ट्रांसफार्मर को ठंडा करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रांसफार्मर में होने वाले नुकसान (जैसे कि तांबे और लोहे में होने वाले नुकसान) से गर्मी पैदा होती है, जिसे हटाना ज़रूरी होता है ताकि ट्रांसफार्मर ज़्यादा गरम न हो। ट्रांसफार्मर की रेटिंग और प्रकार के आधार पर शीतलन विधि का चयन किया जाता है।
शीतलन विधियाँ (Cooling Methods)
ट्रांसफार्मर के लिए मुख्य शीतलन विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- प्राकृतिक वायु शीतलन (Air-Natural/Dry-Type): यह सबसे सरल तरीका है, जहाँ ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के लिए प्राकृतिक हवा का इस्तेमाल किया जाता है। ये ट्रांसफार्मर आमतौर पर कम क्षमता वाले होते हैं और इनमें कोई तेल या यांत्रिक पंखे नहीं होते हैं। इन्हें शुष्क-प्रकार (dry-type) ट्रांसफार्मर भी कहते हैं।
- तेल-निमज्जित स्व-शीतलन (Oil-Immersed Self-Cooled): इस विधि में, ट्रांसफार्मर के कोर और कॉइल को एक टैंक में रखा जाता है जो विशेष ट्रांसफार्मर तेल से भरा होता है। जब ट्रांसफार्मर काम करता है, तो तेल गर्म हो जाता है और प्राकृतिक संवहन के कारण ऊपर उठता है। ठंडा होने के लिए, यह टैंक की दीवारों और रेडिएटर के माध्यम से बाहरी हवा के संपर्क में आता है और फिर से नीचे चला जाता है, जिससे एक प्राकृतिक परिसंचरण चक्र बनता है।
- तेल-निमज्जित वायु-शीतलन (Oil-Immersed Air-Cooled): यह विधि तेल-निमज्जित स्व-शीतलन के समान है, लेकिन इसमें अतिरिक्त पंखे (fans) लगाए जाते हैं। ये पंखे रेडिएटर पर ठंडी हवा का प्रवाह तेज़ करते हैं, जिससे गर्मी बहुत तेज़ी से बाहर निकलती है। इस विधि का उपयोग उन ट्रांसफार्मरों के लिए किया जाता है जिनकी क्षमता अधिक होती है।
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मजबूर परिसंचरण (Forced Circulation): उच्च क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है। इसमें, तेल को पंपों के माध्यम से जबरन परिसंचरित किया जाता है। इस विधि में दो मुख्य प्रकार हैं:
- मजबूर तेल वायु शीतलन (Forced Oil Air Cooling): इसमें तेल को पंप के द्वारा रेडिएटर और पंखों के माध्यम से ठंडा किया जाता है।
- मजबूर तेल जल शीतलन (Forced Oil Water Cooling): इस विधि में तेल को ठंडा करने के लिए पानी का उपयोग किया जाता है। गर्म तेल को एक हीट एक्सचेंजर के माध्यम से पंप किया जाता है जहाँ ठंडा पानी तेल से गर्मी निकालता है।
ट्रांसफार्मर में शीतलन की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि ट्रांसफार्मर के संचालन के दौरान गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को यदि नियंत्रित न किया जाए, तो यह ट्रांसफार्मर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
गर्मी के मुख्य कारण
ट्रांसफार्मर में गर्मी दो मुख्य प्रकार के नुकसान (हानि) के कारण उत्पन्न होती है:
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लौह हानि (Iron Loss): यह हानि ट्रांसफार्मर के कोर में होती है। यह मुख्यतः दो कारणों से होती है:
- हिस्टेरेसिस हानि (Hysteresis Loss): जब चुंबकीय क्षेत्र बार-बार बदलता है, तो कोर में ऊर्जा का नुकसान होता है।
- एडी करंट हानि (Eddy Current Loss): बदलते हुए चुंबकीय क्षेत्र से कोर में छोटे-छोटे भंवर धाराएं (eddy currents) उत्पन्न होती हैं, जो गर्मी पैदा करती हैं।
- ताम्र हानि (Copper Loss): यह हानि ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग (तारों) में होती है। जब वाइंडिंग से धारा प्रवाहित होती है, तो उसके प्रतिरोध के कारण I²R (धारा का वर्ग गुणा प्रतिरोध) के रूप में ऊर्जा का नुकसान होता है, जो गर्मी में बदल जाता है।
शीतलन का महत्व
शीतलन के बिना, ट्रांसफार्मर का तापमान बढ़ता जाएगा, जिससे:
- इंसुलेशन (विद्युत रोधन) का नुकसान: ट्रांसफार्मर में इस्तेमाल होने वाले इंसुलेशन सामग्री (जैसे तेल, कागज) का जीवनकाल कम हो जाएगा। उच्च तापमान से इंसुलेशन की डाइइलेक्ट्रिक शक्ति कम हो जाती है, जिससे शॉर्ट-सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
- दक्षता में कमी: अत्यधिक गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर की दक्षता कम हो जाती है और ऊर्जा की बर्बादी बढ़ जाती है।
- ट्रांसफार्मर का फटना या खराब होना: यदि तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग पिघल सकती हैं या तेल उबल सकता है, जिससे ट्रांसफार्मर में आग लग सकती है या वह फट सकता है।
इसलिए,
ट्रांसफार्मर का सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित करने के लिए, उत्पन्न हुई गर्मी को लगातार बाहर निकालना बहुत ज़रूरी होता है।
यदि ट्रांसफार्मर को ठीक से ठंडा नहीं किया जाता है, तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं जो इसकी कार्यक्षमता, जीवनकाल और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।
इंसुलेशन (विद्युत रोधन) का नुकसान
ट्रांसफार्मर में वाइंडिंग (तारों) को अलग रखने के लिए इंसुलेशन सामग्री का उपयोग किया जाता है। उच्च तापमान के कारण यह इंसुलेशन समय के साथ खराब हो जाता है, जिससे इसकी विद्युतरोधी क्षमता कम हो जाती है। जब इंसुलेशन पूरी तरह से टूट जाता है, तो वाइंडिंग आपस में शॉर्ट-सर्किट हो सकती हैं, जिससे ट्रांसफार्मर पूरी तरह से विफल हो जाएगा।
दक्षता में कमी
ट्रांसफार्मर में उत्पन्न होने वाली गर्मी, मुख्य रूप से तांबे की हानि (copper losses), प्रतिरोध के कारण होती है। जब तापमान बढ़ता है, तो वाइंडिंग का प्रतिरोध भी बढ़ता है, जिससे और अधिक गर्मी पैदा होती है। यह एक दुष्चक्र बन जाता है जो ट्रांसफार्मर की दक्षता को काफी कम कर देता है।
ट्रांसफार्मर का जीवनकाल कम होना
इंसुलेशन का खराब होना ट्रांसफार्मर के जीवनकाल को सीधे कम करता है। एक सामान्य नियम के अनुसार, यदि ट्रांसफार्मर का तापमान उसके डिज़ाइन तापमान से 10°C अधिक हो जाता है, तो उसका जीवनकाल लगभग आधा हो जाता है।
सुरक्षा का खतरा
अत्यधिक गर्मी के कारण, ट्रांसफार्मर के अंदर का तेल उबल सकता है या भाप बन सकता है, जिससे टैंक के अंदर दबाव बहुत बढ़ जाता है। इस दबाव के कारण ट्रांसफार्मर फट सकता है, जिससे आग लगने या विस्फोट होने का गंभीर खतरा पैदा होता है। इससे आस-पास के उपकरण और लोगों को भी बड़ा नुकसान हो सकता है।
वितरण ट्रांसफार्मर में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार की शीतलन विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. तेल-निमज्जित स्व-शीतलन (Oil-Immersed Self-Cooled)
यह वितरण ट्रांसफार्मर के लिए सबसे आम शीतलन विधि है। इस विधि में, ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग को एक टैंक में रखा जाता है जो ट्रांसफार्मर तेल से भरा होता है। जब ट्रांसफार्मर काम करता है, तो वाइंडिंग और कोर में गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे तेल गर्म होकर ऊपर उठता है। गर्म तेल टैंक की दीवारों और बाहरी रेडिएटर फिन्स (fins) के माध्यम से ठंडा होता है और फिर नीचे चला जाता है। यह एक प्राकृतिक परिसंचरण चक्र बनाता है।
2. मजबूर वायु शीतलन (Forced Air Cooling)
इस विधि में, ट्रांसफार्मर के बाहर लगे रेडिएटर के ऊपर या उसके पास इलेक्ट्रिक पंखे (fans) लगाए जाते हैं। ये पंखे तेल के प्राकृतिक परिसंचरण के साथ मिलकर काम करते हैं और तेल को बहुत तेजी से ठंडा करते हैं। जब ट्रांसफार्मर पर भार बढ़ जाता है, तो ये पंखे स्वचालित रूप से चालू हो जाते हैं ताकि अतिरिक्त गर्मी को नियंत्रित किया जा सके।
3. शुष्क-प्रकार वायु शीतलन (Dry-Type Air-Cooled)
ये ट्रांसफार्मर तेल का उपयोग नहीं करते हैं। इनमें वाइंडिंग को एक विशेष इन्सुलेशन सामग्री (जैसे कि एपॉक्सी राल) से ढका जाता है। इन ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के लिए प्राकृतिक हवा का इस्तेमाल किया जाता है, जो वाइंडिंग के बीच से बहती है और गर्मी को बाहर निकालती है।
विस्तार से:
वितरण ट्रांसफार्मर आमतौर पर 33 kV तक की वोल्टेज रेटिंग के लिए बनाए जाते हैं और उनका उपयोग आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली वितरित करने के लिए किया जाता है। इनकी क्षमता आम तौर पर कम होती है, इसलिए इनमें साधारण और लागत प्रभावी शीतलन विधियों का उपयोग किया जाता है। तेल-निमज्जित स्व-शीतलन और मजबूर वायु शीतलन सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधियाँ हैं। मजबूर वायु शीतलन का उपयोग तब किया जाता है जब ट्रांसफार्मर को अपनी रेटेड क्षमता से अधिक पर संचालित किया जाना होता है।
पावर ट्रांसफार्मर में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार की शीतलन विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. प्राकृतिक वायु शीतलन (Air Natural - AN)
इस विधि में, ट्रांसफार्मर को ठंडा करने के लिए उसके चारों ओर की प्राकृतिक हवा का उपयोग किया जाता है। गर्म हवा ऊपर उठती है और उसकी जगह ठंडी हवा ले लेती है। यह विधि केवल कम क्षमता वाले शुष्क-प्रकार (dry-type) ट्रांसफार्मर के लिए उपयुक्त है।
2. तेल-निमज्जित स्व-शीतलन (Oil-Immersed Self-Cooled - ONAN)
यह विधि उन ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है जिनकी क्षमता 500 kVA तक होती है। इसमें ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग को एक टैंक में डुबोया जाता है जिसमें ट्रांसफार्मर तेल भरा होता है। जब ट्रांसफार्मर गर्म होता है, तो तेल का तापमान बढ़ता है और वह प्राकृतिक संवहन के कारण ऊपर उठता है। यह गर्म तेल रेडिएटर के माध्यम से ठंडा होकर वापस नीचे चला जाता है।
3. तेल-निमज्जित मजबूर वायु शीतलन (Oil-Immersed Forced Air - ONAF)
यह विधि ONAN के समान है, लेकिन इसमें अतिरिक्त पंखे (fans) लगाए जाते हैं जो रेडिएटर पर हवा का प्रवाह बढ़ाकर शीतलन को तेज करते हैं। यह विधि 500 kVA से 5000 kVA तक की क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के लिए उपयुक्त है।
4. मजबूर तेल प्राकृतिक वायु शीतलन (Forced Oil Natural Air - OFAN)
इस विधि में, ट्रांसफार्मर तेल को पंपों के माध्यम से जबरन रेडिएटर में भेजा जाता है। रेडिएटर में तेल प्राकृतिक हवा के संपर्क में आकर ठंडा होता है और फिर से ट्रांसफार्मर में वापस आ जाता है।
5. मजबूर तेल मजबूर वायु शीतलन (Forced Oil Forced Air - OFAF)
यह उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाने वाली विधि है। इसमें तेल को पंप के माध्यम से रेडिएटर में भेजा जाता है और साथ ही पंखों का उपयोग करके रेडिएटर पर हवा का प्रवाह भी तेज किया जाता है। यह विधि सबसे अधिक प्रभावी होती है और इसका उपयोग 5000 kVA से अधिक के बड़े पावर ट्रांसफार्मरों में किया जाता है।
6. मजबूर तेल मजबूर जल शीतलन (Forced Oil Forced Water - OFWF)
यह विधि बहुत बड़े पावर ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है। इसमें तेल को पंप के माध्यम से एक हीट एक्सचेंजर में भेजा जाता है, जहाँ तेल को ठंडा करने के लिए पानी का उपयोग किया जाता है। ठंडा हुआ तेल फिर से ट्रांसफार्मर में लौट आता है। यह विधि अत्यधिक कुशल होती है और इसका उपयोग विशेष रूप से पनबिजली स्टेशनों जैसे स्थानों में किया जाता है, जहाँ पानी आसानी से उपलब्ध होता है।
ONAN ट्रांसफार्मर कूलिंग विधि ट्रांसफार्मर को ठंडा करने की एक सरल और सबसे आम विधि है। ONAN का मतलब ऑयल नेचुरल एयर नेचुरल है।
ONAN कूलिंग कैसे काम करती है?
- ऑयल नेचुरल (O-N): ट्रांसफार्मर के अंदर के कॉइल और कोर से गर्मी उत्पन्न होती है। यह गर्मी ट्रांसफार्मर में भरे हुए तेल में चली जाती है। गर्म तेल, जो हल्का होता है, ऊपर की ओर उठता है और ट्रांसफार्मर के ऊपरी हिस्से में चला जाता है। उसी समय, ठंडा तेल, जो भारी होता है, नीचे की ओर आता है और गर्म कॉइल के संपर्क में आता है। इस तरह, तेल में एक प्राकृतिक संवहन (natural convection) प्रवाह बनता है, जिससे गर्मी लगातार ऊपर की ओर आती रहती है।
- एयर नेचुरल (A-N): ऊपर आने वाला गर्म तेल ट्रांसफार्मर की टंकी या इससे जुड़े रेडिएटर (radiators) में फैलता है। रेडिएटर में तेल की सतह का क्षेत्रफल बहुत ज़्यादा होता है। रेडिएटर में मौजूद गर्म तेल बाहरी ठंडी हवा के संपर्क में आता है। यह गर्मी हवा में प्राकृतिक संवहन (natural convection) और विकिरण (radiation) के माध्यम से फैल जाती है। जैसे-जैसे तेल ठंडा होता है, वह फिर से भारी होकर नीचे की ओर जाता है और यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
ONAN कूलिंग विधि उन ट्रांसफार्मर में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है जिनकी क्षमता 500 kVA तक होती है, क्योंकि यह शांत और किफायती होती है।
ONAF ट्रांसफार्मर कूलिंग विधि ट्रांसफार्मर को ठंडा करने की एक उन्नत विधि है, जो ONAN विधि से अधिक कुशल है। ONAF का मतलब ऑयल नेचुरल एयर फोर्स्ड है।
यह विधि मुख्य रूप से मध्यम और बड़े आकार के ट्रांसफार्मर में इस्तेमाल की जाती है। जब ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ता है, तो अधिक गर्मी उत्पन्न होती है। ऐसे में, प्राकृतिक वायु प्रवाह (natural air flow) से पर्याप्त कूलिंग नहीं हो पाती। इसी समस्या को हल करने के लिए ONAF विधि का उपयोग किया जाता है।
ONAF कूलिंग कैसे काम करती है?
ऑयल नेचुरल (O-N): इस विधि में, ONAN की तरह ही, ट्रांसफार्मर के अंदर का तेल गर्म होकर प्राकृतिक संवहन (natural convection) के माध्यम से ऊपर उठता है और ठंडा होने के लिए रेडिएटर में जाता है।
एयर फोर्स्ड (A-F): यह इस विधि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। रेडिएटर के ऊपर या पास में, बिजली से चलने वाले पंखे (fans) लगाए जाते हैं। ये पंखे रेडिएटर के ऊपर जबरदस्ती हवा (forced air) प्रवाहित करते हैं। यह तेज हवा रेडिएटर की सतह से गर्मी को बहुत तेज़ी से हटाती है, जिससे तेल जल्दी ठंडा हो जाता है।
ONAF के फायदे
- उच्च दक्षता: पंखों का उपयोग करने से कूलिंग की गति और दक्षता बहुत बढ़ जाती है।
- लोड क्षमता: यह ट्रांसफार्मर को अधिक लोड पर काम करने की अनुमति देता है, क्योंकि यह अतिरिक्त गर्मी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है।
- ONAN से बेहतर: ONAF कूलिंग, ONAN की तुलना में ट्रांसफार्मर की रेटिंग को लगभग 30-50% तक बढ़ा सकती है।
इस वीडियो में आप ट्रांसफार्मर की ONAN, ONAF, और OFAF कूलिंग विधियों के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
OFAF ट्रांसफार्मर कूलिंग विधि बड़े और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए उपयोग की जाने वाली एक अत्यधिक कुशल विधि है। OFAF का मतलब ऑयल फोर्स्ड एयर फोर्स्ड है।
OFAF कूलिंग कैसे काम करती है?
यह विधि ONAN और ONAF विधियों से अलग है क्योंकि इसमें कूलिंग के लिए तेल और हवा दोनों को जबरदस्ती (forced) circulate किया जाता है।
- ऑयल फोर्स्ड (O-F): ट्रांसफार्मर के टैंक के बाहर एक पंप लगाया जाता है। यह पंप ट्रांसफार्मर के अंदर के गर्म तेल को रेडिएटर या हीट एक्सचेंजर की ओर धकेलता है। यह पंप प्राकृतिक संवहन पर निर्भर रहने के बजाय तेल के प्रवाह को तेज कर देता है, जिससे तेल अधिक तेज़ी से ठंडा होने के लिए रेडिएटर तक पहुँचता है।
- एयर फोर्स्ड (A-F): रेडिएटर पर बड़े पंखे (fans) लगाए जाते हैं। जब गर्म तेल रेडिएटर में पहुँचता है, तो ये पंखे उस पर तेज हवा का दबाव बनाते हैं। इस तेज हवा के कारण रेडिएटर की सतह से गर्मी बहुत तेज़ी से दूर होती है और तेल जल्दी ठंडा हो जाता है। ठंडा तेल फिर से पंप के माध्यम से ट्रांसफार्मर के टैंक में वापस चला जाता है, जहाँ वह फिर से गर्म होता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
OFAF के फायदे
- उच्च दक्षता: यह विधि बहुत ही प्रभावी कूलिंग प्रदान करती है, जिससे ट्रांसफार्मर को अपनी उच्चतम रेटिंग पर काम करने में मदद मिलती है।
- उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर: यह विधि विशेष रूप से पावर सबस्टेशन और जेनरेटिंग स्टेशनों में उपयोग होने वाले बहुत बड़े ट्रांसफार्मर के लिए उपयुक्त है।
- कम जगह: यह विधि उच्च दक्षता के कारण कम जगह में ही अधिक गर्मी को dissipate कर सकती है।
ट्रांसफार्मर की OFWF शीतलन विधि, जिसे ऑयल फोर्स्ड वाटर फोर्स्ड कहा जाता है, बहुत बड़े ट्रांसफार्मर के लिए सबसे कुशल कूलिंग तरीकों में से एक है। इस विधि में, तेल और पानी दोनों को पंपों के माध्यम से जबरदस्ती सर्कुलेट किया जाता है।
OFWF कैसे काम करती है?
- ऑयल फोर्स्ड (O-F): एक पंप ट्रांसफार्मर के अंदर के गर्म तेल को खींचता है और उसे एक हीट एक्सचेंजर (heat exchanger) की ओर धकेलता है। यह पंप प्राकृतिक संवहन पर निर्भर रहने के बजाय तेल के प्रवाह को बहुत तेज कर देता है।
- वाटर फोर्स्ड (W-F): हीट एक्सचेंजर में, एक और पंप ठंडे पानी को सर्कुलेट करता है। यह पानी हीट एक्सचेंजर के पाइपों से गुजरता है, जिससे यह गर्म तेल की गर्मी को अवशोषित कर लेता है। गर्म पानी को फिर कूलिंग टावर या किसी अन्य स्रोत में भेजा जाता है ताकि वह ठंडा हो सके।
यह विधि बहुत प्रभावी होती है क्योंकि पानी की ऊष्मा अवशोषित करने की क्षमता हवा से कहीं अधिक होती है। इसीलिए, OFWF कूलिंग बहुत बड़े ट्रांसफार्मर में उपयोग की जाती है जहाँ बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है, जैसे कि जलविद्युत संयंत्रों में।
शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर (Dry-Type Transformers) में तेल का उपयोग नहीं होता, इसलिए ये ट्रांसफार्मर अपनी गर्मी को कम करने के लिए केवल हवा पर निर्भर करते हैं। इनकी मुख्य शीतलन विधियाँ दो प्रकार की होती हैं:
1. प्राकृतिक वायु शीतलन (Air Natural - AN)
यह शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर के लिए सबसे सरल और सबसे आम विधि है।
- कार्यविधि: इस विधि में, ट्रांसफार्मर से उत्पन्न होने वाली गर्मी प्राकृतिक रूप से आसपास की हवा में फैल जाती है। ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग गर्म होने पर, उनके चारों ओर की हवा भी गर्म हो जाती है। चूंकि गर्म हवा हल्की होती है, वह ऊपर उठती है और उसकी जगह ठंडी हवा नीचे से आती है। इस प्राकृतिक संवहन (natural convection) के कारण गर्मी लगातार ट्रांसफार्मर से दूर होती रहती है।
- उपयोग: यह विधि आमतौर पर कम क्षमता वाले (लगभग 500 kVA तक) ट्रांसफार्मर में उपयोग की जाती है जहाँ उत्पन्न होने वाली गर्मी की मात्रा कम होती है।
2. बलपूर्वक वायु शीतलन (Air Forced - AF)
जब ट्रांसफार्मर पर भार (load) बढ़ता है या यह अधिक क्षमता का होता है, तो प्राकृतिक वायु शीतलन पर्याप्त नहीं होती है। ऐसे में यह विधि उपयोग की जाती है।
- कार्यविधि: इस विधि में, ट्रांसफार्मर के चारों ओर या विशेष रूप से वाइंडिंग के पास पंखे (fans) लगाए जाते हैं। ये पंखे जबरदस्ती हवा को ट्रांसफार्मर के ऊपर से प्रवाहित करते हैं। यह तेज हवा गर्मी को बहुत तेज़ी से वाइंडिंग से दूर करती है, जिससे ट्रांसफार्मर अधिक कुशल और ठंडे रहते हैं।
- उपयोग: यह विधि मध्यम और उच्च क्षमता वाले शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर में उपयोग की जाती है, खासकर औद्योगिक और वाणिज्यिक सेटिंग्स में जहाँ उच्च भार क्षमता की आवश्यकता होती है।
ट्रांसफार्मर कूलिंग में तेल का मुख्य कार्य दोहरी भूमिका निभाना है:
1. शीतलन, और
2. विद्युत रोधन (इंसुलेशन)।
1. शीतलन (Cooling)
जब ट्रांसफार्मर काम करता है, तो उसके कोर और वाइंडिंग में विद्युत प्रतिरोध के कारण गर्मी उत्पन्न होती है। तेल इस गर्मी को अवशोषित करता है और प्राकृतिक संवहन (natural convection) या पंपों के माध्यम से इसे ट्रांसफार्मर के रेडिएटर तक ले जाता है। रेडिएटर में, तेल की गर्मी बाहरी हवा या पानी में फैल जाती है, जिससे तेल ठंडा हो जाता है और फिर से ट्रांसफार्मर के अंदर वापस चला जाता है। यह प्रक्रिया ट्रांसफार्मर को ज़्यादा गरम होने से बचाती है।
2. विद्युत रोधन (Electrical Insulation)
तेल एक उत्कृष्ट विद्युत रोधक (electrical insulator) के रूप में भी काम करता है। यह ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग और कोर के बीच किसी भी शॉर्ट सर्किट को रोकता है। तेल की उच्च ढांकता हुआ शक्ति (dielectric strength) यह सुनिश्चित करती है कि उच्च वोल्टेज के बावजूद भी विद्युत प्रवाह केवल निर्धारित रास्तों से ही गुजरे, जिससे ट्रांसफार्मर की सुरक्षा और दक्षता बनी रहती है।
इसके अलावा,
ट्रांसफार्मर तेल नमी और अशुद्धियों को दूर रखकर ट्रांसफार्मर के घटकों को जंग लगने से भी बचाता है।
ट्रांसफार्मर कूलिंग में रेडिएटर फिन्स का मुख्य कार्य ट्रांसफार्मर के तेल की गर्मी को वातावरण में प्रभावी ढंग से फैलाना है।
रेडिएटर फिन्स, जो ट्रांसफार्मर की मुख्य टंकी से जुड़े हुए होते हैं, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
1. सतह का क्षेत्रफल बढ़ाना (Increase Surface Area)
फिन्स, ट्रांसफार्मर के रेडिएटर की कुल सतह का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं। ज़्यादा सतह का मतलब है कि गर्म तेल और बाहरी ठंडी हवा के बीच गर्मी के आदान-प्रदान के लिए अधिक जगह मिलती है। यह गर्मी को अधिक तेजी से फैलाता है।
2. गर्मी को फैलाना (Heat Dissipation)
गर्म तेल, जो ट्रांसफार्मर के अंदर से आता है, इन फिन्स से होकर गुजरता है। फिन्स की बड़ी सतह के संपर्क में आने पर, तेल की गर्मी प्राकृतिक संवहन (natural convection) या पंखों (fans) के माध्यम से बाहरी हवा में चली जाती है। ठंडी हवा फिन्स के संपर्क में आकर गर्म हो जाती है और ऊपर उठ जाती है, जबकि फिन्स में मौजूद तेल ठंडा होकर ट्रांसफार्मर में वापस चला जाता है।
यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे ट्रांसफार्मर का तापमान एक सुरक्षित सीमा के अंदर बना रहता है। इस तरह, रेडिएटर फिन्स ट्रांसफार्मर की दक्षता और जीवनकाल को बढ़ाने में मदद करते हैं।
ONAF (ऑयल नेचुरल एयर फोर्स्ड) कूल्ड ट्रांसफॉर्मर में पंखों का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि ट्रांसफार्मर के रेडिएटर फिन्स को जबरदस्ती हवा देकर ठंडा किया जा सके। यह पंखे ट्रांसफार्मर को ज़्यादा लोड पर चलाने की अनुमति देते हैं।
- O (Oil): तेल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में होता है।
- N (Natural): ट्रांसफार्मर के अंदर तेल का बहाव स्वाभाविक रूप से संवहन (natural convection) द्वारा होता है।
- A (Air): गर्मी को वातावरण में हवा के माध्यम से फैलाया जाता है।
- F (Forced): हवा का प्रवाह पंखों द्वारा जबरदस्ती (forced) किया जाता है।
पंखों का कार्य और लाभ
- तेजी से कूलिंग: पंखे रेडिएटर फिन्स पर हवा का एक तेज प्रवाह बनाते हैं। यह तेज हवा प्राकृतिक हवा की तुलना में अधिक कुशलता से गर्मी को फिन्स से दूर ले जाती है।
- क्षमता बढ़ाना: जब ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ता है, तो अधिक गर्मी उत्पन्न होती है। पंखे इस अतिरिक्त गर्मी को तेजी से फैलाकर ट्रांसफार्मर को ज़्यादा गरम होने से बचाते हैं, जिससे ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक लोड पर भी सुरक्षित रूप से काम कर पाता है।
- ONAN से बेहतर: ONAF कूलिंग, ONAN (ऑयल नेचुरल एयर नेचुरल) कूलिंग से अधिक प्रभावी है, क्योंकि इसमें पंखों का उपयोग करके गर्मी फैलाने की दर को बढ़ाया जाता है, जबकि ONAN में केवल प्राकृतिक हवा पर निर्भर रहा जाता है।
सरल शब्दों में,
पंखे ट्रांसफार्मर को एक 'बूस्ट' देते हैं, जिससे यह अधिक गर्मी को नियंत्रित कर सके और अपनी अधिकतम क्षमता पर कुशलता से काम कर सके।
प्राकृतिक वायु (Air Natural - AN) और बलपूर्वक वायु (Air Forced - AF) शीतलन के बीच का मुख्य अंतर हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने के तरीके में है।
1. प्राकृतिक वायु शीतलन (AN)
- कार्यविधि: इस विधि में, ट्रांसफार्मर से गर्मी हटाने के लिए हवा के प्राकृतिक संवहन (natural convection) पर निर्भर रहा जाता है। जब ट्रांसफार्मर गर्म होता है, तो उसके आसपास की हवा भी गर्म होकर हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। इसकी जगह ठंडी और भारी हवा नीचे से आती है। इस तरह, हवा का एक प्राकृतिक चक्र बनता है जो गर्मी को धीरे-धीरे दूर करता है।
- उपयोग: यह विधि कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए पर्याप्त होती है क्योंकि इनमें उत्पन्न होने वाली गर्मी की मात्रा कम होती है। यह शांत और कम रखरखाव वाली होती है।
2. बलपूर्वक वायु शीतलन (AF)
- कार्यविधि: इस विधि में, हवा को जबरदस्ती ट्रांसफार्मर के ऊपर से प्रवाहित करने के लिए पंखों (fans) या ब्लोअर का उपयोग किया जाता है। ये पंखे गर्मी को प्राकृतिक संवहन की तुलना में बहुत तेजी से हटाते हैं।
- उपयोग: यह विधि मध्यम से उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए आवश्यक है, जहाँ प्राकृतिक शीतलन पर्याप्त नहीं होती है। यह ट्रांसफार्मर को अधिक लोड पर काम करने की अनुमति देती है और इसकी दक्षता बढ़ाती है।
संक्षेप में,
प्राकृतिक वायु धीमी और कम कुशल होती है, जबकि बलपूर्वक वायु तेज और अधिक कुशल होती है, जिससे ट्रांसफार्मर को उच्च प्रदर्शन पर चलाने में मदद मिलती है।
ONAN और ONAF शीतलन विधियों की दक्षता की तुलना नीचे दी गई है:
दोनों ही विधियों में ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग को ठंडा रखने के लिए तेल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हवा के प्रवाह को संभालने का तरीका अलग-अलग होता है, जिससे उनकी दक्षता में अंतर आता है।
ONAN (Oil Natural, Air Natural)
ONAN शीतलन विधि में, तेल और हवा दोनों का प्रवाह प्राकृतिक संवहन (natural convection) द्वारा होता है।
- तेल: गर्म तेल ऊपर उठता है और ठंडा तेल नीचे जाता है।
- हवा: रेडिएटर फिन्स के आसपास की गर्म हवा ऊपर उठती है और उसकी जगह ठंडी हवा ले लेती है।
यह विधि कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए पर्याप्त होती है और इसका रखरखाव सरल होता है। हालाँकि, इसकी दक्षता कम होती है क्योंकि गर्मी को फैलाने की प्रक्रिया धीमी होती है।
ONAF (Oil Natural, Air Forced)
ONAF शीतलन विधि में, तेल का प्रवाह तो प्राकृतिक होता है, लेकिन हवा का प्रवाह बलपूर्वक (forced) होता है।
तेल: ONAN की तरह ही, गर्म तेल ऊपर जाता है और ठंडा तेल नीचे आता है।
हवा: रेडिएटर फिन्स पर पंखे (fans) लगाए जाते हैं जो जबरदस्ती हवा का प्रवाह करके गर्मी को तेजी से हटाते हैं।
यह विधि अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए बहुत प्रभावी होती है। पंखे लगाने से गर्मी फैलने की दर बहुत बढ़ जाती है, जिससे ट्रांसफार्मर को ज़्यादा लोड पर भी सुरक्षित रूप से चलाया जा सकता है।
दक्षता की तुलना
ONAF की दक्षता ONAN से काफी बेहतर होती है क्योंकि:
- कूलिंग दर: पंखों का उपयोग करने से गर्मी फैलने की दर बढ़ जाती है।
- लोड क्षमता: ONAF विधि ट्रांसफार्मर को अपनी क्षमता से 1.5 से 2 गुना अधिक लोड पर काम करने की अनुमति देती है, जबकि ONAN में यह संभव नहीं होता।
- नियंत्रण: ONAF प्रणाली में पंखों को ट्रांसफार्मर के तापमान के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त कूलिंग मिल जाती है।
बड़े पावर ट्रांसफार्मर में जबरन जल शीतलन (OFWF) का उपयोग इसकी अत्यधिक दक्षता के कारण किया जाता है। OFWF का मतलब ऑयल फोर्स्ड वाटर फोर्स्ड है। यह विधि उन ट्रांसफार्मर के लिए सबसे उपयुक्त है जो सैकड़ों मेगावाट (MVA) बिजली का प्रबंधन करते हैं और बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं।
यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं कि क्यों OFWF का उपयोग बड़े पावर ट्रांसफार्मर में किया जाता है:
1. उच्च ऊष्मा स्थानांतरण दर
पानी में हवा की तुलना में गर्मी को अवशोषित करने और स्थानांतरित करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। इसलिए, OFWF प्रणाली में पानी का उपयोग करके ट्रांसफार्मर से उत्पन्न होने वाली भारी मात्रा में गर्मी को बहुत प्रभावी ढंग से और जल्दी से हटाया जा सकता है।
2. उच्च दक्षता
इस विधि में, तेल और पानी दोनों को पंपों के माध्यम से जबरदस्ती सर्कुलेट किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि गर्मी को नियंत्रित और निर्देशित तरीके से हटाया जाए, जिससे ट्रांसफार्मर को अपनी उच्चतम रेटिंग पर लगातार काम करने की अनुमति मिलती है।
3. कम जगह
समान कूलिंग क्षमता के लिए, OFWF प्रणाली OFAF (ऑयल फोर्स्ड एयर फोर्स्ड) प्रणाली की तुलना में कम जगह घेरती है, क्योंकि पानी के हीट एक्सचेंजर हवा के रेडिएटर की तुलना में छोटे होते हैं।
यह विधि आमतौर पर बिजली संयंत्रों, खासकर जलविद्युत संयंत्रों में उपयोग की जाती है, जहाँ पानी की उपलब्धता आसानी से होती है।
ONAN कूलिंग विधि का उपयोग आमतौर पर कम से मध्यम क्षमता वाले (low to medium capacity) ट्रांसफार्मर में किया जाता है, जिनकी रेटिंग 500 kVA से 3000 kVA तक होती है।
कुछ मामलों में, इसका उपयोग 10 MVA तक के ट्रांसफार्मर में भी किया जा सकता है, लेकिन यह कम आम है। यह कूलिंग विधि सबसे सरल और सबसे किफायती होती है क्योंकि यह पूरी तरह से प्राकृतिक संवहन पर निर्भर करती है और इसमें कोई बाहरी पंखे या पंप नहीं लगे होते।
जब ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ता है और उससे उत्पन्न होने वाली गर्मी को प्राकृतिक तरीकों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता, तब ONAN की जगह ONAF या अन्य अधिक कुशल कूलिंग विधियों का उपयोग किया जाता है।
ONAF कूलिंग का उपयोग मध्यम से उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर में किया जाता है, जिनकी रेटिंग आमतौर पर 10 MVA और उससे अधिक होती है। कुछ मामलों में, इसका उपयोग 25 MVA या उससे भी अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर में किया जाता है।
यह कूलिंग विधि उन स्थितियों में सबसे उपयुक्त है जहाँ ट्रांसफार्मर पर अधिक और परिवर्तनशील (variable) लोड होता है।
ONAF (Oil Natural Air Forced) रेटिंग, ट्रांसफार्मर की मूल ONAN (Oil Natural Air Natural) रेटिंग से लगभग 25% से 33% अधिक होती है। उदाहरण के लिए, एक ट्रांसफार्मर जिसकी ONAN रेटिंग 20 MVA है, उसकी ONAF रेटिंग 25 MVA हो सकती है। यह पंखों की मदद से अतिरिक्त गर्मी को हटाकर ट्रांसफार्मर को उच्च क्षमता पर काम करने में सक्षम बनाता है।
OFAF (ऑयल फोर्स्ड एयर फोर्स्ड) और OFWF (ऑयल फोर्स्ड वाटर फोर्स्ड) कूलिंग का उपयोग बहुत उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर में किया जाता है, जिनकी रेटिंग आमतौर पर 60 MVA से अधिक होती है।
इन कूलिंग विधियों को बड़े पावर स्टेशनों, भारी औद्योगिक अनुप्रयोगों और उन सबस्टेशनों में पसंद किया जाता है जहाँ लगातार उच्च भार (high load) पर काम करना होता है।
OFAF कूलिंग: इसमें तेल को एक पंप द्वारा रेडिएटर में ज़बरदस्ती (forced) घुमाया जाता है और पंखों की मदद से हवा को भी ज़बरदस्ती रेडिएटर पर फेंका जाता है। यह विधि बहुत अधिक गर्मी को कम जगह में ही नियंत्रित करने में सक्षम होती है।OFWF कूलिंग: यह OFAF से भी अधिक कुशल होती है। इसमें तेल को पंप द्वारा हीट एक्सचेंजर में भेजा जाता है और पानी की मदद से तेल को ठंडा किया जाता है। यह विधि उन जगहों के लिए सबसे अच्छी है जहाँ पानी आसानी से उपलब्ध हो, जैसे कि थर्मल पावर प्लांट। यह हवा से ठंडा करने वाली विधि की तुलना में अधिक कॉम्पैक्ट और कुशल होती है।
संक्षेप में,
जैसे-जैसे ट्रांसफार्मर की रेटिंग बढ़ती है, कूलिंग के लिए प्राकृतिक तरीकों की जगह अधिक सक्रिय और शक्तिशाली तरीकों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए OFAF और OFWF का उपयोग किया जाता है।
वितरण (distribution) और पावर ट्रांसफार्मर (power transformers) के लिए शीतलन विधियाँ (cooling methods) मुख्य रूप से उनकी क्षमता (capacity) और भार (load) के कारण अलग-अलग होती हैं।
वितरण ट्रांसफार्मर (Distribution Transformers)
वितरण ट्रांसफार्मर आमतौर पर छोटी से मध्यम क्षमता (low to medium capacity) के होते हैं (जैसे 2.5 MVA तक)। ये ट्रांसफार्मर आवासीय और छोटे व्यावसायिक क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं, जहाँ भार कम और अपेक्षाकृत स्थिर (stable) होता है।
- ONAN (Oil Natural Air Natural): इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में, तेल प्राकृतिक संवहन (natural convection) के माध्यम से गर्मी को बाहर निकालता है और बाहरी हवा भी प्राकृतिक रूप से ही तेल को ठंडा करती है। इस विधि में कोई बाहरी उपकरण जैसे पंखे या पंप की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह लागत प्रभावी (cost-effective) और कम रखरखाव वाला होता है।
पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformers)
पावर ट्रांसफार्मर उच्च क्षमता (high capacity) के होते हैं (10 MVA से 1000 MVA तक)। ये ट्रांसफार्मर बिजली उत्पादन और संचरण (transmission) स्टेशनों में उपयोग किए जाते हैं, जहाँ भारी और लगातार भार होता है, जिससे बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए अधिक कुशल शीतलन प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
- ONAF (Oil Natural Air Forced): जब भार बढ़ जाता है, तो पंखे (fans) लगाए जाते हैं जो जबरदस्ती हवा को रेडिएटर पर फेंकते हैं, जिससे शीतलन क्षमता बढ़ती है।
- OFAF (Oil Forced Air Forced): अत्यधिक उच्च भार के लिए, तेल को भी पंप (pump) द्वारा ज़बरदस्ती घुमाया जाता है, और पंखे भी जबरदस्ती हवा फेंकते हैं। यह प्रणाली सबसे कुशल एयर-कूल्ड विधि है।
- OFWF (Oil Forced Water Forced): कुछ मामलों में, पानी का उपयोग हीट एक्सचेंजर (heat exchanger) के रूप में किया जाता है, जहाँ पंप की मदद से तेल को ठंडे पानी से ठंडा किया जाता है। यह विधि उन स्थितियों के लिए सबसे उपयुक्त है जहाँ बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है और पानी की उपलब्धता होती है।
मुख्य अंतर (Key Differences)
संक्षेप में,
वितरण ट्रांसफार्मर में कम गर्मी उत्पन्न होती है, जिसे प्राकृतिक शीतलन विधियों से प्रबंधित किया जा सकता है। जबकि, पावर ट्रांसफार्मर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है, जिसके लिए जबरदस्ती (forced) शीतलन प्रणालियों की आवश्यकता होती है ताकि यह कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से काम कर सके।
ट्रांसफार्मर में मुख्य रूप से दो प्रकार के नुकसान होते हैं जो ऊष्मा (heat) उत्पन्न करते हैं:
लौह या कोर हानियाँ (Iron or Core Losses): ये हानियाँ ट्रांसफार्मर के कोर में होती हैं और यह तब तक होती हैं जब तक ट्रांसफार्मर को बिजली मिलती रहती है, भले ही उस पर कोई लोड न हो। ये हानियाँ दो प्रकार की होती हैं:
हिस्टैरिसीस हानियाँ (Hysteresis Losses): यह हानि कोर के लगातार चुम्बकित (magnetized) और विचुम्बकित (demagnetized) होने के कारण होती है।
भँवर धारा हानियाँ (Eddy Current Losses): यह हानि कोर में प्रेरित भँवर धाराओं के कारण होती है। इन धाराओं के कारण ऊर्जा ऊष्मा के रूप में व्यर्थ हो जाती है। इस हानि को कम करने के लिए कोर को पतली चादरों (laminations) से बनाया जाता है।
ये हानियाँ स्थिर होती हैं और लोड पर निर्भर नहीं करतीं।
- ताम्र हानियाँ (Copper Losses): ये हानियाँ ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में होती हैं। जब वाइंडिंग से धारा (current) प्रवाहित होती है, तो तारों के प्रतिरोध (resistance) के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है। इन हानियों को I^2R हानियाँ भी कहा जाता है, जहाँ I धारा है और R प्रतिरोध है।
ये हानियाँ परिवर्तनीय होती हैं और ट्रांसफार्मर पर लोड के साथ बदलती रहती हैं। जब लोड बढ़ता है, तो धारा भी बढ़ती है, जिससे ये हानियाँ भी बढ़ जाती हैं।
ये दोनों प्रकार की हानियाँ विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदल देती हैं, जिससे ट्रांसफार्मर का तापमान बढ़ जाता है। ट्रांसफार्मर की दक्षता बनाए रखने और उसे नुकसान से बचाने के लिए इस ऊष्मा को नियंत्रित करना आवश्यक है।
ट्रांसफार्मर में तेल और वाइंडिंग के लिए स्वीकार्य तापमान वृद्धि, ट्रांसफार्मर के सुरक्षित संचालन और उसके जीवनकाल को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। ये सीमाएँ अंतर्राष्ट्रीय मानकों, जैसे IEC 60076 द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
तेल के लिए स्वीकार्य तापमान वृद्धि
- तेल-निमज्जित ट्रांसफार्मर में, टॉप ऑयल का तापमान परिवेश के तापमान से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए।
- ONAN/ONAF/OFAF कूलिंग के लिए: सामान्यतः, टॉप ऑयल का अधिकतम स्वीकार्य तापमान वृद्धि 55°C होता है।
- OFWF/ODWF कूलिंग के लिए: इन विधियों में, जहाँ पानी का उपयोग किया जाता है, अधिकतम स्वीकार्य तापमान वृद्धि 50°C होती है।
- आमतौर पर, ट्रांसफार्मर तेल का अधिकतम ऑपरेटिंग तापमान लगभग 85°C होता है। इस तापमान पर एक अलार्म सक्रिय हो सकता है, और यदि तापमान 95°C तक पहुँचता है, तो ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए उसे ट्रिप कर दिया जाता है।
वाइंडिंग के लिए स्वीकार्य तापमान वृद्धि
- वाइंडिंग का तापमान आमतौर पर तेल के तापमान से 10°C से 15°C अधिक होता है।
- क्लास 'A' इंसुलेशन वाले ट्रांसफार्मर (जो तेल-निमज्जित ट्रांसफार्मर में आम है): वाइंडिंग की औसत तापमान वृद्धि 65°C से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह परिवेश के तापमान से ऊपर का तापमान है।
- वाइंडिंग का सबसे गर्म हिस्सा जिसे हॉट-स्पॉट (hot-spot) कहा जाता है, उसका तापमान 98°C से अधिक नहीं होना चाहिए। यह बिंदु ट्रांसफार्मर के जीवनकाल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
इन तापमान सीमाओं का पालन करना आवश्यक है क्योंकि अत्यधिक गर्मी से ट्रांसफार्मर में उपयोग होने वाले इन्सुलेशन और तेल का जीवनकाल कम हो जाता है। प्रत्येक 8°C की तापमान वृद्धि से ट्रांसफार्मर का जीवनकाल लगभग आधा हो सकता है।
ट्रांसफार्मर के शीतलन में कंजर्वेटर टैंक की भूमिका सीधे तौर पर ट्रांसफार्मर को ठंडा करने की नहीं है, बल्कि यह अप्रत्यक्ष रूप से शीतलन प्रणाली की दक्षता और ट्रांसफार्मर के जीवनकाल को बनाए रखने में मदद करता है।
कंजर्वेटर टैंक एक सहायक टैंक होता है जो मुख्य ट्रांसफार्मर टैंक के ऊपर स्थापित होता है। इसका मुख्य कार्य ट्रांसफार्मर तेल के आयतन (volume) में होने वाले बदलावों को संभालना है।
1. तेल के विस्तार और संकुचन को नियंत्रित करना
जब ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ता है और वह गर्म होता है, तो तेल का आयतन बढ़ जाता है (विस्तार)। कंजर्वेटर टैंक अतिरिक्त तेल को समायोजित कर लेता है, जिससे मुख्य टैंक पर दबाव नहीं पड़ता। इसी तरह, जब ट्रांसफार्मर ठंडा होता है, तो तेल का आयतन कम हो जाता है (संकुचन), और कंजर्वेटर टैंक से तेल वापस मुख्य टैंक में भर जाता है।
2. नमी और हवा को रोकना
कंजर्वेटर टैंक, ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक को सीधे वायुमंडल के संपर्क में आने से रोकता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर गर्म तेल सीधे हवा के संपर्क में आता है, तो वह हवा से नमी (moisture) और ऑक्सीजन को अवशोषित कर सकता है। नमी और ऑक्सीजन तेल के ढांकता हुआ गुणों (dielectric properties) को कम कर देते हैं और ट्रांसफार्मर के इन्सुलेशन को नुकसान पहुँचाते हैं।
3. ब्रीदर के साथ कार्य
कंजर्वेटर टैंक के ऊपर एक ब्रीदर लगा होता है। ब्रीदर में सिलिका जेल होता है जो हवा से नमी को सोख लेता है। जब हवा टैंक के अंदर या बाहर जाती है, तो सिलिका जेल नमी को रोक लेती है, जिससे ट्रांसफार्मर के अंदर का तेल हमेशा सूखा और सुरक्षित रहता है।
संक्षेप में,
कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर के तेल की गुणवत्ता बनाए रखकर और तेल के आयतन में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करके, यह सुनिश्चित करता है कि शीतलन प्रणाली प्रभावी रूप से काम करे और ट्रांसफार्मर लंबे समय तक सुरक्षित रहे।
शीतलन विधि का ट्रांसफार्मर की दक्षता (efficiency) और जीवन (life) पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह ट्रांसफार्मर में उत्पन्न होने वाली ऊष्मा को नियंत्रित करती है।
दक्षता पर प्रभाव (Effect on Efficiency)
उच्च तापमान = कम दक्षता: ट्रांसफार्मर में होने वाले नुकसान (losses), जैसे कि ताम्र हानियाँ (copper losses), सीधे तौर पर तापमान से संबंधित होते हैं। जब ट्रांसफार्मर का तापमान बढ़ता है, तो वाइंडिंग का प्रतिरोध (resistance) भी बढ़ता है, जिससे ताम्र हानियाँ बढ़ जाती हैं।
- ठंडा रहना = अधिक दक्षता: एक कुशल शीतलन विधि, जैसे कि जबरन तेल और वायु परिसंचरण (OFAF), ट्रांसफार्मर को कम तापमान पर बनाए रखती है। कम तापमान का मतलब है कम प्रतिरोध और कम हानियाँ, जिसके परिणामस्वरूप ट्रांसफार्मर की दक्षता अधिक होती है।
- ऊर्जा की खपत: जबरन शीतलन विधियों (जैसे पंखे और पंप) को चलाने के लिए भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा खपत ट्रांसफार्मर की कुल दक्षता को थोड़ा कम कर सकती है, खासकर जब लोड कम हो। इसलिए, सही शीतलन विधि का चुनाव लोड और लागत के आधार पर किया जाता है।
जीवन पर प्रभाव (Effect on Life)
- इन्सुलेशन का जीवनकाल: ट्रांसफार्मर के अंदर उपयोग होने वाला इन्सुलेशन (जैसे पेपर और तेल) ऊष्मा के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। यदि तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तो इन्सुलेशन सामग्री तेजी से खराब हो जाती है।
- तापमान वृद्धि और जीवन: एक सामान्य नियम यह है कि प्रत्येक 8°C की तापमान वृद्धि से ट्रांसफार्मर का जीवनकाल लगभग आधा हो जाता है। इसलिए, एक कुशल शीतलन प्रणाली जो तापमान को नियंत्रित रखती है, ट्रांसफार्मर के जीवनकाल को काफी बढ़ा सकती है।
- तेल का ऑक्सीकरण: अत्यधिक तापमान से ट्रांसफार्मर तेल का ऑक्सीकरण (oxidation) भी तेजी से होता है, जिससे तेल की गुणवत्ता बिगड़ जाती है। खराब गुणवत्ता वाला तेल इन्सुलेशन को प्रभावी ढंग से ठंडा नहीं कर पाता, जिससे एक दुष्चक्र (vicious cycle) शुरू हो जाता है और ट्रांसफार्मर के विफल होने का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष यह है
कि एक प्रभावी शीतलन विधि ट्रांसफार्मर को उसके अधिकतम स्वीकार्य तापमान के भीतर रखती है, जिससे न केवल उसकी दक्षता बढ़ती है बल्कि उसके महत्वपूर्ण घटकों, विशेष रूप से इन्सुलेशन, के जीवनकाल को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
उच्च वोल्टेज ट्रांसफार्मर को ठंडा रखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि संचालन के दौरान इसमें बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है। यदि इस गर्मी को प्रभावी ढंग से खत्म नहीं किया जाता है, तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
गर्मी उत्पन्न होने के कारण
ट्रांसफार्मर में गर्मी मुख्य रूप से दो प्रकार के नुकसान (हानियों) के कारण उत्पन्न होती है:
- तांबे की हानि (Copper loss): यह ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में प्रवाहित होने वाले करंट के कारण होता है। जब भी वाइंडिंग से करंट गुजरता है, तो प्रतिरोध के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- लोहे की हानि (Iron loss): यह कोर में चुंबकीय फ्लक्स के कारण होता है। इसमें हिस्टैरिसीस (hysteresis) और एडी करंट (eddy current) हानियां शामिल हैं, जो कोर को गर्म करती हैं।
ठंडा करना क्यों आवश्यक है?
- इंसुलेशन (Insulation) की सुरक्षा: ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग पर इंसुलेशन सामग्री लगी होती है जो उच्च तापमान के प्रति संवेदनशील होती है। यदि तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तो इंसुलेशन कमजोर हो जाता है या टूट जाता है। इंसुलेशन के खराब होने से शॉर्ट-सर्किट और ट्रांसफार्मर के विफल होने का खतरा बढ़ जाता है।
- दक्षता बनाए रखना: ट्रांसफार्मर की दक्षता (efficiency) तब कम हो जाती है जब तापमान बढ़ता है। गर्मी के कारण होने वाली अतिरिक्त हानि से बिजली की बर्बादी होती है, जिससे ट्रांसफार्मर की कुल दक्षता प्रभावित होती है।
- जीवनकाल बढ़ाना: तापमान सीधे तौर पर ट्रांसफार्मर के जीवनकाल को प्रभावित करता है। अत्यधिक गर्मी इंसुलेशन और अन्य आंतरिक घटकों को तेजी से खराब करती है, जिससे ट्रांसफार्मर का जीवनकाल कम हो जाता है। प्रभावी शीतलन से ट्रांसफार्मर का जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है।
- सुरक्षित संचालन: ट्रांसफार्मर का तापमान एक महत्वपूर्ण तकनीकी पैरामीटर है। यदि तापमान एक स्वीकार्य सीमा से अधिक हो जाता है, तो यह दर्शाता है कि ट्रांसफार्मर में कोई आंतरिक खराबी हो सकती है, जैसे कि वाइंडिंग में शॉर्ट-सर्किट। पर्याप्त शीतलन सुरक्षित और स्थिर संचालन सुनिश्चित करता है।
शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर (Dry-type transformers) में मुख्य रूप से दो प्रकार की शीतलन विधियों का उपयोग किया जाता है, जो हवा पर आधारित होती हैं। इन ट्रांसफार्मर में किसी भी तरल पदार्थ (जैसे तेल) का उपयोग नहीं किया जाता है।
1. प्राकृतिक वायु शीतलन (Air Natural - AN)
इस विधि में, ट्रांसफार्मर में उत्पन्न गर्मी को प्राकृतिक रूप से आसपास की हवा द्वारा हटाया जाता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक संवहन (natural convection) पर आधारित है, जहाँ गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा उसकी जगह लेती है, जिससे ट्रांसफार्मर लगातार ठंडा होता रहता है।
- क्यों? यह विधि छोटे और कम क्षमता वाले (low-capacity) ट्रांसफार्मर के लिए आदर्श है। यह सरल है, इसे किसी अतिरिक्त उपकरण (जैसे पंखे) की आवश्यकता नहीं होती, और इसका रखरखाव भी आसान होता है। इसका उपयोग अक्सर इनडोर (indoor) अनुप्रयोगों में किया जाता है, जैसे कि इमारतों, अस्पतालों और डेटा केंद्रों में, जहाँ आग का खतरा कम करना महत्वपूर्ण होता है।
2. वायु बलात शीतलन (Air Force - AF)
इस विधि में, पंखे (fans) या ब्लोअर (blowers) का उपयोग करके ट्रांसफार्मर के चारों ओर हवा को जबरन प्रसारित (forced circulation) किया जाता है। यह प्राकृतिक संवहन की तुलना में गर्मी को अधिक प्रभावी ढंग से और तेजी से हटाता है।
- क्यों? यह विधि उन बड़े या मध्यम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है जिन्हें उच्च भार (high-load) परिस्थितियों में काम करना होता है। जब प्राकृतिक शीतलन पर्याप्त नहीं होता, तब वायु बलात शीतलन अतिरिक्त गर्मी को दूर करके ट्रांसफार्मर को सुरक्षित तापमान सीमा के भीतर रखता है। यह विधि ट्रांसफार्मर की दक्षता और लोड क्षमता को बढ़ाती है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त ऊर्जा की खपत होती है और यह शोर भी करता है।
इन विधियों का उपयोग क्यों किया जाता है?
सुरक्षा: शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर में तेल का उपयोग नहीं होता है, जिससे आग लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। यह उन्हें उन स्थानों के लिए सुरक्षित बनाता है जहाँ ज्वलनशील पदार्थ या लोग मौजूद होते हैं।
रखरखाव: इनमें तेल की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए तेल के रिसाव (leakage), फिल्टरेशन या नियमित परीक्षण की कोई समस्या नहीं होती है, जिससे रखरखाव लागत और प्रयास कम हो जाते हैं।
पर्यावरण: ये ट्रांसफार्मर पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, क्योंकि इनमें किसी भी तरल पदार्थ का उपयोग नहीं होता जो रिसाव होने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है।
बड़े ट्रांसफार्मरों में तेल निर्देशित बलपूर्वक शीतलन (Oil Forced Air Forced - OFAF) या जल निर्देशित बलपूर्वक शीतलन (Oil Forced Water Forced - OFWF) का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि वे बहुत अधिक ऊर्जा से काम करते हैं, जिससे भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न होती है।
प्राकृतिक शीतलन विधियां (natural cooling methods) इस अतिरिक्त गर्मी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं होती हैं।
मुख्य कारण
- उच्च ऊष्मा उत्पादन: बड़े ट्रांसफार्मर उच्च वोल्टेज और करंट पर काम करते हैं, जिसके कारण तांबे और लोहे की हानियाँ (losses) बहुत अधिक होती हैं। ये हानियां भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न करती हैं, जिसे प्राकृतिक परिसंचरण (circulation) से नियंत्रित करना संभव नहीं होता।
- तेजी से ऊष्मा का स्थानांतरण: बलपूर्वक शीतलन प्रणाली में, पंप ट्रांसफार्मर के भीतर तेल को जबरन परिसंचरित (circulate) करते हैं, जिससे यह कोर और वाइंडिंग से गर्मी को तेजी से अवशोषित करता है। इसके बाद यह गर्म तेल रेडिएटर (radiators) या हीट एक्सचेंजर (heat exchangers) तक पहुँचता है।
- बढ़ी हुई दक्षता: रेडिएटर में लगे पंखे (fans) या हीट एक्सचेंजर में पानी का प्रवाह गर्मी को वातावरण में बहुत तेजी से बाहर निकालता है। यह प्रक्रिया ट्रांसफार्मर को सुरक्षित तापमान पर बनाए रखती है, जिससे इसकी दक्षता (efficiency) और जीवनकाल (lifespan) बढ़ता है।
सरल शब्दों में,
यह प्रणाली एक शक्तिशाली "पंप" और "पंखे/कूलर" की तरह काम करती है ताकि ट्रांसफार्मर के सबसे गर्म हिस्सों से गर्मी को तुरंत हटाकर उसे सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करने दिया जा सके।
ONAF (Oil Natural Air Forced) की तुलना में OFAF (Oil Forced Air Forced) का उपयोग करने का मुख्य लाभ यह है कि OFAF ट्रांसफार्मर के भीतर तेल के परिसंचरण को मजबूर करके गर्मी को बहुत अधिक प्रभावी ढंग से हटाता है।
ONAF में,
तेल प्राकृतिक संवहन (natural convection) के माध्यम से वाइंडिंग के चारों ओर घूमता है, जिसका अर्थ है कि गर्म तेल ऊपर उठता है और ठंडा तेल नीचे जाता है। पंखे केवल रेडिएटर के चारों ओर हवा के प्रवाह को बढ़ाकर शीतलन को बढ़ाते हैं। यह एक धीमी प्रक्रिया है और उच्च भार वाले बड़े ट्रांसफार्मर के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है।
इसके विपरीत,
OFAF में एक पंप का उपयोग किया जाता है जो तेल को जबरन ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग से होते हुए रेडिएटर तक ले जाता है। यह जबरन परिसंचरण गर्मी को अधिक तेज़ी से और कुशलता से हटाता है, जिससे ट्रांसफार्मर को उच्च भार (high loads) पर भी सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सकता है।
- मुख्य लाभ: OFAF ट्रांसफार्मर की भार क्षमता (load capacity) को काफी बढ़ा देता है। यह इसे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने की स्थिति में भी स्थिर तापमान बनाए रखने की अनुमति देता है, जिससे इंसुलेशन की सुरक्षा होती है और ट्रांसफार्मर का जीवनकाल बढ़ जाता है।
विद्युत संयंत्र ट्रांसफार्मर के लिए तेल निर्देशित जल बलात (Oil Forced Water Forced - OFWF) शीतलन विधि को सबसे विश्वसनीय माना जाता है। यह विधि सबसे बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है और इसमें निम्नलिखित कारण से उच्च विश्वसनीयता होती है:
उच्च दक्षता
OFWF प्रणाली में, एक पंप तेल को ट्रांसफार्मर के भीतर से जबरन घुमाता है, जो वाइंडिंग और कोर से गर्मी को अवशोषित करता है। इसके बाद, इस गर्म तेल को एक हीट एक्सचेंजर से गुजारा जाता है जहाँ ठंडा पानी भी जबरन परिसंचरित होता है। पानी की उच्च तापीय चालकता (thermal conductivity) के कारण यह गर्मी को हवा की तुलना में बहुत तेजी और प्रभावी ढंग से दूर करता है।
स्थिरता और भार प्रबंधन
यह प्रणाली ट्रांसफार्मर को अत्यधिक भार (overload) की स्थिति में भी तापमान को नियंत्रित रखने में सक्षम बनाती है। बिजली संयंत्रों में, जहाँ ट्रांसफार्मर को लगातार अधिकतम क्षमता पर काम करना होता है, OFWF विधि यह सुनिश्चित करती है कि तापमान में वृद्धि नियंत्रित रहे, जिससे ट्रांसफार्मर की इंसुलेशन सामग्री सुरक्षित रहती है और उसका जीवनकाल बढ़ता है।
अंतरिक्ष दक्षता
पानी आधारित शीतलन प्रणाली हवा आधारित प्रणालियों (जैसे ONAF या OFAF) की तुलना में बहुत अधिक कॉम्पैक्ट (compact) होती है। क्योंकि पानी हवा की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी शीतलक है, इसलिए इसमें बड़े-बड़े रेडिएटर या पंखों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह बिजली संयंत्रों के लिए एक विश्वसनीय और कुशल विकल्प बन जाती है।
वितरण ट्रांसफार्मर (distribution transformers) में आमतौर पर जल शीतलन का उपयोग नहीं किया जाता है। अधिकांश वितरण ट्रांसफार्मर छोटे या मध्यम आकार के होते हैं और इनमें तेल-डूबे हुए प्राकृतिक वायु शीतलन (ONAN) या तेल-डूबे हुए बलपूर्वक वायु शीतलन (ONAF) जैसी सरल और कम लागत वाली विधियों का उपयोग किया जाता है।
जल शीतलन, विशेष रूप से तेल निर्देशित जल बलात (Oil Forced Water Forced - OFWF), का उपयोग मुख्य रूप से बहुत बड़े और उच्च-क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों में किया जाता है, जैसे कि बिजली संयंत्रों या बड़े औद्योगिक उप-केंद्रों (industrial substations) में।
वितरण ट्रांसफार्मर में जल शीतलन का उपयोग न करने के मुख्य कारण:
- जटिलता और लागत: जल शीतलन प्रणाली को एक जटिल पंप और पाइप नेटवर्क की आवश्यकता होती है, जिससे इसकी स्थापना और रखरखाव की लागत बहुत बढ़ जाती है।
- पानी के रिसाव का खतरा: जल शीतलन प्रणाली में पानी के रिसाव का जोखिम होता है। यदि पानी ट्रांसफार्मर के भीतर तेल के साथ मिल जाता है, तो यह इंसुलेशन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है।
- रखरखाव की आवश्यकता: जल शीतलन प्रणाली को लगातार पानी की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव की आवश्यकता होती है ताकि जंग और पाइपों के बंद होने से बचा जा सके।
संक्षेप में,
वितरण ट्रांसफार्मर में जल शीतलन का उपयोग इसलिए नहीं किया जाता है क्योंकि यह अनावश्यक रूप से जटिल, महंगा और जोखिम भरा होता है, जबकि वायु-आधारित शीतलन विधियां उनकी आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त और अधिक विश्वसनीय होती हैं।
तेल प्राकृतिक (Oil Natural - ONAN) और तेल मजबूर (Oil Forced - ONAF/OFAF) शीतलन के बीच मुख्य अंतर गर्मी को दूर करने के तरीके में है।
तेल प्राकृतिक (ONAN)
इस विधि में, तेल और हवा दोनों का परिसंचरण प्राकृतिक संवहन (natural convection) पर निर्भर करता है।
- तेल: ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग से गर्म होने पर तेल ऊपर उठता है और ठंडा होने पर रेडिएटर के माध्यम से नीचे जाता है।
- हवा: रेडिएटर से गर्मी प्राकृतिक रूप से आसपास की ठंडी हवा में स्थानांतरित होती है।
यह विधि कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए पर्याप्त होती है क्योंकि वे कम गर्मी उत्पन्न करते हैं। यह सरल, शांत और कम रखरखाव वाली होती है क्योंकि इसमें कोई यांत्रिक पुर्जे नहीं होते।
तेल मजबूर (OFAF)
यह विधि बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है जो बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं। यह प्राकृतिक शीतलन की सीमाओं को दूर करती है।
- तेल: इस विधि में, पंप का उपयोग करके तेल को जबरन कोर और वाइंडिंग से रेडिएटर तक पहुंचाया जाता है, जिससे गर्मी का हस्तांतरण बहुत तेज हो जाता है।
- हवा: रेडिएटरों पर लगे पंखे जबरन हवा को रेडिएटरों से गुजारते हैं, जिससे गर्मी का अपव्यय (dissipation) बढ़ जाता है।
यह विधि ट्रांसफार्मर की लोड क्षमता को काफी बढ़ा देती है, जिससे वह अधिक भार पर भी सुरक्षित रूप से काम कर सकता है। हालांकि, इसमें पंखे और पंप के कारण शोर होता है और अधिक ऊर्जा की खपत होती है।
वायु प्राकृतिक (Air Natural - AN) और वायु बलपूर्वक (Air Forced - AF) शीतलन के बीच मुख्य अंतर हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने के तरीके में है।
वायु प्राकृतिक (AN)
इस विधि में, ट्रांसफार्मर में उत्पन्न गर्मी को प्राकृतिक रूप से हवा के संवहन (convection) द्वारा हटाया जाता है।
- हवा का प्रवाह: गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा उसकी जगह लेती है, जिससे एक प्राकृतिक परिसंचरण बनता है।
- उपयोग: यह विधि आमतौर पर छोटे, शुष्क-प्रकार के ट्रांसफार्मरों में उपयोग की जाती है जो कम गर्मी उत्पन्न करते हैं।
- लाभ: यह सरल, शांत और कम रखरखाव वाली होती है क्योंकि इसमें किसी भी यांत्रिक भाग (जैसे पंखे) का उपयोग नहीं होता है।
वायु बलपूर्वक (AF)
इस विधि में, पंखों या ब्लोअर का उपयोग करके हवा को जबरन ट्रांसफार्मर के चारों ओर प्रसारित किया जाता है।
- हवा का प्रवाह: पंखे हवा को ट्रांसफार्मर के गर्म सतहों पर धकेलते हैं, जिससे गर्मी का हस्तांतरण बहुत तेज हो जाता है।
- उपयोग: यह विधि बड़े, शुष्क-प्रकार के ट्रांसफार्मरों में उपयोग की जाती है जिन्हें उच्च भार पर काम करना होता है।
- लाभ: यह प्राकृतिक शीतलन की तुलना में गर्मी को बहुत अधिक प्रभावी ढंग से हटाती है, जिससे ट्रांसफार्मर की लोड क्षमता बढ़ जाती है। हालांकि, इसमें अधिक ऊर्जा की खपत होती है और यह शोर भी करता है।
संक्षेप में,
AN प्राकृतिक परिसंचरण पर निर्भर करता है जबकि AF यांत्रिक साधनों (पंखों) का उपयोग करके शीतलन को बढ़ाता है।
छोटे ट्रांसफार्मरों के लिए ONAN (Oil Natural Air Natural) और बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए ONAF (Oil Natural Air Forced) को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह उनकी दक्षता, लागत और परिचालन आवश्यकताओं के अनुकूल होता है।
छोटे ट्रांसफार्मर के लिए ONAN को प्राथमिकता
छोटे ट्रांसफार्मर, जैसे कि वितरण ट्रांसफार्मर, कम गर्मी उत्पन्न करते हैं। इस गर्मी को प्राकृतिक संवहन (natural convection) द्वारा आसानी से हटाया जा सकता है।
- सरल और विश्वसनीय: ONAN विधि में कोई यांत्रिक पुर्जे (जैसे पंखे या पंप) नहीं होते, जिससे विफलता का जोखिम कम होता है।
- लागत-प्रभावी: यह विधि ONAF की तुलना में निर्माण और रखरखाव में सस्ती होती है।
- शोर रहित संचालन: बिना पंखों के, यह शांत वातावरण के लिए उपयुक्त होती है।
बड़े ट्रांसफार्मर के लिए ONAF को प्राथमिकता
बड़े ट्रांसफार्मर, जैसे कि पावर ट्रांसफार्मर, उच्च भार के कारण बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं। इस अतिरिक्त गर्मी को हटाने के लिए प्राकृतिक शीतलन पर्याप्त नहीं होता है।
- उच्च दक्षता: ONAF विधि में पंखे जबरन हवा को रेडिएटरों पर प्रवाहित करते हैं, जिससे गर्मी बहुत तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से हटती है।
- बढ़ी हुई लोड क्षमता: बेहतर शीतलन के कारण, ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रूप से अधिक भार पर चलाया जा सकता है, जो बिजली संयंत्रों और औद्योगिक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
- अंतरिक्ष दक्षता: जबरन शीतलन के कारण कम रेडिएटरों की आवश्यकता होती है, जिससे ट्रांसफार्मर का समग्र आकार छोटा हो सकता है।
सबसे बेहतर अधिभार (overload) क्षमता मजबूर शीतलन (forced cooling) विधियाँ प्रदान करती हैं, जैसे कि ONAF (Oil Natural Air Forced) और OFAF (Oil Forced Air Forced)।
यह क्षमता इसलिए बेहतर होती है क्योंकि ये विधियाँ पारंपरिक प्राकृतिक शीतलन (ONAN) की तुलना में अधिक तेजी और दक्षता से गर्मी को हटाती हैं। जब ट्रांसफार्मर पर भार (load) बढ़ता है, तो उसमें उत्पन्न होने वाली गर्मी भी बढ़ जाती है।
- ONAN जैसी प्राकृतिक विधियाँ सीमित दर पर गर्मी हटा सकती हैं, जिससे एक निश्चित भार के बाद ट्रांसफार्मर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुँच सकता है।
- ONAF या OFAF में, पंखे और/या पंप का उपयोग करके तेल और हवा का परिसंचरण तेज कर दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त गर्मी को तुरंत दूर किया जा सकता है।
यह त्वरित गर्मी अपव्यय ट्रांसफार्मर को अपनी रेटेड क्षमता से अधिक पर काम करने की अनुमति देता है, जिससे उसे शॉर्ट-टर्म ओवरलोड स्थितियों में भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए, मजबूर शीतलन विधियों को उच्च अधिभार क्षमता के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
सबसे अधिक रखरखाव लागत मजबूर शीतलन प्रणाली (forced cooling system) की होती है, और इसका कारण इसमें उपयोग होने वाले यांत्रिक पुर्जे हैं।
अधिक रखरखाव लागत के कारण
- यांत्रिक पुर्जे: मजबूर शीतलन प्रणालियों, जैसे कि ONAF और OFAF में, पंखे और पंप जैसे अतिरिक्त यांत्रिक घटक होते हैं। इन पुर्जों को सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, चिकनाई और संभावित मरम्मत की आवश्यकता होती है।
- बिजली की खपत: पंखे और पंप चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे ट्रांसफार्मर की परिचालन लागत बढ़ जाती है।
- रिसाव का जोखिम: OFWF जैसी जल-आधारित प्रणालियों में, पाइप और हीट एक्सचेंजर में रिसाव का जोखिम होता है, जिसके लिए नियमित जांच और मरम्मत की आवश्यकता होती है ताकि पानी के रिसाव से ट्रांसफार्मर को नुकसान न पहुँचे।
इसके विपरीत,
प्राकृतिक शीतलन प्रणाली (ONAN) में कोई यांत्रिक पुर्जे नहीं होते हैं, जिससे यह बहुत ही सरल और कम रखरखाव वाली होती है।
सबसे अधिक ऊर्जा कुशल शीतलन प्रणाली प्राकृतिक शीतलन (natural cooling) प्रणाली है, विशेष रूप से ONAN (Oil Natural Air Natural)।
इसका कारण बहुत सरल है: ये प्रणालियां किसी भी अतिरिक्त ऊर्जा का उपभोग नहीं करती हैं।
ONAN की ऊर्जा दक्षता
- कोई अतिरिक्त ऊर्जा खपत नहीं: ONAN प्रणाली में, तेल और हवा दोनों प्राकृतिक संवहन (natural convection) के माध्यम से चलते हैं। इस प्रक्रिया को चलाने के लिए किसी भी पंखे या पंप की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए कोई अतिरिक्त बिजली खर्च नहीं होती है।
- सरल डिजाइन: इसमें कोई यांत्रिक पुर्जे नहीं होते, जिससे यह सबसे सरल और सबसे विश्वसनीय शीतलन विधि बन जाती है।
मजबूर शीतलन प्रणालियों से तुलना
मजबूर शीतलन प्रणालियाँ, जैसे कि ONAF और OFAF, उच्च दक्षता के साथ गर्मी को हटाती हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता होती है।
- ONAF: पंखों को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है।
- OFAF: पंखों और तेल पंपों दोनों को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है।
- OFWF: पंप और हीट एक्सचेंजर में पानी के प्रवाह के लिए बिजली की आवश्यकता होती है।
इन मजबूर प्रणालियों को बड़े ट्रांसफार्मर के लिए उच्च भार क्षमता प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन वे स्वयं ऊर्जा का उपभोग करती हैं, जिससे उनकी कुल ऊर्जा दक्षता कम हो जाती है।
संक्षेप में,
हालांकि मजबूर शीतलन प्रणालियां बेहतर गर्मी अपव्यय प्रदान करती हैं, ONAN सबसे अधिक ऊर्जा कुशल है क्योंकि यह शून्य अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग करती है।
घर के अंदर के सबस्टेशनों (indoor substations) के लिए सबसे उपयुक्त शीतलन प्रणाली शुष्क-प्रकार (dry-type) ट्रांसफार्मर और वायु प्राकृतिक (AN) या वायु बलपूर्वक (AF) शीतलन है।
इसके कारण हैं:
- सुरक्षा: शुष्क-प्रकार के ट्रांसफार्मर में तेल का उपयोग नहीं होता है, जिससे आग या विस्फोट का खतरा कम हो जाता है। इनडोर स्थानों में, जहाँ लोग और अन्य उपकरण मौजूद होते हैं, यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा लाभ है।
- कम रखरखाव: शुष्क-प्रकार के ट्रांसफार्मरों को तेल-आधारित ट्रांसफार्मरों की तुलना में कम रखरखाव की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसमें तेल की जांच या बदलाव की जरूरत नहीं होती है।
- पर्यावरण के अनुकूल: तेल रिसाव का कोई जोखिम नहीं होता है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।
जहाँ तक शीतलन विधियों की बात है, छोटे सबस्टेशनों के लिए वायु प्राकृतिक (AN) पर्याप्त है। बड़े सबस्टेशनों के लिए, जहाँ अधिक गर्मी उत्पन्न होती है, वायु बलपूर्वक (AF) का उपयोग किया जाता है, जिसमें पंखे हवा को प्रभावी ढंग से प्रसारित करते हैं।
220kV/400kV जैसे बड़े ट्रांसफार्मर में कूलिंग फैन इसलिए दिए जाते हैं ताकि उनकी उच्च रेटिंग के कारण उत्पन्न होने वाली भारी मात्रा में गर्मी को प्रभावी ढंग से हटाया जा सके।
पंखे क्यों आवश्यक हैं
- उच्च गर्मी उत्पादन: उच्च वोल्टेज और पावर रेटिंग (MVA) वाले ट्रांसफार्मर बहुत अधिक मात्रा में गर्मी उत्पन्न करते हैं। यह गर्मी कोर और वाइंडिंग में होने वाले नुकसान (losses) के कारण पैदा होती है।
- प्राकृतिक शीतलन की सीमाएं: प्राकृतिक शीतलन (ONAN) विधि, जिसमें केवल तेल और हवा के प्राकृतिक संवहन पर निर्भर रहा जाता है, इतनी भारी मात्रा में गर्मी को हटाने के लिए पर्याप्त नहीं होती है।
- मजबूर शीतलन: इसलिए, इन ट्रांसफार्मरों में ONAF (Oil Natural Air Forced) या OFAF (Oil Forced Air Forced) जैसी मजबूर शीतलन प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। इन प्रणालियों में, पंखे रेडिएटरों (radiators) पर हवा को जबरदस्ती प्रवाहित करते हैं, जिससे तेल से हवा में गर्मी का हस्तांतरण बहुत तेज हो जाता है।
- सुरक्षित संचालन: ये पंखे सुनिश्चित करते हैं कि ट्रांसफार्मर का तापमान सुरक्षित सीमा के भीतर रहे, जिससे ओवरहीटिंग को रोका जा सके। यह ट्रांसफार्मर की दक्षता, विश्वसनीयता और जीवनकाल को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
कुछ पावर ट्रांसफार्मरों में हीट एक्सचेंजर्स का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि ट्रांसफार्मर के भीतर उत्पन्न होने वाली भारी मात्रा में गर्मी को कुशलतापूर्वक और तेजी से हटाया जा सके। यह विशेष रूप से उन ट्रांसफार्मरों के लिए महत्वपूर्ण है जो बहुत उच्च वोल्टेज और भार पर काम करते हैं।
हीट एक्सचेंजर्स का कार्य
हीट एक्सचेंजर्स, जिसे रेडिएटर भी कहा जाता है, मजबूर शीतलन प्रणाली (forced cooling system) का एक अभिन्न अंग हैं। ये गर्म तेल से गर्मी को आसपास की हवा या पानी में स्थानांतरित करने का काम करते हैं।
- गर्मी का अवशोषण: ट्रांसफार्मर के भीतर, कोर और वाइंडिंग से उत्पन्न होने वाली गर्मी को तेल द्वारा अवशोषित किया जाता है।
- गर्मी का स्थानांतरण: एक पंप इस गर्म तेल को जबरन हीट एक्सचेंजर तक भेजता है।
- शीतलन: हीट एक्सचेंजर के अंदर, गर्म तेल को पतली नलिकाओं के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है। इन नलिकाओं के चारों ओर हवा को पंखों द्वारा या पानी को पंप द्वारा प्रवाहित किया जाता है, जो तेल की गर्मी को अवशोषित कर लेता है और उसे बाहर निकाल देता है।
उपयोग क्यों महत्वपूर्ण है
प्राकृतिक शीतलन (natural cooling) की तुलना में, हीट एक्सचेंजर्स का उपयोग करने से शीतलन प्रक्रिया की गति और दक्षता में भारी वृद्धि होती है। यह बड़े ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित रूप से संचालित करने की अनुमति देता है, जिससे उनकी अधिभार क्षमता (overload capacity) बढ़ जाती है और उनके जीवनकाल में वृद्धि होती है।
- वायु-आधारित हीट एक्सचेंजर्स (ONAF/OFAF): ये पंखों का उपयोग करके गर्मी को हवा में फैलाते हैं।
- जल-आधारित हीट एक्सचेंजर्स (OFWF): ये पानी का उपयोग करते हैं, जो हवा की तुलना में अधिक प्रभावी शीतलक है। इनका उपयोग उन स्थानों पर होता है जहाँ हवा द्वारा शीतलन अपर्याप्त होता है।
जबरन शीतलन विधियों (forced cooling methods) का उपयोग करने के कई नुकसान हैं जो प्राकृतिक शीतलन विधियों की तुलना में अधिक होते हैं।
1. बढ़ी हुई लागत
- अधिक पूंजीगत लागत: मजबूर शीतलन प्रणालियों में पंखे, पंप, और कभी-कभी हीट एक्सचेंजर जैसे अतिरिक्त उपकरण शामिल होते हैं। इन घटकों को ट्रांसफार्मर में जोड़ने से इसकी प्रारंभिक लागत बढ़ जाती है।
- उच्च परिचालन लागत: पंखे और पंपों को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है, जो ट्रांसफार्मर की कुल ऊर्जा खपत को बढ़ाती है।
2. अधिक रखरखाव और शोर
- जटिल रखरखाव: प्राकृतिक शीतलन के विपरीत, मजबूर शीतलन प्रणाली में यांत्रिक पुर्जे होते हैं जिन्हें नियमित निरीक्षण और रखरखाव की आवश्यकता होती है। पंखों और पंपों में खराबी आने की संभावना होती है।
- शोर: पंखे और पंप के चलने से शोर उत्पन्न होता है, जो उन क्षेत्रों में समस्या हो सकती है जहाँ शांत वातावरण की आवश्यकता होती है।
3. विश्वसनीयता का जोखिम
- विफलता का खतरा: चूंकि मजबूर शीतलन प्रणाली में अतिरिक्त पुर्जे होते हैं, इन पुर्जों के विफल होने का खतरा होता है। यदि पंखे या पंप विफल हो जाते हैं, तो ट्रांसफार्मर की शीतलन क्षमता अचानक कम हो जाती है, जिससे उसका तापमान तेजी से बढ़ सकता है और वह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
- अतिरिक्त उपकरण: जल-आधारित मजबूर शीतलन प्रणालियों (OFWF) में, पानी के रिसाव का जोखिम होता है, जो ट्रांसफार्मर के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।
संक्षेप में,
मजबूर शीतलन विधियाँ बेहतर प्रदर्शन और अधिभार क्षमता प्रदान करती हैं, लेकिन उनकी बढ़ी हुई लागत, रखरखाव की आवश्यकता, और कम विश्वसनीयता जैसी कमियाँ भी होती हैं।
ट्रांसफार्मर की नेमप्लेट पर शीतलन विधि को कुछ विशिष्ट अक्षरों के कोड से पहचाना जा सकता है। यह कोड चार अक्षरों का एक समूह होता है जो अंतर्राष्ट्रीय विद्युत तकनीकी आयोग (International Electrotechnical Commission - IEC) के मानक पर आधारित है।
शीतलन कोड का अर्थ
हर अक्षर एक विशिष्ट कार्य को दर्शाता है:
-
पहला अक्षर: आंतरिक शीतलन माध्यम
- O: मिनरल तेल या कोई अन्य ज्वलनशील तरल पदार्थ जिसका फ्लैश प्वाइंट 300°C से कम हो।
- K: गैर-ज्वलनशील सिंथेटिक तेल या अन्य तरल पदार्थ जिसका फ्लैश प्वाइंट 300°C से अधिक हो (जैसे FR3)।
- L: कम ज्वलनशील सिंथेटिक तरल पदार्थ।
- A: वायु (air) या गैस (dry-type transformers)।
-
दूसरा अक्षर: आंतरिक परिसंचरण का तरीका
- N: प्राकृतिक संवहन (natural convection), कोई पंप नहीं।
- F: मजबूर संचलन (forced circulation), पंप का उपयोग करके।
- D: निर्देशित मजबूर संचलन (directed forced circulation), तेल को सीधे वाइंडिंग में निर्देशित करना।
-
तीसरा अक्षर: बाहरी शीतलन माध्यम
- A: वायु (air)।
- W: जल (water)।
-
चौथा अक्षर: बाहरी परिसंचरण का तरीका
- N: प्राकृतिक संवहन (natural convection)।
- F: मजबूर संचलन (forced circulation), पंखे का उपयोग करके।
सामान्य उदाहरण:
-
ONAN:
- O (तेल) N (प्राकृतिक) A (हवा) N (प्राकृतिक)
- अर्थ: तेल में प्राकृतिक संवहन और हवा में प्राकृतिक संवहन द्वारा ठंडा किया गया ट्रांसफार्मर। यह सबसे आम और सरल विधि है।
-
ONAF:
- O (तेल) N (प्राकृतिक) A (हवा) F (मजबूर)
- अर्थ: तेल में प्राकृतिक संवहन, लेकिन हवा को पंखों द्वारा मजबूर करके ठंडा किया गया।
-
OFAF:
- O (तेल) F (मजबूर) A (हवा) F (मजबूर)
- अर्थ: तेल को पंप से और हवा को पंखों से मजबूर करके ठंडा किया गया।
-
AN:
- A (हवा) N (प्राकृतिक)
- अर्थ: शुष्क-प्रकार ट्रांसफार्मर, जिसमें हवा का प्राकृतिक संवहन होता है।
-
AF:
- A (हवा) F (मजबूर)
- अर्थ: शुष्क-प्रकार ट्रांसफार्मर, जिसमें हवा को पंखों द्वारा मजबूर करके ठंडा किया जाता है।
ट्रांसफार्मर के आकार और वजन पर शीतलन विधि का सीधा प्रभाव पड़ता है। संक्षेप में, मजबूर शीतलन विधियों (forced cooling methods) का उपयोग ट्रांसफार्मर के कुल आकार और वजन को कम करने में मदद करता है, जबकि प्राकृतिक शीतलन (natural cooling) का उपयोग करने पर ट्रांसफार्मर बड़ा और भारी हो सकता है।
मजबूर शीतलन (Forced Cooling)
मजबूर शीतलन प्रणालियाँ, जैसे ONAF या OFAF, पंखों और/या पंपों का उपयोग करके बहुत अधिक गर्मी को तेजी से हटा सकती हैं। इस बेहतर दक्षता के कारण, ट्रांसफार्मर को उसी क्षमता के लिए छोटे रेडिएटरों और कम कूलिंग सतह क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
- छोटे रेडिएटर: प्राकृतिक शीतलन की तुलना में, मजबूर वायु परिसंचरण से गर्मी अपव्यय की दर बढ़ जाती है। इसलिए, समान मात्रा में गर्मी को हटाने के लिए कम या छोटे आकार के रेडिएटर पर्याप्त होते हैं।
- कम तेल: रेडिएटर का आकार छोटा होने से आवश्यक तेल की मात्रा भी कम हो जाती है।
- परिणाम: इन कारकों के कारण, ट्रांसफार्मर का समग्र आकार और वजन काफी कम हो जाता है, जिससे यह अधिक कॉम्पैक्ट (compact) और जगह बचाने वाला बनता है।
प्राकृतिक शीतलन (Natural Cooling)
प्राकृतिक शीतलन प्रणाली, जैसे ONAN, केवल प्राकृतिक संवहन पर निर्भर करती है। यह गर्मी को कम कुशलता से हटाती है। इसलिए, समान मात्रा में गर्मी को हटाने के लिए:
- बड़े रेडिएटर: अधिक सतह क्षेत्र वाले बड़े और अधिक रेडिएटरों की आवश्यकता होती है।
- अधिक तेल: इन बड़े रेडिएटरों और टैंक में अधिक तेल की आवश्यकता होती है।
- परिणाम: इन अतिरिक्त घटकों के कारण ट्रांसफार्मर का कुल आकार और वजन बढ़ जाता है।
संक्षेप में,
यदि आपके पास जगह सीमित है या आप अधिक वजन नहीं चाहते हैं, तो मजबूर शीतलन एक बेहतर विकल्प है। हालांकि, यदि आप सरल और कम रखरखाव वाली प्रणाली चाहते हैं, तो प्राकृतिक शीतलन को प्राथमिकता दी जाती है, भले ही इसका आकार और वजन अधिक हो।
जल-शीतित ट्रांसफार्मरों में कई महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए, क्योंकि इनमें पानी और बिजली दोनों का उपयोग होता है। इन सावधानियों का उद्देश्य ट्रांसफार्मर के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करना और इसकी लंबी उम्र बनाए रखना है।
1. पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति
जल-शीतित प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण है।
- शुद्ध पानी: केवल शुद्ध या आसुत जल (distilled water) का उपयोग किया जाना चाहिए। अशुद्ध पानी में मौजूद खनिज, जैसे कैल्शियम या मैग्नीशियम, पाइपों में जमा हो सकते हैं और उन्हें बंद कर सकते हैं, जिससे शीतलन दक्षता कम हो जाती है।
- जंग से बचाव: पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होनी चाहिए ताकि पाइप और हीट एक्सचेंजर में जंग न लगे। जंग लगने से प्रणाली कमजोर हो सकती है और रिसाव हो सकता है।
- निरंतर आपूर्ति: जल की आपूर्ति निर्बाध होनी चाहिए। यदि जल प्रवाह अचानक रुक जाता है, तो ट्रांसफार्मर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे गंभीर क्षति हो सकती है।
2. रिसाव का खतरा और निवारण
पानी के रिसाव को रोकना सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है। पानी के रिसाव से ट्रांसफार्मर के भीतर तेल के साथ नमी मिल सकती है, जो इंसुलेशन को खराब कर सकती है और शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकती है।
- नियमित निरीक्षण: पानी के पाइपों, वाल्वों और हीट एक्सचेंजर्स की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी रिसाव के शुरुआती लक्षण का पता लगाया जा सके।
- पंप और वाल्वों की जाँच: पंप और वाल्वों की कार्यक्षमता की नियमित जांच की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सही ढंग से काम कर रहे हैं।
3. तापमान और दबाव की निगरानी
ऑपरेटरों को पानी के तापमान और दबाव की लगातार निगरानी करनी चाहिए।
- तापमान सेंसर: ट्रांसफार्मर के भीतर तापमान सेंसर और अलार्म होने चाहिए जो तापमान एक निर्धारित सीमा से ऊपर जाने पर चेतावनी दे सकें।
- दबाव माप: पानी के प्रवाह और दबाव को नियमित रूप से मापना चाहिए। यदि दबाव अचानक गिरता है, तो यह रिसाव का संकेत हो सकता है।
4. बर्फ जमने से सुरक्षा
ठंडे मौसम वाले क्षेत्रों में, यदि ट्रांसफार्मर को बंद किया जाता है तो पानी के पाइपों में पानी जम सकता है। इससे पाइप फट सकते हैं और रिसाव हो सकता है। इसे रोकने के लिए, ठंडे मौसम में ट्रांसफार्मर बंद होने पर पानी को पूरी तरह से निकाल देना चाहिए या हीटर का उपयोग करना चाहिए।
5. सामान्य ट्रांसफार्मर रखरखाव
जल-शीतित प्रणाली के रखरखाव के अलावा, ट्रांसफार्मर के सामान्य रखरखाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें तेल की जांच, ओवरलोड से बचाव और उचित ग्राउंडिंग शामिल है।
- नियमित तेल जांच: ट्रांसफार्मर तेल में नमी की मात्रा की नियमित जांच करनी चाहिए।
11kV के वितरण ट्रांसफार्मर में सबसे आम प्रकार की शीतलन तेल प्राकृतिक वायु प्राकृतिक (ONAN) है। इस प्रकार के ट्रांसफार्मर आमतौर पर छोटे और मध्यम क्षमता वाले होते हैं, और इसलिए वे इतनी अधिक गर्मी उत्पन्न नहीं करते कि उन्हें मजबूर शीतलन की आवश्यकता हो।
ONAN प्रणाली काम कैसे करती है
इस प्रणाली में, ट्रांसफार्मर को तेल से भरे एक टैंक में रखा जाता है।
- तेल द्वारा शीतलन: ट्रांसफार्मर के कोर और वाइंडिंग में उत्पन्न होने वाली गर्मी को तेल अवशोषित कर लेता है। जब तेल गर्म होता है, तो वह प्राकृतिक संवहन के कारण ऊपर की ओर बढ़ता है।
- हवा द्वारा शीतलन: गर्म तेल ट्रांसफार्मर टैंक की दीवारों और बाहरी रेडिएटरों तक पहुँचता है। इन रेडिएटरों से गर्मी प्राकृतिक रूप से आसपास की हवा में फैल जाती है। हवा के प्राकृतिक परिसंचरण से रेडिएटर ठंडे होते हैं, जिससे तेल ठंडा होता है और नीचे की ओर बहने लगता है।
ONAN को प्राथमिकता क्यों दी जाती है
- कम लागत: ONAN प्रणाली में किसी भी अतिरिक्त पंखे या पंप की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे इसकी निर्माण लागत कम होती है।
- विश्वसनीयता: चूंकि इसमें कोई यांत्रिक पुर्जे नहीं होते, इसलिए विफलता का जोखिम बहुत कम होता है।
- कम रखरखाव: इसे कम रखरखाव की आवश्यकता होती है।
कुछ बड़े 11kV वितरण ट्रांसफार्मरों में, जहाँ अधिक भार की संभावना होती है, ONAF (Oil Natural Air Forced) शीतलन का भी उपयोग किया जा सकता है। इसमें तेल का परिसंचरण प्राकृतिक होता है, लेकिन पंखे हवा के प्रवाह को मजबूर करते हैं।
765kV ट्रांसमिशन ट्रांसफार्मर में मुख्य रूप से तेल निर्देशित जल बलात (Oil Forced Water Forced - OFWF) शीतलन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली उच्च-क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के लिए सबसे प्रभावी और विश्वसनीय मानी जाती है।
OFWF को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
765kV जैसे अल्ट्रा-हाई वोल्टेज (UHV) ट्रांसफार्मर बहुत अधिक ऊर्जा को संभालते हैं, जिससे भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न होती है। इस गर्मी को प्राकृतिक रूप से हटाना असंभव है।
- अत्यधिक ऊष्मा अपव्यय: OFWF प्रणाली में, एक पंप तेल को ट्रांसफार्मर के भीतर से जबरन परिसंचरित करता है। यह गर्म तेल एक हीट एक्सचेंजर से गुजरता है, जहाँ ठंडा पानी भी पंपों द्वारा जबरन घुमाया जाता है।
- पानी की उच्च तापीय चालकता: पानी की तापीय चालकता हवा की तुलना में बहुत अधिक होती है, जिससे यह गर्मी को कहीं अधिक तेजी से और कुशलता से दूर करता है।
- उच्च विश्वसनीयता: यह प्रणाली ट्रांसफार्मर को अत्यधिक भार (overload) की स्थिति में भी तापमान को नियंत्रित रखने में सक्षम बनाती है। बिजली संयंत्रों में, जहाँ ट्रांसफार्मर को लगातार अधिकतम क्षमता पर काम करना होता है, OFWF विधि सुनिश्चित करती है कि ट्रांसफार्मर का तापमान सुरक्षित सीमा के भीतर रहे।
- अंतरिक्ष दक्षता: जल-आधारित प्रणाली हवा-आधारित प्रणालियों (जैसे ONAF) की तुलना में बहुत अधिक कॉम्पैक्ट होती है, क्योंकि इसमें बड़े-बड़े पंखों या रेडिएटरों की आवश्यकता नहीं होती।
परिवेश का तापमान सीधे तौर पर ट्रांसफार्मर के शीतलन प्रदर्शन को प्रभावित करता है। सरल शब्दों में, जब परिवेश का तापमान बढ़ता है, तो ट्रांसफार्मर को ठंडा करना अधिक कठिन हो जाता है।
ट्रांसफार्मर के शीतलन का मूल सिद्धांत गर्मी को ट्रांसफार्मर के भीतर से उसके आसपास के वातावरण में स्थानांतरित करना है। यह प्रक्रिया तब सबसे प्रभावी होती है जब ट्रांसफार्मर और परिवेश के बीच तापमान में बड़ा अंतर होता है।
गर्म परिवेश में शीतलन (Cooling in Hotter Environments)
- जब परिवेश का तापमान अधिक होता है (उदाहरण के लिए, गर्मियों के दिन), तो ट्रांसफार्मर और उसके आसपास की हवा के बीच तापमान का अंतर कम हो जाता है।
- इस कारण से, ट्रांसफार्मर से गर्मी का अपव्यय (dissipation) धीमा हो जाता है, जिससे ट्रांसफार्मर का आंतरिक तापमान बढ़ जाता है।
- अधिक गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर का तेल और वाइंडिंग अधिक गर्म हो सकते हैं, जिससे ट्रांसफार्मर की दक्षता कम हो जाती है और इसके इन्सुलेशन की उम्र कम हो सकती है।
ठंडे परिवेश में शीतलन (Cooling in Colder Environments)
- जब परिवेश का तापमान कम होता है (उदाहरण के लिए, सर्दियों में), तो ट्रांसफार्मर और उसके आसपास की हवा के बीच तापमान का अंतर अधिक होता है।
- यह बड़ा तापमान अंतर गर्मी के अपव्यय को बहुत कुशल बनाता है।
- परिणामस्वरूप, ट्रांसफार्मर का आंतरिक तापमान कम रहता है, जिससे वह अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करता है और उसकी लंबी उम्र सुनिश्चित होती है।
यही कारण है कि उच्च-क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों में मजबूर शीतलन प्रणाली (Forced Cooling System), जैसे ONAF या OFWF का उपयोग किया जाता है। ये प्रणालियाँ, पंखों या पंपों का उपयोग करके, परिवेश के तापमान से कम प्रभावित होती हैं क्योंकि वे प्राकृतिक हवा या पानी के संवहन पर निर्भर नहीं होती हैं।
बुचोलज़ रिले एक सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग तेल-शीतित ट्रांसफार्मर में आंतरिक दोषों का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसे ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंजरवेटर टैंक के बीच जोड़ने वाली पाइप में लगाया जाता है।
बुचोलज़ रिले की भूमिका
बुचोलज़ रिले की मुख्य भूमिका ट्रांसफार्मर को गंभीर नुकसान से बचाना है। यह छोटे से छोटे दोषों का भी पता लगा सकता है जो सामान्य सुरक्षा प्रणालियों द्वारा पता नहीं चल पाते हैं। जब भी ट्रांसफार्मर के अंदर कोई खराबी (जैसे वाइंडिंग में शॉर्ट सर्किट, कोर में हीटिंग आदि) होती है, तो ट्रांसफार्मर का तेल गर्म होकर विघटित होने लगता है। इस प्रक्रिया से गैसें (जैसे हाइड्रोजन, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड) उत्पन्न होती हैं। बुचोलज़ रिले इन्हीं गैसों या तेल के प्रवाह में अचानक बदलाव को महसूस करके काम करता है।
यह कैसे काम करता है?
बुचोलज़ रिले के भीतर दो फ्लोट होते हैं:
- ऊपरी फ्लोट (अलार्म सर्किट): जब ट्रांसफार्मर में कोई छोटा दोष (जैसे धीरे-धीरे गर्मी बढ़ना) होता है, तो थोड़ी मात्रा में गैसें उत्पन्न होती हैं। ये गैसें रिले के ऊपरी हिस्से में जमा हो जाती हैं, जिससे रिले के भीतर तेल का स्तर गिर जाता है। तेल का स्तर गिरने से ऊपरी फ्लोट नीचे आता है और एक मरकरी स्विच को सक्रिय करता है। यह स्विच एक अलार्म सर्किट को चालू करता है, जिससे ऑपरेटर को संभावित खराबी के बारे में चेतावनी मिलती है।
- निचला फ्लोट (ट्रिप सर्किट): जब कोई बड़ा और गंभीर दोष (जैसे वाइंडिंग में गंभीर शॉर्ट सर्किट) होता है, तो बड़ी मात्रा में गैसें उत्पन्न होती हैं और तेल का एक शक्तिशाली बहाव मुख्य टैंक से कंजरवेटर टैंक की ओर होता है। तेल का यह तेज बहाव निचले फ्लोट पर जोर डालता है, जो एक और मरकरी स्विच को सक्रिय करता है। यह स्विच ट्रिप सर्किट को चालू करता है, जो तुरंत सर्किट ब्रेकर को बंद कर देता है और ट्रांसफार्मर को बिजली आपूर्ति से अलग कर देता है।
इस प्रकार,
बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर को पूरी तरह से विफल होने से पहले प्रारंभिक चेतावनी और अंतिम सुरक्षा दोनों प्रदान करता है।
ट्रांसफार्मर में शीतलन प्रणाली की विफलता से गंभीर परिणाम हो सकते हैं क्योंकि यह सीधे ट्रांसफार्मर की सुरक्षा, दक्षता और जीवनकाल को प्रभावित करती है। शीतलन प्रणाली की विफलता के कारण ट्रांसफार्मर में ओवरहीटिंग (overheating) हो जाती है।
1. इंसुलेशन का खराब होना
ट्रांसफार्मर का इन्सुलेशन (विशेषकर तेल और कागज) तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होता है।
- इंसुलेशन का टूटना: जब ट्रांसफार्मर ज़्यादा गरम होता है, तो उसका इन्सुलेशन तेजी से खराब होने लगता है। उच्च तापमान से इन्सुलेशन की यांत्रिक और ढांकता हुआ (dielectric) शक्ति कम हो जाती है।
- जीवनकाल में कमी: एक सामान्य नियम के अनुसार, ट्रांसफार्मर का तापमान हर 6°C बढ़ने पर उसके इन्सुलेशन का जीवनकाल आधा हो जाता है। शीतलन विफलता के कारण तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे ट्रांसफार्मर का जीवनकाल कई वर्षों से घटकर कुछ ही महीनों या हफ्तों तक सीमित हो सकता है।
2. तेल का विघटन और गैस का बनना
तेल-शीतित ट्रांसफार्मरों में, अत्यधिक गर्मी से तेल विघटित होने लगता है।
- गैसों का निर्माण: तेल के विघटन से हाइड्रोजन और हाइड्रोकार्बन जैसी ज्वलनशील गैसें बनती हैं। ये गैसें ट्रांसफार्मर के भीतर जमा हो सकती हैं।
- आग और विस्फोट का खतरा: गैसों का जमा होना बुचोलज़ रिले को ट्रिप कर सकता है, लेकिन अगर यह जमाव तेजी से होता है, तो इससे ट्रांसफार्मर के टैंक में दबाव बढ़ सकता है, जिससे आग या विस्फोट का खतरा पैदा हो सकता है।
3. प्रदर्शन में गिरावट और संभावित विफलता
- दक्षता में कमी: जब ट्रांसफार्मर ज़्यादा गरम होता है, तो कॉपर हानि बढ़ जाती है, जिससे इसकी दक्षता कम हो जाती है।
- आंतरिक दोष: अत्यधिक गर्मी से वाइंडिंग विकृत हो सकती हैं या उनके कनेक्शन ढीले हो सकते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट और आर्क लगने की संभावना बढ़ जाती है।
- पूरी तरह से विफलता: यदि शीतलन विफलता को तुरंत ठीक नहीं किया जाता है, तो ट्रांसफार्मर की आंतरिक क्षति इतनी गंभीर हो सकती है कि वह पूरी तरह से काम करना बंद कर दे। ऐसी विफलता से न केवल ट्रांसफार्मर को बदलने की लागत आती है, बल्कि व्यापक बिजली आउटेज और उत्पादन हानि भी हो सकती है।
तटीय या आर्द्र क्षेत्रों में ONAN (Oil Natural Air Natural) और ONAF (Oil Natural Air Forced) जैसी शीतलन विधियों को प्राथमिकता दी जाती है। इन क्षेत्रों में मुख्य चिंता उच्च आर्द्रता (humidity) और हवा में नमक की मात्रा है।
ONAN/ONAF को प्राथमिकता देने के कारण:
- जंग से बचाव: तटीय क्षेत्रों की हवा में नमक की मात्रा अधिक होती है, जो धातु के उपकरणों में जंग लगने की प्रक्रिया को तेज करती है। तेल-डूबे हुए ट्रांसफार्मर में, शीतलन के लिए हवा का उपयोग होता है, लेकिन महत्वपूर्ण भाग जैसे वाइंडिंग और कोर तेल में डूबे रहते हैं, जिससे वे सीधे हवा के संपर्क में नहीं आते और जंग से बच जाते हैं।
- विश्वसनीयता और कम रखरखाव: ONAN सबसे सरल शीतलन विधि है जिसमें कोई यांत्रिक पुर्जे नहीं होते। इससे नम और नमकीन वातावरण में भी इसकी विश्वसनीयता अधिक रहती है क्योंकि पंखे या पंपों में जंग लगने या खराब होने का जोखिम कम होता है। बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए ONAF का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसमें भी पानी की प्रणाली नहीं होती।
- जल शीतलन से बचें: जल-शीतित प्रणालियाँ (OFWF) तटीय क्षेत्रों के लिए कम उपयुक्त होती हैं। यदि नमकीन पानी का उपयोग किया जाता है तो यह पाइपों और हीट एक्सचेंजर में अत्यधिक जंग का कारण बन सकता है। यदि ताजे पानी का उपयोग किया जाता है, तो इसकी निरंतर आपूर्ति और रखरखाव एक चुनौती हो सकती है।
संक्षेप में,
तटीय क्षेत्रों में तेल-आधारित वायु शीतलन विधियाँ सबसे बेहतर होती हैं क्योंकि वे जंग से बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं और जल-आधारित प्रणालियों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और कम रखरखाव वाली होती हैं।
शुष्क प्रकार के कास्ट रेजिन ट्रांसफार्मर में मुख्य रूप से वायु प्राकृतिक (Air Natural - AN) और वायु बलपूर्वक (Air Forced - AF) शीतलन विधियों का उपयोग किया जाता है। इन ट्रांसफार्मर में किसी भी तरल पदार्थ (जैसे तेल) का उपयोग नहीं किया जाता है।
1. वायु प्राकृतिक (AN) शीतलन
यह विधि छोटे से मध्यम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए सबसे आम है। इस विधि में, ट्रांसफार्मर में उत्पन्न गर्मी प्राकृतिक संवहन के माध्यम से आसपास की हवा में फैल जाती है। गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा उसकी जगह लेती है, जिससे ट्रांसफार्मर स्वाभाविक रूप से ठंडा होता रहता है।
- उपयोग: यह उन अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है जहां ट्रांसफार्मर पर भार स्थिर और कम होता है।
2. वायु बलपूर्वक (AF) शीतलन
यह विधि उन कास्ट रेजिन ट्रांसफार्मरों के लिए उपयोग की जाती है जिन्हें उच्च भार पर काम करना होता है। इसमें पंखों (fans) या ब्लोअर का उपयोग करके ट्रांसफार्मर के चारों ओर हवा को जबरन प्रसारित किया जाता है।
- उपयोग: यह विधि ट्रांसफार्मर की लोड क्षमता को 40% तक बढ़ा सकती है। जब लोड बढ़ता है और प्राकृतिक शीतलन पर्याप्त नहीं होता, तो पंखे स्वचालित रूप से चालू हो जाते हैं।
कास्ट रेजिन ट्रांसफार्मर में ये दोनों विधियाँ इसलिए उपयुक्त हैं क्योंकि उनकी संरचना तेल को हटाकर हवा को मुख्य शीतलन माध्यम बनाती है। इससे वे अधिक सुरक्षित, कम रखरखाव वाले और इनडोर उपयोग के लिए आदर्श बन जाते हैं।
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