कंडक्टर को कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है, लेकिन सबसे आम वर्गीकरण उनके मटेरियल और बनावट के आधार पर होता है।
मटेरियल के आधार पर
मटेरियल के आधार पर, कंडक्टर के कुछ मुख्य प्रकार नीचे दिए गए हैं:
* धातु कंडक्टर (Metallic Conductors):
ये सबसे आम प्रकार के कंडक्टर हैं, जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बिजली के प्रवाह में मदद करते हैं।
* तांबा (Copper):
यह सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला कंडक्टर है। इसमें उच्च चालकता और मजबूती होती है, इसलिए इसे घर की वायरिंग, मोटर और केबल में इस्तेमाल किया जाता है।
* एल्यूमीनियम (Aluminium):
यह तांबे से हल्का और सस्ता होता है। इसमें तांबे से कम चालकता होती है, लेकिन यह बिजली ट्रांसमिशन लाइनों (power transmission lines) के लिए बहुत अच्छा होता है।
* चांदी (Silver):
यह सबसे अच्छा कंडक्टर है, लेकिन यह महंगा होने के कारण इसका उपयोग ज़्यादातर विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सर्किटों में होता है।
* सोना (Gold):
यह भी बहुत अच्छा कंडक्टर है और जंग (corrosion) से बचाने के लिए अक्सर महत्वपूर्ण सर्किटों में इसका उपयोग किया जाता है।
* नॉन-मेटल कंडक्टर (Non-metallic Conductors): कुछ नॉन-मेटल भी बिजली का संचालन कर सकते हैं।
* ग्रेफाइट (Graphite):
यह कार्बन का एक रूप है और यह बिजली का अच्छा कंडक्टर है। इसका उपयोग इलेक्ट्रोड और बैटरी में किया जाता है।
* आयनिक कंडक्टर (Ionic Conductors):
ये वो कंडक्टर हैं जो घोल (solution) के रूप में होते हैं और आयनों के प्रवाह से बिजली का संचालन करते हैं। उदाहरण के लिए, नमक का पानी।
* सुपरकंडक्टर (Superconductors):
ये वो मटेरियल हैं जो एक निश्चित कम तापमान (critical temperature) पर अपनी सारी बिजली प्रतिरोधकता (resistance) खो देते हैं। इनमे बिना किसी हानि के बिजली का प्रवाह हो सकता है।
बनावट (Construction) के आधार पर
बनावट के आधार पर, कंडक्टर को इन प्रकारों में बाँटा जा सकता है:
* ठोस कंडक्टर (Solid Conductors):
यह एक ही तार से बना होता है और ज़्यादातर कम बिजली की ज़रूरतों के लिए उपयोग होता है, जैसे कि अर्थिंग के लिए।
* फंसे हुए कंडक्टर (Stranded Conductors):
ये पतले तारों को एक साथ मरोड़कर बनाए जाते हैं। ये ठोस कंडक्टरों की तुलना में ज़्यादा लचीले और मजबूत होते हैं।
* ACSR (Aluminium Conductor Steel Reinforced):
इन कंडक्टर में एल्यूमीनियम के तारों को एक स्टील के कोर (core) के चारों ओर लपेटा जाता है। यह ज़्यादा तन्य शक्ति (tensile strength) प्रदान करता है, जिससे ये लंबी दूरी की ट्रांसमिशन लाइनों के लिए उपयुक्त होते हैं।
* बंडल कंडक्टर (Bundle Conductors):
इस प्रकार में कई कंडक्टरों को एक साथ बंडल किया जाता है। इनका उपयोग ज़्यादातर एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज लाइनों में होता है, जिससे कोरोना लॉस (corona loss) कम होता है।
एसीएसआर (ACSR - Aluminium Conductor Steel Reinforced) कंडक्टर को उनकी बनावट और क्षमता के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। इन कंडक्टरों को आमतौर पर जानवरों के नाम दिए जाते हैं, जिससे उन्हें पहचानना और उनके विनिर्देशों को याद रखना आसान हो जाता है।
मुख्य रूप से एसीएसआर कंडक्टरों के प्रकार नीचे दिए गए हैं, जो उनकी क्षमता और उपयोग के आधार पर अलग-अलग होते हैं:
* डॉग (Dog):
यह 33kV से 66kV तक की लाइनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी करंट कैरिंग क्षमता लगभग 300 एम्पीयर होती है। इसकी बनावट में 6 एल्यूमीनियम के तार और 7 स्टील के तार होते हैं।
* पैंथर (Panther):
इसका उपयोग 66kV से 132kV तक की लाइनों में किया जाता है। इसकी करंट कैरिंग क्षमता लगभग 480 एम्पीयर होती है। इसमें 30 एल्यूमीनियम के तार और 7 स्टील के तार होते हैं।
* ज़ेबरा (Zebra):
यह 220kV की लाइनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी करंट कैरिंग क्षमता लगभग 735 एम्पीयर होती है। इसकी बनावट में 54 एल्यूमीनियम के तार और 7 स्टील के तार होते हैं।
* मूस (Moose):
यह 220kV या 440kV जैसी उच्च वोल्टेज लाइनों के लिए उपयुक्त है। इसकी क्षमता लगभग 800 एम्पीयर तक होती है।
इनके अलावा भी कई अन्य प्रकार के एसीएसआर कंडक्टर मौजूद हैं, जिन्हें भी जानवरों के नाम दिए गए हैं,
जैसे:
* गिलहरी (Squirrel)
* वीज़ल (Weasel)
* रैबिट (Rabbit)
* वूल्फ़ (Wolf)
* कौगर (Cougar)
* ज़िलेट (Zilat)
इन सभी प्रकारों में एल्यूमीनियम और स्टील के तारों की संख्या और मोटाई अलग-अलग होती है, जो उनकी करंट कैरिंग क्षमता और यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) को निर्धारित करती है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टर का उपयोग करने के कई फायदे हैं, यही वजह है कि इन्हें ओवरहेड पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।
इनके कुछ प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
* उच्च तन्य शक्ति (High Tensile Strength): एसीएसआर कंडक्टरों में स्टील का कोर होता है, जो इन्हें बहुत ज़्यादा मजबूती और तन्य शक्ति देता है। इस मजबूती के कारण, ये लंबी दूरी तक बिना ज़्यादा झुके (sag) लटके रह सकते हैं। इससे कम टावरों की ज़रूरत होती है, जिससे इंस्टॉलेशन की लागत कम हो जाती है।
* उत्कृष्ट चालकता (Excellent Conductivity): एसीएसआर के बाहरी हिस्से में एल्यूमीनियम के तार होते हैं, जो बिजली के एक अच्छे कंडक्टर के रूप में काम करते हैं। एल्यूमीनियम का उपयोग करने से बिजली का प्रवाह सुचारू रूप से होता है, जिससे ऊर्जा की हानि कम होती है।
* हल्का वज़न:
एल्यूमीनियम, तांबे की तुलना में बहुत हल्का होता है। इस वजह से एसीएसआर कंडक्टरों का कुल वज़न कम होता है। कम वज़न होने से उन्हें ले जाना और स्थापित करना आसान होता है और वे टावरों पर कम भार डालते हैं।
* कम शिथिलता (Low Sag):
स्टील कोर की मजबूती के कारण, एसीएसआर कंडक्टरों में शिथिलता (sag) कम होती है। शिथिलता का मतलब है कि कंडक्टर गर्मी से फैलने पर कितना नीचे झुकता है। कम शिथिलता होने से लाइनों को जमीन से सुरक्षित दूरी पर बनाए रखना आसान होता है, खासकर जब तापमान ज़्यादा होता है।
* किफायती (Economical):
तांबे की तुलना में एल्यूमीनियम सस्ता होता है। एसीएसआर में एल्यूमीनियम और स्टील का संयोजन इसे एक लागत प्रभावी विकल्प बनाता है, जो लंबी दूरी की पावर ट्रांसमिशन लाइनों के लिए बहुत ज़रूरी है।
* जंग प्रतिरोध (Corrosion Resistance):
एसीएसआर कंडक्टर जंग (corrosion) का अच्छी तरह से मुकाबला करते हैं। एल्यूमीनियम की बाहरी परत पर एक पतली ऑक्साइड परत बनती है, जो कंडक्टर को संक्षारण से बचाती है। इससे कंडक्टर की उम्र बढ़ जाती है और रखरखाव की लागत कम होती है।
इन सभी फायदों के कारण, एसीएसआर कंडक्टरों को विभिन्न वोल्टेज स्तरों पर उपयोग किया जाता है और ये आधुनिक विद्युत प्रणालियों का एक अभिन्न अंग बन गए हैं।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टर में डॉग कंडक्टर एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रकार है, जिसका उपयोग 33kV से 66kV तक की ओवरहेड ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में किया जाता है। इसकी अपनी बनावट और विशेषताओं के कारण कुछ खास फायदे और नुकसान हैं।
डॉग कंडक्टर की बनावट और आकार
डॉग कंडक्टर की बनावट काफी विशिष्ट होती है जो इसे इसके उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है:
* एल्यूमीनियम के तार (Aluminum Strands):
इसमें 6 एल्यूमीनियम के तार होते हैं, जिनका व्यास (diameter) 4.72 mm होता है। ये तार कंडक्टर की बाहरी परत बनाते हैं, जो बिजली के प्रवाह के लिए मुख्य मार्ग का काम करते हैं।
* स्टील के तार (Steel Strands):
इसके केंद्र में 7 स्टील के तार होते हैं, जिनका व्यास 1.57 mm होता है। ये तार कंडक्टर को उसकी यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करते हैं।
* कुल व्यास (Overall Diameter):
डॉग कंडक्टर का कुल व्यास लगभग 14.15 mm होता है।
* कुल वज़न (Total Weight):
इसका वज़न लगभग 394 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* करंट कैरिंग क्षमता (Current Carrying Capacity): यह कंडक्टर लगभग 300 एम्पीयर तक की धारा (current) को वहन कर सकता है।
डॉग कंडक्टर के फायदे (Profits)
डॉग कंडक्टर को चुनने के मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
* उच्च शक्ति-से-वज़न अनुपात (High Strength-to-Weight Ratio):
स्टील कोर की वजह से यह काफी मजबूत होता है, जबकि एल्यूमीनियम के तारों के कारण इसका वज़न कम होता है। यह इसे लंबी दूरी तक बिना ज़्यादा झुके (sag) लटकने की अनुमति देता है, जिससे टावरों की संख्या और लागत कम हो जाती है।
* किफायती (Economical):
तांबे के कंडक्टरों की तुलना में एल्यूमीनियम सस्ता होता है। डॉग कंडक्टर का उपयोग करके, आप सामग्री और स्थापना दोनों की लागत को कम कर सकते हैं।
* अच्छा संक्षारण प्रतिरोध (Good Corrosion Resistance):
एल्यूमीनियम की बाहरी परत जंग (corrosion) से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कंडक्टर की उम्र लंबी होती है।
* अच्छा चालकता (Good Conductivity): एल्यूमीनियम के तारों के कारण इसमें विद्युत चालकता अच्छी होती है, जो बिजली के नुकसान को कम करने में मदद करती है।
डॉग कंडक्टर के नुकसान (Losses)
डॉग कंडक्टर के कुछ संभावित नुकसान या सीमाएं भी हैं:
* सीमित तापमान (Limited Temperature): एल्यूमीनियम तार समय के साथ 75°C से अधिक तापमान पर नरम (soften) हो सकते हैं। इसलिए, इसका उपयोग लगातार उच्च तापमान वाली जगहों पर सीमित होता है।
* विशेष उपकरण की आवश्यकता (Special Tools Required):
इसकी बनावट के कारण, इसे स्थापित करने के लिए विशेष उपकरणों और तकनीकों की ज़रूरत होती है, जिससे स्थापना की लागत थोड़ी बढ़ सकती है।
* अधिक वोल्टेज के लिए अनुपयुक्त (Unsuitable for Higher Voltages):
इसकी करंट कैरिंग क्षमता और यांत्रिक बनावट इसे 66kV से ऊपर की लाइनों के लिए अनुपयुक्त बनाती है। उच्च वोल्टेज के लिए पैंथर या ज़ेबरा जैसे बड़े एसीएसआर कंडक्टरों का उपयोग किया जाता है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टर के प्रकारों में, पैंथर (Panther) कंडक्टर एक प्रमुख प्रकार है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च-वोल्टेज वाली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए किया जाता है। यहाँ पैंथर कंडक्टर के उपयोग, फायदे, नुकसान और उसकी विशिष्टताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
पैंथर कंडक्टर की बनावट और आकार
पैंथर कंडक्टर की बनावट इसे उच्च-शक्ति संचरण के लिए आदर्श बनाती है।
* एल्यूमीनियम के तार (Aluminum Strands):
इसमें 30 एल्यूमीनियम के तार होते हैं, जिनका व्यास 3.00 mm होता है। ये तार बिजली का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करते हैं।
* स्टील के तार (Steel Strands): इसके केंद्र में 7 स्टील के तार होते हैं, जिनका व्यास भी 3.00 mm होता है। ये तार कंडक्टर को असाधारण यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं।
* कुल व्यास (Overall Diameter):
पैंथर कंडक्टर का कुल व्यास 21.00 mm होता है।
* कुल वज़न (Total Weight):
इसका वज़न लगभग 974 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* करंट कैरिंग क्षमता (Current Carrying Capacity):
यह कंडक्टर लगभग 421 से 480 एम्पीयर तक की धारा को वहन कर सकता है।
पैंथर कंडक्टर के फायदे (Profits)
पैंथर कंडक्टर के उपयोग के कई फायदे हैं, यही कारण है कि यह उच्च-वोल्टेज लाइनों के लिए लोकप्रिय है:
* उच्च तन्य शक्ति (High Tensile Strength):
स्टील कोर की वजह से यह बहुत मजबूत होता है। इसकी उच्च यांत्रिक शक्ति इसे लंबी दूरी के स्पैन (span) पर कम शिथिलता (sag) के साथ स्थापित करने की अनुमति देती है, जिससे कम टावरों की ज़रूरत होती है और लागत घटती है।
* उच्च वोल्टेज के लिए उपयुक्त (Suitable for High Voltages):
इसकी बनावट इसे 66 kV से 132 kV तक की लाइनों के लिए आदर्श बनाती है, जहाँ ज़्यादा करंट और बेहतर यांत्रिक शक्ति की आवश्यकता होती है।
* किफायती (Economical):
तांबे की तुलना में एल्यूमीनियम और स्टील का संयोजन इसे एक लागत-प्रभावी समाधान बनाता है, खासकर लंबी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए।
* अच्छा संक्षारण प्रतिरोध (Good Corrosion Resistance):
एल्यूमीनियम की बाहरी परत जंग से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कंडक्टर का जीवनकाल लंबा होता है और रखरखाव की लागत कम होती है।
पैंथर कंडक्टर के नुकसान (Losses)
पैंथर कंडक्टर का उपयोग करते समय कुछ संभावित नुकसान या सीमाएं भी हैं:
* सीमित ऑपरेटिंग तापमान (Limited Operating Temperature):
इसकी एक सीमा है, जिसके तहत यह 75°C से अधिक तापमान पर लगातार काम नहीं कर सकता, क्योंकि एल्यूमीनियम धीरे-धीरे नरम हो सकता है।
* ज्यादा वज़न (Higher Weight):
डॉग जैसे छोटे एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में इसका वज़न ज़्यादा होता है, जिससे इसे संभालने और स्थापित करने के लिए मज़बूत टावरों और उपकरणों की ज़रूरत होती है।
* स्थापना की जटिलता (Installation Complexity):
इसके बड़े आकार और वज़न के कारण, इसे स्थापित करने के लिए विशेष तकनीकों और कुशल श्रम की आवश्यकता होती है, जिससे स्थापना की लागत बढ़ सकती है।
पैंथर कंडक्टर का चयन वोल्टेज स्तर, अपेक्षित करंट क्षमता और स्पैन की लंबाई जैसी ज़रूरतों पर निर्भर करता है। यह 66 kV से 132 kV तक के ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए एक बहुत ही प्रभावी और विश्वसनीय विकल्प है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टर के प्रकारों में, ज़ेबरा (Zebra) कंडक्टर एक उच्च क्षमता वाला और बहुत ही महत्वपूर्ण कंडक्टर है। इसका उपयोग मुख्य रूप से 220 kV जैसी उच्च वोल्टेज वाली ट्रांसमिशन लाइनों में किया जाता है, जहाँ अधिक शक्ति और दूरी के लिए बेहतर यांत्रिक और विद्युत गुणों की आवश्यकता होती है।
ज़ेबरा कंडक्टर की बनावट और आकार
ज़ेबरा कंडक्टर की बनावट इसे उच्च-वोल्टेज और लंबी दूरी के उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है:
* एल्यूमीनियम के तार (Aluminum Strands):
इसमें 54 एल्यूमीनियम के तार होते हैं, जिनका व्यास (diameter) 3.18 mm होता है। ये तार बाहरी परत बनाते हैं और मुख्य रूप से विद्युत प्रवाह के लिए जिम्मेदार होते हैं।
* स्टील के तार (Steel Strands):
इसके केंद्र में 7 स्टील के तार होते हैं, जिनका व्यास 3.18 mm होता है। ये तार कंडक्टर को असाधारण यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करते हैं, जिससे यह लंबी दूरी तक बिना ज़्यादा झुके (sag) लटक सकता है।
* कुल व्यास (Overall Diameter):
ज़ेबरा कंडक्टर का कुल व्यास लगभग 28.62 mm होता है।
* कुल वज़न (Total Weight):
इसका वज़न लगभग 1621 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* करंट कैरिंग क्षमता (Current Carrying Capacity):
यह कंडक्टर लगभग 635 से 735 एम्पीयर तक की धारा को वहन कर सकता है।
ज़ेबरा कंडक्टर के फायदे (Profits)
ज़ेबरा कंडक्टर के उपयोग के कई फायदे हैं, जो इसे उच्च-वोल्टेज ट्रांसमिशन के लिए एक आदर्श विकल्प बनाते हैं:
* अत्यधिक उच्च तन्य शक्ति (Extremely High Tensile Strength):
स्टील कोर की वजह से इसमें बहुत ज़्यादा मजबूती होती है। यह इसे लंबी दूरी के स्पैन (span) पर कम शिथिलता (sag) के साथ स्थापित करने की अनुमति देता है, जिससे टावरों की संख्या कम हो जाती है और इंस्टॉलेशन लागत घटती है।
* उच्च करंट क्षमता (High Current Capacity):
इसमें बड़ी संख्या में एल्यूमीनियम के तार होने के कारण, यह बहुत अधिक मात्रा में विद्युत धारा को वहन कर सकता है, जो 220 kV जैसी लाइनों के लिए आवश्यक है।
* कम शिथिलता (Low Sag):
इसकी उच्च यांत्रिक शक्ति के कारण, गर्मी के मौसम में भी यह ज़्यादा नहीं झुकता। इससे लाइनों को ज़मीन से सुरक्षित दूरी पर बनाए रखना आसान होता है।
* किफायती (Economical):
तांबे के कंडक्टरों की तुलना में एल्यूमीनियम और स्टील का संयोजन इसे एक लागत-प्रभावी समाधान बनाता है, खासकर लंबी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए।
* उत्कृष्ट चालकता (Excellent Conductivity): एल्यूमीनियम के तारों की बड़ी संख्या बिजली के नुकसान को कम करती है और ऊर्जा का कुशल संचरण सुनिश्चित करती है।
ज़ेबरा कंडक्टर के नुकसान (Losses)
ज़ेबरा कंडक्टर का उपयोग करते समय कुछ संभावित नुकसान या सीमाएं भी हैं:
* अधिक वज़न (Higher Weight):
इसका वज़न पैंथर या डॉग जैसे छोटे कंडक्टरों की तुलना में बहुत ज़्यादा होता है। इससे इसे संभालने और स्थापित करने के लिए मज़बूत टावरों और विशेष उपकरणों की ज़रूरत होती है, जिससे स्थापना की लागत और जटिलता बढ़ जाती है।
* स्थापना की जटिलता (Installation Complexity):
इसके बड़े आकार और वज़न के कारण, इसे स्थापित करने के लिए विशेष तकनीकों और कुशल श्रम की आवश्यकता होती है, जिससे स्थापना का समय और लागत बढ़ सकती है।
* सीमित ऑपरेटिंग तापमान (Limited Operating Temperature):
एल्यूमीनियम तारों के कारण इसका लगातार ऑपरेटिंग तापमान 75°C के आसपास तक सीमित होता है। इससे ज़्यादा तापमान पर, एल्यूमीनियम नरम हो सकता है, जिससे कंडक्टर की यांत्रिक शक्ति पर असर पड़ सकता है।
संक्षेप में,
ज़ेबरा कंडक्टर का उपयोग तब किया जाता है जब बिजली की बहुत ज़्यादा मात्रा को लंबी दूरी तक उच्च वोल्टेज पर ले जाना होता है। यह अपनी उच्च क्षमता और मजबूती के कारण 220 kV ट्रांसमिशन लाइनों के लिए एक विश्वसनीय और प्रभावी विकल्प है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टर के प्रकारों में, मूस (Moose) कंडक्टर एक अत्यंत उच्च क्षमता और उच्च शक्ति वाला कंडक्टर है। इसका उपयोग मुख्य रूप से 220 kV या उससे भी अधिक वोल्टेज वाली ट्रांसमिशन लाइनों में किया जाता है, जहाँ बिजली की बहुत ज़्यादा मात्रा को लंबी दूरी तक ले जाने की आवश्यकता होती है।
मूस कंडक्टर की बनावट और आकार
मूस कंडक्टर की बनावट इसे सबसे शक्तिशाली एसीएसआर कंडक्टरों में से एक बनाती है।
* एल्यूमीनियम के तार (Aluminum Strands):
इसमें 54 एल्यूमीनियम के तार होते हैं, जिनका व्यास 3.53 mm होता है। ये तार बाहरी परत बनाते हैं और मुख्य रूप से विद्युत प्रवाह के लिए जिम्मेदार होते हैं।
* स्टील के तार (Steel Strands):
इसके केंद्र में 7 स्टील के तार होते हैं, जिनका व्यास भी 3.53 mm होता है। ये तार कंडक्टर को असाधारण यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं, जिससे यह अत्यंत लंबी दूरी के स्पैन (span) पर भी बिना ज़्यादा झुके लटक सकता है।
* कुल व्यास (Overall Diameter):
मूस कंडक्टर का कुल व्यास लगभग 31.77 mm होता है।
* कुल वज़न (Total Weight):
इसका वज़न लगभग 1999 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* करंट कैरिंग क्षमता (Current Carrying Capacity): यह कंडक्टर लगभग 763 एम्पीयर तक की धारा को वहन कर सकता है, जो इसे सबसे ज़्यादा क्षमता वाले कंडक्टरों में से एक बनाता है।
मूस कंडक्टर के फायदे (Profits)
मूस कंडक्टर के उपयोग के कई फायदे हैं, जो इसे EHV (Extra High Voltage) ट्रांसमिशन के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाते हैं:
* अत्यंत उच्च तन्य शक्ति (Extremely High Tensile Strength):
स्टील कोर की वजह से इसमें बहुत ज़्यादा मजबूती होती है। यह इसे बहुत लंबी दूरी के स्पैन पर कम शिथिलता (sag) के साथ स्थापित करने की अनुमति देता है, जैसे कि नदियों या घाटियों के पार, जहाँ टावरों की संख्या कम हो सकती है।
* उच्च करंट क्षमता (High Current Capacity):
इसमें बड़ी संख्या में एल्यूमीनियम के तार होने के कारण, यह बहुत अधिक मात्रा में विद्युत धारा को वहन कर सकता है, जो 220 kV और उससे अधिक वोल्टेज वाली लाइनों के लिए आवश्यक है।
* कम शिथिलता (Low Sag):
इसकी उच्च यांत्रिक शक्ति के कारण, यह गर्मी के मौसम में भी ज़्यादा नहीं झुकता। इससे लाइनों को ज़मीन से सुरक्षित दूरी पर बनाए रखना आसान होता है, जो सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है।
* किफायती (Economical):
अपनी उच्च क्षमता और मजबूती के कारण, यह टावरों और अन्य सहायक संरचनाओं की संख्या को कम कर सकता है, जिससे लंबी दूरी के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में कुल लागत कम हो जाती है।
* उत्कृष्ट चालकता (Excellent Conductivity): एल्यूमीनियम के तारों की बड़ी संख्या बिजली के नुकसान को कम करती है और ऊर्जा का कुशल संचरण सुनिश्चित करती है।
मूस कंडक्टर के नुकसान (Losses)
मूस कंडक्टर का उपयोग करते समय कुछ संभावित नुकसान या सीमाएं भी हैं:
* अधिक वज़न (Higher Weight):
इसका वज़न अन्य छोटे कंडक्टरों की तुलना में बहुत ज़्यादा होता है। इससे इसे संभालने, स्थापित करने और बनाए रखने के लिए मज़बूत टावरों और विशेष उपकरणों की ज़रूरत होती है, जिससे स्थापना की लागत और जटिलता बढ़ जाती है।
* स्थापना की जटिलता (Installation Complexity):
इसके बड़े आकार और वज़न के कारण, इसे स्थापित करने के लिए विशेष तकनीकों और कुशल श्रम की आवश्यकता होती है, जिससे स्थापना का समय और लागत बढ़ सकती है।
* सीमित ऑपरेटिंग तापमान (Limited Operating Temperature):
एल्यूमीनियम तारों के कारण इसका लगातार ऑपरेटिंग तापमान 75°C के आसपास तक सीमित होता है। इससे ज़्यादा तापमान पर, एल्यूमीनियम नरम हो सकता है, जिससे कंडक्टर की यांत्रिक शक्ति पर असर पड़ सकता है।
संक्षेप में,
मूस कंडक्टर का उपयोग तब किया जाता है जब बिजली की बहुत ज़्यादा मात्रा को लंबी दूरी तक उच्च वोल्टेज पर ले जाना होता है। यह अपनी उच्च क्षमता और मजबूती के कारण 220 kV और EHV ट्रांसमिशन लाइनों के लिए एक विश्वसनीय और प्रभावी विकल्प है, खासकर उन जगहों पर जहाँ लंबे स्पैन की आवश्यकता होती है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टरों में, "रैबिट" (Rabbit) एक विशिष्ट प्रकार का कंडक्टर है जिसका उपयोग मुख्य रूप से कम और मध्यम वोल्टेज की विद्युत संचरण लाइनों में किया जाता है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। यह अपने कुछ विशिष्ट गुणों के कारण कई फायदे और नुकसान के साथ आता है।
खरगोश कंडक्टर का विवरण
* आकार और संरचना:
खरगोश कंडक्टर आमतौर पर 6 एल्यूमीनियम तारों और 1 स्टील कोर तार से बना होता है।
* एल्यूमीनियम तार (Aluminium Strands):
6 तार, जिनका व्यास 3.35 मिमी होता है।
* स्टील कोर (Steel Core):
1 तार, जिसका व्यास भी 3.35 मिमी होता है।
* कुल व्यास:
कुल कंडक्टर का व्यास लगभग 10.05 मिमी होता है।
* क्षेत्रफल:
एल्यूमीनियम का कुल क्षेत्रफल लगभग 52.88 वर्ग मिमी (mm²) और कुल क्षेत्रफल 61.70 वर्ग मिमी होता है।
* भार:
इसका कुल भार लगभग 214 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* विद्युत गुण:
इसकी करंट वहन क्षमता (current carrying capacity) लगभग 185 एम्पीयर होती है और इसका DC प्रतिरोध 20°C पर 0.5426 Ω/किमी होता है।
खरगोश कंडक्टर के लाभ
* कम लागत:
अन्य बड़े ACSR कंडक्टरों की तुलना में खरगोश कंडक्टर अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, जिससे कम बजट वाले प्रोजेक्ट्स में इनका उपयोग करना किफायती होता है।
* अच्छा शक्ति-से-भार अनुपात (Strength-to-Weight Ratio):
स्टील कोर की वजह से यह पर्याप्त यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है, जो इसे हवा, बर्फ और अन्य मौसम की स्थितियों का सामना करने में मदद करता है। साथ ही एल्यूमीनियम का हल्कापन इसे स्थापित करने में आसान बनाता है।
* स्थापना में आसानी:
हल्के वजन और सरल संरचना के कारण इसे स्थापित करना और रखरखाव करना आसान होता है।
* अच्छी चालकता:
एल्यूमीनियम तारों की उच्च चालकता बिजली के कुशल संचरण को सुनिश्चित करती है, जिससे ऊर्जा का नुकसान कम होता है।
* लंबे अंतराल (Long Span):
इसकी उच्च यांत्रिक शक्ति के कारण इसे दो खंभों के बीच लंबे अंतराल पर लगाया जा सकता है, जिससे खंभों की संख्या कम हो जाती है और लागत में और कमी आती है।
खरगोश कंडक्टर की हानियाँ
* सीमित वोल्टेज और करंट क्षमता:
खरगोश कंडक्टर की करंट वहन क्षमता सीमित होती है (लगभग 185 एम्पीयर), जो इसे उच्च वोल्टेज और भारी विद्युत संचरण लाइनों के लिए अनुपयुक्त बनाती है।
* गलवानिक जंग (Galvanic Corrosion): एल्यूमीनियम और स्टील के बीच नमी और हवा के संपर्क में आने पर गैल्वेनिक जंग (एक प्रकार का रासायनिक जंग) का खतरा होता है, जिससे कंडक्टर का जीवनकाल कम हो सकता है।
* उच्च तापमान पर सीमित प्रदर्शन:
ACSR कंडक्टर, विशेष रूप से खरगोश, उच्च तापमान पर बहुत अच्छी तरह से काम नहीं कर पाते हैं। इनकी तापमान सीमा लगभग 100°C होती है, जबकि कुछ नए कंडक्टर 180°C तक के तापमान को झेल सकते हैं।
* फ्लेक्सिबिलिटी की कमी:
स्टील कोर की उपस्थिति के कारण यह पूरी तरह से एल्यूमीनियम वाले कंडक्टरों की तुलना में कम लचीला होता है।
सारांश में,
खरगोश एसीएसआर कंडक्टर ग्रामीण विद्युतीकरण और कम क्षमता वाली लाइनों के लिए एक उत्कृष्ट और किफायती विकल्प है, लेकिन इसकी सीमित करंट और वोल्टेज रेटिंग इसे बड़े पैमाने पर औद्योगिक या हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन के लिए अनुपयुक्त बनाती है।
एसीएसआर (ACSR) कंडक्टरों में, "वुल्फ" (Wolf) एक महत्वपूर्ण प्रकार का कंडक्टर है जिसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (High Voltage) की विद्युत संचरण लाइनों में किया जाता है, खासकर 33kV और 132kV के बीच की लाइनों में। इसकी उच्च यांत्रिक शक्ति और अच्छी चालकता इसे एक आदर्श विकल्प बनाती है।
वुल्फ कंडक्टर का विवरण
* आकार और संरचना:
वुल्फ कंडक्टर में आमतौर पर 30 एल्यूमीनियम के तार और 7 स्टील के तार होते हैं।
* एल्यूमीनियम तार (Aluminium Strands):
30 तार, जिनका व्यास 2.59 मिमी होता है।
* स्टील कोर (Steel Core):
7 तार, जिनका व्यास 2.59 मिमी होता है।
* कुल व्यास:
कुल कंडक्टर का व्यास लगभग 18.13 मिमी होता है।
* क्षेत्रफल:
एल्यूमीनियम का कुल क्षेत्रफल 150 वर्ग मिमी (mm²) होता है और कुल क्षेत्रफल 194.9 वर्ग मिमी होता है।
* भार:
इसका कुल भार लगभग 726 किलोग्राम प्रति किलोमीटर होता है।
* विद्युत गुण:
इसकी करंट वहन क्षमता (current carrying capacity) लगभग 355 एम्पीयर होती है। इसका DC प्रतिरोध 20°C पर 0.1828 Ω/किमी होता है।
* यांत्रिक शक्ति:
इसका ब्रेकिंग लोड (breaking load) लगभग 69.2 kN होता है, जो इसे लंबी दूरी और कठोर मौसम की स्थितियों के लिए बहुत मजबूत बनाता है।
वुल्फ कंडक्टर के लाभ
* उच्च यांत्रिक शक्ति:
स्टील के तारों का 7-स्ट्रैंड कोर इसे अत्यधिक यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है। यह इसे लंबी दूरी के स्पैन (जैसे नदियों या घाटियों के पार) और भारी हवा और बर्फ के भार को झेलने में सक्षम बनाता है।
* उच्च करंट वहन क्षमता:
150 वर्ग मिमी के एल्यूमीनियम क्षेत्र के कारण, इसकी करंट वहन क्षमता काफी अधिक होती है, जो इसे 33kV और 132kV जैसी उच्च वोल्टेज वितरण और संचरण लाइनों के लिए उपयुक्त बनाती है।
* लागत प्रभावी:
तांबे जैसे अन्य कंडक्टरों की तुलना में एल्यूमीनियम का उपयोग इसे किफायती बनाता है, जिससे बड़ी परियोजनाओं की कुल लागत कम हो जाती है।
* लंबे स्पैन:
इसकी उच्च शक्ति के कारण, दो टावरों के बीच की दूरी को बढ़ाया जा सकता है, जिससे टावरों की संख्या और स्थापना लागत में कमी आती है।
* विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त:
इसका उपयोग न केवल हाई-टेंशन (HT) ओवरहेड लाइनों में होता है, बल्कि सबस्टेशन में इनकमिंग या आउटगोइंग फीडर के रूप में भी किया जाता है।
वुल्फ कंडक्टर की हानियाँ
* गलवानिक जंग का खतरा:
एल्यूमीनियम और स्टील के बीच नमी और हवा के संपर्क में आने पर गैल्वेनिक जंग का खतरा रहता है। इस जंग को रोकने के लिए कंडक्टर पर अक्सर कोटिंग या गैल्वनाइजिंग प्रक्रिया की जाती है, लेकिन यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाता।
* वजन और स्थापना:
खरगोश जैसे छोटे कंडक्टरों की तुलना में, वुल्फ कंडक्टर काफी भारी होता है, जिससे इसकी स्थापना और हैंडलिंग थोड़ी अधिक कठिन हो सकती है।
* लचीलेपन की कमी:
स्टील कोर की वजह से यह पूरी तरह से एल्यूमीनियम वाले कंडक्टरों की तुलना में कम लचीला होता है।
* उच्च तापमान पर सीमित प्रदर्शन:
यद्यपि यह उच्च शक्ति वाला कंडक्टर है, इसकी इष्टतम परिचालन तापमान सीमा लगभग 70°C होती है। अत्यधिक उच्च तापमान इसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
संक्षेप में,
वुल्फ एसीएसआर कंडक्टर अपनी उच्च शक्ति और करंट वहन क्षमता के कारण उच्च वोल्टेज वितरण और संचरण लाइनों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है। इसकी यांत्रिक मजबूती इसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी के संचरण के लिए आदर्श बनाती है। हालांकि, इसे जंग से बचाने के लिए उचित रखरखाव और सावधानी की आवश्यकता होती है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें