इलेक्ट्रिकल साक्षात्कार प्रश्न और उत्तर( Electrical Interview Questions & Answers Type of Earthing )
1. अर्थिंग क्या है?
Ans.
अर्थिंग (Earthing), जिसे भूसम्पर्कन या ग्राउंडिंग भी कहते हैं, एक सुरक्षा प्रक्रिया है जिसका उपयोग विद्युत प्रणालियों और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
इसका अर्थ:
- किसी भी विद्युत उपकरण या मशीन (खासकर जिनकी बॉडी धातु की होती है) के धातु वाले हिस्से को एक कम प्रतिरोध वाले तार के माध्यम से पृथ्वी (जमीन) से जोड़ना अर्थिंग कहलाता है।
- इसके लिए जमीन में एक धातु की प्लेट या रॉड (अर्थ इलेक्ट्रोड) गाड़ दी जाती है, और उसे ही तार से जोड़ा जाता है।
अर्थिंग क्यों जरूरी है (मुख्य उद्देश्य):
- बिजली के झटकों से सुरक्षा: जब किसी उपकरण में कोई खराबी आती है (जैसे लाइव तार का बॉडी से छू जाना), तो उपकरण की धातु की बॉडी में करंट आ जाता है। अगर उपकरण की अर्थिंग की गई है, तो यह लीकेज करंट तुरंत उस अर्थ वायर के माध्यम से जमीन में चला जाता है। इससे उस उपकरण को छूने वाले व्यक्ति को बिजली का झटका नहीं लगता है।
- उपकरणों की सुरक्षा: यह अत्यधिक करंट को सर्किट में प्रवाहित होने से रोककर विद्युत उपकरणों और मशीनों को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।
- वोल्टेज को स्थिर रखना: यह बिजली आपूर्ति प्रणालियों में वोल्टेज को पृथ्वी के संबंध में नियंत्रित करने में मदद करता है।
2. अर्थिंग की परिभाषा?
Ans.
अर्थिंग (Earthing) को भूसम्पर्कन या ग्राउंडिंग भी कहा जाता है।
अर्थिंग की परिभाषा
अर्थिंग एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया है जिसके तहत किसी भी विद्युत उपकरण या प्रणाली के धात्विक (Metallic) हिस्सों को एक कम प्रतिरोध वाले चालक तार के माध्यम से पृथ्वी (जमीन) से जोड़ा जाता है।
सरल शब्दों में, यह लीकेज करंट या किसी भी अवांछित विद्युत आवेश को तुरंत और सुरक्षित रूप से जमीन में भेजने का एक रास्ता है ताकि लोगों और उपकरणों को बिजली के झटके या क्षति से बचाया जा सके।
अर्थिंग का मुख्य उद्देश्य: सुरक्षा
अर्थिंग का प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षा है।
- जब कोई फाल्ट होता है (जैसे लाइव वायर का उपकरण की बॉडी को छूना), तो लीकेज करंट उपकरण की धातु की बॉडी में प्रवाहित होने लगता है।
- अर्थिंग के कारण, यह करंट पृथ्वी में चला जाता है क्योंकि पृथ्वी का प्रतिरोध लगभग शून्य होता है (अर्थात यह करंट के लिए सबसे आसान रास्ता है)।
- यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण की बॉडी पर कोई खतरनाक वोल्टेज न रहे, जिससे उसे छूने वाले व्यक्ति को बिजली का झटका न लगे।
3. अर्थिंग का उद्देश्य?
Ans.
अर्थिंग (भूसम्पर्कन) का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्युतीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अर्थिंग के मुख्य उद्देश्य
अर्थिंग का मूल उद्देश्य विद्युत धारा के लिए पृथ्वी के माध्यम से प्रवाहित होने हेतु यथासंभव कम प्रतिरोध (Low Resistance) का मार्ग प्रदान करना है। इसके विशिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. मानव जीवन की सुरक्षा (Protection of Human Life)
- जब किसी विद्युत उपकरण (जैसे फ्रिज, कूलर, मोटर) की धातु की बॉडी में फॉल्ट (Fault) के कारण लीकेज करंट आता है, तो अर्थिंग इस करंट को तुरंत जमीन में भेज देता है।
- चूंकि करंट हमेशा कम प्रतिरोध वाले मार्ग से प्रवाहित होता है, यह लीकेज करंट मानव शरीर (जिसका प्रतिरोध अधिक होता है) के बजाय, कम प्रतिरोध वाले अर्थ वायर (Earth Wire) से होकर सुरक्षित रूप से जमीन में चला जाता है।
- इससे किसी व्यक्ति को उस उपकरण को छूने पर बिजली का झटका लगने से बचाया जा सकता है।
2. विद्युत उपकरणों की सुरक्षा (Protection of Electrical Equipment)
- फॉल्ट या आकाशीय बिजली (Lightning) के कारण होने वाले अचानक उच्च वोल्टेज को अर्थिंग सीधे जमीन में डिस्चार्ज कर देता है।
- यह वोल्टेज वृद्धि से उपकरणों को बचाता है, जिससे वे जलने या खराब होने से बच जाते हैं।
- यह अत्यधिक करंट को सर्किट के माध्यम से बहने से रोककर उपकरणों को क्षति से बचाता है।
3. वोल्टेज को स्थिर रखना (Stabilizing Voltage)
- अर्थिंग सिस्टम, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत प्रणालियों के तटस्थ (Neutral) बिंदु को जमीन से जोड़कर, पृथ्वी की प्रवाहकीय सतह के सापेक्ष वोल्टेज को स्थिर रखने में मदद करता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम का वोल्टेज एक संदर्भ शून्य क्षमता (Reference Zero Potential) पर बना रहे, जिससे विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बनी रहती है।
अर्थिंग का उपयोग मनुष्य और उपकरण दोनों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
4. अर्थिंग क्यों आवश्यक है?
Ans.
अर्थिंग (भूसम्पर्कन) विद्युत प्रणालियों का एक अतिआवश्यक सुरक्षा घटक है। यह निम्नलिखित प्रमुख कारणों से आवश्यक है:
अर्थिंग की आवश्यकता के प्रमुख कारण
1. बिजली के झटकों से मानव सुरक्षा
अर्थिंग का सबसे महत्वपूर्ण कारण मानव जीवन की रक्षा करना है।
- जब किसी उपकरण (जैसे हीटर, फ्रिज, कूलर) के अंदर की लाइव (फेज) तार किसी फॉल्ट या इन्सुलेशन की खराबी के कारण उसकी धातु की बाहरी बॉडी को छू जाती है, तो बॉडी पर उच्च वोल्टेज आ जाता है।
- यदि कोई व्यक्ति उस उपकरण को छूता है और अर्थिंग नहीं है, तो वह व्यक्ति करंट के प्रवाह का माध्यम बन जाता है (चूंकि करंट को पृथ्वी तक जाने का रास्ता मिल जाता है), जिससे उसे गंभीर या घातक झटका लग सकता है।
- अर्थिंग का सिद्धांत (सबसे कम प्रतिरोध का पथ): अर्थिंग एक बहुत कम प्रतिरोध (Low Resistance) वाला मार्ग प्रदान करता है। लीकेज करंट हमेशा कम प्रतिरोध वाले मार्ग से बहना पसंद करता है। इसलिए, फॉल्ट होने पर, लीकेज करंट मानव शरीर के उच्च प्रतिरोध वाले मार्ग के बजाय, तुरंत अर्थ वायर से होकर सुरक्षित रूप से जमीन में चला जाता है।
2. विद्युत उपकरणों की सुरक्षा
अर्थिंग,
विद्युत उपकरणों को अत्यधिक वोल्टेज और करंट से बचाती है:
- ओवरकरंट और वोल्टेज वृद्धि: फॉल्ट या आसमानी बिजली (Lightning) गिरने की स्थिति में, अर्थिंग इन उच्च वोल्टेज और अत्यधिक करंट को सीधे जमीन में भेजकर उपकरणों को जलने या खराब होने से बचाता है।
- सर्किट ब्रेकर सक्रियण: जब लीकेज करंट अर्थ वायर से होकर बहता है, तो यह इतना बढ़ जाता है कि फ्यूज या सर्किट ब्रेकर (MCB) को तुरंत सक्रिय कर देता है, जिससे विद्युत आपूर्ति कट जाती है और उपकरण सुरक्षित रहता है।
3. आग के जोखिम को रोकना
करंट लीकेज के कारण धातु की बॉडी का अत्यधिक गर्म होना आग लगने का खतरा पैदा कर सकता है। अर्थिंग इस लीकेज करंट को हटाकर आग के जोखिम को कम करती है।
4. वोल्टेज को स्थिर करना
अर्थिंग सिस्टम, बिजली आपूर्ति नेटवर्क के तटस्थ (Neutral) बिंदुओं को पृथ्वी से जोड़कर, लाइन-टू-ग्राउंड वोल्टेज को एक निश्चित शून्य संदर्भ क्षमता पर बनाए रखने में मदद करती है, जिससे विद्युत आपूर्ति की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
5. अर्थिंग का महत्व?
Ans.
अर्थिंग (Earthing) का महत्व किसी भी विद्युत प्रणाली (Electrical System) में अद्वितीय है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सुरक्षा, विश्वसनीयता और उपकरणों की दीर्घायु से जुड़ा हुआ है।
अर्थिंग का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है:
1. व्यक्तिगत सुरक्षा (Personal Safety)
- बिजली के झटके से बचाव: यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। फॉल्ट की स्थिति में, अर्थिंग लीकेज करंट को मानव शरीर के बजाय सीधे जमीन में भेजकर जानलेवा बिजली के झटकों को रोकता है।
- कम प्रतिरोध का मार्ग: अर्थिंग वायर करंट को बहने के लिए सबसे आसान (सबसे कम प्रतिरोध वाला) रास्ता प्रदान करता है।
2. उपकरणों की सुरक्षा (Equipment Protection)
- ओवरकरंट से बचाव: अर्थिंग अचानक वोल्टेज वृद्धि (जैसे आसमानी बिजली या लाइन फॉल्ट) के कारण होने वाले अत्यधिक करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित कर देता है, जिससे महंगे उपकरण (कंप्यूटर, मोटर, रेफ्रिजरेटर आदि) नष्ट होने से बच जाते हैं।
- एमसीबी/फ्यूज का त्वरित संचालन: जब बॉडी में फॉल्ट करंट आता है, तो अर्थिंग के माध्यम से यह करंट इतना बढ़ जाता है कि फ्यूज या सर्किट ब्रेकर (MCB) तुरंत ट्रिप हो जाता है, जिससे सर्किट में बिजली की आपूर्ति कट जाती है और उपकरण सुरक्षित हो जाता है।
3. आग से बचाव (Fire Prevention)
- लीकेज करंट यदि उपकरण की बॉडी पर बना रहे, तो वह अत्यधिक गर्मी उत्पन्न कर सकता है, जिससे आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है। अर्थिंग इस करंट को तुरंत हटाकर आग के जोखिम को समाप्त करता है।
4. वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability)
- विद्युत वितरण प्रणालियों में, अर्थिंग (ग्राउंडिंग) वोल्टेज को पृथ्वी के संदर्भ में एक शून्य क्षमता (Zero Potential) पर स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। यह सिस्टम की ओवरवोल्टेज और वोल्टेज उतार-चढ़ाव से रक्षा करता है, जिससे विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता बनी रहती है।
5. लाइटनिंग अरेस्टर का कार्य (Functioning of Lightning Arresters)
- ऊंची इमारतों और पावर स्टेशनों पर लगे लाइटनिंग अरेस्टर (तड़ित चालक) तभी प्रभावी ढंग से काम करते हैं जब वे एक उचित और कम प्रतिरोध वाले अर्थिंग सिस्टम से जुड़े हों। अर्थिंग बिजली गिरने पर उच्च आवेश को तुरंत और सुरक्षित रूप से जमीन में ले जाता है।
संक्षेप में,
अर्थिंग एक जीवन रक्षक प्रणाली है जो विद्युत दोषों की स्थिति में मनुष्य और संपत्ति दोनों को सुरक्षा प्रदान करती है। यही कारण है कि यह सभी विद्युत प्रतिष्ठानों के लिए एक अनिवार्य हिस्सा है।
6. अर्थिंग के मुख्य प्रकार क्या हैं?
Ans.
अर्थिंग (भूसम्पर्कन) के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रोड (Earth Electrode) के आकार और सामग्री के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले अर्थिंग के प्रकार निम्नलिखित हैं:
1. पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing)
- इलेक्ट्रोड: इस विधि में, एक जस्तीकृत लोहे (GI) या तांबे का पाइप (आमतौर पर 38 मिमी व्यास और 2-3 मीटर लंबा) को जमीन में सीधा (ऊर्ध्वाधर) गाड़ दिया जाता है।
- स्थापना: पाइप को गड्ढे में नमी बनाए रखने और प्रतिरोध कम करने के लिए उसके चारों ओर नमक (Salt) और कोयले (Charcoal) की परतें बिछाई जाती हैं।
- उपयोग: यह घरों, छोटे औद्योगिक क्षेत्रों और सामान्य अनुप्रयोगों में सबसे अधिक उपयोग होने वाली और सस्ती विधि है।
2. प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)
- इलेक्ट्रोड: इस विधि में एक तांबे (Copper) या जस्तीकृत लोहे (GI) की प्लेट (आमतौर पर 60 \text{ cm} \times 60 \text{ cm} आकार की) को जमीन में गहराई में ऊर्ध्वाधर रूप से गाड़ा जाता है।
- स्थापना: पाइप अर्थिंग की तरह, प्लेट को भी नमक और कोयले की परतों के बीच रखा जाता है।
- उपयोग: यह विधि आमतौर पर बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बिजली उप-स्टेशनों (Sub-stations) में उपयोग की जाती है, जहां बहुत कम अर्थ प्रतिरोध (Low Earth Resistance) की आवश्यकता होती है। इसे पाइप अर्थिंग से अधिक विश्वसनीय माना जाता है, लेकिन यह महंगी होती है।
3. रॉड अर्थिंग (Rod Earthing)
- इलेक्ट्रोड: इसमें जस्तीकृत लोहे की रॉड (छड़) या तांबे के तार से लिपटी हुई रॉड को जमीन में गाड़ दिया जाता है।
- उपयोग: यह विधि आमतौर पर रेतीली या चट्टानी मिट्टी (जहां गहरा गड्ढा खोदना मुश्किल हो) में, और ट्रांसमिशन लाइनों के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
4. स्ट्रिप और वायर अर्थिंग (Strip and Wire Earthing)
- इलेक्ट्रोड: इस विधि में, गोल या आयताकार स्ट्रिप कंडक्टर (तांबे या GI) को उथले खाई में क्षैतिज रूप से (Horizontal) जमीन में बिछाया जाता है।
- उपयोग: यह उन जगहों पर उपयोग की जाती है जहां गहरी खुदाई संभव नहीं है या जहां जमीन की नमी पूरे वर्ष एक समान बनी रहती है।
7. पाइप अर्थिंग क्या है?
Ans.
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) अर्थिंग (भूसम्पर्कन) की एक लोकप्रिय और आमतौर पर उपयोग की जाने वाली विधि है जिसमें एक धातु के पाइप को अर्थ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लीकेज करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए कम प्रतिरोध वाला मार्ग प्रदान करना है।
https://dkrajwar.blogspot.com/2025/10/electrical-interview-questions-answers_02040200677.html
पाइप अर्थिंग की संरचना और कार्य
पाइप अर्थिंग का निर्माण एक सरल और प्रभावी तरीके से किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:
1. अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode)
- एक जस्तीकृत लोहे (Galvanized Iron - GI) या तांबे का पाइप इस्तेमाल किया जाता है।
- GI पाइप का मानक व्यास आमतौर पर लगभग 38 मिमी (1.5 { इंच}) होता है और इसकी लंबाई 2 से 3 मीटर होती है।
- पाइप को पूरी लंबाई में छोटे-छोटे छेद (Holes) किए जाते हैं ताकि नमी और लीकेज करंट के लिए जमीन से बेहतर संपर्क बन सके।
- इस पाइप को जमीन में ऊर्ध्वाधर रूप से (Vertical) पर्याप्त गहराई तक गाड़ा जाता है, ताकि वह हमेशा नम मिट्टी के संपर्क में रहे।
2. गड्ढा और भराव सामग्री
- पाइप को स्थापित करने के लिए एक गड्ढा खोदा जाता है, जिसकी गहराई लगभग 4.75 मीटर तक हो सकती है (यह मिट्टी की प्रकृति पर निर्भर करता है)।
- पाइप के चारों ओर गड्ढे को नमक (Salt) और कोयले (Charcoal) की वैकल्पिक परतों (Layers) से भरा जाता है। यह मिश्रण मिट्टी की प्रतिरोधकता (Resistivity) को बहुत कम कर देता है, जिससे करंट आसानी से जमीन में चला जाता है।
3. जल व्यवस्था
- पाइप के ऊपरी सिरे पर एक कीप (Funnel) और एक पतला पाइप जोड़ा जाता है।
- इस कीप के माध्यम से समय-समय पर पानी डाला जाता है। पानी, नमक और कोयले के मिश्रण को सक्रिय रखता है और गड्ढे में नमी बनाए रखता है, जो कम अर्थ प्रतिरोध के लिए अत्यंत आवश्यक है।
4. अर्थ लीड (Earth Lead)
- एक अर्थ तार (GI या कॉपर) को नट-बोल्ट की सहायता से पाइप के ऊपरी सिरे पर मजबूती से जोड़ा जाता है। यह तार उपकरण की धातु की बॉडी से जुड़ा होता है और लीकेज करंट को पाइप तक पहुंचाता है।
उपयोग
पाइप अर्थिंग घरेलू (Domestic) और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (Small Commercial Establishments) के लिए सबसे अधिक प्रचलित और किफायती विधि है।
8. प्लेट अर्थिंग क्या है?
Ans.
प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing) अर्थिंग की एक विधि है जिसमें जमीन में गाड़े गए अर्थ इलेक्ट्रोड के रूप में एक धातु की प्लेट का उपयोग किया जाता है। यह विधि उच्च क्षमता वाले (High Capacity) विद्युत प्रतिष्ठानों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है, जहाँ लीकेज करंट को जमीन में प्रवाहित करने के लिए बहुत कम प्रतिरोध की आवश्यकता होती है।
प्लेट अर्थिंग की संरचना और विशेषताएँ
1. अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode)
प्लेट अर्थिंग में अर्थ इलेक्ट्रोड एक आयताकार या वर्गाकार प्लेट होती है:
- सामग्री: यह प्लेट या तो तांबे (Copper) या जस्तीकृत लोहे (Galvanized Iron - GI) की बनी होती है।
-
आकार: प्लेट का मानक आकार आमतौर पर लगभग 60 { cm} × 60 { cm} होता है।
- {GI} प्लेट की मोटाई कम से कम {6.35 { mm}} होनी चाहिए।
- {Copper} प्लेट की मोटाई कम से कम {3.18 { mm}} होनी चाहिए।
2. स्थापना
- गहराई: प्लेट को जमीन में काफी गहराई पर (आमतौर पर 3 मीटर या उससे अधिक, जहां मिट्टी हमेशा नम रहती है) ऊर्ध्वाधर (Vertically) स्थिति में गाड़ा जाता है।
- भराव सामग्री: प्लेट के चारों ओर गड्ढे को नमक (Salt) और कोयले (Charcoal) की वैकल्पिक परतों (Layers) से भरा जाता है। यह मिश्रण आसपास की मिट्टी की प्रतिरोधकता (Resistivity) को बहुत कम करता है, जिससे लीकेज करंट के लिए जमीन में जाने का रास्ता आसान हो जाता है।
- अर्थ लीड: एक अर्थ तार (Copper या {GI} स्ट्रिप) को नट-बोल्ट का उपयोग करके प्लेट से मजबूती से जोड़ा जाता है। यह तार जमीन से ऊपर निकलकर उपकरण या सिस्टम की बॉडी से जुड़ता है।
- जल व्यवस्था: नमी बनाए रखने के लिए एक पतली पाइप की व्यवस्था की जाती है, जिसके माध्यम से गड्ढे में पानी डाला जा सके।
3. मुख्य लाभ और उपयोग
- कम प्रतिरोध: प्लेट का सतह क्षेत्र (Surface Area) पाइप या रॉड की तुलना में अधिक होता है, जिसके कारण यह सबसे कम अर्थ प्रतिरोध प्रदान करती है।
- उच्च दक्षता: यह उच्च मात्रा के फॉल्ट करंट (जैसे सब-स्टेशन या बिजली गिरने) को भी कुशलतापूर्वक जमीन में प्रवाहित कर सकती है।
- उपयोग: यह विधि मुख्य रूप से बिजली उत्पादन स्टेशनों, बड़े औद्योगिक क्षेत्रों, और उच्च-वोल्टेज सब-स्टेशनों में उपयोग की जाती है, जहाँ सुरक्षा और कम प्रतिरोध अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
9. रॉड अर्थिंग क्या है?
Ans.
रॉड अर्थिंग (Rod Earthing) अर्थिंग की एक विधि है जिसमें ज़मीन में एक धातु की छड़ (रॉड) को अर्थ इलेक्ट्रोड के रूप में गाड़ा जाता है। यह विधि उन स्थानों के लिए बहुत उपयुक्त है जहाँ ज़मीन रेतीली या पथरीली होती है और इलेक्ट्रोड को बहुत गहराई तक डालना आसान होता है।
रॉड अर्थिंग की संरचना और विशेषताएँ
1. अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode)
- सामग्री: रॉड (छड़) आमतौर पर कॉपर (तांबे) या कॉपर-कोटेड स्टील (Copper-coated Steel) की बनी होती है। गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) रॉड का भी उपयोग किया जा सकता है।
- आकार: कॉपर रॉड का व्यास लगभग {12.5 { mm}} (या 16 { mm}) होता है और {GI} पाइप के खोखले खंड का उपयोग करने पर व्यास {25 { mm}} हो सकता है।
- लंबाई: रॉड की लंबाई {2 { से } 3 { मीटर}} या उससे अधिक हो सकती है, जो मिट्टी की नमी और प्रतिरोधकता पर निर्भर करती है।
2. स्थापना प्रक्रिया
- गहराई तक डालना: रॉड को सीधे जमीन में हथौड़े या वाइब्रेटर की मदद से तब तक धंसाया जाता है, जब तक कि वह स्थायी रूप से नम मिट्टी (Moist Soil) की परत तक न पहुँच जाए। रेतीली ज़मीन (Sandy Soil) में इस विधि का उपयोग करना आसान होता है क्योंकि रॉड को गहरी नमी तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
- भराव सामग्री: पाइप अर्थिंग के विपरीत, रॉड अर्थिंग में आमतौर पर कोई बड़ा गड्ढा नहीं खोदा जाता है। हालाँकि, यदि कम प्रतिरोध प्राप्त करना हो, तो रॉड के चारों ओर विशेष अर्थ एन्हांसिंग कंपाउंड (Earthing Enhancing Compound - EEC) या नमक/कोयले का मिश्रण भरा जा सकता है।
- अर्थ लीड: एक अर्थ तार को एक विशेष ग्राउंड क्लैंप की मदद से रॉड के ऊपरी सिरे से मजबूती से जोड़ा जाता है।
3. मुख्य लाभ और उपयोग
- स्थापना में आसानी: इसे स्थापित करना सरल और तेज़ होता है, खासकर रेतीली मिट्टी में।
- कम लागत: पाइप अर्थिंग की तुलना में इसकी लागत कम होती है।
-
उपयोग:
- रेतीले क्षेत्र: यह रेतीली मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है।
- घरेलू/छोटे प्रतिष्ठान: छोटे घरेलू अर्थिंग सिस्टम और ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनों के पोल अर्थिंग में भी इसका उपयोग किया जाता है।
10. पाइप अर्थिंग क्या है? इसकी संरचना और कार्यप्रणाली समझाइए?
Ans.
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) अर्थिंग (भूसम्पर्कन) की एक विधि है जिसमें बिजली के उपकरणों से आने वाले लीकेज या फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए धातु के एक पाइप को अर्थ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग किया जाता है। यह सबसे सामान्य और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली अर्थिंग प्रणालियों में से एक है।
पाइप अर्थिंग की संरचना (Structure of Pipe Earthing)
पाइप अर्थिंग की संरचना में मुख्य रूप से निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:
-
अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode):
- यह मुख्य घटक है, जो गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) या तांबे (Copper) का एक खोखला पाइप होता है।
- GI पाइप का मानक व्यास लगभग {38 { mm}} ({1.5 { इंच}}) और लंबाई {2.5 { मीटर}} या उससे अधिक होती है।
- पाइप की पूरी लंबाई में समान दूरी पर छोटे-छोटे छेद (Holes) किए जाते हैं ताकि लीकेज करंट को जमीन में बेहतर ढंग से प्रवाहित किया जा सके और पाइप के चारों ओर भराव सामग्री से संपर्क बना रहे।
-
अर्थ पिट (Earth Pit):
- पाइप को गाड़ने के लिए लगभग {4.75 { मीटर}} गहरा एक गड्ढा (पिट) खोदा जाता है।
- पाइप को इस तरह से गाड़ा जाता है कि उसका निचला सिरा हमेशा नम मिट्टी (Moist Soil) के संपर्क में रहे।
-
भराव सामग्री (Backfilling Material):
- पाइप के चारों ओर गड्ढे को नमक (Salt) और लकड़ी के कोयले (Charcoal) की वैकल्पिक परतों (Layers) से भरा जाता है।
- कार्य: यह मिश्रण आसपास की मिट्टी की विद्युत प्रतिरोधकता (Electrical Resistivity) को बहुत कम कर देता है, जिससे लीकेज करंट को जमीन में जाने का रास्ता अत्यंत आसान (कम प्रतिरोध वाला) मिलता है।
- अर्थ लीड (Earthing Lead) और क्लैंप:
- एक GI या कॉपर का मोटा तार (अर्थ लीड) उपकरण की बॉडी से आता है और एक नट-बोल्ट और क्लैंप की मदद से पाइप के ऊपरी सिरे पर मजबूती से जोड़ा जाता है।
- कीप और पाइप (Funnel and Pipe):
- पाइप के ऊपर एक कीप (Funnel) लगी होती है और एक पतला पाइप गड्ढे से ऊपर तक निकला होता है। इसका उपयोग शुष्क मौसम में पानी डालकर कोयले और नमक के मिश्रण में नमी बनाए रखने के लिए किया जाता है, ताकि अर्थिंग का प्रतिरोध कम बना रहे।
कार्यप्रणाली (Working Principle)
पाइप अर्थिंग का कार्यप्रणाली सरल और पूरी तरह से सुरक्षा पर आधारित है:
- सामान्य स्थिति में: जब विद्युत प्रणाली सामान्य रूप से कार्य कर रही होती है, तो अर्थिंग सिस्टम निष्क्रिय रहता है और कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है।
-
दोष की स्थिति में:
- जब किसी विद्युत उपकरण की धातु की बॉडी (Metal Body) में तारों के इन्सुलेशन खराब होने के कारण करंट लीकेज (Leakage Current) होता है या कोई शॉर्ट सर्किट फॉल्ट होता है, तो उपकरण की बॉडी में उच्च वोल्टेज आ जाता है।
- चूंकि लीकेज करंट हमेशा सबसे कम प्रतिरोध वाला मार्ग चुनता है, यह करंट उपकरण की बॉडी से जुड़े अर्थ लीड के माध्यम से अर्थ पाइप तक पहुँच जाता है।
-
सुरक्षित प्रवाह:
- अर्थ पाइप और उसके चारों ओर मौजूद नमक/कोयले का मिश्रण करंट को जमीन में सुरक्षित रूप से प्रवाहित करने के लिए एक बहुत कम प्रतिरोध का मार्ग प्रदान करता है।
- यह करंट तेज़ी से जमीन के विशाल द्रव्यमान (Mass of the Earth) में फैल जाता है और शून्य क्षमता (Zero Potential) प्राप्त कर लेता है।
- सुरक्षा: इस प्रक्रिया से उपकरण की बॉडी का वोल्टेज तुरंत शून्य हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति गलती से दोषपूर्ण उपकरण को छूता है, तो उसे बिजली का झटका नहीं लगता, जिससे वह सुरक्षित रहता है।
- नमी का महत्व: गड्ढे में नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी डालना आवश्यक है, क्योंकि नम मिट्टी की चालकता (Conductivity) सूखी मिट्टी की तुलना में बहुत अधिक होती है, जो अर्थिंग के प्रतिरोध को कम रखने में मदद करती है।
11. पाइप अर्थिंग का निर्माण?
Ans.
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) का निर्माण (Installation) एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य लीकेज करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए कम-प्रतिरोध वाला मार्ग बनाना है।
पाइप अर्थिंग की निर्माण प्रक्रिया (Installation Steps)
पाइप अर्थिंग स्थापित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
1. गड्ढा खोदना (Excavation)
- सबसे पहले, इलेक्ट्रोड स्थापित करने के लिए जमीन में एक गहरा गड्ढा (अर्थ पिट) खोदा जाता है।
- गड्ढे का आकार आमतौर पर लगभग {1.2 { मीटर} × 1.2 { मीटर}} चौड़ा और {2.5 { मीटर}} से {4.75 { मीटर}} गहरा होता है।
- गड्ढा इतनी गहराई तक खोदा जाता है कि पाइप का निचला सिरा स्थायी रूप से नम मिट्टी (Moist Soil) के संपर्क में रहे।
2. इलेक्ट्रोड की तैयारी (Electrode Preparation)
- एक {38 { mm}} व्यास वाला {GI} (गैल्वेनाइज्ड आयरन) या तांबे का पाइप (अर्थ इलेक्ट्रोड) लिया जाता है।
- इस पाइप की पूरी लंबाई में समान अंतराल पर {12 { mm}} व्यास के छोटे-छोटे छेद बनाए जाते हैं ताकि लीकेज करंट आसानी से बाहर निकल सके और नमी अंदर जा सके।
- पाइप के निचले सिरे को नुकीला या तिरछा (Chiselled) बनाया जाता है ताकि इसे जमीन में आसानी से धंसाया जा सके।
3. इलेक्ट्रोड की स्थापना (Electrode Installation)
- तैयार किए गए अर्थ पाइप को गड्ढे के बीच में ऊर्ध्वाधर (Vertically) स्थिति में गाड़ दिया जाता है।
- पाइप के साथ-साथ एक पतला {19 { mm}} व्यास का {GI} पाइप भी लगाया जाता है। यह पतला पाइप सतह तक जाता है और इसका उपयोग शुष्क मौसम में पानी डालने के लिए किया जाता है।
4. भराव सामग्री डालना (Backfilling)
- गाड़े गए पाइप के चारों ओर गड्ढे को {15 { cm}} मोटी नमक (Salt) और लकड़ी के कोयले (Charcoal) की वैकल्पिक परतों से भरा जाता है।
- उद्देश्य: नमक प्रतिरोध को कम करता है, और कोयला नमी को बनाए रखने में मदद करता है।
- पाइप को लगभग ज़मीन की सतह से {20 { cm}} नीचे तक इन परतों से भर दिया जाता है।
5. अर्थ लीड को जोड़ना (Connecting Earthing Lead)
- अर्थ लीड (अर्थ तार या पट्टी), जो उपकरण से आती है, उसे नट-बोल्ट और वाशर की मदद से अर्थ पाइप के ऊपरी सिरे पर {19 { mm}} के पाइप के पास मजबूती से जोड़ा जाता है।
- यह कनेक्शन ढीला नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह प्रतिरोध को बढ़ा सकता है।
6. सुरक्षा और नमी बनाए रखना
- {19 { mm}} वाले पाइप के ऊपरी सिरे पर एक कीप (Funnel) लगाई जाती है (जिस पर जालीदार फिल्टर होता है)। इसी कीप से नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी डाला जाता है।
- पूरे अर्थ पिट को मौसम और भौतिक क्षति से बचाने के लिए, इसके ऊपर एक कास्ट-आयरन का ढक्कन या {30 { cm} × 30 { cm}} आकार का सीमेंट-कंक्रीट का बॉक्स (Inspection Pit) बनाया जाता है, ताकि निरीक्षण (Inspection) और रखरखाव (Maintenance) आसान हो।
12. पाइप अर्थिंग का कार्य क्या है?
Ans.
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) का मुख्य कार्य विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसका उद्देश्य फॉल्ट या लीकेज करंट को सुरक्षित रूप से जमीन (पृथ्वी) में प्रवाहित करके उपकरणों और मनुष्यों को बिजली के खतरों से बचाना है।
पाइप अर्थिंग के प्रमुख कार्य (Functions of Pipe Earthing)
पाइप अर्थिंग निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य करती है:
1. सुरक्षा मार्ग प्रदान करना (Providing Safety Path)
- लीकेज करंट को डिस्चार्ज करना: यह विद्युत उपकरणों (जैसे फ्रिज, कूलर, मोटर आदि) की धातु की बॉडी में आए लीकेज या दोषपूर्ण करंट (Fault Current) को कम प्रतिरोध (Low Resistance) का मार्ग प्रदान करती है।
- बिजली के झटके से बचाव: जब लीकेज करंट इस कम प्रतिरोध वाले मार्ग से जमीन में चला जाता है, तो उपकरण की बॉडी का वोल्टेज शून्य (Zero Potential) हो जाता है। इससे यदि कोई व्यक्ति उपकरण को छूता है, तो करंट उसके शरीर से प्रवाहित नहीं होता, जिससे वह बिजली के झटके (Electric Shock) से बच जाता है।
2. उपकरणों की सुरक्षा (Equipment Protection)
- अत्यधिक करंट से बचाव: फॉल्ट करंट को तुरंत जमीन में प्रवाहित करके, यह सर्किट में लगे फ्यूज (Fuse) या सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) को ट्रिप (Trip) होने के लिए पर्याप्त करंट प्रदान करती है। इससे सर्किट जल्दी टूट जाता है और उपकरण क्षतिग्रस्त होने से बच जाते हैं।
3. वोल्टेज को स्थिर रखना (Voltage Stabilization)
- तटस्थ बिंदु (Neutral Point) को शून्य क्षमता पर रखना: बड़े विद्युत वितरण प्रणालियों में, अर्थिंग ट्रांसफार्मर के तटस्थ बिंदु को पृथ्वी के साथ जोड़कर उसके वोल्टेज को पृथ्वी के संदर्भ में शून्य (Zero) बनाए रखने में मदद करती है।
- सिस्टम की स्थिरता: यह बिजली की लाइनों में वोल्टेज के उतार-चढ़ाव (Surges) को नियंत्रित करती है, जिससे पूरे विद्युत सिस्टम की स्थिरता (Stability) बनी रहती है।
4. आसमानी बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection)
- यदि लाइटनिंग अरेस्टर (तड़ित चालक) का उपयोग किया गया हो, तो पाइप अर्थिंग आसमानी बिजली (Lightning) के बहुत बड़े सर्ज करंट को भी सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करके बिल्डिंग और उपकरणों को गंभीर नुकसान से बचाती है।
संक्षेप में,
पाइप अर्थिंग विद्युत प्रणाली और पृथ्वी के बीच एक सुरक्षित और प्रभावी संपर्क स्थापित करती है, जो सुरक्षा और सुचारु संचालन दोनों के लिए आवश्यक है।
13. पाइप अर्थिंग के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
Ans.
पाइप अर्थिंग के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्री और घटकों का उपयोग किया जाता है:
|
सामग्री का नाम (Name of Material)
|
विवरण (Description)
|
कार्य (Function)
|
|
अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode)
|
{38 { mm}} व्यास और कम से कम {2.5 { मीटर}} लंबा गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) पाइप या तांबे का पाइप।
|
लीकेज करंट को जमीन में प्रवाहित करने के लिए मुख्य चालक (कंडक्टर)।
|
|
भराव सामग्री (Backfilling Material)
|
लकड़ी का कोयला (Charcoal/Coke) और नमक (Salt) की वैकल्पिक परतें। (प्रत्येक की लगभग 10 { kg} मात्रा)
|
कोयला नमी बनाए रखता है और नमक मिट्टी की चालकता (Conductivity) बढ़ाता है, जिससे अर्थिंग प्रतिरोध कम होता है।
|
|
अर्थ लीड (Earthing Lead)
|
तांबे या {GI} की मोटी पट्टी (Strip) या मोटा तार।
|
उपकरण की बॉडी और अर्थ पाइप के बीच कनेक्शन स्थापित करना।
|
|
पानी डालने वाला पाइप
|
एक पतला {19 { mm}} व्यास का {GI} पाइप।
|
शुष्क मौसम में नमी बनाए रखने के लिए गड्ढे में पानी डालने के लिए।
|
|
कीप (Funnel)
|
{19 { mm}} के पाइप के ऊपरी सिरे पर जालीदार कीप।
|
पानी डालने और कचरा अंदर जाने से रोकने के लिए।
|
|
निरीक्षण बॉक्स (Inspection Chamber)
|
कास्ट-आयरन का ढक्कन या {30 { cm} × 30 { cm}} कंक्रीट का बॉक्स।
|
अर्थिंग कनेक्शन के निरीक्षण और रखरखाव के लिए।
|
हाल ही में,
पारंपरिक नमक और कोयले के मिश्रण के स्थान पर अर्थ एन्हांसमेंट कंपाउंड (Earthing Enhancing Compounds - EEC) जैसे बेंटोनाइट (Bentonite) का भी उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह अधिक टिकाऊ होता है और बेहतर चालकता प्रदान करता है।
14. पाइप अर्थिंग का उपयोग?
Ans.
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत सुरक्षा और प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। यह भारत में सबसे किफायती और कुशल अर्थिंग विधियों में से एक है, इसलिए इसका उपयोग व्यापक रूप से किया जाता है।
पाइप अर्थिंग के मुख्य उपयोग क्षेत्र
1. घरेलू और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (Domestic and Commercial Installations)
- आवासीय भवन और कार्यालय: यह घरों, अपार्टमेंटों और छोटे कार्यालयों के लिए सबसे आम अर्थिंग विधि है, जहाँ कम प्रतिरोध वाली विश्वसनीय अर्थिंग आवश्यक होती है।
- उपकरणों की सुरक्षा: यह रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, और कंप्यूटर जैसे विद्युत उपकरणों की धातु की बॉडी को गलती से चार्ज होने से बचाती है।
2. औद्योगिक और बड़े भवन (Industrial and Large Buildings)
- छोटे और मध्यम आकार के औद्योगिक संयंत्रों में, जहाँ करंट के प्रवाह का परिमाण (Magnitude) प्लेट अर्थिंग जितना अधिक नहीं होता, वहाँ पाइप अर्थिंग का उपयोग किया जाता है।
- यह जेनरेटर सेट, मोटर और विद्युत पैनल की अर्थिंग के लिए एक विश्वसनीय विकल्प है।
3. विद्युत वितरण प्रणाली (Electrical Distribution Systems)
- ट्रांसमिशन टॉवर और पोल: पाइप अर्थिंग का उपयोग बिजली के खंभों (Poles) और छोटी ट्रांसमिशन लाइनों के टॉवरों की अर्थिंग के लिए किया जाता है ताकि आकाशीय बिजली (Lightning) के प्रभाव को जमीन में सुरक्षित रूप से प्रवाहित किया जा सके।
- सबस्टेशन: छोटे सबस्टेशनों और वितरण ट्रांसफार्मरों के तटस्थ (Neutral) बिंदुओं को अर्थ करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
4. नमी वाली मिट्टी में श्रेष्ठता (Advantage in Moist Soil)
- चूँकि पाइप अर्थिंग में नमक और कोयले का उपयोग करके गड्ढे में नमी बनाए रखना आसान होता है (पानी डालने वाले पाइप के कारण), इसलिए यह उन स्थानों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती है जहाँ मिट्टी पर्याप्त नम होती है।
15. प्लेट अर्थिंग क्या है?
Ans.
प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing) एक प्रकार की विद्युत सुरक्षा प्रक्रिया है जिसे ग्राउंडिंग (Grounding) भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्युत उपकरणों या प्रणालियों को सुरक्षित रखना और बिजली के झटके से लोगों की रक्षा करना है।
प्लेट अर्थिंग में, एक धातु की प्लेट (आमतौर पर तांबे या गैल्वेनाइज्ड आयरन/जीआई की) को जमीन में काफी गहराई पर (आमतौर पर 3 से 5 फीट या उससे अधिक, नमी के स्तर के आधार पर) एक गड्ढे में लंबवत गाड़ दिया जाता है।
प्लेट अर्थिंग की प्रक्रिया
- प्लेट को गाड़ना: तांबे या जीआई की एक प्लेट को जमीन में काफी गहराई तक खोदे गए गड्ढे में रखा जाता है।
- आमतौर पर, तांबे की प्लेट का आकार 60 × 60 × 3.18 { mm} और जीआई प्लेट का आकार 60 × 60 × 6.35 { mm} होता है।
- अर्थिंग लीड: एक अर्थिंग तार या स्ट्रिप (अर्थ इलेक्ट्रोड) को नट-बोल्ट का उपयोग करके इस प्लेट से कसकर जोड़ दिया जाता है। यह तार उपकरण के धातु के हिस्सों से जुड़ा होता है।
- भरना: गड्ढे को प्लेट के चारों ओर नमक (Salt) और कोयले (Charcoal) की वैकल्पिक परतों से भरा जाता है। यह मिश्रण पृथ्वी के संपर्क प्रतिरोध (Earth Resistance) को कम करने में मदद करता है, जिससे करंट आसानी से जमीन में जा सके।
- पानी डालना: नमी बनाए रखने के लिए एक पाइप (फनेल के साथ) का उपयोग करके समय-समय पर पानी डालने की व्यवस्था की जाती है, क्योंकि मिट्टी सूखी होने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है।
उद्देश्य और कार्य
जब किसी विद्युत उपकरण की धातु की बॉडी में कोई खराबी (Fault) आती है, तो लीकेज करंट उस बॉडी में आ सकता है। यदि कोई व्यक्ति उस उपकरण को छूता है, तो उसे गंभीर बिजली का झटका लग सकता है।
- प्लेट अर्थिंग इस लीकेज करंट को कम प्रतिरोध वाले रास्ते (अर्थिंग तार) से सीधे पृथ्वी (जमीन) में भेज देता है।
- चूँकि करंट हमेशा सबसे आसान और कम प्रतिरोध वाले मार्ग का अनुसरण करता है, यह प्लेट अर्थिंग के माध्यम से जमीन में चला जाता है, और इस प्रकार उपकरण का छूने वाला हिस्सा सुरक्षित रहता है।
- यह लोगों को बिजली के झटके से बचाता है और उपकरणों को अधिक वोल्टेज से होने वाले नुकसान से भी सुरक्षित रखता है।
प्लेट अर्थिंग को अक्सर बड़े औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े फ्लैटों या उच्च करंट वहन करने वाले इंस्टॉलेशन में उपयोग किया जाता है।
17. प्लेट अर्थिंग का निर्माण?
Ans.
प्लेट अर्थिंग के निर्माण (Construction) के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसका उद्देश्य जमीन में कम से कम प्रतिरोध (Low Resistance) वाला रास्ता बनाना है ताकि दोषपूर्ण करंट (Fault Current) सुरक्षित रूप से पृथ्वी में समाहित हो जाए।
यहाँ प्लेट अर्थिंग के निर्माण की चरण-दर-चरण प्रक्रिया दी गई है:
प्लेट अर्थिंग का निर्माण (Plate Earthing Construction)
1. गड्ढा खोदना (Excavation of the Pit)
- गहराई: सबसे पहले, जमीन में एक गहरा गड्ढा खोदा जाता है। गड्ढे की गहराई कम से कम 3 मीटर (लगभग 10 फीट) होनी चाहिए, ताकि प्लेट को नमी वाली परत (Moist Layer) तक पहुँचाया जा सके।
- चौड़ाई: गड्ढे की चौड़ाई लगभग 90 cm × 90 cm रखी जाती है।
2. अर्थ प्लेट और सामग्री का चयन (Selection of Plate and Materials)
-
अर्थ इलेक्ट्रोड प्लेट: प्लेट अर्थिंग के लिए आमतौर पर तांबे (Copper) या गैल्वेनाइज्ड आयरन (G.I.) की प्लेट का उपयोग किया जाता है।
- तांबे की प्लेट: 60 { cm} × 60 { cm} × 3.18 { mm}
- जीआई (G.I.) प्लेट: 60 { cm} × 60 { cm} × 6.35 { mm}
- अन्य सामग्री: कोयला (Charcoal) और नमक (Salt) या विशेष अर्थिंग केमिकल पाउडर।
3. अर्थिंग लीड को जोड़ना (Connecting the Earthing Lead)
- प्लेट के केंद्र में छेद किया जाता है। एक अर्थिंग तार (अर्थिंग लीड) को प्लेट के साथ नट-बोल्ट की सहायता से कसकर जोड़ा जाता है।
- यह सुनिश्चित किया जाता है कि जोड़ (Connection) मजबूत और जंग-मुक्त (Corrosion-free) हो, क्योंकि यही तार उपकरण से करंट को प्लेट तक पहुँचाता है।
4. प्लेट को स्थापित करना (Installation of the Plate)
- अर्थ प्लेट को खोदे गए गड्ढे के तल पर लंबवत (Vertically) स्थिति में रखा जाता है।
- अर्थिंग लीड को एक पाइप के अंदर से गड्ढे से बाहर निकाला जाता है, जो इसे यांत्रिक क्षति (Mechanical Damage) से बचाता है।
5. गड्ढे को भरना (Filling the Pit)
- प्लेट के चारों ओर गड्ढे को कोयले और नमक की वैकल्पिक परतों (Alternate Layers) से भरा जाता है। प्रत्येक परत की मोटाई लगभग 15 { cm} तक रखी जाती है।
- कोयला और नमक का यह मिश्रण अर्थ इलेक्ट्रोड प्लेट के आसपास की मिट्टी के प्रतिरोध को कम करता है और लंबे समय तक नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे अर्थिंग प्रणाली की दक्षता बनी रहती है।
6. पानी डालने की व्यवस्था (Provision for Water)
- एक पतला गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) पाइप (लगभग 19 { mm} व्यास का) प्लेट की सतह तक नीचे डाला जाता है और ऊपर की ओर बाहर निकला रहता है।
- इस पाइप के ऊपरी सिरे पर एक कीप (Funnel) लगा दी जाती है।
- यह व्यवस्था गड्ढे में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। शुष्क मौसम में, इस पाइप के माध्यम से समय-समय पर पानी डाला जाता है ताकि अर्थ प्रतिरोध कम बना रहे।
7. अंतिम आवरण (Final Covering)
- जब गड्ढा पूरी तरह से भर जाता है, तो ऊपरी हिस्से को मिट्टी से भरकर समतल कर दिया जाता है।
- गड्ढे के मुख को एक ढक्कन (Cover) या सीमेंट के चैम्बर से बंद कर दिया जाता है, जिसे अर्थिंग पिट (Earthing Pit) कहते हैं, ताकि अर्थिंग कनेक्शन सुरक्षित रहे और नमी की व्यवस्था (फनल) तक आसानी से पहुंचा जा सके।
यह निर्माण प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि अर्थिंग का प्रतिरोध न्यूनतम रहे, जो सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
18. प्लेट अर्थिंग का कार्य क्या है?
Ans.
प्लेट अर्थिंग ({Plate Earthing}) का मुख्य कार्य विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह किसी भी दोषपूर्ण या रिसाव करंट (Fault or Leakage Current) को कम प्रतिरोध (Low Resistance) का मार्ग प्रदान करके उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी (जमीन) में प्रवाहित करता है।
प्लेट अर्थिंग के मुख्य कार्य
1. व्यक्तिगत सुरक्षा (Personal Safety)
- बिजली के झटके से बचाव: सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि यह लोगों को बिजली के झटके से बचाता है।
- जब किसी विद्युत उपकरण (जैसे फ्रिज, कूलर, प्रेस, गीजर) के इंसुलेशन (विद्युत रोधन) में खराबी आती है और फेज तार (Phase Wire) गलती से उसकी धातु की बॉडी को छू लेता है, तो बॉडी में करंट आ जाता है।
- प्लेट अर्थिंग इस खतरनाक करंट को मानव शरीर के बजाय, अर्थिंग तार के माध्यम से सीधे जमीन में भेज देता है, जिससे व्यक्ति को झटका नहीं लगता।
2. उपकरणों की सुरक्षा (Protection of Equipment)
- अत्यधिक वोल्टेज से बचाव: यह उपकरणों को उच्च वोल्टेज या तड़ित झंझावात (Lightning/Surge) के कारण होने वाले नुकसान से बचाता है।
- जब किसी भी कारण से सर्किट में अत्यधिक करंट आता है, तो प्लेट अर्थिंग उसे तुरंत जमीन में भेजकर उपकरण के जलने या खराब होने से बचाता है।
3. वोल्टेज स्थायित्व (Voltage Stabilization)
- यह विद्युत प्रणाली में वोल्टेज को स्थिर रखने में मदद करता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि न्यूट्रल पॉइंट (Neutral Point) का पोटेंशियल पृथ्वी के पोटेंशियल के करीब बना रहे, जिससे सिस्टम में वोल्टेज असंतुलन (Voltage Imbalance) नहीं होता।
4. आग के जोखिम को रोकना (Preventing Fire Hazard)
- करंट रिसाव या अत्यधिक करंट से उत्पन्न होने वाली गर्मी से आग लगने के जोखिम को कम करता है, क्योंकि दोषपूर्ण करंट तुरंत जमीन में समाहित हो जाता है।
संक्षेप में,
प्लेट अर्थिंग एक सुरक्षा वाल्व की तरह काम करता है, जो गलती से उत्पन्न होने वाले किसी भी अतिरिक्त या खतरनाक करंट को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से हटा देता है।
19. प्लेट अर्थिंग का उपयोग किसमें किया जाता है?
Ans.
प्लेट अर्थिंग का उपयोग मुख्य रूप से उन विद्युत प्रणालियों और प्रतिष्ठानों में किया जाता है जहाँ अधिक दोष करंट (High Fault Current) को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने की आवश्यकता होती है, और जहाँ कम अर्थ प्रतिरोध (Low Earth Resistance) एक अनिवार्य सुरक्षा आवश्यकता है।
प्लेट अर्थिंग के प्रमुख उपयोग क्षेत्र
प्लेट अर्थिंग का उपयोग आम तौर पर निम्नलिखित स्थानों पर किया जाता है, क्योंकि यह उच्च चालकता (High Conductivity) और बड़े संपर्क क्षेत्र (Large Contact Area) के कारण उच्च दक्षता प्रदान करता है:
-
औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas):
- बड़ी मशीनरी और भारी विद्युत उपकरण।
- औद्योगिक संयंत्रों, कारखानों और विनिर्माण इकाइयों में।
-
बिजली उपकेंद्र और स्टेशन (Power Substations and Power Stations):
- ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर और उच्च वोल्टेज स्विचगियर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए।
- यह प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट (Neutral Point) को ग्राउंड करने के लिए बहुत प्रभावी है।
- ऊंची इमारतें और बड़े फ्लैट (High-rise Buildings and Large Flats):
- बड़े वाणिज्यिक परिसर (Commercial Complexes) और आवासीय भवनों में जहाँ एक मजबूत और स्थिर अर्थिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है।
- तड़ित सुरक्षा प्रणाली (Lightning Protection System):
- यह अक्सर इमारतों और संरचनाओं पर लगाए गए तड़ित चालक (Lightning Arresters) से उत्पन्न होने वाले भारी करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- दूरसंचार टावर (Telecommunication Towers):
- संचार उपकरणों को अत्यधिक वोल्टेज और बिजली गिरने से बचाने के लिए।
प्लेट अर्थिंग को पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है, खासकर उन जगहों पर जहाँ मिट्टी का प्रतिरोध (Soil Resistivity) अधिक होता है, क्योंकि इसमें उपयोग की जाने वाली प्लेट का सतही क्षेत्रफल (Surface Area) अधिक होता है।
20. रॉड अर्थिंग क्या है?
Ans.
रॉड अर्थिंग ({Rod Earthing}) एक प्रकार की विद्युत अर्थिंग (Earthing) प्रणाली है जिसमें दोषपूर्ण (Fault) या अतिरिक्त विद्युत करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए धातु की एक लंबी छड़ (Rod) का उपयोग किया जाता है।
यह अर्थिंग की सबसे सरल और सस्ती विधियों में से एक है।
रॉड अर्थिंग क्या है और यह कैसे काम करता है?
1. परिभाषा और इलेक्ट्रोड
- अर्थ रॉड: रॉड अर्थिंग में मुख्य इलेक्ट्रोड एक ठोस छड़ होती है। यह छड़ आमतौर पर तांबे (Copper), गैल्वेनाइज्ड आयरन (G.I.), या कॉपर-बांडेड स्टील (Copper-bonded Steel) से बनी होती है।
- स्थापना: इस छड़ को मशीन या मैनुअल बल का उपयोग करके, सीधे या थोड़े तिरछे कोण पर, जमीन में बहुत गहराई तक गाड़ दिया जाता है। इसका उद्देश्य जमीन में नमी की स्थायी परत (Permanent Moist Layer) तक पहुँचना होता है, जहाँ मिट्टी का प्रतिरोध कम होता है।
2. कार्यप्रणाली
- कनेक्शन: इस रॉड को एक अर्थिंग तार (अर्थिंग लीड) के माध्यम से विद्युत उपकरण के धात्विक भाग (Metallic Body) से जोड़ा जाता है।
- सुरक्षा मार्ग: जब उपकरण में कोई दोष उत्पन्न होता है (जैसे लीकेज करंट या शॉर्ट सर्किट), तो यह करंट अत्यधिक प्रतिरोध वाले मानव शरीर में प्रवाहित होने के बजाय, रॉड और अर्थिंग तार के माध्यम से कम प्रतिरोध वाला मार्ग चुनता है।
- यह करंट जमीन में चला जाता है, जिससे व्यक्ति को बिजली का झटका लगने से सुरक्षा मिलती है और उपकरणों को क्षति से बचाया जा सकता है।
रॉड अर्थिंग के उपयोग और फायदे
- उपयोग: इसका उपयोग आमतौर पर उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ मिट्टी नम होती है और आसानी से नमी वाली परतों तक पहुँचा जा सकता है।
- यह आमतौर पर घरों, छोटे प्रतिष्ठानों (Small Establishments) और वितरण ट्रांसफार्मर के पास उपयोग किया जाता है।
-
फायदे:
- स्थापना में आसानी: इसे स्थापित करना प्लेट या पाइप अर्थिंग की तुलना में बहुत आसान होता है।
- कम जगह: इसे लगाने के लिए बहुत कम जगह (केवल एक छोटा सा गड्ढा या बोर) की आवश्यकता होती है।
- सस्ता: यह अन्य पारंपरिक अर्थिंग विधियों की तुलना में सस्ती होती है।
21. रॉड अर्थिंग का निर्माण?
Ans.
रॉड अर्थिंग का निर्माण (या स्थापना) एक अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य एक धातु की छड़ को जमीन में काफी गहराई तक गाड़कर विद्युत उपकरणों के लिए कम प्रतिरोध वाला सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है।
निर्माण के चरण (Construction Steps) नीचे दिए गए हैं:
1. स्थल चयन और सामग्री की तैयारी
- स्थल चयन: ऐसी जगह चुनें जहाँ मिट्टी में पर्याप्त नमी हो। यदि मिट्टी सूखी हो, तो रॉड को अधिक गहराई तक गाड़ना पड़ सकता है, या रासायनिक मिश्रण का उपयोग करना पड़ सकता है।
- अर्थ रॉड: उपयुक्त सामग्री (जैसे कॉपर-बांडेड स्टील या जस्तीकृत लोहा (G.I.)) और व्यास की एक अर्थ रॉड चुनें। रॉड की लम्बाई मिट्टी की प्रतिरोधकता के अनुसार 1.2 मीटर से 3 मीटर या उससे अधिक हो सकती है।
- अर्थिंग तार (Earthing Lead): उपकरण को रॉड से जोड़ने के लिए उपयुक्त क्रॉस-सेक्शन वाले तांबे या G.I. तार का चयन करें।
- अर्थिंग क्लैंप: रॉड और अर्थिंग तार को कसकर जोड़ने के लिए एक क्लैंप तैयार रखें।
2. रॉड स्थापित करना
- गड्ढा/बोर बनाना: रॉड की मोटाई से थोड़ा अधिक व्यास का एक छोटा गड्ढा या बोर होल (Bore Hole) खोदें। गड्ढे की गहराई रॉड की लम्बाई पर निर्भर करती है।
- रॉड गाड़ना: रॉड को गड्ढे के बीच में रखें और उसे मैन्युअल रूप से या एक पावर हैमर की मदद से सीधे या तिरछे (15° से 30° के कोण पर) जमीन में गाड़ दें। रॉड को तब तक गाड़ा जाता है जब तक कि उसका ऊपरी सिरा सतह से लगभग 15-20 सेमी नीचे न रह जाए। रॉड का नुकीला सिरा (Pointed end) नीचे की ओर होना चाहिए।
- गहराई: उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रॉड, मिट्टी की उस परत तक पहुँचे जहाँ नमी स्थायी रूप से बनी रहती है।
3. अर्थिंग तार और बैकफिल (Backfill)
- अर्थिंग क्लैंप लगाना: रॉड के ऊपरी सिरे पर अर्थिंग क्लैंप कसें और इस क्लैंप से अर्थिंग तार (अर्थिंग लीड) को मज़बूती से जोड़ दें।
-
बैकफिल (ऐच्छिक): यदि आप रासायनिक अर्थिंग (Chemical Earthing) का उपयोग कर रहे हैं (जो कम प्रतिरोध के लिए बेहतर है), तो:
- रॉड के चारों ओर अर्थ एन्हांसिंग कंपाउंड (जैसे बेंटोनाइट क्ले या ग्रेफाइट यौगिक) का गाढ़ा घोल भरें।
- पारंपरिक विधि में, रॉड के चारों ओर नमक और कोयले की वैकल्पिक परतें डालकर गड्ढे को भरा जाता है।
- गड्ढा भरना: शेष गड्ढे को खोदी हुई मिट्टी से भर दिया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि रॉड अच्छी तरह से घिरा हुआ है।
- इंस्पेक्शन चैंबर: रॉड के ऊपरी सिरे के ऊपर एक इंस्पेक्शन चैंबर (Inspection Chamber) या अर्थ पिट बॉक्स बनाया जाता है ताकि भविष्य में कनेक्शन की जांच की जा सके और नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी डाला जा सके।
4. टेस्टिंग
- प्रतिरोध जाँच: अंतिम चरण में अर्थ रेजिस्टेंस टेस्टर (Earth Resistance Tester) का उपयोग करके पूरे अर्थिंग सिस्टम के प्रतिरोध मूल्य की जाँच की जाती है। यह मान मानकों के अनुसार कम होना चाहिए (आमतौर पर 5 ओम से कम)।
22. रॉड अर्थिंग का कार्य क्या है?
Ans.
रॉड अर्थिंग का मुख्य कार्य विद्युत उपकरणों और प्रणालियों को सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि किसी भी खराबी या लीकेज करंट की स्थिति में वह खतरनाक करंट सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित हो जाए।
रॉड अर्थिंग के प्रमुख कार्य (Functions of Rod Earthing)
रॉड अर्थिंग, अन्य प्रकार की अर्थिंग प्रणालियों की तरह, तीन महत्वपूर्ण कार्य करती है:
1. मानव जीवन की सुरक्षा (Protection of Human Life)
- बिजली के झटके से बचाव: जब किसी विद्युत उपकरण की धात्विक बॉडी (metallic body) में गलती से फेस वायर (Phase Wire) से लीकेज करंट आ जाता है (जैसे कि तार का इन्सुलेशन खराब होने पर), तो रॉड अर्थिंग एक कम प्रतिरोध (Low Resistance) का मार्ग प्रदान करती है।
- यह कम प्रतिरोध वाला मार्ग सुनिश्चित करता है कि लीकेज करंट मानव शरीर से होकर न जाए, बल्कि सीधे अर्थिंग रॉड के माध्यम से जमीन में चला जाए। इससे व्यक्ति को गंभीर बिजली के झटके लगने से बचाया जा सकता है।
2. विद्युत उपकरणों की सुरक्षा (Protection of Electrical Equipment)
- ओवर-वोल्टेज से बचाव: अर्थिंग अचानक आने वाले उच्च वोल्टेज सर्ज (Surges) (जैसे बिजली गिरने या सिस्टम में क्षणिक दोष के कारण) को सुरक्षित रूप से जमीन में फैला देती है।
- यह प्रक्रिया उपकरणों को अत्यधिक वोल्टेज से होने वाले नुकसान से बचाती है और उनकी कार्यक्षमता व जीवनकाल को बनाए रखने में मदद करती है।
3. दोष करंट का सुरक्षित निष्कासन (Safe Dissipation of Fault Current)
- फ्यूज/ब्रेकर को ट्रिप करना: जब कोई बड़ा दोष (Fault) होता है, तो रॉड अर्थिंग उस उच्च दोष करंट को तुरंत जमीन में भेज देती है। यह करंट इतना बड़ा होता है कि सर्किट के सुरक्षात्मक उपकरण, जैसे फ्यूज (Fuse) या सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker), तुरंत सक्रिय (Activate) होकर सर्किट को काट देते हैं।
- सर्किट के कट जाने से आग लगने (Fire Hazard) और उपकरण को स्थायी नुकसान होने का खतरा समाप्त हो जाता है।
संक्षेप में,
रॉड अर्थिंग एक आपातकालीन "सुरक्षा वाल्व" ({Safety Valve}) के रूप में कार्य करती है, जो विद्युत प्रणाली में उत्पन्न होने वाले किसी भी अवांछित करंट को पृथ्वी (Ground) में भेज देती है, क्योंकि पृथ्वी का पोटेंशियल (विभव) शून्य माना जाता है।
23. रॉड अर्थिंग का उपयोग?
Ans.
रॉड अर्थिंग का उपयोग मुख्य रूप से उन जगहों पर किया जाता है जहाँ कम प्रतिरोध (Low Resistance) प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रोड को गहराई तक गाड़ना संभव होता है और जहाँ अन्य प्रकार की अर्थिंग विधियाँ (जैसे प्लेट अर्थिंग) अधिक महँगी या अव्यावहारिक होती हैं।
रॉड अर्थिंग के उपयोग के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
1. आवासीय और छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान
- घरों में सुरक्षा: घरों, छोटे कार्यालयों और दुकानों में विद्युत उपकरणों को बिजली के झटके और लीकेज करंट से बचाने के लिए रॉड अर्थिंग सबसे आम और किफायती तरीका है।
- सोलर सिस्टम: छत पर लगे सोलर पैनल (Solar Panel) सिस्टम की अर्थिंग के लिए भी रॉड अर्थिंग का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
2. उच्च प्रतिरोधकता वाली मिट्टी
- रेतीले या पथरीले क्षेत्र: रॉड अर्थिंग उन रेतीले या पथरीले क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जहाँ मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) अधिक होती है।
- रॉड को जोड़ा (Coupled) जा सकता है और तब तक गहराई में धकेला जा सकता है जब तक कि यह नम मिट्टी या पानी की मेज (Water Table) तक नहीं पहुँच जाता, जिससे आवश्यक कम अर्थ प्रतिरोध प्राप्त हो सके।
3. ट्रांसमिशन और वितरण प्रणालियाँ
- ट्रांसफॉर्मर: वितरण ट्रांसफॉर्मर के न्यूट्रल पॉइंट (Neutral Point) को अर्थ करने के लिए रॉड अर्थिंग का उपयोग किया जाता है ताकि वोल्टेज स्थिरता बनी रहे और दोषपूर्ण करंट को नियंत्रित किया जा सके।
- ओवरहेड लाइनें: ट्रांसमिशन और वितरण लाइनों के टावरों और पोल पर सुरक्षात्मक अर्थिंग के लिए भी रॉड अर्थिंग का उपयोग किया जाता है।
4. आकाशीय बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection)
- तड़ित चालक (Lightning Arresters): इमारतों और संरचनाओं पर लगे तड़ित चालकों को रॉड अर्थिंग से जोड़ा जाता है। जब बिजली गिरती है, तो रॉड इलेक्ट्रोड सुरक्षित रूप से उस विशाल करंट को जमीन में प्रवाहित कर देता है, जिससे संरचना को नुकसान होने से बचाया जाता है।
क्यों रॉड अर्थिंग?
रॉड अर्थिंग का चुनाव अक्सर इसलिए किया जाता है क्योंकि:
- इसे स्थापित करने के लिए कम खुदाई की आवश्यकता होती है।
- यह अन्य विधियों की तुलना में सस्ती होती है।
- इसे आसानी से और तेजी से स्थापित किया जा सकता है।
24. पाइप, प्लेट और रॉड अर्थिंग में क्या अंतर है?
Ans.
पाइप, प्लेट और रॉड अर्थिंग में मुख्य अंतर इलेक्ट्रोड के आकार, स्थापना की विधि और लागत में है। तीनों का उद्देश्य एक ही है: दोष करंट (Fault Current) को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करने के लिए कम प्रतिरोध (Low Resistance) वाला मार्ग प्रदान करना।
तीनों प्रकार की अर्थिंग में मुख्य अंतरों का सारांश यहाँ दिया गया है:
|
विशेषता
|
प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)
|
पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing)
|
रॉड अर्थिंग (Rod Earthing)
|
|
इलेक्ट्रोड का आकार
|
एक ठोस आयताकार प्लेट (जैसे 60 { cm} × 60 { cm} × 3.18 { mm} कॉपर के लिए)।
|
खोखला (Hollow) पाइप (जैसे 38 { mm} व्यास का G.I. या कॉपर)।
|
ठोस छड़/रॉड (जैसे 12{ mm} व्यास का कॉपर-बांडेड या G.I.)।
|
|
स्थापना विधि
|
गहराई में बड़ा गड्ढा (लगभग 3 मीटर) खोदकर प्लेट को लंबवत रखा जाता है।
|
गड्ढा खोदकर पाइप को लंबवत गाड़ा जाता है। नमी बनाए रखने के लिए पानी डालने का प्रावधान होता है।
|
कम खुदाई या बिना खुदाई के, रॉड को सीधे जमीन में हथौड़े (Hammer) या मशीन से गहराई तक धकेला जाता है।
|
|
आवश्यक गहराई
|
मध्यम (2.5 मीटर से 3 मीटर या अधिक)।
|
मध्यम से अधिक (2.5 मीटर से 4.75 मीटर तक)।
|
अधिक गहराई तक गाड़ा जा सकता है (आवश्यकतानुसार रॉड को कपलर से जोड़कर)।
|
|
प्रयुक्त सामग्री
|
कॉपर या गैल्वेनाइज्ड आयरन (G.I.) प्लेट।
|
G.I. या कॉपर का पाइप।
|
कॉपर, G.I. या कॉपर-बांडेड स्टील रॉड।
|
|
सतह संपर्क क्षेत्र
|
बहुत अधिक, जिससे बहुत कम प्रतिरोध प्राप्त हो सकता है।
|
मध्यम।
|
कम।
|
|
उपयोग
|
बड़े उद्योग, पावर स्टेशन, और उच्च धारा घनत्व (High Current Density) वाली जगहें।
|
आवासीय, वाणिज्यिक, और छोटे औद्योगिक अनुप्रयोगों में सबसे सामान्य।
|
पथरीली या रेतीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में जहाँ गहरी नमी तक पहुँचना आवश्यक हो।
|
|
लागत
|
सबसे महँगी (बड़ा गड्ढा और प्लेट के कारण)।
|
प्लेट अर्थिंग से सस्ती, लेकिन रॉड अर्थिंग से महँगी।
|
सबसे किफायती (कम खुदाई और कम सामग्री के कारण)।
|
मुख्य अंतर का कारण
तीनों में मुख्य अंतर उनके इलेक्ट्रोड ज्यामिति (Electrode Geometry) में है:
- प्लेट अर्थिंग: प्लेट का क्षेत्रफल सबसे अधिक होता है, इसलिए यह जमीन के साथ सबसे अधिक संपर्क बनाता है। यह उच्च दोष करंट को संभालने के लिए आदर्श है और इसका प्रतिरोध सबसे कम होता है, लेकिन इसे स्थापित करना जटिल और महंगा है।
- पाइप अर्थिंग: यह एक अच्छा संतुलन प्रदान करता है—प्लेट जितना बड़ा क्षेत्रफल नहीं, लेकिन रॉड से बेहतर। खोखला होने के कारण, इसमें नमी बनाए रखने के लिए पानी डालना आसान होता है, जो प्रतिरोध को कम रखता है।
- रॉड अर्थिंग: यह गहराई तक गाड़ने के लिए सबसे उपयुक्त है। इसका संपर्क क्षेत्रफल कम होता है, लेकिन रॉड को नम मिट्टी की निचली परतों तक धकेलकर कम प्रतिरोध प्राप्त किया जा सकता है, खासकर उन शुष्क स्थानों में जहाँ प्लेट या पाइप पर्याप्त नमी तक नहीं पहुँच पाते।
25. रासायनिक अर्थिंग क्या है?
Ans.
रासायनिक अर्थिंग (Chemical Earthing) अर्थिंग की एक आधुनिक और उन्नत विधि है जिसमें कम और स्थिर भू-प्रतिरोध (Earth Resistance) प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रोड के चारों ओर कोयले और नमक के बजाय विशेष रासायनिक मिश्रणों का उपयोग किया जाता है।
यह विधि विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है जहाँ की मिट्टी शुष्क, पथरीली या रेतीली होती है, जहाँ पारंपरिक अर्थिंग विधियाँ (जैसे पाइप या प्लेट अर्थिंग) वांछित निम्न प्रतिरोध प्राप्त नहीं कर पाती हैं।
रासायनिक अर्थिंग की मुख्य विशेषताएं
1. प्रयुक्त सामग्री
इसमें पारंपरिक सामग्री की जगह उच्च चालकता वाले विशेष यौगिक (Compounds) का प्रयोग होता है:
- अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode): विशेष रूप से डिजाइन की गई रॉड या इलेक्ट्रोड का उपयोग होता है, जो आमतौर पर कॉपर-बांडेड स्टील या उच्च गुणवत्ता वाले G.I. के बने होते हैं। ये इलेक्ट्रोड अक्सर अंदर से खोखले होते हैं।
- बैकफिल कंपाउंड (Backfill Compound): इलेक्ट्रोड के चारों ओर एक विशेष, उच्च चालकता वाला मिश्रण भरा जाता है। इसमें आमतौर पर बेंटोनाइट (Bentonite), ग्रेफाइट (Graphite), और अन्य खनिज यौगिक शामिल होते हैं।
- कार्य: यह यौगिक मिट्टी से नमी को अवशोषित करता है और इलेक्ट्रोड के चारों ओर नमी को बनाए रखता है, जिससे इलेक्ट्रोड और पृथ्वी के बीच का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है।
2. निर्माण प्रक्रिया
रासायनिक अर्थिंग में इलेक्ट्रोड को जमीन में गाड़ने के बाद, इलेक्ट्रोड और गड्ढे की दीवार के बीच के स्थान को इस रासायनिक मिश्रण के घोल या पाउडर से भर दिया जाता है। इस मिश्रण को अर्थ एन्हांसिंग कंपाउंड (Earth Enhancing Compound - EEC) कहा जाता है।
3. लाभ
रासायनिक अर्थिंग को पारंपरिक तरीकों से बेहतर माना जाता है क्योंकि:
- स्थिर और निम्न प्रतिरोध: यह बहुत कम (आमतौर पर 1 ओम से 5 ओम तक) और पूरे वर्ष स्थिर भू-प्रतिरोध प्रदान करता है, भले ही मौसम शुष्क क्यों न हो।
- रखरखाव मुक्त: इसमें पारंपरिक अर्थिंग की तरह बार-बार पानी डालने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि रसायन स्वयं नमी को बनाए रखते हैं। इसे रखरखाव मुक्त (Maintenance-Free) प्रणाली माना जाता है।
- लंबा जीवनकाल: उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रोड और रसायन जंग-रोधी (Corrosion Resistant) होते हैं, जिससे सिस्टम का जीवनकाल लंबा होता है।
26. रासायनिक भूयोजन के लाभ?
Ans.
रासायनिक भूयोजन (Chemical Earthing) के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं जो इसे पारंपरिक भूयोजन (Earthing) विधियों से बेहतर बनाते हैं, खासकर कठिन मिट्टी वाली जगहों पर।
यहाँ रासायनिक भूयोजन के प्रमुख लाभ दिए गए हैं:
रासायनिक भूयोजन के प्रमुख लाभ (Key Benefits of Chemical Earthing)
1. निम्न और स्थिर भू-प्रतिरोध (Low and Stable Earth Resistance)
- कम प्रतिरोध: यह प्रणाली बहुत कम भू-प्रतिरोध प्राप्त करने में सक्षम होती है (अक्सर 5 ओम से कम), जो सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
- स्थिरता: विशेष रासायनिक यौगिक (जैसे बेंटोनाइट और ग्रेफाइट) इलेक्ट्रोड के चारों ओर की मिट्टी में नमी को बनाए रखते हैं। इस नमी के कारण, भू-प्रतिरोध वर्ष भर स्थिर बना रहता है, चाहे मौसम कितना भी शुष्क क्यों न हो। यह सबसे बड़ा लाभ है।
2. रखरखाव मुक्त प्रणाली (Maintenance-Free System)
- पारंपरिक अर्थिंग (जैसे पाइप या प्लेट अर्थिंग) में प्रतिरोध को कम रखने के लिए नियमित रूप से पानी डालना पड़ता है।
- रासायनिक भूयोजन में उपयोग किए जाने वाले यौगिक (EEC) प्राकृतिक रूप से नमी को अवशोषित करते हैं और बनाए रखते हैं, इसलिए इसे स्थापित करने के बाद बार-बार पानी डालने की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अधिक जीवनकाल और जंग प्रतिरोध (Longer Life and Corrosion Resistance)
- रासायनिक भूयोजन में उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रोड (आमतौर पर कॉपर-बांडेड स्टील) उच्च गुणवत्ता के होते हैं और जंग (Corrosion) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।
- रासायनिक यौगिक भी इलेक्ट्रोड को मिट्टी के रासायनिक क्षरण से बचाते हैं, जिससे प्रणाली का जीवनकाल 15 से 20 वर्ष या उससे अधिक हो जाता है।
4. स्थापना में लचीलापन (Flexibility in Installation)
- यह प्रणाली पथरीली (Rocky), रेतीली (Sandy) या शुष्क (Dry) मिट्टी सहित विभिन्न प्रकार की मिट्टी में प्रभावी ढंग से काम करती है, जहाँ पारंपरिक तरीके विफल हो सकते हैं।
- चूँकि यह इलेक्ट्रोड को गहराई तक गाड़ने पर निर्भर करता है, इसलिए इसे कम जगह वाली साइटों पर भी स्थापित किया जा सकता है।
5. बेहतर सुरक्षा (Enhanced Safety)
- निम्न और स्थिर प्रतिरोध सुनिश्चित करता है कि दोष करंट (Fault Current) या आकाशीय बिजली का करंट तेजी से और सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित हो जाए।
- यह विद्युत उपकरणों और मानव जीवन दोनों के लिए उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है।
27. रासायनिक भूयोजन के नुकसान?
Ans.
रासायनिक भूयोजन (Chemical Weathering) के नुकसान
रासायनिक भूयोजन (चट्टानों का रासायनिक क्रिया द्वारा टूटना) पृथ्वी की सतह को आकार देने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव या नुकसान भी हो सकते हैं:
- भूस्खलन (Landslides) और शैलस्खलन (Rockslides) का खतरा: रासायनिक भूयोजन चट्टानों और मिट्टी को कमजोर करता है। चट्टानों के टूटने से बड़े पैमाने पर मलबे का निर्माण होता है जो गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर खिसक सकता है, जिससे भूस्खलन और शैलस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है, जो मानव जीवन और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- अवसंरचना का क्षरण (Degradation of Infrastructure): यह इमारतों, पुलों और सड़कों जैसे मानव निर्मित संरचनाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। उदाहरण के लिए, अम्लीय वर्षा (रासायनिक भूयोजन का एक रूप) चूना पत्थर या संगमरमर से बनी इमारतों और स्मारकों को घोल सकती है, जिससे उनका क्षरण होता है।
- खनिजों का विमोचन और प्रदूषण (Release of Minerals and Pollution): रासायनिक भूयोजन चट्टानों से हानिकारक खनिजों और रसायनों को पर्यावरण में मुक्त कर सकता है। ये घुलनशील पदार्थ मिट्टी और जल स्रोतों में मिलकर प्रदूषण पैदा कर सकते हैं, जो जीवित जीवों (मनुष्यों सहित) के लिए हानिकारक हो सकता है।
- मृदा की उर्वरता में कमी (Reduction in Soil Fertility): कुछ स्थितियों में, पानी में घुलनशील पोषक तत्वों (जैसे लवण) को चट्टानों से हटाकर बहा ले जाने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उसकी उर्वरता कम हो सकती है।
- जंग (Rusting): ऑक्सीकरण (रासायनिक भूयोजन का एक प्रकार) लोहे युक्त खनिजों में जंग लगने के लिए जिम्मेदार है। यह प्रक्रिया लोहे की संरचनाओं को कमजोर और नष्ट कर सकती है।
संक्षेप में,
रासायनिक भूयोजन भू-आकृतियों को बदलने और मिट्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन साथ ही यह प्राकृतिक और मानव निर्मित संरचनाओं को कमजोर करने का कारण भी बन सकता है, जिससे आपदाएँ और प्रदूषण होते हैं।
28. रासायनिक भू-संपर्कन का निर्माण?
Ans.
रासायनिक भू-संपर्कन का निर्माण (Chemical Earthing Construction)
रासायनिक भू-संपर्कन (Chemical Earthing) बिजली के उपकरणों और प्रणालियों को सुरक्षित रूप से ग्राउंड करने की एक आधुनिक तकनीक है। यह पारंपरिक भू-संपर्कन (जिसमें कोयला और नमक का उपयोग होता था) से बेहतर मानी जाती है क्योंकि इसमें कम प्रतिरोध (low resistance) का मार्ग बनता है और यह कम रखरखाव (maintenance-free) वाली होती है।
रासायनिक भू-संपर्कन के निर्माण की प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
1. स्थल का चयन और गड्ढा खोदना
- स्थान का चयन: एक उपयुक्त स्थान का चयन करें जो किसी भी इमारत से कम से कम 1.5 मीटर दूर हो और जहाँ की मिट्टी में नमी बनी रहे।
- गड्ढा खोदना: एक निर्धारित आकार (आमतौर पर 500 x 500 x 200 मिमी) का गड्ढा खोदें। इस गड्ढे के केंद्र में, इलेक्ट्रोड को लगाने के लिए लगभग 100 मिमी व्यास और 2.8 से 3.5 मीटर गहराई का एक लंबवत (vertical) छेद बनाया जाता है। गहराई मिट्टी के प्रकार और प्रतिरोधकता पर निर्भर करती है।
2. इलेक्ट्रोड की स्थापना
- इलेक्ट्रोड डालना: कॉपर या जस्ती लोहा (GI) से बने विशेष इलेक्ट्रोड (रॉड या पाइप) को लंबवत छेद के केंद्र में डाला जाता है। इलेक्ट्रोड का ऊपरी सिरा कनेक्शन के लिए गड्ढे के ऊपर तक पहुंचना चाहिए।
3. रासायनिक यौगिक से भरण (Chemical Backfilling)
- अर्थ एन्हांसमेंट सामग्री (Earthing Enhancement Material): गड्ढे और छेद को भरने के लिए बेंटोनाइट या ग्रेफाइट आधारित जैसे विशेष चालक रासायनिक यौगिकों (conductive chemical compounds) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें अर्थ एन्हांसमेंट सामग्री (EEM) या बैकफिल कंपाउंड (BFC) कहा जाता है।
- भरण प्रक्रिया: EEM को पानी के साथ मिलाकर गारा (slurry) के रूप में या पाउडर के रूप में इलेक्ट्रोड के चारों ओर भरा जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि यौगिक इलेक्ट्रोड को पूरी लंबाई में अच्छी तरह से ढक ले। यह यौगिक मिट्टी की चालकता को बढ़ाता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे भू-संपर्कन प्रतिरोध कम हो जाता है।
4. कनेक्शन और अंतिम भरण
- कनेक्शन: इलेक्ट्रोड के ऊपरी सिरे को मुख्य अर्थिंग बसबार (main earthing busbar) से एक उपयुक्त आकार के कॉपर स्ट्रिप या तार के साथ जोड़ा जाता है। यह कनेक्शन थर्मल वेल्डिंग (Exothermic Welding) जैसी मजबूत और कम प्रतिरोध वाली विधि से किया जाता है।
- गड्ढा बंद करना: शेष गड्ढे को सामान्य मिट्टी से भर दिया जाता है। इलेक्ट्रोड के शीर्ष पर रखरखाव के लिए एक अर्थ पिट चैंबर (Earth Pit Chamber) या ढक्कन स्थापित किया जाता है।
- परीक्षण: स्थापना के बाद, भू-संपर्कन प्रतिरोध (Earth Resistance) को एक अर्थ टेस्टर (Earth Tester) का उपयोग करके मापा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह निर्धारित मानकों के भीतर है।
यह प्रणाली भू-संपर्कन प्रतिरोध को कम करती है, उपकरण और मानव जीवन को विद्युत दोषों और सर्ज (surges) से सुरक्षा प्रदान करती है।
29. रासायनिक अर्थिंग का कार्य क्या है?
Ans.
रासायनिक भू-संपर्कन (Chemical Earthing) का मुख्य कार्य विद्युत दोष धाराओं (electrical fault currents) को पृथ्वी में सुरक्षित रूप से प्रवाहित करने के लिए एक विश्वसनीय और कम प्रतिरोध (low resistance) वाला मार्ग प्रदान करना है।
रासायनिक भू-संपर्कन के कार्य और उद्देश्य
रासायनिक भू-संपर्कन प्रणाली, पारंपरिक अर्थिंग की तुलना में मिट्टी की चालकता (conductivity) को बढ़ाने के लिए विशेष अर्थ एन्हांसमेंट यौगिकों (जैसे बेंटोनाइट या ग्रेफाइट-आधारित पाउडर) का उपयोग करती है, जिससे इसके कार्य अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
1. सुरक्षा प्रदान करना (Protection)
- विद्युत झटके से सुरक्षा: यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण के धात्विक आवरण (metallic body) में किसी दोष के कारण आने वाला लीकेज करंट (leakage current) तुरंत पृथ्वी में चला जाए। यह किसी व्यक्ति को गंभीर विद्युत आघात लगने से बचाता है।
- उपकरणों की सुरक्षा: यह अत्यधिक दोष धाराओं (जैसे शॉर्ट सर्किट या लाइटनिंग स्ट्राइक) को तेज़ी से जमीन में फैलाकर महंगे बिजली के उपकरणों और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जलने या क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।
- आग से बचाव: करंट के रिसाव या ओवरहीटिंग के कारण होने वाले आग के जोखिम को कम करता है।
2. निम्न प्रतिरोध बनाए रखना (Maintaining Low Resistance)
- चालकता बढ़ाना: इस्तेमाल किए गए रासायनिक यौगिक मिट्टी की प्रतिरोधकता (soil resistivity) को काफी हद तक कम कर देते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दोष करंट को जमीन में प्रवाहित होने के लिए एक निम्न-प्रतिबाधा (low-impedance) पथ मिलता है।
- नमी बनाए रखना: ये यौगिक नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं। नमी चालकता के लिए आवश्यक है, जिससे सूखे मौसम या शुष्क मिट्टी की स्थिति में भी अर्थिंग प्रतिरोध स्थिर बना रहता है।
3. वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability)
- यह बिजली के सिस्टम के तटस्थ बिंदु (neutral point) को पृथ्वी के संदर्भ में एक स्थिर शून्य विभव (zero potential) पर बनाए रखने में मदद करता है, जिससे पूरे सिस्टम में वोल्टेज की स्थिरता सुनिश्चित होती है।
30. रासायनिक अर्थिंग का उपयोग?
Ans.
रासायनिक भू-संपर्कन (Chemical Earthing) का उपयोग मुख्य रूप से उन सभी स्थानों पर किया जाता है जहाँ बिजली की सुरक्षा, उपकरणों के बचाव और कम रखरखाव वाले, स्थिर (stable) भू-संपर्कन प्रतिरोध की आवश्यकता होती है।
यह पारंपरिक भू-संपर्कन प्रणालियों (कोयला और नमक) की तुलना में अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है।
रासायनिक अर्थिंग के प्रमुख अनुप्रयोग क्षेत्र
रासायनिक अर्थिंग विशेष रूप से उन स्थानों पर बहुत प्रभावी है जहाँ की मिट्टी की स्थिति चुनौतीपूर्ण होती है।
1. शुष्क और पथरीले क्षेत्र (Dry and Rocky Areas)
- कम नमी वाली जगहें: जहाँ की मिट्टी सूखी होती है, जैसे पहाड़ी या रेगिस्तानी इलाके। रासायनिक यौगिक (जैसे बेंटोनाइट) नमी को अवशोषित करके रखते हैं, जिससे साल भर कम भू-संपर्कन प्रतिरोध बना रहता है, जो पारंपरिक अर्थिंग में संभव नहीं होता।
- पथरीली जमीन (Rocky Land): कठोर या पथरीली मिट्टी में, जहाँ इलेक्ट्रोड को बहुत गहराई तक गाड़ना मुश्किल होता है, वहाँ भी रासायनिक यौगिक बेहतर चालकता प्रदान करते हैं।
2. औद्योगिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोग (Industrial and Commercial Applications)
रासायनिक अर्थिंग का उपयोग उच्च सुरक्षा और विश्वसनीयता की मांग वाले लगभग सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में होता है:
- पावर सबस्टेशन और ट्रांसफार्मर: उच्च वोल्टेज दोष (faults) को सुरक्षित रूप से खत्म करने के लिए।
- दूरसंचार टॉवर और डेटा सेंटर: संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिजली के उछाल (surges) और बिजली गिरने से बचाने के लिए, जहाँ प्रतिरोध का मान बहुत कम होना आवश्यक है।
- सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plants): रूफटॉप सोलर सहित सभी सोलर इंस्टॉलेशन्स में उपकरणों की सुरक्षा और प्रणाली की स्थिरता के लिए।
- विनिर्माण उद्योग: भारी मशीनों और औद्योगिक मोटर जैसे उपकरणों की सुरक्षा के लिए।
3. आवासीय और सामान्य उपयोग
- आजकल घरों और आवासीय इमारतों में भी रासायनिक अर्थिंग का उपयोग बढ़ रहा है क्योंकि यह लगभग रखरखाव-मुक्त (maintenance-free) होती है और एक स्थिर भू-संपर्कन प्रतिरोध प्रदान करती है।
रासायनिक अर्थिंग को इसलिए प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह:
- उच्च चालकता (High Conductivity) प्रदान करती है।
- पारंपरिक नमक-कोयला अर्थिंग की तुलना में जंग (Corrosion) की दर को कम करती है।
- भू-संपर्कन प्रतिरोध को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखती है।
31. रखरखाव मुक्त अर्थिंग क्या है?
Ans.
रखरखाव मुक्त अर्थिंग (Maintenance-Free Earthing) एक आधुनिक भू-संपर्कन प्रणाली है जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि उसे न्यूनतम या शून्य आवधिक रखरखाव (periodic maintenance) की आवश्यकता होती है। इसे अक्सर रासायनिक भू-संपर्कन (Chemical Earthing) के रूप में जाना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
पारंपरिक अर्थिंग (जिसमें कोयला और नमक का उपयोग होता है) को प्रभावी बनाए रखने के लिए समय-समय पर गड्ढे में पानी डालना पड़ता है ताकि चालकता बनी रहे। इसके विपरीत, रखरखाव मुक्त अर्थिंग निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं के कारण बेहतर प्रदर्शन करती है:
-
विशेष रासायनिक यौगिक: इसमें बेंटोनाइट या ग्रेफाइट आधारित जैसे विशेष अर्थ एन्हांसमेंट यौगिकों (Earthing Enhancement Compounds - EEC/BFC) का उपयोग किया जाता है। ये यौगिक:
- नमी बनाए रखते हैं: इनमें अत्यधिक आर्द्रता-अवशोषण (hygroscopic) क्षमता होती है, जो सूखे मौसम में भी नमी को पकड़कर रखती है।
- स्थिर प्रतिरोध: यह सुनिश्चित करते हैं कि भू-संपर्कन प्रतिरोध का मान लंबे समय तक स्थिर और कम बना रहे।
- उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रोड: इसमें आमतौर पर कॉपर-बॉन्डेड रॉड या विशेष जीआई (GI) पाइप का उपयोग किया जाता है जो गैर-संक्षारक (non-corrosive) होते हैं और पारंपरिक इलेक्ट्रोड की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं।
- दीर्घायु (Long Life): उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग और रासायनिक यौगिकों की उपस्थिति के कारण, इस प्रणाली का जीवनकाल पारंपरिक अर्थिंग की तुलना में बहुत लंबा होता है।
- कम पानी की आवश्यकता: चूंकि रासायनिक यौगिक नमी को बनाए रखते हैं, इसलिए पारंपरिक अर्थिंग की तरह इसमें नियमित रूप से पानी डालने की आवश्यकता नहीं होती है।
संक्षेप में,
रखरखाव मुक्त अर्थिंग एक उच्च-प्रदर्शन प्रणाली है जो कम प्रतिरोध, उच्च विश्वसनीयता और लंबे परिचालन जीवन के लिए डिज़ाइन की गई है।
32. अर्थिंग प्रतिरोध का विशिष्ट मान क्या है?
Ans.
अर्थिंग प्रतिरोध का कोई एक विशिष्ट मान (single value) नहीं है; यह मान संस्थापन (Installation) के प्रकार, उपकरण की संवेदनशीलता और स्थानीय विद्युत नियमों (Electrical Codes) के आधार पर अलग-अलग होता है।
अर्थिंग का सिद्धांत यह है कि प्रतिरोध का मान जितना कम हो, उतना बेहतर है, क्योंकि यह दोष धारा (fault current) को तेज़ी से और सुरक्षित रूप से ज़मीन में प्रवाहित होने देता है।
आदर्श रूप से, यह मान शून्य (0) ओम होना चाहिए, जो व्यवहार में असंभव है।
विभिन्न प्रतिष्ठानों के लिए अधिकतम अनुमेय मान
भारत में, विभिन्न प्रतिष्ठानों के लिए अधिकतम अनुमेय भू-संपर्कन प्रतिरोध मान (Maximum Permissible Earth Resistance Value) निम्नलिखित हैं (IS 3043 और अन्य मानकों के अनुसार):
|
संस्थापन का प्रकार
|
अधिकतम अनुमेय प्रतिरोध मान
|
|
बड़े विद्युत केंद्र (Large Power Stations)
|
0.5 ओम (Omega)
|
|
प्रमुख सब-स्टेशन (Major Sub-stations)
|
1.0 ओम (Omega)
|
|
छोटे सब-स्टेशन (Small Sub-stations)
|
2.0 ओम (Omega)
|
|
घरेलू और छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (Domestic/Small Commercial)
|
5.0 ओम (Omega) से कम
|
|
अन्य सभी सामान्य स्थितियाँ
|
8.0 ओम (Omega) तक
|
|
टेलीकॉम टावर / संवेदनशील उपकरण
|
1.0 ओम (Omega) से कम
|
सामान्य दिशानिर्देश
- राष्ट्रीय विद्युत कोड (National Electrical Code - NEC) और IEEE जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं आमतौर पर 5.0 ओम (Omega) या उससे कम के मान को सुरक्षित और प्रभावी मानती हैं।
- घरेलू वायरिंग (Domestic Wiring): आमतौर पर 5 Omega से कम होना चाहिए।
- उच्च वोल्टेज और संवेदनशील उपकरण: डेटा सेंटर, अस्पताल, और दूरसंचार जैसे संवेदनशील उपकरणों वाले स्थानों के लिए, 1 Omega या उससे कम प्रतिरोध को लक्षित किया जाता है।
33. अर्थिंग प्रतिरोध को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
Ans.
अर्थिंग प्रतिरोध ({R}_{{अर्थ}}) को मुख्य रूप से दो प्रमुख कारक प्रभावित करते हैं: मिट्टी की प्रतिरोधकता और इलेक्ट्रोड की ज्यामिति (आकृति और आकार)।
अर्थिंग प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक
1. मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity)
मिट्टी की प्रतिरोधकता (rho) सबसे महत्वपूर्ण कारक है। यह मिट्टी का वह गुण है जो उसमें से विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। मिट्टी की प्रतिरोधकता को कई उप-कारक प्रभावित करते हैं:
-
मिट्टी में नमी का स्तर (Moisture Content):
- नमी मिट्टी की चालकता (Conductivity) को बढ़ाती है और प्रतिरोधकता को कम करती है।
- सूखी मिट्टी में प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
- लगभग 15% नमी के बाद, प्रतिरोध में कमी धीमी हो जाती है।
- मिट्टी का रासायनिक संघटन (Chemical Composition / Dissolved Salts):
- मिट्टी में नमक, लवण और खनिज (जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स) की उपस्थिति चालकता को बढ़ाती है और प्रतिरोध को कम करती है। यही कारण है कि पारंपरिक अर्थिंग में नमक और कोयले का उपयोग होता था।
-
मिट्टी का तापमान (Temperature):
- तापमान बढ़ने पर आयनिक गतिशीलता (ionic mobility) बढ़ती है, जिससे प्रतिरोधकता कम होती है।
- तापमान जब पानी के हिमांक बिंदु (Freezing Point) के करीब पहुँचता है, तो मिट्टी की नमी जम जाती है, जिससे प्रतिरोधकता तेजी से बढ़ जाती है।
-
मिट्टी की संरचना (Soil Composition/Type):
- चिकनी मिट्टी (Clay) में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक होती है, इसलिए इसमें प्रतिरोध कम होता है।
- रेतीली या पथरीली मिट्टी (Sandy/Rocky Soil) में नमी कम होती है, जिससे प्रतिरोध अधिक होता है।
- मौसमी बदलाव (Seasonal Variations):
- सूखे मौसम में नमी कम होने से प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि बरसात के मौसम में यह घटता है।
2. इलेक्ट्रोड की ज्यामिति और स्थिति (Electrode Geometry and Configuration)
- इलेक्ट्रोड की सामग्री (Material):
- इलेक्ट्रोड की सामग्री (जैसे तांबा/कॉपर या जस्ती लोहा/GI) की अपनी चालकता प्रतिरोध को प्रभावित करती है, हालांकि मुख्य योगदान मिट्टी से आता है।
- इलेक्ट्रोड की गहराई (Depth):
- इलेक्ट्रोड को जितना गहरा गाड़ा जाता है, प्रतिरोध उतना ही कम होता है, क्योंकि गहरी मिट्टी में नमी और तापमान अधिक स्थिर होते हैं।
-
इलेक्ट्रोड की लंबाई और व्यास (Length and Diameter):
- इलेक्ट्रोड की लंबाई बढ़ाने से प्रतिरोध कम होता है, यह व्यास बढ़ाने की तुलना में अधिक प्रभावी तरीका है।
- इलेक्ट्रोड का व्यास बढ़ाने से भी प्रतिरोध घटता है।
- इलेक्ट्रोड की संख्या और रिक्ति (Number and Spacing):
- यदि एक से अधिक इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है, तो उन्हें पर्याप्त दूरी पर (उनकी लंबाई के कम से कम दोगुने पर) स्थापित करना चाहिए ताकि उनके प्रभावी प्रतिरोध क्षेत्र (effective resistance areas) ओवरलैप न हों, जिससे कुल अर्थिंग प्रतिरोध कम हो जाए।
34. अर्थिंग प्रतिरोध को कैसे कम करें?
Ans.
अर्थिंग प्रतिरोध ({R}_{{अर्थ}}) को कम करने के लिए मुख्य रूप से दो रणनीतियों पर काम किया जाता है: इलेक्ट्रोड की ज्यामिति को बदलना और मिट्टी की प्रतिरोधकता को कम करना।
इन तरीकों का उद्देश्य दोष धारा (fault current) को पृथ्वी में प्रवाहित होने के लिए एक बड़ा, स्थिर और कम प्रतिरोध वाला मार्ग प्रदान करना है।
I. मिट्टी की प्रतिरोधकता कम करके (Reducing Soil Resistivity)
मिट्टी की प्रतिरोधकता को कम करना अर्थिंग प्रतिरोध को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
-
नमी बनाए रखना (Maintain Moisture):
- सूखे मौसम में अर्थिंग पिट में समय-समय पर पानी डालना, क्योंकि नमी प्रतिरोध को कम करती है।
- रखरखाव मुक्त (केमिकल) अर्थिंग का उपयोग करना, जिसमें नमी को अवशोषित करने वाले और चालकता बढ़ाने वाले विशेष यौगिक (जैसे बेंटोनाइट, अर्थ एन्हांसमेंट कंपाउंड) होते हैं।
-
रासायनिक उपचार (Chemical Treatment):
-
पारंपरिक अर्थिंग में, नमक (Salt) और कोयला/चारकोल (Charcoal) की वैकल्पिक परतें इलेक्ट्रोड के चारों ओर डाली जाती हैं।
- नमक एक इलेक्ट्रोलाइट के रूप में कार्य करके चालकता को बढ़ाता है और प्रतिरोध को कम करता है।
- कोयला नमी को बनाए रखने में मदद करता है।
- विशेष फिलिंग कंपाउंड (Special Filling Compounds):
- आधुनिक प्रणालियों में, गैर-संक्षारक (non-corrosive), उच्च चालकता वाले केमिकल पाउडर का उपयोग किया जाता है। ये यौगिक नमी को बनाए रखते हैं और प्रतिरोधकता को स्थायी रूप से कम करते हैं।
II. इलेक्ट्रोड की ज्यामिति बदलकर (Changing Electrode Geometry)
इलेक्ट्रोड का डिज़ाइन बदलकर भी अर्थिंग प्रतिरोध को कम किया जा सकता है:
- गहराई बढ़ाना (Increase Depth):
- इलेक्ट्रोड को अधिक गहराई तक गाड़ना। गहरी मिट्टी में तापमान और नमी का स्तर अधिक स्थिर होता है, जिससे प्रतिरोध कम हो जाता है।
- इलेक्ट्रोड की लंबाई बढ़ाना (Increase Electrode Length):
- लंबी रॉड या पाइप का उपयोग करने से पृथ्वी के साथ संपर्क क्षेत्र (Contact Area) बढ़ जाता है, जिससे प्रतिरोध सीधे कम होता है।
-
समानांतर में कई इलेक्ट्रोड का उपयोग (Use Multiple Electrodes in Parallel):
- एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर (आमतौर पर इलेक्ट्रोड की लंबाई के कम से कम दोगुने पर) दो या दो से अधिक अर्थ इलेक्ट्रोड स्थापित करना और उन्हें समानांतर (Parallel) में जोड़ना।
- यह विधि कुल प्रतिरोध को काफी हद तक कम कर देती है, ठीक वैसे ही जैसे समानांतर में जुड़े प्रतिरोधों का कुल प्रतिरोध कम होता है।
- बड़े प्रतिष्ठानों में इसे अर्थिंग ग्रिड (Earthing Grid) बनाकर किया जाता है।
- इलेक्ट्रोड का सतह क्षेत्र बढ़ाना (Increase Surface Area):
- प्लेट अर्थिंग में बड़ी प्लेट का उपयोग करके या पाइप/रॉड का व्यास बढ़ाकर संपर्क क्षेत्र बढ़ाया जाता है। (हालांकि, लंबाई बढ़ाना व्यास बढ़ाने से अधिक प्रभावी होता है।)
इन तरीकों का सही संयोजन साइट की मिट्टी की स्थिति और वांछित प्रतिरोध मान पर निर्भर करता है।
35. पृथ्वी इलेक्ट्रोड का कार्य क्या है?
Ans.
पृथ्वी इलेक्ट्रोड (Earth Electrode), जिसे ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड भी कहते हैं, एक धातु का संवाहक (metallic conductor) होता है जिसे जमीन के अंदर गाड़ा जाता है। यह विद्युत प्रणाली को पृथ्वी से जोड़ने का भौतिक माध्यम (physical link) है।
पृथ्वी इलेक्ट्रोड का मुख्य कार्य निम्नलिखित दो उद्देश्यों को पूरा करना है:
-
सुरक्षा (Safety): यह विद्युत दोष (Electrical Faults) जैसे शॉर्ट सर्किट या इन्सुलेशन विफलता की स्थिति में खतरनाक दोष धारा (fault current) को सीधे और सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करने के लिए सबसे कम प्रतिरोध वाला मार्ग प्रदान करता है।
- यह उपकरण के धातु के शरीर (Metal Body) पर अत्यधिक आवेश (charge) या उच्च विभव (High Potential) के निर्माण को रोकता है।
- यह लोगों को बिजली के झटके (Electric Shock) से बचाता है, क्योंकि दोष धारा मानव शरीर के बजाय निम्न प्रतिरोध वाले अर्थिंग मार्ग से होकर गुजर जाती है।
-
प्रणाली का स्थिरीकरण (System Stabilization): यह विद्युत प्रणाली के विभव (Voltage) को पृथ्वी के संदर्भ में शून्य (Zero) विभव पर बनाए रखने में मदद करता है।
- यह तड़ित (Lightning) और क्षणिक वोल्टता स्पाइक्स (Transient Voltage Spikes) के कारण उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त वोल्टता को अवशोषित करके उपकरण की सुरक्षा करता है।
- यह संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक स्थिर संदर्भ बिंदु (stable reference point) प्रदान करके प्रणाली के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।
संक्षेप में,
पृथ्वी इलेक्ट्रोड एक सुरक्षा वाल्व (Safety Valve) के रूप में कार्य करता है, जो गलती होने पर अतिरिक्त विद्युत ऊर्जा को पृथ्वी की विशाल चालक क्षमता में तुरंत समाप्त (Dissipate) कर देता है।
36. न्यूट्रल अर्थिंग क्या है?
Ans.
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing) एक प्रक्रिया है जिसमें विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट को सीधे पृथ्वी (Ground) से जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से सबस्टेशन या डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर की जाती है।
न्यूट्रल वायर का सामान्य कार्य लोड के माध्यम से फेज करंट को रिटर्न पाथ (Return Path) प्रदान करना होता है, ताकि सर्किट पूरा हो सके। न्यूट्रल अर्थिंग यह सुनिश्चित करती है कि यह रिटर्न पाथ स्थायी रूप से शून्य विभव (Zero Potential) पर बना रहे, जो पृथ्वी का विभव होता है।
न्यूट्रल अर्थिंग के उद्देश्य (Purposes of Neutral Earthing)
न्यूट्रल अर्थिंग का उद्देश्य सुरक्षा के साथ-साथ विद्युत प्रणाली के प्रदर्शन को भी बेहतर बनाना है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
-
वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization):
- न्यूट्रल को अर्थ करने से फेज और न्यूट्रल के बीच का विभव (जैसे 220V) स्थिर बना रहता है, क्योंकि न्यूट्रल का विभव पृथ्वी के विभव (शून्य) पर फिक्स हो जाता है।
- यह ग्राउंड फॉल्ट (Ground Fault) की स्थिति में भी स्वस्थ फेज (Healthy Phases) पर वोल्टेज वृद्धि को रोकता है, जिससे उपकरणों को क्षति से बचाया जा सकता है।
-
दोष धारा का त्वरित निष्कासन (Quick Clearance of Fault Current):
- जब फेज तार सीधे जमीन से संपर्क करता है (ग्राउंड फॉल्ट), तो न्यूट्रल अर्थिंग दोष धारा (Fault Current) को तुरंत और सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करने के लिए एक सीधा मार्ग प्रदान करती है।
- यह फ़ॉल्ट धारा सुरक्षा उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर) को ट्रिप होने में मदद करती है, जिससे आपूर्ति जल्दी कट जाती है और प्रणाली सुरक्षित रहती है।
- आकाशीय बिजली और क्षणिक विभव से सुरक्षा (Protection from Lightning and Transients):
- ट्रांसफार्मर या सिस्टम पर आकाशीय बिजली गिरने या अचानक स्विचिंग (Switching) के कारण उत्पन्न होने वाले उच्च विभव (High Voltage Surges) को न्यूट्रल अर्थिंग के माध्यम से सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित किया जा सकता है।
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral) और उपकरण अर्थिंग (Earth) में मुख्य अंतर
हालांकि दोनों में पृथ्वी इलेक्ट्रोड का उपयोग होता है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हैं:
|
विशेषता
|
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing)
|
उपकरण अर्थिंग (Equipment/Body Earthing)
|
|
उद्देश्य
|
सिस्टम के न्यूट्रल विभव को स्थिर करना और फॉल्ट करंट के लिए रिटर्न पाथ देना।
|
उपकरणों के धातु के बाह्य भाग को छूने वाले व्यक्ति को बिजली के झटके से बचाना।
|
|
कनेक्शन
|
ट्रांसफार्मर या जनरेटर के स्टार पॉइंट (Star Point) से।
|
उपकरण के धातु के शरीर/आवरण (Metal Body) से।
|
|
सामान्य स्थिति
|
सामान्य लोड पर इससे करंट प्रवाहित होता है।
|
सामान्य लोड पर इससे करंट प्रवाहित नहीं होता
|
37. न्यूट्रल अर्थिंग का उद्देश्य क्या है?
Ans.
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing) का मुख्य उद्देश्य विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी के शून्य विभव पर स्थिर रखना और दोषों (Faults) के दौरान उपकरणों तथा व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यहाँ न्यूट्रल अर्थिंग के प्राथमिक उद्देश्य दिए गए हैं:
1. वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization)
- स्थिर संदर्भ बिंदु (Stable Reference Point) बनाए रखना: न्यूट्रल को अर्थ करने से फेज और न्यूट्रल के बीच का कार्यकारी वोल्टेज (जैसे 220V) स्थिर बना रहता है, क्योंकि न्यूट्रल का विभव पृथ्वी के शून्य विभव (Zero Potential) पर फिक्स हो जाता है।
- ओवरवोल्टेज को रोकना: यदि किसी एक फेज में ग्राउंड फ़ॉल्ट होता है, तो न्यूट्रल अर्थिंग अन्य स्वस्थ फेजों पर अत्यधिक वोल्टेज वृद्धि (Overvoltage) को रोकती है, जिससे उपकरणों को क्षति से बचाया जा सकता है।
2. दोष धारा का त्वरित निष्कासन (Quick Fault Current Clearance)
- दोष धारा को मार्ग प्रदान करना: यह ग्राउंड फ़ॉल्ट (जैसे कि फेज का जमीन से छू जाना) की स्थिति में दोष धारा को वापस स्रोत (Source) तक बहने के लिए एक निम्न प्रतिरोध वाला, नियंत्रित मार्ग प्रदान करता है।
- सुरक्षा उपकरणों का संचालन (Operation of Protective Devices): जब दोष धारा इस मार्ग से बहती है, तो यह उच्च धारा सर्किट ब्रेकर (Circuit Breakers) या फ़्यूज़ को ट्रिप करने के लिए पर्याप्त होती है। इससे दोषपूर्ण भाग को तुरंत अलग किया जा सकता है, जिससे प्रणाली और उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
3. प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा (System Reliability and Safety)
- आकाशीय बिजली से सुरक्षा: आकाशीय बिजली (Lightning) या अचानक स्विचिंग के कारण उत्पन्न होने वाली क्षणिक वोल्टेज स्पाइक्स (Voltage Spikes) को न्यूट्रल अर्थिंग के माध्यम से सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करके उपकरणों को सुरक्षित रखा जाता है।
- लोड संतुलन (Load Balancing): असंतुलित लोड (Unbalanced Load) की स्थिति में भी न्यूट्रल विभव को शून्य पर बनाए रखता है, जिससे उपकरणों को अत्यधिक वोल्टेज से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
संक्षेप में,
न्यूट्रल अर्थिंग प्रणाली की सुरक्षा (System Protection) और कार्यक्षमता (Performance) दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
38. न्यूट्रल अर्थिंग के प्रकार क्या हैं?
Ans.
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing) के मुख्य प्रकार वे तरीके हैं जिनके द्वारा विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु (Neutral Point) को पृथ्वी से जोड़ा जाता है। प्रत्येक विधि फ़ॉल्ट करंट (Fault Current) की मात्रा और सिस्टम में ओवरवोल्टेज (Overvoltage) के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक अलग रास्ता प्रदान करती है।
प्रमुख न्यूट्रल अर्थिंग विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. ठोस अर्थिंग (Solid Grounding)
इसे प्रभावी अर्थिंग (Effective Grounding) भी कहा जाता है।
- विधि: न्यूट्रल पॉइंट को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिरोधक (Resistor) या प्रतिघातक (Reactor) के सीधे पृथ्वी से जोड़ा जाता है।
- विशेषता: यह फ़ॉल्ट होने पर दोष धारा को पृथ्वी में बहने के लिए सबसे कम प्रतिरोध वाला मार्ग प्रदान करता है।
- उपयोग: यह विधि आमतौर पर कम वोल्टेज (Low Voltage) प्रणालियों (600V से कम) और उच्च वोल्टेज (High Voltage) ट्रांसमिशन प्रणालियों (132 kV और उससे अधिक) में उपयोग की जाती है।
- लाभ: ओवरवोल्टेज को प्रभावी ढंग से कम करता है।
2. प्रतिरोध अर्थिंग (Resistance Grounding)
इस विधि में न्यूट्रल और पृथ्वी के बीच एक प्रतिरोधक डाला जाता है।
- विधि: न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी से एक प्रतिरोधक (Resistor) के माध्यम से जोड़ा जाता है।
- विशेषता: यह प्रतिरोधक ग्राउंड फ़ॉल्ट करंट की मात्रा को सीमित (Limit) करता है।
- उपयोग: यह मध्यम वोल्टेज (Medium Voltage) औद्योगिक प्रणालियों (2.4 kV से 33 kV) में आम है, जहाँ फ़ॉल्ट करंट को सीमित करना आवश्यक होता है।
-
दो प्रकार:
- निम्न प्रतिरोध अर्थिंग (Low Resistance Grounding): फ़ॉल्ट करंट को उच्च स्तर पर (लगभग 25 A से 600 A) सीमित करता है, ताकि सुरक्षा उपकरण (Protection Devices) तेजी से संचालित हो सकें।
- उच्च प्रतिरोध अर्थिंग (High Resistance Grounding): फ़ॉल्ट करंट को बहुत कम स्तर पर (लगभग 10 A से 25 A) सीमित करता है। इसका उपयोग प्रक्रिया निरंतरता (Process Continuity) वाले उद्योगों में किया जाता है, जहाँ एक ग्राउंड फ़ॉल्ट होने पर भी सिस्टम को तुरंत बंद नहीं करना होता है।
3. प्रतिघात अर्थिंग (Reactance Grounding)
- विधि: न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी से एक प्रतिघातक (Reactor) या प्रेरक (Inductor) के माध्यम से जोड़ा जाता है।
- विशेषता: यह प्रतिरोध की तुलना में फ़ॉल्ट करंट को सीमित करने के लिए अधिक प्रतिक्रिया (Reactance) प्रदान करता है, जिससे क्षणिक ओवरवोल्टेज को भी नियंत्रित किया जाता है।
- उपयोग: इसका उपयोग आमतौर पर बड़े जनरेटर (Generators) में किया जाता है, जहाँ फ़ॉल्ट करंट के कारण होने वाली यांत्रिक क्षति (Mechanical Damage) को कम करना आवश्यक होता है।
4. गुंजायमान अर्थिंग / पीटरसन कॉइल अर्थिंग (Resonant / Petersen Coil Earthing)
इसे अर्क दमन कॉइल (Arc Suppression Coil) अर्थिंग भी कहते हैं।
- विधि: न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी से एक परिवर्तनीय प्रतिघातक (Variable Reactor) के माध्यम से जोड़ा जाता है।
- विशेषता: इस प्रतिघातक को सिस्टम की कैपेसिटिव करंट (Capacitive Current) को रद्द करने के लिए ट्यून किया जाता है।
- लाभ: सिंगल लाइन-टू-ग्राउंड फ़ॉल्ट (Single Line-to-Ground Fault) होने पर, यह स्वचालित रूप से फ़ॉल्ट करंट को लगभग शून्य तक कम कर देता है, जिससे आर्क (Arc) स्वतः बुझ जाता है। यह सेवा की निरंतरता (Continuity of Service) को अधिकतम करता है।
5. अ-अर्थिंग या पृथक न्यूट्रल (Ungrounded or Isolated Neutral System)
- विधि: न्यूट्रल पॉइंट को जानबूझकर पृथ्वी से नहीं जोड़ा जाता है।
- विशेषता: यह तकनीकी रूप से अर्थिंग नहीं है, बल्कि एक सिस्टम कॉन्फ़िगरेशन है। फ़ॉल्ट करंट बहुत कम (केवल कैपेसिटिव) होता है।
- नुकसान: एक फ़ॉल्ट होने पर, अन्य फेजों पर अत्यधिक ओवरवोल्टेज (Line-to-Line Voltage) आ सकता है, जिससे इंसुलेशन फेल हो सकता है और दूसरा फ़ॉल्ट हो सकता है।
39. ठोस (प्रत्यक्ष) भूयोजन की व्याख्या करें?
Ans.
हाँ, मैं ठोस (प्रत्यक्ष) भूयोजन (Solid Grounding) की व्याख्या कर सकता हूँ।
ठोस (प्रत्यक्ष) भूयोजन की व्याख्या (Solid Grounding Explanation)
ठोस भूयोजन (Solid Grounding), जिसे प्रत्यक्ष भूयोजन (Direct Grounding) या प्रभावी भूयोजन (Effective Grounding) भी कहा जाता है, विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु (Neutral Point) को पृथ्वी से जोड़ने का सबसे सरल और सीधा तरीका है।
1. विधि (Method)
ठोस भूयोजन में, थ्री-फेज स्टार-संयोजित (Star-Connected) प्रणाली का न्यूट्रल बिंदु, जैसे कि ट्रांसफार्मर या जनरेटर का, किसी भी अतिरिक्त प्रतिरोधक (Resistor) या प्रतिघातक (Reactor) को शामिल किए बिना, एक बहुत कम प्रतिरोध वाले संवाहक (Conductor) के माध्यम से सीधे पृथ्वी इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाता है।
दूसरे शब्दों में:
2. उद्देश्य और विशेषताएँ (Purpose and Characteristics)
इस विधि का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राउंड फ़ॉल्ट (जमीन से संपर्क) होने पर फ़ॉल्ट करंट को पृथ्वी में बहने के लिए एक अत्यंत निम्न प्रतिरोध पथ मिले।
|
विशेषता
|
व्याख्या
|
|
फ़ॉल्ट करंट का स्तर
|
चूंकि प्रतिरोध बहुत कम होता है, इसलिए ग्राउंड फ़ॉल्ट करंट का मान बहुत अधिक होता है (यह थ्री-फेज शॉर्ट सर्किट करंट के करीब हो सकता है)।
|
|
वोल्टेज स्थिरीकरण
|
यह न्यूट्रल पॉइंट के विभव (Potential) को पृथ्वी के शून्य विभव पर सबसे प्रभावी ढंग से स्थिर करता है।
|
|
सुरक्षा उपकरणों का संचालन
|
उच्च फ़ॉल्ट करंट के कारण, फ़्यूज़ और सर्किट ब्रेकर जैसे सुरक्षा उपकरण तेजी से (Fast Acting) और विश्वसनीयता के साथ काम करते हैं।
|
|
ओवरवोल्टेज (Overvoltage) नियंत्रण
|
यह विधि आकाशीय बिजली या स्विचिंग के कारण होने वाले क्षणिक ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) को सबसे अधिक प्रभावी ढंग से सीमित करती है।
|
3. अनुप्रयोग (Applications)
ठोस भूयोजन मुख्य रूप से दो प्रकार की प्रणालियों में उपयोग किया जाता है:
- निम्न वोल्टेज (Low Voltage) वितरण प्रणालियाँ: जैसे कि घरेलू और वाणिज्यिक 415/240 V प्रणालियाँ। उच्च फ़ॉल्ट करंट तेजी से सुरक्षा उपकरणों को ट्रिप करने की अनुमति देता है, जिससे आग और बिजली के झटके का खतरा कम हो जाता है।
- उच्च वोल्टेज (High Voltage) ट्रांसमिशन प्रणालियाँ: बहुत उच्च वोल्टेज (जैसे 132 kV और उससे ऊपर) पर भी इसका उपयोग किया जाता है, क्योंकि यहाँ ओवरवोल्टेज नियंत्रण (जो यह विधि अच्छी तरह से करती है) प्राथमिकता होती है।
4. सीमाएँ (Limitations)
ठोस भूयोजन का मुख्य नुकसान यह है कि अत्यधिक उच्च फ़ॉल्ट करंट के कारण, यह ट्रांसफार्मर और जनरेटर वाइंडिंग को यांत्रिक और तापीय क्षति (Mechanical and Thermal Damage) पहुंचा सकता है।
इसलिए,
इसे मध्यम वोल्टेज की प्रणालियों में कम ही उपयोग किया जाता है जहाँ फ़ॉल्ट करंट को सीमित करने की आवश्यकता होती है।
40. प्रतिरोध अर्थिंग की व्याख्या करें?
Ans.
प्रतिरोध अर्थिंग (Resistance Grounding) एक न्यूट्रल अर्थिंग विधि है जिसमें विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु को पृथ्वी से एक प्रतिरोधक (Resistor) के माध्यम से जोड़ा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राउंड फ़ॉल्ट (Ground Fault) होने पर बहने वाली अत्यधिक दोष धारा (Fault Current) को सीमित करना है।
प्रतिरोध अर्थिंग की कार्यप्रणाली (How Resistance Grounding Works)
- प्रतिरोधक का समावेश: इस प्रणाली में, जनरेटर या ट्रांसफार्मर के स्टार पॉइंट (न्यूट्रल) और पृथ्वी के इलेक्ट्रोड के बीच एक उपयुक्त मान का प्रतिरोधक (Resistor) डाला जाता है।
- दोष धारा को सीमित करना: जब कोई फेज तार जमीन से संपर्क करता है, तो यह प्रतिरोधक दोष धारा के मार्ग में एक रुकावट पैदा करता है, जिससे धारा का मान कम हो जाता है।
- वोल्टेज पर नियंत्रण: यह ठोस अर्थिंग जितना प्रभावी ढंग से वोल्टेज को स्थिर नहीं करता है, लेकिन फिर भी स्वस्थ फेजों पर ओवरवोल्टेज को एक सुरक्षित सीमा तक नियंत्रित रखता है।
प्रतिरोध अर्थिंग के प्रकार (Types of Resistance Grounding)
प्रतिरोधक के मान के आधार पर, यह दो मुख्य प्रकारों में विभाजित है:
1. निम्न प्रतिरोध अर्थिंग (Low Resistance Grounding - LRG)
- प्रतिरोध मान: कम (आमतौर पर 2 Omega से 10 Omega के बीच)।
- फ़ॉल्ट करंट: यह दोष धारा को कुछ सौ एम्पीयर (जैसे 25 {A} से 600 {A}) तक सीमित करता है।
- उद्देश्य: फ़ॉल्ट करंट को पर्याप्त रूप से सीमित करना ताकि उपकरणों को अत्यधिक यांत्रिक क्षति न हो, लेकिन फिर भी सुरक्षा उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर) को तेजी से ट्रिप करने के लिए पर्याप्त उच्च रखना।
- उपयोग: यह मध्यम वोल्टेज औद्योगिक प्रणालियों (2.4 kV से 13.8 kV) में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
2. उच्च प्रतिरोध अर्थिंग (High Resistance Grounding - HRG)
- प्रतिरोध मान: उच्च (आमतौर पर कई सौ या हज़ार ओम)।
- फ़ॉल्ट करंट: यह दोष धारा को बहुत कम मान (आमतौर पर 10 {A} से भी कम) तक सीमित करता है।
- उद्देश्य: फ़ॉल्ट करंट को इतना कम रखना कि सुरक्षा उपकरण तुरंत ट्रिप न हों। इसका मुख्य उद्देश्य सेवा की निरंतरता (Continuity of Service) बनाए रखना है।
- उपयोग: उन औद्योगिक प्रक्रियाओं में जहाँ बिजली आपूर्ति का क्षणिक व्यवधान भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है (जैसे केमिकल प्लांट, डेटा सेंटर)। इस स्थिति में, ऑपरेटर को फ़ॉल्ट का पता लगाने और उसे मैन्युअल रूप से ठीक करने का समय मिल जाता है।
लाभ (Advantages)
- यांत्रिक क्षति में कमी: दोष धारा को सीमित करने के कारण जनरेटर और ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग को कम नुकसान होता है।
- ओवरवोल्टेज नियंत्रण: यह क्षणिक ओवरवोल्टेज को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- सुरक्षा उपकरणों का चयन: सुरक्षा उपकरणों (रिले) का चयन और ट्यूनिंग करना आसान हो जाता है, क्योंकि फ़ॉल्ट करंट का मान नियंत्रित होता है।
- HRG में निरंतरता: उच्च प्रतिरोध अर्थिंग में, पहले ग्राउंड फ़ॉल्ट पर सिस्टम को तुरंत बंद नहीं करना पड़ता है।
41. रिऐक्टेंस अर्थिंग की व्याख्या करें?
Ans.
रिऐक्टेंस अर्थिंग (Reactance Grounding) न्यूट्रल अर्थिंग की एक विधि है जिसमें विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु (Neutral Point) को पृथ्वी से एक प्रतिघातक (Reactor) या प्रेरक (Inductor) के माध्यम से जोड़ा जाता है।
रिऐक्टेंस अर्थिंग की कार्यप्रणाली (Working of Reactance Grounding)
- प्रतिघातक का समावेश: इस विधि में, ट्रांसफार्मर या जनरेटर के न्यूट्रल पॉइंट और पृथ्वी के इलेक्ट्रोड के बीच एक उपयुक्त मान का प्रेरक (Inductor) जोड़ा जाता है।
- दोष धारा को सीमित करना: यह प्रेरक (inductor) ग्राउंड फ़ॉल्ट (Ground Fault) होने पर बहने वाली दोष धारा के मार्ग में प्रतिघात (Reactance - X_L) प्रदान करता है। यह प्रतिघात, दोष धारा के मान को सीमित करता है।
- वोल्टेज पर प्रभाव: यह प्रणाली ठोस अर्थिंग की तुलना में दोष धारा को अधिक सीमित करती है, लेकिन प्रतिरोध अर्थिंग की तुलना में कम सीमित करती है।
ध्यान दें: प्रतिघात अर्थिंग का मुख्य लाभ यह है कि यह दोष धारा को सीमित करने के साथ-साथ क्षणों में होने वाले ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।
रिऐक्टेंस अर्थिंग के उद्देश्य (Purposes of Reactance Grounding)
- यांत्रिक क्षति को सीमित करना: अत्यधिक फ़ॉल्ट करंट के कारण जनरेटर या ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में होने वाली यांत्रिक विकृति (Mechanical Stress) को कम करना।
- ओवरवोल्टेज पर नियंत्रण: यह ठोस अर्थिंग जितना प्रभावी नहीं है, लेकिन फिर भी स्विचिंग (Switching) या लाइटनिंग (Lightning) के कारण उत्पन्न होने वाले क्षणिक ओवरवोल्टेज को सीमित करने में मदद करता है।
- दोष का पता लगाना: यह दोष धारा को इतना अधिक रखता है कि सुरक्षा उपकरण (रिले) विश्वसनीय रूप से काम कर सकें।
अनुप्रयोग और सीमाएँ (Applications and Limitations)
अनुप्रयोग (Applications)
- यह विधि आमतौर पर बड़े जनरेटरों और उच्च वोल्टेज (HV) पारेषण (Transmission) प्रणालियों में उपयोग की जाती है, जहाँ उपकरणों की यांत्रिक क्षति को नियंत्रित करना एक बड़ी चिंता होती है।
सीमाएँ (Limitations)
- रिऐक्टेंस अर्थिंग का मुख्य दोष यह है कि यह स्वस्थ फेजों पर वोल्टेज वृद्धि (Voltage Rise on Healthy Phases) को पूरी तरह से दबा नहीं पाता है। ग्राउंड फ़ॉल्ट के दौरान, स्वस्थ फेजों पर वोल्टेज 1.73 गुना (V_{L-L} / V_{L-N}) तक बढ़ सकता है। यह वृद्धि सिस्टम के इंसुलेशन के लिए खतरनाक हो सकती है। (इस सीमा के कारण, इसे अक्सर ठोस अर्थिंग की तुलना में कम प्रभावी माना जाता है)।
सारांश (Summary)
|
विधि
|
न्यूट्रल से पृथ्वी का कनेक्शन
|
फ़ॉल्ट करंट का स्तर
|
मुख्य उद्देश्य
|
|
ठोस (Solid)
|
सीधा तार (Coductor)
|
बहुत अधिक (सबसे कम प्रतिरोध)
|
ओवरवोल्टेज का अधिकतम नियंत्रण
|
|
प्रतिरोध (Resistance)
|
प्रतिरोधक (Resistor) के माध्यम से
|
कम या बहुत कम (नियंत्रित)
|
फ़ॉल्ट करंट को सीमित करना, सेवा की निरंतरता (HRG)
|
|
रिऐक्टेंस (Reactance)
|
प्रेरक (Inductor) के माध्यम से
|
मध्यम (प्रतिरोध से अधिक, ठोस से कम)
|
यांत्रिक क्षति को सीमित करना और क्षणिक वोल्टेज नियंत्रण
|
42. अनुनाद (पीटरसन कॉइल) अर्थिंग की व्याख्या करें?
Ans.
अनुनाद अर्थिंग (Resonant Earthing), जिसे पीटरसन कॉइल अर्थिंग (Petersen Coil Earthing) या आर्क दमन कॉइल अर्थिंग (Arc Suppression Coil Earthing) भी कहते हैं, न्यूट्रल भूयोजन (Neutral Grounding) की एक विशेष विधि है जिसका उपयोग मुख्य रूप से पारेषण (Transmission) और वितरण (Distribution) प्रणालियों में सेवा की निरंतरता (Continuity of Service) बनाए रखने के लिए किया जाता है।
1. पीटरसन कॉइल अर्थिंग की कार्यप्रणाली
यह विधि विद्युत अनुनाद (Electrical Resonance) के सिद्धांत पर आधारित है।
विधि:
न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी से एक विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए प्रेरक (Inductor) के माध्यम से जोड़ा जाता है, जिसे पीटरसन कॉइल (Petersen Coil) या ग्राउंड फ़ॉल्ट न्यूट्रलाइज़र (Ground Fault Neutralizer) कहा जाता है। यह कॉइल अक्सर परिवर्तनीय (Variable) होती है।
अनुनाद का सिद्धांत:
जब किसी फेज कंडक्टर में सिंगल लाइन-टू-ग्राउंड फ़ॉल्ट (Single Line-to-Ground Fault) होता है, तो:
- फ़ॉल्टेड फेज से जमीन की ओर एक प्रेरक फ़ॉल्ट करंट (I_L) प्रवाहित होता है।
- इसी समय, स्वस्थ फेजों से जमीन की ओर एक संधारित्री लीकेज करंट (I_C) बहता है (सिस्टम के कंडक्टरों और जमीन के बीच मौजूद कैपेसिटेंस के कारण)।
- पीटरसन कॉइल को इस तरह से ट्यून किया जाता है कि इसका प्रेरक प्रतिघात (X_L) स्वस्थ फेजों के संधारित्री प्रतिघात (X_C) के बराबर हो जाता है, जिससे अनुनाद (Resonance) की स्थिति उत्पन्न होती है: X_L = X_C।
- चूंकि प्रेरक धारा (I_L) संधारित्री धारा (I_C) के लगभग बराबर और ठीक विपरीत फेज में होती है, वे एक-दूसरे को रद्द (Cancel Out) कर देती हैं।
परिणाम:
दोष स्थल पर बहने वाली अवशिष्ट दोष धारा (Residual Fault Current) लगभग शून्य हो जाती है। यह शून्य के करीब की धारा दोष चाप (Fault Arc) को स्वयं ही बुझा देती है।
2. अनुनाद अर्थिंग के लाभ (Advantages)
- सेवा की निरंतरता (Maximum Service Continuity): सबसे बड़ा लाभ यह है कि पहले ग्राउंड फ़ॉल्ट के दौरान आपूर्ति बाधित नहीं होती है। चाप स्वयं बुझ जाता है, जिससे सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करने की आवश्यकता नहीं होती है।
- ओवरवोल्टेज नियंत्रण: यह ठोस अर्थिंग की तरह ओवरवोल्टेज को सीमित करने में प्रभावी है।
- पुनरावर्ती चाप (Restriking Arcs) से सुरक्षा: चाप के स्वतः बुझ जाने के कारण, पुनरावर्ती चाप की समस्या लगभग समाप्त हो जाती है।
3. सीमाएँ (Limitations)
- जटिलता और लागत: पीटरसन कॉइल एक परिवर्तनीय और जटिल उपकरण है जिसे सिस्टम की बदलती कैपेसिटेंस के साथ ट्यून करने की आवश्यकता होती है, जिससे लागत और रखरखाव बढ़ जाता है।
- दोहरे फ़ॉल्ट (Double Faults): यदि पहला ग्राउंड फ़ॉल्ट ठीक होने से पहले दूसरा ग्राउंड फ़ॉल्ट हो जाता है, तो यह विधि अप्रभावी हो जाती है और सिस्टम को अत्यधिक क्षति हो सकती है।
- उच्च वोल्टेज तक सीमित: यह विधि मुख्य रूप से उच्च और अतिरिक्त उच्च वोल्टेज प्रणालियों में ही प्रभावी होती है।
संक्षेप में:
अनुनाद अर्थिंग का प्राथमिक लक्ष्य ग्राउंड फ़ॉल्ट को नियंत्रित करके अत्यधिक विश्वसनीयता प्रदान करना है, भले ही इसके लिए अधिक जटिल उपकरणों और ट्यूनिंग की आवश्यकता हो।
43. पृथक तटस्थ (अप्रकाशित प्रणाली) की व्याख्या करें?
Ans.
पृथक तटस्थ (Isolated Neutral), जिसे अप्रकाशीय प्रणाली (Ungrounded System) या फ़्लोटिंग न्यूट्रल प्रणाली (Floating Neutral System) भी कहा जाता है, न्यूट्रल भूयोजन (Neutral Grounding) की एक विधि नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रणाली कॉन्फ़िगरेशन है जिसमें जनरेटर या ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट का पृथ्वी से कोई जानबूझकर किया गया सीधा या अप्रत्यक्ष कनेक्शन नहीं होता है।
पृथक तटस्थ प्रणाली की व्याख्या (Explanation of Isolated Neutral System)
1. विधि और संरचना (Method and Structure)
- कनेक्शन: थ्री-फेज प्रणाली के स्टार पॉइंट (तटस्थ/न्यूट्रल) को पृथ्वी से जोड़ने के लिए कोई तार या उपकरण (जैसे प्रतिरोधक या प्रतिघातक) उपयोग नहीं किया जाता है।
- ग्राउंडिंग का अभाव: न्यूट्रल जानबूझकर पृथक (Isolated) रखा जाता है।
- कैपेसिटिव युग्मन: व्यवहार में, सिस्टम कंडक्टर और पृथ्वी के बीच मौजूद प्राकृतिक धारिता (Capacitance) के कारण हमेशा एक कैपेसिटिव युग्मन (Capacitive Coupling) बना रहता है। इस कारण, यह प्रणाली वास्तव में कैपेसिटिव ग्राउंडेड सिस्टम के रूप में कार्य करती है।
2. सामान्य संचालन (Normal Operation)
- सामान्य लोड की स्थिति में, फेज और न्यूट्रल के बीच वोल्टेज स्थिर रहता है, क्योंकि तीन फेजों का वोल्टेज संतुलित होने के कारण न्यूट्रल पॉइंट शून्य विभव पर रहता है।
3. ग्राउंड फ़ॉल्ट के दौरान (During a Ground Fault)
जब एक सिंगल लाइन-टू-ग्राउंड फ़ॉल्ट होता है (मान लीजिए फेज A जमीन से छू जाता है):
- फ़ॉल्ट करंट बहुत कम होता है, क्योंकि यह करंट केवल सिस्टम कैपेसिटेंस के माध्यम से बहता है। यह धारा आमतौर पर सुरक्षात्मक उपकरणों को ट्रिप करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है।
- सेवा की निरंतरता (Continuity of Service) बनी रहती है क्योंकि सिस्टम तुरंत बंद नहीं होता है।
-
खतरा: फ़ॉल्ट के कारण, अन्य दो स्वस्थ फेजों (फेज B और C) पर वोल्टेज, फेज वोल्टेज (V_p) से बढ़कर लाइन वोल्टेज (V_L) के बराबर हो जाता है (लगभग sqrt{3} गुना बढ़ जाता है)।
{स्वस्थ फेज वोल्टेज} = sqrt{3} × {फेज वोल्टेज}
यह उच्च वोल्टेज अन्य उपकरणों के इंसुलेशन (Insulation) को नुकसान पहुंचा सकता है और एक ही समय में एक से अधिक स्थानों पर फ़ॉल्ट (Double Faults) का कारण बन सकता है।
4. अनुप्रयोग और सीमाएँ (Applications and Limitations)
|
पहलू
|
विवरण
|
|
मुख्य लाभ
|
सेवा की उच्च निरंतरता (High Continuity of Service): पहले ग्राउंड फ़ॉल्ट पर सिस्टम बंद नहीं होता है।
|
|
मुख्य नुकसान
|
ओवरवोल्टेज का खतरा: स्वस्थ फेजों पर वोल्टेज sqrt{3} गुना बढ़ जाता है, जिससे इंसुलेशन फेल हो सकता है।
|
|
अनुप्रयोग
|
छोटे या मध्यम वोल्टेज औद्योगिक और शिपबोर्ड प्रणालियाँ, जहाँ उच्च विश्वसनीयता आवश्यक है और फ़ॉल्ट का पता लगाने के लिए अलार्म सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
|
|
सीमाएँ
|
फ़ॉल्ट का पता लगाना मुश्किल, क्षणिक ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) का खतरा अधिक।
|
44. न्यूट्रल अर्थिंग और उपकरण अर्थिंग के बीच क्या अंतर है?
Ans.
न्यूट्रल अर्थिंग और उपकरण अर्थिंग (Equipment Earthing) विद्युत प्रणालियों में दो अलग-अलग प्रकार की अर्थिंग (Earthing) हैं, जिनके उद्देश्य और कनेक्शन के स्थान अलग-अलग होते हैं।
|
विशेषता
|
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing)
|
उपकरण अर्थिंग (Equipment Earthing)
|
|
उद्देश्य
|
यह मुख्य रूप से सिस्टम सुरक्षा (System Safety) और प्रदर्शन के लिए होता है।
|
यह मुख्य रूप से मानव सुरक्षा (Personnel Safety) और उपकरण सुरक्षा के लिए होता है।
|
|
क्या अर्थ किया जाता है
|
विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु को अर्थ (जमीन) किया जाता है, आमतौर पर ट्रांसफार्मर या जनरेटर पर।
|
विद्युत उपकरणों या मशीनरी के धातु के आवरण (Metallic Body) को अर्थ किया जाता है।
|
|
कार्य
|
1. ओवरवोल्टेज को सीमित करना: यह फॉल्ट (दोष) की स्थिति में फेज वोल्टेज को सीमित करता है।
|
1. बिजली के झटके से सुरक्षा: यह लीकेज करंट (Leakage Current) को जमीन में प्रवाहित कर देता है, जिससे व्यक्ति को झटका नहीं लगता।
|
|
|
2. फॉल्ट की पहचान: यह अर्थ फॉल्ट करंट (Earth Fault Current) के लिए रास्ता प्रदान करता है ताकि सुरक्षा उपकरण (जैसे रिले, फ्यूज) फॉल्ट को पहचान सकें और सप्लाई काट सकें।
|
2. उपकरण की सुरक्षा: लीकेज करंट को उपकरण के शरीर पर जमा होने से रोकता है, जिससे उपकरण को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
|
|
|
3. वोल्टेज संतुलन: यह थ्री-फेज सिस्टम में वोल्टेज को संतुलित रखने में मदद करता है।
|
3. लो-रेजिस्टेंस पाथ: यह फॉल्ट करंट के लिए जमीन में जाने हेतु एक बहुत कम प्रतिरोध (Low Resistance) का रास्ता प्रदान करता है।
|
|
स्थान
|
बिजली उत्पादन या वितरण प्रणाली के स्रोत (Source) पर।
|
सभी बड़े और धातु के आवरण वाले विद्युत उपकरणों पर।
|
संक्षेप में:
- न्यूट्रल अर्थिंग का उद्देश्य विद्युत प्रणाली के कार्य और स्थिरता को सुनिश्चित करना और ओवरवोल्टेज से बचाना है।
- उपकरण अर्थिंग का उद्देश्य उपकरणों के धातु के हिस्सों में गलती से आए करंट से लोगों और उपकरणों की रक्षा करना है।
45. अर्थिंग से संबंधित आईएस मानक क्या हैं?
Ans.
भारत में अर्थिंग (Earthing) से संबंधित प्रमुख भारतीय मानक (Indian Standard - IS) और नियम निम्नलिखित हैं:
1. प्रमुख भारतीय मानक (IS Code)
अर्थिंग प्रणाली के डिज़ाइन, स्थापना और रखरखाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक मानक भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रकाशित किया जाता है:
- IS 3043: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग (Code of Practice for Earthing)
- यह मानक अर्थिंग प्रणाली के लिए सामान्य दिशानिर्देश, पृथ्वी से कनेक्शन, उपभोक्ता परिसर में अर्थ-फॉल्ट सुरक्षा, पावर स्टेशनों, सबस्टेशनों और ओवरहेड लाइनों में अर्थिंग के नियम और अर्थ रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) के अपेक्षित मानों को कवर करता है। इसका नवीनतम संशोधन IS 3043: 2018 है।
2. अन्य संबंधित मानक और नियम
- IS 732: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर इलेक्ट्रिकल वायरिंग इंस्टॉलेशन्स (Code of Practice for Electrical Wiring Installations):
- यह मानक सामान्य विद्युत वायरिंग प्रतिष्ठानों के संबंध में सुरक्षा और अर्थिंग आवश्यकताओं का भी उल्लेख करता है।
-
भारतीय विद्युत नियम, 1956 (Indian Electricity Rules, 1956):
-
हालांकि ये नियम अब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपाय) विनियम, 2010 (CEA Regulations, 2010) द्वारा प्रतिस्थापित कर दिए गए हैं, लेकिन ये मूल रूप से अर्थिंग और सुरक्षा के लिए कई मूलभूत आवश्यकताओं को निर्धारित करते थे, जैसे कि:
- न्यूट्रल कंडक्टर को प्रभावी ढंग से अर्थ किया जाना चाहिए।
- अर्थ पिट का प्रतिरोध 5 ओम (Ohm) से अधिक नहीं होना चाहिए (हालांकि, सबस्टेशन जैसी महत्वपूर्ण जगहों के लिए यह मान 1 ओम से कम अपेक्षित होता है)।
- सभी धातु के गैर-करंट ले जाने वाले हिस्सों को प्रभावी ढंग से अर्थ किया जाना चाहिए।
3. अर्थ रेजिस्टेंस के अपेक्षित मान (Expected Earth Resistance Values)
IS 3043 और सामान्य अभ्यास के अनुसार, अर्थिंग का प्रतिरोध जितना कम हो उतना बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह लीकेज करंट को तेज़ी से ज़मीन में प्रवाहित करने में मदद करता है। विभिन्न स्थानों के लिए कुछ अनुशंसित मान (Recommended Values) हैं:
|
स्थान/स्थापना
|
अधिकतम अनुशंसित अर्थ रेजिस्टेंस
|
|
पावर स्टेशन (Power Stations)
|
0.5 Omega
|
|
ईएचटी/एचवी सब-स्टेशन (EHT/HV Substations)
|
1.0 Omega
|
|
एलटी/वितरण ट्रांसफार्मर (LT/DTR Structures)
|
5.0 Omega
|
|
सामान्य आवासीय/व्यावसायिक स्थापना
|
5.0 Omega से कम (आमतौर पर 1.0 Omega से कम वांछनीय)
|
46. अर्थिंग सारांश चार्ट?
Ans.
ज़रूर, न्यूट्रल अर्थिंग और उपकरण अर्थिंग के बीच के अंतर का एक सारांश चार्ट यहाँ दिया गया है, साथ ही अर्थिंग से संबंधित मुख्य भारतीय मानक (IS) कोड भी शामिल है।
अर्थिंग सारांश चार्ट (Earthing Summary Chart)
|
विशेषता
|
न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing)
|
उपकरण अर्थिंग (Equipment Earthing)
|
|
उद्देश्य
|
सिस्टम सुरक्षा और प्रदर्शन (ओवरवोल्टेज को सीमित करना और फॉल्ट की पहचान करना)।
|
मानव सुरक्षा और उपकरण सुरक्षा (बिजली के झटके से बचाना)।
|
|
किसको अर्थ किया जाता है
|
विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु को। (जैसे ट्रांसफार्मर का न्यूट्रल)।
|
विद्युत उपकरणों के धातु के आवरण (Metallic Body)।
|
|
मुख्य कार्य
|
1. फॉल्ट की स्थिति में फेज वोल्टेज को स्थिर रखना। 2. सुरक्षा उपकरणों के लिए फॉल्ट करंट पाथ प्रदान करना।
|
1. लीकेज करंट को जमीन में प्रवाहित करना। 2. उपकरण के शरीर पर शून्य विभव (Zero Potential) बनाए रखना।
|
|
कनेक्शन का स्थान
|
बिजली वितरण प्रणाली के स्रोत पर (जैसे सबस्टेशन/ट्रांसफार्मर)।
|
सभी बड़े और धातु के आवरण वाले उपकरणों पर।
|
|
महत्वपूर्ण IS कोड
|
IS 3043: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग (Earthing Resistance के मान और डिज़ाइन के नियम)
|
IS 3043: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग (Earथिंग वायर का साइज़ और इंस्टॉलेशन के नियम)
|
मुख्य भारतीय मानक (IS Code)
|
मानक संख्या
|
विवरण
|
मुख्य बिंदु
|
|
IS 3043: 2018
|
कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग (Code of Practice for Earthing)
|
अर्थिंग सिस्टम के डिजाइन, स्थापना, और विभिन्न स्थानों के लिए अनुमेय अर्थ रेजिस्टेंस मानों को निर्दिष्ट करता है। (सबसे महत्वपूर्ण कोड)
|
|
IS 732
|
कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर इलेक्ट्रिकल वायरिंग इंस्टॉलेशन्स
|
वायरिंग इंस्टॉलेशन में अर्थिंग और सुरक्षा प्रावधानों से संबंधित है।
|
|
CEA रेगुलेशन, 2010
|
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम
|
विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा से संबंधित कानूनी नियम, जिसमें न्यूट्रल अर्थिंग की अनिवार्यता शामिल है।
|
नोट: आवासीय और छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए अर्थ रेजिस्टेंस का मान आमतौर पर 5.0 Omega से कम होना चाहिए, लेकिन 1 Omega से कम होना सर्वोत्तम माना जाता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें