सबस्टेशन डिजाइनिंग एक बहुआयामी इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जिसमें विद्युत ऊर्जा को उत्पादन स्थल से वितरण केंद्र तक कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से प्रवाहित करने के लिए एक सुविधा (substation) की योजना बनाना, लेआउट तैयार करना और विशिष्ट उपकरण निर्धारित करना शामिल है।
एक सबस्टेशन विद्युत प्रणाली का वह हिस्सा है जो वोल्टेज को आवश्यकतानुसार बढ़ाने या घटाने (step up or step down) का काम करता है, और इसमें सुरक्षात्मक उपकरण भी होते हैं।
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प्रमुख तत्व
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कार्य (Function)
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पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformers)
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वोल्टेज को आवश्यक स्तर (जैसे, ट्रांसमिशन के लिए बढ़ाना या वितरण के लिए घटाना) में बदलते हैं।
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सर्किट ब्रेकर (Circuit Breakers)
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दोष (fault) की स्थिति में बिजली के प्रवाह को बाधित करके सबस्टेशन और ग्रिड को क्षति से बचाते हैं।
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बस बार (Busbars)
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सबस्टेशन के भीतर विभिन्न सर्किट और उपकरणों को जोड़ने वाले विद्युत कंडक्टर के रूप में कार्य करते हैं, जो बिजली के वितरण में मदद करते हैं।
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आइसोलेटर (Isolators)/डिस्कनेक्टर (Disconnectors)
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रखरखाव (maintenance) के लिए सर्किट के एक हिस्से को मैन्युअल रूप से अलग करने के लिए उपयोग किए जाने वाले यांत्रिक स्विच। इन्हें सर्किट ब्रेकर के खुले होने पर ही संचालित किया जाता है।
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करंट ट्रांसफार्मर (Current Transformers - CT) और पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (Potential Transformers - PT)
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मापन (measurement) और सुरक्षा (protection) के उद्देश्य से उच्च धाराओं और वोल्टेज को निम्न स्तर तक कम करते हैं। इन्हें 'इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर' भी कहा जाता है।
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लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arresters)
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बिजली गिरने या क्षणिक उच्च वोल्टेज (transient overvoltages) की स्थिति में विद्युत प्रवाह को जमीन पर मोड़कर उपकरणों की सुरक्षा करते हैं।
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स्विचगियर (Switchgear)
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इसमें ब्रेकर, फ्यूज और डिस्कनेक्टर जैसे उपकरण शामिल होते हैं, जिनका उपयोग नियंत्रण, सुरक्षा और सिस्टम को अलग करने के लिए किया जाता है।
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सुरक्षात्मक रिले (Protective Relays)
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दोषों का पता लगाते हैं और सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करके सिस्टम के सुरक्षात्मक संचालन को शुरू करते हैं।
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अर्थिंग/ग्राउंडिंग सिस्टम (Earthing/Grounding Systems)
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दोष धाराओं को सुरक्षित रूप से जमीन तक पहुंचाने के लिए एक निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करते हैं, जो सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
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सबस्टेशन डिजाइनिंग के प्रमुख चरण (Key Steps in Substation Designing)
- योजना और आवश्यकता का आकलन (Planning and Load Assessment): वर्तमान और भविष्य की विद्युत लोड मांग का पूर्वानुमान लगाना, उपयुक्त वोल्टेज स्तर और दोष स्तर निर्धारित करना।
- साइट चयन (Site Selection): सबस्टेशन के लिए सर्वोत्तम भौतिक स्थान का चुनाव करना, जिसमें पहुंच, पर्यावरणीय कारक और ट्रांसमिशन लाइनों से निकटता को ध्यान में रखा जाता है।
- उपकरण और कॉन्फ़िगरेशन का चयन (Equipment and Configuration Selection): सबस्टेशन के प्रकार (जैसे, AIS - Air-Insulated Substation या GIS - Gas-Insulated Substation) और बसबार व्यवस्था (Busbar Arrangement) का चुनाव करना।
- लेआउट योजना (Layout Planning): सुरक्षा मंजूरी (safety clearances) और आसान रखरखाव (easy maintenance) सुनिश्चित करने के लिए उपकरणों के स्थान और रिक्ति (spacing) का निर्धारण करना।
- ग्राउंडिंग और सुरक्षा डिजाइन (Grounding and Protection Design): एक प्रभावी अर्थिंग ग्रिड, रिले सुरक्षा प्रणाली और लाइटनिंग अरेस्टर का डिजाइन करना।
सबस्टेशन डिज़ाइन में इलेक्ट्रिकल, सिविल, और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग सहित कई इंजीनियरिंग शाखाओं के बीच समन्वय (coordination) की आवश्यकता होती है।
विद्युत सबस्टेशन डिजाइनिंग एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जो विद्युत शक्ति को कुशलतापूर्वक, सुरक्षित रूप से और विश्वसनीय तरीके से ट्रांसमिशन (पारेषण) से वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) तक नियंत्रित करती है।
सबस्टेशन डिजाइनिंग के मुख्य चरण
सबस्टेशन का डिज़ाइन कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि लोड की आवश्यकता, वोल्टेज स्तर, विश्वसनीयता की आवश्यकता और साइट की उपलब्धता। प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:
1. योजना और साइट का चयन (Planning & Site Selection)
- लोड पूर्वानुमान (Load Forecasting): वर्तमान और भविष्य की विद्युत मांग का अनुमान लगाना।
- वोल्टेज और दोष स्तर (Voltage & Fault Levels): सबस्टेशन पर आने वाले और बाहर जाने वाले वोल्टेज और अधिकतम संभावित शॉर्ट-सर्किट करंट (दोष स्तर) का निर्धारण करना।
- स्थान का चुनाव: सबस्टेशन के लिए ऐसी जगह का चयन करना जो लोड केंद्र के करीब हो, सुलभ हो और पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।
- पर्यावरणीय और सुरक्षा मानक: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (जैसे, IEEE, IEC) का पालन सुनिश्चित करना।
2. बसबार व्यवस्था का चयन (Busbar Configuration Selection)
बसबार व्यवस्था विश्वसनीयता, लागत और संचालन में लचीलेपन (flexibility) को प्रभावित करती है।
बसबार व्यवस्था विवरण
सिंगल बस (Single Bus)
सबसे सरल और कम खर्चीला। एक बस में दोष आने पर पूरे सबस्टेशन की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।
डबल बस (Double Bus)
दो बसबारों का उपयोग होता है। एक बस पर दोष आने पर लोड को दूसरी बस में स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे विश्वसनीयता बढ़ती है।
मेन और ट्रांसफर बस (Main and Transfer Bus) एक मुख्य बस और एक अतिरिक्त ट्रांसफर बस होती है। रखरखाव के दौरान सर्किट ब्रेकर को आइसोलेट करके ट्रांसफर बस के माध्यम से आपूर्ति जारी रखी जा सकती है।
रिंग बस (Ring Bus)
उपकरण एक रिंग (गोलाकार) बस से जुड़े होते हैं। उच्च विश्वसनीयता, क्योंकि प्रत्येक फीडर को दो सर्किट ब्रेकर से आपूर्ति मिलती है।
ब्रेकर-और-ए-हाफ (Breaker-and-a-Half)
सबसे जटिल और विश्वसनीय व्यवस्था। प्रत्येक दो फीडर को तीन सर्किट ब्रेकर साझा करते हैं, जिससे उच्च विश्वसनीयता और लचीलापन मिलता है।
3. प्रमुख उपकरणों का चयन (Selection of Major Equipment)
डिज़ाइन की गई आवश्यकताओं (वोल्टेज, करंट और दोष स्तर) के आधार पर उपकरणों का चयन किया जाता है:
- पावर ट्रांसफार्मर: सही क्षमता (MVA रेटिंग), वोल्टेज अनुपात और कूलिंग विधि का चयन।
- सर्किट ब्रेकर: दोष धाराओं को तोड़ने की आवश्यक क्षमता (ब्रेकिंग क्षमता) और प्रकार (जैसे, {SF_6}, वैक्यूम) का चयन।
- आइसोलेटर/डिस्कनेक्टर: सर्किट ब्रेकर के दोनों ओर लगाए जाते हैं ताकि रखरखाव के लिए उपकरण को विद्युत रूप से अलग किया जा सके।
- इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर (CT & PT): सुरक्षात्मक रिले और मीटरिंग के लिए आवश्यक अनुपात (ratio) का चयन।
- लाइटनिंग अरेस्टर (LA): सबस्टेशन को आकाशीय बिजली से बचाने के लिए उपयुक्त रेटिंग का चयन।
4. लेआउट और ग्राउंडिंग डिजाइन (Layout & Grounding Design)
- जनरल अरेंजमेंट (General Arrangement) लेआउट: उपकरणों के भौतिक स्थान (Physical Location) का निर्धारण, जिसमें सुरक्षा मंजूरी (Safety Clearance) और रखरखाव के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित की जाती है।
- ग्राउंडिंग (भू-संपर्कन) ग्रिड डिज़ाइन: सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोष धाराओं को सुरक्षित रूप से जमीन तक पहुंचाने के लिए अर्थिंग इलेक्ट्रोड और स्ट्रिप्स की गणना और लेआउट।
- स्ट्रक्चरल डिज़ाइन: सभी उपकरणों, बसबारों और गैन्ट्री टावरों (gantry towers) को सहारा देने के लिए स्टील संरचनाओं का डिज़ाइन।
- केबल लेआउट और कंट्रोल रूम डिज़ाइन: पावर केबल और कंट्रोल केबल रूट का लेआउट, साथ ही सुरक्षात्मक रिले और SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) सिस्टम के लिए कंट्रोल रूम का डिज़ाइन।
सबस्टेशन (Substation) विद्युत उत्पादन, पारेषण (Transmission), और वितरण (Distribution) प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। यह एक ऐसी सुविधा है जहाँ विद्युत ऊर्जा के वोल्टेज को आवश्यकतानुसार बदला जाता है, और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित तथा सुरक्षित किया जाता है।
सबस्टेशन के मुख्य कार्य
एक सबस्टेशन कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
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वोल्टेज रूपांतरण (Voltage Transformation): यह सबसे मुख्य कार्य है।
- स्टेप-अप (Step-Up): बिजली संयंत्र (Generating Station) के पास, यह वोल्टेज को लंबी दूरी के पारेषण (Transmission) के लिए उच्च स्तर (जैसे, 132kV, 400kV) तक बढ़ाता है ताकि ऊर्जा हानि (Energy Loss) कम हो सके।
- स्टेप-डाउन (Step-Down): उपभोक्ता केंद्रों के पास, यह उच्च वोल्टेज को वितरण (Distribution) के लिए निम्न स्तर (जैसे, 33kV, 11kV) तक कम करता है, जो अंततः घरों और व्यवसायों के लिए 230V/440V में बदल जाता है।
- स्विचिंग और नियंत्रण (Switching and Control): सबस्टेशन सर्किट ब्रेकर और आइसोलेटर का उपयोग करके बिजली के सर्किट को जोड़ने या काटने की अनुमति देता है। यह ग्रिड में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने का केंद्र है।
- सुरक्षा (Protection): इसमें लाइटनिंग अरेस्टर, सर्किट ब्रेकर और सुरक्षात्मक रिले जैसे उपकरण होते हैं जो शॉर्ट-सर्किट या आकाशीय बिजली गिरने जैसी दोष (fault) की स्थिति में उपकरणों को बचाते हैं और प्रभावित हिस्से को ग्रिड से अलग करते हैं।
- वितरण (Distribution): यह विभिन्न क्षेत्रों या फीडरों में बिजली वितरित करने के लिए जंक्शन (Junction) बिंदु के रूप में कार्य करता है।
सबस्टेशन के प्रमुख घटक (Key Components)
सबस्टेशन में निम्नलिखित प्रमुख उपकरण शामिल होते हैं:
- पावर ट्रांसफार्मर: वोल्टेज बदलने के लिए।
- सर्किट ब्रेकर: दोष आने पर सर्किट को तोड़ने के लिए।
- बस बार: सबस्टेशन के भीतर सभी सर्किटों को जोड़ने वाले कंडक्टर।
- आइसोलेटर: रखरखाव के लिए सर्किट को मैन्युअल रूप से अलग करने के लिए।
- करंट ट्रांसफार्मर (CT) और पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT): मापन और सुरक्षा के लिए।
- लाइटनिंग अरेस्टर (LA): ओवरवोल्टेज से सुरक्षा के लिए।
सबस्टेशन की तुलना एक बड़े यातायात चौराहे से की जा सकती है, जहाँ बिजली की लाइनों (सड़कों) का वोल्टेज बदला जाता है और ट्रैफिक (बिजली का प्रवाह) को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से प्रबंधित किया जाता है।
सबस्टेशन का मुख्य कार्य विद्युत शक्ति के वोल्टेज को बदलना ({Step-up} या {Step-down}) और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित तथा सुरक्षित करना है।
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मुख्य कार्य
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विवरण
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वोल्टेज रूपांतरण (Voltage Transformation)
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ट्रांसफार्मर का उपयोग करके लंबी दूरी के {Transmission} के लिए वोल्टेज को बढ़ाना (Step-Up) या वितरण ({Distribution}) के लिए वोल्टेज को घटाना (Step-Down) ताकि ऊर्जा हानि कम हो और उपभोक्ता को उपयोग योग्य बिजली मिले।
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स्विचिंग और नियंत्रण (Switching & Control)
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सर्किट ब्रेकर और आइसोलेटर का उपयोग करके बिजली लाइनों और उपकरणों को जरूरत के अनुसार जोड़ना ({connect}) या अलग करना ({isolate}), जिससे ग्रिड में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके।
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सुरक्षा और अलगाव (Protection & Isolation)
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सुरक्षात्मक रिले और {Circuit Breaker} का उपयोग करके शॉर्ट-सर्किट या ओवरलोड जैसे दोषों ({faults}) को तुरंत पहचानना और क्षतिग्रस्त हिस्से को ग्रिड से अलग करना, ताकि बाकी सिस्टम सुरक्षित रहे।
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सबस्टेशन इन कार्यों के माध्यम से बिजली संयंत्र ({Power Plant}) और अंतिम उपयोगकर्ता ({end-user}) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है, जो सुरक्षित और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
सबस्टेशनों को उनके कार्य ({Service Requirement}), निर्माण की विशेषता ({Constructional Features}), और ऑपरेटिंग वोल्टेज के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
1. कार्य के आधार पर वर्गीकरण (Based on Service Requirement)
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प्रकार
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मुख्य कार्य
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स्थान/उदाहरण
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जनरेटिंग/स्टेप-अप सबस्टेशन
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बिजली संयंत्र से उत्पन्न कम वोल्टेज को लंबी दूरी के पारेषण के लिए बहुत उच्च वोल्टेज ({EHV} या {UHV}) तक बढ़ाना।
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पावर प्लांट के करीब।
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ट्रांसमिशन सबस्टेशन
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विभिन्न ट्रांसमिशन लाइनों को जोड़ना, वोल्टेज को एक उच्च स्तर से दूसरे उच्च स्तर ({जैसे}, 400 {kV} से 220 {kV}) में बदलना।
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ग्रिड के मुख्य स्विचिंग बिंदु।
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डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन
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पारेषण या उप-पारेषण वोल्टेज को अंतिम उपयोगकर्ताओं ({घरों और उद्योगों}) को आपूर्ति करने के लिए निम्न वोल्टेज ({जैसे}, 11 {kV} या 33 {kV}) में घटाना।
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लोड सेंटर ({शहर, कॉलोनी}) के पास।
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स्विचिंग सबस्टेशन
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वोल्टेज को बिना बदले केवल लाइनों को जोड़ने या काटने ({Switching}) का कार्य करना।
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जहां ग्रिड कनेक्शन की आवश्यकता होती है।
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कनवर्टिंग सबस्टेशन
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{AC} (प्रत्यावर्ती धारा) को {DC} (दिष्ट धारा) में या इसका उल्टा बदलना।
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एचवीडीसी ({HVDC}) ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन ({Electric Traction}) के लिए।
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2. निर्माण की विशेषता के आधार पर वर्गीकरण (Based on Construction)
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प्रकार
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विशेषता
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उपयुक्तता
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आउटडोर सबस्टेशन
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अधिकांश उपकरण ({ट्रांसफार्मर, सर्किट ब्रेकर}) खुली हवा में स्थापित होते हैं। इन्हें वायु इंसुलेटेड सबस्टेशन ({AIS}) भी कहते हैं।
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उच्च वोल्टेज ({HV} और ऊपर) और जहां पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।
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इनडोर सबस्टेशन
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सभी उपकरण इमारत या कमरे के अंदर स्थापित होते हैं।
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कम वोल्टेज ({जैसे}, 11 {kV} तक) और प्रदूषित/भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में।
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भूमिगत सबस्टेशन
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उपकरण जमीन के नीचे बनाए गए कक्षों में स्थापित होते हैं।
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घनी आबादी वाले महानगरीय क्षेत्रों में, जहां जमीन की लागत अधिक है।
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पोल-माउंटेड सबस्टेशन
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छोटे वितरण ट्रांसफार्मर को खंभों ({Poles}) पर लगाया जाता है।
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छोटे लोड क्षेत्रों और ग्रामीण वितरण के लिए।
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गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन ({GIS})
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उपकरण {SF}_{6} गैस से भरे हुए सीलबंद टैंकों में होते हैं।
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बहुत कम जगह की आवश्यकता होती है, उच्च वोल्टेज के लिए उपयोग किया जाता है।
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कार्य के आधार पर सबस्टेशनों को मुख्य रूप से तीन चरणों में वर्गीकृत किया जाता है, जो विद्युत ऊर्जा के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने तक के मार्ग को दर्शाते हैं।
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वर्गीकरण (Classification)
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उप-प्रकार (Sub-Type)
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मुख्य कार्य (Primary Function)
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1. जनरेटिंग या स्टेप-अप सबस्टेशन
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जनरेटिंग सबस्टेशन
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बिजली संयंत्र में उत्पन्न हुए कम वोल्टेज को लंबी दूरी के पारेषण ({Transmission}) के लिए उच्च वोल्टेज में बदलना। ({Step-Up})
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2. ट्रांसमिशन सबस्टेशन
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प्राइमरी या सेकेंडरी ग्रिड सबस्टेशन
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विभिन्न उच्च वोल्टेज पारेषण लाइनों को जोड़ना, वोल्टेज का रूपांतरण करना ({Step-Down}), और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करना। (जैसे: 400 {kV} को 220 {kV} में)
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3. डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन
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प्राइमरी/सेकेंडरी डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन
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उच्च वोल्टेज को उपभोक्ता उपयोग के लिए आवश्यक निम्न वोल्टेज में बदलना। (जैसे: 11 {kV} या 33 {kV} को 440 {V}/230 {V} में)
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कार्य-आधारित वर्गीकरण का विस्तृत विवरण
1. जनरेटिंग या स्टेप-अप सबस्टेशन ({Step-Up Substation})
यह सबस्टेशन बिजली संयंत्र ({Generating Station}) से जुड़ा होता है।
- उद्देश्य: चूंकि बिजली संयंत्रों में बिजली अपेक्षाकृत कम वोल्टेज पर उत्पन्न होती है, इसलिए इसे लंबी दूरी तक कुशलतापूर्वक भेजने के लिए वोल्टेज को बहुत अधिक स्तर पर बढ़ाया जाता है।
- महत्व: उच्च वोल्टेज पारेषण से लाइन हानि ({Line Loss}) कम होती है और संचरण की दक्षता बढ़ती है।
2. ट्रांसमिशन सबस्टेशन ({Transmission Substation})
ये सबस्टेशन लंबे पारेषण मार्गों पर स्थित होते हैं।
- ग्रिड इंटरकनेक्शन: ये सबस्टेशन विभिन्न उच्च वोल्टेज लाइनों और ग्रिडों को आपस में जोड़ते हैं, जिससे बिजली एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भेजी जा सकती है।
- प्राथमिक Step-Down: ये वोल्टेज को {EHV} से {HV} स्तर तक कम करते हैं ({Step-Down}), जैसे 400 {kV} से 220 {kV} या 132 {kV}।
- स्विचिंग सबस्टेशन (Switching Substation): इस श्रेणी में वे सबस्टेशन भी आते हैं जो केवल लाइनों को जोड़ने या काटने का काम करते हैं, बिना वोल्टेज बदले।
3. डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन ({Distribution Substation})
ये सबस्टेशन लोड सेंटर (आवासीय/औद्योगिक क्षेत्र) के करीब होते हैं।
- अंतिम Step-Down: यह वह अंतिम चरण है जहाँ वोल्टेज को अंतिम उपभोक्ता के लिए आवश्यक स्तर तक ({जैसे}, 11 {kV} को 440 {V} या 230 {V} में) कम किया जाता है।
- वितरण: यह बिजली को छोटे उप-केन्द्रों (Secondary Substation) या सीधे विभिन्न फीडरों के माध्यम से घरों और व्यवसायों में वितरित करता है।
अन्य विशिष्ट कार्यात्मक वर्गीकरण
उपरोक्त तीन मुख्य प्रकारों के अलावा, कुछ विशेष कार्यों के लिए भी सबस्टेशन होते हैं:
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विशिष्ट प्रकार
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कार्य
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कनवर्टिंग सबस्टेशन ({Converting Substation})
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यह {AC} (प्रत्यावर्ती धारा) को {DC} (दिष्ट धारा) में या {DC} को {AC} में परिवर्तित करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से {HVDC} पारेषण और रेलवे के ट्रैक्शन सिस्टम में होता है।
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औद्योगिक सबस्टेशन ({Industrial Substation})
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किसी बड़े उद्योग या कारखाने की उच्च मांग को पूरा करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सबस्टेशन।
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पावर फैक्टर करेक्शन सबस्टेशन ({P.F. Correction Substation})
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इसमें कैपेसिटर बैंक जैसे उपकरण लगे होते हैं जो ग्रिड के {Power Factor} को बेहतर बनाने का कार्य करते हैं।
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वोल्टेज स्तर के आधार पर, सबस्टेशनों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जो विद्युत पारेषण ({Transmission}) और वितरण ({Distribution}) के चरणों को दर्शाते हैं।
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वर्गीकरण (Classification)
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वोल्टेज स्तर (Voltage Level)
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उदाहरण (Typical Voltages in India)
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1. उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({High Voltage Substation} - {HV})
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11 {kV} से 66 {kV} के बीच।
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11 {kV}, 33 {kV}, 66 {kV}
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2. अतिरिक्त-उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({Extra-High Voltage Substation} - {EHV})
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132 {kV} से 400 {kV} के बीच।
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132 {kV}, 220 {kV}, 400 {kV}
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3. अति-उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({Ultra-High Voltage Substation} - {UHV})
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400 {kV} से ऊपर।
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765 {kV}, 1200 {kV}
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वोल्टेज स्तर के आधार पर सबस्टेशनों का विस्तृत विवरण
1. उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({HV Substation})
यह सबस्टेशन वितरण प्रणाली का हिस्सा होता है।
- यह आमतौर पर वितरण सबस्टेशनों के रूप में कार्य करता है, जहां उच्च वोल्टेज ({जैसे}, 33 {kV}) को मध्यम वोल्टेज ({जैसे}, 11 {kV}) में बदलकर स्थानीय क्षेत्रों को आपूर्ति की जाती है।
- 11 {kV} तक के वोल्टेज स्तर के लिए उपकरण अक्सर इनडोर स्थापित किए जाते हैं, जबकि 33 {kV} या 66 {kV} के लिए आउटडोर सबस्टेशन आम हैं।
2. अतिरिक्त-उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({EHV Substation})
यह सबस्टेशन पारेषण प्रणाली का मुख्य हिस्सा है।
- ये सबस्टेशन आमतौर पर ग्रिड के मुख्य स्विचिंग और इंटरकनेक्शन बिंदु होते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों या राज्यों के बीच थोक बिजली हस्तांतरण ({Bulk Power Transfer}) को संभालते हैं।
- इनमें वोल्टेज रूपांतरण एक उच्च स्तर से दूसरे उच्च स्तर तक होता है ({जैसे}, 400 {kV} को 220 {kV} में कम करना)।
3. अति-उच्च वोल्टेज सबस्टेशन ({UHV Substation})
ये सबस्टेशन सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन नोड होते हैं।
- ये सबस्टेशन बहुत लंबी दूरी के लिए अत्यधिक कुशल बिजली पारेषण सुनिश्चित करते हैं।
- इनके उपकरण बड़े होते हैं और अधिक सुरक्षात्मक निकासी ({clearances}) की आवश्यकता होती है, जिसके कारण ये सबस्टेशन बड़े क्षेत्र में फैले होते हैं।
डिजाइन और निर्माण की विशेषताओं के आधार पर सबस्टेशनों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
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वर्गीकरण (Classification)
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विशेषता (Feature)
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उपयुक्तता (Suitability)
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1. इनडोर सबस्टेशन ({Indoor Substation})
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सभी उपकरण (ट्रांसफार्मर को छोड़कर या उसके साथ) एक सीलबंद भवन के भीतर स्थापित किए जाते हैं।
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कम वोल्टेज ({जैसे}, 11 {kV} तक)। भीड़-भाड़ वाले शहरी क्षेत्र, और प्रदूषित वातावरण वाले स्थान।
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2. आउटडोर सबस्टेशन ({Outdoor Substation})
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अधिकांश उपकरण खुली हवा या खुले यार्ड में स्थापित किए जाते हैं। इसे {Air Insulated Substation} ({AIS}) भी कहते हैं।
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उच्च और अतिरिक्त-उच्च वोल्टेज ({जैसे}, 66 {kV}, 132 {kV} और ऊपर)। जहां पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।
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3. विशेष डिजाइन सबस्टेशन ({Special Design Substation})
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ये किसी विशेष आवश्यकता या स्थान की कमी को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं।
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विभिन्न पर्यावरणीय या स्थानिक आवश्यकताएं।
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डिजाइन-आधारित वर्गीकरण का विस्तृत विवरण
1. इनडोर सबस्टेशन ({Indoor Substation})
इन सबस्टेशनों में, स्विचगियर, बसबार, सर्किट ब्रेकर और अन्य उपकरण प्रदूषण, वर्षा, धूल और जानवरों से सुरक्षा के लिए एक इमारत के अंदर रखे जाते हैं।
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उप-प्रकार:
- पूरी तरह से संलग्न ({Enclosed}): एक या अधिक दीवारें अन्य इमारतों के साथ साझा की जाती हैं।
- स्वतंत्र भवन ({Independent Building}): एक समर्पित सबस्टेशन भवन।
- लाभ: सुरक्षा और उपकरणों की गंदगी से सुरक्षा अधिक होती है।
- सीमा: उच्च वोल्टेज (66 {kV} से अधिक) के लिए इन्हें बनाना महंगा और अव्यवहारिक होता है, क्योंकि उपकरणों के बीच अधिक वायु निकासी ({Air Clearance}) की आवश्यकता होती है।
2. आउटडोर सबस्टेशन ({Outdoor Substation})
ये सबस्टेशन सबसे आम हैं और बड़े खुले स्थान पर स्थापित किए जाते हैं। उच्च वोल्टेज के लिए उपकरणों के बीच आवश्यक अधिक दूरी को समायोजित करने के लिए वे खुले में बने होते हैं।
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उप-प्रकार:
- पोल-माउंटेड ({Pole-Mounted}): वितरण ट्रांसफार्मर और संबंधित उपकरण एक या दो खंभों पर लगाए जाते हैं। (छोटे वितरण के लिए, आमतौर पर 11 {kV}/400 {V})।
- प्लिंथ/फाउंडेशन-माउंटेड ({Plinth/Foundation-Mounted}): उपकरण जमीनी स्तर पर या कंक्रीट प्लिंथ पर स्थापित होते हैं। (बड़े वितरण और ट्रांसमिशन सबस्टेशनों के लिए)।
- लाभ: आसान रखरखाव, कम प्रारंभिक निर्माण लागत।
- सीमा: उपकरणों पर मौसम और प्रदूषण का प्रभाव पड़ता है।
3. विशेष डिजाइन सबस्टेशन ({Special Design Substation})
ये विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने के लिए बनाए जाते हैं:
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गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन ({Gas Insulated Substation} - {GIS}):
- सभी उच्च वोल्टेज वाले लाइव उपकरण ({live equipment}) को {SF}_{6} ({Sulphur Hexafluoride}) गैस से भरे हुए सीलबंद धातु के संलग्नकों ({enclosures}) के अंदर स्थापित किया जाता है।
- सबसे बड़ा लाभ: यह बहुत कम जगह घेरता है (पारंपरिक {AIS} की तुलना में लगभग 1/10 भाग)। यह शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
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भूमिगत सबस्टेशन ({Underground Substation}):
- उपकरण भूमिगत कक्षों में स्थापित होते हैं।
- उपयोग: घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, जहां सतह पर जगह उपलब्ध नहीं होती है या सौंदर्य कारणों से उपकरणों को छिपाना आवश्यक होता है।
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मोबाइल सबस्टेशन ({Mobile Substation}):
- सभी उपकरण एक ट्रेलर या ट्रक पर लगाए जाते हैं।
- उपयोग: आपातकाल के दौरान या अस्थायी बिजली की आपूर्ति के लिए तुरंत एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
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प्रीफैब्रिकेटेड/कॉम्पैक्ट सबस्टेशन ({Prefabricated/Compact Substation} - {CSS}):
- ट्रांसफार्मर, स्विचगियर और अन्य उपकरण एक फैक्टरी में बने धातु या कंक्रीट के बॉक्स या बाड़े में एकीकृत होते हैं।
- लाभ: त्वरित स्थापना, सुरक्षा, और कॉम्पैक्ट आकार।
सेवा (Service) की आवश्यकता के आधार पर सबस्टेशनों को मुख्य रूप से उन विशिष्ट कार्यों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है जिन्हें वे विद्युत प्रणाली में करते हैं।
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सबस्टेशन का प्रकार
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मुख्य सेवा (Service)
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उद्देश्य
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1. ट्रांसफार्मर सबस्टेशन ({Transformer Substation})
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वोल्टेज का रूपांतरण ({Voltage Transformation})
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यह सबस्टेशन प्राथमिक रूप से विद्युत आपूर्ति के वोल्टेज स्तर को बदलने (बढ़ाने या घटाने) के लिए ट्रांसफार्मर का उपयोग करता है। यह सबसे आम प्रकार है।
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2. स्विचिंग सबस्टेशन ({Switching Substation})
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लाइन स्विचिंग और नियंत्रण ({Line Switching and Control})
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यह वोल्टेज के स्तर को बदले बिना केवल पारेषण लाइनों को जोड़ने या काटने ({switching}) का कार्य करता है। यह ग्रिड में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है।
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3. कनवर्टिंग सबस्टेशन ({Converting Substation})
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धारा का रूपांतरण ({Current Conversion})
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यह {AC} ({Alternating Current}) को {DC} ({Direct Current}) में, या इसके विपरीत परिवर्तित करता है।
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4. फ्रीक्वेंसी चेंजर सबस्टेशन ({Frequency Changer Substation})
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आवृत्ति का रूपांतरण ({Frequency Conversion})
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यह बिजली आपूर्ति की आवृत्ति ({Frequency}) को एक मान से दूसरे मान में बदलता है ({जैसे}, 50 {Hz} से 60 {Hz})। यह तब आवश्यक होता है जब दो अलग-अलग आवृत्ति वाली प्रणालियों को जोड़ना हो।
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5. पावर फैक्टर सुधार सबस्टेशन ({Power Factor Correction Substation})
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पावर फैक्टर में सुधार ({Power Factor Improvement})
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यह सिंक्रोनस कंडेंसर या कैपेसिटर बैंक का उपयोग करके सिस्टम के पावर फैक्टर को बेहतर बनाने का कार्य करता है, जिससे पारेषण हानि कम होती है।
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6. औद्योगिक सबस्टेशन ({Industrial Substation})
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विशेष औद्योगिक आपूर्ति ({Dedicated Industrial Supply})
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यह विशेष रूप से किसी एक बड़ी औद्योगिक इकाई की उच्च और विशिष्ट बिजली मांग को पूरा करने के लिए स्थापित किया जाता है।
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इनमें से, ट्रांसफार्मर सबस्टेशन सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी है क्योंकि वे पारेषण और वितरण प्रणाली की रीढ़ हैं।
विन्यास (Configuration) के आधार पर सबस्टेशनों का वर्गीकरण मुख्य रूप से उस तकनीक और लेआउट को दर्शाता है जिसका उपयोग उपकरणों को व्यवस्थित करने और इन्सुलेट ({insulate}) करने के लिए किया जाता है। यह वर्गीकरण आमतौर पर सबस्टेशन के बाहरी रूप और उपयोग की गई इन्सुलेशन सामग्री से संबंधित होता है।
मुख्य रूप से सबस्टेशनों को निम्नलिखित विन्यास के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
1. एयर इंसुलेटेड सबस्टेशन ({Air Insulated Substation} - {AIS})
- विन्यास: यह एक पारंपरिक आउटडोर सबस्टेशन है जहाँ उच्च वोल्टेज वाले उपकरण खुले यार्ड में स्थापित होते हैं।
- इंसुलेशन: हवा ({Air}) को प्राथमिक इन्सुलेटिंग माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है।
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विशेषता:
- उपकरणों के बीच उच्च वोल्टेज के लिए पर्याप्त वायु निकासी ({air clearance}) की आवश्यकता होती है, इसलिए इन्हें बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
- निर्माण लागत आमतौर पर कम होती है।
- भारत में अधिकांश 66 {kV} और उससे ऊपर के सबस्टेशन इसी विन्यास के हैं।
2. गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन ({Gas Insulated Substation} - {GIS})
- विन्यास: सभी उच्च वोल्टेज वाले उपकरण ({बसबार, सर्किट ब्रेकर, आइसोलेटर, आदि}) सीलबंद धातु संलग्नकों ({metal enclosures}) के अंदर स्थापित होते हैं।
- इंसुलेशन: {SF}_{6} (सल्फर हेक्साफ्लोराइड) गैस को प्राथमिक इन्सुलेटिंग माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है।
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विशेषता:
- {SF}_{6} गैस की उत्कृष्ट इन्सुलेटिंग क्षमता के कारण, ये सबस्टेशन बहुत कम जगह ({AIS} की तुलना में लगभग 1/10) घेरते हैं।
- शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक परिसरों और भूमिगत सबस्टेशनों के लिए आदर्श हैं।
- लागत अधिक होती है, लेकिन रखरखाव कम होता है और यह वातावरण से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
3. हाइब्रिड सबस्टेशन ({Hybrid Substation})
- विन्यास: यह {AIS} और {GIS} विन्यास का एक संयोजन है।
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विशेषता:
- कुछ उपकरण ({जैसे}, बसबार या स्विचगियर) {GIS} तकनीक का उपयोग करके संलग्न किए जाते हैं।
- अन्य उपकरण ({जैसे}, ट्रांसफार्मर या कुछ स्विचगियर) {AIS} तकनीक का उपयोग करके खुले में स्थापित होते हैं।
- यह {GIS} की कॉम्पैक्टनेस और {AIS} की कम लागत के बीच एक समझौता प्रदान करता है।
4. कॉम्पैक्ट/पैकेज्ड सबस्टेशन ({Compact/Packaged Substation} - {CSS/PSS})
- विन्यास: ट्रांसफार्मर, {MV} स्विचगियर, और {LV} वितरण पैनल एक ही फैक्टरी में निर्मित धातु या कंक्रीट बॉक्स में पूरी तरह से फिट होते हैं।
- इंसुलेशन: आमतौर पर वायु या {SF}_{6}/तेल का मिश्रण।
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विशेषता:
- इन्हें बनाने में कम समय लगता है और ये सीधे साइट पर स्थापित किए जाते हैं।
- सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर और सुरक्षित।
- छोटे वितरण भारों के लिए आदर्श ({जैसे}, आवासीय कॉलोनियों, शॉपिंग मॉल)।
सबस्टेशन डिजाइन एक जटिल और व्यवस्थित इंजीनियरिंग प्रक्रिया है, जिसे विश्वसनीयता, सुरक्षा और लागत-दक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों में पूरा किया जाता है।
सबस्टेशन डिज़ाइन प्रक्रिया के प्रमुख चरण दर चरण नीचे दिए गए हैं:
सबस्टेशन डिज़ाइन प्रक्रिया के चरण
चरण 1: आवश्यकता निर्धारण और साइट चयन (Need Assessment and Site Selection)
- भार पूर्वानुमान (Load Forecasting): वर्तमान और भविष्य की अधिकतम बिजली की माँग ({peak load}) और वृद्धि दर का आकलन करना।
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साइट चयन (Site Selection):
- स्थान को भार केंद्र ({load centre}) के पास होना चाहिए।
- पारेषण लाइनों तक आसान पहुँच।
- पर्याप्त भूमि की उपलब्धता (उपकरण और विस्तार के लिए)।
- मिट्टी की स्थिति ({soil condition}), बाढ़ का खतरा और भूकंपीय गतिविधि का मूल्यांकन।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन ({EIA}) और नियामक मंजूरी।
चरण 2: सिस्टम विन्यास का चयन (Selection of System Configuration)
- वोल्टेज स्तर का निर्धारण: आने वाली ({incoming}) और जाने वाली ({outgoing}) लाइनों के लिए आवश्यक वोल्टेज स्तर ({जैसे}, 220 {kV}/33 {kV}) तय करना।
- स्विचिंग स्कीम/बस व्यवस्था का चयन: विश्वसनीयता और परिचालन लचीलेपन के आधार पर बसबार व्यवस्था का चयन करना।
- सामान्य विन्यास: एकल बसबार ({Single Bus}), डबल बसबार ({Double Bus}), रिंग बस ({Ring Bus}), ब्रेकर-एंड-ए-हाफ ({Breaker and a Half})।
चरण 3: मुख्य उपकरण का चयन और निर्धारण (Selection and Specification of Main Equipment)
- ट्रांसफार्मर का आकार: भार की आवश्यकता के आधार पर मुख्य पॉवर ट्रांसफार्मर की रेटिंग ({MVA}) और वोल्टेज रेटिंग का चयन।
- सर्किट ब्रेकर ({Circuit Breakers}): वोल्टेज, अधिकतम निरंतर करंट और शॉर्ट सर्किट इंटरप्टिंग क्षमता के आधार पर रेटिंग का चयन।
- बसबार/कंडक्टर का आकार: अधिकतम करंट वहन क्षमता और शॉर्ट सर्किट बलों का सामना करने के लिए कंडक्टर का चयन।
- इन्स्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर ({CT/PT}): मापने और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए करंट ट्रांसफार्मर ({CT}) और पोटेंशियल ट्रांसफार्मर ({PT}) का चयन।
- अन्य उपकरण: आइसोलेटर ({Isolators}), लाइटनिंग अरेस्टर ({Lightning Arresters}), और सहायक उपकरण का चयन।
चरण 4: लेआउट और सिविल डिजाइन (Layout and Civil Design)
- कुंजी योजना (Key Plan): सभी उपकरणों, स्टील संरचनाओं, नियंत्रण कक्ष ({Control House}), और संपत्ति रेखा की स्थिति दर्शाने वाला एक विस्तृत योजना तैयार करना।
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विद्युत लेआउट डिजाइन:
- उपकरणों के बीच सुरक्षित विद्युत निकासी ({electrical clearances}) सुनिश्चित करना।
- बस डिजाइन और कनेक्शन विवरण।
- केवल ट्रे सिस्टम ({Cable Tray System}) और मैनहोल का लेआउट।
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अर्थिंग और लाइटनिंग प्रोटेक्शन (Earthing and Lightning Protection):
- मिट्टी की प्रतिरोधकता मापकर एक सुरक्षित अर्थिंग ग्रिड ({Earthing Grid}) डिजाइन करना।
- उपकरणों को आसमानी बिजली से बचाने के लिए लाइटनिंग मास्ट ({Lightning Masts}) का डिजाइन।
- संरचनात्मक/सिविल डिजाइन: ट्रांसफार्मर फाउंडेशन, उपकरण सपोर्ट स्ट्रक्चर और कंट्रोल बिल्डिंग का सिविल इंजीनियरिंग डिजाइन।
चरण 5: नियंत्रण और सुरक्षा प्रणाली डिजाइन (Control and Protection System Design)
- रिले सुरक्षा (Relay Protection): सबस्टेशन के प्रत्येक खंड के लिए आवश्यक सुरक्षा रिले और योजनाबद्ध आरेख ({schematics}) डिजाइन करना।
- SCADA और स्वचालन: दूरस्थ नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण ({SCADA}) प्रणाली की स्थापना और वायरिंग आरेख डिजाइन करना।
- सहायक विद्युत प्रणाली: नियंत्रण और सुरक्षा उपकरणों के लिए सहायक {AC} और {DC} बैटरी प्रणाली का डिजाइन।
चरण 6: निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग (Construction, Testing, and Commissioning)
- निर्माण सहायता: साइट पर निर्माण टीम को इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करना।
- स्थापना: उपकरणों की स्थापना और वायरिंग।
- परीक्षण: निर्माण पूरा होने पर, विश्वसनीय और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी उपकरणों और प्रणालियों का कठोर परीक्षण करना।
- कमीशनिंग: ग्रिड में बिजली की आपूर्ति शुरू करने के लिए सबस्टेशन को सक्रिय करना।
सबस्टेशन के लिए साइट (स्थल) का चयन डिजाइन प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण और पहला कदम है, क्योंकि यह सबस्टेशन की विश्वसनीयता, दक्षता और लागत को सीधे प्रभावित करता है।
साइट का चयन करते समय तकनीकी, भौतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक कारकों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है।
सबस्टेशन साइट चयन के महत्वपूर्ण कारक
1. तकनीकी कारक (Technical Factors)
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कारक
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विवरण
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भार केंद्र से निकटता
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सबस्टेशन को भार केंद्र ({load centre}) के जितना संभव हो उतना पास स्थित होना चाहिए। यह पारेषण लाइनों की लंबाई को कम करता है, जिससे बिजली की हानि ({transmission losses}) और कंडक्टर की लागत कम हो जाती है।
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पारेषण लाइन पहुँच
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साइट तक मौजूदा या नियोजित पारेषण लाइनों से जुड़ने के लिए आसान कॉरिडोर ({corridor}) उपलब्ध होना चाहिए।
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भविष्य का विस्तार
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साइट में भविष्य के भार वृद्धि ({load growth}) और अतिरिक्त फीडरों या ट्रांसफार्मर की स्थापना के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
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वोल्टेज स्तर
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सबस्टेशन के प्रकार (स्टेप-अप या स्टेप-डाउन) और उसके वोल्टेज स्तर ({जैसे}, 400 {kV}, 220 {kV}, 33 {kV}) के आधार पर उपकरण के लिए आवश्यक विद्युत निकासी ({electrical clearances}) के लिए जगह की आवश्यकता होती है।
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प्रदूषण
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वायुमंडलीय स्थितियाँ (जैसे, नमक या रासायनिक संदूषक) उपकरण के इन्सुलेशन और रखरखाव की आवश्यकता को प्रभावित करती हैं, इसलिए उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों से बचना चाहिए।
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2. भौतिक और भूवैज्ञानिक कारक (Physical and Geological Factors)
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कारक
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विवरण
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स्थलाकृति ({Topography})
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साइट समतल होनी चाहिए ताकि मिट्टी भराई ({soil filling}) और भूमि निष्कासन जैसे कार्य कम से कम हों, जिससे निर्माण लागत और समय की बचत हो।
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भूवैज्ञानिक स्थिति
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मजबूत नींव ({strong foundation}) के निर्माण के लिए मिट्टी की जाँच ({soil testing}) आवश्यक है। खराब मिट्टी की स्थिति (जैसे, उच्च जल स्तर {high water table}) या कठोर चट्टानी सतह से बचना चाहिए।
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बाढ़ का खतरा
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साइट बाढ़-प्रवण क्षेत्रों ({flood-prone areas}) या जल-जमाव वाले स्थानों से दूर होनी चाहिए। पिछली सबसे खराब बाढ़ के ऐतिहासिक डेटा को ध्यान में रखना चाहिए।
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अर्थिंग प्रतिरोधकता
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कम मिट्टी प्रतिरोधकता ({low soil resistivity}) वांछनीय है, क्योंकि यह एक प्रभावी और सुरक्षित अर्थिंग ग्रिड ({earthing grid}) डिजाइन करने में मदद करती है।
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3. आर्थिक और अवसंरचनात्मक कारक (Economic and Infrastructural Factors)
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कारक
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विवरण
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भूमि की लागत
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चूंकि सबस्टेशन को बड़ी जगह की आवश्यकता होती है, इसलिए जमीन की कीमत उचित होनी चाहिए, और शहर के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों से बाहर स्थान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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पहुँच मार्ग ({Access Road})
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निर्माण मशीनों, भारी उपकरणों, और विशेष रूप से ट्रांसफार्मर के सुगम परिवहन के लिए साइट तक अच्छे सड़क मार्ग उपलब्ध होने चाहिए। रखरखाव कर्मियों के लिए भी आसान पहुँच आवश्यक है।
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परिवहन प्रतिबंध
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बड़े उपकरणों को साइट तक पहुँचाने पर किसी भी प्रकार के परिवहन प्रतिबंध ({transportation restrictions}) का मूल्यांकन।
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4. सामाजिक और पर्यावरणीय कारक (Social and Environmental Factors)
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कारक
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विवरण
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जन स्वीकृति
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साइट को घनी आबादी वाले या आवासीय क्षेत्रों से दूर रखने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि ध्वनि ({noise}) और दृश्य प्रदूषण ({visual pollution}) से बचा जा सके। सार्वजनिक विरोध को कम करने के लिए स्थानीय लोगों को प्रक्रिया में शामिल करना बेहतर है।
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पर्यावरण और संस्कृति
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साइट को अंतर्राष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर नामित संरक्षित क्षेत्रों, जैसे प्राकृतिक विरासत स्थलों, वन्यजीव अभयारण्यों या सांस्कृतिक मूल्य के क्षेत्रों से बचना चाहिए।
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सुरक्षा
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सबस्टेशन की भौतिक सुरक्षा ({physical security}) और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त दूरी और बाड़ लगाना महत्वपूर्ण है।
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सबस्टेशन का प्रकार (जैसे, एयर इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) या गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन (GIS)) भी साइट के आकार की आवश्यकता को प्रभावित करता है; {GIS} को {AIS} की तुलना में बहुत कम जगह की आवश्यकता होती है, जिससे यह तंग या भीड़भाड़ वाले स्थानों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बन जाता है।
सबस्टेशन (Substation) का वोल्टेज स्तर मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों द्वारा निर्धारित होता है:
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प्रणाली में उसका स्थान (Its position in the System): सबस्टेशन विद्युत शक्ति प्रणाली (electric power system) में कहाँ स्थित है, यह इसका वोल्टेज स्तर निर्धारित करता है।
- उत्पादन सबस्टेशन (Generating Substation) या स्टेप-अप सबस्टेशन (Step-Up Substation): ये जनरेटिंग स्टेशन के पास होते हैं और उत्पादित वोल्टेज (generated voltage) (जैसे 11 { kV} से 25 { kV}) को उच्च ट्रांसमिशन वोल्टेज (High Transmission Voltage) (जैसे 132 { kV}, 220 { kV}, 400 { kV} या उससे अधिक) में बदलते हैं ताकि लंबी दूरी पर बिजली के नुकसान को कम किया जा सके।
- प्राथमिक ट्रांसमिशन सबस्टेशन (Primary Transmission Substation): ये उच्च ट्रांसमिशन वोल्टेज को अगले स्तर के ट्रांसमिशन वोल्टेज में बदलते हैं।
- सब-ट्रांसमिशन सबस्टेशन (Sub-Transmission Substation): ये उच्च वोल्टेज को वितरण वोल्टेज (Distribution Voltage) (जैसे 33 { kV} या 66 { kV}) में बदल देते हैं।
- वितरण सबस्टेशन (Distribution Substation) या स्टेप-डाउन सबस्टेशन (Step-Down Substation): ये सब-ट्रांसमिशन या उच्च वितरण वोल्टेज को माध्यम वोल्टेज (Medium Voltage) (जैसे 11 { kV}, 22 { kV} या 33 { kV}) में बदलते हैं, जिसका उपयोग ग्राहकों के पास तक बिजली वितरण के लिए किया जाता है।
- उपभोक्ता सबस्टेशन (Consumer Substation): ये अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए माध्यम वोल्टेज को कम वोल्टेज (Low Voltage) (जैसे 400 { V} / 230 { V}) में बदलते हैं।
- दूरी और बिजली हानि (Distance and Power Loss): लंबी दूरी पर बिजली के संचरण (transmission) के लिए उच्च वोल्टेज का उपयोग किया जाता है ताकि ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली ऊर्जा हानि (energy loss) को कम किया जा सके (P_{{loss}} {1}{V^2})। जैसे-जैसे उपभोग केंद्र (consumption center) करीब आते हैं, वोल्टेज का स्तर चरणबद्ध तरीके से कम किया जाता है।
- वितरण क्षेत्र की आवश्यकता (Requirement of the Distribution Area): शहरी (urban) और ग्रामीण (rural) क्षेत्रों में लोड घनत्व (load density) और दूरी के आधार पर आवश्यक वोल्टेज स्तर अलग-अलग होते हैं।
- मानक वोल्टेज स्तर (Standard Voltage Levels): प्रत्येक क्षेत्र या देश में बिजली के संचरण और वितरण के लिए मानक वोल्टेज स्तर निर्धारित होते हैं, और सबस्टेशन इन्हीं स्तरों के अनुरूप वोल्टेज परिवर्तन (voltage transformation) करते हैं।
सबस्टेशन लोड (भार) और क्षमता (कैपेसिटी) का अनुमान लगाना विद्युत प्रणाली की योजना और विश्वसनीय संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
1. सबस्टेशन लोड अनुमान (Substation Load Estimation)
सबस्टेशन लोड अनुमान का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सबस्टेशन से जुड़े उपभोक्ताओं द्वारा भविष्य में अधिकतम कितनी बिजली की मांग की जाएगी। लोड का अनुमान निम्नलिखित कारकों के आधार पर लगाया जाता है:
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कारक (Factor)
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विवरण (Description)
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जुड़ा हुआ लोड (Connected Load)
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सबस्टेशन से जुड़े सभी उपभोक्ताओं के विद्युत उपकरणों की कुल रेटेड क्षमता (जैसे किलोवाट/kW)।
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डिमांड फैक्टर (Demand Factor)
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जुड़ा हुआ लोड का वह हिस्सा जो एक ही समय में अधिकतम रूप से चालू होने की संभावना है। {Demand Factor} = {{Maximum Demand}}{{Connected Load}}
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लोड फैक्टर (Load Factor)
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दिखाता है कि अधिकतम मांग की तुलना में औसत लोड कितना है। {Load Factor} = {{Average Load}}{{Maximum Demand}}
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विकास दर (Growth Rate)
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पिछले वर्षों की लोड वृद्धि के रुझानों का विश्लेषण करना, और भविष्य में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकीकरण, और नए उपभोक्ताओं की संख्या को ध्यान में रखना।
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क्षेत्र का प्रकार (Area Type)
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क्या क्षेत्र आवासीय (Residential), वाणिज्यिक (Commercial), या औद्योगिक (Industrial) है। प्रत्येक प्रकार का अपना विशिष्ट लोड पैटर्न और मांग होती है।
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पीक लोड समय (Peak Load Time)
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वह समय जब मांग सबसे अधिक होती है (जैसे सुबह और शाम)। अनुमान में इस पीक लोड को ही आधार बनाया जाता है।
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लोड अनुमान के लिए मुख्य रूप से पिछला डेटा विश्लेषण (Historical Data Analysis) और क्षमता-आधारित अनुमान (Area-based Estimation) विधियों का उपयोग किया जाता है।
2. सबस्टेशन क्षमता अनुमान (Substation Capacity Estimation)
सबस्टेशन की क्षमता (आमतौर पर MVA या kVA में) मुख्य रूप से उसमें स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मर की रेटिंग पर निर्भर करती है। क्षमता का अनुमान लगाते समय, अनुमानित अधिकतम लोड के साथ-साथ निम्नलिखित कारकों पर विचार किया जाता है:
- अधिकतम अनुमानित लोड (Maximum Estimated Load): सबस्टेशन की क्षमता हमेशा भविष्य के अधिकतम लोड (आमतौर पर अगले 5 से 10 वर्षों के लिए अनुमानित) से अधिक होनी चाहिए।
- स्पेयर क्षमता (Spare Capacity) या N-1 सुरक्षा: सबस्टेशन डिज़ाइन में कम से कम एक प्रमुख घटक (जैसे एक ट्रांसफार्मर) के विफल होने पर भी शेष उपकरणों द्वारा महत्वपूर्ण लोड को सहन करने की क्षमता होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि दो ट्रांसफार्मर (T_1 + T_2) हैं, तो एक ट्रांसफार्मर (T_1) के फेल होने पर भी दूसरा (T_2) बाकी लोड को संभाल सके।
- तापमान वृद्धि सीमा (Temperature Rise Limits): ट्रांसफार्मर को रेटेड क्षमता से अधिक लोड करने पर उसका तापमान बढ़ सकता है, जिससे उसकी जीवन प्रत्याशा (life expectancy) कम हो जाती है। क्षमता का चयन इस सीमा को ध्यान में रखकर किया जाता है।
- वोल्टेज विनियमन (Voltage Regulation): ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड होने से वोल्टेज ड्रॉप होता है। क्षमता का चयन ऐसा होना चाहिए कि उपभोक्ताओं को स्वीकार्य सीमा के भीतर वोल्टेज मिलता रहे।
- मानकीकरण (Standardization): यूटिलिटी कंपनियाँ इन्वेंटरी और रखरखाव में आसानी के लिए कुछ मानक ट्रांसफार्मर रेटिंग (जैसे 10 { MVA}, 20 { MVA}, 50 { MVA} आदि) का उपयोग करती हैं।
संक्षेप में,
सबस्टेशन क्षमता को हमेशा अधिकतम अपेक्षित लोड + पर्याप्त सुरक्षा मार्जिन (Spare Capacity for Reliability) के बराबर या उससे अधिक रखा जाता है।
सबस्टेशन का लेआउट (Layout) तय करना एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जो कई कारकों पर निर्भर करती है। लेआउट का उद्देश्य सबस्टेशन को विश्वसनीय (reliable), लचीला (flexible), सुरक्षित (safe) और किफायती (economical) बनाना है।
सबस्टेशन लेआउट तय करने वाले मुख्य कारक
सबस्टेशन के भौतिक विन्यास (physical configuration) को अंतिम रूप देने में निम्नलिखित कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
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कारक (Factor)
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विवरण (Description)
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1. वोल्टेज स्तर (Voltage Level)
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उच्च वोल्टेज (HV, EHV, UHV) वाले सबस्टेशनों में उपकरणों और तारों के बीच अधिक सुरक्षित दूरी (clearance) की आवश्यकता होती है। इसलिए, उच्च वोल्टेज सबस्टेशन (High Voltage Substation) के लिए एक बड़ा क्षेत्र (larger area) और आउटडोर (Outdoor) लेआउट आवश्यक होता है।
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2. विश्वसनीयता की आवश्यकता (Reliability Requirement)
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यह निर्धारित करता है कि किसी फॉल्ट या रखरखाव के दौरान कितने फीडरों को आपूर्ति मिलती रहनी चाहिए। उच्च विश्वसनीयता के लिए जटिल बस बार योजनाएं (Complex Bus Bar Schemes) (जैसे डबल बस-बार या रिंग बस) चुनी जाती हैं, जिन्हें अधिक जगह की आवश्यकता होती है।
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3. उपलब्ध स्थान (Available Space / Land Cost)
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शहरी क्षेत्रों (Urban Areas) में, भूमि महंगी होती है और जगह कम होती है। ऐसे में इनडोर सबस्टेशन (Indoor Substation) या गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन (GIS - Gas Insulated Substation) का उपयोग किया जाता है, जो एयर इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) की तुलना में बहुत कम जगह लेते हैं।
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4. भविष्य का विस्तार (Future Expansion)
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लेआउट को इस तरह से डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि भविष्य में क्षमता वृद्धि (जैसे अतिरिक्त ट्रांसफार्मर जोड़ना) या नए फीडरों को जोड़ने के लिए पर्याप्त जगह और लचीलापन हो।
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5. संचालन और रखरखाव में आसानी (Ease of Operation & Maintenance)
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लेआउट ऐसा होना चाहिए कि सुरक्षा दूरी (safety clearances) बनी रहे और कर्मचारियों के लिए सभी उपकरणों तक पहुंचना, निरीक्षण करना और रखरखाव करना आसान हो।
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6. लागत (Cost)
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जटिल लेआउट (जैसे डबल बस-बार) और GIS सबस्टेशन की लागत सिंगल बस-बार लेआउट और AIS सबस्टेशन की तुलना में काफी अधिक होती है। लागत और विश्वसनीयता के बीच संतुलन बनाया जाता है।
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सबस्टेशन बस-बार लेआउट के प्रकार
लेआउट का चयन मुख्य रूप से बस-बार व्यवस्था पर निर्भर करता है, जो सबस्टेशन के लचीलेपन और विश्वसनीयता को तय करती है:
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सिंगल बस-बार लेआउट (Single Bus-Bar Layout):
- विशेषता: सबसे सरल और सस्ता। सभी इनकमिंग और आउटगोइंग लाइनें एक ही बस से जुड़ी होती हैं।
- उपयोग: कम महत्व वाले, छोटे डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशनों (33 { kV} तक) के लिए।
- नुकसान: यदि बस-बार में फॉल्ट आता है, तो पूरा सबस्टेशन बंद हो जाता है (कम विश्वसनीयता)।
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डबल बस-बार लेआउट (Double Bus-Bar Layout):
- विशेषता: दो मुख्य बस-बार होते हैं। प्रत्येक फीडर को दोनों बस-बार से जोड़ा जा सकता है।
- उपयोग: उच्च वोल्टेज और महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन सबस्टेशनों के लिए।
- फायदा: एक बस-बार पर काम चल रहा हो या फॉल्ट हो, तो लोड को दूसरे बस-बार पर शिफ्ट किया जा सकता है (उच्च विश्वसनीयता)।
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रिंग बस लेआउट (Ring Bus Layout):
- विशेषता: सभी इनकमिंग और आउटगोइंग फीडरों को एक गोलाकार रिंग बस से जोड़ा जाता है।
- फायदा: उच्च विश्वसनीयता। किसी भी फॉल्ट को आइसोलेट किया जा सकता है जबकि शेष रिंग चालू रहती है।
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ब्रीकर और एक-आधा लेआउट (Breaker and a Half Layout):
- विशेषता: प्रत्येक दो फीडर के लिए तीन सर्किट ब्रेकर का उपयोग किया जाता है।
- उपयोग: अति-उच्च वोल्टेज (400 { kV} और उससे ऊपर) और सबसे महत्वपूर्ण सबस्टेशनों के लिए।
- फायदा: सबसे अधिक विश्वसनीयता और लचीलापन।
लेआउट,
सबस्टेशन के प्रकार और उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा की गंभीरता पर निर्भर करता है।
सबस्टेशन के प्रमुख उपकरणों (Major Equipment) का चयन एक जटिल प्रक्रिया है जो विद्युत प्रणाली की आवश्यकताओं, विश्वसनीयता और आर्थिक विचारों पर आधारित होती है।
उपकरणों को मुख्य रूप से प्राथमिक उपकरण (Primary Equipment) और द्वितीयक उपकरण (Secondary Equipment) में विभाजित किया जाता है।
प्रमुख उपकरण चयन के सामान्य मापदंड
किसी भी प्रमुख उपकरण (जैसे ट्रांसफार्मर, सर्किट ब्रेकर) का चयन करते समय निम्नलिखित मुख्य मापदंडों पर विचार किया जाता है:
- रेटेड वोल्टेज (Rated Voltage): उपकरण का चयन सिस्टम के अधिकतम ऑपरेटिंग वोल्टेज (जैसे 33 { kV}, 132 { kV}, 400 { kV}) के लिए किया जाना चाहिए।
- रेटेड धारा (Rated Current): उपकरण को अधिकतम अपेक्षित लोड धारा को सुरक्षित रूप से वहन करने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही भविष्य के लोड वृद्धि के लिए पर्याप्त मार्जिन (Margin) भी होना चाहिए।
- शॉर्ट-सर्किट वियोजन क्षमता (Short-Circuit Breaking Capacity): सर्किट ब्रेकर जैसे सुरक्षात्मक उपकरणों को सिस्टम में होने वाले अधिकतम शॉर्ट-सर्किट फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से तोड़ने में सक्षम होना चाहिए।
- इंसुलेशन स्तर (Insulation Level) / BIL: उपकरणों का चयन उनके बेसिक इंपल्स इंसुलेशन लेवल (BIL) के आधार पर किया जाता है, जो उन्हें बिजली गिरने (Lightning) या स्विचिंग के कारण होने वाले ओवरवोल्टेज से बचाता है।
- विश्वसनीयता और रखरखाव (Reliability & Maintenance): उपकरणों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता, और न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाती है।
- पर्यावरण की स्थिति (Environmental Conditions): उपकरण को स्थानीय जलवायु (तापमान, आर्द्रता, वर्षा, प्रदूषण स्तर) के अनुसार उपयुक्त होना चाहिए (जैसे उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों में विशेष इन्सुलेटर का उपयोग)।
- लागत (Cost): प्रारंभिक पूंजीगत लागत (Initial Capital Cost) और उपकरणों के परिचालन लागत (Operational Cost) के बीच एक किफायती संतुलन बनाना।
प्रमुख उपकरणों के लिए विशिष्ट चयन मापदंड
1. पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformer)
- क्षमता (Capacity - MVA/kVA): यह सबस्टेशन के अधिकतम अनुमानित लोड और भविष्य के लोड वृद्धि पर आधारित होता है। विश्वसनीयता के लिए एक स्पेयर ट्रांसफार्मर या N-1 सुरक्षा क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।
- वोल्टेज रेटिंग: ट्रांसमिशन वोल्टेज (प्राथमिक) और डिस्ट्रीब्यूशन वोल्टेज (द्वितीयक) की सटीक आवश्यकताएँ।
- कूलिंग विधि (Cooling Method): जैसे {ONAN} (प्राकृतिक तेल और हवा), {OFAF} (जबरन तेल और हवा)। उच्च क्षमता के लिए अधिक प्रभावी कूलिंग विधियाँ चुनी जाती हैं।
- टैप चेंजर (Tap Changer): वोल्टेज को समायोजित करने के लिए {On-Load Tap Changer (OLTC)} या {Off-Load Tap Changer} की आवश्यकता का निर्धारण।
2. सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker - CB)
- रेटेड वोल्टेज और करंट: सिस्टम की आवश्यकतानुसार।
- वियोजन क्षमता (Breaking Capacity): यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जो उस अधिकतम फॉल्ट करंट को दर्शाता है जिसे ब्रेकर सुरक्षित रूप से इंटरप्ट (interrupt) कर सकता है। यह सबस्टेशन पर गणना किए गए अधिकतम शॉर्ट-सर्किट करंट से अधिक होना चाहिए।
- ऑपरेटिंग माध्यम (Operating Medium): {SF6} गैस, वैक्यूम या तेल। उच्च वोल्टेज पर और पर्यावरण के कारण {SF6} ब्रेकर आम तौर पर पसंद किए जाते हैं।
- ऑपरेटिंग समय (Operating Time): फॉल्ट को तेज़ी से हटाने के लिए ब्रेकर का कुल वियोजन समय (Total Breaking Time) कम होना चाहिए।
3. आइसोलेटर/डिस्कनेक्टर स्विच (Isolator/Disconnector Switch)
- रेटेड वोल्टेज और करंट: सर्किट ब्रेकर के समान।
- शॉर्ट-सर्किट withstand क्षमता: चूंकि आइसोलेटर बिना लोड पर ही खोले या बंद किए जाते हैं, इसलिए उनकी वियोजन क्षमता शून्य होती है, लेकिन उन्हें सिस्टम में होने वाले अधिकतम शॉर्ट-सर्किट करंट को कुछ समय के लिए वहन (withstand) करने में सक्षम होना चाहिए।
- मोटराइज्ड/मैन्युअल ऑपरेशन: वोल्टेज स्तर के आधार पर रिमोट ऑपरेशन के लिए मोटर चालित (Motorized) आइसोलेटर चुने जाते हैं।
4. इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर (CT और PT/VT)
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करंट ट्रांसफार्मर (CT):
- अनुपात (Ratio): प्राथमिक वाइंडिंग के लिए अधिकतम लोड करंट और सेकेंडरी वाइंडिंग के लिए मीटरिंग/सुरक्षा मानकों के अनुरूप अनुपात (1 {A} या 5 {A})।
- बर्डन और सटीकता वर्ग (Burden & Accuracy Class): मीटरिंग (उच्च सटीकता) और सुरक्षा (तेज़ प्रतिक्रिया) की आवश्यकताओं के लिए अलग-अलग {CT} चुने जाते हैं।
- पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT/VT):
- अनुपात (Ratio): प्राथमिक वोल्टेज और सेकेंडरी वोल्टेज (110 {V} या 63.5 {V}) के अनुरूप।
5. लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester - LA)
- रेटेड वोल्टेज: सिस्टम के अधिकतम फेज-टू-ग्राउंड वोल्टेज से अधिक होना चाहिए।
- डिस्चार्ज क्षमता: अरेस्टर को बिजली गिरने (Lightning Strike) की अधिकतम ऊर्जा को अवशोषित करने में सक्षम होना चाहिए। आमतौर पर मेटल ऑक्साइड वेरीस्टर (MOV) प्रकार के अरेस्टर चुने जाते हैं।
सबस्टेशन की संरक्षण (Protection) और मीटरिंग (Metering) योजनाएँ विद्युत प्रणाली की सुरक्षा, विश्वसनीयता और वाणिज्यिक संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों योजनाएँ एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और {CT} (करंट ट्रांसफार्मर) और {PT} (पोटेंशियल ट्रांसफार्मर) जैसे सहायक उपकरणों पर निर्भर करती हैं।
1. सबस्टेशन संरक्षण योजना (Substation Protection Scheme)
संरक्षण योजना का मुख्य उद्देश्य दोष (Faults) (जैसे शॉर्ट सर्किट, अर्थ फॉल्ट) का पता लगाना और दोषपूर्ण उपकरण या खंड को तेजी से और चुनिंदा (Fast and Selective) रूप से बाकी स्वस्थ प्रणाली से अलग करना है।
प्रमुख संरक्षण क्षेत्र और उपकरण:
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उपकरण/संरक्षण क्षेत्र
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दोष (Fault)
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प्राथमिक सुरक्षा (Main Protection)
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बैकअप सुरक्षा (Back-up Protection)
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पावर ट्रांसफार्मर
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वाइंडिंग फॉल्ट, कोर फॉल्ट, इंटर-टर्न फॉल्ट
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डिफरेंशियल रिले ({87}): ट्रांसफार्मर के इनपुट और आउटपुट करंट के अंतर पर आधारित।
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ओवरकरंट रिले ({51/50}), अर्थ फॉल्ट रिले ({51N})।
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ओवर टेम्परेचर, ओवर प्रेशर
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बुखोल्ज़ रिले (Buchholz Relay): आंतरिक गैस या तेल दबाव में वृद्धि का पता लगाता है।
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बसबार (Busbar)
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बस फॉल्ट (उच्च शॉर्ट सर्किट करंट)
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बसबार डिफरेंशियल प्रोटेक्शन ({87B}): बस से जुड़े सभी फीडरों के योग और बस से निकलने वाले करंट के योग के बीच अंतर पर आधारित।
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ज़ोन प्रोटेक्शन (Zone Protection) या लोकल बैकअप।
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फीडर/लाइन (Feeders/Lines)
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शॉर्ट सर्किट, अर्थ फॉल्ट
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डिस्टेंस रिले ({21}): लाइन की दूरी के अनुपात में प्रतिबाधा को मापता है।
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ओवरकरंट और अर्थ फॉल्ट रिले ({51/51N})।
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पायलट प्रोटेक्शन (लंबी लाइनों के लिए): {POTT/PUTT} या {Phase Comparison}।
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सर्किट ब्रेकर
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ब्रेकर विफलता (Breaker Failure)
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ब्रेकर फेलियर प्रोटेक्शन ({50BF}): यदि {CB} को ट्रिप कमांड मिलने के बाद भी फॉल्ट करंट जारी रहता है, तो यह आस-पास के {CB} को ट्रिप कर देता है।
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संरक्षण योजना के चयन को प्रभावित करने वाले कारक:
- उपकरण का महत्व और लागत: महंगे और महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए अधिक जटिल और तेज़ सुरक्षा योजनाएँ (जैसे {डिफरेंशियल} और {डिस्टेंस} प्रोटेक्शन) का उपयोग किया जाता है।
- दोष साफ़ करने का समय (Fault Clearing Time): दोष को तेजी से साफ करने से उपकरण की क्षति कम होती है और सिस्टम स्थिरता बनी रहती है।
- चयनशीलता (Selectivity): यह सुनिश्चित करना कि केवल दोषपूर्ण भाग ही अलग हो, स्वस्थ भाग की बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
- समन्वय (Coordination): प्राथमिक और बैकअप सुरक्षा उपकरणों के बीच एक उचित समय विलंब (Time Delay) सुनिश्चित करना ताकि बैकअप तभी संचालित हो जब प्राथमिक विफल हो जाए।
2. सबस्टेशन मीटरिंग योजना (Substation Metering Scheme)
मीटरिंग योजना का उद्देश्य सिस्टम के महत्वपूर्ण विद्युत मापदंडों को मापना, रिकॉर्ड करना और उनका बिलिंग (Billing) और परिचालन उद्देश्यों के लिए उपयोग करना है।
प्रमुख मीटरिंग उपकरण:
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उपकरण
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कार्य
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करंट ट्रांसफार्मर (CT)
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उच्च करंट को मापने योग्य, मानकीकृत निम्न करंट (जैसे {1 A} या {5 A}) में रूपांतरित करता है।
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पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT) / वोल्टेज ट्रांसफार्मर (VT)
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उच्च वोल्टेज को मापने योग्य, मानकीकृत निम्न वोल्टेज (जैसे {110 V} या {63.5 V}) में रूपांतरित करता है।
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एनर्जी मीटर (Energy Meter)
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उपभोग की गई विद्युत ऊर्जा ({kWh}) और प्रतिक्रियाशील ऊर्जा ({kVARh}) को मापता है। वाणिज्यिक मीटरिंग के लिए उच्च सटीकता वर्ग (जैसे {0.2 S}) के मीटर उपयोग किए जाते हैं।
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अन्य मीटर
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वोल्टमीटर, एमीटर, पावर फैक्टर मीटर, फ्रीक्वेंसी मीटर और {Digital Fault Recorders (DFR)}।
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मीटरिंग का वर्गीकरण:
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मीटरिंग का प्रकार
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उद्देश्य
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सटीकता की आवश्यकता
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वाणिज्यिक/राजस्व मीटरिंग (Commercial/Revenue Metering)
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बिलिंग और ऊर्जा व्यापार के लिए सटीक ऊर्जा विनिमय को रिकॉर्ड करना।
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उच्चतम सटीकता (जैसे {0.2 S} या {0.5 S} क्लास)।
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परिचालन मीटरिंग (Operational Metering)
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सबस्टेशन के नियंत्रण कक्ष से वास्तविक समय में वोल्टेज, करंट, आवृत्ति, और पावर फ्लो की निगरानी करना।
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मध्यम सटीकता (जैसे {1.0} क्लास)।
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मीटरिंग योजना के चयन को प्रभावित करने वाले कारक:
- सटीकता वर्ग (Accuracy Class): राजस्व मीटरिंग के लिए आवश्यक उच्च सटीकता सुनिश्चित करना।
- CT/PT रेटिंग: इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर की रेटिंग मीटर की इनपुट आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
- बर्डन (Burden): {CT/PT} का चयन इस तरह किया जाता है कि वह जुड़े हुए सभी मीटरों और रिले के लोड (Burden) को सुरक्षित रूप से संभाल सके।
- डेटा अधिग्रहण और संचार: मीटरिंग डेटा को {SCADA} (Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली या दूरस्थ निगरानी केंद्र तक भेजने के लिए संचार प्रोटोकॉल और उपकरणों का चयन।
संरक्षण और मीटरिंग,
दोनों ही मामलों में, {CT} और {PT} दोहरे उद्देश्य (Dual Purpose) वाले उपकरण हैं, लेकिन सुरक्षा (Protection) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले {CT/PT} के कोर और मीटरिंग (Metering) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले {CT/PT} के कोर को एक दूसरे से अलग रखा जाता है ताकि एक की विफलता दूसरे को प्रभावित न करे।
सबस्टेशन अर्थिंग डिज़ाइन सुरक्षा और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य अर्थ फॉल्ट करंट (Earth Fault Current) को सुरक्षित रूप से जमीन (अर्थ) में प्रवाहित करना और स्टेप वोल्टेज (Step Voltage) और टच वोल्टेज (Touch Voltage) को सुरक्षित सीमा के भीतर रखना है।
सबस्टेशन अर्थिंग डिज़ाइन के मुख्य सिद्धांत:
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अर्थिंग ग्रिड (Earthing Grid):
- सबस्टेशन के पूरे क्षेत्र को कवर करते हुए, जमीन के नीचे हॉरिजॉन्टल स्ट्रिप्स (horizontal strips) या कंडक्टरों का एक जाल (Mesh) बिछाया जाता है, जिसे अर्थिंग ग्रिड कहते हैं।
- यह ग्रिड आम तौर पर तांबे (Copper) या गैल्वेनाइज्ड स्टील (Galvanized Steel) की स्ट्रिप्स से बना होता है।
- कंडक्टरों को 0.5 मीटर से 1 मीटर की गहराई पर दफनाया जाता है।
- सुरक्षित वोल्टेज सीमा (Safe Voltage Limits):
- डिज़ाइन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी फॉल्ट की स्थिति में, टच वोल्टेज (उपकरण को छूने वाले व्यक्ति के हाथ और पैर के बीच का वोल्टेज) और स्टेप वोल्टेज (जमीन पर खड़े व्यक्ति के दोनों पैरों के बीच का वोल्टेज) खतरनाक स्तर से नीचे रहे। इसके लिए IEEE Std 80 जैसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाता है।
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ग्रिड प्रतिरोध (Grid Resistance):
- अर्थिंग ग्रिड का संपर्क प्रतिरोध (Contact Resistance) यथासंभव कम होना चाहिए, ताकि फॉल्ट करंट आसानी से जमीन में जा सके।
- यह मिट्टी की प्रतिरोधकता (Soil Resistivity) और ग्रिड के डिज़ाइन पर निर्भर करता है।
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फॉल्ट करंट (Fault Current):
- डिज़ाइन करते समय, सबस्टेशन में संभावित अधिकतम अर्थ फॉल्ट करंट और फॉल्ट की अवधि (Fault Duration) को ध्यान में रखा जाता है।
- कंडक्टर का साइज़ इतना होना चाहिए कि वह फॉल्ट की अवधि के दौरान बिना पिघले या ज़्यादा गरम हुए इस करंट को सहन कर सके।
- अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrodes/Rods):
- ग्रिड के साथ-साथ, वर्टिकल रॉड (Vertical Rods) भी लगाए जाते हैं और ग्रिड से जोड़े जाते हैं ताकि जमीन के गहरे, कम प्रतिरोध वाले परतों तक बेहतर संपर्क बनाया जा सके।
- उपकरणों की अर्थिंग (Equipment Earthing):
- सभी गैर-करंट ले जाने वाले धात्विक भाग (non-current-carrying metallic parts), जैसे ट्रांसफार्मर के टैंक, स्विचगियर बाड़े, और स्ट्रक्चर्स को सुरक्षा के लिए अर्थिंग ग्रिड से जोड़ा जाता है।
सबस्टेशन का नियंत्रण एवं संरक्षण कक्ष (Control and Protection Room) सबस्टेशन का दिमाग (Brain) होता है, जहाँ से पूरे सबस्टेशन के उपकरणों का संचालन (Operation), निगरानी (Monitoring), और सुरक्षा (Protection) की जाती है।
यह एक वातानुकूलित (Air-conditioned) और सुरक्षित इनडोर स्थान होता है जिसमें महत्वपूर्ण कंट्रोल पैनल (Control Panels) और रिले पैनल (Relay Panels) रखे जाते हैं।
मुख्य कार्य (Main Functions)
नियंत्रण एवं संरक्षण कक्ष के दो प्राथमिक कार्य हैं:
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नियंत्रण (Control):
- यह ऑपरेटरों को सर्किट ब्रेकर (Circuit Breakers), डिस्कनेक्टर स्विच (Disconnector Switches), और टैप चेंजर (Tap Changers) जैसे उपकरणों को दूर से संचालित (Remotely Operate) करने की अनुमति देता है।
- ऑपरेटर यहाँ से सिस्टम में वोल्टेज (Voltage) और करंट (Current) के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।
- इसमें SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम भी शामिल होता है जो पूरे ग्रिड का वास्तविक समय (Real-time) डेटा प्रदर्शित करता है।
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संरक्षण (Protection):
- यह सबस्टेशन के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। इसमें सुरक्षा रिले (Protective Relays) और संबंधित सर्किट होते हैं।
- जब सिस्टम में फॉल्ट (Fault) (जैसे शॉर्ट सर्किट या अर्थ फॉल्ट) होता है, तो ये रिले उसे तुरंत सेंस (Sense) करते हैं।
- फॉल्ट को सेंस करने के बाद, रिले सर्किट ब्रेकर को एक ट्रिप कमांड (Trip Command) भेजकर फॉल्टी सेक्शन को सेकंडों के एक अंश में स्वस्थ (Healthy) सिस्टम से अलग (Isolate) कर देता है, जिससे महंगे उपकरण सुरक्षित रहते हैं और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बनी रहती है।
कक्ष के प्रमुख घटक (Key Components of the Room)
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घटक (Component)
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कार्य (Function)
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कंट्रोल पैनल
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सबस्टेशन उपकरणों के नियंत्रण स्विच और इंडिकेटर लाइट्स होते हैं।
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रिले पैनल
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इसमें विभिन्न प्रकार के सुरक्षा रिले (जैसे ओवरकरंट, अर्थ फॉल्ट, डिस्टेंस रिले) लगाए जाते हैं।
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मीटरिंग पैनल
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वोल्टेज, करंट, पावर (kW, kVA), ऊर्जा (kWh) आदि के मापन उपकरण।
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SCADA / HMI
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कंप्यूटर सिस्टम और मानव-मशीन इंटरफेस, जो सबस्टेशन के डेटा को ग्राफ़िकल रूप से दिखाते हैं।
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बैटरी बैंक (DC)
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आपातकालीन स्थिति (AC पावर फेल होने) में रिले, ब्रेकर और कंट्रोल सिस्टम को DC पावर सप्लाई करता है।
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AC / DC वितरण बोर्ड
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कक्ष के उपकरणों को पावर सप्लाई का वितरण और सुरक्षा।
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संचार उपकरण
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ग्रिड के अन्य सबस्टेशनों और लोड डिस्पैच सेंटर से संपर्क बनाए रखने के लिए।
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डिज़ाइन पर विचार (Design Considerations)
- सुरक्षा: उपकरणों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आग प्रतिरोधी सामग्री (Fire-resistant material) का उपयोग।
- लेआउट: नियंत्रण और रिले पैनल को तार्किक रूप से व्यवस्थित किया जाता है ताकि ऑपरेटर जल्दी से प्रतिक्रिया कर सकें। पैनल के पीछे की वायरिंग पहचानने योग्य (Identifiable) होनी चाहिए।
- पर्यावरण: धूल, नमी और तापमान को नियंत्रित करने के लिए एयर कंडीशनिंग (AC) अनिवार्य है, क्योंकि ये उपकरण अत्यधिक तापमान और नमी के प्रति संवेदनशील होते हैं।
सबस्टेशन का सिविल और संरचनात्मक डिज़ाइन (Civil and Structural Design) सबस्टेशन के सभी उपकरणों और इमारतों को सहारा देने के साथ-साथ उन्हें मौसम और विद्युत बलों (Electrical Forces) से सुरक्षित रखने के लिए आधार प्रदान करता है।
डिज़ाइन का लक्ष्य स्थायित्व (Durability), सुरक्षा (Safety), और लंबे समय तक संचालन (Long-term operation) सुनिश्चित करना है।
सिविल डिज़ाइन (Civil Design)
सिविल डिज़ाइन मुख्य रूप से सबस्टेशन की भौगोलिक योजना और भूमि उपयोग से संबंधित है।
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साइट विकास (Site Development):
- साइट की तैयारी: भूमि को समतल (Grading) करना और जल निकासी (Drainage) की उचित व्यवस्था करना ताकि भारी बारिश के दौरान पानी जमा न हो।
- बाड़ लगाना और सुरक्षा: अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए सबस्टेशन के चारों ओर चारदीवारी (Boundary wall) और सुरक्षा द्वार का निर्माण।
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सड़कें और फुटपाथ (Roads and Pavements):
- उपकरणों के रखरखाव और परिवहन के लिए साइट के भीतर पक्की सड़कों का डिज़ाइन।
- ऑपरेटरों के चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ।
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भवन (Buildings):
- नियंत्रण कक्ष (Control Room): वातानुकूलित, धूल-मुक्त कमरा जिसमें रिले और नियंत्रण पैनल रखे जाते हैं।
- बैटरी कक्ष (Battery Room): बैटरी बैंक के लिए वेंटिलेशन और एसिड-प्रतिरोधी फर्श वाला कमरा।
- अन्य सहायक भवन: गार्ड रूम, स्टोर रूम, और अग्निशमन उपकरण कक्ष।
- ऑयल पिट और ड्रेनेज (Oil Pits and Drainage):
- ट्रांसफार्मर के नीचे ऑयल कलेक्शन पिट (Oil Collection Pit) का निर्माण, ताकि ट्रांसफार्मर में आग लगने या तेल रिसाव की स्थिति में तेल मिट्टी या जल निकासी प्रणाली को दूषित न करे।
- अर्थिंग ग्रिड (Earthing Grid):
- अर्थिंग कंडक्टरों को दफनाने के लिए साइट की खुदाई और तैयारी भी सिविल कार्य का हिस्सा है।
संरचनात्मक डिज़ाइन (Structural Design)
संरचनात्मक डिज़ाइन का संबंध लोड (भार) वहन करने वाली सभी संरचनाओं की मजबूती और स्थिरता से है।
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उपकरण नींव (Equipment Foundations):
- ट्रांसफार्मर नींव: ट्रांसफार्मर के भारी स्थिर भार (Static load) को वहन करने के लिए डिज़ाइन किया गया।
- सर्किट ब्रेकर और आइसोलेटर नींव: इन उपकरणों को उचित ऊँचाई और स्तर पर सहारा देने के लिए नींव।
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स्टील संरचनाएँ (Steel Structures):
- गैन्ट्री (Gantry): बसबारों और ओवरहेड कंडक्टरों को सहारा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले जालीदार स्टील के ऊँचे टॉवर या संरचनाएँ।
- उपकरण सपोर्ट स्ट्रक्चर: करंट ट्रांसफार्मर (CT), पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT), और लाइटनिंग अरेस्टर जैसे उपकरणों को माउंट करने के लिए स्टील के फ्रेम।
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संरचनात्मक विश्लेषण (Structural Analysis):
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सभी संरचनाओं का डिज़ाइन निम्नलिखित बलों और भारों को सहन करने के लिए किया जाता है:
- मृत भार (Dead Load): संरचना और उपकरण का अपना भार।
- लाइव भार (Live Load): रखरखाव के दौरान कर्मचारियों या अस्थायी भार।
- हवा का भार (Wind Load): हवा के दबाव को सहन करने की क्षमता।
- भूकंपीय भार (Seismic Load): भूकंप संभावित क्षेत्रों में भूकंप के झटकों का सामना करने की क्षमता।
- विद्युत बल (Electrical Forces): शॉर्ट सर्किट के दौरान कंडक्टरों में उत्पन्न होने वाले गतिशील विद्युत बल।
- सामग्री का चयन: संरचनाओं के लिए उच्च-शक्ति वाले गैल्वेनाइज्ड स्टील (Galvanized Steel) का उपयोग किया जाता है ताकि जंग से सुरक्षा मिल सके और लंबी उम्र सुनिश्चित हो सके।
सबस्टेशन की सुरक्षा और मानक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे विद्युत प्रणाली की विश्वसनीयता (Reliability) सुनिश्चित करते हैं और कर्मचारियों एवं आम जनता को बिजली के खतरों (Electrical Hazards) से बचाते हैं।
सबस्टेशन सुरक्षा (Substation Safety)
सबस्टेशन सुरक्षा का उद्देश्य दुर्घटनाओं, आग और उपकरणों की क्षति को रोकना है।
1. व्यक्तिगत सुरक्षा नियम (Personnel Safety Rules)
- सभी को "चार्ज" मानें: हमेशा यह मानकर काम करें कि सभी तार और उपकरण चार्ज्ड (Energized) हैं, जब तक कि उन्हें स्रोत से डिस्कनेक्ट, टेस्ट और अर्थ न कर दिया जाए।
- PPE (Personal Protective Equipment) का उपयोग: काम करते समय हमेशा उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (जैसे हेलमेट, सुरक्षा दस्ताने, सुरक्षा जूते और आर्क-रेटेड कपड़े) पहनें।
- सुरक्षित दूरी: वोल्टेज स्तर के अनुसार लाइव लाइनों और उपकरणों से निर्धारित न्यूनतम सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- LOTO (Lockout-Tagout) प्रक्रिया: उपकरणों पर काम शुरू करने से पहले आकस्मिक ऊर्जाकरण (Accidental energization) को रोकने के लिए LOTO प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करें।
- अर्थिंग/ग्राउंडिंग: मरम्मत या रखरखाव के दौरान काम करने वाले उपकरणों को ठीक से अर्थ (Properly Ground) करें।
2. परिसर और उपकरण सुरक्षा (Perimeter and Equipment Safety)
- बाड़ लगाना: अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए सबस्टेशन के चारों ओर न्यूनतम 1.8 मीटर ऊँचाई की धातु की बाड़ (Metallic fence) लगाना।
- खतरे के निशान: प्रवेश द्वारों और उच्च-वोल्टेज क्षेत्रों (High-voltage areas) पर हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में खतरे के नोटिस (Danger Boards) लगाए जाने चाहिए (आमतौर पर IS: 2551 के अनुसार)।
- अग्निशमन: ट्रांसफार्मर और अन्य तेल-भरे उपकरणों के पास आग से लड़ने के लिए उचित अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguishers) और तेल संग्रह गड्ढे (Oil Collection Pits) की व्यवस्था होनी चाहिए (IS 1646)।
- प्रशिक्षण: सभी कर्मचारियों को सुरक्षा नियमों, आपातकालीन प्रक्रियाओं और उपकरण संचालन का गहन प्रशिक्षण (Training) दिया जाना चाहिए।
सबस्टेशन मानक (Substation Standards)
सबस्टेशनों का डिज़ाइन, निर्माण और संचालन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाता है। भारत में, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS/IS) द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है।
1. भारतीय मानक (Indian Standards - IS Codes)
सबस्टेशन के विभिन्न पहलुओं के लिए निम्नलिखित IS कोड महत्वपूर्ण हैं:
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मानक (IS Code)
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विवरण (Description)
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IS 3043
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अर्थिंग (Earthing) के लिए अभ्यास संहिता। यह विद्युत सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक है।
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IS 1646
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भवनों की अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के लिए अभ्यास संहिता, विशेष रूप से विद्युत संस्थापनों से संबंधित (जैसे ट्रांसफार्मर और स्विचगियर हाउसिंग)।
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IS 2551
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खतरे के नोटिस (Danger Notice) के लिए विशिष्टता।
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IS 15652
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स्विचगियर और कंट्रोल पैनल के सामने उपयोग किए जाने वाले इंसुलेटिंग मैट (Insulating Mats) के लिए मानक।
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IS 5613
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पावर ट्रांसमिशन लाइनों के लिए न्यूनतम विद्युत क्लीयरेंस (Minimum Electrical Clearance) को परिभाषित करता है।
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2. वैधानिक नियम (Statutory Regulations)
- भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 (Indian Electricity Act, 2003): भारत में बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार को नियंत्रित करता है।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपाय) विनियम, 2010 (CEA Regulations): इसमें विद्युत सुरक्षा और आपूर्ति के विस्तृत नियम शामिल हैं, जिसमें अर्थिंग, गार्डिंग और क्लीयरेंस शामिल हैं।
सबस्टेशन में SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) और स्वचालन (Automation) आधुनिक ग्रिड संचालन की रीढ़ हैं। इनका उपयोग सबस्टेशन उपकरणों की दूरस्थ निगरानी (Remote Monitoring), नियंत्रण (Control), और स्वचालित संचालन (Automated Operation) के लिए किया जाता है।
SCADA प्रणाली (SCADA System)
SCADA एक ऐसी प्रणाली है जो ऑपरेटरों को केंद्रीकृत स्थान (Centralized Location) से पूरे सबस्टेशन नेटवर्क की निगरानी और नियंत्रण करने की अनुमति देती है।
SCADA के प्रमुख कार्य
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डेटा अधिग्रहण (Data Acquisition):
- यह फील्ड उपकरणों (Field Devices) (जैसे ट्रांसफार्मर का तापमान, सर्किट ब्रेकर की स्थिति, वोल्टेज, करंट, आवृत्ति आदि) से वास्तविक समय (Real-time) में डेटा एकत्र करता है।
- यह डेटा RTU (Remote Terminal Unit) या IEDs (Intelligent Electronic Devices) के माध्यम से केंद्रीय मास्टर यूनिट (Master Unit) तक पहुँचता है।
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सुपरविजन और निगरानी (Supervision and Monitoring):
- ऑपरेटर HMI (Human-Machine Interface) स्क्रीन पर सबस्टेशन का सचित्र प्रतिनिधित्व (Graphical Representation) देखते हैं।
- यह प्रणाली अलार्म (Alarms) उत्पन्न करती है जब कोई पैरामीटर सामान्य सीमा (Normal Limit) से बाहर जाता है (जैसे अति-वोल्टेज या अति-तापमान)।
- नियंत्रण (Control):
- ऑपरेटर दूर से सर्किट ब्रेकर को खोल या बंद (Open/Close) करने, टैप चेंजर (Tap Changer) को समायोजित करने और अन्य उपकरणों को नियंत्रित करने के लिए कमांड भेज सकते हैं।
सबस्टेशन स्वचालन (Substation Automation - SA)
सबस्टेशन स्वचालन का तात्पर्य एक एकीकृत प्रणाली से है जो IEDs से डेटा का उपयोग करके मानव हस्तक्षेप के बिना (Without Human Intervention) नियंत्रण, सुरक्षा और निगरानी कार्य करती है।
स्वचालन के मुख्य घटक
- IEDs (Intelligent Electronic Devices): ये प्रोग्राम करने योग्य माइक्रोप्रोसेसर-आधारित उपकरण होते हैं, जो सुरक्षा रिले (Protection Relays), मीटरिंग उपकरण (Metering Devices), और नियंत्रक (Controllers) का कार्य करते हैं।
- सबस्टेशन कंप्यूटर (Substation Computer - SC): यह गेटवे के रूप में कार्य करता है और विभिन्न IEDs से डेटा एकत्र करके इसे SCADA प्रणाली (कंट्रोल सेंटर) तक भेजता है।
- संचार नेटवर्क (Communication Network): स्वचालन प्रणाली में IEDs, SCADA और अन्य उपकरणों के बीच डेटा के आदान-प्रदान के लिए IEC 61850 जैसे उच्च गति वाले प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है।
स्वचालन के कार्य
- स्वचालित फ़ॉल्ट आइसोलेशन (Automatic Fault Isolation): फ़ॉल्ट होने पर IEDs तुरंत फ़ॉल्टी सेक्शन को अलग कर देते हैं।
- स्वचालित बहाली (Automatic Restoration): यह प्रणाली स्वस्थ फीडरों (Healthy Feeders) के माध्यम से बिजली आपूर्ति को स्वचालित रूप से बहाल करने का प्रयास कर सकती है।
- स्थिति-आधारित निगरानी (Condition-Based Monitoring): यह उपकरण के स्वास्थ्य की निगरानी करके रखरखाव की आवश्यकता का पूर्वानुमान लगाता है।
SCADA और स्वचालन के लाभ (Benefits)
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लाभ का क्षेत्र
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विवरण
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विश्वसनीयता में वृद्धि
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स्वचालित नियंत्रण और फ़ॉल्ट आइसोलेशन के कारण आउटेज (Outage) का समय कम हो जाता है।
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संचालन लागत में कमी
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दूरस्थ संचालन और निगरानी से मानव श्रम (Manpower) और फील्ड विजिट (Field Visits) की आवश्यकता घट जाती है।
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सुरक्षा
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ऑपरेटरों को उच्च-वोल्टेज क्षेत्रों में जाने की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे मानव सुरक्षा बढ़ती है।
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तेज प्रतिक्रिया
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आपातकालीन स्थिति या फ़ॉल्ट की स्थिति में, SCADA प्रणाली मिलिसेकंड (Milliseconds) में प्रतिक्रिया देती है, जो मानवीय प्रतिक्रिया से कहीं तेज है।
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बेहतर डेटा
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यह सटीक वास्तविक-समय डेटा एकत्र करता है, जो बेहतर योजना और निर्णय लेने में सहायता करता है।
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एक 132/33 kV सबस्टेशन का डिज़ाइन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें बिजली को 132 किलोवोल्ट (kV) के उच्च ट्रांसमिशन स्तर से 33 kV के वितरण स्तर तक कम किया जाता है।
एक विशिष्ट डिज़ाइन के उदाहरण में निम्नलिखित मुख्य घटक और लेआउट विचार शामिल होते हैं:
1. मुख्य घटक (Major Components)
132 kV और 33 kV दोनों तरफ कई महत्वपूर्ण उपकरण शामिल होते हैं:
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घटक (Component)
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132 kV साइड पर कार्य (Function on 132 kV Side)
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33 kV साइड पर कार्य (Function on 33 kV Side)
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पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformer)
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132 kV को 33 kV में बदलता है (स्टेप-डाउन)।
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सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker - CB)
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गलतियों (faults) के दौरान सर्किट को स्वचालित रूप से खोलता है और सामान्य संचालन के लिए भी प्रयोग होता है।
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सर्किट को खोलता है/बंद करता है।
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आइसोलेटर/डिस्कनेक्टर (Isolator/Disconnector - DS)
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नो-लोड की स्थिति में, रखरखाव के लिए सर्किट ब्रेकर और अन्य उपकरणों को अलग करता है। इसे लोड के तहत संचालित नहीं किया जाता है।
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रखरखाव के लिए उपकरण को अलग करता है।
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लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester - LA)
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बिजली (lightning) या अन्य उच्च वोल्टेज स्पाइक्स से उपकरणों की सुरक्षा करता है।
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उपकरणों की सुरक्षा करता है।
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करंट ट्रांसफार्मर (Current Transformer - CT)
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रिले और मीटरिंग के लिए उच्च धाराओं को कम और आनुपातिक धारा में बदलता है।
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रिले और मीटरिंग के लिए धारा को कम करता है।
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पोटेंशियल/वोल्टेज ट्रांसफार्मर (Potential/Voltage Transformer - PT/VT)
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रिले और मीटरिंग के लिए उच्च वोल्टेज को कम और आनुपातिक वोल्टेज में बदलता है।
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रिले और मीटरिंग के लिए वोल्टेज को कम करता है।
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वेब ट्रैप (Wave Trap)
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उच्च आवृत्ति संचार सिग्नल (जैसे पीएलसीसी के लिए) को सबस्टेशन उपकरणों में प्रवेश करने से रोकता है।
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बस बार (Bus Bar)
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आने वाली और बाहर जाने वाली लाइनों, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों के लिए सामान्य कनेक्शन बिंदु प्रदान करता है।
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आने वाली और बाहर जाने वाली लाइनों के लिए कनेक्शन बिंदु।
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2. विशिष्ट लेआउट (Typical Layout)
132/33 kV सबस्टेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले सामान्य लेआउट में सिंगल बस बार या मेन और ट्रांसफर बस बार व्यवस्था शामिल है, जिससे विश्वसनीयता बढ़ जाती है।
- इनकमिंग लाइन (Incoming Line): 132 kV ट्रांसमिशन लाइन सबस्टेशन में प्रवेश करती है।
- लाइन बे (Line Bay) 132 kV: इसमें लाइटनिंग अरेस्टर, वेव ट्रैप, आइसोलेटर, सीटी, पीटी और एक सर्किट ब्रेकर होते हैं जो इनकमिंग लाइन को 132 kV बस बार से जोड़ते हैं।
- बस बार (Bus Bar) 132 kV: सभी इनकमिंग और ट्रांसफार्मर बे इस बस बार से जुड़े होते हैं।
- ट्रांसफार्मर बे (Transformer Bay): यह बस बार को पावर ट्रांसफार्मर से जोड़ता है। इसमें आइसोलेटर, सर्किट ब्रेकर, और ट्रांसफार्मर सुरक्षा उपकरण (जैसे बुचोल्ज़ रिले) शामिल होते हैं।
- पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformer): यह 132 kV को 33 kV में बदलता है। आमतौर पर इसमें तेल शीतलन (oil cooling) और टैप चेंजर (Tap Changer) होते हैं।
- बस बार (Bus Bar) 33 kV: ट्रांसफार्मर का 33 kV आउटपुट और सभी फीडर इस बस बार से जुड़े होते हैं।
- आउटगोइंग फीडर बे (Outgoing Feeder Bay) 33 kV: 33 kV बस बार से बिजली को विभिन्न वितरण फीडरों में वितरित किया जाता है। प्रत्येक फीडर बे में आइसोलेटर, सीटी, पीटी, लाइटनिंग अरेस्टर, और एक सर्किट ब्रेकर होता है।
- नियंत्रण कक्ष (Control Room): रिले, मीटरिंग उपकरण, बैटरी बैंक और सबस्टेशन के दूरस्थ पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए पैनल यहां स्थापित होते हैं।
3. सिंगल लाइन डायग्राम (SLD)
डिज़ाइन का उदाहरण अक्सर एक सिंगल लाइन डायग्राम (SLD) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो उपकरणों के अनुक्रम और कनेक्शन को दर्शाता है। 132 kV पक्ष में, अनुक्रम आमतौर पर इस प्रकार होता है:
132 kV लाइन \ LA \WT \ DS \CB \ CT \ DS \ 132 kV BUS
और 132 kV बस से ट्रांसफार्मर की ओर:
132 kV BUS \DS \CB \ CT \ट्रांसफार्मर
सबस्टेशन डिज़ाइन के लिए कोई एकल "सूत्र" (formula) नहीं है, बल्कि यह विभिन्न इंजीनियरिंग सिद्धांतों और मानकों पर आधारित चरणबद्ध प्रक्रिया है। डिज़ाइन का चयन कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है, जिन्हें नीचे दिए गए चरणों में समझा जा सकता है।
1. मुख्य चयन पैरामीटर (Key Selection Parameters)
डिज़ाइन का चयन और आकार (sizing) मुख्य रूप से इन कारकों से तय होता है:
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पैरामीटर (Parameter)
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विवरण (Description)
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पावर रेटिंग (S)
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सबस्टेशन को कितनी अधिकतम बिजली (MVA में) संभालनी है। यह ट्रांसफार्मर के आकार (S_{T}), बस बार क्षमता, और सर्किट ब्रेकर रेटिंग को तय करता है।
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वोल्टेज स्तर (V)
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इनकमिंग (जैसे 132 kV) और आउटगोइंग (जैसे 33 kV) वोल्टेज। यह इंसुलेशन स्तर, सुरक्षा दूरी (Clearances), और उपकरण के प्रकार को निर्धारित करता है।
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शॉर्ट-सर्किट स्तर (I_{sc})
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सिस्टम में अधिकतम संभावित दोष धारा (fault current)। यह सर्किट ब्रेकर की ब्रेकिंग क्षमता, बस बार की यांत्रिक शक्ति, और अर्थिंग ग्रिड के डिज़ाइन के लिए महत्वपूर्ण है।
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विश्वसनीयता और लचीलापन
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आवश्यक बस बार व्यवस्था (जैसे सिंगल बस, मेन-ट्रांसफर बस, या डबल बस) का चुनाव। यह उपकरणों की संख्या और लेआउट की जटिलता को प्रभावित करता है।
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2. डिज़ाइन में उपयोग किए जाने वाले मुख्य "सूत्र" (Key "Formulas" used in Design)
यद्यपि यह एक व्यापक प्रक्रिया है, यहाँ कुछ महत्वपूर्ण गणनाएं हैं जो डिज़ाइन में उपयोग होती हैं:
A. उपकरण रेटिंग का निर्धारण (Equipment Rating Determination)
ट्रांसफार्मर रेटिंग (S_{T}):
S_{T} S_{{Load}} + S_{{Future}}
- जहां S_{{Load}} वर्तमान अधिकतम मांग है, और S_{{Future}} भविष्य की अपेक्षित मांग (आमतौर पर 5-10 वर्ष के लिए) है।
सर्किट ब्रेकर, CT और Isolator की नॉमिनल करंट रेटिंग (I_{N}):
I_{N} {S_{T}}{sqrt{3} × V_{{Line}}}
- सुरक्षा के लिए, I_{N} को आमतौर पर ट्रांसफार्मर के रेटेड फुल लोड करंट से 1.25 से 1.5 गुना अधिक चुना जाता है।
B. शॉर्ट-सर्किट करंट गणना (Short-Circuit Current Calculation)
शॉर्ट-सर्किट करंट (I_{sc}) की गणना सबस्टेशन के सबसे कमजोर बिंदु पर की जाती है।
I_{sc} = {V_{p.u.} × I_{{base}}}{Z_{{Total} p.u.}}
- जहां V_{p.u.} वोल्टेज प्रति इकाई है (आमतौर पर 1.0), I_{{base}} आधार धारा है, और Z_{{Total} p.u.} दोष बिंदु तक कुल प्रतिबाधा प्रति इकाई है।
- उपयोग: यह गणना सर्किट ब्रेकर की ब्रेकिंग क्षमता (I_{B} I_{sc}) और उपकरणों की क्षणिक withstand रेटिंग को निर्धारित करती है।
C. सुरक्षा दूरी (Clearances) का निर्धारण
इंसुलेशन और सुरक्षा के लिए उपकरणों के बीच की न्यूनतम दूरी (D) आवश्यक है।
D V_{{System}}
- जहां V_{{System}} सिस्टम का वोल्टेज स्तर है।
- उपयोग: उच्च वोल्टेज के लिए {BIS/IEC} मानकों के अनुसार लाइन-टू-ग्राउंड, लाइन-टू-लाइन, और फेज-टू-फेज दूरी निर्धारित की जाती है।
D. अर्थिंग ग्रिड डिज़ाइन (Earthing Grid Design)
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अर्थिंग ग्रिड को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि गलती के दौरान टच पोटेंशियल (E_{{touch}}) और स्टेप पोटेंशियल (E_{{step}}) खतरनाक स्तर से नीचे रहें।
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यह गणना मिट्टी की प्रतिरोधकता (rho), शॉर्ट-सर्किट करंट (I_{G}), और दोष अवधि (t) पर निर्भर करती है।
E_{{touch}} < E_{{touch}({Permissible})}
- उपयोग: यह ग्रिड के लिए आवश्यक कंडक्टर के आकार और जाली की गहराई/क्षेत्र को तय करता है।
3. बस बार व्यवस्था का चयन (Bus Bar Arrangement Selection)
सबस्टेशन के डिज़ाइन में विश्वसनीयता एक महत्वपूर्ण कारक है, जिसके आधार पर बस व्यवस्था चुनी जाती है:
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व्यवस्था (Arrangement)
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विशेषता (Feature)
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उपयुक्तता (Suitability)
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सिंगल बस (Single Bus)
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सबसे सरल, कम लागत। एक दोष से पूरी बस बंद हो जाती है।
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छोटे और कम महत्वपूर्ण सबस्टेशन (कम विश्वसनीयता आवश्यक)।
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मेन और ट्रांसफर बस (Main & Transfer Bus)
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रखरखाव के लिए किसी भी सर्किट ब्रेकर को बंद किया जा सकता है। एक दोष से पूरी बस बंद हो सकती है।
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मध्यम आकार के सबस्टेशन (बेहतर विश्वसनीयता)।
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डबल बस (Double Bus)
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किसी भी बस पर दोष आने पर भी आपूर्ति जारी रखी जा सकती है। अधिक महंगा और जटिल।
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बड़े और बहुत महत्वपूर्ण सबस्टेशन (उच्च विश्वसनीयता आवश्यक)।
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रिंग बस (Ring Bus)
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उच्चतम विश्वसनीयता। दोष आने पर रिंग दो भागों में बंट जाती है, आपूर्ति जारी रहती है।
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महत्वपूर्ण 132 kV सबस्टेशन।
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कमीशनिंग (चालू करने) से पहले सबस्टेशन में उपकरणों की उचित कार्यप्रणाली, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक परीक्षण किए जाते हैं। इन परीक्षणों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: प्रारंभिक/दृश्य जाँच, व्यक्तिगत उपकरण परीक्षण, और एंड-टू-एंड (end-to-end) कार्यात्मक परीक्षण।
1. प्रारंभिक और दृश्य जाँच (Preliminary & Visual Checks)
ये जाँचें उपकरणों को सक्रिय करने से पहले उनकी भौतिक स्थापना और कनेक्शन की सटीकता सुनिश्चित करती हैं।
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जनरल लेआउट और इंस्टॉलेशन (General Layout and Installation):
- सभी उपकरण, जैसे ट्रांसफार्मर, सर्किट ब्रेकर, आइसोलेटर, उनके निर्धारित स्थानों पर सही ढंग से स्थापित हैं या नहीं।
- उपकरण के बीच और ग्राउंड से आवश्यक सुरक्षा दूरी (Clearances) मानकों के अनुसार है या नहीं।
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ग्राउंडिंग और अर्थिंग (Grounding and Earthing):
- सभी उपकरणों के मेटालिक पार्ट्स और सुरक्षा बाड़ (fence) ठीक से अर्थिंग ग्रिड से जुड़े हुए हैं।
- अर्थिंग कनेक्शन मजबूत और जंग रहित हैं।
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कनेक्शनों की जाँच (Connection Verification):
- पावर और कंट्रोल वायरिंग के सभी टर्मिनेशन टाइट हैं।
- कंट्रोल सर्किट में वायरिंग का ध्रुवीकरण (Polarity of Wiring) और फेज सीक्वेंस (Phase Sequence) सही है।
- तेल और गैस स्तर (Oil and Gas Levels):
- ट्रांसफार्मर और सर्किट ब्रेकर (SF6) में तेल/गैस का स्तर आवश्यक सीमा के भीतर है।
2. मुख्य उपकरण परीक्षण (Major Equipment Tests)
ये परीक्षण प्रत्येक उपकरण की इलेक्ट्रिकल अखंडता (electrical integrity) और विशिष्ट प्रदर्शन को मापते हैं।
A. पावर ट्रांसफार्मर के लिए (For Power Transformer)
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परीक्षण (Test)
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उद्देश्य (Objective)
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इंसुलेशन रेसिस्टेंस (Megger Test)
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वाइंडिंग और ग्राउंड के बीच इंसुलेशन की गुणवत्ता मापना।
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वाइंडिंग रेसिस्टेंस (Winding Resistance)
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वाइंडिंग की निरंतरता और सही कनेक्शन सुनिश्चित करना।
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ट्रांसफॉर्मेशन रेश्यो (Turns Ratio Test - TTR)
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मापा गया वोल्टेज अनुपात नेमप्लेट मान से मेल खाता है या नहीं यह देखना।
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डाइइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ ऑफ ऑयल (BDV Test)
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ट्रांसफार्मर तेल की इन्सुलेटिंग क्षमता की जाँच करना।
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डोमेन फैक्टर टेस्ट (Tan Delta/Dissipation Factor)
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ट्रांसफार्मर इंसुलेशन में नमी या दोषों का पता लगाना।
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बुचोल्ज़ रिले परीक्षण (Buchholz Relay Test)
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यांत्रिक रूप से इसकी कार्यक्षमता की जाँच करना।
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B. सर्किट ब्रेकर (CB) के लिए
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परीक्षण (Test)
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उद्देश्य (Objective)
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कॉन्टैक्ट रेसिस्टेंस (Contact Resistance)
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मुख्य संपर्कों पर प्रतिरोध को मापना (कम प्रतिरोध आवश्यक)।
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ऑपरेशन टाइम टेस्ट (Timing Test)
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ओपनिंग और क्लोजिंग ऑपरेशन का समय मापना (मानक सीमा के भीतर होना चाहिए)।
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इंसुलेशन रेसिस्टेंस
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पोल और ग्राउंड के बीच इंसुलेशन की जाँच करना।
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C. CT (करंट ट्रांसफार्मर) और PT (पोटेंशियल ट्रांसफार्मर) के लिए
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परीक्षण (Test)
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उद्देश्य (Objective)
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रेश्यो और ध्रुवीकरण (Ratio and Polarity Test)
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CT/PT अनुपात सही है और ध्रुवीकरण (सर्कुलेशन से बचने के लिए) सही ढंग से चिह्नित है या नहीं।
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एक्साइटेशन या नी-पॉइंट वोल्टेज (Knee-Point Voltage)
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CT के कोर का सेचुरेशन (Saturation) स्तर जाँच करना (रिले CT के लिए महत्वपूर्ण)।
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बर्डन टेस्ट (Burden Test)
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CT/PT से जुड़े उपकरणों का कुल भार उसकी रेटिंग के भीतर है या नहीं।
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3. कार्यात्मक और नियंत्रण परीक्षण (Functional & Control Tests)
ये परीक्षण सबस्टेशन के नियंत्रण और सुरक्षा प्रणाली (Control and Protection System) पर केंद्रित होते हैं।
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कंट्रोल और इंटरलॉक टेस्ट (Control and Interlock Test):
- स्थानीय और रिमोट कंट्रोल (SCADA) से सर्किट ब्रेकर और आइसोलेटर को नियंत्रित करना।
- सुरक्षा इंटरॉक (जैसे: आइसोलेटर को लोड के तहत संचालित नहीं किया जा सकता) सही ढंग से कार्य कर रहे हैं या नहीं।
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रिले और सुरक्षा परीक्षण (Relay and Protection Tests):
- रिले की सेटिंग की जाँच करना (जैसे: ओवरकरंट, अर्थ फॉल्ट, डिस्टेन्स)।
- सेकेंडरी इंजेक्शन (secondary injection) या प्राइमरी इंजेक्शन (primary injection) द्वारा यह सुनिश्चित करना कि गलती होने पर रिले सर्किट ब्रेकर को सही समय पर ट्रिप कमांड भेजता है।
- ट्रांसफार्मर डिफरेंशियल प्रोटेक्शन का एंड-टू-एंड चेक।
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अलार्म और ट्रिप सर्किट की जाँच (Alarm and Trip Circuit Verification):
- सभी तापमान, दबाव, और अन्य अलार्म (OTI, WTI, Low Gas/Oil) सही से ट्रिगर हो रहे हैं या नहीं।
- ट्रिपिंग सर्किट की निरंतरता (Continuity) और द्वैतता (Duplicity) की जाँच करना।
- बैटरी और चार्जर सिस्टम (Battery and Charger System):
- बैटरी का डिस्चार्ज और रिचार्ज चक्र परीक्षण (कंट्रोल और ट्रिपिंग पावर के लिए महत्वपूर्ण)।
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SCADA और संचार (SCADA and Communication):
- स्थानीय उपकरणों और SCADA सिस्टम के बीच डेटा अधिग्रहण और कमांड सही ढंग से हो रहा है या नहीं।
- वेब ट्रैप (Wave Trap) और PLCC (Power Line Carrier Communication) सिस्टम की जाँच।
सबस्टेशन वोल्टेज क्लीयरेंस (Substation Voltage Clearance) का अर्थ है, सबस्टेशन में उच्च वोल्टेज वाले कंडक्टरों और ग्राउंडेड या अन्य जीवित भागों के बीच आवश्यक सुरक्षित दूरी (Safe Electrical Clearances) निर्धारित करना।
यह मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करता है:
सिस्टम का वोल्टेज स्तर और उस माध्यम की इन्सुलेटिंग क्षमता जिसमें कंडक्टर हैं (आमतौर पर हवा)।
यह प्रक्रिया सुरक्षा मानकों (जैसे IS, IEC, या IEEE) के आधार पर चरण दर चरण की जाती है:
1. सिस्टम वोल्टेज और इंसुलेशन स्तर निर्धारित करना
पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम यह पहचानना है कि सबस्टेशन किस वोल्टेज स्तर पर संचालित होता है और उस वोल्टेज के लिए मानक इन्सुलेशन स्तर क्या है।
- रेटेड सिस्टम वोल्टेज (V_s): सबस्टेशन का नॉमिनल वोल्टेज (जैसे 132 kV, 33 kV)।
- सबसे अधिक सिस्टम वोल्टेज (V_m): यह वोल्टेज है जिस पर सिस्टम लगातार संचालित हो सकता है (आमतौर पर रेटेड वोल्टेज से थोड़ा अधिक)। उदाहरण के लिए, 132 kV सिस्टम के लिए V_m 145 kV हो सकता है।
- बेसिक इंसुलेशन लेवल (BIL): यह बिजली या स्विचिंग ओवरवोल्टेज से उत्पन्न क्षणिक वोल्टेज स्पाइक्स का सामना करने की क्षमता है। यह {kVp} (किलोवोल्ट पीक) में मापा जाता है (जैसे 132 kV के लिए 650 { kVp})। क्लियरेंस मुख्य रूप से इस BIL मान पर निर्भर करता है।
2. क्लीयरेंस के प्रकारों की पहचान करना
विद्युत सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से तीन प्रकार के क्लीयरेंस (दूरी) निर्धारित किए जाते हैं:
- फेज-टू-ग्राउंड क्लीयरेंस (C_{PG}): किसी भी जीवित कंडक्टर और ग्राउंडेड संरचना (जैसे स्टील स्ट्रक्चर, बाड़, ग्राउंड वायर) के बीच की न्यूनतम दूरी।
- फेज-टू-फेज क्लीयरेंस (C_{PP}): अलग-अलग फेज के जीवित कंडक्टरों के बीच की न्यूनतम दूरी।
- ब्रेकिंग गैप क्लीयरेंस (C_{BG}): आइसोलेटर या सर्किट ब्रेकर द्वारा बनाए गए ओपन कॉन्टैक्ट्स (विच्छेदित) के बीच की दूरी।
3. मानक टेबल का उपयोग करना
मानक क्लीयरेंस मान सीधे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों (जैसे {IS}: 5578, {IEC}: 61936) की टेबलों से प्राप्त किए जाते हैं।
- उदाहरण: 132 kV (145 kV अधिकतम) सिस्टम के लिए मानक मान मोटे तौर पर इस प्रकार हैं (ये मान संदर्भ मानक के आधार पर थोड़े भिन्न हो सकते हैं):
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क्लीयरेंस प्रकार
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मानक दूरी (लगभग)
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फेज-टू-ग्राउंड (C_{PG})
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1300 { mm} (1.3 मीटर)
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फेज-टू-फेज (C_{PP})
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1500 { mm} (1.5 मीटर)
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4. ऊंचाई समायोजन (Altitude Correction)
यदि सबस्टेशन समुद्र तल से काफी ऊंचाई (Altitude) पर स्थित है, तो क्लीयरेंस को समायोजित करना आवश्यक हो जाता है।
- जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा का घनत्व और इन्सुलेटिंग क्षमता कम हो जाती है।
-
यदि सबस्टेशन {1000 m} से अधिक ऊंचाई पर है, तो एक ऊंचाई सुधार कारक (K_a) का उपयोग किया जाता है:
K_a = \exp \left( {h}{8150} \right)
- जहां h मीटर में साइट की ऊंचाई है।
- आवश्यक क्लीयरेंस: C_{{Required}} = C_{{Standard}} × K_a
5. क्लीयरेंस को अंतिम रूप देना और लेआउट डिज़ाइन
अंतिम चरण में, निर्धारित क्लीयरेंस मानों का उपयोग करके सबस्टेशन का भौतिक लेआउट डिज़ाइन किया जाता है:
- उपकरण की स्थापना: सुनिश्चित करना कि उपकरणों को इस तरह से लगाया गया है कि कोई भी जीवित भाग दूसरे जीवित भाग या ग्राउंड से निर्धारित न्यूनतम दूरी (C_{PG}, C_{PP}) का उल्लंघन न करे।
- बस बार की लंबाई: बस बार की लंबाई और सैग (झुकना) को डिज़ाइन करना ताकि सबसे खराब स्थिति में भी क्लीयरेंस सुरक्षित रहे।
- स्ट्रक्चर का डिज़ाइन: स्टील स्ट्रक्चर की ऊंचाई और चौड़ाई इस तरह से तय करना कि कार्यरत व्यक्तियों (Working Personnel) को ग्राउंड से भी पर्याप्त क्लीयरेंस मिले ({Ground Clearance})।
- सुरक्षा बाड़ (Perimeter Fence): बाहरी बाड़ को ग्राउंडेड माना जाता है, इसलिए बाड़ और सबसे बाहरी जीवित कंडक्टर के बीच C_{PG} का ध्यान रखा जाता है।
निष्कर्ष: सबस्टेशन वोल्टेज क्लीयरेंस डिज़ाइन की नींव है। यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम न केवल ओवरवोल्टेज का सामना कर सके, बल्कि कर्मचारियों और उपकरणों के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण भी प्रदान करे।
सबस्टेशन (Substation) का चरणवार सारांश उसकी योजना (Planning) से लेकर कमीशनिंग (Commissioning) और परिचालन (Operation) तक की पूरी प्रक्रिया को दर्शाता है। यहाँ 132/33 { kV} सबस्टेशन के निर्माण और संचालन का एक चरणवार सारांश दिया गया है:
1. योजना और व्यवहार्यता अध्ययन (Planning & Feasibility Study)
यह सबस्टेशन की आवश्यकता और स्थान का निर्धारण करने वाला प्रारंभिक चरण है।
- लोड पूर्वानुमान (Load Forecasting): वर्तमान और भविष्य की बिजली मांग (5-10 वर्ष) का आकलन करना।
- साइट का चयन (Site Selection): सबस्टेशन के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करना। स्थान एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसमिशन लाइनों के करीब, और भूकंपीय/बाढ़ जोखिम से दूर होना चाहिए।
- सिस्टम स्टडी (System Study): सबस्टेशन को मौजूदा ग्रिड में जोड़ने से शॉर्ट-सर्किट स्तर, वोल्टेज स्थिरता और पावर फ्लो पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करना।
- व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report): तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन करना।
2. डिज़ाइन और इंजीनियरिंग (Design & Engineering)
इसमें सबस्टेशन के लेआउट और सभी उपकरणों के विनिर्देशों को अंतिम रूप दिया जाता है।
- सिंगल लाइन डायग्राम (SLD) बनाना: उपकरणों के कनेक्शन का वैचारिक लेआउट (जैसे मेन-ट्रांसफर बस या डबल बस)।
- उपकरणों की रेटिंग और विनिर्देश: ट्रांसफार्मर क्षमता (20/40 { MVA}), सर्किट ब्रेकर (CB) ब्रेकिंग क्षमता, आइसोलेटर, {CT/PT} आदि का चयन।
- क्लियरेंस निर्धारण: वोल्टेज स्तर (132 { kV}) के आधार पर फेज-टू-ग्राउंड और फेज-टू-फेज सुरक्षा दूरी निर्धारित करना।
- लेआउट डिज़ाइन: उपकरणों की भौतिक व्यवस्था, कंट्रोल रूम का स्थान, और अर्थिंग ग्रिड डिज़ाइन तैयार करना।
3. खरीद और निर्माण (Procurement & Construction)
डिज़ाइन को अंतिम रूप देने के बाद उपकरणों की खरीद और साइट पर निर्माण कार्य शुरू होता है।
- उपकरणों की खरीद (Procurement): सभी मुख्य उपकरण (ट्रांसफार्मर, {CB}, {CT/PT}, बस बार कंडक्टर) और सहायक उपकरण का ऑर्डर देना।
- सिविल कार्य (Civil Works): कंट्रोल रूम भवन, उपकरण नींव (Foundation), केबल ट्रेंच और बाउंड्री वॉल का निर्माण।
- स्ट्रक्चरल इरेक्शन (Structural Erection): स्विचयार्ड में स्टील स्ट्रक्चर (गैन्ट्री टावर, उपकरण सपोर्ट) लगाना।
- उपकरणों की स्थापना (Equipment Installation): ट्रांसफार्मर, {CB}, {LA}, {DS} आदि को उनकी नींव पर स्थापित करना।
- कंडक्टर और इंसुलेटर का लगाना: बस बार और जम्पर लगाना।
4. वायरिंग और नियंत्रण प्रणाली (Wiring & Control System)
यह सबस्टेशन के "मस्तिष्क" (Brain) को स्थापित करने का चरण है।
- केबल बिछाना (Cable Laying): पावर केबल, कंट्रोल केबल और ऑप्टिकल फाइबर को ट्रेंच में बिछाना।
- रिले पैनल की स्थापना: कंट्रोल रूम में सुरक्षा रिले, मीटरिंग उपकरण और {SCADA} इंटरफ़ेस पैनल स्थापित करना।
- कंट्रोल वायरिंग: सभी फील्ड उपकरणों को कंट्रोल रूम से जोड़ना।
- अर्थिंग ग्रिड कनेक्शन: अर्थिंग ग्रिड को सभी उपकरणों और बाड़ से अंतिम रूप से जोड़ना।
5. परीक्षण और कमीशनिंग (Testing & Commissioning)
यह सबस्टेशन को चालू करने (energizing) से पहले उसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने का अंतिम चरण है।
- व्यक्तिगत उपकरण परीक्षण: ट्रांसफार्मर के लिए {TTR}, ऑयल {BDV}; सर्किट ब्रेकर के लिए {Timing} और {Contact Resistance} परीक्षण।
- रिले परीक्षण: सभी सुरक्षा रिले की {Settings} और {Trip Logic} को {Primary} या {Secondary Injection} द्वारा जांचना।
- कार्यात्मक परीक्षण (Functional Test): एंड-टू-एंड {Trip Circuit}, {Interlocks} और {SCADA} संचार की जाँच करना।
- चार्जिंग (Charging): सभी परीक्षणों के बाद, सबस्टेशन को पहली बार उच्च वोल्टेज से ऊर्जावान (energized) करना।
6. परिचालन और रखरखाव (Operation & Maintenance)
सबस्टेशन के चालू होने के बाद का दीर्घकालिक चरण।
- परिचालन (Operation): लोड वितरण, वोल्टेज नियंत्रण (OLTC के माध्यम से), और ग्रिड आवश्यकताओं के अनुसार switching करना।
- निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance): नियमित रूप से तेल नमूना परीक्षण, {SF6} गैस टॉप-अप, और उपकरण निरीक्षण करना।
- दोष प्रबंधन (Fault Management): दोष (Fault) की स्थिति में सुरक्षा रिले द्वारा ट्रिपिंग की जांच करना और दोष को साफ़ करके सामान्य संचालन बहाल करना।
विभिन्न सबस्टेशन वोल्टेज स्तरों ({11 kV} से {400 kV}) के लिए आवश्यक वोल्टेज क्लीयरेंस (Voltage Clearance) का निर्धारण सुरक्षा और इंसुलेशन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्लीयरेंस मुख्य रूप से सिस्टम के अधिकतम वोल्टेज और {BIL} (Basic Insulation Level) पर निर्भर करता है।
यहाँ {11/33/132/220/400 kV} वोल्टेज के लिए आवश्यक क्लीयरेंस के चरण और अनुमानित मान दिए गए हैं:
1. क्लीयरेंस निर्धारण के चरण (Steps for Clearance Determination)
विभिन्न वोल्टेज स्तरों के लिए क्लीयरेंस निर्धारित करने के चरण समान होते हैं, लेकिन उपयोग किए जाने वाले मानक मान (तालिकाओं से प्राप्त) भिन्न होते हैं:
चरण 1: सिस्टम पैरामीटर पहचानें
- रेटेड वोल्टेज (V_R): सबस्टेशन का नॉमिनल वोल्टेज ({11 kV}, {33 kV}, आदि)।
- अधिकतम सिस्टम वोल्टेज (V_M): यह वोल्टेज जिस पर सिस्टम लगातार चल सकता है ({11 kV} के लिए {12 kV}, {132 kV} के लिए {145 kV}, {400 kV} के लिए {420 kV})।
- बेसिक इंसुलेशन लेवल ({BIL}): क्षणिक ओवरवोल्टेज (बिजली या स्विचिंग) का सामना करने की क्षमता, जो {kVp} में मापा जाता है। क्लीयरेंस मुख्य रूप से इसी {BIL} मान पर आधारित होता है।
चरण 2: आवश्यक क्लीयरेंस के प्रकार चुनें
मुख्य रूप से दो प्रकार की दूरी आवश्यक होती है:
- फेज-टू-ग्राउंड क्लीयरेंस (C_{PG}): जीवित कंडक्टर और ग्राउंडेड स्ट्रक्चर के बीच।
- फेज-टू-फेज क्लीयरेंस (C_{PP}): अलग-अलग फेज के जीवित कंडक्टरों के बीच।
चरण 3: मानक मानों का उपयोग करें
राष्ट्रीय ({IS}) या अंतर्राष्ट्रीय ({IEC}) मानकों से सीधे क्लीयरेंस के मान प्राप्त करें। ये मान प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड अनुभव पर आधारित होते हैं।
चरण 4: ऊंचाई सुधार (Altitude Correction) (यदि आवश्यक हो)
यदि सबस्टेशन समुद्र तल से 1000 { मीटर} से अधिक की ऊंचाई पर है, तो कम हवा के घनत्व के कारण क्लीयरेंस को बढ़ाया जाना चाहिए।
2. विभिन्न वोल्टेज स्तरों के लिए अनुमानित क्लीयरेंस (Approximate Clearances)
यह तालिका सबस्टेशन डिज़ाइन में उपयोग किए जाने वाले सामान्य, अनुमानित क्लीयरेंस मान दर्शाती है। सटीक डिज़ाइन के लिए हमेशा लागू मानक और उपकरण निर्माता के विशिष्टता का संदर्भ लेना चाहिए।
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वोल्टेज स्तर (V_R)
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अधिकतम सिस्टम वोल्टेज (V_M)
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अनुमानित BIL ({kVp})
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फेज-टू-ग्राउंड क्लीयरेंस (C_{PG})
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फेज-टू-फेज क्लीयरेंस (C_{PP})
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11 { kV}
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12 { kV}
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75 { kVp}
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250 { mm}
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300 { mm}
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33 { kV}
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36 { kV}
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170 { kVp}
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320 { mm}
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350 { mm}
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132 { kV}
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145 { kV}
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650 { kVp}
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1300 { mm} (1.3 m)
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1500 { mm} (1.5 m)
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220 { kV}
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245 { kV}
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1050 { kVp}
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2100 { mm} (2.1 m)
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2300 { mm} (2.3 m)
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400 { kV}
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420 { kV}
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1425 { kVp}
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3500 { mm} (3.5 m)
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4000 { mm} (4.0 m)
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मुख्य अवलोकन:
- वोल्टेज पर निर्भरता: जैसे-जैसे वोल्टेज स्तर ({kV}) बढ़ता है, {BIL} बढ़ता है, और इसलिए आवश्यक क्लीयरेंस (दोनों C_{PG} और C_{PP}) नाटकीय रूप से बढ़ जाते हैं।
- C_{PP} बनाम C_{PG}: अधिकांश मामलों में, फेज-टू-फेज क्लीयरेंस (C_{PP}) फेज-टू-ग्राउंड क्लीयरेंस (C_{PG}) से अधिक होता है, खासकर उच्च वोल्टेज स्तरों पर, क्योंकि फेज-टू-फेज वोल्टेज ग्राउंड वोल्टेज से sqrt{3} गुना अधिक होता है।
- इंसुलेशन माध्यम: ये मान खुले हवा वाले स्विचयार्ड (Open Air Switchyard) के लिए हैं। यदि उपकरण गैस इंसुलेटेड ({GIS}) हैं, तो आवश्यक दूरी {SF6} गैस की उच्च डाइइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ के कारण बहुत कम हो जाती है।
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