अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
Circuits, Voltage, Power, Frequency, Phase, DC, AC, Troubleshooting, Maintenance, Installation, Systems, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switch, Generation, Transmission, Distribution, Grid, Transformer, Generator, Motor, Switchgear, Electronics, Renewable, Energy, Solar, Wind, Smart, Grid, Control, PID, Controller, PLC, SCADA, HMI, Electricity, Testing, Measurement, Drives, Wiring, Current, Electrical, Engineering, Electrician, Diagram, BJT, MOSFET,
Ans.
एक संधारित्र (capacitor) को जनरेटर (generator) लोड से जोड़ने पर कई चीजें हो सकती हैं, जो संधारित्र के प्रकार, आकार और कनेक्शन की स्थिति पर निर्भर करती हैं।
संक्षेप में,
उचित आकार और नियंत्रित संधारित्र बैंक का उपयोग जनरेटर पर पावर फैक्टर को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अत्यधिक संधारित्र क्षमता गंभीर वोल्टेज अस्थिरता और क्षति का कारण बन सकती है।
यह अंतर मुख्य रूप से संधारित्र के सिद्धांत और आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है।
जब संधारित्र को DC सप्लाई से जोड़ा जाता है:
जब संधारित्र को AC सप्लाई से जोड़ा जाता है:
संक्षेप में,
संधारित्र को काम करने के लिए वोल्टेज में निरंतर परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जो केवल AC ही प्रदान करता है।
फ्यूज के विपरीत, सर्किट ब्रेकर को गलती ठीक होने के बाद रीसेट किया जा सकता है।
सर्किट ब्रेकर मुख्य रूप से थर्मल-मैग्नेटिक ट्रिपिंग (Thermal-Magnetic Tripping) सिद्धांत पर काम करता है, जो दो मुख्य प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है:
यह धीमे, लेकिन लगातार ओवरकरंट की स्थिति में सर्किट को बचाता है, जो तारों को गर्म करके आग लगने का खतरा पैदा कर सकता है।
यह अचानक, अत्यधिक और खतरनाक रूप से उच्च करंट (शॉर्ट सर्किट) की स्थिति में सर्किट को बचाता है।
जब ब्रेकर के संपर्क उच्च धारा को तोड़ते हुए खुलते हैं, तो उनके बीच एक विद्युत चाप (Electric Arc) उत्पन्न होता है। यदि इस आर्क को तुरंत नहीं बुझाया गया, तो यह ब्रेकर और पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।
Ans.
ट्रांसफार्मर शीतलन प्रणाली को मुख्य रूप से शीतलन माध्यम और परिसंचरण की विधि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
शीतलन माध्यम के आधार पर, ट्रांसफार्मर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
तेल निमज्जित ट्रांसफार्मर में, शीतलन के तरीके को और अधिक विशिष्ट बनाने के लिए दो अक्षरों के कोड का उपयोग किया जाता है:
शीतलन प्रणाली के सबसे आम प्रकार निम्नलिखित हैं, जिनमें से प्रत्येक का उपयोग ट्रांसफार्मर की क्षमता और परिचालन आवश्यकताओं पर निर्भर करता है:
ट्रांसफार्मर शीतलन प्रणाली को मुख्य रूप से शीतलन माध्यम और परिसंचरण की विधि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
शीतलन माध्यम के आधार पर, ट्रांसफार्मर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
तेल निमज्जित ट्रांसफार्मर में, शीतलन के तरीके को और अधिक विशिष्ट बनाने के लिए दो अक्षरों के कोड का उपयोग किया जाता है:
शीतलन प्रणाली के सबसे आम प्रकार निम्नलिखित हैं, जिनमें से प्रत्येक का उपयोग ट्रांसफार्मर की क्षमता और परिचालन आवश्यकताओं पर निर्भर करता है:
ट्रांसफार्मर शीतलन प्रणाली को मुख्य रूप से शीतलन माध्यम और परिसंचरण की विधि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
शीतलन माध्यम के आधार पर, ट्रांसफार्मर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
तेल निमज्जित ट्रांसफार्मर में, शीतलन के तरीके को और अधिक विशिष्ट बनाने के लिए दो अक्षरों के कोड का उपयोग किया जाता है:
शीतलन प्रणाली के सबसे आम प्रकार निम्नलिखित हैं, जिनमें से प्रत्येक का उपयोग ट्रांसफार्मर की क्षमता और परिचालन आवश्यकताओं पर निर्भर करता है:
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कोड |
पूरा नाम (हिंदी) |
परिसंचरण की विधि |
वर्णन |
|---|---|---|---|
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ONAN |
तेल प्राकृतिक वायु प्राकृतिक |
प्राकृतिक |
तेल का प्राकृतिक संवहन और फिर हवा द्वारा प्राकृतिक संवहन द्वारा गर्मी का अपव्यय। (छोटे और मध्यम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए उपयोग किया जाता है) |
|
ONAF |
तेल प्राकृतिक वायु बलपूर्वक |
प्राकृतिक (तेल), बलपूर्वक (वायु) |
तेल का प्राकृतिक संवहन, लेकिन गर्मी को तेजी से हटाने के लिए रेडिएटर (radiator) पर पंखों (Fans) का उपयोग किया जाता है। |
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OFAF |
तेल बलपूर्वक वायु बलपूर्वक |
बलपूर्वक |
पंप (Pump) का उपयोग करके तेल को जबरन ठंडा करने के लिए रेडिएटर/कूलर में परिचालित किया जाता है, और पंखों का उपयोग करके रेडिएटर को ठंडा किया जाता है। (उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर के लिए) |
|
OFWF |
तेल बलपूर्वक जल बलपूर्वक |
बलपूर्वक |
पंप का उपयोग करके तेल को जबरन परिचालित किया जाता है और पानी के कूलर द्वारा ठंडा किया जाता है। (बहुत बड़े ट्रांसफार्मर के लिए जहां पानी आसानी से उपलब्ध हो) |
|
AN |
वायु प्राकृतिक |
प्राकृतिक |
शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर में केवल प्राकृतिक वायु संवहन द्वारा ठंडा करना। (कम क्षमता वाले शुष्क प्रकार के लिए) |
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AF |
वायु बलपूर्वक |
बलपूर्वक |
शुष्क प्रकार के ट्रांसफार्मर में पंखों का उपयोग करके जबरन वायु संचलन द्वारा ठंडा करना। (मध्यम क्षमता वाले शुष्क प्रकार के लिए) |
यह सुरक्षा विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण होती है जब:
एंटी-पंपिंग रिले यह सुनिश्चित करता है कि जब ब्रेकर एक बार बंद हो जाए, तो वह क्लोजिंग कॉइल की सप्लाई को काट दे, भले ही ऑपरेटर ने क्लोजिंग बटन दबाए रखा हो, जिससे एक ही क्लोजिंग कमांड के लिए मल्टीपल क्लोजिंग ऑपरेशन को रोका जा सके।
यह मोटर अपनी आंतरिक संरचना (स्टेटर में इलेक्ट्रोमैग्नेट्स और रोटर में स्थायी चुंबक या सॉफ्ट आयरन) के कारण काम करती है।
स्टेपर मोटर का प्राथमिक उपयोग उन प्रणालियों में होता है जहाँ सटीक स्थिति नियंत्रण और सटीक गति नियंत्रण (Accurate Speed Control) की आवश्यकता होती है।
इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:
|
क्षेत्र |
उपयोग के उदाहरण |
|---|---|
|
विनिर्माण और स्वचालन |
3D प्रिंटर (XYZ अक्षों की सटीक गति), CNC मशीनें, पिक एंड प्लेस मशीनें, और लेज़र कटिंग मशीनें। |
|
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स |
स्कैनर और फैक्स मशीनें (स्कैनिंग हेड और पेपर फीड को नियंत्रित करने के लिए), डिस्क ड्राइव। |
|
रोबोटिक्स |
रोबोटिक आर्म्स और ग्रिपर्स की गति को नियंत्रित करने के लिए। |
|
चिकित्सा उपकरण |
तरल पदार्थों को नियंत्रित करने वाले सिरिंज पंप और स्कैनर। |
|
ऑटोमोटिव |
क्रूज़ नियंत्रण प्रणाली और डिजिटल इंजन नियंत्रण प्रणाली में। |
|
कैमरा उपकरण |
स्वचालित कैमरा लेंस फोकस तंत्र। |
करंट ट्रांसफार्मर (CT) एक विशेष प्रकार का ट्रांसफार्मर है जिसका उपयोग उच्च प्रत्यावर्ती धारा (High AC Current) को मापने के लिए किया जाता है।
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विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
पूर्ण रूप |
करंट ट्रांसफार्मर (Current Transformer), जिसे धारा ट्रांसफार्मर भी कहते हैं। |
|
कार्य |
प्राथमिक सर्किट की उच्च धारा को एक मानकीकृत, निम्न धारा (आमतौर पर 1A या 5A) तक कम करना। |
|
कनेक्शन |
यह हमेशा उस सर्किट के साथ श्रृंखला (Series) में जुड़ा होता है जिसकी धारा मापनी होती है। |
|
संरचना |
इसकी प्राथमिक वाइंडिंग (Primary Winding) में कम टर्न (Turns) होते हैं, जबकि द्वितीयक वाइंडिंग (Secondary Winding) में अधिक टर्न होते हैं। |
|
प्रकार |
यह एक स्टेप-अप (Step-Up) ट्रांसफार्मर के रूप में कार्य करता है (वोल्टेज बढ़ाता है, लेकिन धारा कम करता है)। |
|
उपयोग |
एमीटर (Ammeter), ऊर्जा मीटर और ओवरकरंट (Overcurrent) और शॉर्ट सर्किट प्रोटेक्शन रिले को सप्लाई देना। |
|
सुरक्षा नियम |
CT की द्वितीयक वाइंडिंग को कभी भी खुला (Open) नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे द्वितीयक वाइंडिंग में बहुत उच्च वोल्टेज प्रेरित हो सकता है और इन्सुलेशन क्षति हो सकती है। |
पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT) एक विशेष प्रकार का ट्रांसफार्मर है जिसका उपयोग उच्च प्रत्यावर्ती वोल्टेज (High AC Voltage) को मापने के लिए किया जाता है।
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
पूर्ण रूप |
पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (Potential Transformer), जिसे विभव ट्रांसफार्मर या वोल्टेज ट्रांसफार्मर भी कहते हैं। |
|
कार्य |
प्राथमिक सर्किट के उच्च वोल्टेज को एक मानकीकृत, निम्न वोल्टेज (आमतौर पर 110V) तक कम करना। |
|
कनेक्शन |
यह हमेशा उस सर्किट के साथ समानांतर (Parallel) में जुड़ा होता है जिसका वोल्टेज मापना होता है। |
|
संरचना |
इसकी प्राथमिक वाइंडिंग (Primary Winding) में अधिक टर्न (Turns) होते हैं, जबकि द्वितीयक वाइंडिंग (Secondary Winding) में कम टर्न होते हैं। |
|
प्रकार |
यह एक स्टेप-डाउन (Step-Down) ट्रांसफार्मर के रूप में कार्य करता है (वोल्टेज कम करता है)। |
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उपयोग |
वोल्टमीटर, ऊर्जा मीटर और ओवरवोल्टेज (Overvoltage) या अंडरवोल्टेज प्रोटेक्शन रिले को सप्लाई देना। |
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सुरक्षा नियम |
PT की द्वितीयक वाइंडिंग को सुरक्षा के लिए ग्राउंड (Ground) किया जाता है। |
सीटी और पीटी विद्युत प्रणालियों में सुरक्षा (Safety) और मापन सटीकता (Measurement Accuracy) सुनिश्चित करने के लिए अपरिहार्य हैं:
इन दोनों उपकरणों के लिए, यदि हम समान रेटेड क्षमता (Rated Capacity) (KVA) पर तुलना करते हैं, तो इंडक्शन मशीन (प्रेरण मोटर) में लोड धारा (Load Current) अधिकतम होगी।
यहां यह समझना आवश्यक है कि हम सामान्यतः नो-लोड करंट (No-Load Current) की तुलना करते हैं, क्योंकि ट्रांसफार्मर और इंडक्शन मोटर के नो-लोड करंट में बड़ा अंतर होता है। हालाँकि, यदि प्रश्न अधिकतम 'लोड धारा' के बारे में है, तो यह तुलना दोनों की फुल-लोड करंट (Full-Load Current) के अनुपात पर निर्भर करती है।
यदि दोनों उपकरणों की {KVA} रेटिंग और आपूर्ति वोल्टेज समान हैं, तो उनके {Full-Load Current (}} रेटेड धारा) सैद्धांतिक रूप से लगभग समान होंगे, क्योंकि {Current} = {KVA} / {Voltage} होता है।
परन्तु, नो-लोड (No-Load) की स्थिति में, इंडक्शन मशीन अधिक धारा लेती है, जो कि इसकी अधिकतम नो-लोड धारा होती है।
प्रेरण मोटर (Induction Motor) को उच्च नो-लोड करंट की आवश्यकता होती है क्योंकि:
निष्कर्ष:
{KVA} रेटिंग के आधार पर दोनों का फुल-लोड करंट लगभग समान होगा। लेकिन यदि हम दोनों के नो-लोड करंट या शुरुआती करंट की तुलना करें, तो इंडक्शन मशीन एयर गैप के कारण आवश्यक उच्च मैग्नेटाइजिंग करंट के कारण, ट्रांसफार्मर की तुलना में काफी अधिक धारा खींचती है।
पावर फैक्टर ({PF}) किसी {AC} विद्युत परिपथ में वास्तविक शक्ति (Real Power) ({kW}) और आभासी शक्ति (Apparent Power) ({kVA}) का अनुपात होता है।
{Power Factor (PF)} = {{वास्तविक शक्ति (Real Power)}}{{आभासी शक्ति (Apparent Power)}} = {{kW}}{{kVA}}
यह अनुपात बताता है कि कुल आपूर्ति की गई विद्युत शक्ति ({kVA}) का कितना हिस्सा वास्तव में उपयोगी कार्य (जैसे प्रकाश या यांत्रिक ऊर्जा) करने में ({kW}) परिवर्तित हो रहा है।
तकनीकी रूप से, पावर फैक्टर वोल्टेज और करंट की तरंगों के बीच कला कोण (phi) के कोसाइन ({cosine}) मान के बराबर होता है:{PF} = cos(phi)
इसका मान हमेशा 0 और 1 के बीच होता है।
पावर फैक्टर हमेशा उच्च (High) होना चाहिए, और आदर्श रूप से 1 ({Unity}) होना चाहिए।
उच्च पावर फैक्टर क्यों अच्छा है (1 के करीब):
|
कारण |
प्रभाव |
|---|---|
|
कम करंट खींचना |
एक उच्च {PF} का मतलब है कि एक ही मात्रा में उपयोगी शक्ति ({kW}) प्रदान करने के लिए उपकरण को आपूर्ति से कम कुल करंट खींचना पड़ता है। {Current} 1/{PF} |
|
उपकरण क्षमता का बेहतर उपयोग |
जनरेटर, ट्रांसफार्मर और लाइनें {kVA} (आभासी शक्ति) के आधार पर रेटेड होती हैं। उच्च {PF} पर, {kW} का मान {kVA} के करीब होता है, जिसका अर्थ है कि उपकरण अपनी अधिकतम क्षमता के करीब उपयोगी कार्य ({kW}) प्रदान कर रहा है। |
|
कम लाइन हानि ({I}^2{R} Loss) |
कम करंट का मतलब है कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में {I}^2{R} (कॉपर लॉस) कम होगा, जिससे सिस्टम की दक्षता (Efficiency) बढ़ जाती है। |
|
वोल्टेज रेगुलेशन में सुधार |
लाइनों में कम करंट बहने से वोल्टेज ड्रॉप कम होता है, जिससे उपभोक्ता को अधिक स्थिर और सही वोल्टेज मिलता है। |
|
पेनाल्टी से बचाव |
बिजली आपूर्तिकर्ता आमतौर पर खराब (कम) पावर फैक्टर वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पेनाल्टी (जुर्माना) लगाते हैं। |
जब पावर फैक्टर निम्न (जैसे 0.7 या 0.8 लैगिंग) होता है, तो इसका मतलब है कि सिस्टम में रिएक्टिव पावर ({kVAR}) की मात्रा अधिक है। यह रिएक्टिव पावर चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए आवश्यक है (जैसे मोटर और ट्रांसफार्मर के लिए), लेकिन यह उपयोगी कार्य नहीं करती है, फिर भी इसे ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित करना पड़ता है।
उच्च पावर फैक्टर विद्युत प्रणाली के कुशल (Efficient) और किफायती (Economical) संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
Ans.
आइसोलेटर (Isolator) और सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) दोनों विद्युत प्रणालियों में सर्किट को तोड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन उनके उद्देश्य, कार्य और ऑपरेटिंग स्थितियाँ पूरी तरह से अलग हैं।
यहाँ उनके बीच मुख्य अंतरों का सारांश दिया गया है:
|
विशेषता (Feature) |
सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) |
आइसोलेटर / डिस्कनेक्टर (Isolator / Disconnector) |
|---|---|---|
|
मुख्य उद्देश्य |
सर्किट और उपकरणों को फॉल्ट (दोष) (जैसे ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट) से सुरक्षित रखना। |
सुरक्षित रखरखाव के लिए सर्किट के एक हिस्से को पूरी तरह से अलग करना। |
|
ऑपरेटिंग स्थिति |
ऑन-लोड डिवाइस (On-Load Device): इसे सर्किट में करंट बहने पर भी संचालित (चालू/बंद) किया जा सकता है। |
ऑफ-लोड डिवाइस (Off-Load Device): इसे केवल तभी संचालित किया जा सकता है जब सर्किट में कोई करंट न बह रहा हो (नो-लोड)। |
|
ऑपरेशन मोड |
स्वचालित (Automatic) और मैनुअल (Manual) दोनों। फॉल्ट होने पर यह अपने आप ट्रिप हो जाता है। |
केवल मैनुअल (Manual)। इसे हाथ से या दूर से ही संचालित किया जाता है; इसमें कोई स्वचालित ट्रिपिंग तंत्र नहीं होता है। |
|
आर्क शमन (Arc Quenching) |
आर्क शमन प्रणाली (जैसे \text{SF}_6, तेल, वैक्यूम) मौजूद होती है, ताकि करंट काटते समय बनने वाली चाप (Arc) को सुरक्षित रूप से बुझाया जा सके। |
कोई आर्क शमन प्रणाली नहीं। करंट को काटने की कोशिश करने पर एक बड़ा और खतरनाक चाप बन सकता है। |
|
सुरक्षा भूमिका |
प्रोटेक्शन डिवाइस (Protection Device)। यह सिस्टम में दोष का पता लगाता है और उसे दूर करता है। |
सेफ्टी/मेंटेनेंस डिवाइस (Safety/Maintenance Device)। यह यह सुनिश्चित करता है कि मरम्मत के दौरान सर्किट में कोई करंट न हो। |
|
उपयोग का क्रम |
आइसोलेटर को हमेशा सर्किट ब्रेकर के ट्रिप होने के बाद ही खोला जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई करंट नहीं बह रहा है। |
सर्किट को चालू/बंद करने के लिए पहले सर्किट ब्रेकर का उपयोग किया जाता है। |
|
दृश्य पुष्टि |
संपर्क (Contacts) एक बंद आवरण (Casing) के अंदर होते हैं, इसलिए सर्किट टूटा है या नहीं, इसकी दृश्य पुष्टि नहीं होती। |
संपर्क खुले में दिखाई देते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सर्किट में भौतिक रूप से स्पष्ट अलगाव (Physical Isolation) हो गया है। |
संक्षेप में:
सर्किट ब्रेकर एक सुरक्षा उपकरण है जो ऑन-लोड पर काम करता है और स्वचालित रूप से गलती को दूर करता है।
आइसोलेटर एक रखरखाव उपकरण है जो केवल ऑफ-लोड पर काम करता है और सर्किट ब्रेकर के खुले होने की दृश्य पुष्टि प्रदान करके सुरक्षित कार्य क्षेत्र बनाता है।
Ans.
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) एक सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग तेल-भरे बिजली ट्रांसफार्मर और रिएक्टरों में किया जाता है, जो कंजरवेटर टैंक (ओवरहेड तेल जलाशय) से सुसज्जित होते हैं। यह ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंजरवेटर टैंक को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित होता है।
यह रिले गैस-संचालित होती है और ट्रांसफार्मर के अंदर होने वाले आंतरिक दोषों का पता लगाती है।
बुचोलज़ रिले का ट्रांसफार्मर में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, खासकर बड़े ट्रांसफार्मर (आमतौर पर 500 kVA से अधिक रेटिंग वाले) के लिए।
संक्षेप में,
यह रिले ट्रांसफार्मर के अंदर की समस्याओं को पहचानने और प्रतिक्रिया करने के लिए एक केंद्रीय सुरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करता है।
Ans.
एसएफ6 (SF6) सर्किट ब्रेकर एक प्रकार का सर्किट ब्रेकर (परिपथ वियोजक) है जो विद्युत प्रणालियों में आर्क (Arc) बुझाने और इन्सुलेशन (विद्युत रोधन) के लिए माध्यम के रूप में सल्फर हेक्साफ्लोराइड (Sulphur Hexafluoride - SF6) नामक गैस का उपयोग करता है।
यह प्रभाव मुख्य रूप से निम्नलिखित परिस्थितियों में देखा जाता है:
यह प्रभाव पारेषण लाइन के वितरित धारिता (Distributed Capacitance) के कारण होता है।
संक्षेप में:
चार्जिंग करंट का लाइन के प्रेरकत्व में बहना ही फेरेंटी प्रभाव का मूल कारण है।
इस अतिरिक्त वोल्टेज को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लाइन के उपकरणों (जैसे इंसुलेटर, सर्किट ब्रेकर) को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे कम करने के लिए अभिग्राही सिरे पर शंट रिएक्टर (Shunt Reactor) का उपयोग किया जाता है। शंट रिएक्टर (जो मूल रूप से एक बड़ा इंडक्टर होता है) लाइन के कैपेसिटिव चार्जिंग करंट को अवशोषित करके वोल्टेज को सामान्य स्तर पर लाने में मदद करता है।
Ans.
केबलों में इन्सुलेशन वोल्टेज (Insulation Voltage) का अर्थ रेटेड वोल्टेज (Rated Voltage) या वोल्टेज रेटिंग से है।
यह वह अधिकतम वोल्टेज मान है जिसे केबल में लगी इन्सुलेशन सामग्री (जैसे PVC, XLPE, EPR) बिना किसी क्षति या ब्रेकडाउन के लंबे समय तक सुरक्षित रूप से झेल सकती है।
केबल का मुख्य काम विद्युत ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना है। कंडक्टर के चारों ओर जो इन्सुलेशन परत होती है, वह दो मुख्य कार्य करती है:
इन्सुलेशन वोल्टेज का महत्व:
इन्सुलेशन वोल्टेज रेटिंग यह सुनिश्चित करती है कि केबल को उसके इच्छित विद्युत प्रणाली में सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सके।
केबलों में इन्सुलेशन वोल्टेज (Insulation Voltage) का अर्थ यह है कि केबल की इन्सुलेशन परत सुरक्षित रूप से अधिकतम कितना वोल्टेज झेल सकती है। इसे वोल्टेज रेटिंग भी कहते हैं।
यह वह अधिकतम वोल्टेज है जिसे केबल के कंडक्टर और उसके आसपास के वातावरण (जैसे कि ज़मीन, या अन्य कंडक्टर) के बीच केबल का इंसुलेशन बिना ब्रेकडाउन (विद्युत भंजन) हुए झेल सकता है।
इन्सुलेशन वोल्टेज को बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्न बिंदुओं पर विचार करें:
यह रेटिंग सुनिश्चित करती है कि केबल का इन्सुलेशन किसी भी परिस्थिति में बिजली का रिसाव (Current Leakage), शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) या बिजली के झटके (Electric Shock) को रोकने के लिए पर्याप्त मजबूत है।
केबल का इन्सुलेशन एक परावैद्युत पदार्थ (Dielectric Material) होता है (जैसे, XLPE, PVC, रबर या तेल से भरा कागज) जो बिजली का कुचालक होता है। इन्सुलेशन वोल्टेज रेटिंग मुख्य रूप से इस सामग्री की परावैद्युत शक्ति (Dielectric Strength) पर निर्भर करती है।
हर इन्सुलेशन सामग्री की एक सीमा होती है। यदि उस सीमा से अधिक वोल्टेज लागू किया जाता है, तो इन्सुलेशन अपनी कुचालक (Insulating) क्षमता खो देता है और वह बिजली का चालक बन जाता है। इस बिंदु पर इन्सुलेशन 'फेल' हो जाता है, जिसे ब्रेकडाउन (Breakdown) कहा जाता है। इन्सुलेशन वोल्टेज वह सुरक्षित सीमा है जिसके अंदर केबल को संचालित किया जाना चाहिए।
केबल को हमेशा ऐसी प्रणाली में उपयोग किया जाना चाहिए जिसका परिचालन वोल्टेज (Operating Voltage) केबल के इन्सुलेशन वोल्टेज से कम या उसके बराबर हो। उच्च वोल्टेज वाली प्रणाली में कम वोल्टेज रेटिंग वाले केबल का उपयोग करने से इन्सुलेशन जल्दी खराब हो सकता है और आग या उपकरणों को नुकसान हो सकता है।
उदाहरण के लिए,
एक केबल जिस पर 600V की रेटिंग लिखी है, उसे 600 वोल्ट या उससे कम वोल्टेज की प्रणाली के लिए डिज़ाइन किया गया है।
बॉडी अर्थिंग का मुख्य कार्य मानव सुरक्षा है।
ट्रांसफार्मर/डीजी सेट का बाहरी धातु आवरण (Metal Body), फ्रेम और अन्य धातु के हिस्से।
न्यूट्रल अर्थिंग का मुख्य कार्य प्रणाली की स्थिरता और उपकरणों की सुरक्षा है।
ट्रांसफार्मर/डीजी सेट के स्टार-पॉइंट (Star Point) पर निकले हुए न्यूट्रल टर्मिनल को।
भारतीय मानक (IS) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार, सुरक्षा और स्थिरता के लिए अर्थिंग प्रतिरोध का मान जितना कम हो उतना बेहतर माना जाता है।
|
उपकरण |
अनुशंसित अधिकतम अर्थिंग प्रतिरोध मान |
|---|---|
|
500 kVA ट्रांसफार्मर |
1.0 \Omega (ओम) से कम |
|
380 kVA DG सेट |
2.0 \Omega (ओम) से कम |
नोट:
यहाँ उनके बीच मुख्य अंतर और उपयोग दिए गए हैं:
MCB का अर्थ मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (Miniature Circuit Breaker) है, जबकि MCCB का अर्थ मोल्डेड केस सर्किट ब्रेकर (Moulded Case Circuit Breaker) है।
|
विशेषता |
MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) |
MCCB (मोल्डेड केस सर्किट ब्रेकर) |
|---|---|---|
|
करंट रेटिंग (Current Rating) |
कम (Low): आमतौर पर 6A से 100A तक। |
उच्च (High): आमतौर पर 100A से 2500A तक। |
|
ट्रिपिंग सर्किट |
फिक्स्ड (Fixed): ट्रिपिंग करंट रेटिंग को समायोजित (Adjust) नहीं किया जा सकता। |
समायोज्य (Adjustable): ट्रिपिंग करंट रेटिंग को एक रेंज के भीतर सेट किया जा सकता है। |
|
ब्रेकिंग क्षमता |
कम: आमतौर पर 10kA (किलोएम्पीयर) तक सीमित। |
उच्च: आमतौर पर 10kA से 100kA या उससे अधिक। |
|
पोल्स की संख्या |
1P, 2P, 3P, और 4P में उपलब्ध। |
3P और 4P में उपलब्ध (आमतौर पर सिंगल पोल में नहीं)। |
|
आकार और कीमत |
छोटा आकार, कम कीमत। |
बड़ा आकार, अधिक कीमत। |
|
उपयोग |
घरेलू और छोटे वाणिज्यिक अनुप्रयोग। |
औद्योगिक और बड़े वाणिज्यिक अनुप्रयोग। |
उनके डिज़ाइन और रेटिंग के कारण, MCB और MCCB का उपयोग विभिन्न स्थानों पर किया जाता है:
MCB का उपयोग मुख्य रूप से उन स्थानों पर किया जाता है जहाँ कम करंट रेटिंग और सीमित शॉर्ट-सर्किट क्षमता की आवश्यकता होती है।
MCCB का उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहाँ उच्च करंट रेटिंग, उच्च ब्रेकिंग क्षमता और ट्रिपिंग सेटिंग्स को समायोजित करने की आवश्यकता होती है।
Ans.
एचटी (HT - High Tension) वोल्टेज सिस्टम में लॉकआउट रिले (Lockout Relay), जिसे अक्सर मास्टर ट्रिप रिले (Master Trip Relay) या ANSI कोड 86 रिले कहा जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है।
यह एक विशेष प्रकार की सहायक रिले (Auxiliary Relay) है जिसका प्राथमिक कार्य निम्नलिखित है:
यह रिले सिस्टम में मौजूद अन्य सभी सुरक्षा रिले (जैसे ओवर-करंट रिले, अर्थ फॉल्ट रिले, डिफरेंशियल रिले, आदि) से ट्रिप कमांड सिग्नल प्राप्त करती है। जब किसी भी सुरक्षा रिले को कोई गंभीर खराबी (फॉल्ट) मिलती है, तो वह सिग्नल सीधे लॉकआउट रिले को भेजती है।
चूंकि यह रिले सर्किट को "लॉक" कर देती है, इसलिए जब तक कोई तकनीशियन या इंजीनियर मैन्युअल रूप से (हाथ से) रिले को रिसेट (Reset) नहीं करता, तब तक सर्किट ब्रेकर को फिर से बंद करना (ON करना) असंभव होता है।
लॉकआउट का महत्व:
यह सुनिश्चित करता है कि जब तक फॉल्ट के कारण का पता लगाकर उसे ठीक नहीं कर लिया जाता, तब तक गलती से भी सिस्टम को वापस चालू न किया जाए। यह बार-बार ट्रिपिंग और री-क्लोजिंग को रोकता है, जिससे एचटी उपकरण (जैसे ट्रांसफार्मर या स्विचगियर) को फॉल्ट के कारण होने वाले गंभीर नुकसान से बचाया जा सके और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
Ans.
तकनीकी रूप से, पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) और पृथ्वी इलेक्ट्रोड प्रतिरोध (Earth Electrode Resistance) दोनों शब्द एक ही भौतिक मात्रा को दर्शाते हैं। ये लगभग पर्यायवाची (synonymous) हैं और एक ही माप को संदर्भित करते हैं।
हालांकि, अवधारणा को समझने के लिए, हम इसे उन घटकों (Components) के रूप में देख सकते हैं जिनसे यह कुल प्रतिरोध बनता है:
यह उस धातु के इलेक्ट्रोड (जैसे पाइप या प्लेट) का प्रतिरोध है जिसे आपने जमीन में गाड़ा है।
संक्षेप में:
यह सिर्फ इलेक्ट्रोड से संबंधित प्रतिरोध है, लेकिन व्यवहार में, यह अकेले मायने नहीं रखता।
यह वह कुल प्रतिरोध है जो किसी फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से इलेक्ट्रोड के माध्यम से जमीन में प्रवाहित होने पर मिलता है। यह वह मान है जिसे हम आमतौर पर अर्थ टेस्टर से मापते हैं।
पृथ्वी प्रतिरोध, पृथ्वी इलेक्ट्रोड प्रतिरोध के घटकों के अलावा, मिट्टी के प्रतिरोध (Soil Resistivity) को भी शामिल करता है।
{पृथ्वी प्रतिरोध} = ({इलेक्ट्रोड प्रतिरोध}) + ({इलेक्ट्रोड से दूर मिट्टी का प्रतिरोध})
निष्कर्ष:
व्यवहारिक रूप से, जब एक इलेक्ट्रीशियन या इंजीनियर "पृथ्वी प्रतिरोध" मापता है, तो वह वास्तव में पूरे अर्थिंग सिस्टम (इलेक्ट्रोड + आसपास की मिट्टी) का प्रतिरोध माप रहा होता है, जिसे सही नाम से पृथ्वी इलेक्ट्रोड प्रतिरोध कहा जाता है, लेकिन जिसे बोलचाल की भाषा में अर्थ रेजिस्टेंस कहते हैं।
दोनों शब्द एक ही वांछित माप का वर्णन करते हैं: वह कुल प्रतिरोध जो किसी फॉल्ट करंट को जमीन में सुरक्षित रूप से फैलने से रोकता है।
Ans.
आम तौर पर, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Nuclear Power Plants) का लोड फैक्टर (Load Factor) सबसे अधिक होता है।
लोड फैक्टर को निम्नलिखित सूत्र द्वारा परिभाषित किया जाता है:
{लोड फैक्टर} = {{एक निश्चित अवधि में औसत मांग}}{{उसी अवधि में अधिकतम मांग}}
उच्च लोड फैक्टर का मतलब है कि पावर प्लांट अपनी क्षमता का उपयोग लगातार और कुशलता से कर रहा है।
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पावर प्लांट का प्रकार |
लोड फैक्टर की प्रकृति |
कारण |
|---|---|---|
|
परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear) |
सबसे अधिक (Highest) |
परमाणु संयंत्रों को बेस लोड स्टेशन (Base Load Stations) के रूप में डिज़ाइन किया जाता है। इनकी प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है और इन्हें चालू या बंद करना मुश्किल और महंगा होता है, इसलिए इन्हें अधिकतम संभव समय (लगभग 90% या उससे अधिक) के लिए लगातार चलाया जाता है। |
|
कोयला/तापीय संयंत्र (Thermal/Coal) |
उच्च (High) |
ये भी बेस लोड के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इन्हें मेंटेनेंस (रखरखाव) और ईंधन की आपूर्ति के लिए परमाणु संयंत्रों की तुलना में अधिक बार बंद करना पड़ता है। इनका लोड फैक्टर परमाणु संयंत्रों से थोड़ा कम होता है। |
|
जल विद्युत (Hydro) |
मध्यम (Moderate) |
पानी की उपलब्धता (वर्षा) और जलाशय के स्तर पर निर्भर करता है। रन-ऑफ-रिवर प्लांट का लोड फैक्टर अधिक हो सकता है, जबकि स्टोरेज प्लांट का उपयोग पीक लोड के दौरान भी किया जाता है। |
|
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) |
सबसे कम (Lowest) |
जैसे सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा। ये मौसम पर निर्भर होते हैं। उदाहरण के लिए, सौर ऊर्जा केवल दिन के समय बिजली बनाती है। इसलिए इनका लोड फैक्टर आमतौर पर 25% से 45% तक होता है। |
संक्षेप में,
जो पावर प्लांट बेस लोड (यानी, चौबीसों घंटे चलने वाली न्यूनतम आवश्यक बिजली आपूर्ति) को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, उनका लोड फैक्टर सबसे अधिक होता है, और इसमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र शीर्ष पर होते हैं।
Ans.
एसी (AC) सोलेनोइड वाल्व प्लंजर को हमेशा आकर्षित करता है, भले ही आप टर्मिनलों को आपस में बदल दें, और हाँ, सोलेनोइड के ध्रुव (Poles) बदलते हैं।
यह प्रभाव दो मुख्य कारणों से होता है:
एसी सप्लाई अपनी ध्रुवता (दिशा) को लगातार बदलती रहती है (भारत में 50 हर्ट्ज़ पर प्रति सेकंड 100 बार)।
टर्मिनल बदलने से AC ऑपरेशन पर कोई व्यावहारिक अंतर नहीं आता है।
यह मुख्य कारण है कि प्लंजर हमेशा आकर्षित होता है:
इसलिए,
चूंकि प्लंजर सिर्फ एक फेरोमैग्नेटिक धातु है, यह हमेशा सोलेनोइड के चुंबकीय क्षेत्र के प्रति आकर्षित होता है, भले ही ध्रुव प्रति सेकंड 100 बार बदल रहे हों या आपने तार बदल दिए हों।
Ans.
एक IDMT (Inverse Definite Minimum Time) रिले एक ऐसा सुरक्षात्मक रिले है जिसका संचालन समय, उसमें से बहने वाले दोष करंट (fault current) की मात्रा के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होता है, लेकिन एक निश्चित न्यूनतम सीमा से नीचे नहीं गिरता।
यह दो प्रकार के रिले की विशेषताओं को जोड़ता है:
यह गुण सुनिश्चित करता है कि:
यह गुण सुनिश्चित करता है कि:
परिभाषा:
IDMT रिले एक ऐसा रिले है जो करंट की मात्रा के साथ व्युत्क्रम अनुपात में काम करता है, लेकिन इसका एक निश्चित समय विलंब (time delay) होता है जो बहुत बड़े दोष करंट के लिए भी रिले के संचालन के समय को एक पूर्व-निर्धारित न्यूनतम मान तक सीमित करता है।
महत्व:
IDMT रिले समन्वय (coordination) के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर विद्युत वितरण प्रणालियों में। ये सुनिश्चित करते हैं कि दोष के सबसे नजदीक का सर्किट ब्रेकर (near-end breaker) पहले ट्रिप हो, जबकि उससे दूर के ब्रेकरों को एक छोटा विलंब समय मिलता है ताकि वे अनावश्यक रूप से ट्रिप न हों। यह सुनिश्चित करता है कि दोष को दूर करने के लिए पावर सिस्टम का केवल सबसे छोटा हिस्सा ही डिस्कनेक्ट हो।
Ans.
ट्रांसफार्मर हानियाँ (Transformer Losses) वह ऊर्जा है जो विद्युत ऊर्जा को एक सर्किट से दूसरे सर्किट में स्थानांतरित (transfer) करते समय ऊष्मा (heat) के रूप में व्यर्थ हो जाती है। एक आदर्श ट्रांसफार्मर में कोई हानि नहीं होती है, लेकिन वास्तविक ट्रांसफार्मर में ये हानियाँ इसकी दक्षता (efficiency) को कम करती हैं।
ट्रांसफार्मर में मुख्य रूप से दो प्रकार की हानियाँ होती हैं:
ये हानियाँ ट्रांसफार्मर के कोर (magnetic core) में होती हैं और ये मुख्य रूप से वोल्टेज पर निर्भर करती हैं, लोड पर नहीं। इसलिए, ये हानियाँ ट्रांसफार्मर के चालू रहने तक स्थिर (constant) रहती हैं।
ये हानियाँ ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग्स (प्राथमिक और द्वितीयक दोनों) में होती हैं और ये मुख्य रूप से करंट पर निर्भर करती हैं, इसलिए इन्हें परिवर्तनीय हानियाँ (variable losses) भी कहा जाता है।
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हानि का प्रकार |
कहाँ होती है? |
किस पर निर्भर करती है? |
प्रकृति |
कम करने का उपाय |
|---|---|---|---|---|
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कोर हानियाँ |
कोर (Core) में |
वोल्टेज (V) |
स्थिर (Constant) |
सिलिकॉन स्टील और लैमिनेशन का उपयोग |
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ताम्र हानियाँ |
वाइंडिंग्स (Windings) में |
करंट (I) या लोड |
परिवर्तनीय (Variable) |
कम प्रतिरोध वाले मोटे तार (तांबा) का उपयोग |
Ans.
पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking) एक ऊर्जा-बचत ब्रेकिंग तकनीक है जिसमें किसी इलेक्ट्रिक मोटर को रोकने या धीमा करने के बजाय, उसे एक विद्युत जनरेटर के रूप में कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता है।
इस प्रक्रिया में, मोटर की गतिक ऊर्जा (Kinetic Energy) को बर्बाद होने देने के बजाय, उसे वापस विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके सिस्टम में लौटा दिया जाता है।
यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), हाइब्रिड कारों, इलेक्ट्रिक ट्रेनों और ट्राम में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। यह एक प्रकार की "फ्री" ब्रेकिंग है जो ब्रेक लगाने के दौरान बर्बाद होने वाली ऊर्जा को उपयोगी बना देती है।
Ans.
डीसी मोटर में प्रारंभिक धारा (Starting Current) उच्च होने का मुख्य कारण पश्च विद्युत वाहक बल (Back EMF, E_b) का शून्य होना है।
इसे समझने के लिए डीसी मोटर के आर्मेचर करंट (I_a) के समीकरण को देखना आवश्यक है:
I_a = {V - E_b}{R_a}
जहाँ:
इस अत्यधिक प्रारंभिक धारा को रोकने और मोटर को जलने से बचाने के लिए, डीसी मोटर के साथ हमेशा स्टार्टर (Starter) का उपयोग किया जाता है।
Ans.
इंडक्शन मोटर (प्रेरण मोटर) के साथ स्टार-डेल्टा स्टार्टर (Star-Delta Starter) का उपयोग करने का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण लाभ मोटर के शुरुआती करंट को कम करना है। इसके कई अन्य फायदे भी हैं जो इसे औद्योगिक अनुप्रयोगों में लोकप्रिय बनाते हैं।
यह मुख्य लाभ है।
स्टार-डेल्टा स्टार्टर दो चरणों में काम करता है:
Ans.
डेल्टा-स्टार (Delta-Y) ट्रांसफार्मर का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत वितरण (Distribution) के लिए किया जाता है, जहाँ प्रकाश भार (Lighting Load) जैसे एकल-फेज (Single-Phase) लोड भी जुड़े होते हैं।
इस संयोजन का चुनाव करने के निम्नलिखित तीन मुख्य कारण हैं:
Ans.
तीन पिन प्लग में अर्थ पिन (Earth Pin) को अन्य दो पिनों (फेज और न्यूट्रल) की तुलना में मोटा (Thicker) और लंबा (Longer) रखने के दो प्राथमिक कारण हैं, और ये दोनों कारण सुरक्षा (Safety) से जुड़े हैं:
अर्थ पिन को लंबा इसलिए बनाया जाता है ताकि जब प्लग को सॉकेट में डाला जाए, तो यह सबसे पहले सॉकेट में प्रवेश करे और सबसे आखिर में बाहर निकले।
अर्थ पिन को मोटा रखने के भी दो कारण हैं:
Ans.
सीरीज मोटर (Series Motor) को बिना लोड के चालू नहीं किया जा सकता क्योंकि नो-लोड स्थिति में उसकी गति खतरनाक रूप से अनंत (Dangerously high/Infinite speed) तक पहुँच जाती है, जिसे रनिंग अवे (Running Away) कहा जाता है। यह मोटर को यांत्रिक रूप से नष्ट कर सकता है।
यह क्यों होता है, इसके पीछे का कारण मोटर के गति समीकरण (Speed Equation) में है:
डीसी (DC) सीरीज मोटर में गति (N) फ्लक्स (Phi) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होती है:
N {E_b}{Phi}
जहाँ:
निष्कर्ष: सीरीज मोटर को हमेशा कुछ यांत्रिक लोड (Mechanical Load) से जोड़कर ही शुरू किया जाना चाहिए ताकि आर्मेचर करंट पर्याप्त रहे और एक सुरक्षित गति सीमा बनाए रखने के लिए पर्याप्त फ्लक्स उत्पन्न हो सके।
Ans.
आपका प्रश्न ELCB (Earth Leakage Circuit Breaker) के वोल्टेज-संचालित पुराने संस्करण से संबंधित है। आधुनिक सुरक्षा उपकरण अब आमतौर पर RCCB/RCD (Residual Current Circuit Breaker/Device) हैं, जो करंट-संचालित होते हैं।
पुराना वोल्टेज ELCB (Voltage ELCB) इसलिए काम नहीं कर सकता अगर उसका N इनपुट ग्राउंड से कनेक्ट न हो, क्योंकि यह लीकेज को वोल्टेज के अंतर के आधार पर पता लगाता है।
वोल्टेज ELCB का कार्य सिद्धांत एक कॉइल (Coil) पर आधारित होता है जो यह पता लगाता है कि:
{वोल्टेज} V = {अर्थ वायर का वोल्टेज} - {स्थानीय ग्राउंड का वोल्टेज}
निष्कर्ष: ELCB अपनी सुरक्षात्मक क्रिया के लिए अर्थ इलेक्ट्रोड के साथ न्यूट्रल के सीधे कनेक्शन पर निर्भर करता है, ताकि लीकेज करंट के कारण उत्पन्न वोल्टेज को मापा जा सके।
Ans.
ए.सी. जनरेटर (AC Generator), जिसे अल्टरनेटर भी कहा जाता है, यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को प्रत्यावर्ती विद्युत ऊर्जा (Alternating Electrical Energy) में परिवर्तित करके विद्युत शक्ति उत्पन्न करता है।
यह प्रक्रिया फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम (Faraday's Law of Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर आधारित है।
सिद्धांत यह है कि जब किसी चालक (Conductor) को चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) में घुमाया जाता है, तो उस चालक में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced Electro-Motive Force - EMF) उत्पन्न होता है, जिससे विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
यह तीन मुख्य तत्वों पर निर्भर करता है:
एसी जनरेटर में, आमतौर पर (आधुनिक पावर प्लांट जनरेटर में थोड़ा अलग डिज़ाइन हो सकता है) एक आर्मेचर (Armature) को दो शक्तिशाली चुंबकीय ध्रुवों (N और S) के बीच घुमाया जाता है।
Ans.
एसी (AC) सोलेनोइड वाल्व प्लंजर को आकर्षित करता रहता है, भले ही आप टर्मिनल को आपस में बदल दें, क्योंकि आकर्षण बल हमेशा एक ही दिशा में कार्य करता है, भले ही एसी सप्लाई में ध्रुवता (Polarity) लगातार बदलती रहती है।
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चक्र (Cycle) |
सोलेनोइड कोर का ध्रुव |
प्लंजर का ध्रुव |
परिणामी बल |
|---|---|---|---|
|
पहला आधा चक्र |
उत्तर (N) |
दक्षिण (S) |
आकर्षण (Pull) |
|
दूसरा आधा चक्र |
दक्षिण (S) |
उत्तर (N) |
आकर्षण (Pull) |
चूँकि ध्रुवीयता हमेशा इस तरह से बदलती है कि सोलेनोइड कोर और प्लंजर के बीच हमेशा विपरीत ध्रुव बने रहते हैं, इसलिए चुंबकीय बल की दिशा हमेशा कोर की ओर रहती है (यानी, प्लंजर को खींचती रहती है)।
Ans.
डिरेटिंग (Derating) क्या है?
डिरेटिंग (Derating) का अर्थ है किसी उपकरण या घटक को उसकी रेटेड (Rated) या अधिकतम क्षमता से कम लोड या कम रेटिंग पर संचालित करना।
यह एक इंजीनियरिंग अभ्यास है जिसका उद्देश्य उपकरणों की विश्वसनीयता (Reliability), सुरक्षा (Safety), और लंबी उम्र (Longevity) सुनिश्चित करना है। जब वास्तविक परिचालन स्थितियाँ (जैसे उच्च परिवेश का तापमान, ऊंचाई, या तारों का गुच्छा) मानक परीक्षण स्थितियों से अधिक कठोर होती हैं, तो डिरेटिंग आवश्यक हो जाता है।
सरल शब्दों में: यह एक सुरक्षा मार्जिन है जो यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण कठिन परिस्थितियों में भी विफल न हो।
डिरेटिंग की आवश्यकता का मुख्य कारण गर्मी (Heat) है। अधिकांश विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपनी अधिकतम क्षमता पर चलने पर गर्मी उत्पन्न करते हैं। यदि यह गर्मी परिवेश की परिस्थितियों के कारण या खराब वेंटिलेशन के कारण ठीक से समाप्त (dissipate) नहीं हो पाती है, तो उपकरण के महत्वपूर्ण घटक ज़्यादा गरम हो जाएंगे, जिससे उनकी इन्सुलेशन सामग्री, अर्धचालक, या यांत्रिक भागों को नुकसान पहुंचेगा।
डिरेटिंग के मुख्य कारण और आवश्यकताएँ:
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कारण (Factor) |
प्रभाव (Effect) |
आवश्यकता (Necessity) |
|---|---|---|
|
उच्च परिवेश तापमान (High Ambient Temperature) |
उपकरण से गर्मी को बाहर निकालना (हीट डिसिपेशन) मुश्किल हो जाता है। |
आंतरिक तापमान को सुरक्षित सीमा के भीतर रखना। |
|
समुद्र तल से अधिक ऊँचाई (High Altitude) |
पतली हवा के कारण हवा का शीतलन (Air Cooling) कम प्रभावी हो जाता है। |
पर्याप्त शीतलन क्षमता बनाए रखना। |
|
समूहीकरण या बंडलिंग (Grouping/Bundling) |
केबल या घटकों के आस-पास गर्मी जमा हो जाती है, जिससे व्यक्तिगत घटक ज़्यादा गरम होते हैं। |
स्थानीय ताप वृद्धि को नियंत्रित करना। |
|
अन्य लोड कारक (Duty Cycle, Harmonics) |
अप्रत्याशित या बार-बार लोड बढ़ने से तात्कालिक गर्मी उत्पन्न होती है। |
अत्यधिक झटके और थर्मल तनाव से बचना। |
क्या डिरेटिंग ड्राइव, मोटर और केबल के लिए समान है?
नहीं, डिरेटिंग का सिद्धांत समान है (सुरक्षित परिचालन के लिए रेटेड क्षमता को कम करना), लेकिन इसे लागू करने का तरीका और इसके कारण प्रत्येक उपकरण के लिए अलग-अलग होते हैं।
Ans.
स्वचालित वोल्टेज नियामक (Automatic Voltage Regulator - AVR) एक इलेक्ट्रॉनिक या इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण है जो आउटपुट वोल्टेज को एक निश्चित, वांछित मान पर स्वचालित रूप से स्थिर रखता है, भले ही लोड (भार) या इनपुट गति में परिवर्तन हो।
यह आमतौर पर जनरेटर (Alternator/Generator) और बिजली संयंत्रों में उपयोग किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं को हमेशा एक स्थिर और सुरक्षित वोल्टेज आपूर्ति मिलती रहे।
AVR का प्राथमिक कार्य जनरेटर के टर्मिनल वोल्टेज को नियंत्रित और स्थिर करना है। यह तीन मुख्य कार्य करता है:
AVR एक क्लोज्ड-लूप कंट्रोल सिस्टम (Closed-Loop Control System) पर काम करता है:
यह प्रक्रिया स्वचालित और बहुत तेज होती है, जिससे जनरेटर का आउटपुट वोल्टेज लगभग स्थिर रहता है।
Ans.
हाँ, आपका प्रश्न विद्युत उत्पादन से संबंधित है।
उत्तेजक (Exciter) एक सहायक युक्ति (Auxiliary Device) है जो बड़े सिंक्रोनस जनरेटर (Synchronous Generator) या अल्टरनेटर (Alternator) के रोटर (Rotor) में आवश्यक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए दिष्ट धारा (DC Current) की आपूर्ति करता है।
जनरेटर में विद्युत उत्पादन के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली है, जिसे उत्तेजना प्रणाली (Excitation System) का केंद्रीय भाग माना जाता है।
सिंक्रोनस जनरेटर (जो बिजली संयंत्रों में उपयोग किए जाते हैं) में, विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) द्वारा वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए रोटर वाइंडिंग में एक शक्तिशाली स्थिर चुंबकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
संक्षेप में: उत्तेजक, मुख्य जनरेटर के लिए शक्तिशाली चुम्बक बनाने का काम करता है।
उत्तेजक की कार्यप्रणाली इस्तेमाल किए गए प्रकार पर निर्भर करती है, लेकिन मूलभूत सिद्धांत समान रहता है: AC आउटपुट को स्थिर DC इनपुट में बदलना।
उत्तेजक के दो मुख्य प्रकार हैं:
यह आधुनिक और अधिक विश्वसनीय प्रणाली है क्योंकि इसमें ब्रश और स्लिप रिंग का उपयोग नहीं होता है, जिससे घिसाव (wear and tear) कम होता है।
निष्कर्ष: उत्तेजक का काम जनरेटर के रोटर में एक नियंत्रित DC चुंबकीय क्षेत्र स्थापित करना है, जो मुख्य जनरेटर को बिजली (AC) पैदा करने में सक्षम बनाता है।
Ans.
डीसी (DC) शंट और कंपाउंड मोटर्स में चार पॉइंट स्टार्टर (4-Point Starter) और तीन पॉइंट स्टार्टर (3-Point Starter) का उपयोग मोटर को शुरू करते समय अत्यधिक स्टार्टिंग करंट (Starting Current) को सीमित करने के लिए किया जाता है।
इन दोनों स्टार्टर के बीच मुख्य अंतर नो-वोल्ट कॉइल (No-Volt Coil - NVC) या होल्डिंग कॉइल (Holding Coil) के कनेक्शन में है।
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विशेषता (Feature) |
तीन पॉइंट स्टार्टर (3-Point Starter) |
चार पॉइंट स्टार्टर (4-Point Starter) |
|---|---|---|
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टर्मिनल (Terminals) |
तीन टर्मिनल होते हैं: L (लाइन), A (आर्मेचर), F (फील्ड) |
चार टर्मिनल होते हैं: L, A, F, और एक अतिरिक्त टर्मिनल N (नो-वोल्ट कॉइल लाइन)। |
|
NVC कनेक्शन |
NVC को शंट फील्ड वाइंडिंग के साथ श्रृंखला (Series) में जोड़ा जाता है। |
NVC को एक अतिरिक्त प्रतिरोध (Resistance) के साथ सीधे आपूर्ति (Supply) के समानांतर (Parallel) में जोड़ा जाता है, और यह शंट फील्ड वाइंडिंग से स्वतंत्र होता है। |
|
मुख्य समस्या |
फील्ड वीकेनिंग (Field Weakening) द्वारा गति नियंत्रण के लिए उपयुक्त नहीं है। यदि शंट फील्ड करंट कम होता है, तो NVC में करंट भी कम हो जाता है, और कॉइल हैंडल को रिलीज़ करके मोटर को बंद कर सकता है। |
फील्ड वीकेनिंग द्वारा गति नियंत्रण के लिए पूरी तरह उपयुक्त है, क्योंकि NVC करंट शंट फील्ड करंट से स्वतंत्र होता है। |
|
NVC कार्यप्रणाली |
NVC में प्रवाहित धारा शंट फील्ड की धारा पर निर्भर करती है। |
NVC में प्रवाहित धारा केवल आपूर्ति वोल्टेज पर निर्भर करती है, शंट फील्ड की धारा पर नहीं। |
|
उपयोग |
जहां फील्ड वीकेनिंग द्वारा गति नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती है। |
जहां फील्ड वीकेनिंग (रेटेड स्पीड से ऊपर की गति नियंत्रण) की आवश्यकता होती है। |
नो-वोल्ट कॉइल (NVC): यह एक सुरक्षा उपकरण है। इसका काम आपूर्ति वोल्टेज के बहुत कम हो जाने (नो-वोल्ट स्थिति) पर हैंडल को "रन" स्थिति से "ऑफ" स्थिति पर खींचकर मोटर को आपूर्ति से अलग करना है, ताकि वोल्टेज वापस आने पर मोटर खुद से शुरू न हो जाए।
Ans.
उच्च संचरण (High Transmission) या वितरण प्रणाली (Distribution System) में वीसीबी (VCB - Vacuum Circuit Breaker) का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह एसीबी (ACB - Air Circuit Breaker) की तुलना में उच्च वोल्टेज और उच्च दोष धाराओं (High Fault Currents) को अधिक कुशलता से और सुरक्षित रूप से नियंत्रित कर सकता है।
वीसीबी 11 kV से लेकर 33 kV तक के मध्यम वोल्टेज अनुप्रयोगों के लिए एक पसंदीदा विकल्प है, और यह अपनी उत्कृष्ट आर्क शमन (Arc Quenching) क्षमता के कारण सफल है:
एयर सर्किट ब्रेकर (ACB) आर्क को बुझाने के लिए माध्यम के रूप में सामान्य वायु (Air) का उपयोग करता है। उच्च संचरण (High Voltage) प्रणाली में इसका उपयोग न करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
संक्षेप में, VCB की निर्वात-आधारित तकनीक इसे उच्च वोल्टेज पर दोष धाराओं को तेजी से, कुशलता से और कम रखरखाव के साथ तोड़ने की बेजोड़ क्षमता प्रदान करती है, जो ACB के वायु-आधारित तंत्र में संभव नहीं है।
Ans.
सर्ज अरेस्टर (Surge Arrester) और लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) दोनों ही विद्युत प्रणालियों को अत्यधिक वोल्टेज (Overvoltage) से बचाते हैं, लेकिन उनके प्राथमिक उद्देश्य, अनुप्रयोग (Application) और सुरक्षा का दायरा अलग-अलग होते हैं।
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विशेषता |
लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) |
सर्ज अरेस्टर (Surge Arrester) |
|---|---|---|
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संरक्षण का प्राथमिक उद्देश्य |
सीधे बिजली गिरने (Direct Lightning Strike) के कारण उत्पन्न होने वाले अत्यधिक उच्च वोल्टेज और धारा से इमारतों, संरचनाओं और बाह्य उपकरणों की सुरक्षा करना। |
स्विचिंग ऑपरेशन (Switching Operations) या दूरस्थ बिजली गिरने के कारण उत्पन्न होने वाले क्षणिक वोल्टेज स्पाइक्स (Transient Voltage Spikes) से विद्युत उपकरणों की सुरक्षा करना। |
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सुरक्षा का दायरा |
यह बाहरी संरचनात्मक सुरक्षा पर केंद्रित है, जिससे बिजली की भारी ऊर्जा को सीधे जमीन (Ground) में डायवर्ट किया जा सके। |
यह आंतरिक विद्युत प्रणाली सुरक्षा पर केंद्रित है, जिससे लाइन में आने वाले वोल्टेज उछाल को नियंत्रित किया जा सके। |
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स्थापना का स्थान |
आमतौर पर बाहर स्थापित किया जाता है—जैसे कि इमारतों की छत पर, बिजली के खंभों पर या ट्रांसमिशन लाइनों पर। |
आमतौर पर अंदर स्थापित किया जाता है—जैसे कि सबस्टेशनों के फीडर प्रवेश द्वार पर, पैनलों के अंदर, या संवेदनशील उपकरणों के पास। |
|
वोल्टेज रेंज |
उच्च वोल्टेज अनुप्रयोगों (जैसे 11kV से 500kV तक) के लिए डिज़ाइन किया गया। |
कम और मध्यम वोल्टेज अनुप्रयोगों (जैसे 0.4kV से 36kV तक) के लिए उपयोग किया जाता है, हालांकि इसका उपयोग उच्च वोल्टेज लाइनों पर भी सर्ज को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। |
|
संरक्षण का कारण |
केवल आकाशीय बिजली से उत्पन्न सर्ज। |
आकाशीय बिजली, स्विचिंग, लोड परिवर्तन और अन्य आंतरिक या बाहरी कारणों से उत्पन्न सभी प्रकार के वोल्टेज स्पाइक्स (Voltage Spikes)। |
|
संरचनात्मक अंतर |
यह आमतौर पर एक छड़ (Rod) या धातु का नुकीला उपकरण होता है जिसे पृथ्वी से जोड़ा जाता है। |
यह एक गैर-रेखीय प्रतिरोधी (Non-Linear Resistor) डिवाइस होता है, जो अक्सर मेटल ऑक्साइड वैरिस्टर (MOV) का उपयोग करता है। |
वास्तव में, सर्ज अरेस्टर एक व्यापक शब्द है जो किसी भी क्षणिक वोल्टेज उछाल (Transient Overvoltage) से बचाने वाले उपकरण को दर्शाता है। लाइटनिंग अरेस्टर को अक्सर सर्ज अरेस्टर का एक विशेष रूप माना जाता है, जिसे विशेष रूप से सीधे बिजली गिरने की अत्यधिक ऊर्जा को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
आजकल, उच्च वोल्टेज प्रणालियों में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश उपकरण जो बिजली के सर्ज से रक्षा करते हैं, उन्हें सर्ज अरेस्टर कहा जाता है, जो बिजली के साथ-साथ स्विचिंग से उत्पन्न सर्ज से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
Ans.
विद्युत उत्पादन के लिए तुल्यकालिक जनरेटर (Synchronous Generators), जिन्हें अल्टरनेटर (Alternators) भी कहा जाता है, का उपयोग मुख्य रूप से उनकी स्थिर आउटपुट आवृत्ति, वोल्टेज नियंत्रण क्षमता और ग्रिड के साथ निर्बाध रूप से समानांतर (Parallel) रूप से काम करने की क्षमता के कारण किया जाता है। वे बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए सबसे विश्वसनीय और कुशल मशीनें हैं।
अतुल्यकालिक जनरेटर (Asynchronous Generators) या इंडक्शन जनरेटर का उपयोग मुख्य रूप से पवन ऊर्जा संयंत्रों जैसे छोटे या विशेष अनुप्रयोगों में किया जाता है, लेकिन वे प्रतिक्रियाशील शक्ति को ग्रिड में इंजेक्ट नहीं कर सकते हैं, उन्हें हमेशा ग्रिड से प्रतिक्रियाशील शक्ति खींचनी पड़ती है, जो बड़े ग्रिड को स्थिर रखने के लिए उन्हें अनुपयुक्त बनाता है। इसलिए, अधिकांश बिजली संयंत्रों में तुल्यकालिक जनरेटर (Synchronous Generators) ही प्राथमिक जनरेटर हैं।
Ans.
डीसी (DC) जनरेटर को उनके फील्ड वाइंडिंग (Field Winding) उत्तेजन (Excitation) के तरीके के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रमुख प्रकारों में सूचीबद्ध किया जाता है: स्थायी चुंबक डीसी जनरेटर और विद्युत चुंबक डीसी जनरेटर।
इन जनरेटरों में, चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए विद्युत चुंबक (Electromagnet) (जिसे फील्ड वाइंडिंग कहते हैं) का उपयोग किया जाता है। इन्हें आगे उत्तेजन के तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
i. डीसी शंट जनरेटर (DC Shunt Generator)
ii. डीसी सीरीज जनरेटर (DC Series Generator)
iii. डीसी कम्पाउंड जनरेटर (DC Compound Generator)
Ans.
सिंक्रोनस जनरेटर (Synchronous Generator) और एसिंक्रोनस जनरेटर (Asynchronous Generator) (जिसे इंडक्शन जनरेटर भी कहा जाता है) के बीच मुख्य अंतर उनकी रोटर गति और ग्रिड पर नियंत्रण की क्षमता में है।
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विशेषता |
सिंक्रोनस जनरेटर (Synchronous Generator) / अल्टरनेटर |
एसिंक्रोनस जनरेटर (Asynchronous Generator) / इंडक्शन जनरेटर |
|---|---|---|
|
रोटर गति (Rotor Speed) |
रोटर हमेशा तुल्यकालिक गति (N_s) पर घूमता है, जिसका अर्थ है कि रोटर की गति चुंबकीय क्षेत्र की गति के बराबर होती है। |
रोटर तुल्यकालिक गति (N_s) से अधिक गति पर घूमता है, जिससे स्लिप (Slip) का मान ऋणात्मक (Negative) होता है। (N_r > N_s) |
|
क्षेत्र उत्तेजन (Field Excitation) |
इसे बाहरी DC स्रोत (जैसे एक्ससाइटर) की आवश्यकता होती है, जिससे यह अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सके। |
इसे बाहरी उत्तेजन की आवश्यकता नहीं होती है; यह चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए ग्रिड से प्रतिक्रियाशील शक्ति (Reactive Power) खींचता है। |
|
प्रतिक्रियाशील शक्ति (Reactive Power) |
यह प्रतिक्रियाशील शक्ति को उत्पन्न या अवशोषित (ग्रिड को प्रदान या ग्रिड से खींच) कर सकता है, जिससे यह ग्रिड वोल्टेज को नियंत्रित करने में सक्षम होता है। |
यह हमेशा ग्रिड से प्रतिक्रियाशील शक्ति खींचता है (अवशोषित करता है)। यह वोल्टेज को नियंत्रित नहीं कर सकता। |
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ग्रिड अनुप्रयोग |
बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए प्राथमिक विकल्प है (जैसे थर्मल, हाइड्रो, न्यूक्लियर पावर प्लांट)। |
मुख्य रूप से पवन टर्बाइन और छोटी जलविद्युत इकाइयों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में उपयोग किया जाता है। |
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संरचना की जटिलता |
अधिक जटिल (स्लिप रिंग, ब्रश और एक्साइटर की आवश्यकता होती है)। |
अधिक सरल और मजबूत (स्लिप रिंग और एक्साइटर की आवश्यकता नहीं होती)। |
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शुरुआत |
इसे तुल्यकालिक गति तक लाने के लिए एक प्राइम मूवर (Prime Mover) की आवश्यकता होती है। |
इसे शुरू करने के लिए प्राइम मूवर के साथ-साथ ग्रिड से प्रतिक्रियाशील शक्ति की आवश्यकता होती है। |
Ans.
डीसी शंट मोटर (DC Shunt Motor) की गति नियंत्रण (Speed Control) की दो बुनियादी योजनाएँ निम्नलिखित हैं:
Ans.
मोटर का सिद्धांत विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित है।
मोटर एक विद्युत-यांत्रिक मशीन है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा (घूमने वाली गति) में परिवर्तित करती है।
बुनियादी सिद्धांत:
संक्षेप में, मोटर का सिद्धांत यह है कि चुंबकीय क्षेत्र में धारा प्रवाहित करने पर बल उत्पन्न होता है, जो घूर्णन (Rotation) पैदा करता है।
Ans.
आर्मेचर प्रतिक्रिया (Armature Reaction) से तात्पर्य मुख्य क्षेत्र फ्लक्स (Main Field Flux) पर आर्मेचर फ्लक्स के प्रभाव से है।
जब एक डीसी मशीन (चाहे वह मोटर हो या जनरेटर) लोड पर चलती है, तो आर्मेचर वाइंडिंग में धारा (I_a) प्रवाहित होती है। इस धारा के कारण आर्मेचर फ्लक्स (\Phi_a) उत्पन्न होता है।
यह आर्मेचर फ्लक्स, जो कि मुख्य रूप से ध्रुवों (Poles) द्वारा उत्पन्न मुख्य क्षेत्र फ्लक्स (\Phi_m) के लंबवत (Perpendicular) होता है, मुख्य फ्लक्स के साथ परस्पर क्रिया (Interact) करता है और उस पर दो अवांछनीय प्रभाव डालता है:
संक्षेप में:
आर्मेचर प्रतिक्रिया के कारण स्पार्किंग (Sparking) और मशीन की दक्षता (Efficiency) में कमी आ सकती है।
Ans.
ध्रुवीकरण सूचकांक (Polarization Index - PI) विद्युत मशीन (जैसे मोटर और ट्रांसफार्मर) के इन्सुलेशन (विद्युत रोधन) की समग्र गुणवत्ता और नमी की मात्रा का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण नैदानिक उपकरण है।
ध्रुवीकरण सूचकांक (PI) दो अलग-अलग समय पर मापे गए इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) का अनुपात है।
यह अनुपात दिखाता है कि समय के साथ इन्सुलेशन सामग्री कितनी अच्छी तरह से चार्ज को अवशोषित करती है और इन्सुलेशन प्रतिरोध में वृद्धि होती है। यह मशीन के इन्सुलेशन में नमी, प्रदूषण या गंभीर क्षति की उपस्थिति को इंगित करता है।
PI मान की गणना 10 मिनट के इन्सुलेशन प्रतिरोध को 1 मिनट के इन्सुलेशन प्रतिरोध से विभाजित करके की जाती है:
{PI} = {{10 मिनट पर इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR)} (R_{10})}{{1 मिनट पर इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR)} (R_{1})}
PI मान और इन्सुलेशन की स्थिति:
विद्युत मशीनरी के लिए स्वीकार्य PI मान आमतौर पर 2.0 या उससे अधिक होता है। विभिन्न मानों का अर्थ निम्नलिखित है:
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PI मान. |
इन्सुलेशन की स्थिति |
|---|---|
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< 1.0 से 1.5 तक |
खराब / खतरनाक (नमी संदूषण, गंदगी या गंभीर गिरावट को दर्शाता है) |
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1.5 से 2.0 तक |
सीमांत (Marginal) |
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\ge 2.0 |
अच्छा / संतोषजनक |
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> 4.0 |
उत्कृष्ट (Excellent) |
एक उच्च PI मान (आमतौर पर 2.0 या उससे अधिक) स्वस्थ, साफ और सूखा इन्सुलेशन दर्शाता है।
एक कम PI मान (1.0 के करीब) दूषित, खराब या गीला इन्सुलेशन दर्शाता है।
Ans.
जब किसी शक्ति वितरण (Power Distribution) प्रणाली में शक्ति गुणांक (Power Factor - PF) अग्रणी (Leading) होता है, तो इसका मतलब है कि परिपथ में धारा (Current) वोल्टेज (Voltage) से आगे चलती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब सिस्टम में धारिता लोड (Capacitive Load) की मात्रा अधिक हो जाती है।
शक्ति गुणांक के अत्यधिक अग्रणी होने पर वितरण प्रणाली में निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
यह सबसे महत्वपूर्ण और हानिकारक प्रभाव है।
आमतौर पर, उद्योगों में पिछड़ा हुआ शक्ति गुणांक (Lagging Power Factor) (इंडक्टिव लोड के कारण) होता है, और इसे इकाई (Unity) के करीब लाने के लिए संधारित्र बैंक (Capacitor Banks) का उपयोग किया जाता है। हालांकि, यदि गलती से बहुत अधिक संधारित्र लगा दिए जाते हैं या हल्के लोड की स्थिति में भी वे चालू रहते हैं, तो शक्ति गुणांक अत्यधिक अग्रणी हो सकता है, जिससे सिस्टम में वोल्टेज अनियंत्रण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है।
Ans.
2 फेज मोटर एक प्रकार की AC (प्रत्यावर्ती धारा) मोटर है, जिसमें आमतौर पर दो स्टेटर वाइंडिंग (Stator Windings) होती हैं, जो एक-दूसरे से 90 विद्युत डिग्री पर विस्थापित (Displaced) होती हैं।
मूल रूप से, 2-फेज मोटर एक दो-फेज विद्युत आपूर्ति पर चलने के लिए डिज़ाइन की गई थी, जिसमें दो AC वोल्टेज एक-दूसरे से 90^{\circ} कला कोण पर होते थे। हालांकि, आधुनिक विद्युत वितरण प्रणालियों में, 2-फेज प्रणाली का उपयोग अब लगभग नहीं किया जाता है; इसके बजाय 3-फेज या सिंगल-फेज प्रणाली का उपयोग होता है।
आजकल, जब "2 फेज मोटर" शब्द का उपयोग किया जाता है, तो यह अक्सर दो प्रकार की मोटरों को संदर्भित करता है:
Ans.
ईओटी (EOT - Electric Overhead Travelling) क्रेन के लिए वीवीवीएफ (VVVF - Variable Voltage Variable Frequency) ड्राइव का उपयोग गैर-वीवीवीएफ (पारंपरिक कांटेक्टर या प्रतिरोधी नियंत्रण) ड्राइव की तुलना में कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।
VVVF ड्राइव्स क्रेन संचालन में सटीकता, सुरक्षा और दक्षता में सुधार करते हैं।
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लाभ का क्षेत्र |
वीवीवीएफ ड्राइव (VVVF Drive) |
गैर-वीवीवीएफ ड्राइव (Non-VVVF Drive) |
|---|---|---|
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गति नियंत्रण |
चर गति (Stepless Speeds): गति को 5% से 100% तक किसी भी बिंदु पर सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। |
निश्चित/स्टेप गति (Fixed/Step Speeds): केवल कुछ निश्चित गतियाँ (जैसे धीमी, मध्यम, तेज) ही उपलब्ध होती हैं। |
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सुचारू संचालन |
झटके/लोड स्विंग में कमी (Reduced Jerk/Load Swing): मोटर का त्वरण और मंदन (Acceleration and Deceleration) प्रोग्राम किए गए रैंप समय के माध्यम से धीरे-धीरे होता है, जिससे लोड झूलता नहीं है। |
अचानक शुरू होने और रुकने से झटके (Jerks) लगते हैं, जिससे लोड में स्विंग (झुकाव) होता है। |
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ऊर्जा दक्षता |
अधिक ऊर्जा बचत: लोड की आवश्यकता के अनुसार मोटर की गति को समायोजित करता है, जिससे मोटर को हमेशा पूरी गति पर चलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। |
मोटर हमेशा अपनी पूर्ण गति और आवृत्ति पर चलती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी अधिक होती है। |
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ब्रेकिंग और टॉर्क |
नियंत्रित ब्रेकिंग और पुनर्योजी ऊर्जा (Regenerative Energy): ड्राइव विद्युत ब्रेकिंग प्रदान करता है और ब्रेकिंग के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को वापस स्रोत में भेज सकता है या ब्रेकिंग रोकने के लिए प्रतिरोधी (Braking Resistor) में नष्ट कर सकता है। |
मुख्य रूप से यांत्रिक ब्रेक (Mechanical Brake) पर निर्भर करता है, जिससे घिसाव (Wear and Tear) अधिक होता है। |
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उपकरण का जीवनकाल |
घिसाव में कमी (Reduced Wear and Tear): मोटर और यांत्रिक घटकों (गियर, रस्सी/रस्सी ड्रम) पर कम यांत्रिक तनाव के कारण उनका जीवनकाल बढ़ जाता है। |
उच्च यांत्रिक तनाव के कारण मोटर और यांत्रिक भागों में जल्दी घिसाव होता है। |
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सुरक्षा और सटीकता |
सटीक स्थिति निर्धारण: माइक्रोगति पर अत्यंत सटीक नियंत्रण संभव है, जो संवेदनशील और नाजुक वस्तुओं को संभालने के लिए महत्वपूर्ण है। ओवरलोड सुरक्षा ड्राइव में अंतर्निहित (Inbuilt) होती है। |
सटीक स्थिति निर्धारण (Precision Positioning) कठिन होता है और मोटर को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए बाहरी हार्डवेयर की आवश्यकता होती है। |
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रखरखाव |
संपर्ककर्ताओं (Contactors) के उपयोग में कमी के कारण रखरखाव कम होता है और स्पार्किंग (Arcing) की संभावना समाप्त हो जाती है। |
संपर्ककर्ता जल्दी खराब होते हैं, जिससे रखरखाव की लागत और समय बढ़ जाता है। |
Ans.
विद्युत ट्रांसफार्मर में वेक्टर समूहीकरण (Vector Grouping) का महत्व विद्युत प्रणाली के सही संचालन, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में निहित है।
वेक्टर समूहीकरण (जैसे Dyn11, Yyn0, आदि) तीन-चरण ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग (कुंडलियों) के कनेक्शन और उनके बीच के फेज संबंध को दर्शाता है।
वेक्टर समूहीकरण निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को निर्धारित करता है:
संक्षेप में, वेक्टर समूहीकरण एक कोड है जो इंजीनियरों को ट्रांसफार्मर को सिस्टम में सही ढंग से एकीकृत करने के लिए आवश्यक सभी जानकारी देता है, जिससे वोल्टेज असंतुलन और परिसंचारी धाराओं को रोका जा सके।
Ans.
घरेलू पंखों में मुख्य रूप से सिंगल फेज इंडक्शन मोटर (Single-Phase Induction Motor) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि घर की बिजली की आपूर्ति सिंगल फेज एसी होती है।
इन इंडक्शन मोटरों को उनके संचालन के तरीके के आधार पर आगे वर्गीकृत किया जाता है:
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पंखे का प्रकार |
उपयोग की जाने वाली AC मोटर का प्रकार |
विशेषताएँ |
|---|---|---|
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सीलिंग फैन (Ceiling Fan) |
परमानेंट स्प्लिट कैपेसिटर (PSC) मोटर (यह सिंगल-फेज इंडक्शन मोटर का एक प्रकार है) |
यह पारंपरिक और सबसे आम मोटर है। इसमें स्टार्टिंग (शुरुआत) और रनिंग (चलने) दोनों के लिए एक ही कैपेसिटर स्थायी रूप से जुड़ा रहता है। |
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पेडस्टल फैन (Pedestal Fan), टेबल फैन (Table Fan), ब्रैकेट फैन (Bracket Fan) |
कैपेसिटर स्टार्ट इंडक्शन मोटर या PSC मोटर |
ये भी सिंगल-फेज इंडक्शन मोटर का उपयोग करते हैं, जो किफायती और सरल होते हैं। |
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एग्जॉस्ट फैन (Exhaust Fan) / छोटे ब्लोअर |
शेडेड पोल मोटर (Shaded Pole Motor) या PSC मोटर |
शेडेड पोल मोटर सबसे सरल, सबसे सस्ती होती है लेकिन इसमें टॉर्क (torque) कम होता है, इसलिए इसका उपयोग छोटे एग्जॉस्ट फैन और कम हवा फेंकने वाले अनुप्रयोगों में किया जाता है। |
ऊर्जा दक्षता के लिए आधुनिक विकल्प (Modern Efficient Alternative)
आजकल, ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) पर बढ़ते ध्यान के कारण, एक अलग प्रकार की मोटर लोकप्रिय हो रही है:
Ans.
पक्षी ट्रांसमिशन लाइनों या करंट तारों पर बैठने पर इसलिए झटका (करंट) महसूस नहीं करते क्योंकि उनके शरीर में वोल्टेज का कोई अंतर (Potential Difference) नहीं होता और विद्युत सर्किट पूरा नहीं होता।
करंट प्रवाहित होने के लिए दो मुख्य चीजें आवश्यक हैं:
जब कोई पक्षी किसी एक तार पर बैठता है, तो निम्नलिखित होता है:
पक्षी को झटका तभी लगेगा जब वह गलती से एक साथ दो अलग-अलग विभव वाले बिंदुओं को छू लेता है, जिससे सर्किट पूरा हो जाता है:
उदाहरण के लिए, चमगादड़ (Bats) को अक्सर इसलिए झटका लगता है क्योंकि वे तारों पर उल्टे लटकते हैं और गलती से उनका बड़ा पंख या शरीर का हिस्सा एक साथ दो तारों को छू लेता है।
Ans.
यदि आप एक मानक फ्लोरोसेंट ट्यूब लाइट (जिसे चोक और स्टार्टर के साथ AC सप्लाई पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है) को सीधे 220 वोल्ट डीसी (DC) सप्लाई देते हैं, तो:
हाँ, एक ट्यूब लाइट को DC पर चलाया जा सकता है, लेकिन यह एक मानक AC सर्किट के साथ संतोषजनक ढंग से काम नहीं करेगी, और इसके लिए सर्किट में बदलाव की आवश्यकता होती है:
Ans.
दिए गए विकल्पों डीसी मोटर, इंडक्शन मोटर, या सिंक्रोनस मोटर में से, डीसी सीरीज़ (श्रेणी) मोटर में उच्चतम प्रारंभिक टॉर्क (High Starting Torque) होता है।
निष्कर्ष:
Ans.
वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (VCB) एक सुरक्षा उपकरण है जो दोष (Fault) की स्थिति में विद्युत सर्किट को तेज़ी से खोलने और उसमें बहने वाले करंट को रोकने के लिए उच्च वैक्यूम (निर्वात) का उपयोग करता है।
वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (VCB) एक ऐसा सर्किट ब्रेकर है जो सर्किट को वियोजित (Break) करते समय उत्पन्न होने वाले आर्क (Arc) को बुझाने (Arc Extinction) के लिए वैक्यूम इंटरप्टर नामक एक सीलबंद कक्ष के अंदर उच्च निर्वात (High Vacuum) का उपयोग करता है।
वैक्यूम का उपयोग मुख्य रूप से उसकी उत्कृष्ट ढांकता हुआ शक्ति (Dielectric Strength) और चाप को तेज़ी से बुझाने की क्षमता के कारण किया जाता है।
VCB अपनी विश्वसनीयता, कम रखरखाव और तेज़ संचालन के कारण मुख्य रूप से मध्यम वोल्टेज (Medium Voltage) वाले अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं।
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अनुप्रयोग का क्षेत्र |
वोल्टेज रेंज |
उदाहरण |
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बिजली वितरण प्रणाली |
1kV से 38kV (आमतौर पर 11 kV से 33 kV) |
सबस्टेशन, बिजली घरों और स्विचगियर में। |
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औद्योगिक संयंत्र |
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भारी मोटरें, ट्रांसफार्मर और संधारित्र (Capacitor) बैंकों को सुरक्षित करने के लिए। |
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विद्युत रेलवे |
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कर्षण (Traction) सबस्टेशन में। |
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अन्य अनुप्रयोग |
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बंदरगाहों, खनन उद्यमों, और जहाँ बार-बार स्विचिंग की आवश्यकता होती है। |
VCBs को SF6 ब्रेकर की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है क्योंकि वे कोई हानिकारक गैस उत्सर्जित नहीं करते हैं।
Ans.
एसीआर केबल का पूरा नाम एल्यूमीनियम कंडक्टर स्टील रीइन्फोर्स्ड (Aluminum Conductor Steel Reinforced - ACSR) है।
यह एक उच्च क्षमता और उच्च शक्ति वाला स्ट्रैन्डेड कंडक्टर (stranded conductor) है जिसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत ऊर्जा के संचरण (Transmission) और वितरण (Distribution) के लिए किया जाता है।
ACSR केबल दो मुख्य सामग्रियों के गुणों का उपयोग करने के लिए बनाई गई है:
इस दोहरी संरचना के कारण, ACSR केबल में एल्यूमीनियम की अच्छी चालकता और स्टील की उच्च शक्ति का संयोजन होता है, जिससे यह लंबी शिरोपरि (Overhead) लाइनों के लिए आदर्श बन जाता है।
ACSR केबल का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में किया जाता है:
Ans.
मार्क्स सर्किट, जिसे आमतौर पर मार्क्स जनरेटर (Marx Generator) कहा जाता है, एक विशेष प्रकार का विद्युत परिपथ है जिसका उपयोग कम DC वोल्टेज से उच्च वोल्टेज स्पंद (High Voltage Pulse) उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
मार्क्स जनरेटर का मूल सिद्धांत यह है कि यह कई कैपेसिटर को समांतर (Parallel) क्रम में एक कम वोल्टेज स्रोत से चार्ज करता है, और फिर उन्हें लगभग तुरंत श्रृंखला (Series) क्रम में जोड़कर एक बहुत उच्च वोल्टेज स्पंद (पल्स) उत्पन्न करता है।
मार्क्स सर्किट में मुख्य रूप से तीन घटक होते हैं, जिन्हें कई चरणों (Stages) में व्यवस्थित किया जाता है:
मार्क्स जनरेटर का उपयोग उन अनुप्रयोगों में किया जाता है जहाँ कम अवधि के लिए अत्यंत उच्च वोल्टेज की आवश्यकता होती है:
Ans.
मोटर (Motor) का सिद्धांत विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करना है। यह सिद्धांत चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल लगने (यानी विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव) के मूलभूत नियम पर आधारित है।
विद्युत मोटर के कार्य करने का मूल सिद्धांत यह है कि:
जब किसी धारावाही चालक (Current-Carrying Conductor) को चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) में रखा जाता है, तो वह चालक एक यांत्रिक बल (Mechanical Force) का अनुभव करता है।
यह बल चालक को घुमाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा घूर्णन (Rotation) की यांत्रिक ऊर्जा में बदल जाती है।
Ans.
विद्युत कर्षण (Electric Traction) वह प्रणाली है जिसमें रेलगाड़ी, ट्राम, ट्रॉली बस अथवा किसी अन्य वाहन को खींचने या चलाने के लिए विद्युत् शक्ति का उपयोग किया जाता है।
सरल शब्दों में, यह वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए कर्षण बल (Tractive Force) उत्पन्न करने हेतु विद्युत् मोटरों का उपयोग करने की विधि है।
विद्युत कर्षण प्रणाली के गैर-विद्युत कर्षण (जैसे स्टीम इंजन या डीजल इंजन) प्रणालियों की तुलना में कई लाभ हैं:
Ans.
पारंपरिक 40W फ्लोरोसेंट ट्यूब लाइट को उसके मूल चोक (कॉइल) और स्टार्टर के बिना सीधे 230V AC/DC पर चलाना संभव नहीं है और यह अत्यधिक खतरनाक हो सकता है।
चोक/कॉइल (जिसे बैलास्ट भी कहा जाता है) के दो मुख्य कार्य होते हैं, जिनके बिना ट्यूब लाइट काम नहीं कर सकती:
चोक के बिना ट्यूब लाइट को सुरक्षित रूप से और कुशलता से चलाने के लिए, आप एक इलेक्ट्रॉनिक बैलास्ट या सीएफएल/एलईडी ड्राइवर सर्किट का उपयोग कर सकते हैं।
1. इलेक्ट्रॉनिक बैलास्ट का उपयोग
2. खराब CFL/LED ड्राइवर सर्किट का उपयोग
Ans.
थर्मल पावर स्टेशन (Thermal Power Station) का मुख्य ऑपरेशन उष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) को विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) में परिवर्तित करना है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से रैंकाइन चक्र (Rankine Cycle) पर आधारित होती है, जिसमें ऊर्जा रूपांतरण के कई चरण शामिल होते हैं।
थर्मल पावर प्लांट के संचालन को मोटे तौर पर छह प्रमुख चरणों में विभाजित किया जा सकता है:
Ans.
एसी सर्किट में सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए फेज (Phase/Live) तार में फ्यूज और न्यूट्रल (Neutral) तार में लिंक (Link) प्रदान किया जाता है।
इसके दो मुख्य कारण हैं: सुरक्षा और प्रोटेक्शन की प्रभावशीलता।
फ्यूज का मुख्य उद्देश्य सर्किट को अतिरिक्त करंट (Overcurrent) और शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) से बचाना है। इसे हमेशा फेज तार में लगाने का कारण है:
न्यूट्रल तार में फ्यूज के बजाय एक सीधा लिंक (ठोस कंडक्टर) या कटआउट (Link) प्रदान किया जाता है, जिसके दो कारण हैं:
संक्षेप में, फेज में फ्यूज सुरक्षा के लिए उच्च वोल्टेज को हटाता है, जबकि न्यूट्रल में लिंक रिटर्न पथ की निरंतरता बनाए रखता है और खतरनाक "फ्लोटिंग" वोल्टेज को रोकता है।
Ans.
डीसी जनरेटर (DC Generator) को मुख्य रूप से उनके फील्ड वाइंडिंग (Field Winding) और आर्मेचर वाइंडिंग (Armature Winding) के बीच कनेक्शन के तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
डीसी जनरेटर की सूची निम्नलिखित है:
इन जनरेटर में, फील्ड वाइंडिंग को आर्मेचर में ही उत्पन्न होने वाले करंट द्वारा उत्तेजित किया जाता है। यह तीन प्रकार का होता है:
(a) शंट जनरेटर (Shunt Generator)
(b) श्रृंखला जनरेटर (Series Generator)
(c) कंपाउंड जनरेटर (Compound Generator)
इस जनरेटर में दो फील्ड वाइंडिंग होती हैं: एक शंट में और दूसरी श्रृंखला में जुड़ी होती है। यह दोनों शंट और श्रृंखला जनरेटर की विशेषताओं को मिलाता है। यह दो प्रकार का होता है:
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प्रकार |
विशेषता |
आउटपुट वोल्टेज (Load बढ़ने पर) |
|---|---|---|
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I. दीर्घ शंट कंपाउंड (Long Shunt Compound) |
शंट फील्ड वाइंडिंग आर्मेचर और सीरीज फील्ड वाइंडिंग दोनों के समांतर में जुड़ी होती है। |
- |
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II. लघु शंट कंपाउंड (Short Shunt Compound) |
शंट फील्ड वाइंडिंग केवल आर्मेचर के समानांतर में जुड़ी होती है। |
- |
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A. कम्युलेटिव कंपाउंड (Cumulative Compound) |
श्रृंखला और शंट फील्ड एक-दूसरे को मदद करती हैं। |
लोड बढ़ने पर वोल्टेज लगभग स्थिर रहता है (ओवर, फ्लैट या अंडर कंपाउंडिंग के आधार पर)। |
|
B. विभेदक कंपाउंड (Differential Compound) |
श्रृंखला और शंट फील्ड एक-दूसरे का विरोध करती हैं। |
लोड बढ़ने पर वोल्टेज तेजी से घटता है (इसलिए इसका उपयोग कम होता है)। |
Ans.
इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर और साधारण रिओस्टेट (Rheostat) रेगुलेटर के बीच मुख्य अंतर उनके कार्य सिद्धांत और दक्षता (Efficiency) में है, जो सीधे बिजली की खपत को प्रभावित करता है।
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विशेषताएँ |
इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर (Capacitor/Triac Based) |
साधारण रिओस्टेट रेगुलेटर (Resistive Type) |
|---|---|---|
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मूल सिद्धांत |
वोल्टेज को कम करना (Reducing Voltage): यह सप्लाई वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए कैपेसिटर (संधारित्र) या सेमीकंडक्टर (जैसे TRIAC) का उपयोग करता है। |
करंट को सीमित करना (Limiting Current): यह श्रृंखला में प्रतिरोध (Series Resistance) का उपयोग करके सर्किट में प्रवाहित होने वाले करंट को सीमित करता है। |
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उपयोग किया गया घटक |
मुख्य रूप से कैपेसिटर या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट। |
वायर-वाउंड रेसिस्टर (Wire-wound Resistor) या रेसिस्टर्स की एक श्रृंखला। |
दक्षता दोनों प्रकार के रेगुलेटर के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर है:
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अंतर |
इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर |
साधारण रिओस्टेट रेगुलेटर |
|---|---|---|
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आकार और वजन |
छोटा और हल्का (अधिक कॉम्पैक्ट)। |
बड़ा और भारी। |
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कीमत |
निर्माण लागत के कारण आमतौर पर थोड़ा महंगा। |
सस्ता। |
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नियंत्रण |
आमतौर पर स्टेप-टाइप (1, 2, 3, 4) नियंत्रण या पोटेंशियोमीटर के माध्यम से सटीक नियंत्रण। |
आमतौर पर स्टेप-टाइप (1, 2, 3, 4) नियंत्रण। |
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जीवनकाल |
सेमीकंडक्टर या कैपेसिटर की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, लेकिन आम तौर पर अच्छा। |
प्रतिरोधक तार की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। |
निष्कर्ष:
आजकल, घरों में लगभग हमेशा इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर का उपयोग किया जाता है क्योंकि वे अधिक ऊर्जा कुशल हैं और लंबी अवधि में बिजली के बिल को कम करते हैं। रिओस्टेट रेगुलेटर पुरानी तकनीक है और उच्च ऊर्जा खपत के कारण अब शायद ही कभी उपयोग किए जाते हैं।
Ans.
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के बीच मुख्य अंतर स्केल (Scale), शक्ति (Power) और करंट के नियंत्रण के तरीके में है।
सरल शब्दों में:
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विशेषता |
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) |
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ECE) |
|---|---|---|
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मुख्य फोकस |
विद्युत ऊर्जा (Electrical Power): उत्पादन, वितरण, और बड़ी मशीनों को चलाना। |
सूचना संकेत (Information Signal): डेटा/संकेत को संसाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉन प्रवाह को नियंत्रित करना। |
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स्केल (Scale) |
मैक्रोस्कोपिक (Macroscopic): बड़े पैमाने पर सिस्टम और उच्च वोल्टेज/करंट। |
माइक्रोस्कोपिक (Microscopic): छोटे पैमाने पर सर्किट और कम वोल्टेज/करंट। |
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वोल्टेज स्तर |
उच्च वोल्टेज (High Voltage) (जैसे 220V से 400KV)। |
कम वोल्टेज (Low Voltage) (जैसे 5V से 12V)। |
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उपयोग किए जाने वाले उपकरण |
ट्रांसफार्मर, जनरेटर, मोटर, पावर ग्रिड, स्विचगियर, भारी मशीनरी। |
ट्रांजिस्टर, डायोड, इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs), माइक्रोप्रोसेसर, सेंसर। |
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करंट का प्रकार |
AC (Alternating Current) और DC (Direct Current) दोनों पर काम करता है। |
मुख्य रूप से DC (Direct Current) पर काम करता है। |
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सर्किट की प्रकृति |
सर्किट का कोई "निर्णय लेने" का कार्य नहीं होता; यह ऊर्जा को परिवर्तित करता है (जैसे ऊष्मा, प्रकाश, या गति में)। |
सर्किट में निर्णय लेने (Decision-Making) की क्षमता होती है (जैसे लॉजिक गेट्स और माइक्रोचिप)। |
दोनों क्षेत्रों के बीच कई ओवरलैप (जैसे कंट्रोल सिस्टम, रोबोटिक्स) हैं, लेकिन उनके मुख्य अध्ययन क्षेत्र भिन्न हैं:
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मुख्य रूप से विद्युत शक्ति प्रणाली और विद्युत चुंबकत्व के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर उपकरणों और सूचना प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
Ans.
एक्साइटर (Exciter) को हिंदी में उत्तेजक कहते हैं। यह एक सहायक डीसी जनरेटर या इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है जिसका मुख्य कार्य बड़े एसी जनरेटर (अल्टरनेटर) या सिंक्रोनस मोटर की फील्ड वाइंडिंग (चुंबकीय कुंडली) को डीसी करंट (DC Current) प्रदान करना है, ताकि मुख्य मशीन में एक मजबूत और नियंत्रित चुंबकीय क्षेत्र स्थापित हो सके।
उत्तेजक एक अनिवार्य उपकरण है जो पावर स्टेशन में विद्युत उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले विशाल अल्टरनेटर (Alternator) के सफल संचालन को संभव बनाता है।
उत्तेजक का कार्य मुख्य रूप से अल्टरनेटर के आउटपुट वोल्टेज और रिएक्टिव पावर (Reactive Power) को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है।
उत्तेजक प्रणाली को मुख्यतः दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
(a) स्थैतिक उत्तेजक (Static Exciter)
(b) ब्रशरहित उत्तेजक (Brushless Exciter)
संक्षेप में, उत्तेजक वह 'दिल' है जो अल्टरनेटर के 'शरीर' को वह डीसी 'शक्ति' प्रदान करता है जिससे बिजली पैदा होती है और उस शक्ति को नियंत्रित भी किया जाता है।
Ans.
बीओएम शब्द का मतलब बिल ऑफ मैटेरियल्स (Bill of Materials - BOM) है।
यह एक व्यापक सूची (Comprehensive List) है जिसमें किसी अंतिम उत्पाद (Finished Product), उप-असेंबली (Sub-Assembly) या उप-उत्पाद (Sub-Component) को बनाने के लिए आवश्यक सभी कच्चे माल (Raw Materials), घटक (Components), भाग (Parts) और मात्रा (Quantities) का विवरण होता है।
बीओएम को अक्सर उत्पाद की "रेसिपी (Recipe)" या "ब्लूप्रिंट (Blueprint)" माना जाता है, क्योंकि यह निर्माण प्रक्रिया के लिए एक सटीक मार्गदर्शिका प्रदान करता है।
एक विशिष्ट बीओएम में निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होती है:
बीओएम को उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
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प्रकार |
विवरण |
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इंजीनियरिंग बीओएम (EBOM) |
यह उत्पाद के डिजाइन को दर्शाता है और इसमें इंजीनियरिंग और तकनीकी विवरण शामिल होते हैं। |
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विनिर्माण बीओएम (MBOM) |
यह उत्पाद के निर्माण के लिए आवश्यक संरचना को दर्शाता है, जिसमें उत्पादन और पैकेजिंग के लिए आवश्यक सभी आइटम शामिल होते हैं। |
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सेवा बीओएम (Service BOM) |
यह उत्पाद की मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक घटकों की सूची है। |
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सिंगल-लेवल बीओएम |
यह केवल एक स्तर की असेंबली दिखाता है (जैसे मुख्य उत्पाद और उसके तत्काल भाग)। |
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मल्टी-लेवल बीओएम |
यह उत्पाद संरचना का एक पदानुक्रम (Hierarchy) दिखाता है, जिसमें मुख्य असेंबली, उप-असेंबली, और उनके घटक शामिल होते हैं। |
Ans.
QMS का फुल फॉर्म क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम (Quality Management System) है, जिसे हिंदी में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली कहते हैं।
QMS एक औपचारिक ढांचा (Formalized Framework) है जिसमें किसी संगठन की नीतियों (Policies), प्रक्रियाओं (Processes), दस्तावेजीकृत प्रक्रियाओं (Documented Procedures) और संसाधनों का एक संग्रह शामिल होता है, जिसे वह ग्राहकों की आवश्यकताओं को लगातार पूरा करने और उनकी संतुष्टि बढ़ाने के लिए अपनाता है।
सरल शब्दों में:
QMS एक कंपनी के लिए वह नियम पुस्तिका (Rulebook) है जो यह सुनिश्चित करती है कि उसके उत्पाद या सेवाएँ हर बार एक ही उच्च-स्तरीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करें। यह दोषों और विफलताओं को कम करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
QMS के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
एक प्रभावी QMS निम्नलिखित मूलभूत तत्वों पर बनाया जाता है:
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तत्व (Element) |
विवरण (Description) |
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गुणवत्ता नीति (Quality Policy) |
संगठन का एक औपचारिक बयान जो गुणवत्ता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को परिभाषित करता है। |
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प्रक्रियाएँ और कार्यविधियाँ (Processes & Procedures) |
यह परिभाषित करना कि कोई विशेष कार्य "कैसे," "कब" और "किसके द्वारा" किया जाना है, ताकि कार्य में एकरूपता (Consistency) बनी रहे। |
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दस्तावेज़ीकरण और रिकॉर्ड (Documentation & Records) |
सभी गुणवत्ता-संबंधी गतिविधियों, परिणामों और प्रशिक्षण के रिकॉर्ड का रखरखाव। |
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नेतृत्व और भागीदारी (Leadership & Engagement) |
शीर्ष प्रबंधन का समर्थन और सभी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना। |
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निष्पादन माप (Performance Measurement) |
प्रक्रियाओं की निगरानी और ऑडिटिंग करना ताकि पता चल सके कि सिस्टम कितना प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। |
QMS को लागू करने से संगठन को कई दीर्घकालिक लाभ मिलते हैं:
Ans.
उत्पाद निर्माण (Product Manufacturing) एक जटिल प्रक्रिया है जो कई चुनौतियों से भरी होती है। ये चुनौतियाँ कच्चे माल की खरीद से लेकर अंतिम उत्पाद के बाजार में आने तक हर चरण को प्रभावित कर सकती हैं।
उत्पाद निर्माण में आने वाली कुछ मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
ये सीधे उत्पादन लाइन और दक्षता से संबंधित हैं।
बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रौद्योगिकी को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
ये सीधे व्यवसाय की लाभप्रदता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती हैं।
यह सुनिश्चित करना कि कार्यबल कुशल है और सभी नियम-कानूनों का पालन हो रहा है।
इन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए, कंपनियों को अक्सर लीन मैन्युफैक्चरिंग (Lean Manufacturing), सिक्स सिग्मा (Six Sigma), और उन्नत इन्वेंटरी प्रबंधन प्रणालियों (Advanced Inventory Management Systems) जैसे रणनीतिक उपकरणों का उपयोग करना पड़ता है।
Ans.
फैक्ट्री ओवरहेड (Factory Overhead), जिसे विनिर्माण ओवरहेड (Manufacturing Overhead) भी कहा जाता है, वे अप्रत्यक्ष लागतें (Indirect Costs) हैं जो किसी कारखाने या उत्पादन सुविधा के संचालन में खर्च होती हैं, लेकिन जिन्हें सीधे किसी विशिष्ट उत्पाद इकाई (specific product unit) से आसानी से जोड़ा नहीं जा सकता।
फैक्ट्री ओवरहेड उन सभी खर्चों का योग होता है जो किसी उत्पाद को बनाने के लिए आवश्यक तो हैं, पर वे प्रत्यक्ष सामग्री (Direct Material) और प्रत्यक्ष श्रम (Direct Labor) की श्रेणी में नहीं आते।
फैक्ट्री ओवरहेड में तीन मुख्य प्रकार की अप्रत्यक्ष लागतें शामिल होती हैं:
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लागत का प्रकार |
उदाहरण (Examples) |
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1. अप्रत्यक्ष सामग्री (Indirect Materials) |
मशीनरी को चलाने के लिए चिकनाई तेल (Lubricating Oil), सफाई सामग्री (Cleaning Supplies), या छोटे-मोटे उपकरण (Tools) जो जल्दी घिस जाते हैं। |
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2. अप्रत्यक्ष श्रम (Indirect Labor) |
उत्पादन प्रक्रिया में सीधे शामिल न होने वाले कर्मचारियों का वेतन, जैसे पर्यवेक्षक (Supervisors), निरीक्षक (Inspectors), रखरखाव कर्मचारी (Maintenance Staff), और सुरक्षा गार्ड (Security Guards)। |
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3. अन्य अप्रत्यक्ष व्यय (Other Indirect Expenses) |
* फैक्ट्री का किराया और बीमा (Insurance)। |
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* उत्पादन सुविधा की बिजली और उपयोगिताएँ (Utilities)। |
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* मशीनरी पर मूल्यह्रास (Depreciation on Machinery)। |
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* उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव (Repairs and Maintenance)। |
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* संपत्ति कर (Property Taxes)। |
संक्षेप में: फैक्ट्री ओवरहेड यह सुनिश्चित करता है कि उत्पादन सुविधा कार्यशील रहे, लेकिन यह खर्च सीधे उत्पाद के निर्माण को मापने योग्य तरीके से प्रभावित नहीं करता। यह उत्पाद की कुल लागत (Total Product Cost) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसे बाद में एक उपयुक्त आधार (जैसे श्रम घंटे, मशीन घंटे, या प्रत्यक्ष सामग्री लागत) का उपयोग करके उत्पादों पर वितरित किया जाता है।
Ans.
विनिर्माण इकाई (Manufacturing Unit) में प्रभावी पर्यवेक्षण (Supervision) के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उत्पादन प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से, कुशलतापूर्वक और गुणवत्ता मानकों के अनुसार चलें।
पर्यवेक्षण को सफल बनाने के लिए यहाँ कुछ मुख्य कदम और रणनीतियाँ दी गई हैं:
पर्यवेक्षण की शुरुआत स्पष्टता से होती है।
उत्पादन तल (Shop Floor) पर सक्रिय रूप से उपस्थित रहना और डेटा का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
पर्यवेक्षण का मुख्य फोकस गुणवत्ता बनाए रखना होना चाहिए।
एक सुरक्षित और प्रेरित कार्यबल उच्च उत्पादकता की नींव है।
प्रभावी पर्यवेक्षण का अर्थ केवल गलतियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि सुविधाकर्ता (Facilitator), शिक्षक (Teacher) और समस्या हल करने वाला (Problem Solver) बनना है जो टीम को सफलता की ओर ले जाता है।
Ans.
डीसी मशीन (DC Machine) में कम्यूटेशन (Commutation) एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो आर्मेचर कॉइल्स में उत्पन्न होने वाले प्रत्यावर्ती धारा (AC) को बाहरी सर्किट के लिए दिष्ट धारा (DC) में परिवर्तित करती है।
कम्यूटेशन वह प्रक्रिया है जिसके दौरान कम्यूटेटर सेगमेंट और ब्रश के संपर्क में आने पर एक आर्मेचर कॉइल में प्रवाहित होने वाले करंट की दिशा उलट (Reverse) जाती है।
आदर्श रूप से, यह करंट उलटाव (Reversal) तुरंत और सुचारू रूप से होना चाहिए। हालांकि, कॉइल में स्व-प्रेरकत्व (Self-Inductance) के कारण एक रिएक्टेंस वोल्टेज (Reactance Voltage) उत्पन्न होता है। यह वोल्टेज करंट के उलटाव का विरोध करता है और इसे धीमा कर देता है।
यदि करंट का उलटाव (Commutation) धीमा होता है, तो जब ब्रश एक सेगमेंट को छोड़ता है, तो सेगमेंट और ब्रश के बीच स्पार्किंग (Sparking) होती है। यह स्पार्किंग ब्रश और कम्यूटेटर दोनों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे मशीन का रखरखाव बढ़ जाता है और दक्षता कम होती है।
इंटर पोल (Inter Poles), जिन्हें कम्यूटेटिंग पोल (Commutating Poles) भी कहा जाता है, छोटे अतिरिक्त पोल होते हैं जो मुख्य चुंबकीय ध्रुवों (Main Poles) के बीच में स्थापित किए जाते हैं।
इंटर पोल का मुख्य उद्देश्य स्पार्किंग को समाप्त करना (Eliminate Sparking) और कम्यूटेशन में सुधार करना है। यह दो कारणों से आवश्यक हैं:
A. रिएक्टेंस वोल्टेज का निराकरण (Neutralization of Reactance Voltage)
इंटर पोल एक सहायक चुंबकीय क्षेत्र (Auxiliary Magnetic Field) उत्पन्न करते हैं। इस क्षेत्र का उद्देश्य कॉइल में स्व-प्रेरकत्व के कारण उत्पन्न होने वाले रिएक्टेंस वोल्टेज को ठीक से रद्द (Cancel Out) करना है। जब यह वोल्टेज सफलतापूर्वक निराकृत हो जाता है, तो करंट का उलटाव सुचारू रूप से होता है और स्पार्किंग समाप्त हो जाती है।
B. आर्मेचर रिएक्शन का प्रभाव कम करना (Reducing Armature Reaction Effect)
लोड बढ़ने पर, आर्मेचर करंट एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जिसे आर्मेचर रिएक्शन कहते हैं। यह आर्मेचर रिएक्शन मुख्य फ्लक्स को विकृत (Distort) कर देता है और चुंबकीय उदासीन अक्ष (Magnetic Neutral Axis - MNA) को खिसका देता है।
इंटर पोल द्वारा उत्पन्न क्षेत्र, आर्मेचर रिएक्शन के क्रॉस-मैग्नेटाइजिंग प्रभाव (Cross-Magnetizing Effect) का भी विरोध करता है। चूंकि इंटर पोल वाइंडिंग आर्मेचर के साथ श्रृंखला में जुड़ी होती है, उनका क्षेत्र लोड करंट के साथ बदलता है, जिससे वे सभी लोड स्तरों पर प्रभावी रूप से कम्यूटेशन में सुधार करते हैं।
इस प्रकार, इंटर पोल डीसी मशीन को उच्च गति और उच्च लोड पर भी स्पार्किंग-मुक्त संचालन की अनुमति देते हैं।
Ans.
एकल चरण ट्रांसफार्मर (Single-Phase Transformer) का कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम (Faraday's Law of Electromagnetic Induction) और पारस्परिक प्रेरण (Mutual Induction) पर आधारित है।
ट्रांसफार्मर एक स्थिर (Static) उपकरण है जो बिना किसी चलती भाग के आवृत्ति (Frequency) को बदले बिना विद्युत ऊर्जा को एक सर्किट से दूसरे सर्किट में स्थानांतरित करता है।
{प्रेरित ईएमएफ (EMF)} = {फेरों की संख्या}×{फ्लक्स परिवर्तन की दर}
उत्पन्न द्वितीयक ईएमएफ (E_2) का मान सीधे प्राथमिक और द्वितीयक वाइंडिंग में फेरों की संख्या के अनुपात पर निर्भर करता है, जिसे फेरा अनुपात (Turns Ratio - K) कहते हैं:
K = {N_2}{N_1} = {E_2}{E_1} approx {V_2}{V_1}
संक्षेप में, ट्रांसफार्मर चुंबकीय क्षेत्र को एक माध्यम के रूप में उपयोग करके, एसी वोल्टेज को उसकी आवृत्ति बदले बिना, एक स्तर से दूसरे स्तर पर परिवर्तित करता है।
रेटेड गति (Rated Speed), जिसे कभी-कभी सामान्य गति (Nominal Speed) भी कहा जाता है, वह गति है जिस पर एक मशीन (जैसे मोटर, जनरेटर, या इंजन) को उसके डिज़ाइन किए गए आउटपुट (यानी, पूर्ण लोड) पर सुरक्षित रूप से और लगातार (continuously) चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह वह गति है जिसे मशीन के नेमप्लेट (Nameplate) पर स्पष्ट रूप से इंगित किया जाता है और यह आमतौर पर क्रांति प्रति मिनट (Revolutions Per Minute - RPM) में व्यक्त की जाती है।
रेटेड गति किसी भी घूर्णन मशीन (rotating machine) के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण विनिर्देश (specification) है:
यदि एक लैंप (बल्ब) को दो चरणों (Two Phases) के बीच जोड़ा जाता है, तो यह निश्चित रूप से चमकेगा (यानी जल जाएगा), बशर्ते लैंप को इस तरह के वोल्टेज अंतर को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया हो।
यह सिद्धांत तीन-चरण (Three-Phase) एसी बिजली आपूर्ति प्रणाली पर लागू होता है, जिसका उपयोग अधिकांश औद्योगिक और कुछ उच्च शक्ति वाले आवासीय अनुप्रयोगों में किया जाता है।
किसी भी विद्युत उपकरण (जैसे लैंप) को काम करने के लिए, उसे आवश्यक वोल्टेज अंतर (Potential Difference) मिलना चाहिए।
जब लैंप को तीन-चरण प्रणाली के किन्हीं दो फेज (जैसे R और Y, या Y और B) के बीच जोड़ा जाता है, तो लैंप को मिलने वाला वोल्टेज, एकल-चरण आपूर्ति से मिलने वाले वोल्टेज से अधिक होता है।
{लाइन वोल्टेज } (V_L) = sqrt{3} ×{फेज वोल्टेज } (V_{ph})
मान लीजिए आपके क्षेत्र में फेज वोल्टेज V_{ph} = 230 V है।
निष्कर्ष: लैंप चमकेगा, लेकिन अगर यह 230 V का घरेलू लैंप है, तो यह ओवरवोल्टेज (overvoltage) के कारण क्षणिक रूप से चमककर खराब हो जाएगा।
Ans.
KVAR का पूर्ण रूप है किलोवोल्ट एम्पीयर रिएक्टिव (Kilovolt Ampere Reactive)।
KVAR विद्युत शक्ति (Electric Power) से संबंधित है और इसका उपयोग रिएक्टिव पावर (Reactive Power) को मापने के लिए किया जाता है।
रिएक्टिव पावर वह शक्ति है जो एसी (AC) सर्किट में चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Fields) को बनाने और बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है, जिसका उपयोग प्रेरक भार (Inductive Loads) जैसे मोटर्स, ट्रांसफार्मर और इंडक्टरों में किया जाता है।
जब 100 वाट और 40 वाट के दो बल्बों को समानांतर (Parallel) में 230{ V} की आपूर्ति के साथ जोड़ा जाता है, तो 100 वाट का बल्ब अधिक चमकेगा।
बल्ब की चमक (Brightness) सीधे उसमें उपयोग होने वाली शक्ति (Power Consumed) पर निर्भर करती है। जिस बल्ब में अधिक शक्ति की खपत होती है, वह अधिक चमकीला होता है।
जब दो बल्बों को समानांतर में जोड़ा जाता है, तो दोनों बल्बों को समान रूप से उनकी रेटेड वोल्टेज (यानी 230{ V}) की आपूर्ति मिलती है।
चूँकि दोनों को डिज़ाइन वोल्टेज मिल रहा है, वे अपनी रेटेड शक्ति (Rated Power) का उपभोग करेंगे: 100{ W} का बल्ब 100 { W} का उपभोग करेगा, और 40{ W} का बल्ब 40 { W} का उपभोग करेगा।
हम जानते हैं कि शक्ति (P), वोल्टेज (V) और प्रतिरोध (R) के बीच संबंध इस प्रकार है:
P = {V^2}{R}
चूँकि दोनों बल्बों को समान वोल्टेज (230 { V}) पर रेट किया गया है, हम कह सकते हैं कि शक्ति प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है: P = {1}{R}
{क्योंकि } P_{100} > P_{40} R_{100} < R_{40}
समानांतर सर्किट में, जिस बल्ब का प्रतिरोध कम होता है, वह अधिक धारा खींचता है (I = V/R), जिससे उसमें अधिक शक्ति (Power) की खपत होती है और वह अधिक चमकीला होता है।
इसलिए, 100 { W} का बल्ब 40 { W} के बल्ब से अधिक चमकेगा।
यदि इन्हीं दो बल्बों को 230 { V} आपूर्ति के साथ श्रृंखला (Series) में जोड़ा जाता, तो 40 वाट का बल्ब अधिक चमकीला होता।
कारण: श्रृंखला में, दोनों बल्बों में धारा (Current) समान होती है (I_{{total}})।
Ans.
बस बार (Busbar) और आइसोलेटर (Isolator) में तापमान वृद्धि (Temperature Rise) की जाँच या निगरानी मुख्य रूप से सुरक्षा, दक्षता और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
यह तापमान वृद्धि, डिज़ाइन की गई अधिकतम सीमा के भीतर होनी चाहिए ताकि उपकरणों को क्षति न पहुँचे।
बस बार (Busbar) धातु की पट्टियाँ होती हैं जिनका उपयोग स्विचगियर या सबस्टेशन में विद्युत ऊर्जा को वितरित करने के लिए किया जाता है।
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कारण |
व्याख्या |
|---|---|
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प्रतिरोधक हानि (Resistive Loss): |
जब बस बार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके आंतरिक विद्युत प्रतिरोध (R) के कारण ऊष्मा (\text{Power Loss} = I^2R) उत्पन्न होती है। यह ऊष्मा ही तापमान वृद्धि का मुख्य कारण है। |
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विद्युत की हानि: |
तापमान बढ़ने से बस बार का प्रतिरोध और बढ़ सकता है, जिससे शक्ति की हानि (Power Loss) बढ़ जाती है। अत्यधिक हानि दक्षता को कम करती है। |
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इन्सुलेशन पर प्रभाव: |
बस बार के चारों ओर के इन्सुलेशन (Insulation) सामग्री (जैसे PVC या एपॉक्सी) पर अत्यधिक तापमान से बुरा प्रभाव पड़ता है। इन्सुलेशन गर्म होने पर टूट सकता है, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। |
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विस्तार और यांत्रिक तनाव: |
अत्यधिक गर्मी धातु में थर्मल विस्तार (Thermal Expansion) पैदा करती है, जिससे बस बार के जोड़ों और सहायक संरचनाओं पर यांत्रिक तनाव पड़ता है, जिससे ढीले कनेक्शन (loose connections) हो सकते हैं। |
आइसोलेटर (जिसे डिस्कनेक्टर भी कहा जाता है) एक यांत्रिक स्विच है जिसका उपयोग सर्किट को ऑफ-लोड स्थिति में अलग (isolate) करने के लिए किया जाता है।
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कारण |
व्याख्या |
|---|---|
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जोड़ों की गुणवत्ता (Joint Quality): |
आइसोलेटर में सबसे अधिक तापमान वृद्धि इसके चलते हुए और स्थिर संपर्कों (Moving and Fixed Contacts) के जोड़ पर होती है। यदि संपर्क ढीले हैं, तो संपर्क प्रतिरोध (Contact Resistance) बहुत बढ़ जाता है। |
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स्पार्किंग और चाप (Sparking and Arcing): |
संपर्क प्रतिरोध बढ़ने से अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। यदि तापमान बहुत अधिक हो जाता है, तो संपर्क धातु पिघल (Melt) सकती है, जिससे स्पार्किंग (Sparking) या चाप (Arcing) उत्पन्न हो सकता है, जिससे आइसोलेटर विफल हो सकता है। |
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संचालन की विश्वसनीयता: |
ओवरलोड या फाल्ट (Fault) स्थितियों के दौरान तापमान वृद्धि की जाँच यह सुनिश्चित करती है कि आइसोलेटर के यांत्रिक भाग (जैसे स्प्रिंग्स और ऑपरेटिंग रॉड) गर्मी से विकृत न हों, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर सर्किट को सही ढंग से डिस्कनेक्ट कर सकें। |
दोनों उपकरणों में, तापमान वृद्धि की सीमा IEC (International Electrotechnical Commission) और ANSI (American National Standards Institute) जैसे मानकों द्वारा निर्धारित की जाती है।
आमतौर पर, तापमान वृद्धि को परिवेश तापमान (Ambient Temperature) के सापेक्ष मापा जाता है। मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि उपकरण के किसी भी बिंदु पर तापमान उस सामग्री के अधिकतम अनुमत तापमान (Maximum Permissible Temperature) से अधिक न हो जिससे वह बना है (विशेषकर इन्सुलेशन)।
Ans.
सिस्टम (System) को सरल शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है:
सिस्टम घटकों (components) का एक ऐसा सेट या समूह है जो एक सामान्य उद्देश्य (common purpose) या लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक दूसरे के साथ बातचीत (interact) करते हैं और संगठित (organized) तरीके से काम करते हैं।
सिस्टम को बेहतर ढंग से समझने के लिए, उसकी चार मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें:
सिस्टम को विभिन्न क्षेत्रों में पाया जा सकता है, और वे सरल या अत्यधिक जटिल हो सकते हैं:
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सिस्टम का प्रकार |
घटक (Components) |
उद्देश्य (Goal) |
|---|---|---|
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भौतिक/मशीनी |
गियर, मोटर, बेल्ट, सेंसर |
किसी वस्तु को उठाना या शक्ति संचारित करना। |
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जैविक (मानव शरीर) |
अंग, ऊतक, कोशिकाएँ |
जीवन को बनाए रखना, प्रजनन और प्रतिक्रिया देना। |
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कंप्यूटर/सूचना |
हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटाबेस |
डेटा को संसाधित करना और जानकारी प्रदान करना। |
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सामाजिक/आर्थिक |
लोग, नियम, संगठन, धन |
माल और सेवाओं का उत्पादन और वितरण करना। |
संक्षेप में, चाहे वह एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट हो या एक बड़ी कंपनी, सिस्टम सिर्फ एक संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसा संगठित ढांचा है जो एक समन्वित तरीके से काम करके कुछ उपयोगी हासिल करता है।
Ans.
नियंत्रण प्रणाली (Control System) घटकों का एक ऐसा समूह है जो किसी अन्य प्रणाली या उपकरण के व्यवहार को निर्देशित, विनियमित या नियंत्रित करने का कार्य करता है ताकि एक वांछित आउटपुट या लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
सरल शब्दों में, यह एक ऐसा तंत्र है जो यह सुनिश्चित करता है कि जो आप चाहते हैं (वांछित आउटपुट), वही हो रहा है (वास्तविक आउटपुट)।
एक नियंत्रण प्रणाली में आमतौर पर तीन मुख्य तत्व होते हैं:
नियंत्रण प्रणाली को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
क्लोज्ड-लूप प्रणाली को फीडबैक नियंत्रण प्रणाली (Feedback Control System) भी कहा जाता है, और यह आमतौर पर अधिक सटीक और वांछनीय होती है क्योंकि यह बाहरी गड़बड़ी (External Disturbances) को समायोजित कर सकती है।
Ans.
नियंत्रण प्रणालियों को उनके कार्य सिद्धांत, अनुप्रयोग और घटकों के आधार पर कई तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है।
नियंत्रण प्रणालियों के दो सबसे मौलिक और व्यापक प्रकार नीचे दिए गए हैं, इसके बाद अन्य महत्वपूर्ण वर्गीकरण दिए गए हैं:
इस प्रणाली में, नियंत्रक आउटपुट पर ध्यान दिए बिना ही कार्रवाई करता है। आउटपुट का कोई भी माप या प्रतिक्रिया (feedback) इनपुट को प्रभावित नहीं करता है।
इस प्रणाली में, आउटपुट को लगातार मापा जाता है और इसे प्रतिक्रिया (Feedback) के रूप में नियंत्रक को वापस भेजा जाता है।
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प्रकार |
व्याख्या |
उदाहरण |
|---|---|---|
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निरंतर डेटा प्रणाली (Continuous Data System) |
वे प्रणालियाँ जहाँ सिग्नल और क्रियाएँ समय के साथ निरंतर (continuously) बदलती रहती हैं। |
एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक्स, पारंपरिक DC मोटर नियंत्रण। |
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असतत डेटा प्रणाली (Discrete Data System) |
वे प्रणालियाँ जहाँ सिग्नल केवल असतत समय अंतराल (discrete time intervals) पर ही बदलता है या संसाधित होता है। |
डिजिटल नियंत्रक, माइक्रोकंट्रोलर-आधारित प्रणालियाँ। |
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प्रकार |
व्याख्या |
उदाहरण |
|---|---|---|
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रैखिक प्रणाली (Linear System) |
वह प्रणाली जो अध्यारोपण सिद्धांत (Superposition Principle) का पालन करती है। इसका आउटपुट इनपुट के अनुपात में बदलता है। |
सरल RC सर्किट। |
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अरैखिक प्रणाली (Non-Linear System) |
वह प्रणाली जो अध्यारोपण सिद्धांत का पालन नहीं करती है। अधिकांश वास्तविक दुनिया की प्रणालियाँ (जैसे मोटर्स, रोबोट) अरैखिक होती हैं। |
सैचुरेशन (Saturation) या फ्रिक्शन (Friction) वाली मशीनें। |
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प्रकार |
व्याख्या |
उदाहरण |
|---|---|---|
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यांत्रिक नियंत्रण प्रणाली |
केवल यांत्रिक घटकों (गियर, लीवर, स्प्रिंग्स) का उपयोग करती है। |
सेंट्रीफ्यूगल गवर्नर (Centrifugal Governor)। |
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विद्युत नियंत्रण प्रणाली |
विद्युत घटकों (रजिस्टर, कैपेसिटर) और सर्किट का उपयोग करती है। |
वोल्टेज स्टेबलाइज़र। |
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हाइड्रोलिक/न्यूमैटिक प्रणाली |
तरल पदार्थ (तेल) या हवा के दबाव का उपयोग करती है। |
भारी मशीनरी में हाइड्रोलिक ब्रेक और एक्चूएटर्स। |
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सर्वो तंत्र (Servo Mechanism) |
एक क्लोज्ड-लूप प्रणाली जो आउटपुट को त्रुटि के आधार पर नियंत्रित करती है; आमतौर पर स्थिति (position) और वेग (velocity) को नियंत्रित करती है। |
रोबोटिक आर्म, ट्रैकिंग एंटीना। |
Ans.
नियंत्रण प्रणाली में फीडबैक (Feedback) एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जहाँ किसी सिस्टम के वास्तविक आउटपुट का एक हिस्सा मापा जाता है और उसे इनपुट (या वांछित सेटपॉइंट) की तुलना के लिए वापस नियंत्रक (Controller) तक भेजा जाता है।
यह प्रक्रिया सिस्टम को अपने प्रदर्शन की जाँच करने और वांछित लक्ष्य से किसी भी विचलन (त्रुटि - Error) को स्वचालित रूप से ठीक करने की अनुमति देती है।
फीडबैक क्लोज्ड-लूप (बंद लूप) नियंत्रण प्रणाली का आधार है।
मुख्यतः दो प्रकार के फीडबैक का उपयोग किया जाता है:
नियंत्रण प्रणाली में नकारात्मक फीडबैक (Negative Feedback) को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह सिस्टम को स्थिर (Stable), सटीक (Accurate) और विश्वसनीय (Reliable) बनाता है। यह स्वचालित रूप से त्रुटियों को ठीक करता है और बाहरी गड़बड़ियों को कम करता है।
नकारात्मक फीडबैक (जहाँ मापा गया आउटपुट इनपुट का विरोध करता है) क्लोज्ड-लूप नियंत्रण प्रणालियों के लिए आवश्यक है क्योंकि यह निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:
संक्षेप में, नियंत्रण इंजीनियरिंग का पूरा अनुशासन नकारात्मक फीडबैक का उपयोग करके त्रुटि-मुक्त, स्थिर और मजबूत प्रणालियों के डिजाइन पर आधारित है।
Ans.
सकारात्मक प्रतिक्रिया (Positive Feedback) का प्रणाली की स्थिरता (Stability) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है; यह प्रणाली को अस्थिर (Unstable) बना देती है।
सकारात्मक फीडबैक तब होता है जब सिस्टम के आउटपुट का एक हिस्सा इनपुट के उसी चरण (Same Phase) में वापस भेजा जाता है, जिससे त्रुटि और आउटपुट दोनों तेजी से बढ़ते हैं।
सकारात्मक प्रतिक्रिया किसी भी प्रारंभिक विचलन (initial deviation) को लगातार बढ़ाती जाती है। यदि आउटपुट थोड़ा सा बढ़ता है, तो सकारात्मक प्रतिक्रिया उस बढ़े हुए आउटपुट को इनपुट में जोड़ देती है, जिससे आउटपुट और भी अधिक बढ़ता है।
सकारात्मक फीडबैक प्रणाली को नियंत्रित करने के बजाय, उसके आउटपुट को एक सीमा की ओर धकेलता है:
यह अनियंत्रित व्यवहार प्रणाली को उपयोगी कार्य करने से रोकता है और इसे अक्सर फ्लाइट (Runaway) कहा जाता है।
हालांकि सकारात्मक प्रतिक्रिया नियंत्रण प्रणालियों में अस्थिरता लाती है, इसका उपयोग जानबूझकर कुछ विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों में किया जाता है जहाँ अस्थिरता वांछित होती है:
निष्कर्ष: नियंत्रण इंजीनियरिंग के संदर्भ में (जैसे तापमान या गति नियंत्रण), सकारात्मक प्रतिक्रिया से पूरी तरह से बचा जाता है क्योंकि यह मशीन को अनियंत्रित कर देती है और नुकसान पहुंचा सकती है।
Ans.
सुरक्षात्मक रिले (Protective Relay) एक विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग विद्युत शक्ति प्रणाली (Electric Power System) जैसे जनरेटर, ट्रांसफार्मर, बस बार और ट्रांसमिशन लाइनों को फाल्ट (Fault) या असामान्य परिचालन स्थितियों से बचाने के लिए किया जाता है।
सुरक्षात्मक रिले का मुख्य कार्य फाल्ट का पता लगाना (Fault Detection), निदान करना (Diagnosis) और फिर सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) को ट्रिप कमांड भेजकर फाल्ट वाले हिस्से को स्वस्थ हिस्से से अलग करना (Isolate) है।
यह एक सुरक्षा गार्ड की तरह काम करता है, जो लगातार विद्युत प्रणाली के स्वास्थ्य की निगरानी करता है।
सुरक्षात्मक रिले के तीन प्राथमिक उद्देश्य हैं:
उपकरणों और ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के सुरक्षात्मक रिले (Protective Relays) का उपयोग किया जाता है। इन रिले को उनके कार्य सिद्धांत, मापी गई मात्रा, या उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले विभिन्न रिले और उनके अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:
दूरी रिले ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा के लिए सबसे आम हैं। ये रिले फाल्ट स्थान की दूरी के अनुपात में प्रतिबाधा (Impedance) को मापते हैं।
ये सबसे सरल और सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले रिले हैं, जो किसी भी उपकरण या लाइन में अत्यधिक करंट प्रवाहित होने पर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
अंतर रिले का उपयोग मुख्य रूप से विशिष्ट उपकरणों जैसे ट्रांसफार्मर और जनरेटर की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
ये रिले न केवल फाल्ट की उपस्थिति को पहचानते हैं, बल्कि यह भी निर्धारित करते हैं कि फाल्ट किस दिशा में हुआ है।
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रिले का नाम |
अनुप्रयोग और सुरक्षा |
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भू-दोष रिले (Earth Fault Relay) |
यह केवल उस फाल्ट करंट के प्रति संवेदनशील होता है जो जमीन के माध्यम से प्रवाहित होता है। यह लाइन-टू-ग्राउंड फाल्ट से सुरक्षा करता है। |
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बुखोल्ज़ रिले (Buchholz Relay) |
तेल-निमज्जित ट्रांसफार्मर के आंतरिक फाल्ट से सुरक्षा करता है। यह ट्रांसफार्मर तेल में फाल्ट के कारण उत्पन्न होने वाली गैसों का पता लगाता है। |
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अंडर/ओवर वोल्टेज रिले (Under/Over Voltage Relay) |
वोल्टेज पूर्व निर्धारित सीमा से अधिक या कम होने पर सुरक्षा करता है। इसका उपयोग जनरेटर और मोटर सुरक्षा में किया जाता है। |
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आवृत्ति रिले (Frequency Relay) |
बिजली प्रणाली की आवृत्ति असामान्य रूप से बढ़ने या घटने पर सुरक्षा करता है। यह अक्सर ग्रिड लोड शेडिंग योजनाओं में उपयोग होता है। |
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तापमान रिले (Temperature Relay) |
मशीन (जैसे मोटर या ट्रांसफार्मर) के वाइंडिंग तापमान की सीधे निगरानी करता है और अत्यधिक गर्मी पर ट्रिप करता है। |
Ans.
विद्युत शक्ति प्रणाली संरक्षण (Power System Protection) को मुख्य रूप से दो प्रमुख तरीकों से विभाजित किया जाता है:
१. संरक्षण का उद्देश्य/आधार: इसके तहत दोषों (Faults) के प्रकार या उन उपकरणों के आधार पर विभाजन किया जाता है जिनकी सुरक्षा की जानी है।
२. संरक्षण का स्थान/दायरा: इसके तहत प्रणाली के विभिन्न भागों में संरक्षण के स्तर के आधार पर विभाजन किया जाता है।
विद्युत शक्ति प्रणाली में होने वाले विभिन्न प्रकार के दोषों (फॉल्ट्स) और असामान्यताओं से सुरक्षा के लिए संरक्षण को विभाजित किया जाता है:
यह विभाजन मुख्य रूप से बिजली के उछालों (Surges) से इमारतों और उपकरणों की सुरक्षा के संदर्भ में उपयोग होता है, जैसे:
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स्तर |
नाम |
उद्देश्य/दायरा |
उपकरण |
|---|---|---|---|
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स्तर 1 (Level 1) |
बाह्य संरक्षण (External Protection) |
यह इमारत पर सीधे बिजली के प्रहार से सुरक्षा प्रदान करता है। |
लाइटनिंग रॉड (Air Terminal), डाउन कंडक्टर, ग्राउंडिंग सिस्टम। |
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स्तर 2 (Level 2) |
आंतरिक संरक्षण (Internal Protection) |
यह विद्युत प्रणालियों के अंदर छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव और प्रेरित उछालों से सुरक्षा प्रदान करता है। |
टाइप 1/टाइप 2 सर्ज अरेस्टर (SPD)। |
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स्तर 3 (Level 3) |
ठीक सुरक्षा (Fine Protection) |
यह लोड के बहुत करीब स्थित सबसे संवेदनशील उपकरणों के लिए आवश्यक अंतिम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है। |
टाइप 3 सर्ज प्रोटेक्टिव डिवाइस (SPD)। |
इसके अलावा, संरक्षण को मोटे तौर पर उन उपकरणों के आधार पर भी विभाजित किया जाता है जिनकी वे सुरक्षा करते हैं:
Ans.
विद्युत शक्ति प्रणाली (Electric Power System) में रक्षी रिले (Protective Relays) को मुख्य रूप से उपकरण ट्रांसफार्मर (Instrument Transformers), परिपथ विच्छेदक (Circuit Breakers), और नियंत्रण शक्ति स्रोत (Control Power Source) के साथ जोड़ा जाता है।
रिले को जोड़ने की प्रक्रिया को तीन मुख्य भागों में समझा जा सकता है:
चूंकि रिले सीधे उच्च वोल्टेज और उच्च धारा वाले मेन पावर सर्किट से नहीं जुड़ सकते, इसलिए उन्हें उपकरण ट्रांसफार्मर के माध्यम से जोड़ा जाता है। ये ट्रांसफार्मर उच्च मात्राओं को सुरक्षित और प्रबंधनीय निम्न स्तरों तक कम कर देते हैं:
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उपकरण |
कार्य |
रिले से कनेक्शन |
|---|---|---|
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धारा ट्रांसफार्मर (CT) |
यह उच्च लाइन धारा को 1A या 5A जैसी मानक, कम द्वितीयक धारा में स्टेप-डाउन करता है। |
CT की द्वितीयक वाइंडिंग सीधे रिले की करंट कॉइल से जुड़ी होती है। यह रिले को मापन के लिए धारा का फीडबैक देता है। |
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विभव ट्रांसफार्मर (PT) |
यह उच्च लाइन वोल्टेज को 110V AC जैसे मानक, कम द्वितीयक वोल्टेज में स्टेप-डाउन करता है। |
PT की द्वितीयक वाइंडिंग सीधे रिले की वोल्टेज कॉइल से जुड़ी होती है। यह रिले को मापन के लिए वोल्टेज का फीडबैक देता है। |
सारांश: CT और PT, रिले के लिए सेंसर के रूप में कार्य करते हैं, जो दोष (फॉल्ट) की स्थिति को भांपने के लिए सिस्टम की वास्तविक धारा और वोल्टेज की जानकारी प्रदान करते हैं।
यह रिले का आउटपुट सर्किट होता है जो दोष की स्थिति में प्रतिक्रिया करता है:
रिले को स्वयं काम करने के लिए एक विश्वसनीय नियंत्रण शक्ति स्रोत की आवश्यकता होती है। यह आमतौर पर सबस्टेशन में लगी बैटरी बैंक (DC Source) से प्रदान की जाती है। यह DC सप्लाई रिले की कॉइल को ऊर्जा देती है ताकि वह चालू रह सके और दोष का पता चलने पर ट्रिपिंग सर्किट को सक्रिय कर सके।
Ans.
इलेक्ट्रो मैकेनिकल रिले (Electromechanical Relays - EMRs) के संचालन के मौलिक रूप से दो मुख्य सिद्धांत हैं। सभी EMRs इन दो सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिन्हें आगे विभिन्न संरचनात्मक प्रकारों में विभाजित किया जाता है:
यह सिद्धांत रिले का सबसे बुनियादी और सामान्य संचालन तरीका है।
जब रिले की कॉइल (Coil) में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह एक विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र एक आर्मेचर (चलने वाला धातु का हाथ) को अपनी ओर आकर्षित करता है। आर्मेचर की यह यांत्रिक गति, रिले के संपर्कों (Contacts) को बंद (Close) या खोल (Open) देती है, जिससे स्विचिंग क्रिया पूरी होती है।
यह सिद्धांत मुख्य रूप से AC सर्किट के लिए डिज़ाइन किए गए रिले में उपयोग होता है और इसके संचालन के लिए आवश्यक बल दो अलग-अलग चुंबकीय फ्लक्सों (Fluxes) के बीच प्रेरण क्रिया (Induction Action) से उत्पन्न होता है।
यह उसी सिद्धांत पर कार्य करता है जिस पर ऊर्जा मीटर (Energy Meter) काम करता है। इसमें, एक एल्युमिनियम या कॉपर की डिस्क या कप को दो अलग-अलग कॉइलों द्वारा उत्पन्न दो समय-विस्थापित (Time-Displaced) चुंबकीय फ्लक्सों के बीच रखा जाता है। इन फ्लक्सों के कारण डिस्क में भँवर धाराएँ (Eddy Currents) उत्पन्न होती हैं। इन भँवर धाराओं और फ्लक्सों की परस्पर क्रिया से एक टॉर्क (Torque) उत्पन्न होता है जो डिस्क को घुमाता है। डिस्क के घूमने पर, एक निश्चित कोण के बाद यह संपर्क को बंद कर देता है।
रिले और सर्किट ब्रेकर (CB) एक विद्युत प्रणाली में गलती (Fault) की स्थिति में मिलकर काम करते हैं। रिले गलती का पता लगाता है और सर्किट ब्रेकर गलती वाले हिस्से को अलग करता है (बिजली काट देता है)।
दोष की स्थिति के दौरान उनकी कार्रवाई का क्रम निम्नलिखित है:
सर्किट ब्रेकर का संपर्क खुलने के बाद, विद्युत प्रणाली का दोषपूर्ण हिस्सा स्वस्थ हिस्से से अलग हो जाता है, जिससे बाकी प्रणाली का सामान्य संचालन जारी रह पाता है और उपकरण क्षति से बच जाते हैं।
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