संधारित्र क्या होता है?
संधारित्र (Capacitor) एक निष्क्रिय (Passive) इलेक्ट्रॉनिक घटक है जिसका उपयोग विद्युत ऊर्जा को एक विद्युत क्षेत्र में संग्रहित करने के लिए किया जाता है।
यह मूल रूप से दो चालकीय प्लेटों से बना होता है, जिन्हें एक परावैद्युत पदार्थ (Dielectric) या इन्सुलेटर द्वारा अलग किया जाता है।
संधारित्र की संरचना और कार्यप्रणाली
- चालकीय प्लेटें (Conducting Plates): ये आमतौर पर धातु की होती हैं और आवेश (Charge) को संग्रहित करती हैं।
- परावैद्युत (Dielectric): यह दो प्लेटों के बीच का इन्सुलेटिंग पदार्थ है (जैसे हवा, कागज, माइका, सिरेमिक)। यह प्लेटों को स्पर्श करने से रोकता है और संधारित्र की भंडारण क्षमता को बढ़ाता है।
कार्यप्रणाली:
- जब एक संधारित्र को बैटरी या किसी वोल्टेज स्रोत से जोड़ा जाता है, तो प्लेटों पर विपरीत आवेश जमा हो जाते हैं।
- एक प्लेट पर धनात्मक आवेश और दूसरी पर ऋणात्मक आवेश जमा होता है, जिससे प्लेटों के बीच एक विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक संधारित्र पर वोल्टेज स्रोत के वोल्टेज के बराबर नहीं हो जाता।
- इस दौरान, संधारित्र विद्युत ऊर्जा को विद्युत क्षेत्र के रूप में संग्रहीत करता है।
संधारित्र की धारिता (Capacitance)
संधारित्र की विद्युत आवेश को संग्रहित करने की क्षमता को धारिता (Capacitance) कहते हैं।
इसका SI मात्रक फैराड (Farad) है, जिसे F से दर्शाया जाता है। फैराड एक बहुत बड़ी इकाई है, इसलिए व्यवहार में माइक्रोफैराड (mu F) और पिकोफैराड (pF) जैसी छोटी इकाइयों का उपयोग किया जाता है।
धारिता को निम्न सूत्र से परिभाषित किया जाता है:
C = {Q}/{V}
जहाँ:
- C = धारिता (फैराड में)
- Q = संग्रहित आवेश (कूलॉम में)
- V = प्लेटों के बीच विभवांतर (वोल्ट में)
संधारित्र के उपयोग
संधारित्र का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और विद्युत परिपथों में कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाता है:
- ऊर्जा भंडारण (Energy Storage): फ्लैश लाइट और पावर सप्लाई में।
- फ़िल्टरिंग (Filtering): AC (प्रत्यावर्ती धारा) को ब्लॉक करना और DC (दिष्ट धारा) को पास करना। इसका उपयोग पावर सप्लाई में Ripple को हटाने के लिए किया जाता है।
- टाइमिंग (Timing): ऑसिलेटर परिपथों और टाइमर में।
- कपलिंग और डीकपलिंग (Coupling and Decoupling): परिपथ के विभिन्न चरणों के बीच सिग्नल को पास करने और अनचाहे शोर को हटाने के लिए।
धारिता की इकाई
धारिता की इकाई (Unit of Capacitance)
धारिता (Capacitance) की SI इकाई फैराड (Farad) है।
- इसे F अक्षर से दर्शाया जाता है।
- यह भौतिक विज्ञानी माइकल फैराडे के नाम पर रखी गई है।
फैराड की परिभाषा
एक फैराड वह धारिता है जब किसी संधारित्र को एक कूलॉम (1 Coulomb) का आवेश देने पर उसके प्लेटों के बीच का विभवांतर एक वोल्ट (1 Volt) हो जाता है।
इसे गणितीय रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
1 , {Farad} , (F) = {1 , {Coulomb} , (C)}/{1 ,{Volt} , (V)}
छोटी इकाइयाँ
फैराड एक बहुत बड़ी इकाई है। व्यवहार में, अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में उपयोग किए जाने वाले संधारित्रों की धारिता बहुत कम होती है, इसलिए छोटी इकाइयों का उपयोग किया जाता है:
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इकाई का नाम
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प्रतीक
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फैराड में मान
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माइक्रोफैराड
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mu F
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10^{-6} , F
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नैनोफैराड
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n F
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10^{-9} , F
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पिकोफैराड
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p F
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10^{-12} , F
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उदाहरण:
- 10 , mu F का मतलब है 10 × 10^{-6} , F
- 47 , p F का मतलब है 47 × 10^{-12} , F
संधारित्र का निर्माण
संधारित्र का निर्माण (Construction of a Capacitor)
संधारित्र की मूल संरचना बहुत सरल है, लेकिन इसके विभिन्न प्रकारों (जैसे सिरेमिक, इलेक्ट्रोलाइटिक) के कारण इसके निर्माण के तरीके में भिन्नता आती है।
1. मूल संरचना के घटक
एक मूलभूत संधारित्र मुख्य रूप से तीन घटकों से मिलकर बनता है, जिन्हें समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) के रूप में समझा जाता है:
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घटक
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विवरण
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उदाहरण सामग्री
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चालकीय प्लेटें (Conducting Plates)
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ये आवेश (चार्ज) को संग्रहित करती हैं। ये हमेशा दो होती हैं और एक दूसरे के समानांतर होती हैं।
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एल्युमीनियम (Aluminum), टेंटलम (Tantalum) या अन्य धातु।
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परावैद्युत (Dielectric)
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यह दो चालकीय प्लेटों के बीच स्थित एक विद्युत्रोधी (Insulating) पदार्थ होता है जो आवेश को प्रवाहित होने से रोकता है।
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हवा, कागज (Paper), माइका (Mica), सिरेमिक (Ceramic), प्लास्टिक फिल्म, या इलेक्ट्रोलाइटिक जेल।
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टर्मिनल (Terminals)
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ये धातु के तार होते हैं जो संधारित्र को बाहरी परिपथ (Circuit) से जोड़ते हैं।
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तांबा (Copper) या अन्य चालक धातु।
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2. निर्माण का सिद्धांत
निर्माण का सिद्धांत यह सुनिश्चित करना है कि दो चालकीय सतहें एक-दूसरे के बहुत करीब हों, लेकिन भौतिक रूप से कभी न छूएं।
प्लेटों को अलग करना: दो चालकीय प्लेटों के बीच एक परावैद्युत (Dielectric) पदार्थ की परत डाली जाती है।
सतह क्षेत्र बढ़ाना: धारिता (Capacitance) बढ़ाने के लिए, प्लेटों का सतह क्षेत्र (A) अधिकतम किया जाता है और उनके बीच की दूरी (d) न्यूनतम की जाती है, क्योंकि धारिता का सूत्र है:
C = {varepsilon A}/{d}
जहाँ varepsilon परावैद्युत की परमिटिविटी है।
व्यवहारिक निर्माण:
- समानांतर प्लेट (Parallel Plate): कुछ संधारित्रों में, जैसे कि सिरेमिक कैपेसिटर, ये प्लेटें वास्तव में एक-दूसरे के समानांतर चिप्स (Layers) के रूप में स्टैक (Stack) की जाती हैं।
- रोल्ड फॉइल (Rolled Foil): अन्य प्रकारों में, जैसे फिल्म या इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर, लंबी धातु की फॉइल (जैसे एल्युमीनियम) को परावैद्युत सामग्री की पतली पट्टी के साथ सैंडविच करके एक सिलेंडर के रूप में कसकर रोल (Roll) कर दिया जाता है। इससे बड़े सतह क्षेत्र को एक छोटे पैकेज में पैक किया जा सकता है।
3. प्रकारों के अनुसार निर्माण
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संधारित्र का प्रकार
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परावैद्युत (Dielectric)
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मुख्य विशेषता
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सिरेमिक संधारित्र
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सिरेमिक सामग्री (जैसे बेरियम टाइटनेट)
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छोटा आकार, उच्च आवृत्ति अनुप्रयोगों के लिए आदर्श।
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फिल्म संधारित्र
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प्लास्टिक फिल्में (जैसे पॉलिएस्टर, पॉलीप्रोपाइलीन)
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उच्च स्थिरता, कम नुकसान (Low loss)।
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इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र
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एक पतली धातु ऑक्साइड परत (जो रासायनिक रूप से बनती है) और एक इलेक्ट्रोलाइट (जेल या तरल)।
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उच्च ऊर्जा भंडारण क्षमता, ध्रुवीकृत (Polarized) होते हैं (इन्हें सही ध्रुवता में जोड़ना आवश्यक है)।
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परावैद्युत माध्यम (अचालक पदार्थ)
परावैद्युत माध्यम (Dielectric Medium) भौतिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, खासकर संधारित्रों (Capacitors) के संदर्भ में।
परावैद्युत माध्यम (Dielectric Medium)
परावैद्युत माध्यम वे अचालक (Insulator) पदार्थ होते हैं जो अपने में से विद्युत धारा (Electric Current) को प्रवाहित नहीं होने देते, लेकिन जब इन्हें किसी बाहरी विद्युत क्षेत्र (Electric Field) में रखा जाता है, तो ये विद्युत प्रभाव (Electric Effects) का प्रदर्शन करते हैं।
इसे इस तरह समझा जा सकता है:
- अचालक प्रकृति: इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) नहीं होते हैं, इसलिए ये धारा का संचालन नहीं करते हैं—ये एक विद्युत रोधी (Insulator) की तरह व्यवहार करते हैं (जैसे कागज, लकड़ी, रबड़, सिरेमिक)।
- प्रेरण क्षमता (Polarization): जब इन्हें एक बाहरी विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है (जैसे संधारित्र की दो प्लेटों के बीच), तो इनके अणु ध्रुवित (Polarized) हो जाते हैं। इसका मतलब है कि अणु के अंदर धनात्मक और ऋणात्मक आवेश के केंद्र विपरीत दिशाओं में थोड़ा विस्थापित हो जाते हैं।
संधारित्र में कार्य और महत्व
परावैद्युत माध्यम का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग संधारित्र की दो चालकीय प्लेटों के बीच किया जाता है। इसके तीन मुख्य कार्य हैं:
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धारिता बढ़ाना (Increasing Capacitance):
- परावैद्युत पदार्थ बाहरी विद्युत क्षेत्र को कमजोर कर देता है।
- इससे संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवांतर (Voltage, V) कम हो जाता है।
- चूँकि धारिता C = Q/V होती है, विभवांतर कम होने पर, धारिता बढ़ जाती है।
- किसी माध्यम में धारिता, निर्वात की धारिता की तुलना में परावैद्युतांक (K) गुना अधिक हो जाती है (C_{{medium}} = K /cdot C_{{air/vacuum}})।
- यांत्रिक सहारा (Mechanical Support):
- यह दो प्लेटों को एक-दूसरे को स्पर्श करने से रोकता है, जिससे शॉर्ट-सर्किट की संभावना समाप्त हो जाती है।
- परावैद्युत सामर्थ्य (Dielectric Strength):
- यह संधारित्र की उस अधिकतम वोल्टेज को निर्धारित करता है जिसे वह बिना टूटे (यानी बिना अचानक चालक बने) सहन कर सकता है।
परावैद्युत के प्रकार
परावैद्युत पदार्थ दो प्रकार के होते हैं:
- ध्रुवीय परावैद्युत (Polar Dielectrics):
- इन अणुओं में, धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के केंद्र सामान्य अवस्था में (जब कोई बाहरी क्षेत्र नहीं होता) एक-दूसरे से विस्थापित होते हैं। उदाहरण: जल (H_2O), {HCl}।
- अध्रुवीय परावैद्युत (Non-polar Dielectrics):
- इन अणुओं में, धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के केंद्र सामान्य अवस्था में एक-दूसरे पर संपाती होते हैं। बाहरी विद्युत क्षेत्र लगाने पर ही ये विस्थापित होते हैं। उदाहरण: हाइड्रोजन (H_2), नाइट्रोजन (N_2), मोम, शुष्क वायु।
सुरक्षात्मक घेरा
सुरक्षात्मक घेरा (Protective Enclosure / Guard Ring)
"सुरक्षात्मक घेरा" या "गार्ड रिंग" (Guard Ring) शब्द का उपयोग आमतौर पर संधारित्रों (Capacitors) और कुछ उच्च-वोल्टेज उपकरणों के संदर्भ में किया जाता है, जहाँ इसका मुख्य उद्देश्य धारिता के किनारों के प्रभाव (Edge Effects) को नियंत्रित करना और विद्युत क्षेत्र की एकरूपता को बनाए रखना होता है।
चूँकि आप संधारित्र के विषय पर बात कर रहे थे, मैं आपको संधारित्र के संदर्भ में इसका अर्थ समझाता हूँ:
संधारित्र में सुरक्षात्मक घेरा (Guard Ring in Capacitors)
आदर्श रूप से, समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) में, प्लेटों के बीच का विद्युत क्षेत्र पूरी तरह से एकसमान (Uniform) माना जाता है। हालांकि, प्लेटों के किनारों पर, यह क्षेत्र बाहर की ओर मुड़ जाता है और एकसमान नहीं रहता। इस घटना को फ्रिंजिंग या एज इफेक्ट (Fringing or Edge Effect) कहते हैं।
सुरक्षात्मक घेरे का कार्य:
- एज इफेक्ट को खत्म करना: गार्ड रिंग, जो केंद्रीय मापन प्लेट के चारों ओर स्थित एक चालक (Conductor) होता है, को उसी विभवांतर (Potential) पर रखा जाता है जिस पर मापन प्लेट होती है।
- मापन में सटीकता: यह सुनिश्चित करता है कि प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र सीधे और एकसमान रहे। नतीजतन, मापन के लिए उपयोग की जाने वाली केंद्रीय प्लेट में आवेश (Charge) का वितरण भी एकसमान रहता है।
- सटीक धारिता मापन: गार्ड रिंग यह सुनिश्चित करता है कि संधारित्र की धारिता की गणना C = {varepsilon A}/{d} सूत्र का उपयोग करके अत्यंत सटीकता से की जा सके, क्योंकि यह प्रभावी रूप से प्लेट के क्षेत्र (A) को बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और गैर-एकरूप क्षेत्र को हटा देता है।
सरल शब्दों में: गार्ड रिंग केंद्रीय प्लेट के किनारों से 'अनियमित' आवेश (Charge) को दूर रखता है, जिससे धारिता का मापन केवल 'नियमित' और 'एकरूप' क्षेत्र के अंदर ही हो पाता है।
उच्च वोल्टेज उपकरणों में सुरक्षात्मक घेरा
उच्च वोल्टेज उपकरणों (जैसे इंसुलेटर, बस बार) में भी "गार्ड रिंग" या "कोरोना रिंग" का उपयोग किया जाता है:
- उद्देश्य: ये तीव्र विद्युत क्षेत्र (High Electric Field) वाले क्षेत्रों में विद्युत क्षेत्र के तनाव (Stress) को कम करने के लिए लगाए जाते हैं।
- कार्य: ये विद्युत क्षेत्र रेखाओं को अधिक समान रूप से वितरित करते हैं, जिससे किसी एक बिंदु पर फील्ड बहुत अधिक केंद्रित नहीं हो पाता। यह कोरोना डिस्चार्ज (Corona Discharge) और अवांछित लीकेज करंट को रोकता है, जिससे उपकरण की सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ती है।
संधारित्र का कार्य सिद्धांत
संधारित्र (Capacitor) का कार्य सिद्धांत विद्युत आवेश (Electric Charge) के संग्रहण (Storage) और विद्युत क्षेत्र (Electric Field) के निर्माण पर आधारित है।
इसे समझने के लिए, हम समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) का उदाहरण लेते हैं।
1. संधारित्र का मूल सिद्धांत
संधारित्र का सिद्धांत यह है कि जब किसी चालक प्लेट को आवेशित किया जाता है, तो उसकी धारिता (Capacitance) को बिना उसके आयाम (Dimensions) में बदलाव किए बढ़ाया जा सकता है।
- एक आवेशित प्लेट के पास, एक अनावेशित (Uncharged) या भू-संपर्कित (Earthed) दूसरी प्लेट को लाने पर, पहली प्लेट का विभवांतर (Potential) कम हो जाता है।
- चूँकि धारिता C = Q/V होती है, जहाँ Q आवेश है और V विभवांतर है, विभवांतर (V) घटने पर धारिता (C) बढ़ जाती है।
इस बढ़ी हुई धारिता के कारण, संधारित्र अधिक मात्रा में आवेश और ऊर्जा संग्रहित कर सकता है।
2. चार्जिंग (Charging) प्रक्रिया
जब एक संधारित्र को किसी DC स्रोत (जैसे बैटरी) से जोड़ा जाता है, तो निम्नलिखित प्रक्रिया होती है:
- इलेक्ट्रॉन का प्रवाह: बैटरी का ऋणात्मक टर्मिनल संधारित्र की एक प्लेट (प्लेट A) से इलेक्ट्रॉनों को धक्का देता है, जबकि धनात्मक टर्मिनल दूसरी प्लेट (प्लेट B) से इलेक्ट्रॉनों को खींचता है।
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आवेश का पृथक्करण:
- प्लेट A (ऋणात्मक): यह प्लेट ऋणात्मक रूप से आवेशित हो जाती है (इलेक्ट्रॉन जमा होते हैं)।
- प्लेट B (धनात्मक): यह प्लेट धनात्मक रूप से आवेशित हो जाती है (इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है)।
- विद्युत क्षेत्र का निर्माण: प्लेट A पर ऋणात्मक आवेश और प्लेट B पर धनात्मक आवेश के कारण, प्लेटों के बीच के परावैद्युत माध्यम में एक विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह क्षेत्र धनात्मक प्लेट से ऋणात्मक प्लेट की ओर निर्देशित होता है।
- ऊर्जा का भंडारण: यह विद्युत क्षेत्र ही वह स्थान है जहाँ संधारित्र विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) को संग्रहित करता है। यह संग्रहित ऊर्जा सूत्र E = {1}/{2} C V^2 द्वारा दी जाती है।
- संतुलन (Equilibrium): जब संधारित्र पर प्लेटों के बीच का विभवांतर बैटरी के वोल्टेज के बराबर हो जाता है, तो संधारित्र पूरी तरह से चार्ज हो जाता है, और धारा का प्रवाह रुक जाता है।
3. डिस्चार्जिंग (Discharging) प्रक्रिया
- जब संधारित्र को बैटरी से हटाकर एक प्रतिरोधक (Resistor) या किसी भार (Load) से जोड़ा जाता है, तो संग्रहित इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक प्लेट से धनात्मक प्लेट की ओर (बाहरी परिपथ के माध्यम से) प्रवाहित होते हैं।
- यह प्रवाह तब तक जारी रहता है जब तक दोनों प्लेटों पर आवेश शून्य नहीं हो जाता और प्लेटों के बीच का विभवांतर समाप्त नहीं हो जाता।
- इस दौरान, संधारित्र संग्रहित विद्युत ऊर्जा को बाहरी परिपथ में छोड़ देता है।
4. AC परिपथ में कार्य
AC (प्रत्यावर्ती धारा) परिपथों में, संधारित्र का कार्य सिद्धांत अलग होता है:
- संधारित्र AC धारा को अपने माध्यम से "पास" करने की अनुमति देता है, लेकिन यह वास्तव में इलेक्ट्रॉनों को परावैद्युत से पार नहीं कराता।
- जैसे ही AC वोल्टेज की ध्रुवता बदलती है, संधारित्र तेजी से चार्ज और डिस्चार्ज होता है। यह लगातार चार्जिंग-डिस्चार्जिंग प्रक्रिया परिपथ में धारा के प्रवाह का भ्रम पैदा करती है।
- यह AC सिग्नल के लिए कम प्रतिबाधा (Low Impedance) और DC सिग्नल के लिए अत्यधिक उच्च प्रतिबाधा प्रदान करता है (यह DC को ब्लॉक करता है), जो इसे फिल्टरिंग जैसे कार्यों के लिए आदर्श बनाता है।
संक्षेप में,
संधारित्र का कार्य सिद्धांत विद्युत क्षेत्र के माध्यम से ऊर्जा को संग्रहित करना और आवश्यकता पड़ने पर इसे परिपथ में वापस छोड़ना है।
संधारित्र में संग्रहित ऊर्जा
संधारित्र में संग्रहित ऊर्जा (Energy Stored in a Capacitor)
जब एक संधारित्र को चार्ज किया जाता है, तो बैटरी (या वोल्टेज स्रोत) आवेश (Charge) को एक प्लेट से दूसरी प्लेट पर ले जाने के लिए कार्य (Work) करती है। यही कार्य संधारित्र की प्लेटों के बीच के विद्युत क्षेत्र में विद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical Potential Energy) के रूप में संग्रहित हो जाता है।
यह संग्रहित ऊर्जा (E या U) निम्नलिखित तीन समकक्ष सूत्रों द्वारा दी जाती है:
1. संग्रहित ऊर्जा का मुख्य सूत्र
सूत्रों का विवरण (Explanation of Formulas)
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प्रतीक (Symbol)
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विवरण (Description)
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SI मात्रक (SI Unit)
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U
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संग्रहित ऊर्जा (Stored Energy)
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जूल (Joule, J)
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C
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संधारित्र की धारिता (Capacitance)
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फैराड (Farad, F)
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V
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संधारित्र पर विभवांतर (Potential Difference)
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वोल्ट (Volt, V)
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Q
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संधारित्र पर आवेश (Charge)
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कूलॉम (Coulomb, C)
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व्युत्पत्ति का संक्षिप्त विचार (Brief Idea of Derivation)
जब आप एक संधारित्र को आवेशित करते हैं, तो आपको एक प्लेट से दूसरी प्लेट तक आवेश (dq) को स्थानांतरित करने के लिए कार्य करना पड़ता है। किसी क्षण, यदि संधारित्र पर आवेश q है, तो उस क्षण प्लेटों के बीच विभवांतर v = q/C होता है।
आवेश की एक अतिरिक्त छोटी मात्रा dq को स्थानांतरित करने में किया गया छोटा कार्य dW है:
dW = v /cdot dq = {q}/{C} dq
संधारित्र को शून्य आवेश से अंतिम आवेश Q तक पूरी तरह से आवेशित करने में किया गया कुल कार्य (और यही संग्रहित ऊर्जा U है) समाकलन (Integration) द्वारा प्राप्त किया जाता है:
U = dW = int_{0}^{Q} {q}{C} dq
U = {1}{C} l[ {q^2}{2} ]_{0}^{Q}
U = {Q^2}{2 C}
अन्य सूत्र इस मूल सूत्र में Q = CV संबंध का उपयोग करके प्राप्त किए जा सकते हैं।
संधारित्र के कार्य
संधारित्र (Capacitor) विद्युत परिपथों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है, और इसके कई कार्य हैं।
https://dkrajwar.blogspot.com/2025/12/what-is-capacitor.htmlस्थिर संधारित्र
संधारित्रों को उनकी धारिता (Capacitance) के मान के आधार पर मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है: स्थिर संधारित्र (Fixed Capacitors) और परिवर्ती संधारित्र (Variable Capacitors)।
स्थिर संधारित्र (Fixed Capacitor)
परिभाषा:
स्थिर संधारित्र वे होते हैं जिनकी धारिता का मान निर्माण के बाद बदला नहीं जा सकता। उनका मान एक निश्चित सीमा (जैसे 10 {pF} या 100/mu/{F}) पर तय होता है। ये सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले संधारित्र हैं।
स्थिर संधारित्र की धारिता निम्नलिखित सूत्र पर निर्भर करती है:
C = {epsilon_0 epsilon_r A}/{d}
जहाँ A प्लेटों का क्षेत्रफल, d प्लेटों के बीच की दूरी, और epsilon_r डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) माध्यम की आपेक्षिक पारगम्यता है। स्थिर संधारित्र में, ये सभी कारक निश्चित होते हैं।
प्रमुख प्रकार और विशेषताएँ (Main Types and Characteristics)
स्थिर संधारित्रों को उनके बीच प्रयुक्त डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) सामग्री के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
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प्रकार (Type)
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डाइइलेक्ट्रिक सामग्री (Dielectric Material)
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विशेषताएँ (Characteristics)
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सामान्य उपयोग (Common Uses)
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1. सिरेमिक संधारित्र
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सिरेमिक (Ceramic)
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छोटे, सस्ते, गैर-ध्रुवीय (Non-Polarized)। उच्च आवृत्ति वाले अनुप्रयोगों के लिए अच्छे।
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डी-कप्लिंग, बाईपास और रेज़ोनेंस सर्किट।
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2. इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र
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एल्युमीनियम ऑक्साइड (Aluminum Oxide)
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बहुत उच्च धारिता प्रदान करते हैं। ये ध्रुवीय (Polarized) होते हैं, यानी इन्हें सही ध्रुवता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
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बिजली आपूर्ति (Power Supplies) में फिल्टरिंग (स्मूथिंग) और ऊर्जा भंडारण।
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3. फिल्म संधारित्र
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प्लास्टिक फिल्म (जैसे पॉलिएस्टर, पॉलीप्रोपाइलीन)
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उच्च परिशुद्धता (High Precision), अच्छी स्थिरता, उच्च वोल्टेज के लिए उपयुक्त, गैर-ध्रुवीय।
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टाइमिंग सर्किट, फ़िल्टर सर्किट और ऑडियो उपकरण।
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4. टैंटलम संधारित्र
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टैंटलम ऑक्साइड (Tantalum Oxide)
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इलेक्ट्रोलाइटिक से छोटे आकार में उच्च धारिता देते हैं। ध्रुवीय।
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मोबाइल फोन और कंप्यूटर जैसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
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5. अभ्रक संधारित्र (Mica)
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अभ्रक (Mica)
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बहुत उच्च परिशुद्धता और स्थिरता, कम नुकसान (Low Loss)। उच्च आवृत्ति और RF सर्किट के लिए उत्तम।
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उच्च आवृत्ति ऑसिलेटर और रेज़ोनेंस सर्किट।
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स्थिर संधारित्र के मुख्य कार्य
स्थिर संधारित्र, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, एक निश्चित विद्युत मान प्रदान करते हैं और निम्नलिखित कार्यों में अपरिहार्य हैं:
- फिल्टरिंग (Filtering): बिजली आपूर्ति में AC (प्रत्यावर्ती धारा) को ब्लॉक करके और DC (दिष्ट धारा) को पास करके आउटपुट वोल्टेज को सुचारू (smooth) करना।
- डिकूप्लिंग/बाईपास: उच्च आवृत्ति वाले शोर को बिजली आपूर्ति से हटाकर संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक घटकों को स्थिर और शुद्ध शक्ति प्रदान करना।
- ऊर्जा भंडारण: फ्लैश लाइट जैसे उपकरणों में त्वरित रूप से ऊर्जा प्रदान करने के लिए एक छोटी, स्थानीय ऊर्जा भंडारण प्रणाली के रूप में कार्य करना।
पेपर कैपेसिटर
पेपर कैपेसिटर (Paper Capacitor) स्थिर संधारित्रों का एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण प्रकार है। इसका नाम इसके निर्माण में उपयोग होने वाले मुख्य परावैद्युत (Dielectric) सामग्री, यानी कागज, से आता है।
पेपर संधारित्र की संरचना (Structure of Paper Capacitor)
पेपर कैपेसिटर की मूल संरचना अन्य संधारित्रों के समान ही होती है, लेकिन इसमें विशिष्ट रूप से कागज का उपयोग किया जाता है:
- चालक प्लेटें (Conductor Plates): पतली धातु की पन्नी (जैसे एल्युमीनियम की पन्नी या फॉइल) का उपयोग चालक प्लेटों के रूप में किया जाता है।
- परावैद्युत (Dielectric): दो धातु की पन्नियों के बीच में कागज की एक या अधिक परतें डाली जाती हैं। इस कागज को अक्सर खनिज तेल (Mineral Oil) या मोम (Wax) जैसे अचालक पदार्थ से संसेचित (impregnated) किया जाता है ताकि इसकी विद्युतरोधी क्षमता (Insulating strength) और स्थायित्व (longevity) में सुधार हो सके।
- रोलिंग (Rolling): कागज और धातु की पन्नियों की लंबी स्ट्रिप्स को एक साथ लपेटकर (रोल करके) एक बेलनाकार या आयताकार आकार दिया जाता है।
- आवरण (Casing): इस रोल की गई संरचना को नमी और बाहरी क्षति से बचाने के लिए एक मोहरबंद आवरण (Sealed casing) में रखा जाता है।
मुख्य पहचान:
कागज संधारित्र को उसके डाइइलेक्ट्रिक के नाम से जाना जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
- उच्च वोल्टेज क्षमता: कागज संधारित्रों की एक प्रमुख विशेषता उनकी उच्च वोल्टेज को संभालने की क्षमता है। यह उन्हें ऐसे अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है जहाँ उच्च कार्यशील वोल्टेज की आवश्यकता होती है।
- स्थिरता: ये समय के साथ और तापमान की एक सीमा के भीतर भी अपेक्षाकृत स्थिर धारिता (stable capacitance) प्रदान करते हैं।
- गैर-ध्रुवीय (Non-Polarized): अधिकांश पेपर कैपेसिटर गैर-ध्रुवीय होते हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें सर्किट में किसी भी दिशा में जोड़ा जा सकता है (इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्रों के विपरीत)।
उपयोग (Applications)
पेपर कैपेसिटर का उपयोग विभिन्न प्रकार के विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- फ़िल्टरिंग (Filtering): खासकर कम आवृत्ति वाले (low frequency) AC अनुप्रयोगों में, अवांछित उच्च आवृत्ति शोर को फ़िल्टर करने के लिए।
- युग्मन और डिकूप्लिंग (Coupling and Decoupling): AC सिग्नल को एक चरण से दूसरे चरण तक पास करने और DC घटकों को ब्लॉक करने के लिए।
- ऊर्जा भंडारण: औद्योगिक मशीनरी और उच्च शक्ति वाले इलेक्ट्रॉनिक्स में ऊर्जा को क्षण भर के लिए संग्रहीत करने के लिए।
- उच्च शक्ति अनुप्रयोग: कुछ पेपर कैपेसिटर को उच्च शक्ति और उच्च वोल्टेज अनुप्रयोगों (जैसे एक्स-रे मशीन या लेजर सिस्टम) के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
अभ्रक संधारित्र
अभ्रक संधारित्र (Mica Capacitor) स्थिर संधारित्रों में सबसे उच्च गुणवत्ता और परिशुद्धता वाले प्रकारों में से एक है। ये अपनी उत्कृष्ट स्थिरता और कम नुकसान (Low Loss) विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं।
अभ्रक संधारित्र की संरचना (Structure of Mica Capacitor)
अभ्रक संधारित्र में डाइइलेक्ट्रिक के रूप में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खनिज अभ्रक (Mica) का उपयोग किया जाता है। अभ्रक (एक परतदार सिलिकेट यौगिक) में विद्युतरोधी (insulating) गुण बहुत उत्कृष्ट होते हैं।
- डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत): अभ्रक की बहुत पतली-पतली चादरों का उपयोग डाइइलेक्ट्रिक परत के रूप में किया जाता है।
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प्लेटें (Electrodes):
- आधुनिक और अधिक स्थिर प्रकार को चांदी अभ्रक संधारित्र (Silver Mica Capacitor) कहा जाता है। इसमें अभ्रक की चादरों की दोनों सतहों पर चांदी की पतली फिल्म का लेप (कोटिंग) किया जाता है जो चालक प्लेटों (इलेक्ट्रोड) का कार्य करती है।
- अभ्रक और चांदी की इन परतों को एक के ऊपर एक (स्टैक) व्यवस्थित किया जाता है।
- सुरक्षा: इस पूरी असेंबली को नमी और पर्यावरण के प्रभावों से बचाने के लिए एपॉक्सी रेज़िन (Epoxy Resin) या बैकेलाइट केस में संकोशित (Encapsulated) किया जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
अभ्रक संधारित्र को उनकी अद्वितीय विशेषताओं के कारण उच्च-प्रदर्शन वाले अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है:
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विशेषता (Characteristic)
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विवरण (Description)
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उच्च परिशुद्धता (High Accuracy)
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इनकी सहनशीलता (Tolerance) बहुत कम होती है (जैसे ±1% तक), जो उन्हें अत्यधिक सटीक परिपथों के लिए आदर्श बनाती है।
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उत्कृष्ट स्थिरता (Stability)
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समय के साथ, तापमान में बदलाव के साथ, और वोल्टेज में परिवर्तन के साथ भी इनकी धारिता (Capacitance) बहुत कम बदलती है।
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कम नुकसान (Low Losses)
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उच्च आवृत्तियों (High Frequencies) पर इनका शक्ति नुकसान (Power Loss) बहुत कम होता है। इनका Q-फैक्टर (Quality Factor) बहुत अधिक होता है।
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उच्च वोल्टेज क्षमता
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इनमें उच्च ब्रेकडाउन वोल्टेज (High Breakdown Voltage) होता है, जिससे ये उच्च वोल्टेज अनुप्रयोगों को संभाल सकते हैं।
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गैर-ध्रुवीय (Non-Polarized)
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ये गैर-ध्रुवीय होते हैं, इसलिए इन्हें परिपथ में किसी भी दिशा में जोड़ा जा सकता है।
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उपयोग (Applications)
ये संधारित्र अक्सर ऐसे अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं जहाँ स्थिरता (Stability) और परिशुद्धता (Precision) सबसे महत्वपूर्ण होती है:
- रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सर्किट: उच्च आवृत्तियों पर कम नुकसान के कारण रेडियो और टीवी ट्रांसमीटरों में।
- ऑसिलेटर्स (Oscillators) और फिल्टर: सटीक और स्थिर आवृत्ति उत्पन्न करने वाले परिपथों में।
- ट्यून किए गए सर्किट (Tuned Circuits): रेडियो रिसीवर में किसी विशेष आवृत्ति पर ट्यूनिंग के लिए।
- उच्च वोल्टेज अनुप्रयोग: जहां वोल्टेज अत्यधिक उच्च होता है।
अभ्रक संधारित्र,
सिरेमिक संधारित्रों की तुलना में महंगे होते हैं, लेकिन उच्च परिशुद्धता वाले काम के लिए इनका कोई विकल्प नहीं है।
सिरेमिक संधारित्र
सिरेमिक संधारित्र (Ceramic Capacitor) आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले और बहुमुखी संधारित्रों में से एक है। ये अपने छोटे आकार, कम लागत और उच्च आवृत्ति वाले अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्तता के कारण बहुत लोकप्रिय हैं।
सिरेमिक संधारित्र की संरचना (Structure of Ceramic Capacitor)
सिरेमिक संधारित्र में डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) सामग्री के रूप में सिरेमिक (मिट्टी के बरतन) का उपयोग किया जाता है। सिरेमिक उच्च डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक (High Dielectric Constant) प्रदान करते हैं, जिससे छोटे भौतिक आकार में भी उच्च धारिता प्राप्त होती है।
- डाइइलेक्ट्रिक: बेरियम टाइटेनेट (BaTiO_3) जैसे सिरेमिक यौगिकों का उपयोग डाइइलेक्ट्रिक माध्यम के रूप में किया जाता है।
- प्लेटें (इलेक्ट्रोड): चांदी या अन्य धातु की कोटिंग को सिरेमिक डाइइलेक्ट्रिक की सतहों पर इलेक्ट्रोड के रूप में चढ़ाया जाता है।
सिरेमिक संधारित्र मुख्य रूप से दो भौतिक रूपों में आते हैं:
- डिस्क सिरेमिक कैपेसिटर (Disc Ceramic Capacitor): ये गोल डिस्क के आकार के होते हैं और इनमें थ्रू-होल लीड होती हैं। ये पुरानी तकनीक के हैं।
- मल्टीलेयर सिरेमिक चिप कैपेसिटर (MLCC - Multi-Layer Ceramic Chip Capacitor): ये सबसे आम और आधुनिक प्रकार हैं। इनमें सिरेमिक और इलेक्ट्रोड की कई परतों को एक साथ स्टैक किया जाता है, जिससे बहुत ही छोटे चिप (SMD) पैकेज में उच्च धारिता प्राप्त होती है।
सिरेमिक संधारित्र के प्रकार (Classes of Ceramic Capacitors)
सिरेमिक संधारित्र को उनकी स्थिरता और डाइइलेक्ट्रिक सामग्री के आधार पर दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है:
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वर्ग (Class)
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डाइइलेक्ट्रिक कोड (उदाहरण)
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मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics)
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सामान्य उपयोग (Common Uses)
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क्लास 1 (टाइप 1)
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NPO या C0G
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उच्च स्थिरता, कम नुकसान, तापमान परिवर्तन के साथ धारिता में बहुत कम परिवर्तन। उच्च परिशुद्धता वाले होते हैं।
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उच्च आवृत्ति RF और ऑसिलेटर सर्किट, टाइमिंग सर्किट।
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क्लास 2 (टाइप 2)
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X7R, X5R, Y5V
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उच्च डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक के कारण उच्च धारिता संभव, लेकिन स्थिरता (Stability) कम होती है। तापमान और वोल्टेज के साथ धारिता बदल सकती है।
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डिकूप्लिंग/बाईपास, फ़िल्टरिंग, ऊर्जा भंडारण।
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प्रमुख विशेषताएँ और अनुप्रयोग
- छोटे आकार और कम लागत: खासकर MLCC तकनीक के कारण, ये बहुत कम जगह घेरते हैं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण सस्ते होते हैं।
- उच्च आवृत्ति पर प्रदर्शन: इनमें प्रेरकत्व (Inductance) बहुत कम होता है, जिसके कारण ये उच्च आवृत्ति वाले (RF) अनुप्रयोगों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
- गैर-ध्रुवीय (Non-Polarized): सिरेमिक संधारित्र गैर-ध्रुवीय होते हैं, इसलिए इन्हें सर्किट में किसी भी दिशा में जोड़ा जा सकता है।
सिरेमिक संधारित्र का उपयोग लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में किया जाता है, विशेष रूप से पावर सप्लाई को स्थिर करने (Voltage Stabilization) और उच्च आवृत्ति वाले शोर को फ़िल्टर करने के लिए।
इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर
इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर (Electrolytic Capacitor) स्थिर संधारित्रों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रकार है, जो अपनी उच्च धारिता के लिए जाने जाते हैं।
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र की पहचान (Key Identification)
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्रों की मुख्य पहचान यह है कि वे ध्रुवीय (Polarized) होते हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें परिपथ में एक निश्चित दिशा या ध्रुवता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
- सकारात्मक (+) लीड हमेशा उच्च विभव (Higher Potential) से जुड़ी होनी चाहिए।
- नकारात्मक (-) लीड हमेशा निम्न विभव (Lower Potential) से जुड़ी होनी चाहिए।
अगर इन्हें गलत ध्रुवता में जोड़ा जाता है, तो ये नष्ट हो सकते हैं, गर्म हो सकते हैं, या फट भी सकते हैं।
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र की संरचना (Structure of Electrolytic Capacitor)
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र दो मूलभूत प्रकारों में आते हैं: एल्युमीनियम (Aluminum) और टैंटलम (Tantalum)। एल्युमीनियम इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र सबसे आम हैं:
- एनोड (सकारात्मक प्लेट): एल्युमीनियम की एक पतली पन्नी। इसकी सतह को रासायनिक रूप से एनोडाइज्ड किया जाता है।
- डाइइलेक्ट्रिक: एनोडाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से एल्युमीनियम पन्नी की सतह पर एल्युमीनियम ऑक्साइड की एक बहुत पतली परत बनती है। यह ऑक्साइड परत डाइइलेक्ट्रिक के रूप में कार्य करती है। यह परत इतनी पतली होती है कि यह छोटे आकार में भी बहुत उच्च धारिता प्रदान करती है।
- कैथोड (नकारात्मक प्लेट): तरल या जेल के रूप में एक इलेक्ट्रोलाइट होता है। यह इलेक्ट्रोलाइट वस्तुतः कैथोड प्लेट के रूप में कार्य करता है।
- संपर्क पन्नी (Contact Foil): इलेक्ट्रोलाइट को बाह्य लीड से जोड़ने के लिए एल्युमीनियम की एक दूसरी पन्नी का उपयोग किया जाता है।
- रोलिंग और आवरण: इन परतों को रोल करके एक बेलनाकार आकार दिया जाता है और फिर धातु के आवरण (कैन) में सील कर दिया जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
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विशेषता (Characteristic)
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विवरण (Description)
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उच्च धारिता घनत्व
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ये छोटे भौतिक आकार में सबसे अधिक धारिता (माइक्रोफ़ारड (mu/{F}) से लेकर फ़ारड ({F}) तक) प्रदान करते हैं।
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ध्रुवीय प्रकृति
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इन्हें केवल DC (दिष्ट धारा) अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाना चाहिए और ध्रुवता का ध्यान रखना अनिवार्य है।
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रिसाव धारा (Leakage Current)
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सिरेमिक या फिल्म संधारित्रों की तुलना में इनमें रिसाव धारा थोड़ी अधिक होती है।
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आयु (Lifespan)
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इलेक्ट्रोलाइट के सूखने या खराब होने के कारण इनकी आयु सीमित हो सकती है, खासकर उच्च तापमान पर।
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उपयोग (Applications)
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्र मुख्य रूप से उन परिपथों में उपयोग किए जाते हैं जहाँ बड़ी मात्रा में ऊर्जा भंडारण और फ़िल्टरिंग की आवश्यकता होती है:
- DC पावर सप्लाई (बिजली आपूर्ति): AC को DC में बदलने के बाद आउटपुट वोल्टेज को सुचारू (smooth) करने और लहर (Ripple) को कम करने के लिए। यह इनका सबसे आम उपयोग है।
- ऊर्जा भंडारण: फ्लैश, इनवर्टर और ऑडियो एम्पलीफायर जैसे उपकरणों में बड़ी मात्रा में ऊर्जा संग्रहीत करने के लिए।
- युग्मन और डिकूप्लिंग: जहाँ ध्रुवीयता को बनाए रखा जा सकता हो।
इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्रों का उपयोग लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में होता है जो AC मुख्य पावर पर चलता है।
प्लास्टिक फिल्म कैपेसिटर
प्लास्टिक फिल्म कैपेसिटर (Plastic Film Capacitor), जिन्हें केवल फिल्म कैपेसिटर भी कहा जाता है, स्थिर संधारित्रों का एक अन्य महत्वपूर्ण समूह है। ये अपने उच्च प्रदर्शन, अच्छी स्थिरता और कम नुकसान (low loss) के कारण जाने जाते हैं।
फिल्म संधारित्र की संरचना (Structure of Film Capacitor)
फिल्म संधारित्र में डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) सामग्री के रूप में प्लास्टिक की पतली फिल्म का उपयोग किया जाता है।
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डाइइलेक्ट्रिक: विभिन्न प्रकार की प्लास्टिक फिल्में, जैसे:
- पॉलिएस्टर (पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थालेट या Mylar): सबसे आम।
- पॉलीप्रोपाइलीन: उच्च आवृत्ति और उच्च शक्ति अनुप्रयोगों के लिए।
- पॉलीकार्बोनेट, पॉलीस्टीरिन, या PTFE (Teflon)।
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चालक प्लेटें (इलेक्ट्रोड): ये दो मुख्य तरीकों से निर्मित होते हैं:
- फॉइल टाइप (Foil Type): प्लास्टिक फिल्म के बीच एल्युमीनियम या टिन की पतली धातु की पन्नी का उपयोग किया जाता है।
- मेटलाइज़्ड फिल्म टाइप (Metallized Film Type): प्लास्टिक फिल्म की सतह पर ही वैक्यूम जमाव (vacuum deposition) द्वारा एक अत्यंत पतली धातु की परत जमा की जाती है। यह रूप अधिक कॉम्पैक्ट (सघन) होता है।
- रोलिंग: डाइइलेक्ट्रिक फिल्म और इलेक्ट्रोड को एक साथ रोल करके एक बेलनाकार या अंडाकार आकार दिया जाता है।
- सुरक्षा: इस रोल को नमी और क्षति से बचाने के लिए एपॉक्सी कोटिंग या कठोर प्लास्टिक आवरण में सील कर दिया जाता है।
प्रमुख प्रकार और विशेषताएँ (Main Types and Characteristics)
फिल्म संधारित्रों को उनके डाइइलेक्ट्रिक सामग्री के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, और प्रत्येक प्रकार की अपनी अनूठी विशेषता होती है:
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प्रकार (Type)
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डाइइलेक्ट्रिक सामग्री
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मुख्य विशेषताएँ (Characteristics)
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सामान्य उपयोग (Common Uses)
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पॉलिएस्टर (PET/Mylar)
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पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थालेट
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उच्च ढांकता हुआ स्थिरांक (Dielectric Constant), छोटा आकार, कम लागत।
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सामान्य युग्मन, बाईपास और DC ब्लॉकिंग सर्किट।
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पॉलीप्रोपाइलीन (PP)
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पॉलीप्रोपाइलीन
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उत्कृष्ट स्थिरता, कम हानि (Low Dissipation Factor), उच्च वोल्टेज और उच्च आवृत्ति अनुप्रयोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ।
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AC मोटर स्टार्टर, स्विच मोड पावर सप्लाई (SMPS), रेज़ोनेंस सर्किट।
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पॉलीस्टीरिन (PS)
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पॉलीस्टीरिन
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उच्च परिशुद्धता, उत्कृष्ट स्थिरता, तापमान गुणांक पर नकारात्मक होता है।
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टाइमिंग और ट्यूनिंग सर्किट (जहाँ परिशुद्धता आवश्यक है)।
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फिल्म संधारित्रों की सामान्य विशेषताएँ
- गैर-ध्रुवीय (Non-Polarized): इन्हें सर्किट में किसी भी दिशा में जोड़ा जा सकता है (इलेक्ट्रोलाइटिक के विपरीत)।
- बेहतर प्रदर्शन: सिरेमिक संधारित्रों की तुलना में तापमान और समय के साथ इनकी धारिता अधिक स्थिर रहती है।
- स्व-उपचार (Self-Healing): मेटलाइज़्ड फिल्म संधारित्रों में यह क्षमता होती है। यदि डाइइलेक्ट्रिक में कोई छोटा छेद या ब्रेकडाउन होता है, तो धातु की परत उस बिंदु पर वाष्पीकृत होकर फॉल्ट को पृथक कर देती है, जिससे संधारित्र शॉर्ट-सर्किट होने से बच जाता है और काम करना जारी रखता है।
फिल्म संधारित्र,
विशेष रूप से पॉलीप्रोपाइलीन वाले, को अक्सर AC अनुप्रयोगों और उच्च शक्ति वाले उपकरणों (जैसे इंडक्शन कुकर और वेल्डिंग मशीन) में उपयोग किया जाता है जहाँ विश्वसनीयता और उच्च वोल्टेज की आवश्यकता होती है।
परिवर्तनीय संधारित्र
परिवर्तनीय संधारित्र (Variable Capacitor), जैसा कि नाम से स्पष्ट है, वे संधारित्र होते हैं जिनकी धारिता (Capacitance) को भौतिक रूप से बदला जा सकता है।
स्थिर संधारित्रों के विपरीत, जो एक निश्चित मान प्रदान करते हैं, परिवर्तनीय संधारित्र हमें सर्किट में ट्यूनिंग (Tuning) या आवृत्ति समायोजन (Frequency Adjustment) की अनुमति देते हैं।
परिवर्तनीय संधारित्र का सिद्धांत (Principle of Variable Capacitor)
धारिता का मूल सूत्र है:
C = {epsilon_0 epsilon_r A}/{d}
परिवर्तनीय संधारित्र इसी सूत्र के एक घटक (A या d) को बदलकर धारिता को बदलते हैं:
- ओवरलैप क्षेत्रफल (A) को बदलकर: यह सबसे आम विधि है, जहाँ दो प्लेटों के बीच ओवरलैप होने वाले क्षेत्रफल को कम या ज़्यादा करके धारिता को बदला जाता है।
- प्लेटों के बीच की दूरी (d) को बदलकर: कुछ प्रकार के संधारित्रों में, दूरी को बदलकर धारिता को समायोजित किया जाता है।
प्रमुख प्रकार (Main Types)
परिवर्तनीय संधारित्र मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं:
1. ट्यूनिंग संधारित्र (Tuning Capacitors)
इनका उपयोग परिपथों को एक विस्तृत रेंज (Wide Range) में ट्यून करने के लिए किया जाता है (जैसे रेडियो स्टेशन बदलना)।
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संरचना: इसमें प्लेटों के दो सेट होते हैं:
- स्टेटर (Stator): स्थिर प्लेटों का सेट।
- रोटर (Rotor): घूमने वाली प्लेटों का सेट, जो एक नॉब (घुंडी) से जुड़ा होता है।
- कार्य: नॉब को घुमाने पर, रोटर प्लेटें स्टेटर प्लेटों के बीच घूमती हैं। जैसे-जैसे ओवरलैप क्षेत्रफल (A) बढ़ता है, धारिता बढ़ती है, और जैसे-जैसे ओवरलैप क्षेत्रफल कम होता है, धारिता घटती है।
- डाइइलेक्ट्रिक: आमतौर पर हवा (Air) या प्लास्टिक फिल्म का उपयोग डाइइलेक्ट्रिक के रूप में किया जाता है।
- उपयोग: AM/FM रेडियो रिसीवर और पुराने टीवी रिसीवर में।
2. ट्रिमर संधारित्र (Trimmer Capacitors)
ये छोटे संधारित्र होते हैं जिनका उपयोग केवल आरंभिक या सामयिक समायोजन (Initial or Occasional Adjustment) के लिए किया जाता है। इन्हें आमतौर पर ट्यूनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता।
- संरचना: इन्हें एक छोटे स्क्रू या प्लास्टिक उपकरण का उपयोग करके समायोजित किया जाता है। ये अक्सर माइका (mica) या सिरेमिक डाइइलेक्ट्रिक का उपयोग करते हैं।
- कार्य: ट्रिमर संधारित्र आमतौर पर प्लेटों के बीच की दूरी (d) को थोड़ा बदलकर या ओवरलैप क्षेत्रफल को बारीक रूप से समायोजित करके धारिता बदलते हैं।
- उपयोग: RF परिपथों में स्थायी रूप से स्थापित होने से पहले सर्किट की सटीक ट्यूनिंग (कैलिब्रेशन) के लिए।
परिवर्तनीय संधारित्रों के कार्य (Functions of Variable Capacitors)
परिवर्तनीय संधारित्रों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य रेज़ोनेंट सर्किट (Resonant Circuits) में होता है:
ट्यूनिंग (Tuning): यह किसी रेडियो रिसीवर को विभिन्न प्रसारण आवृत्तियों (Broadcasting Frequencies) पर समायोजित करने की अनुमति देता है। रेज़ोनेंट आवृत्ति (f) धारिता (C) और प्रेरकत्व (L) पर निर्भर करती है:
f = {1}/{2pi sqrt{LC}}
C को बदलकर, f को बदला जा सकता है।
फ्रीक्वेंसी कैलिब्रेशन: ट्रिमर संधारित्र का उपयोग करके किसी ऑसिलेटर या फिल्टर की आउटपुट आवृत्ति को बहुत सटीक मान पर सेट किया जाता है।
परिवर्तनीय संधारित्र, विशेष रूप से ट्यूनिंग कैपेसिटर, आधुनिक डिजिटल ट्यूनिंग के उदय के कारण अब कम आम हो गए हैं, लेकिन RF और एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक्स में इनकी भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है।
विशेष प्रकार के संधारित्र
संधारित्रों की मूल संरचना (प्लेटें और डाइइलेक्ट्रिक) समान होते हुए भी, विशिष्ट अनुप्रयोगों और मांगों को पूरा करने के लिए कई विशेष प्रकार के संधारित्र (Special Type Capacitors) विकसित किए गए हैं।
यहां कुछ महत्वपूर्ण विशेष प्रकार के संधारित्रों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
1. सुपर कैपेसिटर या अल्ट्रा कैपेसिटर (Supercapacitor / Ultracapacitor)
- मूल कार्य: ये पारंपरिक संधारित्रों और बैटरियों के बीच की कड़ी हैं। ये बहुत ही उच्च ऊर्जा घनत्व (High Energy Density) के लिए जाने जाते हैं।
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विशेषताएँ:
- इनकी धारिता इलेक्ट्रोलाइटिक संधारित्रों से हज़ार गुना अधिक हो सकती है (फ़ारड की रेंज में, \text{F})।
- ये बहुत तेज़ी से आवेशित और निरावेशित हो सकते हैं (उच्च शक्ति घनत्व)।
- इनकी आयु लंबी होती है (लाखों चक्र)।
- डाइइलेक्ट्रिक: ये पारंपरिक डाइइलेक्ट्रिक का उपयोग नहीं करते हैं। इसके बजाय, ये इलेक्ट्रिकल डबल लेयर (EDLC) या फैराडिक स्यूडो-कैपेसिटेंस के सिद्धांतों पर काम करते हैं।
- उपयोग: इलेक्ट्रिक वाहनों में पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking), कंप्यूटर मेमोरी बैकअप, सौर ऊर्जा भंडारण और शॉर्ट-टर्म पावर बूस्ट (जैसे हाइब्रिड बसों में)।
2. वैक्यूम संधारित्र (Vacuum Capacitor)
- मूल कार्य: इन्हें विशेष रूप से अत्यधिक उच्च वोल्टेज (Very High Voltage) और उच्च आवृत्ति (High Frequency) वाले अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषताएँ:
- इनमें डाइइलेक्ट्रिक के रूप में पूर्ण वैक्यूम का उपयोग किया जाता है।
- वैक्यूम के कारण, इनमें डाइइलेक्ट्रिक नुकसान लगभग शून्य होता है।
- ये उच्च रेडियो आवृत्ति (RF) करंट को बहुत कम नुकसान के साथ संभाल सकते हैं।
- संरचना: ये आमतौर पर सिरेमिक या कांच के लिफाफे में बंद धातु की प्लेटों से बने होते हैं।
- उपयोग: उच्च शक्ति वाले रेडियो और टीवी ट्रांसमीटर, MRI मशीन और RF इंडक्शन हीटिंग उपकरण।
3. ट्रिमर और पैडर संधारित्र (Trimmer and Padder Capacitors)
इनका वर्णन परिवर्तनीय संधारित्रों के तहत किया गया है, लेकिन ये अपनी विशिष्ट समायोजन प्रकृति के कारण विशेष हैं।
- ट्रिमर (Trimmer): इनका उपयोग सर्किट को बारीक (Fine) ट्यूनिंग देने के लिए किया जाता है। ये छोटे धारिता मानों को समायोजित करते हैं।
- पैडर (Padder): इनका उपयोग सर्किट की धारिता को मोटे तौर पर (Coarse) बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे ट्यूनिंग रेंज की निचली सीमा निर्धारित होती है।
- उपयोग: RF और माइक्रोवेव सर्किट में सटीक अंशांकन (Calibration) और ट्यूनिंग।
4. फीडथ्रू संधारित्र (Feedthrough Capacitor)
- मूल कार्य: इन्हें विशेष रूप से फ़िल्टरिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ सिग्नल एक शील्ड (Shielded) बाड़े से गुजरता है।
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विशेषताएँ:
- ये उच्च आवृत्ति वाले अवांछित शोर को प्रभावी ढंग से बाईपास करके, सिग्नल लाइन पर उच्च आवृत्ति वाले शोर (Noise) को ग्राउंड (Ground) तक ले जाते हैं।
- इन्हें सीधे धातु के बाड़े (Metal Enclosure) में लगाया जाता है।
- उपयोग: EMI/RFI फ़िल्टरिंग, जहाँ यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक शोर एक संलग्न क्षेत्र में प्रवेश न कर सके या उससे बाहर न निकल सके (जैसे मिलिट्री उपकरण या संवेदनशील माप उपकरण)।
5. डीसी-लिंक संधारित्र (DC-Link Capacitor)
- मूल कार्य: इन्हें उच्च शक्ति वाले इलेक्ट्रॉनिक परिवर्तकों (Converters) में बड़े DC वोल्टेज बस को स्थिर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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विशेषताएँ:
- इन्हें उच्च RMS करंट (उच्च रिपल करंट) और उच्च वोल्टेज को संभालने के लिए बनाया जाता है।
- ये आमतौर पर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म संधारित्र होते हैं।
- उपयोग: सौर इनवर्टर, पवन टर्बाइन परिवर्तक और इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड वाहन ड्राइव सिस्टम।
ये विशेष प्रकार के संधारित्र उन विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करते हैं जो पारंपरिक संधारित्र (जैसे इलेक्ट्रोलाइटिक या सिरेमिक) के दायरे से बाहर होती हैं, जिससे वे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर इंजीनियरिंग के लिए अपरिहार्य बन जाते हैं।
सुपर कैपेसिटर
सुपर कैपेसिटर (Supercapacitor), जिन्हें अल्ट्रा कैपेसिटर (Ultracapacitor) या इलेक्ट्रिकल डबल लेयर कैपेसिटर (EDLC - Electrical Double-Layer Capacitor) भी कहा जाता है, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी तकनीक है।
ये पारंपरिक संधारित्रों और बैटरियों के बीच की विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं, जिससे ये छोटे आकार में उच्च ऊर्जा घनत्व और उच्च शक्ति घनत्व दोनों प्रदान करते हैं।
सुपर कैपेसिटर की कार्यप्रणाली (Working Principle)
सुपर कैपेसिटर पारंपरिक संधारित्रों की तरह डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) का उपयोग नहीं करते हैं। इसके बजाय, वे इलेक्ट्रिकल डबल लेयर (EDL) सिद्धांत का उपयोग करके ऊर्जा संग्रहित करते हैं।
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संरचना: सुपर कैपेसिटर में दो इलेक्ट्रोड होते हैं जो एक विभाजक (Separator) द्वारा अलग किए जाते हैं। ये सभी एक इलेक्ट्रोलाइट में डूबे होते हैं।
- इलेक्ट्रोड: आमतौर पर उच्च छिद्रयुक्त सतह क्षेत्रफल (High Porous Surface Area) वाले सक्रिय कार्बन (Activated Carbon) का उपयोग किया जाता है।
- इलेक्ट्रोलाइट: इसमें आयन होते हैं।
- आवेशण (Charging): जब वोल्टेज लगाया जाता है, तो इलेक्ट्रोलाइट के विपरीत आवेश वाले आयन इलेक्ट्रोड की छिद्रयुक्त सतहों की ओर आकर्षित होते हैं।
- EDL निर्माण: ये विपरीत आवेश वाले आयन इलेक्ट्रोड की सतह पर एक अत्यंत पतली परत (माइक्रोमीटर से भी कम) बनाते हैं, जिसे इलेक्ट्रिकल डबल लेयर कहते हैं।
- ऊर्जा भंडारण: यह बहुत पतली परत डाइइलेक्ट्रिक का कार्य करती है। चूंकि प्लेटों (इलेक्ट्रोड और आयन परत) के बीच की दूरी (d) बहुत कम होती है और सतह का क्षेत्रफल (A) बहुत बड़ा होता है, इसलिए धारिता (C = epsilon A/d) अत्यधिक उच्च होती है।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
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विशेषता (Characteristic)
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सुपर कैपेसिटर
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पारंपरिक इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर
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बैटरी (जैसे लिथियम-आयन)
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धारिता मान
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बहुत उच्च (फ़ारड में, {F})
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मध्यम (माइक्रोफ़ारड से मिलीफ़ारड तक)
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लागू नहीं (रासायनिक रूप से संग्रहित)
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शक्ति घनत्व (Power Density)
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बहुत उच्च (तेज़ ऊर्जा निर्गमन)
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मध्यम से उच्च
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कम (धीमा ऊर्जा निर्गमन)
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ऊर्जा घनत्व (Energy Density)
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मध्यम (बैटरी से कम, कैपेसिटर से अधिक)
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कम
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बहुत उच्च
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आवेश/निरावेश दर
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अत्यधिक तेज़ (सेकंडों में)
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तेज़
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धीमा (घंटों में)
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चक्रीय आयु (Cyclic Life)
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अत्यधिक लंबी (लाखों चक्र)
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लंबी
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सीमित (सैकड़ों/हजारों चक्र)
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कार्य का सिद्धांत
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भौतिक आवेश भंडारण (EDL)
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भौतिक आवेश भंडारण (डाइइलेक्ट्रिक)
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रासायनिक अभिक्रिया
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उपयोग (Applications)
सुपर कैपेसिटर उन अनुप्रयोगों के लिए आदर्श हैं जहाँ त्वरित ऊर्जा वृद्धि (Quick Power Burst) या बार-बार तेज़ आवेशण/निरावेशण (Rapid Cycling) की आवश्यकता होती है:
- पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking): इलेक्ट्रिक ट्रेनों, ट्राम और हाइब्रिड बसों में ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा को तेज़ी से अवशोषित करना और त्वरण के दौरान उसे तेज़ी से मुक्त करना।
- बैकअप पावर: कंप्यूटर, सर्वर और अन्य डिजिटल उपकरणों में संक्षिप्त बिजली कटौती के दौरान तुरंत बैकअप पावर प्रदान करना।
- औद्योगिक पावर बूस्ट: भारी मशीनों, क्रेन और लिफ्टों में त्वरित शक्ति वृद्धि प्रदान करना।
- क्षणिक ऊर्जा संग्रहण: सौर और पवन ऊर्जा प्रणालियों में जहाँ आउटपुट में अचानक उतार-चढ़ाव आता है।
सुपर कैपेसिटर की लंबी आयु और तेज़ गति उन्हें विशेष niches (खास जगह) में बैटरियों का एक महत्वपूर्ण पूरक बनाती है।
वैक्यूम कैपेसिटर
वैक्यूम कैपेसिटर (Vacuum Capacitor) एक विशेष प्रकार का संधारित्र है जिसे मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (High Voltage) और उच्च रेडियो फ्रीक्वेंसी (High RF Frequency) वाले अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ये अपनी अद्वितीय डाइइलेक्ट्रिक सामग्री के कारण पारंपरिक संधारित्रों से अलग हैं।
वैक्यूम संधारित्र की संरचना (Structure of Vacuum Capacitor)
वैक्यूम संधारित्र में डाइइलेक्ट्रिक (परावैद्युत) माध्यम के रूप में पूर्ण वैक्यूम का उपयोग किया जाता है।
- प्लेटें (Electrodes): ये आमतौर पर तांबे (Copper) जैसी उच्च-चालकता वाली धातु से बनी होती हैं।
- डाइइलेक्ट्रिक माध्यम: प्लेटों के बीच का स्थान वैक्यूम (पूर्ण शून्य हवा का दबाव) होता है। वैक्यूम को अब तक ज्ञात सबसे अच्छा इंसुलेटर (विद्युतरोधी) माना जाता है क्योंकि इसमें आयनित होने के लिए कोई अणु या गैस मौजूद नहीं होती है।
- आवरण (Enclosure): प्लेट असेंबली को एक मज़बूत, सीलबंद लिफाफे में बंद किया जाता है, जो आमतौर पर सिरेमिक या कांच का बना होता है। यह लिफाफा वैक्यूम को अंदर बनाए रखता है और बाहरी लीड्स के लिए इन्सुलेशन प्रदान करता है।
- वेल्डिंग/सीलिंग: इलेक्ट्रोड और सिरेमिक एनवलप को अत्यधिक मज़बूती से वेल्ड या सील किया जाता है ताकि वैक्यूम बरकरार रहे।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
वैक्यूम संधारित्र अपनी अनूठी संरचना के कारण अद्वितीय प्रदर्शन प्रदान करते हैं:
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विशेषता (Characteristic)
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विवरण (Description)
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लाभ (Advantage)
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उच्च वोल्टेज क्षमता
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वैक्यूम में डाइइलेक्ट्रिक ब्रेकडाउन (Dielectric Breakdown) वोल्टेज बहुत अधिक होता है।
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संधारित्र बिना पंचर हुए हज़ारों वोल्ट को संभाल सकता है।
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कम नुकसान (Low Losses)
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वैक्यूम का शक्ति अपव्यय (Dissipation Factor) और डाइइलेक्ट्रिक नुकसान लगभग शून्य होता है।
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उच्च आवृत्ति (RF) करंट को संभालने पर बहुत कम गर्मी उत्पन्न होती है।
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उच्च आवृत्ति संचालन
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इसमें बहुत कम प्रेरित प्रेरकत्व (Induced Inductance) और प्रतिरोध होता है।
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उच्च मेगा-हर्ट्ज़ (MHz) और गीगा-हर्ट्ज़ (GHz) आवृत्तियों पर कुशल संचालन।
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तापमान स्थिरता
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वैक्यूम तापमान परिवर्तन से अप्रभावित रहता है।
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प्रदर्शन बाहरी वातावरण के तापमान से प्रभावित नहीं होता है।
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स्व-उपचार (Self-Healing)
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उच्च वोल्टेज की क्षणिक वृद्धि होने पर, वैक्यूम में कोई स्थायी क्षति नहीं होती है।
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अत्यधिक विश्वसनीय और दीर्घकालिक उपयोग के लिए उपयुक्त।
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प्रकार (Types)
वैक्यूम संधारित्र दो मुख्य रूपों में आते हैं:
- स्थिर वैक्यूम संधारित्र (Fixed Vacuum Capacitor): इनकी धारिता का मान निश्चित होता है।
- परिवर्तनीय वैक्यूम संधारित्र (Variable Vacuum Capacitor): इनमें एक जंगम प्लेट होती है जिसे बाहर से नियंत्रित किया जाता है, जिससे धारिता को समायोजित किया जा सकता है।
उपयोग (Applications)
उनकी उच्च शक्ति और आवृत्ति विशेषताओं के कारण, वैक्यूम संधारित्र का उपयोग विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों में किया जाता है जहाँ उच्च विश्वसनीयता और प्रदर्शन आवश्यक है:
- रेडियो और टीवी ट्रांसमीटर: उच्च शक्ति वाले RF ट्यूनिंग और मिलान सर्किट में।
- इंडक्शन हीटिंग उपकरण: उच्च आवृत्ति और उच्च करंट को नियंत्रित करने के लिए।
- मेडिकल उपकरण: MRI मशीन जैसे उच्च-शक्ति वाले इमेजिंग उपकरणों में।
- प्लाज़्मा और सेमीकंडक्टर प्रसंस्करण उपकरण: वैक्यूम वातावरण के कारण ये उपकरण के अंदर सीधे उपयोग किए जा सकते हैं।
संक्षेप में,
वैक्यूम संधारित्र उच्च वोल्टेज, उच्च आवृत्ति और उच्च विश्वसनीयता वाले जटिल RF प्रणालियों के लिए सबसे शक्तिशाली और स्थिर संधारित्र समाधान हैं।
ट्रिमर कैपेसिटर
ट्रिमर कैपेसिटर (Trimmer Capacitor) एक विशेष प्रकार का परिवर्तनीय संधारित्र (Variable Capacitor) है, जिसे परिपथों में अंशांकन (Calibration) या बारीक समायोजन (Fine Tuning) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ये ट्यूनिंग संधारित्रों (Tuning Capacitors) से भिन्न होते हैं क्योंकि इनका उपयोग उपयोगकर्ता द्वारा बार-बार ट्यूनिंग के लिए नहीं किया जाता है, बल्कि इन्हें निर्माण या मरम्मत के दौरान केवल एक बार या यदा-कदा ही समायोजित किया जाता है।
ट्रिमर कैपेसिटर की कार्यप्रणाली और संरचना
ट्रिमर संधारित्र का मुख्य उद्देश्य संधारित्र के प्लेटों के ओवरलैप क्षेत्रफल (A) या दूरी (d) को थोड़ा बदलकर धारिता को समायोजित करना होता है।
- समायोजन: समायोजन आमतौर पर एक छोटे पेंच (Screw) का उपयोग करके किया जाता है, जिसे घुमाने पर धारिता का मान एक छोटी रेंज (जैसे 2/{pF} से 10/{pF} तक) के भीतर बदलता है। इस समायोजन के लिए एक विशेष प्लास्टिक या सिरेमिक टूल का उपयोग किया जाता है ताकि समायोजन के दौरान सर्किट की विशेषताओं पर हाथ की धारिता (Hand Capacitance) का प्रभाव न पड़े।
- छोटे आकार: ये बहुत छोटे होते हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य केवल बेस धारिता मान में मामूली बदलाव करना होता है।
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डाइइलेक्ट्रिक: ट्रिमर संधारित्र अक्सर निम्नलिखित डाइइलेक्ट्रिक सामग्री का उपयोग करते हैं:
- सिरेमिक ट्रिमर: सामान्य तौर पर उपयोग किया जाता है।
- फिल्म ट्रिमर (पॉलीप्रोपाइलीन/पॉलिएस्टर): उच्च आवृत्ति अनुप्रयोगों के लिए।
- सैफायर ट्रिमर: अत्यधिक उच्च आवृत्ति (RF/Microwave) अनुप्रयोगों के लिए।
- वैक्यूम ट्रिमर: उच्च वोल्टेज RF अनुप्रयोगों के लिए।
विशेषताएँ और प्रकार
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विशेषता (Characteristic)
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विवरण (Description)
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धारिता रेंज
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बहुत कम (आमतौर पर 2/{pF} से 100/{pF} तक)।
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स्थायित्व
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समायोजन के बाद धारिता मान स्थिर रहता है।
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गैर-ध्रुवीय
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ये गैर-ध्रुवीय होते हैं और इन्हें AC या DC सर्किट में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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Q-फैक्टर
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अच्छा Q-फैक्टर, खासकर RF अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण।
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ट्रिमर संधारित्र भौतिक संरचना के आधार पर खुले (Open) या सीलबंद (Sealed) प्रकार के हो सकते हैं, जहाँ सीलबंद प्रकार को नमी और धूल से बचाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
उपयोग (Applications)
ट्रिमर संधारित्रों का उपयोग उन संवेदनशील परिपथों में किया जाता है जहाँ अंतिम उत्पादन चरण (Final Production Stage) के दौरान सटीक ट्यूनिंग आवश्यक होती है:
- RF ट्यूनिंग सर्किट: रेडियो ट्रांसमीटर और रिसीवर में उच्च आवृत्ति वाले ऑसिलेटर्स और फिल्टर को सटीक रूप से ट्यून करने के लिए।
- घड़ी परिपथ (Clock Circuits): क्वार्ट्ज क्रिस्टल ऑसिलेटर्स की आउटपुट आवृत्ति को बिल्कुल सटीक मान पर सेट करने के लिए।
- फ़िल्टर और रेज़ोनेंस सर्किट: कम्युनिकेशन उपकरणों में बैंडपास या बैंड-स्टॉप फिल्टर की कटऑफ आवृत्ति को ठीक करने के लिए।
- ट्यूनिंग रेंज सेट करना: ट्यूनिंग कैपेसिटर (जो उपयोगकर्ता द्वारा घुमाया जाता है) के साथ समानांतर में जोड़कर, यह सुनिश्चित किया जाता है कि ट्यूनिंग रेंज की निचली या ऊपरी सीमा सटीक हो।
संक्षेप में,
ट्रिमर संधारित्र वह "ठीक समायोजन" उपकरण है जो एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को उसके इष्टतम प्रदर्शन (Optimal Performance) पर लाता है।
संधारित्र के अनुप्रयोग
नमस्ते! संधारित्र (Capacitor) आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का एक मूलभूत घटक है। इसके अनुप्रयोग बहुत व्यापक और विविध हैं।
संधारित्र के मुख्य अनुप्रयोगों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
1. ऊर्जा भंडारण और बिजली वितरण (Energy Storage and Power Delivery)
यह संधारित्र का सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण कार्य है।
- पावर सप्लाई फिल्टरिंग (Filtering): AC (प्रत्यावर्ती धारा) को DC (दिष्ट धारा) में बदलने के बाद, आउटपुट वोल्टेज में लहरें (ripples) होती हैं। संधारित्र इन लहरों को अवशोषित करके वोल्टेज को सुचारू (smooth) करता है, जिससे स्थिर DC आउटपुट मिलता है।
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ऊर्जा त्वरित निर्गमन (Instantaneous Power Release): संधारित्र उच्च गति से ऊर्जा संग्रहित कर सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे तेज़ी से छोड़ सकता है।
- कैमरा फ्लैश: फ्लैश बल्ब को जलाए रखने के लिए संधारित्र एक झटके में बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्रदान करता है।
- डीफिब्रिलेटर (Defibrillator): हृदय को सदमा देने के लिए एक बड़ी ऊर्जा को तुरंत संग्रहित और मुक्त करता है।
- डिकूप्लिंग और बाईपास: डिजिटल सर्किट में, संधारित्र IC (इंटीग्रेटेड सर्किट) के पास रखे जाते हैं ताकि जब IC अचानक बिजली खींचे तो वे स्थानीय रूप से ऊर्जा प्रदान कर सकें और पावर लाइनों पर उत्पन्न होने वाले उच्च आवृत्ति शोर (noise) को ग्राउंड कर सकें।
- सुपर कैपेसिटर: ये इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड बसों और औद्योगिक उपकरणों में पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking) के दौरान ऊर्जा को तेज़ी से स्टोर करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
2. सिग्नल प्रोसेसिंग और ट्यूनिंग (Signal Processing and Tuning)
संधारित्रों का उपयोग उनके AC और DC के प्रति अलग-अलग व्यवहार के कारण सिग्नल को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है:
- DC ब्लॉकिंग / AC कपलिंग: संधारित्र DC धारा को अपने से गुजरने से रोकता है जबकि AC सिग्नल को गुजरने देता है। इसका उपयोग परिपथ के विभिन्न चरणों को एक-दूसरे से DC रूप से अलग करने (Coupling) के लिए किया जाता है।
- फ़िल्टर सर्किट (Filter Circuits): संधारित्र और प्रेरक (inductor) या प्रतिरोधक (resistor) का उपयोग करके विशिष्ट आवृत्तियों को पास (Pass) या ब्लॉक (Block) करने के लिए फ़िल्टर बनाए जाते हैं (जैसे लो-पास फिल्टर, हाई-पास फिल्टर)।
- ट्यूनिंग सर्किट: रेडियो रिसीवर में, परिवर्तनीय संधारित्र का उपयोग प्रेरक (inductor) के साथ मिलकर रेज़ोनेंट आवृत्ति (Resonant Frequency) को बदलने के लिए किया जाता है, जिससे आप विभिन्न रेडियो स्टेशनों को ट्यून कर सकते हैं।
- टाइमिंग सर्किट (Timing Circuits): प्रतिरोधक के साथ मिलकर, संधारित्र RC टाइम कॉन्स्टेंट (\tau = RC) बनाता है, जिसका उपयोग टाइमर, ऑसिलेटर (Oscillator) और क्लॉक सिग्नल उत्पन्न करने वाले सर्किट में किया जाता है।
3. इलेक्ट्रिकल और मोटर अनुप्रयोग (Electrical and Motor Applications)
बड़े पावर सिस्टम में भी संधारित्रों का महत्वपूर्ण योगदान होता है:
- मोटर स्टार्टर (Motor Starter): एकल-फेज वाली AC मोटरों (जैसे सीलिंग फैन) में, संधारित्र एक अतिरिक्त फेज शिफ्ट (Phase Shift) उत्पन्न करता है, जिससे मोटर को शुरुआती टॉर्क मिलता है और वह घूमने लगती है।
- पावर फैक्टर सुधार (Power Factor Correction): औद्योगिक AC पावर सिस्टम में, संधारित्रों का उपयोग सर्किट के शक्ति गुणांक को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा का अधिक कुशल उपयोग होता है और बिजली के बिल में कमी आती है।
- सर्ज सप्रेशन (Surge Suppression): संधारित्र (विशेष रूप से मेटल ऑक्साइड वैरिस्टर - MOV के साथ मिलकर) वोल्टेज के अचानक उछाल (Surge) को अवशोषित करके संवेदनशील उपकरणों को क्षति से बचाते हैं।
संक्षेप में,
संधारित्र ऊर्जा को स्टोर और नियंत्रित करके, शोर को हटाकर, सिग्नल को अलग करके और मोटरों को शुरू करके इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है।
उदाहरण संख्यात्मक
आप संधारित्र में संग्रहित ऊर्जा (Stored Energy) पर आधारित एक संख्यात्मक उदाहरण हल करना चाहते हैं। यह एक बहुत ही अच्छा अभ्यास है!
आइए एक सामान्य उदाहरण लेते हैं:
संख्यात्मक उदाहरण (Numerical Example)
एक संधारित्र है जिसकी धारिता C = 50 mu {F} (माइक्रोफ़ारड) है। इस संधारित्र को V = 12 {V} (वोल्ट) की बैटरी से जोड़ा जाता है।
प्रश्न:
- संधारित्र पर कितना आवेश (Q) संग्रहित होगा?
- संधारित्र में कितनी विद्युत स्थितिज ऊर्जा (U) संग्रहित होगी?
हल (Solution)
1. आवेश (Q) की गणना
हम धारिता के मूल सूत्र का उपयोग करेंगे:
Q = C cdot V
चरण 1: मात्रकों को SI इकाई में बदलें।
धारिता (C) = 50 mu {F}
चूंकि 1mu {F} = 10^{-6} {F} (फैराड),
C = 50 × 10^{-6} {F}
विभवांतर (V) = 12 {V}
चरण 2: मानों को सूत्र में रखें।
Q = (50 × 10^{-6}/{F}) × (12 {V})
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