अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

चित्र
अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

मेगर परीक्षण और पृथ्वी प्रतिरोध माप ( Megger Testing & Earth Resistance )

मेगर परीक्षण और पृथ्वी प्रतिरोध माप

मेगर परीक्षण (Megger Testing) और पृथ्वी प्रतिरोध माप (Earth Resistance Measurement) दोनों ही विद्युत प्रणालियों के महत्वपूर्ण परीक्षण हैं, लेकिन उनके उद्देश्य और मापी जाने वाली राशियाँ अलग-अलग होती हैं।

मेगर परीक्षण (Insulation Resistance Testing)

​मेगर परीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत उपकरण (जैसे केबल, मोटर, ट्रांसफार्मर) के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापना है।

  • उद्देश्य: यह जांचना कि कंडक्टरों (चालकों) के बीच या कंडक्टरों और उपकरण के बाहरी भाग/जमीन के बीच इन्सुलेशन कितना प्रभावी है। यह इन्सुलेशन की अखंडता, नमी, क्षति या उम्र बढ़ने का पता लगाता है।
  • मापी जाने वाली राशि: उच्च प्रतिरोध (मेगाओम ({M} Omega) में)।
  • उपकरण: इन्सुलेशन परीक्षक (Insulation Tester), जिसे आमतौर पर उसके ब्रांड नाम मेगर (Megger) से जाना जाता है।
  • परीक्षण वोल्टेज: यह परीक्षण करने के लिए उच्च DC वोल्टेज (जैसे 250 {V}, 500 {V}, 1000 {V}, 2500 {V}, आदि) का उपयोग करता है। उच्च प्रतिरोध मान (उच्च मेगाओम रीडिंग) अच्छा इन्सुलेशन दर्शाते हैं, जबकि कम रीडिंग इन्सुलेशन विफलता या रिसाव (leakage) का संकेत देती है।

पृथ्वी प्रतिरोध माप (Earth Resistance Measurement)

​पृथ्वी प्रतिरोध माप का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत प्रणाली के ग्राउंडिंग सिस्टम (Grounding System) का प्रतिरोध मापना है।

  • उद्देश्य: यह आकलन करना कि अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे अर्थ प्लेट या रॉड) द्वारा गलती धाराओं (fault currents) को जमीन में सुरक्षित रूप से और प्रभावी ढंग से फैलाने के लिए कितना कम प्रतिरोध पथ प्रदान किया जा रहा है। यह सुरक्षा और उपकरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मापी जाने वाली राशि: निम्न प्रतिरोध (ओम (Omega) में, आमतौर पर बहुत कम मान, जैसे 5 Omega से कम)।
  • उपकरण: अर्थ परीक्षक (Earth Tester), जिसे ग्राउंड टेस्टर या कभी-कभी अर्थ मेगर भी कहा जाता है।
  • परीक्षण विधि: इसमें अक्सर एक विशिष्ट विन्यास में सहायक इलेक्ट्रोडों को जमीन में गाड़ना शामिल होता है (जैसे फॉल-ऑफ-पोटेंशियल विधि)। यह आमतौर पर कम वोल्टेज पर कार्य करता है।

मुख्य अंतरों का सारांश

विशेषता

मेगर परीक्षण (इन्सुलेशन प्रतिरोध)

पृथ्वी प्रतिरोध माप

मुख्य उद्देश्य

विद्युत उपकरणों के इन्सुलेशन की गुणवत्ता का आकलन करना।

ग्राउंडिंग सिस्टम के प्रतिरोध का आकलन करना।

मापी जाने वाली राशि

इन्सुलेशन प्रतिरोध (उच्च प्रतिरोध)

पृथ्वी का प्रतिरोध (निम्न प्रतिरोध)

मापन की इकाई

मेगाओम ({M} Omega)

ओम (Omega)

परीक्षण वोल्टेज

उच्च DC वोल्टेज

आमतौर पर कम AC या DC वोल्टेज

अनुप्रयोग

केबल, मोटर, ट्रांसफार्मर आदि के इन्सुलेशन दोषों की जांच करना।

ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड की प्रभावशीलता का परीक्षण करना।


मेगर परीक्षण उच्च प्रतिरोध को मापने के लिए उच्च वोल्टेज का उपयोग करता है, जबकि पृथ्वी प्रतिरोध माप कम प्रतिरोध को मापने के लिए फॉल-ऑफ-पोटेंशियल जैसी विशेष तकनीकों का उपयोग करता है।


1. मेगर क्या है?

Ans.    

मेगर (Megger) एक महत्वपूर्ण विद्युत मापक उपकरण है जिसका उपयोग इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए किया जाता है।

​इसे इन्सुलेशन परीक्षक (Insulation Tester) या मेग-ओममीटर (Megohmmeter) भी कहा जाता है, क्योंकि यह प्रतिरोध को मेगाओम ({M} Omega) की रेंज में मापता है।

​मेगर के कार्य और उपयोग

​मेगर का मुख्य कार्य किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण के इन्सुलेशन की गुणवत्ता की जाँच करना है।

  1. इन्सुलेशन प्रतिरोध मापन (IR Test):
    • ​इसका उपयोग तारों, केबलों, मोटर वाइंडिंग, जनरेटर और ट्रांसफार्मर जैसे विद्युत उपकरणों में चालक (कंडक्टर) और जमीन (अर्थ) या दो अलग-अलग चालकों के बीच इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है।
    • ​यह उपकरण परीक्षण के लिए उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, 2500 {V}, आदि) उत्पन्न करता है।
    • उच्च प्रतिरोध रीडिंग (मेगाओम में) अच्छा इन्सुलेशन दर्शाती है, जबकि कम रीडिंग (कुछ मेगाओम या किलोओम) इन्सुलेशन क्षति, नमी या खराबी का संकेत देती है, जिससे लीकेज करंट (रिसाव धारा) या शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
  2. दोष का पता लगाना:
    • ​यह विद्युत वायरिंग या मशीनों में लीकेज करंट (रिसाव धारा) के संभावित कारणों और अन्य खराबी (जैसे क्षतिग्रस्त इन्सुलेशन) को खोजने में मदद करता है।
    • ​नियमित मेगर परीक्षण से उपकरण के जीवनकाल को बढ़ाया जा सकता है और बड़ी विफलताओं से बचा जा सकता है।

​मेगर का कार्य सिद्धांत

​मेगर मुख्य रूप से चल कुंडल मीटर (Moving Coil Meter) के सिद्धांत पर काम करता है, और कुछ आधुनिक उपकरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से काम करते हैं।

  • मूल सिद्धांत: यह ज्ञात प्रतिरोध के साथ इन्सुलेशन के प्रतिरोध की तुलना के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • घटक: एक मेगर में आमतौर पर एक DC जनरेटर (पुराने हैंड-ऑपरेटेड मेगर में हाथ से घुमाया जाता था) या एक बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (आधुनिक डिजिटल मेगर में) होता है, जो उच्च DC वोल्टेज उत्पन्न करता है, और एक ओममीटर होता है जो उत्पन्न वोल्टेज और परिणामी करंट के अनुपात के आधार पर प्रतिरोध को सीधे मेगाओम में प्रदर्शित करता है।


2. मेगर की परिभाषा क्या है?

Ans.   

मेगर की सरल परिभाषा इस प्रकार है:

मेगर (Megger) एक विद्युत मापक उपकरण है जिसका उपयोग बहुत उच्च प्रतिरोध, विशेष रूप से इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए किया जाता है। इसे इन्सुलेशन परीक्षक या मेग-ओममीटर (Megohmmeter) भी कहा जाता है, क्योंकि यह प्रतिरोध को मेगाओम ({M} Omega) की रेंज में मापता है।

​मुख्य उद्देश्य

​मेगर का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत उपकरण (जैसे केबल, मोटर या ट्रांसफार्मर) के इन्सुलेशन की अखंडता और गुणवत्ता की जाँच करना होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कंडक्टर (चालक) के बीच या कंडक्टर और जमीन (अर्थ) के बीच कोई खराबी, नमी, या क्षति तो नहीं है जिससे लीकेज करंट (रिसाव धारा) हो सकता है।

​कार्य सिद्धांत

​यह उपकरण परीक्षण के लिए उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, आदि) उत्पन्न करता है और इन्सुलेशन से प्रवाहित होने वाली बहुत कम रिसाव धारा को मापकर ओम के नियम का उपयोग करके प्रतिरोध मान की गणना करता है।

  • उच्च मेगाओम रीडिंग = अच्छा इन्सुलेशन।
  • कम रीडिंग = खराब या क्षतिग्रस्त इन्सुलेशन।



3. मेगर परीक्षण का उद्देश्य क्या है?

Ans.    

मेगर परीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) की गुणवत्ता और अखंडता की जाँच करना है।

​मेगर परीक्षण के प्रमुख उद्देश्य

​मेगर परीक्षण, जिसे इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण भी कहा जाता है, निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करता है:

  1. इन्सुलेशन की स्थिति का आकलन: यह जांचना कि तारों, केबलों, मोटर वाइंडिंग, ट्रांसफार्मर या अन्य विद्युत उपकरणों के चालकों (conductors) के बीच या चालक और जमीन (earth) के बीच इन्सुलेशन सामग्री कितनी प्रभावी है।
    • उच्च IR मान (मेगाओम में) अच्छा इन्सुलेशन दर्शाता है।
    • निम्न IR मान इन्सुलेशन के खराब होने का संकेत देता है।
  2. दोष और क्षति का पता लगाना: इन्सुलेशन में किसी भी प्रकार की क्षति (damage), नमी (moisture), गंदगी (contamination) या उम्र बढ़ने (aging) के कारण होने वाले दोषों और दरारों की पहचान करना। ये कारक इन्सुलेशन को कमजोर करते हैं और लीकेज करंट (रिसाव धारा) का कारण बन सकते हैं।
  3. सुरक्षा सुनिश्चित करना: यह सुनिश्चित करना कि उपकरण या वायरिंग का इन्सुलेशन इतना मजबूत है कि सामान्य और क्षणिक वोल्टेज पर भी विद्युत प्रवाह को सुरक्षित रूप से सीमित कर सके, जिससे बिजली के झटके और आग लगने के खतरों को रोका जा सके।
  4. निवारक रखरखाव (Predictive Maintenance): नियमित अंतराल पर मेगर परीक्षण करके इन्सुलेशन प्रतिरोध के मान को रिकॉर्ड किया जाता है। समय के साथ प्रतिरोध में गिरावट की प्रवृत्ति को देखकर उपकरण की संभावित विफलता का अनुमान लगाया जा सकता है और बड़ी खराबी आने से पहले सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
  5. उपकरण की स्वीकार्यता (Acceptance of Equipment): किसी भी नए उपकरण या वायरिंग इंस्टॉलेशन को चालू करने से पहले यह सुनिश्चित करना कि इन्सुलेशन प्रतिरोध निर्धारित मानकों (जैसे {IEEE}, {IEC}) के अनुरूप है।



4. मेगर का निर्माण?

Ans.    

मेगर (Megger) को मूल रूप से एक शंट टाइप ओममीटर (Shunt Type Ohmmeter) और एक DC जनरेटर या इलेक्ट्रॉनिक वोल्टेज स्रोत के संयोजन के रूप में बनाया जाता है। मेगर दो मुख्य प्रकार के होते हैं: हैंड-ऑपरेटेड (मैनुअल) और इलेक्ट्रॉनिक/बैटरी-ऑपरेटेड (डिजिटल)

​यहाँ क्लासिक हैंड-ऑपरेटेड एनालॉग मेगर के मुख्य घटकों और उनके निर्माण का विवरण दिया गया है:

​मेगर के मुख्य भाग (Construction)

​एक मेगर के निर्माण में मुख्य रूप से चार भाग होते हैं:

​1. DC वोल्टेज जनरेटर (DC Voltage Generator)

​इसका उद्देश्य परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च DC वोल्टेज उत्पन्न करना है।

  • हैंड-ऑपरेटेड मेगर में: इसमें एक स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) वाला DC जनरेटर होता है, जिसे ऑपरेटर एक हैंडल घुमाकर चलाता है। हैंडल को लगभग 160 { RPM} की गति पर घुमाने से आवश्यक उच्च वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, आदि) उत्पन्न होता है।
  • डिजिटल मेगर में: इसमें बैटरी द्वारा संचालित इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होता है जो आवश्यक उच्च DC वोल्टेज उत्पन्न करता है।

​2. मापन यूनिट (Measuring Unit - Ohmmeter)

​यह मेगर का वह भाग है जो वास्तव में प्रतिरोध को मापता है और रीडिंग दिखाता है। यह एक चल कुंडल मीटर (Moving Coil Meter) के सिद्धांत पर आधारित होता है।

  • स्थायी चुंबक: एक मजबूत स्थायी चुंबक पूरे मापन तंत्र के लिए चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।
  • दो कुंडल (Coils):
    • दबाव कुंडल (Pressure Coil) / नियंत्रण कुंडल (Control Coil) (P): यह उच्च-प्रतिरोध कुंडल है जो सीधे वोल्टेज जनरेटर के समानांतर (parallel) में जुड़ा होता है। यह सूचक (pointer) को वामावर्त (anti-clockwise) दिशा में घुमाने के लिए बल आघूर्ण (torque) उत्पन्न करता है (जो अनंत {M} Omega की ओर इंगित करता है)।
    • धारा कुंडल (Current Coil) / विक्षेपण कुंडल (Deflecting Coil) (C): यह कम-प्रतिरोध कुंडल है जो परीक्षण किए जा रहे इन्सुलेशन के साथ श्रृंखला (series) में जुड़ा होता है। इन्सुलेशन से गुजरने वाली लीकेज धारा इस कुंडल से होकर गुजरती है और सूचक को दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घुमाने के लिए बल आघूर्ण उत्पन्न करती है (जो शून्य Omega की ओर इंगित करता है)।
  • सूचक (Pointer): यह दोनों कुंडल के बीच एक साझा धुरी (common axis) पर जुड़ा होता है और स्केल पर प्रतिरोध मान को इंगित करता है।

​3. प्रतिरोध (Resistors)

​सर्किट में दो सुरक्षात्मक प्रतिरोधक (R_1 और R_2) होते हैं:

  • ​एक प्रतिरोधक दबाव कुंडल के साथ श्रृंखला में जुड़ा होता है।
  • ​दूसरा प्रतिरोधक धारा कुंडल के साथ श्रृंखला में जुड़ा होता है। ये जनरेटर द्वारा उत्पन्न उच्च वोल्टेज से कुंडल को सुरक्षित रखते हैं।

​4. टर्मिनल (Terminals)

​परीक्षण के कनेक्शन के लिए मेगर में दो मुख्य टर्मिनल होते हैं:

  • लाइन टर्मिनल (L): यह उस कंडक्टर से जोड़ा जाता है जिसका इन्सुलेशन प्रतिरोध मापना है।
  • अर्थ टर्मिनल (E): यह आमतौर पर उपकरण की जमीन/बॉडी या दूसरे कंडक्टर से जोड़ा जाता है।

मेगर का कार्य: दोनों कुंडल द्वारा उत्पन्न बल आघूर्ण एक दूसरे के विपरीत होते हैं। सूचक का अंतिम विक्षेपण (deflection) दोनों बल आघूर्ण के अनुपात पर निर्भर करता है, जो अंततः इन्सुलेशन प्रतिरोध का मान दर्शाता है।


5. मेगर परीक्षण टर्मिनल L, E, G क्या है?

Ans.   

मेगर परीक्षण में {L}, {E}, और {G} टर्मिनल मेगर को परीक्षण के तहत उपकरण से जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य बिंदु हैं।

​यह तीन-टर्मिनल सेटअप विशेष रूप से उच्च-वोल्टेज इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण के लिए डिज़ाइन किया गया है, और प्रत्येक का एक विशिष्ट कार्य होता है:

​1. {L} टर्मिनल (Line / रेखा)

  • उद्देश्य: यह टर्मिनल परीक्षण किए जा रहे कंडक्टर (चालक) से जोड़ा जाता है।
  • उदाहरण: किसी मोटर की वाइंडिंग, केबल के चरण (Phase) या किसी स्विचगियर के बस बार (Bus Bar) से जोड़ा जाता है।
  • कार्य: मेगर का उच्च परीक्षण वोल्टेज इसी टर्मिनल के माध्यम से कंडक्टर पर लागू किया जाता है।

​2. {E} टर्मिनल (Earth / पृथ्वी)

  • उद्देश्य: यह टर्मिनल जमीन (Ground) या उपकरण की बॉडी (Body) से जोड़ा जाता है।
  • उदाहरण: मोटर के फ्रेम, धातु केबल शीथ, या किसी विद्युत पैनल के अर्थिंग पॉइंट से जोड़ा जाता है।
  • कार्य: यह टर्मिनल {L} टर्मिनल से जमीन की ओर प्रवाहित होने वाले रिसाव करंट (Leakage Current) के लिए वापसी पथ प्रदान करता है। मेगर इस करंट को मापता है और इन्सुलेशन प्रतिरोध की गणना करता है (चालक और जमीन के बीच)।

​3. {G} टर्मिनल (Guard / रक्षक)

  • उद्देश्य: यह टर्मिनल सतह के लीकेज करंट (Surface Leakage Current) को बाईपास करने के लिए उपयोग किया जाता है, ताकि माप में केवल वास्तविक आयतन इन्सुलेशन प्रतिरोध (Volume Insulation Resistance) शामिल हो सके।
  • उदाहरण: जब आप एक केबल का परीक्षण कर रहे होते हैं, तो {G} टर्मिनल को केबल के जैकेट पर, टर्मिनलों के पास, या बुशिंग के पास नम (गीली) या गंदी सतह से जोड़ा जा सकता है।
  • कार्य:
    • ​सतह की नमी या गंदगी के कारण {L} और {E} टर्मिनलों के बीच प्रवाहित होने वाला कोई भी लीकेज करंट {G} टर्मिनल के माध्यम से वापस मेगर में चला जाता है।
    • ​मेगर का मीटर सर्किट {G} टर्मिनल से आने वाले करंट को माप में शामिल नहीं करता है। इस प्रकार, {G} टर्मिनल यह सुनिश्चित करता है कि परीक्षण केवल आंतरिक इन्सुलेशन की गुणवत्ता को मापे, न कि बाहरी सतह की स्थिति को।

टर्मिनल

   नाम

जुड़ाव

कार्य

{L}

    Line

           परीक्षण किए जा रहे कंडक्टर

            उच्च वोल्टेज लागू करना

{E}

    Earth

           उपकरण की बॉडी/जमीन

            रिसाव करंट (IR) के लिए वापसी पथ

{G}

    Guard

           गंदी या नम सतह

            सतह लीकेज करंट को बाईपास करना


संक्षेप में, 

तीन टर्मिनलों का उपयोग करने का मुख्य कारण {G} (गार्ड) टर्मिनल को शामिल करके माप की सटीकता में सुधार करना है।





6. मेगर में परीक्षण वोल्टेज ?
Ans.    

मेगर परीक्षण के लिए उपयोग किया जाने वाला वोल्टेज एक उच्च DC वोल्टेज होता है, जिसे विशेष रूप से उपकरण के रेटेड वोल्टेज और उसके वर्ग (class) के आधार पर चुना जाता है।

​मेगर में परीक्षण वोल्टेज की सीमा (रेंज) आमतौर पर {50 {V}} से शुरू होकर {15,000 {V}} ({15 {kV}}) या उससे भी अधिक तक जाती है, लेकिन सामान्यतः निम्न और मध्यम वोल्टेज के अनुप्रयोगों में निम्नलिखित मानक DC वोल्टेज का उपयोग किया जाता है:

{500 {V}, 1000 {V}, 2500 {V}, 5000 {V}}


परीक्षण वोल्टेज का चयन कैसे करें?

​मेगर में परीक्षण वोल्टेज का चयन उस विद्युत उपकरण या प्रणाली के ऑपरेटिंग वोल्टेज के आधार पर किया जाता है जिसका परीक्षण किया जा रहा है। एक सामान्य अंगूठा नियम (Rule of Thumb) यह है कि परीक्षण वोल्टेज उपकरण के रेटेड वोल्टेज से थोड़ा अधिक होना चाहिए।

मानक दिशानिर्देशों के अनुसार वोल्टेज चयन का एक सामान्य चार्ट यहाँ दिया गया है:


उपकरण का रेटेड वोल्टेज (AC)

अनुशंसित मेगर परीक्षण वोल्टेज (DC)

उपयोग का उदाहरण

{100 V} तक

{250 { V}}

कम वोल्टेज वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

{650 V} तक ({415 V} /{440 V})

{500 { V}} या {1000 { V}}

LT (लो टेंशन) मोटर, घरेलू वायरिंग, छोटे ट्रांसफार्मर

{1000 V} तक

{1000 { V}}

औद्योगिक LT उपकरण

{2.5 kV} तक

{1000 { V}} या {2500 { V}}

मध्यम HT उपकरण

{5 kV} तक ({3.3 kV} / {6.6 kV})

{2500 { V}} या {5000 { V}}

HT (हाई टेंशन) मोटर, बड़े ट्रांसफार्मर, HT केबल

{15 kV} तक ({11 kV})

{5000 { V}}

उच्च वोल्टेज उपकरण



महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. रेटेड वोल्टेज से अधिक: इन्सुलेशन को उसकी सामान्य ऑपरेटिंग परिस्थितियों से अधिक तनाव (stress) में जांचने के लिए परीक्षण वोल्टेज हमेशा उपकरण के रेटेड वोल्टेज से अधिक होना चाहिए।
  2. ओवर-टेस्टिंग से बचें: वोल्टेज इतना अधिक नहीं होना चाहिए कि वह स्वस्थ इन्सुलेशन को ही नुकसान पहुँचा दे। इसलिए, उपकरण की रेटिंग के अनुसार सही वोल्टेज का चयन करना महत्वपूर्ण है।
  3. DC वोल्टेज: मेगर हमेशा DC (डायरेक्ट करंट) वोल्टेज उत्पन्न करता है क्योंकि {DC} वोल्टेज {AC} की तुलना में अधिक सटीक रूप से इन्सुलेशन की लीकेज धारा को मापता है और कैपेसिटिव प्रभावों को कम करता है।




7. मेगर में डिफ्लेक्टिंग कॉइल और कंट्रोलिंग कॉइल का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans.    

मेगर (Megger) में डिफ्लेक्टिंग कॉइल (Deflecting Coil) और कंट्रोलिंग कॉइल (Controlling Coil) का उपयोग मुख्य रूप से चल कुंडल मापन तंत्र में सूचक (Pointer) को सही स्थिति में लाने और प्रतिरोध को सीधे मापने के लिए किया जाता है। मेगर एक विशिष्ट प्रकार का ओममीटर होता है, और यह दो बल आघूर्णों (Torques) के अनुपात पर काम करता है।

डिफ्लेक्टिंग कॉइल (धारा कुंडल)

उद्देश्य: सूचक को शून्य (Zero) की ओर विक्षेपित करने के लिए डिफ्लेक्टिंग टॉर्क (t_d) उत्पन्न करना।

सर्किट कनेक्शन: यह कॉइल परीक्षण के तहत इन्सुलेशन के साथ श्रृंखला (Series) में जुड़ी होती है।

कार्य: जब मेगर उच्च {DC} वोल्टेज लागू करता है, तो इन्सुलेशन से होकर गुजरने वाला रिसाव करंट (Leakage Current) इस कॉइल से होकर गुजरता है। यह करंट जितना अधिक होगा (मतलब इन्सुलेशन प्रतिरोध उतना ही कम), डिफ्लेक्टिंग टॉर्क उतना ही मजबूत होगा, और सूचक शून्य प्रतिरोध की ओर उतना ही अधिक घूमेगा।

t_d {Current}

कंट्रोलिंग कॉइल (दबाव कुंडल)

उद्देश्य: सूचक को अनंत (infty) की ओर विक्षेपित करने के लिए कंट्रोलिंग टॉर्क (t_c) उत्पन्न करना। यह विक्षेपण टॉर्क के विपरीत दिशा में कार्य करता है।

सर्किट कनेक्शन: यह कॉइल सीधे जनरेटर वोल्टेज के समानांतर (Parallel) में जुड़ी होती है।

कार्य: यह कॉइल यह सुनिश्चित करती है कि सूचक हमेशा एक निश्चित स्थिति में रहे, भले ही जनरेटर द्वारा उत्पन्न वोल्टेज में थोड़ा उतार-चढ़ाव क्यों न हो (विशेषकर हैंड-ऑपरेटेड मेगर में)। यह मूल रूप से सिस्टम में संदर्भ वोल्टेज के समान बल आघूर्ण प्रदान करती है।

t_c {Voltage}

अनुपात और मापन

​मेगर का सूचक तभी स्थिर होता है जब डिफ्लेक्टिंग टॉर्क और कंट्रोलिंग टॉर्क एक दूसरे को संतुलित करते हैं।


{Final Deflection} {{Deflecting Torque } (t_d)}{{Controlling Torque } (t_c)} {{Current}}{{Voltage}}


चूँकि प्रतिरोध ({R}) वोल्टेज ({V}) और करंट ({I}) का अनुपात है ({R} = {V}/{I}), 

सूचक की अंतिम स्थिति सीधे इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) के मान को इंगित करती है:

{Final Deflection} {1}{{Resistance}}

इस दोहरे कॉइल तंत्र का उपयोग करने का लाभ यह है कि यह सुनिश्चित करता है कि रीडिंग केवल प्रतिरोध के अनुपात पर निर्भर करती है, न कि अकेले वोल्टेज या करंट के पूर्ण मान पर, जिससे मेगर द्वारा उत्पन्न वोल्टेज में छोटे-मोटे बदलावों के बावजूद माप सटीक रहता है।




8. मेगर में पॉइंटर और स्केल का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans.

मेगर में पॉइंटर (सूचक) और स्केल (पैमाना) का उपयोग इन्सुलेशन प्रतिरोध ({IR}) के मापे गए मान को दृश्य रूप से प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। यह उपयोगकर्ता को परीक्षण किए जा रहे उपकरण के इन्सुलेशन की गुणवत्ता को सीधे पढ़ने और उसका आकलन करने की अनुमति देता है।

पॉइंटर (सूचक) का उपयोग

​पॉइंटर एक हल्का हिस्सा होता है जो मेगर के आंतरिक मापन तंत्र (डिफ्लेक्टिंग और कंट्रोलिंग कॉइल) से जुड़ा होता है।

  • बल आघूर्णों का संतुलन: पॉइंटर का विक्षेपण (movement) मेगर के दो विपरीत बल आघूर्णों (डिफ्लेक्टिंग और कंट्रोलिंग टॉर्क) के अनुपात पर निर्भर करता है। यह अनुपात सीधे इन्सुलेशन प्रतिरोध के मान से संबंधित होता है।
  • रीडिंग देना: जब ये दोनों टॉर्क संतुलन में आते हैं, तो पॉइंटर स्केल पर एक निश्चित स्थिति पर स्थिर हो जाता है। यह स्थिर स्थिति ही परीक्षण किए गए इन्सुलेशन प्रतिरोध का मान होती है।

​स्केल (पैमाना) का उपयोग

​मेगर का स्केल एक विशिष्ट ओममीटर पैमाना होता है जिसे उच्च प्रतिरोध मानों को दर्शाने के लिए कैलिब्रेट किया जाता है।

  • उच्च रेंज प्रदर्शन: यह स्केल मेगाओम ({M}Omega) में प्रतिरोध मान प्रदर्शित करता है, जिसकी रेंज आमतौर पर ज़ीरो ({0} Omega) से शुरू होकर अनंत (infty) तक जाती है।
  • शून्य ({0}): स्केल का शून्य सिरा सबसे अधिक विक्षेपण (maximum current flow) को दर्शाता है, जिसका अर्थ है शून्य प्रतिरोध या पूर्ण शॉर्ट सर्किट (खराब इन्सुलेशन)।
  • अनंत (infty): स्केल का अनंत सिरा सबसे कम विक्षेपण (negligible current flow) को दर्शाता है, जिसका अर्थ है अनंत प्रतिरोध या उत्कृष्ट इन्सुलेशन (आदर्श स्थिति)।
  • सीधा पठन: पॉइंटर की स्थिति देखकर तकनीशियन तुरंत यह निर्धारित कर सकता है कि इन्सुलेशन प्रतिरोध स्वीकार्य सीमा के भीतर है या नहीं।

संक्षेप में, 

पॉइंटर और स्केल मेगर को एक प्रत्यक्ष-पठन (Direct Reading) उपकरण बनाते हैं, जिससे ऑपरेटर बिना किसी जटिल गणना के तुरंत इन्सुलेशन की स्थिति जान सकता है।





9. मेगर का कार्य सिद्धांत?
Ans.    

मेगर ({Megger}) का कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से चल कुंडल मापन तंत्र और ओम के नियम पर आधारित है, जहाँ प्रतिरोध की गणना के लिए वोल्टेज और करंट के अनुपात का उपयोग किया जाता है।

मेगर का कार्य सिद्धांत

​मेगर का कार्य सिद्धांत दो बल आघूर्णों (टॉर्क) के बीच संतुलन पर आधारित है जो इसके दो विपरीत रूप से जुड़ी कुंडलियों द्वारा उत्पन्न होते हैं:

​1. उच्च DC वोल्टेज उत्पन्न करना

​सबसे पहले, मेगर एक आंतरिक स्रोत (हैंडल घुमाकर या बैटरी का उपयोग करके) से उच्च, स्थिर DC वोल्टेज (जैसे 500 {V}, 1000 {V}, आदि) उत्पन्न करता है। इस वोल्टेज को परीक्षण किए जा रहे उपकरण के कंडक्टर और ग्राउंड (जमीन) पर लागू किया जाता है।

​2. बल आघूर्णों का निर्माण

​मेगर में एक सूचक (Pointer) होता है जो दो बल आघूर्णों के प्रभाव में घूमता है:

डिफ्लेक्टिंग टॉर्क ({t_d}): धारा कुंडल (Current Coil) द्वारा उत्पन्न।

यह टॉर्क परीक्षण किए जा रहे इन्सुलेशन से गुजरने वाली रिसाव धारा ({I}) के समानुपाती होता है।

यह सूचक को शून्य प्रतिरोध (Zero Resistance) की ओर घुमाता है।

t_d {I}

कंट्रोलिंग टॉर्क ({t_c}): दबाव कुंडल (Pressure Coil) द्वारा उत्पन्न।

यह टॉर्क लागू किए गए मेगर वोल्टेज ({V}) के समानुपाती होता है।

यह सूचक को अनंत प्रतिरोध (Infinite Resistance) की ओर घुमाता है।

t_c {V}

3. संतुलन और रीडिंग

​सूचक तब स्थिर होता है जब ये दोनों बल आघूर्ण एक दूसरे को संतुलित करते हैं। सूचक की अंतिम स्थिति t_d और t_c के अनुपात पर निर्भर करती है:

{Final Position} = {t_d}{t_c} / {{I}}{{V}}

चूँकि प्रतिरोध ({R}) वोल्टेज और करंट का अनुपात होता है ({R} = {V}/{I}), 

सूचक की स्थिति सीधे प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है:

{Final Position} {1}{{R}}

इस व्यवस्था से मेगर सीधे मेगाओम ({M} Omega) में प्रतिरोध का मान प्रदर्शित करता है। चूंकि रीडिंग वोल्टेज और करंट के अनुपात पर निर्भर करती है, यह सुनिश्चित होता है कि हस्त-चालित मेगर में भी हैंडल घुमाने की गति में छोटे-मोटे बदलाव के बावजूद माप की सटीकता बनी रहे।

कार्य का सार:

मेगर उच्च वोल्टेज लगाकर इन्सुलेशन की गुणवत्ता को परखता है। यदि इन्सुलेशन अच्छा है (उच्च प्रतिरोध), तो करंट कम होगा, और सूचक {infty {M} Omega} की ओर रहेगा। यदि इन्सुलेशन खराब है (कम प्रतिरोध/शॉर्ट), तो करंट अधिक होगा, और सूचक {0 {M} Omega} की ओर चला जाएगा।




10. मेगर का चरण दर चरण कार्य सिद्धांत?

Ans.   

मेगर (Megger) एक पोर्टेबल उपकरण है जिसका उपयोग उच्च इंसुलेशन प्रतिरोध (High Insulation Resistance) को मापने के लिए किया जाता है। यह विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।

इसका कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से एक स्थायी चुंबक चल कुंडल (Permanent Magnet Moving Coil - PMMC) उपकरण पर आधारित है जिसमें दो कुंडल (Coils) होते हैं:

  1. कंट्रोल कॉइल या वोल्टेज कॉइल (V_1 और V_2): यह जनरेटर से जुड़ा होता है और संकेतक को अनंत (infty) की ओर नियंत्रित (control) करता है।
  2. डिफ्लेक्टिंग कॉइल या करंट कॉइल (Current Coil - CC): यह करंट के सीधे आनुपातिक होता है और संकेतक को शून्य (0) की ओर विक्षेपित (deflect) करता है।

​यहां मेगर के कार्य सिद्धांत के चरण दिए गए हैं:

मेगर का कार्य सिद्धांत

​1. वोल्टेज उत्पन्न करना (Generating Voltage)

  • ​मेगर में एक DC जनरेटर होता है। पुराने हैंड-ऑपरेटेड (Hand-Operated) मेगर में, एक हैंडल को घुमाकर (लगभग 160 RPM पर) उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500V या 1000V) उत्पन्न किया जाता है। डिजिटल मेगर में, यह वोल्टेज एक बैटरी चालित इलेक्ट्रॉनिक परिपथ द्वारा उत्पन्न होता है।
  • ​यह उच्च वोल्टेज उस उपकरण या केबल के इंसुलेशन पर लगाया जाता है जिसका प्रतिरोध मापा जाना है।

​2. कुंडल में धारा प्रवाह (Current Flow in Coils)

  • ​उत्पन्न उच्च वोल्टेज के कारण, करंट वोल्टेज कॉइल (V_1 और V_2) और करंट कॉइल (CC) दोनों से प्रवाहित होता है।
    • वोल्टेज कॉइल (V_1 और V_2): इस कॉइल में करंट वोल्टेज के आनुपातिक होता है।
    • करंट कॉइल (CC): यह कॉइल परीक्षण किए जा रहे इंसुलेशन से होकर बहने वाले लीकेज करंट (Leakage Current) को मापता है। इस कॉइल में करंट इंसुलेशन प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

​3. बल आघूर्ण का उत्पादन (Torque Production)

  • ​मेगर में एक स्थायी चुंबक होता है। जब दोनों कॉइल में करंट प्रवाहित होता है, तो वे स्थायी चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण (Torque) उत्पन्न करते हैं।
    • कंट्रोल/वोल्टेज कॉइल (V_1 और V_2): यह एक बल आघूर्ण उत्पन्न करता है जो संकेतक को अनंत (infty) की ओर ले जाता है।
    • डिफ्लेक्टिंग/करंट कॉइल (CC): यह एक बल आघूर्ण उत्पन्न करता है जो इंसुलेशन के लीकेज करंट के आनुपातिक होता है, और संकेतक को शून्य (0) की ओर विक्षेपित करता है।

​4. संतुलन और रीडिंग (Balance and Reading)

  • ​संकेतक की स्थिति (Pointer's position) इन दोनों बल आघूर्णों के संतुलन पर निर्भर करती है।
    • उच्च प्रतिरोध (अच्छा इंसुलेशन): यदि इंसुलेशन प्रतिरोध बहुत अधिक है, तो लीकेज करंट बहुत कम होगा। इससे करंट कॉइल (CC) का बल आघूर्ण कम होगा, और वोल्टेज कॉइल का बल आघूर्ण प्रभावी होगा। संकेतक अनंत (infty) की ओर रहेगा।
    • निम्न प्रतिरोध (खराब इंसुलेशन): यदि इंसुलेशन प्रतिरोध कम है, तो लीकेज करंट अधिक होगा। इससे करंट कॉइल (CC) का बल आघूर्ण अधिक होगा, और संकेतक शून्य (0) की ओर विक्षेपित होगा।
  • ​संकेतक (Pointer) प्रतिरोध पैमाने पर सीधे इंसुलेशन प्रतिरोध का मान दर्शाता है। यह मान मेगा ओम ({M} Omega) में प्रदर्शित होता है।



11. मेगर गणना सूत्र

Ans.    

मेगर (Megger) उपकरण द्वारा इंसुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को सीधे मेगाओम ({M} Omega) में मापा जाता है, इसलिए किसी जटिल गणना सूत्र की आवश्यकता नहीं होती है।

मेगर का कार्य ओम के नियम पर आधारित है, जिसका मूल सूत्र निम्नलिखित है:

R = {V}/{I}

 

जहाँ:

  • ​R = इंसुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - {M} Omega में)
  • ​V = मेगर द्वारा लगाया गया परीक्षण वोल्टेज (Applied Test Voltage - Volts में, जैसे 500 {V}, 1000 {V})
  • ​I = इंसुलेशन के माध्यम से प्रवाहित होने वाला रिसाव करंट (Leakage Current - Amperes में)

​हालांकि मेगर स्वयं आंतरिक रूप से इस सिद्धांत का उपयोग करके प्रतिरोध को मापता है और सीधे प्रदर्शित करता है, आपको रीडिंग लेने के लिए स्वयं गणना करने की आवश्यकता नहीं होती है।

न्यूनतम स्वीकार्य IR मान के लिए सामान्य नियम

​इंसुलेशन के स्वस्थ होने के लिए, मापा गया {IR} मान हमेशा न्यूनतम स्वीकार्य {IR} मान से अधिक होना चाहिए। इस न्यूनतम मान की गणना के लिए कुछ सामान्य नियम उपयोग किए जाते हैं:

​1. IEEE 43 मानक के अनुसार (घूमने वाली मशीनों के लिए)

​IEEE (Institute of Electrical and Electronics Engineers) मानक {kV}+1 का उपयोग करता है।


{न्यूनतम IR मान (M} Omega)} = {रेटेड वोल्टेज (kV)} + 1

उदाहरण:

यदि किसी मोटर का रेटेड वोल्टेज 0.415 {kV} (415 {V}) है, तो न्यूनतम {IR} मान होना चाहिए:


किसी मोटर के न्यूनतम इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान की गणना करने के लिए आमतौर पर एक सामान्य नियम का उपयोग किया जाता है, खासकर जब कोई विशिष्ट मानक (जैसे कि {IEEE}, {NEMA}, {IEC}) प्रदान नहीं किया गया हो।

​सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य नियम है: 

{IR (M} Omega )} {{रेटेड वोल्टेज (V)}}{1000} + 1

जहाँ:

  • ​{IR} इंसुलेशन रेजिस्टेंस मेगाओम ({M} Omega) में है।
  • ​रेटेड वोल्टेज मोटर का लाइन-टू-लाइन वोल्टेज (वोल्ट ({V}) में) है।

गणना (Calculation)

1. दिए गए मान:

रेटेड वोल्टेज (V_r) = 0.415 {kV}

implies V_r = 415 {V}

2. सूत्र का प्रयोग:

{न्यूनतम IR (M} Omega)} {V_r}{1000} + 1

3. मानों को सूत्र में रखना:

{न्यूनतम IR (M}Omega)} {415}{1000} + 1

{न्यूनतम IR (M}Omega)} 0.415 + 1

{न्यूनतम IR (M}Omega)} 1.415


उत्तर (Answer)

​इस सामान्य नियम के अनुसार, 0.415 {kV} (415 {V}) रेटेड वोल्टेज वाली मोटर के लिए न्यूनतम इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान 1.415 { M} Omega होना चाहिए।

अतिरिक्त जानकारी (Additional Information)

  • मानक नियम (Standard Rule): कई उद्योग मानकों और सर्वोत्तम अभ्यास मार्गदर्शिकाओं में एक सरल 1 { M }Omega को एक सामान्य न्यूनतम {IR} मान के रूप में भी स्वीकार किया जाता है, खासकर निम्न वोल्टेज उपकरणों के लिए, यदि विशिष्ट गणना मान इससे बहुत कम न हो।
  • परीक्षण वोल्टेज (Test Voltage): {IR} को मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला {DC} परीक्षण वोल्टेज आमतौर पर रेटेड वोल्टेज पर निर्भर करता है। 415 {V} मोटर के लिए, 500 {V DC} एक सामान्य परीक्षण वोल्टेज है।
  • {IR} का महत्व: उच्च इंसुलेशन रेजिस्टेंस मान यह सुनिश्चित करता है कि मोटर वाइंडिंग में कोई रिसाव धारा (leakage current) नहीं है, जिससे सुरक्षा और मोटर विश्वसनीयता बनी रहती है।



12. मेगर विशिष्ट परीक्षण वोल्टेज का उपयोग किया जाता है?

Ans.     

मेगर (Megger) परीक्षण के लिए उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट वोल्टेज उस उपकरण या प्रणाली के रेटेड ऑपरेटिंग वोल्टेज पर निर्भर करता है जिसका आप परीक्षण कर रहे हैं। मेगर परीक्षण में, रेटेड वोल्टेज से अधिक DC वोल्टेज (प्रत्यक्ष धारा) का उपयोग किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इंसुलेशन दोषपूर्ण नहीं है।

सामान्यतः 

उपयोग किए जाने वाले परीक्षण वोल्टेज और उनके अनुप्रयोगों के लिए एक गाइड यहाँ दिया गया है:


उपकरण का रेटेड वोल्टेज (V)

मेगर परीक्षण वोल्टेज (V_{DC})

अनुप्रयोग (Application)

1000{V} तक (उदा. 230{V}, 400/415{V}, 690{V})

500{V} या 1000{V}

निम्न वोल्टेज केबल, मोटर, स्विचगियर और सामान्य वायरिंग।

1000{V} से 2500{V} तक

1000{V}

मध्यम वोल्टेज उपकरण।

2500{V} से 5000{V} तक

2500{V}

उच्च वोल्टेज मोटर, ट्रांसफॉर्मर और केबल।

5000{V} से 12000{V} तक

2500{V} या 5000{V}

उच्च वोल्टेज प्रणालियाँ।

12000{V} से अधिक

5000{V} से 10000{V}

बहुत उच्च वोल्टेज की प्रणालियाँ।




परीक्षण वोल्टेज का चयन करने के लिए सामान्य नियम (General Rule for Selecting Test Voltage)

​मेगर परीक्षण वोल्टेज का चयन करने के लिए {IEEE 43-2013} जैसी मार्गदर्शन पुस्तिकाएं निम्नलिखित सामान्य दिशानिर्देश प्रदान करती हैं:

  1. रेटेड वोल्टेज पर निर्भरता: परीक्षण वोल्टेज आमतौर पर उपकरण के रेटेड वोल्टेज से लगभग 1000 {V} अधिक, या उसके करीब होता है, लेकिन {DC} होता है।
  2. मानक दिशानिर्देश (Standard Guideline): यदि कोई विशिष्ट मानक उपलब्ध नहीं है, तो एक बहुत ही सामान्य नियम यह है कि:
    • रेटेड वोल्टेज को {kV} में लें, और इसे {M} Omega में न्यूनतम {IR} आवश्यकता के रूप में उपयोग करें। (उदाहरण के लिए: 415 {V} के लिए 1{M} Omega से अधिक)।
    • परीक्षण वोल्टेज के लिए, निम्न वोल्टेज उपकरणों (जैसे 415{V} मोटर) के लिए आमतौर पर 500 {V} {DC} का उपयोग किया जाता है, या कभी-कभी {IEEE} के अनुसार 1000 {V} {DC} का भी उपयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिए, 415 {V} (निम्न वोल्टेज) मोटर के लिए:

  • ​सबसे आम परीक्षण वोल्टेज 500 {V} {DC} है।
  • ​{IEEE} जैसे कठोर मानकों के तहत, 1000 {V} {DC} का उपयोग भी किया जा सकता है।

Megger क्या होता है इससे हमें झटका क्यो लगता है और कितना voltage जेनेरेट करता है इस वीडियो में मेगर परीक्षण वोल्टेज जनरेट करने के तरीके को समझाया गया है।



13. मेगर के प्रकार?

Ans.    

मेगर (Megger), जिसे इंसुलेशन रेजिस्टेंस टेस्टर (Insulation Resistance Tester) भी कहा जाता है, को मुख्य रूप से वोल्टेज उत्पन्न करने के तरीके और रीडिंग प्रदर्शित करने के तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

मेगर के प्रकार (Types of Megger)

​मेगर को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है:

1. वोल्टेज उत्पादन के आधार पर (Based on Voltage Generation)

​यह वर्गीकरण बताता है कि मेगर परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज कैसे उत्पन्न करता है।

A. हैंड ऑपरेटेड/मैनुअल मेगर (Hand-Operated/Manual Megger)

  • परिचय: यह सबसे पारंपरिक प्रकार का मेगर है।
  • कार्य: इसमें एक हाथ से संचालित क्रैंक लगा होता है। ऑपरेटर को 160 { RPM} की गति से क्रैंक को लगातार घुमाना पड़ता है।
  • वोल्टेज स्रोत: क्रैंक घुमाने से इसके अंदर का एक {DC} जनरेटर काम करता है और उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज (जैसे {500V}, {1000V}) उत्पन्न करता है।
  • उपयोग: यह उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहाँ बैटरी या बिजली स्रोत आसानी से उपलब्ध नहीं है।

B. इलेक्ट्रॉनिक/बैटरी ऑपरेटेड मेगर (Electronic/Battery-Operated Megger)

  • परिचय: यह आधुनिक प्रकार का मेगर है।
  • कार्य: इसमें क्रैंक की आवश्यकता नहीं होती है। यह बैटरी द्वारा संचालित होता है।
  • वोल्टेज स्रोत: यह अपनी बैटरी का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के माध्यम से उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज उत्पन्न करता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग करना आसान है और यह अधिक स्थिर वोल्टेज प्रदान करता है।

2. रीडिंग डिस्प्ले के आधार पर (Based on Reading Display)

​यह वर्गीकरण मेगर द्वारा मापे गए इंसुलेशन रेजिस्टेंस मान को प्रदर्शित करने के तरीके पर आधारित है।

A. एनालॉग मेगर (Analog Megger)

  • परिचय: यह एक पुराना प्रकार है जो हैंड ऑपरेटेड और इलेक्ट्रॉनिक दोनों प्रकारों में आता है।
  • डिस्प्ले: इसमें एक सुई (Pointer) वाला डायल गेज होता है।
  • रीडिंग: सुई की स्थिति को देखकर रीडिंग ली जाती है (जैसे: 1 { M} Omega, 5 { M} Omega, अनंत)।
  • लाभ: सुई की गति से इंसुलेशन की प्रकृति (जैसे कैपेसिटिव चार्जिंग) का अनुमान लगाना आसान होता है।

B. डिजिटल मेगर (Digital Megger)

  • परिचय: यह आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक (बैटरी संचालित) प्रकार का होता है।
  • डिस्प्ले: इसमें डिजिटल स्क्रीन होती है।
  • रीडिंग: रीडिंग सीधे संख्यात्मक रूप में प्रदर्शित होती है (जैसे: 1.415 { M} Omega)।
  • लाभ: रीडिंग स्पष्ट होती है, त्रुटि की संभावना कम होती है, और यह अक्सर गिगाओम ({G} Omega) तक अधिक रेंज में माप सकता है।




14. मैनुअल मेगर (हाथ से संचालित) की व्याख्या करें?

Ans.    

मैनुअल मेगर (Hand-Operated Megger), जिसे हैंड ड्राइविंग मेगर या क्रैंक टाइप मेगर भी कहा जाता है, इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने का एक पारंपरिक उपकरण है। यह अपनी कार्यप्रणाली के लिए बाहरी बिजली स्रोत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए मानव शक्ति का उपयोग करता है।

​यहाँ इसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है:

1. संरचना और मुख्य भाग (Construction and Key Parts)

​मैनुअल मेगर में मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:

भाग का नाम (Part Name)

कार्य (Function)

हैंड क्रैंक (Hand Crank)

इसे हाथ से घुमाया जाता है। यही वह इनपुट है जो मशीन को चलाता है।

{DC} जनरेटर (DC Generator)

यह क्रैंक से यांत्रिक ऊर्जा प्राप्त करता है और उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज (जैसे {500V}, {1000V} या अधिक) उत्पन्न करता है।

क्लच तंत्र (Clutch Mechanism)

यह एक गियर प्रणाली है जो जनरेटर की गति को स्थिर रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि क्रैंक को तेज़ी से घुमाने पर भी आउटपुट वोल्टेज स्थिर बना रहे।

ओममीटर (Ohmmeter)/मापन इकाई

इसमें दो कॉइल होती हैं: दबाव कॉइल (Pressure/Control Coil) और धारा कॉइल (Current/Deflecting Coil)। यह दोनों कॉइलों में प्रवाहित धारा के आधार पर इंसुलेशन रेजिस्टेंस को मापता है।

डायल गेज (Dial Gauge)

यह एक एनालॉग (सुई वाला) डिस्प्ले होता है जिस पर इंसुलेशन रेजिस्टेंस का मान {M} Omega (मेगाओम) में शून्य से अनंत तक अंकित होता है।

टर्मिनल (Terminals)

दो मुख्य लीड पॉइंट होते हैं, जैसे: अर्थ ({E}) और लाइन ({L}), जिनका उपयोग परीक्षण किए जा रहे उपकरण से कनेक्शन करने के लिए किया जाता है।


2. कार्यप्रणाली (Working Principle)

​मैनुअल मेगर निम्नलिखित सिद्धांत पर काम करता है:

  1. वोल्टेज का उत्पादन: जब ऑपरेटर हैंड क्रैंक को घुमाता है (आमतौर पर लगभग {160 RPM} पर), तो वह अंदर के {DC} जनरेटर को चलाता है। यह जनरेटर आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करता है।
  2. स्थिर वोल्टेज: क्लच तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि आउटपुट वोल्टेज क्रैंकिंग की गति से स्वतंत्र रहे और परीक्षण के दौरान एक स्थिर मान बनाए रखे।
  3. धारा का प्रवाह: इस उच्च {DC} वोल्टेज को परीक्षण किए जा रहे उपकरण के इन्सुलेशन पर लगाया जाता है (उदाहरण के लिए, मोटर वाइंडिंग और ग्राउंड/बॉडी के बीच)।
  4. प्रतिरोध मापन:
    • नियंत्रण कॉइल (दबाव कॉइल): यह वोल्टेज के आनुपातिक बल आघूर्ण (Torque) उत्पन्न करता है।
    • विक्षेपण कॉइल (धारा कॉइल): यह इंसुलेशन से होकर प्रवाहित होने वाली लीकेज धारा (Leakage Current) के आनुपातिक बल आघूर्ण उत्पन्न करता है।
  5. पॉइंटर का विक्षेपण: मेगर का सूचक (Pointer) इन दोनों कॉइलों द्वारा उत्पन्न विपरीत बल आघूर्ण के अनुपात में विक्षेपित होता है।
    • अच्छा इंसुलेशन (High Resistance): यदि इंसुलेशन अच्छा है, तो लीकेज धारा कम होगी, विक्षेपण कॉइल का बल आघूर्ण कम होगा, और पॉइंटर अनंत (infty) की ओर इंगित करेगा।
    • खराब इंसुलेशन (Low Resistance): यदि इंसुलेशन खराब है, तो लीकेज धारा अधिक होगी, विक्षेपण कॉइल का बल आघूर्ण अधिक होगा, और पॉइंटर शून्य (0) की ओर इंगित करेगा।

3. लाभ और हानि (Advantages and Disadvantages)


लाभ (Advantages)

हानि (Disadvantages)

स्व-चालित (Self-Powered): इसे संचालित करने के लिए किसी बैटरी या बाहरी बिजली स्रोत की आवश्यकता नहीं होती है।

अस्थिर वोल्टेज: ऑपरेटर को स्थिर {RPM} बनाए रखना पड़ता है, जो मुश्किल हो सकता है और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव ला सकता है।

विश्वसनीयता: इसकी यांत्रिक संरचना इसे कठोर औद्योगिक वातावरण में अधिक टिकाऊ बनाती है।

धीमी गति: डिजिटल मेगर की तुलना में रीडिंग लेने में अधिक समय लग सकता है।

सरल संचालन: इसमें जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट नहीं होते, जिससे मरम्मत आसान होती है।

मानव त्रुटि: अपर्याप्त क्रैंकिंग गति के कारण गलत रीडिंग आ सकती है।




15. इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) मेगर की व्याख्या करें?

Ans.    

इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) मेगर इंसुलेशन रेजिस्टेंस को मापने का एक आधुनिक उपकरण है। मैनुअल मेगर के विपरीत, यह उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए हाथ से क्रैंक घुमाने के बजाय बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग करता है।

1. संरचना और मुख्य भाग (Construction and Key Parts)

​डिजिटल मेगर के मुख्य घटक इस प्रकार हैं:

भाग का नाम (Part Name)

कार्य (Function)

बैटरी (Battery)

मेगर को शक्ति प्रदान करती है। यही {DC} वोल्टेज का अंतिम स्रोत है।

इलेक्ट्रॉनिक सर्किट/कनवर्टर (Electronic Circuit/Converter)

यह बैटरी के निम्न {DC} वोल्टेज को बूस्ट करके आवश्यक उच्च {DC} परीक्षण वोल्टेज (जैसे {500V}, {1000V}, {5000V}) में परिवर्तित करता है।

{LCD/LED} डिस्प्ले (Digital Display)

मापे गए इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) मान को सीधे संख्यात्मक रूप में ( {M} Omega या {G} Omega में) दिखाता है।

परीक्षण बटन (Test Button)

वोल्टेज को सक्रिय (Activate) करने और परीक्षण शुरू करने के लिए इस बटन को दबाया जाता है।

वोल्टेज चयनकर्ता (Voltage Selector)

यह ऑपरेटर को आवश्यक परीक्षण वोल्टेज ({500V}, {1000V}, आदि) चुनने की अनुमति देता है।

टर्मिनल (Terminals)

परीक्षण लीड्स को उपकरण से जोड़ने के लिए {E} (अर्थ/ग्राउंड), {L} (लाइन) और कभी-कभी {Guard} टर्मिनल होते हैं।

2. कार्यप्रणाली (Working Principle)

​डिजिटल मेगर की कार्यप्रणाली स्वचालित और अधिक सटीक होती है:


वोल्टेज पीढ़ी (Voltage Generation): ऑपरेटर वांछित परीक्षण वोल्टेज का चयन करता है (जैसे 1000 {V}) और परीक्षण बटन दबाता है। आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बैटरी वोल्टेज का उपयोग करके इस स्थिर {DC} परीक्षण वोल्टेज को उत्पन्न करता है।


परीक्षण का अनुप्रयोग: यह स्थिर वोल्टेज परीक्षण किए जा रहे इंसुलेशन पर लगाया जाता है।


धारा मापन: मेगर इंसुलेशन से होकर बहने वाली बहुत छोटी लीकेज धारा ({I}_{{leakage}}) को मापता है।

प्रतिरोध की गणना: आंतरिक माइक्रोप्रोसेसर ओम के नियम ({R} = {V}/{I}) का उपयोग करके इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) की गणना करता है:

{IR (M} Omega)} = {{परीक्षण वोल्टेज (V)}}{{लीकेज धारा (A)}}

डिजिटल प्रदर्शन: गणना किया गया {IR} मान तुरंत {LCD} स्क्रीन पर संख्यात्मक रूप से प्रदर्शित होता है।

 

3. लाभ और हानि (Advantages and Disadvantages)

लाभ (Advantages)

हानि (Disadvantages)

स्थिर वोल्टेज (Stable Voltage): यह परीक्षण के दौरान एकदम स्थिर {DC} वोल्टेज प्रदान करता है, जिससे रीडिंग अधिक सटीक होती है।

बैटरी निर्भरता: इसके संचालन के लिए हमेशा चार्ज की गई बैटरी की आवश्यकता होती है।

उच्च सटीकता (High Accuracy): डिजिटल डिस्प्ले और माइक्रोप्रोसेसर-आधारित गणना के कारण रीडिंग बहुत सटीक होती है।

जटिलता: इसमें जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते हैं, जिससे यह मैनुअल मेगर की तुलना में अधिक नाजुक और मरम्मत में कठिन होता है।

पठन में सुगमता (Ease of Reading): {LCD} डिस्प्ले संख्यात्मक मान दिखाता है, जिससे रीडिंग में कोई भ्रम नहीं होता।

मूल्य: उच्च सटीकता और उन्नत सुविधाओं के कारण यह आमतौर पर मैनुअल मेगर से अधिक महंगा होता है।

उन्नत सुविधाएँ: आधुनिक डिजिटल मेगर {PI} (Polarization Index) और {DAR} (Dielectric Absorption Ratio) जैसे स्वचालित परीक्षण कर सकते हैं।

पर्यावरणीय संवेदनशीलता: अत्यधिक तापमान या नमी इलेक्ट्रॉनिक घटकों को प्रभावित कर सकती है।


डिजिटल मेगर आज औद्योगिक और वाणिज्यिक दोनों परीक्षणों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे सटीकता, उपयोग में आसानी और उन्नत डेटा विश्लेषण क्षमता प्रदान करते हैं।



16.  मेगर का उपयोग कैसे करें (प्रक्रिया)?

Ans.   

मेगर (Megger) का उपयोग करके किसी भी विद्युत उपकरण, जैसे मोटर, केबल या ट्रांसफार्मर का इंसुलेशन रेजिस्टेंस ({IR}) परीक्षण करने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और तैयारी चरण शामिल हैं।

​मेगर का उपयोग करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया यहाँ दी गई है:

1. सुरक्षा और तैयारी (Safety and Preparation) 

​सबसे पहले सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मेगर उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करता है:

  1. उपकरण को डी-एनर्जाइज़ करें (De-Energize the Equipment): सुनिश्चित करें कि जिस उपकरण का परीक्षण किया जा रहा है वह पूरी तरह से बिजली स्रोत से डिस्कनेक्ट है और उस पर कोई वोल्टेज नहीं है।
  2. डिस्चार्ज (Discharge): उपकरण या केबल के संधारित्र (Capacitors) में जमा हुए किसी भी अवशिष्ट आवेश (Residual Charge) को सुरक्षित रूप से ग्राउंड करके हटा दें। ऐसा न करने पर खतरनाक झटका लग सकता है या रीडिंग गलत आ सकती है।
  3. सुरक्षा गियर ({PPE}): उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण ({PPE}) पहनें, जैसे कि इंसुलेटेड दस्ताने।
  4. टर्मिनल साफ करें: परीक्षण किए जाने वाले टर्मिनलों और लीड्स को किसी भी धूल या नमी से साफ करें, क्योंकि ये रीडिंग को प्रभावित कर सकते हैं।

2. मेगर सेटअप (Megger Setup)

  1. सही वोल्टेज चुनें (Select the Correct Voltage): उपकरण के रेटेड वोल्टेज के आधार पर मेगर पर उचित {DC} परीक्षण वोल्टेज चुनें।
    • ​600 {V} तक के रेटेड वोल्टेज वाले उपकरण के लिए, आमतौर पर 500 {V} या 1000 {V} {DC} का चयन किया जाता है। (जैसा कि पिछले उत्तर में बताया गया है)।
  2. लीड्स कनेक्ट करें (Connect the Leads): मेगर लीड्स को परीक्षण किए जा रहे उपकरण से कनेक्ट करें:
    • लाइन/लाइव ({L}) टर्मिनल की लीड को उपकरण के चालक ({Conductor}) या वाइंडिंग टर्मिनल से कनेक्ट करें।
    • अर्थ/ग्राउंड ({E}) टर्मिनल की लीड को उपकरण के बॉडी ({Body}) या अर्थिंग पॉइंट से कनेक्ट करें।
  3. टेस्ट चेक (Test Check): परीक्षण शुरू करने से पहले मेगर की कार्यक्षमता जांच लें:
    • ​मेगर लीड्स को हवा में खुला रखकर परीक्षण करें। रीडिंग अनंत (infty) दिखानी चाहिए (जो ओपन सर्किट का संकेत है)।
    • ​दोनों लीड्स को आपस में शॉर्ट करें और परीक्षण करें। रीडिंग शून्य (0) दिखानी चाहिए (जो शॉर्ट सर्किट का संकेत है)।

3. इन्सुलेशन रेजिस्टेंस परीक्षण (IR Test)

  1. वोल्टेज लगाएं (Apply the Voltage):
    • डिजिटल मेगर में: टेस्ट बटन दबाएं और दबाए रखें।
    • मैनुअल मेगर में: क्रैंक को स्थिर गति से घुमाएं (आमतौर पर {160 RPM})।
  2. रीडिंग रिकॉर्ड करें (Record the Reading):
    • ​परीक्षण वोल्टेज लगाने के बाद, एक विशिष्ट अवधि (आमतौर पर 1 मिनट) के लिए रीडिंग को स्थिर होने दें।
    • 1 मिनट के बाद जो रीडिंग आती है, उसे नोट करें। यह रीडिंग मानक {IR} मान है।
    • ​यदि {IR} का मान समय के साथ स्थिर रूप से बढ़ता है, तो यह अच्छे इन्सुलेशन का संकेत है।
  3. डिस्चार्ज (Discharge After Test): परीक्षण पूरा होने पर (टेस्ट बटन रिलीज करने पर या क्रैंक घुमाना बंद करने पर), उपकरण की वाइंडिंग में कोई भी शेष आवेश तुरंत सुरक्षित रूप से हटा दिया जाना चाहिए। आधुनिक डिजिटल मेगर में यह प्रक्रिया स्वचालित रूप से होती है।

4. परिणामों की व्याख्या (Interpreting Results)


न्यूनतम {IR} मान से तुलना: मापी गई {IR} रीडिंग की तुलना न्यूनतम स्वीकार्य {IR} मान से करें (जैसा कि पहले उदाहरण में  1.415 { M} Omega था)।

  • ​यदि {मापी गई IR} {न्यूनतम स्वीकार्य IR} है, तो इंसुलेशन अच्छा माना जाता है। 
  • ​यदि {मापी गई IR} < {न्यूनतम स्वीकार्य IR} है, तो इंसुलेशन कमजोर या खराब माना जाता है, और उपकरण को उपयोग से पहले मरम्मत की आवश्यकता हो सकती है। 


तीन परीक्षण (Three Tests): एक थ्री-फेज मोटर के लिए, आपको निम्न के बीच {IR} जांचना होगा:

{Winding} { (फेज 1)} - {Ground}

{Winding} { (फेज 2)} - {Ground}

{Winding} { (फेज 3)} - {Ground}

फेज से फेज ({Phase} 1 to {Phase} 2, {Phase} 2 to {Phase} 3, {Phase} 3 to {Phase} 1) भी जाँच की जाती है।




17. मेगर की एहतियात?

Ans.     

मेगर का उपयोग करते समय, उच्च {DC} वोल्टेज के कारण सुरक्षा और सटीक रीडिंग सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण एहतियात (Precautions) बरतना आवश्यक है।

​यहाँ मेगर उपयोग करते समय बरती जाने वाली प्रमुख एहतियात दी गई हैं:

1. व्यक्तिगत सुरक्षा एहतियात (Personal Safety Precautions) 

  1. उपकरण को डी-एनर्जाइज़ करें (De-Energize): मेगर परीक्षण शुरू करने से पहले, सुनिश्चित करें कि परीक्षण किया जा रहा उपकरण या प्रणाली पूरी तरह से बिजली के स्रोत से डिस्कनेक्ट हो गई है। लॉकआउट/टैगआउट ({LOTO}) प्रक्रिया का पालन करें।
  2. अवशिष्ट आवेश हटाएं (Discharge Residual Charge): परीक्षण शुरू करने से पहले और परीक्षण पूरा होने के बाद, परीक्षण किए जा रहे सर्किट (जैसे मोटर वाइंडिंग या केबल) को ग्राउंड ({Ground}) करके उसमें जमा हुए अवशिष्ट कैपेसिटिव आवेश को पूरी तरह से हटा दें।
  3. सुरक्षा गियर ({PPE}): मेगर के उपयोग के दौरान हमेशा इंसुलेटेड दस्ताने और अन्य आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण ({PPE}) पहनें, क्योंकि मेगर उच्च वोल्टेज उत्पन्न करता है।
  4. लीड को न छुएं: मेगर के सक्रिय होने पर या क्रैंक घुमाते समय कभी भी टेस्ट लीड के धातु वाले सिरों को न छुएं।
  5. उपकरण को डिस्कनेक्ट रखें: मेगर परीक्षण करते समय किसी भी अन्य उपकरण (जैसे मल्टीमीटर) को सर्किट से कनेक्ट न रखें, क्योंकि उच्च वोल्टेज उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।

2. सटीक मापन के लिए एहतियात (Precautions for Accurate Measurement) 

  1. सतह की सफाई: परीक्षण करने से पहले, इंसुलेशन की सतह (जैसे मोटर के टर्मिनल या केबल की जैकेट) को अच्छी तरह से साफ करें। धूल या नमी {IR} रीडिंग को काफी कम कर सकती है, जिससे इंसुलेशन वास्तव में अच्छा होने पर भी खराब दिख सकता है।
  2. टेस्ट वोल्टेज का सही चयन: उपकरण के रेटेड वोल्टेज के अनुसार ही सही {DC} परीक्षण वोल्टेज चुनें। गलत वोल्टेज का चयन करने से इंसुलेशन को नुकसान हो सकता है या गलत रीडिंग मिल सकती है।
  3. स्थिरता सुनिश्चित करें:
    • मैनुअल मेगर: क्रैंक को स्थिर और अनुशंसित गति (sim 160{ RPM}) पर घुमाना सुनिश्चित करें ताकि एक स्थिर वोल्टेज उत्पन्न हो सके।
    • डिजिटल मेगर: सुनिश्चित करें कि बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो ताकि वह आवश्यक स्थिर वोल्टेज उत्पन्न कर सके।
  4. गार्ड टर्मिनल का उपयोग: उच्च सटीकता की आवश्यकता होने पर, गार्ड टर्मिनल का उपयोग करें। यह सतह रिसाव धारा ({Surface Leakage Current}) को बाइपास कर देता है और केवल वास्तविक आयतन रिसाव धारा ({Volume Leakage Current}) को मापन सर्किट में जाने देता है, जिससे सटीक {IR} मान मिलता है।
  5. तापमान रिकॉर्ड करें: {IR} मान तापमान के साथ बदलता है। हमेशा परीक्षण के समय का तापमान रिकॉर्ड करें और आवश्यक हो तो रीडिंग को 40^circ {C} के मानक तापमान पर समायोजित करें।
  6. 1-मिनट रीडिंग: रीडिंग को 1 मिनट के बाद ही रिकॉर्ड करें। यह सुनिश्चित करता है कि वाइंडिंग कैपेसिटेंस पूरी तरह से चार्ज हो गया है और केवल लीकेज और अवशोषण धारा ही प्रवाहित हो रही है।



18. पृथ्वी प्रतिरोध माप?

Ans.    

पृथ्वी प्रतिरोध माप (Earth Resistance Measurement) किसी भी विद्युत स्थापना की सुरक्षा और दक्षता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह मापता है कि दोष (Fault) की स्थिति में विद्युत धारा कितनी आसानी से पृथ्वी में प्रवाहित होकर समाप्त हो सकती है। पृथ्वी प्रतिरोध जितना कम होगा, सिस्टम उतना ही सुरक्षित होगा।

​पृथ्वी प्रतिरोध मापने के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधि "फॉल-ऑफ-पोटेंशियल विधि" (Fall-of-Potential Method) है, जिसे आमतौर पर तीन-बिंदु विधि (Three-Point Method) कहा जाता है।

1. आवश्यक उपकरण (Required Instruments)

​पृथ्वी प्रतिरोध मापने के लिए एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है जिसे अर्थ टेस्टर या भू-प्रतिरोध परीक्षक (Earth Resistance Tester) कहते हैं।

  • ​यह उपकरण {DC} के बजाय {AC} वोल्टेज का उपयोग करता है। {AC} का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि {DC} का उपयोग करने पर मिट्टी में उत्पन्न इलेक्ट्रोलाइटिक क्रिया के कारण गलत रीडिंग आ सकती है।

2. तीन-बिंदु विधि (फॉल-ऑफ-पोटेंशियल) (Three-Point Method)

​यह विधि सबसे आम और विश्वसनीय है। इसमें तीन इलेक्ट्रोड या टेस्ट स्पाइक्स का उपयोग होता है:


इलेक्ट्रोड

नाम

कार्य

E

अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode)

       यह वह इलेक्ट्रोड है जिसका प्रतिरोध मापना है।

C

करंट इलेक्ट्रोड (Current Electrode)

       {E} से दूर जमीन में ज्ञात धारा (I) इंजेक्ट करने के लिए।

P

पोटेंशियल इलेक्ट्रोड (Potential Electrode)

       {E} और {P} के बीच वोल्टेज ड्रॉप (V) को मापने के लिए।



मापन प्रक्रिया (Measurement Procedure)
सेटअप: तीनों इलेक्ट्रोड ({E}, {P}, और {C}) को जमीन में, एक सीधी रेखा (Straight Line) में और एक दूसरे से पर्याप्त दूरी पर स्थापित किया जाता है।

दूरी: इलेक्ट्रोड {P} को इलेक्ट्रोड {E} और {C} के बीच में रखा जाता है। सटीक रीडिंग के लिए, {P} को {E} से {E-C} दूरी के लगभग 62 % की दूरी पर रखना सबसे अच्छा माना जाता है (जिसे 62 % विधि भी कहते हैं)।

कनेक्शन: अर्थ टेस्टर को तीनों इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाता है।

परीक्षण: अर्थ टेस्टर द्वारा {E} और {C} के बीच एक ज्ञात {AC} धारा (I) प्रवाहित की जाती है।

माप: यह उपकरण तब {E} और {P} के बीच उत्पन्न वोल्टेज ड्रॉप (V) को मापता है।

गणना: उपकरण ओम के नियम का उपयोग करके पृथ्वी प्रतिरोध ({R}_E) की गणना करता है:

R_E = {V}/{I} { (ओहम्स, } Omega{ में)}

3. वेनर फोर-पॉइंट विधि (Wenner Four-Point Method)

​यह विधि मुख्य रूप से मिट्टी प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) को मापने के लिए उपयोग की जाती है, जो कि ग्राउंडिंग सिस्टम को डिज़ाइन करने के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है।

इस विधि में, चार स्पाइक्स को समान दूरी 'a' पर एक सीधी रेखा में स्थापित किया जाता है।

बाहरी स्पाइक्स ({C}_1 और {C}_2) का उपयोग {AC} धारा ({I}) इंजेक्ट करने के लिए, और आंतरिक स्पाइक्स ({P}_1 और {P}_2) का उपयोग वोल्टेज ड्रॉप ({V}) को मापने के लिए किया जाता है।

मिट्टी प्रतिरोधकता (rho) का सूत्र निम्न है:

rho = 2pi a R

जहाँ 

R = V/I और a इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी है।



19. पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक?

Ans.   

पृथ्वी प्रतिरोध (अर्थ रेजिस्टेंस) को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:

पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक

​पृथ्वी का प्रतिरोध (Earth Resistance) वह प्रतिरोध है जो अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे अर्थिंग रॉड या प्लेट) द्वारा विद्युत धारा के जमीन में प्रवाह को प्रदान किया जाता है। इसका मान मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) पर निर्भर करता है, जिसे कई कारक प्रभावित करते हैं:

​1. मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity)

​यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। मिट्टी की प्रतिरोधकता मिट्टी की प्रकृति और उसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा पर निर्भर करती है। अलग-अलग प्रकार की मिट्टी (जैसे रेतीली, चिकनी, नम) की प्रतिरोधकता अलग-अलग होती है।

​2. मिट्टी में नमी की मात्रा (Moisture Content) 

  • ​मिट्टी में नमी की मात्रा का प्रतिरोधकता पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।
  • ​अधिक नमी होने पर मिट्टी की चालकता (Conductivity) बढ़ जाती है, जिससे पृथ्वी प्रतिरोध कम हो जाता है।
  • ​सूखी मिट्टी में प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
  • ​लगभग 15% नमी पर प्रतिरोध न्यूनतम होता है, जिसके बाद नमी बढ़ने पर प्रतिरोध में और कमी कम हो जाती है।

​3. मिट्टी का तापमान (Soil Temperature) 

  • ​तापमान में परिवर्तन से मिट्टी की प्रतिरोधकता बदलती है।
  • ​तापमान बढ़ने से (एक सीमा तक) प्रतिरोधकता घटती है।
  • ​बहुत कम तापमान (जमने बिंदु से नीचे) पर पानी के जमने के कारण प्रतिरोधकता तेजी से बढ़ती है।

​4. घुलनशील लवण और रासायनिक संरचना (Dissolved Salts and Chemical Composition) 

  • ​मिट्टी में घुले हुए लवण (जैसे नमक) इलेक्ट्रोलाइट्स के रूप में कार्य करते हैं, जिससे मिट्टी की चालकता बढ़ती है और प्रतिरोधकता कम होती है।
  • ​अर्थिंग पिट (Earth Pit) में कोयले (Coal Dust) और चारकोल (Charcoal) जैसे पदार्थ डालने का उद्देश्य भी आसपास की मिट्टी की चालकता बढ़ाना होता है।

​5. इलेक्ट्रोड की गहराई (Depth of the Electrode) 

  • ​इलेक्ट्रोड को जितना गहरा दबाया जाता है, उतना ही अधिक संभावना है कि यह स्थायी नमी वाली परतों तक पहुँचेगा।
  • ​अधिक गहराई आमतौर पर पृथ्वी प्रतिरोध को कम करती है क्योंकि गहरी मिट्टी में नमी का स्तर अधिक स्थिर होता है।

​6. इलेक्ट्रोड का आकार और सामग्री (Electrode Size and Material)

  • इलेक्ट्रोड की लंबाई और त्रिज्या/व्यास: इलेक्ट्रोड की लंबाई बढ़ाने या त्रिज्या/व्यास बढ़ाने से आसपास की मिट्टी से संपर्क क्षेत्र बढ़ता है, जिससे प्रतिरोध कम होता है।
  • इलेक्ट्रोड की सामग्री: तांबा या जस्ती लोहा जैसे कम प्रतिरोधकता वाले सामग्री का उपयोग किया जाता है।


20. पृथ्वी परीक्षक के प्रकार?

Ans.    

पृथ्वी परीक्षक (अर्थ टेस्टर) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग ग्राउंडिंग सिस्टम के पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) को मापने के लिए किया जाता है।

​पृथ्वी प्रतिरोध परीक्षक (Earth Resistance Testers) को मुख्य रूप से उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली मापन विधि या उनके टर्मिनलों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

पृथ्वी परीक्षक के मुख्य प्रकार (मापन विधि के आधार पर)

परीक्षक का प्रकार

मापन विधि

कब उपयोग किया जाता है

1. 3-पोल विधि (फॉल-ऑफ़-पोटेंशियल)

इसमें मापे जाने वाले इलेक्ट्रोड (E) और दो सहायक इलेक्ट्रोड (P और C) का उपयोग होता है। यह सबसे मानक और विश्वसनीय विधि है।

अधिकांश सामान्य अर्थिंग इंस्टॉलेशन के प्रतिरोध को सटीकता से मापने के लिए।

2. 4-पोल विधि (वेनर विधि)

इसमें चार इलेक्ट्रोड होते हैं, जो मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) को मापने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

नए अर्थिंग सिस्टम को डिज़ाइन करने या मिट्टी की विद्युत विशेषताओं का मूल्यांकन करने के लिए।

3. क्लैम्प-ऑन अर्थ टेस्टर (स्टेकलेस विधि)

यह जमीन में सहायक इलेक्ट्रोड (स्टेक) लगाए बिना, केवल क्लैम्प का उपयोग करके अर्थ कंडक्टर के चारों ओर से प्रतिरोध को मापता है।

उन मल्टी-ग्राउंडेड सिस्टम (समानांतर ग्राउंडिंग) में त्वरित माप के लिए जहाँ स्टेक लगाना कठिन हो, या जहाँ सिस्टम को डिस्कनेक्ट नहीं किया जा सकता हो।

4. 2-पोल विधि (डेड अर्थ/सरल विधि)

इसमें केवल दो टर्मिनलों का उपयोग होता है: मापा जाने वाला इलेक्ट्रोड और एक ज्ञात, विश्वसनीय संदर्भ ग्राउंडिंग पॉइंट।

एक त्वरित जांच के लिए जब एक ज्ञात, अच्छा ग्राउंडिंग पॉइंट उपलब्ध हो, लेकिन यह कम सटीक होता है।

5. सिलेक्टिव (चयनात्मक) विधि

यह 3-पोल विधि के समान है, लेकिन इसमें एक क्लैम्प का भी उपयोग किया जाता है ताकि ग्राउंडिंग सिस्टम को बिना डिस्कनेक्ट किए इलेक्ट्रोड का प्रतिरोध मापा जा सके।

चालू ग्राउंडिंग सिस्टम में किसी विशिष्ट इलेक्ट्रोड का प्रतिरोध मापने के लिए।




21.    मेगर परीक्षण के अनुप्रयोग?

Ans.     

मेगर परीक्षण के मुख्य अनुप्रयोग (applications) विद्युत प्रणालियों और उपकरणों के विद्युत रोधन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने से संबंधित हैं।

संक्षेप में, 

मेगर परीक्षण का उपयोग यह जाँचने के लिए किया जाता है कि किसी विद्युत उपकरण का रोधन (इंसुलेशन) कितना अच्छा है, ताकि करंट का रिसाव (leakage) न हो और शॉर्ट सर्किट या नुकसान से बचा जा सके।

​मेगर परीक्षण के मुख्य अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:

  1. केबलों का रोधन परीक्षण (Insulation Testing of Cables):
    • ​केबल के कंडक्टरों के बीच और कंडक्टरों व जमीन के बीच रोधन प्रतिरोध को मापना।
    • ​केबल के रोधन में दोषों या नमी की उपस्थिति का पता लगाना।
  2. मोटर वाइंडिंग का रोधन परीक्षण (Insulation Testing of Motor Windings):
    • ​मोटर की वाइंडिंग (coil) का रोधन प्रतिरोध मापना।
    • ​वाइंडिंग और मोटर की बॉडी (ground) के बीच रोधन की स्थिति की जाँच करना।
  3. ट्रांसफार्मर का रोधन परीक्षण (Insulation Testing of Transformers):
    • ​ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग के बीच और वाइंडिंग व जमीन (कोर) के बीच रोधन प्रतिरोध का आकलन करना।
  4. जनरेटर का रोधन परीक्षण (Insulation Testing of Generators):
    • ​जनरेटर की वाइंडिंग के रोधन प्रतिरोध को मापना।
  5. अन्य विद्युत उपकरणों का रोधन परीक्षण (Insulation Testing of other Electrical Equipment):
    • ​स्विचगियर, नियंत्रण पैनल और अन्य विद्युत स्थापनाओं के रोधन की जाँच करना।
  6. रिसाव धारा (Leakage Current) का पता लगाना:
    • ​यह उपकरण में रिसाव धारा की मात्रा और नमी के स्तर को इंगित करता है, जिससे संभावित विफलताओं को रोका जा सकता है।
  7. निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance):
    • ​नियमित अंतराल पर मेगर परीक्षण करके रोधन के धीरे-धीरे बिगड़ने का पता लगाना, जिससे बड़ी खराबी आने से पहले मरम्मत या बदलने का काम किया जा सके।

​मेगर का उपयोग उच्च प्रतिरोध (जैसे मेगाओम) को मापने के लिए किया जाता है, इसलिए इसे इंसुलेशन टेस्टर (रोधन परीक्षक) के नाम से भी जाना जाता है।




22.  मेगर का उपयोग किस लिए किया जाता है?

Ans.    

मेगर (Megger), जिसे इंसुलेशन टेस्टर (रोधन परीक्षक) या मेगओम मीटर भी कहा जाता है, एक विशेष विद्युत मापने वाला उपकरण है जिसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च विद्युत रोधन प्रतिरोध (High Electrical Insulation Resistance) को मापने के लिए किया जाता है।

यह उपकरण उच्च DC वोल्टेज (जैसे 500V, 1000V, 2500V) को लागू करके यह जाँचता है कि:

  • विद्युत रिसाव (Electrical Leakage): किसी विद्युत प्रणाली में, जैसे तारों, केबलों, या वाइंडिंग में, करंट का कितना रिसाव हो रहा है।
  • रोधन की गुणवत्ता (Insulation Quality): केबल, मोटर वाइंडिंग, ट्रांसफार्मर वाइंडिंग और अन्य विद्युत उपकरणों के रोधन की स्थिति कैसी है। रोधन प्रतिरोध का उच्च मान रोधन की अच्छी गुणवत्ता को दर्शाता है, जबकि कम मान रोधन में दोष (जैसे नमी या क्षति) का संकेत देता है, जिससे शॉर्ट सर्किट या उपकरण खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • दोष का पता लगाना (Fault Detection): विद्युत प्रतिष्ठानों में रोधन दोषों या खराबी को ढूँढना।

संक्षेप में, 

मेगर का उपयोग विद्युत सुरक्षा और उपकरणों के जीवनकाल को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।



23. इन्सुलेशन प्रतिरोध की इकाई क्या है?

Ans.     

इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) की मुख्य इकाई मेगाओम ({M} Omega) है।

​इन्सुलेशन प्रतिरोध बहुत अधिक मान का प्रतिरोध होता है, इसलिए इसे ओम (Omega) की बड़ी इकाई मेगाओम ({M} Omega) में व्यक्त किया जाता है।

  • मेगाओम ({M} Omega) = 1,000,000 ओम (Omega)

​इसे मापने के लिए मेगर (Megger) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है।



24. मेगर किस सिद्धांत पर काम करता है?

Ans.     

मेगर (Megger) मुख्य रूप से उच्च प्रतिरोध को मापने वाले एक उपकरण (सीरीज़ टाइप ओममीटर) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें एक DC जनरेटर या उच्च वोल्टेज स्रोत शामिल होता है।

​इसके कार्य करने के पीछे दो मुख्य सिद्धांत हैं:

  1. विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction):
    • ​हाथ से चलाए जाने वाले (Hand-operated) मेगर में, परीक्षण (Test) के लिए आवश्यक उच्च DC वोल्टेज एक स्थायी चुंबक DC जनरेटर द्वारा उत्पन्न किया जाता है, जो विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  2. चल कुण्डल मीटर (Moving Coil Meter) और बलाघूर्ण का संतुलन (Torque Balance):
    • ​मेगर का मीटर भाग चल कुण्डल (Moving Coil) उपकरण पर आधारित होता है। इसमें दो कुण्डलियाँ होती हैं:
      • दबाव कुण्डल (Pressure Coil) या नियंत्रण कुण्डल (Control Coil): यह सीधे DC वोल्टेज स्रोत से जुड़ी होती है और सूचक को अनंत (infty) की ओर ले जाने का प्रयास करती है।
      • धारा कुण्डल (Current Coil) या विक्षेपण कुण्डल (Deflecting Coil): यह उस प्रतिरोध (इंसुलेशन) के माध्यम से प्रवाहित होने वाली लीकेज करंट से जुड़ी होती है जिसे मापा जा रहा है। यह सूचक को शून्य (0) की ओर ले जाने का प्रयास करती है।
    • ​सूचक की स्थिति (यानी मापा गया प्रतिरोध मान) इन दोनों कुण्डलियों द्वारा उत्पन्न विपरीत बलाघूर्णों के संतुलन पर निर्भर करती है।
    • ओम का नियम ({R} = {{V}}/{{I}}) लागू होता है, जहाँ {V} (वोल्टेज) स्थिर रखा जाता है। लीकेज करंट ({I}) जितना कम होगा (यानी प्रतिरोध ({R}) जितना अधिक होगा), सूचक उतना ही {M} Omega (मेगाओम) की ओर विक्षेपित होगा।



25. मेगर में L, E, और G टर्मिनल क्या हैं?

Ans.    

मेगर (Megger) में मुख्य रूप से तीन टर्मिनल होते हैं, जिनका उपयोग इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है:

  1. L (Line)
    • अर्थ: यह लाइन या फेज टर्मिनल है।
    • उपयोग: यह प्रोब परीक्षण किए जाने वाले कंडक्टर (जैसे, केबल का कोर या मोटर वाइंडिंग का टर्मिनल) से जोड़ा जाता है।
  2. E (Earth)
    • अर्थ: यह पृथ्वी या ग्राउंड टर्मिनल है।
    • उपयोग: यह प्रोब उपकरण की बॉडी या ग्राउंड से जोड़ा जाता है, जिसके सापेक्ष इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापा जाना है (जैसे, मोटर फ्रेम)।
    • ​इन्सुलेशन प्रतिरोध का मापन मुख्य रूप से L और E टर्मिनलों के बीच किया जाता है।
  3. G (Guard)
    • अर्थ: यह गार्ड या सुरक्षा टर्मिनल है।
    • उपयोग: इसका उपयोग सतह रिसाव धारा (Surface Leakage Current) को बायपास करने या बाहर निकालने के लिए किया जाता है।
    • ​कुछ मामलों में, विशेष रूप से जब उच्च आर्द्रता या गंदगी के कारण सतह पर रिसाव होने की संभावना होती है, तो यह टर्मिनल लीकेज करंट को मेजरिंग सर्किट से हटा देता है, जिससे वास्तविक इन्सुलेशन प्रतिरोध का अधिक सटीक माप प्राप्त होता है।
    • ​इसे उस हिस्से से जोड़ा जाता है जहाँ लीकेज करंट प्रवाहित हो सकता है, लेकिन जिसका प्रतिरोध मापना आवश्यक नहीं है।



26. 440v प्रणाली के लिए विशिष्ट परीक्षण वोल्टेज?

Ans.    

440V प्रणाली (सिस्टम) के लिए विशिष्ट मेगर परीक्षण वोल्टेज 500V DC होता है।

​विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय मानकों के अनुसार, 500V तक की वोल्टेज रेटिंग वाले उपकरणों या केबलों के इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) को मापने के लिए 500V DC मेगर का उपयोग किया जाता है।

सामान्य नियम (General Rule)

​मेगर परीक्षण में उपयोग किया जाने वाला {DC} परीक्षण वोल्टेज, उपकरण या प्रणाली के रेटेड {AC} वोल्टेज से अधिक होना चाहिए, ताकि इन्सुलेशन की मज़बूती का सही आकलन किया जा सके।

उपकरण का {AC} रेटेड वोल्टेज (V)

अनुशंसित {DC} परीक्षण वोल्टेज (V)

                             0 {V} से 50 {V}

           250 {V}

                  50 {V} से 500 {V} (जैसे {440 {V}})

           500 {V}

       500 {V} से 1000 {V} (जैसे 650 {V}/ 1.1 {kV} केबल)

           1000 {V}


न्यूनतम अपेक्षित {IR} मान

​मेगर परीक्षण करने के बाद, 440 {V} प्रणाली के लिए इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) का मान आमतौर पर कम से कम 1 { Megaohm (M} Omega) या उससे अधिक होना चाहिए।



27.  एक अच्छा इन्सुलेशन प्रतिरोध मान क्या है?

Ans.     

एक अच्छा इन्सुलेशन प्रतिरोध मान वह है जो सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित न्यूनतम स्वीकार्य सीमा से काफी अधिक हो।

​इन्सुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance - IR) का मान मेगाओम ({M} Omega) में मापा जाता है।

​एक सामान्य अंगूठे का नियम (Rule of Thumb) यह है कि आपका {IR} मान जितना अधिक होगा, इन्सुलेशन की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होगी।

न्यूनतम स्वीकार्य मान (Minimum Acceptable Value)

​विभिन्न मानकों और थंब रूल के अनुसार, न्यूनतम इन्सुलेशन प्रतिरोध मान उपकरण के रेटेड वोल्टेज पर निर्भर करता है:

उपकरण का रेटेड {AC} वोल्टेज

न्यूनतम {IR} मान ({M Omega} में)

सामान्य परीक्षण वोल्टेज ({DC} में)

500 { V} (कम वोल्टेज)

1 { M} Omega

500 { V}

> 500 \text{ V} से 1000 { V}

1 { M} Omega

1000 { V}

मोटर/घूर्णन मशीन (Motors/Rotating Machines)

{IR} = ({kV} + 1) { M} Omega या 5 { M} Omega

500 { V} या 1000 { V}


उदाहरण के लिए:

  • ​{440 { V}} की मोटर के लिए: {kV} = 0.44 { kV}
    • ​न्यूनतम {IR} = (0.44 + 1) { M} Omega = **1.44 { M} Omega**

इष्टतम इन्सुलेशन रेटिंग (Optimal Insulation Rating)

  • बहुत अच्छा (Excellent): 50 { M} Omega से अधिक ({G} Omega की रेंज में)
  • अच्छा (Good): 10 { M} Omega से 50 { M} Omega के बीच
  • सामान्य (Normal): 5 { M} Omega से 10 { M} Omega के बीच
  • खराब/संदिग्ध (Poor/Questionable): 1 { M} Omega से 5 { M} Omega के बीच
  • बहुत खराब/खतरनाक (Very Poor/Dangerous): 1 { M} Omega से कम (यह तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।)

निष्कर्ष:

​एक अच्छा इन्सुलेशन प्रतिरोध मान वह है जो उपकरण के रेटेड वोल्टेज पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः यह न्यूनतम 1 { M} Omega से काफी अधिक होना चाहिए और 10 { M} Omega या उससे अधिक होने पर इसे उत्कृष्ट माना जाता है।



28.  पृथ्वी प्रतिरोध क्या है?

Ans.    

पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance), जिसे भू-प्रतिरोध या अर्थिंग प्रतिरोध भी कहा जाता है, ग्राउंडिंग सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर है।

​पृथ्वी प्रतिरोध की परिभाषा यह है कि यह किसी दबे हुए अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे अर्थिंग रॉड या प्लेट) और सामान्य पृथ्वी (Common Earth) के बीच मौजूद विद्युत प्रतिरोध है। यह वह रुकावट है जो पृथ्वी विद्युत धारा के प्रवाह में डालती है।

इसका महत्व

​सुरक्षा की दृष्टि से पृथ्वी प्रतिरोध का मान बहुत कम होना चाहिए।

  1. जीवन सुरक्षा: जब उपकरण के धातु के शरीर में कोई दोष या लीकेज करंट (Leakage Current) आता है, तो अर्थिंग सिस्टम उसे {Ground} में सुरक्षित रूप से प्रवाहित करने का मार्ग प्रदान करता है। यदि प्रतिरोध कम होगा (जैसे {1 Omega} से {5 Omega}), तो लीकेज करंट बिना किसी रुकावट के जमीन में चला जाएगा, जिससे उपकरण के शरीर पर वोल्टेज खतरनाक स्तर तक नहीं बढ़ेगा और व्यक्ति को बिजली का झटका लगने से बचाया जा सकेगा।
  2. उपकरण सुरक्षा: यह उच्च वोल्टेज और सर्ज (Surge) से संवेदनशील उपकरणों की सुरक्षा करता है।
  3. वोल्टेज संतुलन: यह प्रणाली में वोल्टेज को संतुलित रखने में मदद करता है।

पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक

​पृथ्वी प्रतिरोध का मान मुख्य रूप से मिट्टी की प्रकृति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है:

  • मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity): यह सबसे बड़ा कारक है।
  • नमी (Moisture): मिट्टी में नमी का स्तर। सूखी मिट्टी में प्रतिरोध अधिक होता है।
  • तापमान (Temperature): तापमान में कमी से प्रतिरोध बढ़ जाता है।
  • अर्थ इलेक्ट्रोड का आकार: इलेक्ट्रोड का सतह क्षेत्र और गहराई।

न्यूनतम अपेक्षित मान

​विभिन्न मानकों के अनुसार अधिकतम अनुमेय {Earth Resistance} मान:

प्रणाली

                अधिकतम {Earth Resistance}

      बड़े सबस्टेशन/विद्युत केंद्र

                     1 { Ohm} (Omega) तक

      छोटे सबस्टेशन

                     2 { Ohm} (Omega) तक

      बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक भवन

                     5 { Ohm} (Omega) तक

      सामान्य घरेलू वायरिंग

                     5 { Ohm} (Omega) से कम


29. सबस्टेशन के लिए पृथ्वी प्रतिरोध का आदर्श मूल्य?

Ans.    

सबस्टेशन (Substation) के लिए पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) का आदर्श मूल्य जितना संभव हो शून्य (\mathbf{0 \Omega}) के करीब होना चाहिए। हालाँकि, व्यवहार में यह संभव नहीं है।

सबस्टेशन में,

सुरक्षा और उपकरण की सुरक्षा के लिए अत्यंत कम प्रतिरोध की आवश्यकता होती है, क्योंकि फॉल्ट करंट (Fault Current) का मान बहुत अधिक होता है।

​विभिन्न मानकों (जैसे {IEEE}, {IS}) और सबस्टेशन के प्रकार के आधार पर अधिकतम अनुमेय ({Maximum Permissible}) मान निर्धारित किए गए हैं:

सबस्टेशन के लिए अधिकतम अनुमेय पृथ्वी प्रतिरोध मान

सबस्टेशन का प्रकार

अधिकतम अनुमेय {Earth Resistance} ({Omega} में)

         बड़े पावर स्टेशन (Generating Station)

                  {0.5 Omega}

         ईएचटी (EHT) या मुख्य सबस्टेशन (Major.       Substation)

                  {1.0 Omega}

         33 { kV} सबस्टेशन

                  {2.0 Omega}

         छोटे वितरण सबस्टेशन ({DTR})

                  { 5.0 Omega}



निष्कर्ष:

​एक सबस्टेशन के लिए, 1.0 Omega या उससे कम के मान को आदर्श माना जाता है, खासकर उच्च वोल्टेज ({EHT}) और बड़े सबस्टेशनों के लिए। 0.5 Omega का मान सबसे उत्तम माना जाता है।

यह मूल्य क्यों महत्वपूर्ण है?

एक बहुत कम पृथ्वी प्रतिरोध मान यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी गंभीर दोष की स्थिति में, फॉल्ट करंट (Fault Current) तेजी से और सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित हो जाए, जिससे सबस्टेशन के भीतर कदम वोल्टेज (Step Potential) और स्पर्श वोल्टेज (Touch Potential) कम हो जाए और कर्मियों की सुरक्षा बनी रहे।




30. अर्थ टेस्टर में कितने स्पाइकर का उपयोग किया जाता है?

Ans.    

अर्थ टेस्टर का उपयोग करते समय पृथ्वी प्रतिरोध (Earth Resistance) मापने के लिए, मुख्य रूप से दो (2) अतिरिक्त स्पाइक (या इलेक्ट्रोड) का उपयोग किया जाता है।

यह विधि, 

जिसे तीन-टर्मिनल विधि (Three-Terminal Method) या पतन-क्षमता विधि ({Fall-of-Potential Method}) कहा जाता है, अर्थिंग सिस्टम का प्रतिरोध मापने की सबसे सामान्य विधि है।

विधि में आवश्यक इलेक्ट्रोड

​कुल मिलाकर, प्रतिरोध मापने के लिए तीन कनेक्शन बिंदु आवश्यक होते हैं, जिनमें से दो अस्थायी स्पाइक होते हैं:

  1. परीक्षण के तहत अर्थ इलेक्ट्रोड ({E}): यह वह मुख्य अर्थिंग रॉड या प्लेट है जिसका प्रतिरोध मापा जा रहा है।
  2. पोटेंशियल स्पाइक ({P}): यह वोल्टेज मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
  3. करंट स्पाइक ({C}): यह करंट इंजेक्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।


इलेक्ट्रोड का नाम

कार्य

            संख्या

मुख्य इलेक्ट्रोड

                       जिसका प्रतिरोध मापना है

              1

सहायक स्पाइक (P)

                      पोटेंशियल (विभव) मापने के लिए

              1

सहायक स्पाइक (C)

                      करंट प्रवाहित करने के लिए

              1

कुल स्पाइक (अतिरिक्त)

{P} और {C}

              2


अन्य विधियाँ

​कुछ अन्य माप विधियाँ भी हैं:

  • दो-टर्मिनल विधि ({Two-Point Method}): इसमें किसी अतिरिक्त स्पाइक की आवश्यकता नहीं होती है। यह विधि आमतौर पर उन स्थितियों में उपयोग की जाती है जहाँ दूसरा कनेक्शन एक ज्ञात, प्रभावी ग्राउंड (जैसे पानी की पाइपलाइन) से लिया जा सकता है। यह कम सटीक होती है।
  • चार-टर्मिनल विधि ({Four-Point Method}): यह विधि मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता ({Soil/Resistivity}) को मापने के लिए उपयोग की जाती है, न कि इलेक्ट्रोड के प्रतिरोध को। इस विधि में, चार समान दूरी वाले स्पाइक का उपयोग किया जाता है।



31. पृथ्वी प्रतिरोध को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

Ans.   

पृथ्वी प्रतिरोध (अर्थ रेजिस्टेंस) को मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिरोधकता ({Soil Resistivity}) प्रभावित करती है, जो आगे कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है।

​पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:

​1. मिट्टी की प्रतिरोधकता ({Soil/Resistivity})

​यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। मिट्टी की प्रतिरोधकता जितनी अधिक होगी, पृथ्वी प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा। यह निम्नलिखित पर निर्भर करती है:

  • मिट्टी में नमी की मात्रा ({Moisture/Content}): 
  • यह सबसे बड़ा कारक है।
    • ​मिट्टी में नमी की मात्रा बढ़ने पर प्रतिरोधकता कम होती है।
    • ​सूखी मिट्टी, रेतीली मिट्टी या बजरी की प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है। नम, चिकनी मिट्टी ({Clay}) बेहतर चालक होती है।
  • मिट्टी का तापमान ({Temperature}):
    • ​तापमान घटने (विशेष रूप से पानी के जमने, {0^circ C} से नीचे) पर प्रतिरोधकता तेजी से बढ़ती है।
    • ​उच्च तापमान (गर्मियों में) में प्रतिरोधकता कम हो जाती है, लेकिन यह प्रभाव नमी जितना महत्वपूर्ण नहीं होता।
  • मिट्टी की रासायनिक संरचना ({Chemical/Composition})/लवण ({Salts}):
    • ​मिट्टी में नमक ({NaCl}) और अन्य रासायनिक घटकों (जैसे कोयला, चारकोल) की सांद्रता जितनी अधिक होगी, प्रतिरोधकता उतनी ही कम होगी (क्योंकि वे बेहतर चालकता प्रदान करते हैं)।

​2. अर्थ इलेक्ट्रोड के आयाम ({Earth/Electrode/Dimensions})

  • इलेक्ट्रोड की गहराई ({Depth}):
    • ​इलेक्ट्रोड को जितना गहरा गाड़ा जाता है, प्रतिरोध उतना ही कम होता है, क्योंकि गहराई पर नमी का स्तर अधिक स्थिर और मिट्टी की प्रतिरोधकता कम होती है।
  • इलेक्ट्रोड का आकार/सतह क्षेत्र ({Size/Surface/Area}):
    • ​इलेक्ट्रोड का सतह क्षेत्र बढ़ने पर प्रतिरोध कम होता है। यही कारण है कि पाइप या प्लेट का उपयोग किया जाता है।
    • ​इलेक्ट्रोड की लंबाई {(L)} बढ़ने पर प्रतिरोध कम होता है।

​3. इलेक्ट्रोड और मिट्टी के बीच संपर्क प्रतिरोध ({Contact/Resistance})

  • ​इलेक्ट्रोड की सतह और आसपास की मिट्टी के बीच का संपर्क प्रतिरोध भी कुल पृथ्वी प्रतिरोध को प्रभावित करता है।
  • ​यह आमतौर पर कोयला धूल ({Coal/Dust}), नमक या अन्य रासायनिक यौगिकों ({Chemical Compounds}) का उपयोग करके कम किया जाता है, जो इलेक्ट्रोड के चारों ओर अच्छी चालकता सुनिश्चित करते हैं।
  • ​अर्थिंग इलेक्ट्रोड के बीच की दूरी भी महत्वपूर्ण है; समानांतर में लगे इलेक्ट्रोड के बीच उचित दूरी होने पर कुल प्रतिरोध कम होता है।



32. मेगर के लिए सारांश नोट्स?

Ans.     

निश्चित रूप से, यहाँ मेगर (Megger) के लिए सारांश नोट्स दिए गए हैं।

​मेगर एक महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग उच्च {DC} वोल्टेज लगाकर विद्युत उपकरणों और केबल के इन्सुलेशन प्रतिरोध ({Insulation Resistance}) को मापने के लिए किया जाता है। इसे अक्सर इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षक ({Insulation Resistance Tester}) भी कहा जाता है।

मेगर के सारांश नोट्स (Summary Notes for Megger)

​1. मेगर का उद्देश्य और सिद्धांत

विशेषता

विवरण

मुख्य उद्देश्य

          किसी विद्युत उपकरण (जैसे मोटर, ट्रांसफॉर्मर, केबल) के इन्सुलेशन प्रतिरोध (IR) का मापन करना।

माप की इकाई

          मेगाओम ({M Omega}), जो इन्सुलेशन की उच्च प्रतिरोधकता को दर्शाती है।

कार्य सिद्धांत

          मेगर उच्च {DC} वोल्टेज (जैसे 500{V}, 1000{V}, 5000{V}) को इन्सुलेशन पर लागू करता है  और इसके माध्यम से प्रवाहित होने वाली लीकेज धारा ({Leakage Current}) को मापकर ओम के नियम ({R=V/I}) के अनुसार प्रतिरोध की गणना करता है।

अच्छा इन्सुलेशन

          एक अच्छा इन्सुलेशन उच्च प्रतिरोध (आमतौर पर {1 M Omega} से अधिक) दिखाता है।



2. मेगर के मुख्य भाग

​मेगर दो मुख्य प्रकार के होते हैं: हैंड-ऑपरेटेड (Hand-Operated) और इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल ({Digital})


भाग

कार्य

हैंडल या बैटरी

परीक्षण के लिए आवश्यक उच्च {DC} वोल्टेज उत्पन्न करना।

प्रेशर कॉइल ({Pressure \ Coil}) - \mathbf{P}

वोल्टेज के आनुपातिक होता है और इसे सर्किट के आर-पार जोड़ा जाता है।

करंट कॉइल ({Current \ Coil}) - \mathbf{C}

लीकेज धारा के आनुपातिक होता है और इसे सर्किट के साथ सीरीज में जोड़ा जाता है।

पैमाना और सूचक ({Scale & Pointer})

माप को {Ohms} या {M Omega} में प्रदर्शित करता है।

टर्मिनल

लाइन ({L}) / अर्थ ({E}) / गार्ड ({G}) टर्मिनल होते हैं। गार्ड टर्मिनल बाहरी सतह रिसाव धारा को बाईपास करके सटीक माप सुनिश्चित करता है।


3. परीक्षण विधियाँ और उनका उपयोग

​मेगर का उपयोग करके दो मुख्य परीक्षण किए जाते हैं:

​A. इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण ({IR \ Test})

​यह इन्सुलेशन की वर्तमान स्थिति का पता लगाता है।

  • परिणाम का महत्व: यदि मापा गया मान बहुत कम है, तो इन्सुलेशन खराब है और उपकरण विफल हो सकता है।

​B. ध्रुवीकरण सूचकांक परीक्षण ({Polarization \ Index \ (PI) \ Test})

​यह इन्सुलेशन की गुणवत्ता और नमी के अवशोषण की जाँच करता है।

  • सूत्र: \mathbf{PI = {10 \ मिनट \ पर \ IR \ रीडिंग}{1 \ मिनट \ पर \ IR \ रीडिंग}}
  • आदर्श मान: {PI} का मान आमतौर पर 2 से 5 के बीच होना चाहिए। {PI} का कम मान (जैसे 1.5 से कम) यह दर्शाता है कि इन्सुलेशन में नमी मौजूद है या यह गंभीर रूप से खराब हो चुका है।

​4. सुरक्षा सावधानियाँ

  • ​परीक्षण करने से पहले उपकरण को बिजली के स्रोत से पूरी तरह डिस्कनेक्ट कर दें।
  • ​टेस्ट वोल्टेज लागू करने से पहले उपकरण को पूरी तरह से डिस्चार्ज कर दें।
  • ​मापने के बाद, मेगर केबलों को हटाने से पहले उपकरण को फिर से ग्राउंड ({Ground}) करके पूरी तरह से डिस्चार्ज कर दें, क्योंकि इन्सुलेशन में चार्ज जमा हो जाता है।

नोट: 

मेगर से प्राप्त रीडिंग तापमान और आर्द्रता पर बहुत अधिक निर्भर करती है। बेहतर परिणामों के लिए, इन्सुलेशन प्रतिरोध को हमेशा एक ही तापमान और आर्द्रता की स्थिति में मापा जाना चाहिए।






टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

घरेलू उपयोग के लिए पीएलसी (Programmable Logic Controller) का इस्तेमाल करना संभव है, हालांकि यह औद्योगिक उपयोग जितना आम नहीं है। आमतौर पर, घर के स्वचालन के लिए माइक्रोकंट्रोलर-आधारित सिस्टम या रेडीमेड स्मार्ट होम सोल्यूशंस (जैसे गूगल होम, अमेज़न एलेक्सा, स्मार्टथिंग्स) अधिक प्रचलित हैं।

एसी मोटर के मुख्य पुर्जे (Parts of AC Motor)

रिले के प्रकार ( Types of Relay )