अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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मेगर परीक्षण (Megger Testing) और पृथ्वी प्रतिरोध माप (Earth Resistance Measurement) दोनों ही विद्युत प्रणालियों के महत्वपूर्ण परीक्षण हैं, लेकिन उनके उद्देश्य और मापी जाने वाली राशियाँ अलग-अलग होती हैं।
मेगर परीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत उपकरण (जैसे केबल, मोटर, ट्रांसफार्मर) के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापना है।
पृथ्वी प्रतिरोध माप का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत प्रणाली के ग्राउंडिंग सिस्टम (Grounding System) का प्रतिरोध मापना है।
|
विशेषता |
मेगर परीक्षण (इन्सुलेशन प्रतिरोध) |
पृथ्वी प्रतिरोध माप |
|---|---|---|
|
मुख्य उद्देश्य |
विद्युत उपकरणों के इन्सुलेशन की गुणवत्ता का आकलन करना। |
ग्राउंडिंग सिस्टम के प्रतिरोध का आकलन करना। |
|
मापी जाने वाली राशि |
इन्सुलेशन प्रतिरोध (उच्च प्रतिरोध) |
पृथ्वी का प्रतिरोध (निम्न प्रतिरोध) |
|
मापन की इकाई |
मेगाओम ({M} Omega) |
ओम (Omega) |
|
परीक्षण वोल्टेज |
उच्च DC वोल्टेज |
आमतौर पर कम AC या DC वोल्टेज |
|
अनुप्रयोग |
केबल, मोटर, ट्रांसफार्मर आदि के इन्सुलेशन दोषों की जांच करना। |
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड की प्रभावशीलता का परीक्षण करना। |
मेगर परीक्षण उच्च प्रतिरोध को मापने के लिए उच्च वोल्टेज का उपयोग करता है, जबकि पृथ्वी प्रतिरोध माप कम प्रतिरोध को मापने के लिए फॉल-ऑफ-पोटेंशियल जैसी विशेष तकनीकों का उपयोग करता है।
मेगर (Megger) एक महत्वपूर्ण विद्युत मापक उपकरण है जिसका उपयोग इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए किया जाता है।
इसे इन्सुलेशन परीक्षक (Insulation Tester) या मेग-ओममीटर (Megohmmeter) भी कहा जाता है, क्योंकि यह प्रतिरोध को मेगाओम ({M} Omega) की रेंज में मापता है।
मेगर का मुख्य कार्य किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण के इन्सुलेशन की गुणवत्ता की जाँच करना है।
मेगर मुख्य रूप से चल कुंडल मीटर (Moving Coil Meter) के सिद्धांत पर काम करता है, और कुछ आधुनिक उपकरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से काम करते हैं।
मेगर की सरल परिभाषा इस प्रकार है:
मेगर (Megger) एक विद्युत मापक उपकरण है जिसका उपयोग बहुत उच्च प्रतिरोध, विशेष रूप से इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए किया जाता है। इसे इन्सुलेशन परीक्षक या मेग-ओममीटर (Megohmmeter) भी कहा जाता है, क्योंकि यह प्रतिरोध को मेगाओम ({M} Omega) की रेंज में मापता है।
मेगर का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत उपकरण (जैसे केबल, मोटर या ट्रांसफार्मर) के इन्सुलेशन की अखंडता और गुणवत्ता की जाँच करना होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कंडक्टर (चालक) के बीच या कंडक्टर और जमीन (अर्थ) के बीच कोई खराबी, नमी, या क्षति तो नहीं है जिससे लीकेज करंट (रिसाव धारा) हो सकता है।
यह उपकरण परीक्षण के लिए उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, आदि) उत्पन्न करता है और इन्सुलेशन से प्रवाहित होने वाली बहुत कम रिसाव धारा को मापकर ओम के नियम का उपयोग करके प्रतिरोध मान की गणना करता है।
मेगर परीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) की गुणवत्ता और अखंडता की जाँच करना है।
मेगर परीक्षण, जिसे इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण भी कहा जाता है, निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करता है:
मेगर (Megger) को मूल रूप से एक शंट टाइप ओममीटर (Shunt Type Ohmmeter) और एक DC जनरेटर या इलेक्ट्रॉनिक वोल्टेज स्रोत के संयोजन के रूप में बनाया जाता है। मेगर दो मुख्य प्रकार के होते हैं: हैंड-ऑपरेटेड (मैनुअल) और इलेक्ट्रॉनिक/बैटरी-ऑपरेटेड (डिजिटल)।
यहाँ क्लासिक हैंड-ऑपरेटेड एनालॉग मेगर के मुख्य घटकों और उनके निर्माण का विवरण दिया गया है:
एक मेगर के निर्माण में मुख्य रूप से चार भाग होते हैं:
इसका उद्देश्य परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च DC वोल्टेज उत्पन्न करना है।
यह मेगर का वह भाग है जो वास्तव में प्रतिरोध को मापता है और रीडिंग दिखाता है। यह एक चल कुंडल मीटर (Moving Coil Meter) के सिद्धांत पर आधारित होता है।
सर्किट में दो सुरक्षात्मक प्रतिरोधक (R_1 और R_2) होते हैं:
परीक्षण के कनेक्शन के लिए मेगर में दो मुख्य टर्मिनल होते हैं:
मेगर का कार्य: दोनों कुंडल द्वारा उत्पन्न बल आघूर्ण एक दूसरे के विपरीत होते हैं। सूचक का अंतिम विक्षेपण (deflection) दोनों बल आघूर्ण के अनुपात पर निर्भर करता है, जो अंततः इन्सुलेशन प्रतिरोध का मान दर्शाता है।
Ans.
मेगर परीक्षण में {L}, {E}, और {G} टर्मिनल मेगर को परीक्षण के तहत उपकरण से जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य बिंदु हैं।
यह तीन-टर्मिनल सेटअप विशेष रूप से उच्च-वोल्टेज इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण के लिए डिज़ाइन किया गया है, और प्रत्येक का एक विशिष्ट कार्य होता है:
|
टर्मिनल |
नाम |
जुड़ाव |
कार्य |
|---|---|---|---|
|
{L} |
Line |
परीक्षण किए जा रहे कंडक्टर |
उच्च वोल्टेज लागू करना |
|
{E} |
Earth |
उपकरण की बॉडी/जमीन |
रिसाव करंट (IR) के लिए वापसी पथ |
|
{G} |
Guard |
गंदी या नम सतह |
सतह लीकेज करंट को बाईपास करना |
संक्षेप में,
तीन टर्मिनलों का उपयोग करने का मुख्य कारण {G} (गार्ड) टर्मिनल को शामिल करके माप की सटीकता में सुधार करना है।
मेगर परीक्षण के लिए उपयोग किया जाने वाला वोल्टेज एक उच्च DC वोल्टेज होता है, जिसे विशेष रूप से उपकरण के रेटेड वोल्टेज और उसके वर्ग (class) के आधार पर चुना जाता है।
मेगर में परीक्षण वोल्टेज की सीमा (रेंज) आमतौर पर {50 {V}} से शुरू होकर {15,000 {V}} ({15 {kV}}) या उससे भी अधिक तक जाती है, लेकिन सामान्यतः निम्न और मध्यम वोल्टेज के अनुप्रयोगों में निम्नलिखित मानक DC वोल्टेज का उपयोग किया जाता है:
{500 {V}, 1000 {V}, 2500 {V}, 5000 {V}}
मेगर में परीक्षण वोल्टेज का चयन उस विद्युत उपकरण या प्रणाली के ऑपरेटिंग वोल्टेज के आधार पर किया जाता है जिसका परीक्षण किया जा रहा है। एक सामान्य अंगूठा नियम (Rule of Thumb) यह है कि परीक्षण वोल्टेज उपकरण के रेटेड वोल्टेज से थोड़ा अधिक होना चाहिए।
मानक दिशानिर्देशों के अनुसार वोल्टेज चयन का एक सामान्य चार्ट यहाँ दिया गया है:
|
उपकरण का रेटेड वोल्टेज (AC) |
अनुशंसित मेगर परीक्षण वोल्टेज (DC) |
उपयोग का उदाहरण |
|---|---|---|
|
{100 V} तक |
{250 { V}} |
कम वोल्टेज वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण |
|
{650 V} तक ({415 V} /{440 V}) |
{500 { V}} या {1000 { V}} |
LT (लो टेंशन) मोटर, घरेलू वायरिंग, छोटे ट्रांसफार्मर |
|
{1000 V} तक |
{1000 { V}} |
औद्योगिक LT उपकरण |
|
{2.5 kV} तक |
{1000 { V}} या {2500 { V}} |
मध्यम HT उपकरण |
|
{5 kV} तक ({3.3 kV} / {6.6 kV}) |
{2500 { V}} या {5000 { V}} |
HT (हाई टेंशन) मोटर, बड़े ट्रांसफार्मर, HT केबल |
|
{15 kV} तक ({11 kV}) |
{5000 { V}} |
उच्च वोल्टेज उपकरण |
मेगर (Megger) में डिफ्लेक्टिंग कॉइल (Deflecting Coil) और कंट्रोलिंग कॉइल (Controlling Coil) का उपयोग मुख्य रूप से चल कुंडल मापन तंत्र में सूचक (Pointer) को सही स्थिति में लाने और प्रतिरोध को सीधे मापने के लिए किया जाता है। मेगर एक विशिष्ट प्रकार का ओममीटर होता है, और यह दो बल आघूर्णों (Torques) के अनुपात पर काम करता है।
उद्देश्य: सूचक को शून्य (Zero) की ओर विक्षेपित करने के लिए डिफ्लेक्टिंग टॉर्क (t_d) उत्पन्न करना।
सर्किट कनेक्शन: यह कॉइल परीक्षण के तहत इन्सुलेशन के साथ श्रृंखला (Series) में जुड़ी होती है।
कार्य: जब मेगर उच्च {DC} वोल्टेज लागू करता है, तो इन्सुलेशन से होकर गुजरने वाला रिसाव करंट (Leakage Current) इस कॉइल से होकर गुजरता है। यह करंट जितना अधिक होगा (मतलब इन्सुलेशन प्रतिरोध उतना ही कम), डिफ्लेक्टिंग टॉर्क उतना ही मजबूत होगा, और सूचक शून्य प्रतिरोध की ओर उतना ही अधिक घूमेगा।
t_d {Current}
कंट्रोलिंग कॉइल (दबाव कुंडल)
उद्देश्य: सूचक को अनंत (infty) की ओर विक्षेपित करने के लिए कंट्रोलिंग टॉर्क (t_c) उत्पन्न करना। यह विक्षेपण टॉर्क के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
सर्किट कनेक्शन: यह कॉइल सीधे जनरेटर वोल्टेज के समानांतर (Parallel) में जुड़ी होती है।
कार्य: यह कॉइल यह सुनिश्चित करती है कि सूचक हमेशा एक निश्चित स्थिति में रहे, भले ही जनरेटर द्वारा उत्पन्न वोल्टेज में थोड़ा उतार-चढ़ाव क्यों न हो (विशेषकर हैंड-ऑपरेटेड मेगर में)। यह मूल रूप से सिस्टम में संदर्भ वोल्टेज के समान बल आघूर्ण प्रदान करती है।
t_c {Voltage}
अनुपात और मापन
मेगर का सूचक तभी स्थिर होता है जब डिफ्लेक्टिंग टॉर्क और कंट्रोलिंग टॉर्क एक दूसरे को संतुलित करते हैं।
{Final Deflection} {{Deflecting Torque } (t_d)}{{Controlling Torque } (t_c)} {{Current}}{{Voltage}}
चूँकि प्रतिरोध ({R}) वोल्टेज ({V}) और करंट ({I}) का अनुपात है ({R} = {V}/{I}),
सूचक की अंतिम स्थिति सीधे इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) के मान को इंगित करती है:
{Final Deflection} {1}{{Resistance}}
इस दोहरे कॉइल तंत्र का उपयोग करने का लाभ यह है कि यह सुनिश्चित करता है कि रीडिंग केवल प्रतिरोध के अनुपात पर निर्भर करती है, न कि अकेले वोल्टेज या करंट के पूर्ण मान पर, जिससे मेगर द्वारा उत्पन्न वोल्टेज में छोटे-मोटे बदलावों के बावजूद माप सटीक रहता है।
पॉइंटर एक हल्का हिस्सा होता है जो मेगर के आंतरिक मापन तंत्र (डिफ्लेक्टिंग और कंट्रोलिंग कॉइल) से जुड़ा होता है।
मेगर का स्केल एक विशिष्ट ओममीटर पैमाना होता है जिसे उच्च प्रतिरोध मानों को दर्शाने के लिए कैलिब्रेट किया जाता है।
संक्षेप में,
पॉइंटर और स्केल मेगर को एक प्रत्यक्ष-पठन (Direct Reading) उपकरण बनाते हैं, जिससे ऑपरेटर बिना किसी जटिल गणना के तुरंत इन्सुलेशन की स्थिति जान सकता है।
मेगर ({Megger}) का कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से चल कुंडल मापन तंत्र और ओम के नियम पर आधारित है, जहाँ प्रतिरोध की गणना के लिए वोल्टेज और करंट के अनुपात का उपयोग किया जाता है।
मेगर का कार्य सिद्धांत दो बल आघूर्णों (टॉर्क) के बीच संतुलन पर आधारित है जो इसके दो विपरीत रूप से जुड़ी कुंडलियों द्वारा उत्पन्न होते हैं:
सबसे पहले, मेगर एक आंतरिक स्रोत (हैंडल घुमाकर या बैटरी का उपयोग करके) से उच्च, स्थिर DC वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, आदि) उत्पन्न करता है। इस वोल्टेज को परीक्षण किए जा रहे उपकरण के कंडक्टर और ग्राउंड (जमीन) पर लागू किया जाता है।
मेगर में एक सूचक (Pointer) होता है जो दो बल आघूर्णों के प्रभाव में घूमता है:
डिफ्लेक्टिंग टॉर्क ({t_d}): धारा कुंडल (Current Coil) द्वारा उत्पन्न।
यह टॉर्क परीक्षण किए जा रहे इन्सुलेशन से गुजरने वाली रिसाव धारा ({I}) के समानुपाती होता है।
यह सूचक को शून्य प्रतिरोध (Zero Resistance) की ओर घुमाता है।
t_d {I}
कंट्रोलिंग टॉर्क ({t_c}): दबाव कुंडल (Pressure Coil) द्वारा उत्पन्न।
यह टॉर्क लागू किए गए मेगर वोल्टेज ({V}) के समानुपाती होता है।
यह सूचक को अनंत प्रतिरोध (Infinite Resistance) की ओर घुमाता है।
t_c {V}
सूचक तब स्थिर होता है जब ये दोनों बल आघूर्ण एक दूसरे को संतुलित करते हैं। सूचक की अंतिम स्थिति t_d और t_c के अनुपात पर निर्भर करती है:
{Final Position} = {t_d}{t_c} / {{I}}{{V}}
चूँकि प्रतिरोध ({R}) वोल्टेज और करंट का अनुपात होता है ({R} = {V}/{I}),
सूचक की स्थिति सीधे प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है:
{Final Position} {1}{{R}}
इस व्यवस्था से मेगर सीधे मेगाओम ({M} Omega) में प्रतिरोध का मान प्रदर्शित करता है। चूंकि रीडिंग वोल्टेज और करंट के अनुपात पर निर्भर करती है, यह सुनिश्चित होता है कि हस्त-चालित मेगर में भी हैंडल घुमाने की गति में छोटे-मोटे बदलाव के बावजूद माप की सटीकता बनी रहे।
कार्य का सार:
मेगर उच्च वोल्टेज लगाकर इन्सुलेशन की गुणवत्ता को परखता है। यदि इन्सुलेशन अच्छा है (उच्च प्रतिरोध), तो करंट कम होगा, और सूचक {infty {M} Omega} की ओर रहेगा। यदि इन्सुलेशन खराब है (कम प्रतिरोध/शॉर्ट), तो करंट अधिक होगा, और सूचक {0 {M} Omega} की ओर चला जाएगा।
Ans.
मेगर (Megger) एक पोर्टेबल उपकरण है जिसका उपयोग उच्च इंसुलेशन प्रतिरोध (High Insulation Resistance) को मापने के लिए किया जाता है। यह विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
इसका कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से एक स्थायी चुंबक चल कुंडल (Permanent Magnet Moving Coil - PMMC) उपकरण पर आधारित है जिसमें दो कुंडल (Coils) होते हैं:
यहां मेगर के कार्य सिद्धांत के चरण दिए गए हैं:
1. वोल्टेज उत्पन्न करना (Generating Voltage)
2. कुंडल में धारा प्रवाह (Current Flow in Coils)
3. बल आघूर्ण का उत्पादन (Torque Production)
4. संतुलन और रीडिंग (Balance and Reading)
Ans.
मेगर (Megger) उपकरण द्वारा इंसुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को सीधे मेगाओम ({M} Omega) में मापा जाता है, इसलिए किसी जटिल गणना सूत्र की आवश्यकता नहीं होती है।
मेगर का कार्य ओम के नियम पर आधारित है, जिसका मूल सूत्र निम्नलिखित है:
R = {V}/{I}
जहाँ:
हालांकि मेगर स्वयं आंतरिक रूप से इस सिद्धांत का उपयोग करके प्रतिरोध को मापता है और सीधे प्रदर्शित करता है, आपको रीडिंग लेने के लिए स्वयं गणना करने की आवश्यकता नहीं होती है।
इंसुलेशन के स्वस्थ होने के लिए, मापा गया {IR} मान हमेशा न्यूनतम स्वीकार्य {IR} मान से अधिक होना चाहिए। इस न्यूनतम मान की गणना के लिए कुछ सामान्य नियम उपयोग किए जाते हैं:
1. IEEE 43 मानक के अनुसार (घूमने वाली मशीनों के लिए)
IEEE (Institute of Electrical and Electronics Engineers) मानक {kV}+1 का उपयोग करता है।
{न्यूनतम IR मान (M} Omega)} = {रेटेड वोल्टेज (kV)} + 1
उदाहरण:
यदि किसी मोटर का रेटेड वोल्टेज 0.415 {kV} (415 {V}) है, तो न्यूनतम {IR} मान होना चाहिए:
किसी मोटर के न्यूनतम इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान की गणना करने के लिए आमतौर पर एक सामान्य नियम का उपयोग किया जाता है, खासकर जब कोई विशिष्ट मानक (जैसे कि {IEEE}, {NEMA}, {IEC}) प्रदान नहीं किया गया हो।
सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य नियम है:
{IR (M} Omega )} {{रेटेड वोल्टेज (V)}}{1000} + 1
जहाँ:
1. दिए गए मान:
रेटेड वोल्टेज (V_r) = 0.415 {kV}
implies V_r = 415 {V}
2. सूत्र का प्रयोग:
{न्यूनतम IR (M} Omega)} {V_r}{1000} + 1
3. मानों को सूत्र में रखना:
{न्यूनतम IR (M}Omega)} {415}{1000} + 1
{न्यूनतम IR (M}Omega)} 0.415 + 1
{न्यूनतम IR (M}Omega)} 1.415
इस सामान्य नियम के अनुसार, 0.415 {kV} (415 {V}) रेटेड वोल्टेज वाली मोटर के लिए न्यूनतम इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान 1.415 { M} Omega होना चाहिए।
मेगर (Megger) परीक्षण के लिए उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट वोल्टेज उस उपकरण या प्रणाली के रेटेड ऑपरेटिंग वोल्टेज पर निर्भर करता है जिसका आप परीक्षण कर रहे हैं। मेगर परीक्षण में, रेटेड वोल्टेज से अधिक DC वोल्टेज (प्रत्यक्ष धारा) का उपयोग किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इंसुलेशन दोषपूर्ण नहीं है।
सामान्यतः
उपयोग किए जाने वाले परीक्षण वोल्टेज और उनके अनुप्रयोगों के लिए एक गाइड यहाँ दिया गया है:
|
उपकरण का रेटेड वोल्टेज (V) |
मेगर परीक्षण वोल्टेज (V_{DC}) |
अनुप्रयोग (Application) |
|---|---|---|
|
1000{V} तक (उदा. 230{V}, 400/415{V}, 690{V}) |
500{V} या 1000{V} |
निम्न वोल्टेज केबल, मोटर, स्विचगियर और सामान्य वायरिंग। |
|
1000{V} से 2500{V} तक |
1000{V} |
मध्यम वोल्टेज उपकरण। |
|
2500{V} से 5000{V} तक |
2500{V} |
उच्च वोल्टेज मोटर, ट्रांसफॉर्मर और केबल। |
|
5000{V} से 12000{V} तक |
2500{V} या 5000{V} |
उच्च वोल्टेज प्रणालियाँ। |
|
12000{V} से अधिक |
5000{V} से 10000{V} |
बहुत उच्च वोल्टेज की प्रणालियाँ। |
मेगर परीक्षण वोल्टेज का चयन करने के लिए {IEEE 43-2013} जैसी मार्गदर्शन पुस्तिकाएं निम्नलिखित सामान्य दिशानिर्देश प्रदान करती हैं:
उदाहरण के लिए, 415 {V} (निम्न वोल्टेज) मोटर के लिए:
Megger क्या होता है इससे हमें झटका क्यो लगता है और कितना voltage जेनेरेट करता है इस वीडियो में मेगर परीक्षण वोल्टेज जनरेट करने के तरीके को समझाया गया है।
Ans.
मेगर (Megger), जिसे इंसुलेशन रेजिस्टेंस टेस्टर (Insulation Resistance Tester) भी कहा जाता है, को मुख्य रूप से वोल्टेज उत्पन्न करने के तरीके और रीडिंग प्रदर्शित करने के तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
मेगर को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है:
यह वर्गीकरण बताता है कि मेगर परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज कैसे उत्पन्न करता है।
A. हैंड ऑपरेटेड/मैनुअल मेगर (Hand-Operated/Manual Megger)
B. इलेक्ट्रॉनिक/बैटरी ऑपरेटेड मेगर (Electronic/Battery-Operated Megger)
यह वर्गीकरण मेगर द्वारा मापे गए इंसुलेशन रेजिस्टेंस मान को प्रदर्शित करने के तरीके पर आधारित है।
A. एनालॉग मेगर (Analog Megger)
B. डिजिटल मेगर (Digital Megger)
Ans.
मैनुअल मेगर (Hand-Operated Megger), जिसे हैंड ड्राइविंग मेगर या क्रैंक टाइप मेगर भी कहा जाता है, इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने का एक पारंपरिक उपकरण है। यह अपनी कार्यप्रणाली के लिए बाहरी बिजली स्रोत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए मानव शक्ति का उपयोग करता है।
यहाँ इसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है:
मैनुअल मेगर में मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:
|
भाग का नाम (Part Name) |
कार्य (Function) |
|---|---|
|
हैंड क्रैंक (Hand Crank) |
इसे हाथ से घुमाया जाता है। यही वह इनपुट है जो मशीन को चलाता है। |
|
{DC} जनरेटर (DC Generator) |
यह क्रैंक से यांत्रिक ऊर्जा प्राप्त करता है और उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज (जैसे {500V}, {1000V} या अधिक) उत्पन्न करता है। |
|
क्लच तंत्र (Clutch Mechanism) |
यह एक गियर प्रणाली है जो जनरेटर की गति को स्थिर रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि क्रैंक को तेज़ी से घुमाने पर भी आउटपुट वोल्टेज स्थिर बना रहे। |
|
ओममीटर (Ohmmeter)/मापन इकाई |
इसमें दो कॉइल होती हैं: दबाव कॉइल (Pressure/Control Coil) और धारा कॉइल (Current/Deflecting Coil)। यह दोनों कॉइलों में प्रवाहित धारा के आधार पर इंसुलेशन रेजिस्टेंस को मापता है। |
|
डायल गेज (Dial Gauge) |
यह एक एनालॉग (सुई वाला) डिस्प्ले होता है जिस पर इंसुलेशन रेजिस्टेंस का मान {M} Omega (मेगाओम) में शून्य से अनंत तक अंकित होता है। |
|
टर्मिनल (Terminals) |
दो मुख्य लीड पॉइंट होते हैं, जैसे: अर्थ ({E}) और लाइन ({L}), जिनका उपयोग परीक्षण किए जा रहे उपकरण से कनेक्शन करने के लिए किया जाता है। |
मैनुअल मेगर निम्नलिखित सिद्धांत पर काम करता है:
|
लाभ (Advantages) |
हानि (Disadvantages) |
|---|---|
|
स्व-चालित (Self-Powered): इसे संचालित करने के लिए किसी बैटरी या बाहरी बिजली स्रोत की आवश्यकता नहीं होती है। |
अस्थिर वोल्टेज: ऑपरेटर को स्थिर {RPM} बनाए रखना पड़ता है, जो मुश्किल हो सकता है और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव ला सकता है। |
|
विश्वसनीयता: इसकी यांत्रिक संरचना इसे कठोर औद्योगिक वातावरण में अधिक टिकाऊ बनाती है। |
धीमी गति: डिजिटल मेगर की तुलना में रीडिंग लेने में अधिक समय लग सकता है। |
|
सरल संचालन: इसमें जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट नहीं होते, जिससे मरम्मत आसान होती है। |
मानव त्रुटि: अपर्याप्त क्रैंकिंग गति के कारण गलत रीडिंग आ सकती है। |
Ans.
इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) मेगर इंसुलेशन रेजिस्टेंस को मापने का एक आधुनिक उपकरण है। मैनुअल मेगर के विपरीत, यह उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए हाथ से क्रैंक घुमाने के बजाय बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग करता है।
डिजिटल मेगर के मुख्य घटक इस प्रकार हैं:
|
भाग का नाम (Part Name) |
कार्य (Function) |
|---|---|
|
बैटरी (Battery) |
मेगर को शक्ति प्रदान करती है। यही {DC} वोल्टेज का अंतिम स्रोत है। |
|
इलेक्ट्रॉनिक सर्किट/कनवर्टर (Electronic Circuit/Converter) |
यह बैटरी के निम्न {DC} वोल्टेज को बूस्ट करके आवश्यक उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज (जैसे {500V}, {1000V}, {5000V}) में परिवर्तित करता है। |
|
{LCD/LED} डिस्प्ले (Digital Display) |
मापे गए इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान को सीधे संख्यात्मक रूप में ( {M} Omega या {G} Omega में) दिखाता है। |
|
परीक्षण बटन (Test Button) |
वोल्टेज को सक्रिय (Activate) करने और परीक्षण शुरू करने के लिए इस बटन को दबाया जाता है। |
|
वोल्टेज चयनकर्ता (Voltage Selector) |
यह ऑपरेटर को आवश्यक परीक्षण वोल्टेज ({500V}, {1000V}, आदि) चुनने की अनुमति देता है। |
|
टर्मिनल (Terminals) |
परीक्षण लीड्स को उपकरण से जोड़ने के लिए {E} (अर्थ/ग्राउंड), {L} (लाइन) और कभी-कभी {Guard} टर्मिनल होते हैं। |
डिजिटल मेगर की कार्यप्रणाली स्वचालित और अधिक सटीक होती है:
वोल्टेज पीढ़ी (Voltage Generation): ऑपरेटर वांछित परीक्षण वोल्टेज का चयन करता है (जैसे 1000 {V}) और परीक्षण बटन दबाता है। आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बैटरी वोल्टेज का उपयोग करके इस स्थिर {DC} परीक्षण वोल्टेज को उत्पन्न करता है।
परीक्षण का अनुप्रयोग: यह स्थिर वोल्टेज परीक्षण किए जा रहे इंसुलेशन पर लगाया जाता है।
धारा मापन: मेगर इंसुलेशन से होकर बहने वाली बहुत छोटी लीकेज धारा ({I}_{{leakage}}) को मापता है।
प्रतिरोध की गणना: आंतरिक माइक्रोप्रोसेसर ओम के नियम ({R} = {V}/{I}) का उपयोग करके इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) की गणना करता है:
{IR (M} Omega)} = {{परीक्षण वोल्टेज (V)}}{{लीकेज धारा (A)}}
डिजिटल प्रदर्शन: गणना किया गया {IR} मान तुरंत {LCD} स्क्रीन पर संख्यात्मक रूप से प्रदर्शित होता है।
|
लाभ (Advantages) |
हानि (Disadvantages) |
|---|---|
|
स्थिर वोल्टेज (Stable Voltage): यह परीक्षण के दौरान एकदम स्थिर {DC} वोल्टेज प्रदान करता है, जिससे रीडिंग अधिक सटीक होती है। |
बैटरी निर्भरता: इसके संचालन के लिए हमेशा चार्ज की गई बैटरी की आवश्यकता होती है। |
|
उच्च सटीकता (High Accuracy): डिजिटल डिस्प्ले और माइक्रोप्रोसेसर-आधारित गणना के कारण रीडिंग बहुत सटीक होती है। |
जटिलता: इसमें जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते हैं, जिससे यह मैनुअल मेगर की तुलना में अधिक नाजुक और मरम्मत में कठिन होता है। |
|
पठन में सुगमता (Ease of Reading): {LCD} डिस्प्ले संख्यात्मक मान दिखाता है, जिससे रीडिंग में कोई भ्रम नहीं होता। |
मूल्य: उच्च सटीकता और उन्नत सुविधाओं के कारण यह आमतौर पर मैनुअल मेगर से अधिक महंगा होता है। |
|
उन्नत सुविधाएँ: आधुनिक डिजिटल मेगर {PI} (Polarization Index) और {DAR} (Dielectric Absorption Ratio) जैसे स्वचालित परीक्षण कर सकते हैं। |
पर्यावरणीय संवेदनशीलता: अत्यधिक तापमान या नमी इलेक्ट्रॉनिक घटकों को प्रभावित कर सकती है। |
डिजिटल मेगर आज औद्योगिक और वाणिज्यिक दोनों परीक्षणों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे सटीकता, उपयोग में आसानी और उन्नत डेटा विश्लेषण क्षमता प्रदान करते हैं।
Ans.
मेगर (Megger) का उपयोग करके किसी भी विद्युत उपकरण, जैसे मोटर, केबल या ट्रांसफार्मर का इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) परीक्षण करने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और तैयारी चरण शामिल हैं।
मेगर का उपयोग करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया यहाँ दी गई है:
सबसे पहले सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मेगर उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करता है:
न्यूनतम {IR} मान से तुलना: मापी गई {IR} रीडिंग की तुलना न्यूनतम स्वीकार्य {IR} मान से करें (जैसा कि पहले उदाहरण में 1.415 { M} Omega था)।
तीन परीक्षण (Three Tests): एक थ्री-फेज मोटर के लिए, आपको निम्न के बीच {IR} जांचना होगा:
{Winding} { (फेज 1)} - {Ground}
{Winding} { (फेज 2)} - {Ground}
{Winding} { (फेज 3)} - {Ground}
फेज से फेज ({Phase} 1 to {Phase} 2, {Phase} 2 to {Phase} 3, {Phase} 3 to {Phase} 1) भी जाँच की जाती है।
Ans.
मेगर का उपयोग करते समय, उच्च {DC} वोल्टेज के कारण सुरक्षा और सटीक रीडिंग सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण एहतियात (Precautions) बरतना आवश्यक है।
यहाँ मेगर उपयोग करते समय बरती जाने वाली प्रमुख एहतियात दी गई हैं:
पृथ्वी प्रतिरोध माप (Earth Resistance Measurement) किसी भी विद्युत स्थापना की सुरक्षा और दक्षता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह मापता है कि दोष (Fault) की स्थिति में विद्युत धारा कितनी आसानी से पृथ्वी में प्रवाहित होकर समाप्त हो सकती है। पृथ्वी प्रतिरोध जितना कम होगा, सिस्टम उतना ही सुरक्षित होगा।
पृथ्वी प्रतिरोध मापने के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधि "फॉल-ऑफ-पोटेंशियल विधि" (Fall-of-Potential Method) है, जिसे आमतौर पर तीन-बिंदु विधि (Three-Point Method) कहा जाता है।
पृथ्वी प्रतिरोध मापने के लिए एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है जिसे अर्थ टेस्टर या भू-प्रतिरोध परीक्षक (Earth Resistance Tester) कहते हैं।
यह विधि सबसे आम और विश्वसनीय है। इसमें तीन इलेक्ट्रोड या टेस्ट स्पाइक्स का उपयोग होता है:
|
इलेक्ट्रोड |
नाम |
कार्य |
|---|---|---|
|
E |
अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode) |
यह वह इलेक्ट्रोड है जिसका प्रतिरोध मापना है। |
|
C |
करंट इलेक्ट्रोड (Current Electrode) |
{E} से दूर जमीन में ज्ञात धारा (I) इंजेक्ट करने के लिए। |
|
P |
पोटेंशियल इलेक्ट्रोड (Potential Electrode) |
{E} और {P} के बीच वोल्टेज ड्रॉप (V) को मापने के लिए। |
दूरी: इलेक्ट्रोड {P} को इलेक्ट्रोड {E} और {C} के बीच में रखा जाता है। सटीक रीडिंग के लिए, {P} को {E} से {E-C} दूरी के लगभग 62 % की दूरी पर रखना सबसे अच्छा माना जाता है (जिसे 62 % विधि भी कहते हैं)।
कनेक्शन: अर्थ टेस्टर को तीनों इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाता है।
परीक्षण: अर्थ टेस्टर द्वारा {E} और {C} के बीच एक ज्ञात {AC} धारा (I) प्रवाहित की जाती है।
माप: यह उपकरण तब {E} और {P} के बीच उत्पन्न वोल्टेज ड्रॉप (V) को मापता है।
गणना: उपकरण ओम के नियम का उपयोग करके पृथ्वी प्रतिरोध ({R}_E) की गणना करता है:
R_E = {V}/{I} { (ओहम्स, } Omega{ में)}
यह विधि मुख्य रूप से मिट्टी प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) को मापने के लिए उपयोग की जाती है, जो कि ग्राउंडिंग सिस्टम को डिज़ाइन करने के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है।
इस विधि में, चार स्पाइक्स को समान दूरी 'a' पर एक सीधी रेखा में स्थापित किया जाता है।
बाहरी स्पाइक्स ({C}_1 और {C}_2) का उपयोग {AC} धारा ({I}) इंजेक्ट करने के लिए, और आंतरिक स्पाइक्स ({P}_1 और {P}_2) का उपयोग वोल्टेज ड्रॉप ({V}) को मापने के लिए किया जाता है।
मिट्टी प्रतिरोधकता (rho) का सूत्र निम्न है:
rho = 2pi a R
जहाँ
R = V/I और a इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी है।
Ans.
पृथ्वी प्रतिरोध (अर्थ रेजिस्टेंस) को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
पृथ्वी का प्रतिरोध (Earth Resistance) वह प्रतिरोध है जो अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे अर्थिंग रॉड या प्लेट) द्वारा विद्युत धारा के जमीन में प्रवाह को प्रदान किया जाता है। इसका मान मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) पर निर्भर करता है, जिसे कई कारक प्रभावित करते हैं:
यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। मिट्टी की प्रतिरोधकता मिट्टी की प्रकृति और उसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा पर निर्भर करती है। अलग-अलग प्रकार की मिट्टी (जैसे रेतीली, चिकनी, नम) की प्रतिरोधकता अलग-अलग होती है।
Ans.
पृथ्वी परीक्षक (अर्थ टेस्टर) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग ग्राउंडिंग सिस्टम के पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) को मापने के लिए किया जाता है।
पृथ्वी प्रतिरोध परीक्षक (Earth Resistance Testers) को मुख्य रूप से उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली मापन विधि या उनके टर्मिनलों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
|
परीक्षक का प्रकार |
मापन विधि |
कब उपयोग किया जाता है |
|---|---|---|
|
1. 3-पोल विधि (फॉल-ऑफ़-पोटेंशियल) |
इसमें मापे जाने वाले इलेक्ट्रोड (E) और दो सहायक इलेक्ट्रोड (P और C) का उपयोग होता है। यह सबसे मानक और विश्वसनीय विधि है। |
अधिकांश सामान्य अर्थिंग इंस्टॉलेशन के प्रतिरोध को सटीकता से मापने के लिए। |
|
2. 4-पोल विधि (वेनर विधि) |
इसमें चार इलेक्ट्रोड होते हैं, जो मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) को मापने के लिए उपयोग किए जाते हैं। |
नए अर्थिंग सिस्टम को डिज़ाइन करने या मिट्टी की विद्युत विशेषताओं का मूल्यांकन करने के लिए। |
|
3. क्लैम्प-ऑन अर्थ टेस्टर (स्टेकलेस विधि) |
यह जमीन में सहायक इलेक्ट्रोड (स्टेक) लगाए बिना, केवल क्लैम्प का उपयोग करके अर्थ कंडक्टर के चारों ओर से प्रतिरोध को मापता है। |
उन मल्टी-ग्राउंडेड सिस्टम (समानांतर ग्राउंडिंग) में त्वरित माप के लिए जहाँ स्टेक लगाना कठिन हो, या जहाँ सिस्टम को डिस्कनेक्ट नहीं किया जा सकता हो। |
|
4. 2-पोल विधि (डेड अर्थ/सरल विधि) |
इसमें केवल दो टर्मिनलों का उपयोग होता है: मापा जाने वाला इलेक्ट्रोड और एक ज्ञात, विश्वसनीय संदर्भ ग्राउंडिंग पॉइंट। |
एक त्वरित जांच के लिए जब एक ज्ञात, अच्छा ग्राउंडिंग पॉइंट उपलब्ध हो, लेकिन यह कम सटीक होता है। |
|
5. सिलेक्टिव (चयनात्मक) विधि |
यह 3-पोल विधि के समान है, लेकिन इसमें एक क्लैम्प का भी उपयोग किया जाता है ताकि ग्राउंडिंग सिस्टम को बिना डिस्कनेक्ट किए इलेक्ट्रोड का प्रतिरोध मापा जा सके। |
चालू ग्राउंडिंग सिस्टम में किसी विशिष्ट इलेक्ट्रोड का प्रतिरोध मापने के लिए। |
Ans.
मेगर परीक्षण के मुख्य अनुप्रयोग (applications) विद्युत प्रणालियों और उपकरणों के विद्युत रोधन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने से संबंधित हैं।
संक्षेप में,
मेगर परीक्षण का उपयोग यह जाँचने के लिए किया जाता है कि किसी विद्युत उपकरण का रोधन (इंसुलेशन) कितना अच्छा है, ताकि करंट का रिसाव (leakage) न हो और शॉर्ट सर्किट या नुकसान से बचा जा सके।
मेगर परीक्षण के मुख्य अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:
मेगर का उपयोग उच्च प्रतिरोध (जैसे मेगाओम) को मापने के लिए किया जाता है, इसलिए इसे इंसुलेशन टेस्टर (रोधन परीक्षक) के नाम से भी जाना जाता है।
Ans.
मेगर (Megger), जिसे इंसुलेशन टेस्टर (रोधन परीक्षक) या मेगओम मीटर भी कहा जाता है, एक विशेष विद्युत मापने वाला उपकरण है जिसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च विद्युत रोधन प्रतिरोध (High Electrical Insulation Resistance) को मापने के लिए किया जाता है।
यह उपकरण उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500V, 1000V, 2500V) को लागू करके यह जाँचता है कि:
संक्षेप में,
मेगर का उपयोग विद्युत सुरक्षा और उपकरणों के जीवनकाल को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
Ans.
इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) की मुख्य इकाई मेगाओम ({M} Omega) है।
इन्सुलेशन प्रतिरोध बहुत अधिक मान का प्रतिरोध होता है, इसलिए इसे ओम (Omega) की बड़ी इकाई मेगाओम ({M} Omega) में व्यक्त किया जाता है।
इसे मापने के लिए मेगर (Megger) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है।
Ans.
मेगर (Megger) मुख्य रूप से उच्च प्रतिरोध को मापने वाले एक उपकरण (सीरीज़ टाइप ओममीटर) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें एक DC जनरेटर या उच्च वोल्टेज स्रोत शामिल होता है।
इसके कार्य करने के पीछे दो मुख्य सिद्धांत हैं:
Ans.
मेगर (Megger) में मुख्य रूप से तीन टर्मिनल होते हैं, जिनका उपयोग इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है:
Ans.
440V प्रणाली (सिस्टम) के लिए विशिष्ट मेगर परीक्षण वोल्टेज 500V DC होता है।
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय मानकों के अनुसार, 500V तक की वोल्टेज रेटिंग वाले उपकरणों या केबलों के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए 500V DC मेगर का उपयोग किया जाता है।
मेगर परीक्षण में उपयोग किया जाने वाला {DC} परीक्षण वोल्टेज, उपकरण या प्रणाली के रेटेड {AC} वोल्टेज से अधिक होना चाहिए, ताकि इन्सुलेशन की मज़बूती का सही आकलन किया जा सके।
|
उपकरण का {AC} रेटेड वोल्टेज (V) |
अनुशंसित {DC} परीक्षण वोल्टेज (V) |
|---|---|
|
0 {V} से 50 {V} |
250 {V} |
|
50 {V} से 500 {V} (जैसे {440 {V}}) |
500 {V} |
|
500 {V} से 1000 {V} (जैसे 650 {V}/ 1.1 {kV} केबल) |
1000 {V} |
न्यूनतम अपेक्षित {IR} मान
मेगर परीक्षण करने के बाद, 440 {V} प्रणाली के लिए इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) का मान आमतौर पर कम से कम 1 { Megaohm (M} Omega) या उससे अधिक होना चाहिए।
Ans.
एक अच्छा इन्सुलेशन प्रतिरोध मान वह है जो सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित न्यूनतम स्वीकार्य सीमा से काफी अधिक हो।
इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) का मान मेगाओम ({M} Omega) में मापा जाता है।
एक सामान्य अंगूठे का नियम (Rule of Thumb) यह है कि आपका {IR} मान जितना अधिक होगा, इन्सुलेशन की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होगी।
विभिन्न मानकों और थंब रूल के अनुसार, न्यूनतम इन्सुलेशन प्रतिरोध मान उपकरण के रेटेड वोल्टेज पर निर्भर करता है:
|
उपकरण का रेटेड {AC} वोल्टेज |
न्यूनतम {IR} मान ({M Omega} में) |
सामान्य परीक्षण वोल्टेज ({DC} में) |
|---|---|---|
|
500 { V} (कम वोल्टेज) |
1 { M} Omega |
500 { V} |
|
> 500 \text{ V} से 1000 { V} |
1 { M} Omega |
1000 { V} |
|
मोटर/घूर्णन मशीन (Motors/Rotating Machines) |
{IR} = ({kV} + 1) { M} Omega या 5 { M} Omega |
500 { V} या 1000 { V} |
उदाहरण के लिए:
निष्कर्ष:
एक अच्छा इन्सुलेशन प्रतिरोध मान वह है जो उपकरण के रेटेड वोल्टेज पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः यह न्यूनतम 1 { M} Omega से काफी अधिक होना चाहिए और 10 { M} Omega या उससे अधिक होने पर इसे उत्कृष्ट माना जाता है।
Ans.
पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance), जिसे भू-प्रतिरोध या अर्थिंग प्रतिरोध भी कहा जाता है, ग्राउंडिंग सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर है।
पृथ्वी प्रतिरोध की परिभाषा यह है कि यह किसी दबे हुए अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे अर्थिंग रॉड या प्लेट) और सामान्य पृथ्वी (Common Earth) के बीच मौजूद विद्युत प्रतिरोध है। यह वह रुकावट है जो पृथ्वी विद्युत धारा के प्रवाह में डालती है।
सुरक्षा की दृष्टि से पृथ्वी प्रतिरोध का मान बहुत कम होना चाहिए।
पृथ्वी प्रतिरोध का मान मुख्य रूप से मिट्टी की प्रकृति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है:
विभिन्न मानकों के अनुसार अधिकतम अनुमेय {Earth Resistance} मान:
|
प्रणाली |
अधिकतम {Earth Resistance} |
|---|---|
|
बड़े सबस्टेशन/विद्युत केंद्र |
1 { Ohm} (Omega) तक |
|
छोटे सबस्टेशन |
2 { Ohm} (Omega) तक |
|
बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक भवन |
5 { Ohm} (Omega) तक |
|
सामान्य घरेलू वायरिंग |
5 { Ohm} (Omega) से कम |
Ans.
सबस्टेशन (Substation) के लिए पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) का आदर्श मूल्य जितना संभव हो शून्य (\mathbf{0 \Omega}) के करीब होना चाहिए। हालाँकि, व्यवहार में यह संभव नहीं है।
सबस्टेशन में,
सुरक्षा और उपकरण की सुरक्षा के लिए अत्यंत कम प्रतिरोध की आवश्यकता होती है, क्योंकि फॉल्ट करंट (Fault Current) का मान बहुत अधिक होता है।
विभिन्न मानकों (जैसे {IEEE}, {IS}) और सबस्टेशन के प्रकार के आधार पर अधिकतम अनुमेय ({Maximum Permissible}) मान निर्धारित किए गए हैं:
|
सबस्टेशन का प्रकार |
अधिकतम अनुमेय {Earth Resistance} ({Omega} में) |
|---|---|
|
बड़े पावर स्टेशन (Generating Station) |
{0.5 Omega} |
|
ईएचटी (EHT) या मुख्य सबस्टेशन (Major. Substation) |
{1.0 Omega} |
|
33 { kV} सबस्टेशन |
{2.0 Omega} |
|
छोटे वितरण सबस्टेशन ({DTR}) |
{ 5.0 Omega} |
निष्कर्ष:
एक सबस्टेशन के लिए, 1.0 Omega या उससे कम के मान को आदर्श माना जाता है, खासकर उच्च वोल्टेज ({EHT}) और बड़े सबस्टेशनों के लिए। 0.5 Omega का मान सबसे उत्तम माना जाता है।
यह मूल्य क्यों महत्वपूर्ण है?
एक बहुत कम पृथ्वी प्रतिरोध मान यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी गंभीर दोष की स्थिति में, फॉल्ट करंट (Fault Current) तेजी से और सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित हो जाए, जिससे सबस्टेशन के भीतर कदम वोल्टेज (Step Potential) और स्पर्श वोल्टेज (Touch Potential) कम हो जाए और कर्मियों की सुरक्षा बनी रहे।
Ans.
अर्थ टेस्टर का उपयोग करते समय पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) मापने के लिए, मुख्य रूप से दो (2) अतिरिक्त स्पाइक (या इलेक्ट्रोड) का उपयोग किया जाता है।
यह विधि,
जिसे तीन-टर्मिनल विधि (Three-Terminal Method) या पतन-क्षमता विधि ({Fall-of-Potential Method}) कहा जाता है, अर्थिंग सिस्टम का प्रतिरोध मापने की सबसे सामान्य विधि है।
कुल मिलाकर, प्रतिरोध मापने के लिए तीन कनेक्शन बिंदु आवश्यक होते हैं, जिनमें से दो अस्थायी स्पाइक होते हैं:
|
इलेक्ट्रोड का नाम |
कार्य |
संख्या |
|---|---|---|
|
मुख्य इलेक्ट्रोड |
जिसका प्रतिरोध मापना है |
1 |
|
सहायक स्पाइक (P) |
पोटेंशियल (विभव) मापने के लिए |
1 |
|
सहायक स्पाइक (C) |
करंट प्रवाहित करने के लिए |
1 |
|
कुल स्पाइक (अतिरिक्त) |
{P} और {C} |
2 |
कुछ अन्य माप विधियाँ भी हैं:
Ans.
पृथ्वी प्रतिरोध (अर्थ रेजिस्टेंस) को मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता ({Soil Resistivity}) प्रभावित करती है, जो आगे कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है।
पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। मिट्टी की प्रतिरोधकता जितनी अधिक होगी, पृथ्वी प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा। यह निम्नलिखित पर निर्भर करती है:
Ans.
निश्चित रूप से, यहाँ मेगर (Megger) के लिए सारांश नोट्स दिए गए हैं।
मेगर एक महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग उच्च {DC} वोल्टेज लगाकर विद्युत उपकरणों और केबल के इन्सुलेशन प्रतिरोध ({Insulation Resistance}) को मापने के लिए किया जाता है। इसे अक्सर इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षक ({Insulation Resistance Tester}) भी कहा जाता है।
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
मुख्य उद्देश्य |
किसी विद्युत उपकरण (जैसे मोटर, ट्रांसफॉर्मर, केबल) के इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) का मापन करना। |
|
माप की इकाई |
मेगाओम ({M Omega}), जो इन्सुलेशन की उच्च प्रतिरोधकता को दर्शाती है। |
|
कार्य सिद्धांत |
मेगर उच्च {DC} वोल्टेज (जैसे 500{V}, 1000{V}, 5000{V}) को इन्सुलेशन पर लागू करता है और इसके माध्यम से प्रवाहित होने वाली लीकेज धारा ({Leakage Current}) को मापकर ओम के नियम ({R=V/I}) के अनुसार प्रतिरोध की गणना करता है। |
|
अच्छा इन्सुलेशन |
एक अच्छा इन्सुलेशन उच्च प्रतिरोध (आमतौर पर {1 M Omega} से अधिक) दिखाता है। |
मेगर दो मुख्य प्रकार के होते हैं: हैंड-ऑपरेटेड (Hand-Operated) और इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल ({Digital})।
|
भाग |
कार्य |
|---|---|
|
हैंडल या बैटरी |
परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करना। |
|
प्रेशर कॉइल ({Pressure \ Coil}) - \mathbf{P} |
वोल्टेज के आनुपातिक होता है और इसे सर्किट के आर-पार जोड़ा जाता है। |
|
करंट कॉइल ({Current \ Coil}) - \mathbf{C} |
लीकेज धारा के आनुपातिक होता है और इसे सर्किट के साथ सीरीज में जोड़ा जाता है। |
|
पैमाना और सूचक ({Scale & Pointer}) |
माप को {Ohms} या {M Omega} में प्रदर्शित करता है। |
|
टर्मिनल |
लाइन ({L}) / अर्थ ({E}) / गार्ड ({G}) टर्मिनल होते हैं। गार्ड टर्मिनल बाहरी सतह रिसाव धारा को बाईपास करके सटीक माप सुनिश्चित करता है। |
मेगर का उपयोग करके दो मुख्य परीक्षण किए जाते हैं:
A. इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण ({IR \ Test})
यह इन्सुलेशन की वर्तमान स्थिति का पता लगाता है।
B. ध्रुवीकरण सूचकांक परीक्षण ({Polarization \ Index \ (PI) \ Test})
यह इन्सुलेशन की गुणवत्ता और नमी के अवशोषण की जाँच करता है।
नोट:
मेगर से प्राप्त रीडिंग तापमान और आर्द्रता पर बहुत अधिक निर्भर करती है। बेहतर परिणामों के लिए, इन्सुलेशन प्रतिरोध को हमेशा एक ही तापमान और आर्द्रता की स्थिति में मापा जाना चाहिए।
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