अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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ट्रांसमिशन टावरों को उनके कार्य, निर्माण सामग्री और डिज़ाइन के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
ट्रांसमिशन टावरों के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
ये टावर लाइन पर लगने वाले बल और उनके स्थान के आधार पर बनाए जाते हैं:
जालीदार स्टील टावर (Lattice Steel Towers):
ये सबसे आम प्रकार हैं, जो स्टील के कोणों और क्रॉस-सेक्शन के खुले फ्रेमवर्क से बने होते हैं।
इनमें मजबूती-से-वजन का अनुपात (Strength-to-Weight Ratio) उत्कृष्ट होता है और ये लंबी दूरी पर भारी लाइनों के लिए आदर्श होते हैं।
ट्यूबलर स्टील पोल (Tubular Steel Poles - TSP) या मोनोपोल टावर (Monopole Towers):
गाइड टावर (Guyed Towers):
सेल्फ-सपोर्टिंग टावर (Self-Supporting Towers):
सस्पेंशन टावर (Suspension Tower) ट्रांसमिशन लाइन के सबसे आम प्रकार के टावर हैं, जिन्हें टेंजेंट टावर (Tangent Tower) भी कहा जाता है।
तनाव टावर (Tension Tower) ऐसे ट्रांसमिशन टावर होते हैं जिन्हें विशेष रूप से लाइन कंडक्टरों के अनुदैर्ध्य तनाव (Longitudinal Strain) या खिंचाव बल (Pulling force) को वहन करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इन्हें एंगल टावर (Angle Tower) या डेविएशन टावर (Deviation Tower) भी कहा जाता है।
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विशेषता |
विवरण |
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मुख्य कार्य |
लाइन कंडक्टरों के पूर्ण तनाव (Full Tension) को सहन करना। |
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उपयोग के स्थान |
1. जहाँ ट्रांसमिशन लाइन दिशा बदलती है (कोण बनाती है)। |
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2. लाइन के सिरे (Terminal Points) पर, जैसे सबस्टेशन या अंडरग्राउंड केबल कनेक्शन पर। |
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3. नदी या रेलवे क्रॉसिंग जैसी विशेष बाधाओं पर। |
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4. सुरक्षा के लिए लंबी सीधी लाइन के बीच में सेक्शनिंग (खंडन) बिंदु पर। |
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लोड वहन |
ये नीचे की ओर बल, पार्श्व बल, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से अनुदैर्ध्य बल (तारों का खिंचाव) वहन करते हैं। |
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इंसुलेटर का प्रकार |
इनमें कंडक्टरों को सहारा देने के लिए स्ट्रेन इंसुलेटर स्ट्रिंग (Strain Insulator String) का उपयोग किया जाता है। ये इंसुलेटर स्ट्रिंग आमतौर पर क्षैतिज (Horizontally) लगाई जाती हैं ताकि तार के तनाव को झेल सकें। |
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संरचना |
सस्पेंशन टावरों की तुलना में ये अधिक मजबूत, अधिक भारी और आधार पर चौड़े होते हैं, क्योंकि इन्हें अत्यधिक खिंचाव बलों का सामना करना पड़ता है। |
तनाव टावरों को लाइन में विचलन (दिशा परिवर्तन) के कोण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
सस्पेंशन टावर के विपरीत, तनाव टावर लाइन की दिशा को प्रभावी ढंग से मोड़ने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।
टर्मिनल टावर (Terminal Tower), जिसे डेड-एंड टावर (Dead-end Tower) भी कहा जाता है, ट्रांसमिशन लाइन के सबसे मजबूत और सबसे भारी टावरों में से एक होता है।
टर्मिनल टावर एक प्रकार के तनाव टावर (Tension Tower) होते हैं, लेकिन इन्हें विशेष रूप से पूर्ण, एकतरफा अनुदैर्ध्य तनाव (Full, Unbalanced Longitudinal Tension) को वहन करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
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मुख्य कार्य |
लाइन कंडक्टरों के अधिकतम तनाव (Maximum strain) को पूरी तरह से एक दिशा में सहन करना। |
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उपयोग के स्थान |
1. ट्रांसमिशन लाइन का अंत: जहाँ लाइन समाप्त होती है और सबस्टेशन (Substation) के उपकरणों से जुड़ती है। |
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2. लाइन की शुरुआत: जहाँ लाइन पावर जनरेशन स्टेशन से निकलती है। |
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3. अंडरग्राउंड केबल ट्रांज़िशन: जहाँ ओवरहेड लाइनें भूमिगत केबलिंग में बदलती हैं। |
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4. क्रॉसिंग: लंबी नदियों, चौड़े राजमार्गों या रेलवे क्रॉसिंग से ठीक पहले और बाद में। |
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5. कैस्केड विफलता को रोकना: सुरक्षा के लिए लंबी सीधी लाइनों में भी समय-समय पर (पीरियडिकली) लगाए जाते हैं ताकि एक टावर की विफलता पूरी लाइन को नीचे न गिरा दे। |
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लोड वहन |
यह टावर लाइन पर आने वाले सभी प्रकार के बलों (वजन, हवा, और सबसे महत्वपूर्ण, एक तरफ से आने वाले खींचाव/तनाव) को वहन करने के लिए बनाया जाता है। |
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इंसुलेटर का प्रकार |
इसमें क्षैतिज रूप से (Horizontally) लगाई गई स्ट्रेन इंसुलेटर स्ट्रिंग का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसे कंडक्टरों के भारी तनाव का प्रतिरोध करना होता है। |
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संरचना |
टर्मिनल टावर आमतौर पर अपनी श्रेणी के सबसे मजबूत, सबसे भारी और सबसे महंगे टावर होते हैं, क्योंकि उन्हें सबसे कठोर या असंतुलित यांत्रिक लोड (Unbalanced Mechanical Load) को झेलना पड़ता है। |
ट्रांसपोज़िशन टावर (Transposition Tower) एक विशेष प्रकार का टावर है जिसका उपयोग तीन-फेज़ ट्रांसमिशन लाइन में कंडक्टरों (तारों) के भौतिक स्थान (Physical Position) को क्रमिक रूप से बदलने के लिए किया जाता है।
यह टावर एक लाइन सेक्शन को अगले सेक्शन से जोड़ते समय कंडक्टरों को इंटरचेंज करता है, जिससे पूरी लाइन पर विद्युत समरूपता (Electrical Symmetry) सुनिश्चित होती है।
तीन-फेज़ ट्रांसमिशन लाइन में, तीनों फेज़ (R, Y, B) कंडक्टर एक टावर पर एक ही भौतिक व्यवस्था (जैसे, ऊपर, बीच और नीचे) में नहीं होते हैं। इस असमान दूरी के कारण निम्नलिखित समस्याएँ उत्पन्न होती हैं:
इन समस्याओं को दूर करने के लिए, लंबी ट्रांसमिशन लाइनों को तीन बराबर खंडों (Sections) में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक खंड के अंत में एक ट्रांसपोज़िशन टावर का उपयोग किया जाता है।
ट्रांसपोज़िशन टावर यह सुनिश्चित करता है कि पूरी लाइन की लंबाई में:
{{1}{3}{ दूरी के लिए}: {फेज़ A, B, और C क्रमशः स्थिति 1, 2, और 3 पर रहते हैं।}}
{{अगली }{1}{3}{ दूरी के लिए}: {फेज़ A, B, और C अपनी स्थिति आपस में बदल लेते हैं।}}
{{अंतिम }{1}{3}{ दूरी के लिए}: {फेज़ फिर से स्थिति बदलते हैं ताकि प्रत्येक फेज़ ने पूरी लाइन में हर स्थिति पर समान दूरी तय की हो।}}
इस प्रक्रिया से,
तीनों फेज़ों में औसत इंडक्टेंस और कैपेसिटेंस लगभग बराबर हो जाता है, जिससे लाइन में संतुलित वोल्टेज और धारा का प्रवाह होता है।
'स्वयं-सहायक टावर' (Self-Supporting Tower) एक प्रकार का संचार या प्रसारण टावर होता है जिसे बाहरी तारों (guy-wires) या अन्य समर्थन की आवश्यकता के बिना स्वयं ही खड़ा रहने के लिए डिज़ाइन और निर्मित किया जाता है।
'गुएड टावर्स' (Guyed Towers) या गाइड मास्ट एक प्रकार के लंबी, पतली संचार या प्रसारण टावर होते हैं जिन्हें अपनी स्थिरता बनाए रखने के लिए गाइड वायर या स्टे केबल्स (Guy Wires or Stay Cables) की आवश्यकता होती है।
ये तार टावर के शरीर से जुड़े होते हैं और टावर के चारों ओर के मैदान या ठोस एंकर से बंधे होते हैं, जिससे टावर को सीधा खड़ा रहने और हवा के भार का सामना करने में मदद मिलती है।
संक्षेप में,
यह एक पतला मस्तूल है जो गाइ-वायर नामक तनाव वाले केबलों की एक श्रृंखला द्वारा सीधा रखा जाता है।
7. ए-प्रकार के टावर ( A-Type Towers )
टावरों को उनके उपयोग, डिज़ाइन और उन्हें खड़े रहने के लिए आवश्यक समर्थन के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
आपके पिछले प्रश्नों के संदर्भ में, यहाँ मुख्य रूप से संचार (Communication) और विद्युत पारेषण (Power Transmission) टावरों के प्रकार दिए गए हैं:
ये वे टावर हैं जिनका उपयोग मोबाइल सिग्नल, रेडियो, माइक्रोवेव और टेलीविजन प्रसारण के लिए किया जाता है:
ये वे टावर हैं जो बिजली की लाइनों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन्हें लाइन के झुकाव के कोण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
8. बी-प्रकार टावर ( B-Type Towers )
बी-प्रकार टावर (B-Type Tower) मुख्य रूप से विद्युत पारेषण (Electric Power Transmission) लाइनों में उपयोग होने वाला एक प्रकार का टेंशन या एंगल टावर है।
यह टावर ट्रांसमिशन लाइन को दिशा बदलने या झुकाव (Angle of Deviation) देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
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मुख्य उपयोग |
ट्रांसमिशन लाइन को झुकाव (मोड़) देने के लिए। |
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झुकाव कोण (Angle of Deviation) |
यह टावर आमतौर पर 2° से लेकर 15° तक के कोण पर लाइन को मोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है। |
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प्रकार का नाम |
इसे अक्सर टेंशन टावर (Tension Tower) या एंगल टावर (Angle Tower) भी कहा जाता है, क्योंकि इसे कंडक्टरों के उच्च तनाव (Tension) को सहन करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। |
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बनावट/डिज़ाइन |
इसकी संरचना ए-टाइप सस्पेंशन टावर की तुलना में अधिक मजबूत होती है क्योंकि इसे सीधे लाइन में लगने वाले हवा के बल के साथ-साथ दिशा बदलने के कारण उत्पन्न हुए पार्श्व तनाव (Lateral Stress) को भी संभालना पड़ता है। |
संक्षेप में:
जब पावर ट्रांसमिशन लाइन में हल्का से मध्यम मोड़ आता है, तो वहाँ सामान्य सस्पेंशन टावर (A-टाइप) के बजाय बी-प्रकार टेंशन टावर का उपयोग किया जाता है ताकि कंडक्टरों के तनाव को संतुलित किया जा सके और लाइन को स्थिर रखा जा सके।
9. सी-प्रकार टावर ( C-Type Towers )
सी-प्रकार टावर (C-Type Tower) मुख्य रूप से विद्युत पारेषण (Electric Power Transmission) लाइनों में उपयोग होने वाला एक टेंशन या एंगल टावर है। यह टावर लाइन में एक बड़ा मोड़ या झुकाव आने पर कंडक्टरों द्वारा उत्पन्न तनाव (Tension) को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
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मुख्य उपयोग |
ट्रांसमिशन लाइन को मध्यम से बड़े कोण पर मोड़ने या झुकाने के लिए। |
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झुकाव कोण (Angle of Deviation) |
इस टावर का उपयोग आमतौर पर 15° से लेकर 30° तक के कोण पर लाइन को मोड़ने के लिए किया जाता है। |
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प्रकार का नाम |
इसे भी टेंशन टावर या एंगल टावर कहा जाता है, लेकिन यह बी-प्रकार टावर की तुलना में अधिक बल सहने के लिए बनाया जाता है। |
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बनावट/डिज़ाइन |
इसकी संरचना बी-टाइप टावर से भी अधिक मजबूत होती है, क्योंकि यह दिशा बदलने के कारण उत्पन्न हुए बड़े पार्श्व तनाव और कंडक्टरों के उच्च तनाव को संभालता है। |
संक्षेप में:
सी-प्रकार टावर उन स्थानों पर लगाया जाता है जहाँ ट्रांसमिशन लाइन का मार्ग एक महत्वपूर्ण कोण पर मुड़ता है। यह सुनिश्चित करता है कि उच्च तनाव वाली लाइनें मोड़ पर स्थिर रहें और सुरक्षा के मानकों का पालन करें।
10. डी-प्रकार टावर ( D-Type Towers )
डी-प्रकार टावर (D-Type Tower) विद्युत पारेषण लाइनों में उपयोग होने वाला एक भारी टेंशन (Heavy Tension) या डेड-एंड (Dead-End) टावर है। यह ट्रांसमिशन लाइन के मार्ग में सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण बदलावों को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
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मुख्य उपयोग |
बड़े कोण पर लाइन को मोड़ने या लाइन को समाप्त (Dead-End) करने के लिए। |
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झुकाव कोण (Angle of Deviation) |
इस टावर का उपयोग आमतौर पर 30° से लेकर 60° तक के कोण पर लाइन को मोड़ने के लिए किया जाता है। |
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अन्य महत्वपूर्ण उपयोग |
इसका उपयोग विशेष क्रॉसिंग (जैसे, रेलवे क्रॉसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) क्रॉसिंग, या बड़ी नदी क्रॉसिंग) के दोनों सिरों पर किया जाता है, जहाँ अधिकतम सुरक्षा और यांत्रिक स्थिरता आवश्यक होती है। |
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प्रकार का नाम |
यह एक टेंशन टावर है जिसे डेड-एंड टावर या टर्मिनल टावर के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसे उच्च अक्षीय भार (Axial Load) और तनाव को सहन करने के लिए बनाया जाता है। |
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बनावट/डिज़ाइन |
यह A, B, और C-टाइप टावरों में सबसे मजबूत होता है, क्योंकि इसे पूरी लाइन में सबसे अधिक यांत्रिक तनाव का सामना करना पड़ता है। |
संक्षेप में:
डी-प्रकार टावर ट्रांसमिशन लाइन में सबसे अधिक तनाव वाली संरचना होती है। यह लाइन की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन को संभालता है या एक खंड को समाप्त करने से पहले अंतिम सहारा प्रदान करता है, जिससे पूरी लाइन की स्थिरता सुनिश्चित होती है।
11. एकल सर्किट टावर ( Single Circuit Towers )
एकल सर्किट टावर (Single Circuit Tower) वह विद्युत पारेषण टावर है जो केवल एक ही विद्युत सर्किट को सहारा देता है।
एक विद्युत सर्किट में आमतौर पर तीन चरण (Three Phases) होते हैं। इसलिए, सिंगल सर्किट टावर पर आपको आमतौर पर तीन मुख्य कंडक्टर (तार) दिखाई देंगे।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
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सर्किट की संख्या |
केवल एक सर्किट। |
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कंडक्टरों की संख्या |
एक 3-फेज (3-Phase) सिस्टम में आमतौर पर तीन कंडक्टर (या प्रति फेज बंडल किए गए कंडक्टरों के तीन समूह) होते हैं। |
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संरचना |
कंडक्टरों को टावर के एक ही तरफ या दोनों तरफ क्षैतिज रूप से (Horizontal) व्यवस्थित किया जा सकता है, लेकिन वे मिलकर केवल एक सर्किट बनाते हैं। |
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उपयोग |
इन टावरों का उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहाँ कम बिजली की मांग होती है या जहाँ भविष्य में विस्तार की आवश्यकता नहीं होती है। |
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पहचान |
यदि आप ट्रांसमिशन लाइन टावर पर केवल तीन मुख्य इंसुलेटर स्ट्रिंग्स (Insulator Strings) और तीन कंडक्टर देखते हैं, तो यह एक सिंगल सर्किट टावर है। (ध्यान दें: 3 इंसुलेटर स्ट्रिंग्स का मतलब 3 फेज होते हैं, और एक सर्किट में 3 फेज होते हैं)। |
सिंगल सर्किट (SC) टावर के उदाहरण:
इसके विपरीत,
डबल सर्किट टावर (Double Circuit Tower) एक ही टावर पर दो अलग-अलग सर्किट (अर्थात छह कंडक्टर) को सहारा देता है, जिससे कम जगह में अधिक बिजली का पारेषण किया जा सकता है।
12. डबल सर्किट टावर ( Double Circuit Towers )
डबल सर्किट टावर (Double Circuit Tower) वह विद्युत पारेषण टावर है जो एक ही संरचना पर दो स्वतंत्र विद्युत सर्किटों को सहारा देता है।
यह टावर एक ही गलियारे (Right-of-Way) का उपयोग करके सिंगल सर्किट टावर की तुलना में दोगुना बिजली पारेषित करने की क्षमता रखता है।
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विशेषता/लाभ |
विवरण |
|---|---|
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सर्किट की संख्या |
दो सर्किट। |
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कंडक्टरों की संख्या |
एक 3-फेज सिस्टम में दो सर्किटों के लिए कुल छह कंडक्टर (तीन कंडक्टर प्रति सर्किट) होते हैं। इन छह कंडक्टरों को टावर के दोनों तरफ (तीन एक तरफ और तीन दूसरी तरफ) लंबवत (Vertically) व्यवस्थित किया जाता है। |
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अंतरिक्ष की बचत |
शहरी या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि यह दो अलग-अलग सिंगल सर्किट लाइनों के लिए आवश्यक भूमि (Land) की बचत करता है। |
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विश्वसनीयता (Reliability) |
अगर एक सर्किट में कोई खराबी (Fault) आती है, तो दूसरे सर्किट के माध्यम से बिजली का पारेषण जारी रखा जा सकता है। यह बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। |
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संरचना |
डबल सर्किट टावर, सिंगल सर्किट टावर की तुलना में आमतौर पर ऊँचा और अधिक मजबूत (Mechanically Strong) होता है, क्योंकि इसे छह कंडक्टरों का अतिरिक्त वजन और तनाव संभालना होता है। |
डबल सर्किट टावर का उपयोग उच्च वोल्टेज (जैसे 132 kV, 220 kV, 400 kV) पारेषण लाइनों में व्यापक रूप से किया जाता है।
13. मल्टी सर्किट टावर ( Multi-Circuit Towers )
मल्टी सर्किट टावर (Multi-Circuit Tower) वह विद्युत पारेषण टावर है जो एक ही संरचना पर दो से अधिक स्वतंत्र विद्युत सर्किटों को सहारा देता है।
यह सिंगल सर्किट (1 सर्किट) और डबल सर्किट (2 सर्किट) टावरों का एक उन्नत रूप है, जिसे सीमित भूमि (Right-of-Way) में अधिकतम बिजली पारेषण क्षमता प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषता/उद्देश्य |
विवरण |
|---|---|
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सर्किट की संख्या |
तीन या उससे अधिक सर्किट (उदाहरण के लिए, 3 सर्किट, 4 सर्किट, आदि)। |
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कंडक्टरों की संख्या |
प्रत्येक 3-फेज सर्किट में तीन कंडक्टर होते हैं, इसलिए इसमें आमतौर पर नौ या उससे अधिक कंडक्टर होते हैं। उदाहरण के लिए, 4-सर्किट टावर में 4 × 3 = 12 कंडक्टर हो सकते हैं। |
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मुख्य उद्देश्य |
कम भूमि का उपयोग: सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि यह कम जगह/गलियारे (Right-of-Way) में बड़ी मात्रा में बिजली पारेषित करने की अनुमति देता है, जो शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। |
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वोल्टेज स्तर |
मल्टी सर्किट टावरों का उपयोग अक्सर ऐसे मामलों में किया जाता है जहाँ एक ही टावर पर विभिन्न वोल्टेज स्तरों (Multi-Voltage) के सर्किट को ले जाना होता है (जैसे 132 kV, 220 kV, और 400 kV)। |
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संरचना की जटिलता |
ये टावर यांत्रिक रूप से बहुत मजबूत और संरचनात्मक रूप से अधिक जटिल होते हैं, क्योंकि उन्हें अधिक भार, हवा का दबाव और कंडक्टरों को पर्याप्त रूप से अलग रखने की आवश्यकता होती है। |
मल्टी सर्किट टावर एक ही इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके उच्च पारेषण घनत्व (High Transmission Density) सुनिश्चित करते हैं।
नदी पार करने वाले टावर (River Crossing Towers) विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए ऊँचे और मजबूत विद्युत पारेषण टावर होते हैं, जिनका निर्माण चौड़ी नदियों, झीलों, या जल निकायों के ऊपर से बिजली लाइनों को ले जाने के लिए किया जाता है।
15. रेलवे क्रॉसिंग टावर्स (Railway Crossing Towers)
रेलवे क्रॉसिंग टावर्स (Railway Crossing Towers) वे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पारेषण टावर होते हैं जिनका उपयोग उच्च वोल्टेज बिजली लाइनों को किसी सक्रिय रेलवे ट्रैक के ऊपर से सुरक्षित रूप से पार कराने के लिए किया जाता है।
इन टावरों का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजली के कंडक्टर रेलवे की पटरियों, ट्रेनों और रेलवे के विद्युतीकृत ओवरहेड उपकरण (OHE) से पर्याप्त और सुरक्षित ऊँचाई (Vertical Clearance) पर रहें, ताकि कोई दुर्घटना न हो।
चूंकि रेलवे क्रॉसिंग एक संवेदनशील क्षेत्र होता है, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाले टावरों और पारेषण लाइन के डिज़ाइन के लिए कठोर सुरक्षा नियम और विनिर्देशों का पालन किया जाता है:
16. सड़क पार करने वाले टावर ( Road Crossing Towers)
सड़क पार करने वाले टावर (Road Crossing Towers) वे ट्रांसमिशन टावर होते हैं जिनका उपयोग उच्च वोल्टेज बिजली लाइनों को राष्ट्रीय राजमार्गों (NH), राज्य राजमार्गों (SH), या अन्य महत्वपूर्ण सड़कों के ऊपर से सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए किया जाता है।
इन टावरों का मुख्य लक्ष्य सड़क पर चलने वाले वाहनों (विशेषकर ऊँचे ट्रकों और निर्माण उपकरणों), यात्रियों और लाइनों के लिए आवश्यक सुरक्षित दूरी (Safety Clearance) बनाए रखना है।
सड़क पार करने वाले टावरों के डिज़ाइन और स्थापना के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा कठोर नियम निर्धारित किए गए हैं:
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