्रकार की परत होती है, जो उत्सर्जक की तुलना में कम डोपित होती है लेकिन आकार में बड़ी होती है। इसका कार्य आधार से आने वाले आवेश वाहकों को एकत्र करना है।
कार्यप्रणाली:
एनपीएन ट्रांजिस्टर का कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से दो PN जंक्शनों के बायसिंग ( biasing) पर आधारित होता है:
* उत्सर्जक-आधार जंक्शन (Emitter-Base Junction): यह जंक्शन आमतौर पर अग्र अभिनत (forward biased) होता है। इसका मतलब है कि उत्सर्जक को आधार की तुलना में अधिक नकारात्मक वोल्टेज पर रखा जाता है। इस बायसिंग के कारण, उत्सर्जक में मौजूद बहुसंख्यक आवेश वाहक (इलेक्ट्रॉन) आधार की ओर प्रवाहित होते हैं।
* संग्राहक-आधार जंक्शन (Collector-Base Junction): यह जंक्शन आमतौर पर पश्च अभिनत (reverse biased) होता है। इसका मतलब है कि संग्राहक को आधार की तुलना में अधिक सकारात्मक वोल्टेज पर रखा जाता है। यह पश्च अभिनति आधार से आने वाले इलेक्ट्रॉनों को संग्राहक की ओर खींचती है।
एनपीएन ट्रांजिस्टर इस प्रकार कार्य करता है:
* जब उत्सर्जक-आधार जंक्शन को अग्र अभिनत किया जाता है, तो उत्सर्जक से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन आधार में प्रवेश करते हैं।
* आधार बहुत पतला और हल्के से डोपित होता है, इसलिए आधार में प्रवेश करने वाले अधिकांश इलेक्ट्रॉन (लगभग 95-99%) संग्राहक-आधार जंक्शन द्वारा आकर्षित हो जाते हैं और संग्राहक की ओर चले जाते हैं।
* आधार में केवल बहुत कम संख्या में इलेक्ट्रॉन (लगभग 1-5%) आधार के होल्स के साथ पुनर्संयोजित (recombine) होते हैं, जिससे एक छोटा आधार करंट (I_B) प्रवाहित होता है।
* संग्राहक में पहुंचने वाले इलेक्ट्रॉन संग्राहक करंट (I_C) बनाते हैं।
* उत्सर्जक करंट (I_E) आधार करंट (I_B) और संग्राहक करंट (I_C) का योग होता है (I_E = I_B + I_C)।
नियंत्रण:
एनपीएन ट्रांजिस्टर एक करंट-नियंत्रित उपकरण है। बेस पर एक छोटा सा करंट (I_B) संग्राहक पर एक बहुत बड़े करंट (I_C) को नियंत्रित करता है। यह इसकी प्रवर्धन क्षमता का आधार है। यदि बेस करंट बढ़ता है, तो कलेक्टर करंट भी बढ़ता है, और यदि बेस करंट घटता है, तो कलेक्टर करंट भी घटता है।
मुख्य उपयोग:
एनपीएन ट्रांजिस्टर के उपयोगों को हमने पिछली प्रतिक्रिया में विस्तार से देखा है, जिनमें मुख्य रूप से एम्पलीफायर (प्रवर्धक) और इलेक्ट्रॉनिक स्विच के रूप में कार्य करना शामिल है।
पीएनपी (PNP) ट्रांजिस्टर पर श्रेष्ठता:
एनपीएन ट्रांजिस्टर को अक्सर पीएनपी ट्रांजिस्टर की तुलना में अधिक श्रेष्ठ माना जाता है, खासकर उच्च-आवृत्ति वाले अनुप्रयोगों में। इसका मुख्य कारण यह है कि एनपीएन ट्रांजिस्टर में आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि पीएनपी ट्रांजिस्टर में होल्स होते हैं। इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता (mobility) होल्स की तुलना में अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि वे अधिक तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं। यह एनपीएन ट्रांजिस्टर को तेज़ स्विचिंग गति और बेहतर उच्च-आवृत्ति प्रदर्शन प्रदान करता है।
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