अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )
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विद्युत अभियांत्रिकी में आपूर्ति प्रणाली के प्रकार (Types of Supply Systems in Electrical Engineering)
विद्युत आपूर्ति प्रणालियों को विभिन्न मापदंडों के आधार पर कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है।
विद्युत आपूर्ति संहिता (Electrical Supply Code) के अनुसार, वोल्टेज स्तर के आधार पर वर्गीकरण:
ये वर्गीकरण अक्सर विशिष्ट उपकरणों के लिए बिजली आपूर्ति (Power Supply Units) के संदर्भ में होता है:
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इनपुट की प्रकृति |
आउटपुट की प्रकृति |
उदाहरण |
|---|---|---|
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AC |
DC |
दिष्टकारी (Rectifier), AC-DC परिवर्तक |
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AC |
AC |
साइक्लोकन्वर्टर (Cycloconverter), आवृत्ति परिवर्तक |
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DC |
AC |
इन्वर्टर (Inverter), DC-AC परिवर्तक |
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DC |
DC |
DC-DC परिवर्तक |
यहाँ सबसे सामान्य और व्यापक वर्गीकरण दिए गए हैं:
व्यवसाय और प्रबंधन के संदर्भ में, एक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अक्सर उसकी संरचना, कार्यक्षेत्र (Scope), या प्रबंधन के दृष्टिकोण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
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वर्गीकरण (Classification) |
विवरण (Description) |
|---|---|
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पारंपरिक/रेखीय श्रृंखला (Traditional/Linear Chain) |
यह एक सीधा प्रवाह है: आपूर्तिकर्ता निर्माता वितरक खुदरा विक्रेता ग्राहक। इसमें प्रत्येक चरण स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। |
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एकीकृत श्रृंखला (Integrated Chain) |
इसमें सभी प्रतिभागी (आपूर्तिकर्ता से ग्राहक तक) सूचना और प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए एक साथ काम करते हैं। आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (SCM) इसी पर केंद्रित है। |
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जटिल नेटवर्क (Complex Network) |
यह एक सरल श्रृंखला के बजाय आपूर्तिकर्ताओं, निर्माताओं और ग्राहकों का एक जटिल जाल होता है, जहाँ अनेक नोड्स (nodes) होते हैं। |
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वर्गीकरण (Classification) |
विवरण (Description) |
|---|---|
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घरेलू/राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Domestic/National SC) |
यह केवल एक ही देश की सीमाओं के भीतर संचालित होती है। |
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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global SC) |
यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित होती है, जिसमें विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ता, उत्पादन स्थल और बाजार शामिल होते हैं। |
यदि आपका आशय ऊर्जा (Energy), जल (Water), या गैस (Gas) जैसी भौतिक चीज़ों की आपूर्ति से है, तो वर्गीकरण स्रोत, वितरण माध्यम और कार्यप्रणाली पर आधारित होता है।
सैन्य और आपदा राहत में, आपूर्ति को अक्सर उसकी प्रकृति और आवश्यकता के समय के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
धारा (Current) की प्रकृति के अनुसार विद्युत आपूर्ति प्रणाली को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
प्रत्यावर्ती धारा (AC) वह विद्युत धारा है जिसकी दिशा और परिमाण (Magnitude) समय-समय पर एक चक्र में बदलते रहते हैं। यह सबसे सामान्य प्रकार की विद्युत आपूर्ति प्रणाली है जिसका उपयोग घरों और उद्योगों में होता है।
AC प्रणाली को फेज़ (Phase) की संख्या के आधार पर आगे वर्गीकृत किया जाता है:
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वर्गीकरण (Classification) |
विवरण (Description) |
उपयोग (Application) |
|---|---|---|
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एकल फेज़ (Single Phase - 1$\phi$) |
इसमें एक फेज़ तार (Phase Wire) और एक उदासीन तार (Neutral Wire) होता है। |
घरेलू उपकरण, प्रकाश व्यवस्था (Lighting), छोटे लोड। |
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तीन फेज़ (Three Phase - 3$\phi$) |
इसमें तीन फेज़ तार होते हैं (L1, L2, L3) और अक्सर एक उदासीन तार भी होता है। |
औद्योगिक मोटर, भारी मशीनरी, विद्युत उत्पादन और पारेषण। |
दिष्ट धारा (DC) वह विद्युत धारा है जिसकी दिशा और परिमाण समय के साथ नहीं बदलते हैं; यह एक ही दिशा में बहती है।
DC प्रणाली को वोल्टेज स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
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वर्गीकरण (Classification) |
विवरण (Description) |
उपयोग (Application) |
|---|---|---|
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दो-तार प्रणाली (Two-Wire System) |
इसमें एक धनात्मक (+) और एक ऋणात्मक (-) तार होता है। |
बैटरी, छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट। |
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तीन-तार प्रणाली (Three-Wire System) |
इसमें दो बाहरी तार (+/-) और एक केंद्रीय तार (Neutral) होता है। |
कुछ विशेष औद्योगिक और पुराने वितरण प्रणालियाँ। |
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विशेषता |
प्रत्यावर्ती धारा (AC) |
दिष्ट धारा (DC) |
|---|---|---|
|
दिशा |
दिशा बदलती रहती है (आवधिक रूप से)। |
दिशा स्थिर रहती है। |
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उत्पादन |
प्रत्यावर्तक (Alternator) द्वारा। |
दिष्ट धारा जनित्र (Dynamo), बैटरी, सौर सेल द्वारा। |
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पारेषण |
लंबी दूरी के लिए आदर्श (कम हानि)। |
लंबी दूरी के लिए अधिक हानिदायक (अपवाद: HVDC)। |
यह सबसे सामान्य प्रणाली है जिसका उपयोग छोटे लोड और घरेलू ज़रूरतों के लिए किया जाता है।
यह प्रणाली उच्च शक्ति (High Power) वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाती है। विद्युत उत्पादन और पारेषण (Generation and Transmission) हमेशा तीन फेज़ में ही किया जाता है।
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विशेषता |
एकल फेज़ (1 phi ) |
तीन फेज़ (3 phi ) |
|---|---|---|
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तारों की संख्या |
2 (फेज़ और उदासीन) |
3 या 4 (फेज़ और उदासीन) |
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वोल्टेज |
230 {V} (लाइन से उदासीन) |
400 {V} (लाइन से लाइन); 230 {V} (लाइन से उदासीन) |
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शक्ति आपूर्ति |
निम्न से मध्यम शक्ति |
उच्च शक्ति |
|
अनुप्रयोग |
घर, प्रकाश व्यवस्था |
उद्योग, भारी मशीनरी, पारेषण |
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क्षमता |
सीमित |
बहुत अधिक |
संबंध की प्रकृति के अनुसार आपूर्ति प्रणाली (या आपूर्ति श्रृंखला) को मोटे तौर पर निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
यह संबंध आपूर्ति श्रृंखला में सबसे बुनियादी और अल्पकालिक प्रकार का होता है।
इस प्रकार का संबंध दीर्घकालिक दक्षता और आपसी लाभ पर केंद्रित होता है।
यह सहयोग का उच्चतम स्तर है, जो आपूर्ति श्रृंखला के भीतर पूर्ण एकीकरण (Integration) की ओर जाता है।
यह वर्गीकरण दर्शाता है कि किसी भी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता उसके भागीदारों के बीच संबंधों की गहराई और गुणवत्ता पर निर्भर करती है।
विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) के संदर्भ में है, और विशेष रूप से विद्युत संचरण (Transmission) और वितरण (Distribution) के वर्गीकरण से संबंधित है।
संचरण वोल्टेज स्तर (Transmission Voltage Level) के अनुसार, विद्युत आपूर्ति प्रणाली को चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। वोल्टेज जितना अधिक होता है, वह उतनी ही लंबी दूरी के संचरण के लिए उपयोग होता है, जबकि कम वोल्टेज वितरण के लिए उपयोग होता है।
यह सबसे उच्च वोल्टेज स्तर है, जिसका उपयोग बहुत लंबी दूरी तक भारी मात्रा में विद्युत शक्ति को पारेषित (Transmit) करने के लिए किया जाता है।
यह EHV से थोड़ा कम होता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से शहरों के बाहरी क्षेत्रों या बड़े औद्योगिक क्षेत्रों तक शक्ति पहुँचाने के लिए किया जाता है।
इस स्तर पर वोल्टेज को काफी कम कर दिया जाता है, और यह प्राथमिक वितरण प्रणाली (Primary Distribution System) का हिस्सा बनता है। यह सबस्टेशन से औद्योगिक या बड़े वाणिज्यिक उपभोक्ताओं तक शक्ति पहुँचाता है।
यह अंतिम चरण है जहाँ शक्ति को उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए सबसे निचले स्तर तक कम किया जाता है।
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क्रम |
स्तर (Level) |
वोल्टेज रेंज (भारत में मानक) |
मुख्य कार्य (Primary Function) |
|---|---|---|---|
|
1. |
अति उच्च संचरण (EHV) |
220 {kV} से ऊपर |
लंबी दूरी का थोक संचरण (Bulk Power Transmission) |
|
2. |
उच्च संचरण (HV) |
66 {kV}, 132 {kV} |
उप-संचरण और बड़े सबस्टेशनों को जोड़ना |
|
3. |
मध्यम वितरण (MV) |
11 {kV}, 33 {kV} |
प्राथमिक वितरण, औद्योगिक ग्राहकों को आपूर्ति |
|
4. |
निम्न वितरण (LV) |
230 {V}, 400 {V} |
माध्यमिक वितरण, घरेलू और वाणिज्यिक ग्राहकों को आपूर्ति |
यह वर्गीकरण दर्शाता है कि कैसे विद्युत शक्ति को कुशलतापूर्वक लंबी दूरी तक पहुँचाने और फिर सुरक्षित रूप से उपभोक्ताओं तक वितरण के लिए चरणों में वोल्टेज को समायोजित किया जाता है।
आपूर्ति प्रणाली (Supply System), जिसे अक्सर आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के रूप में समझा जाता है, वह नेटवर्क है जो किसी उत्पाद या सेवा को उसके मूल स्रोत से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने में शामिल होता है।
इसके मुख्य घटक (Components) किसी भी व्यवसाय के लिए आवश्यक नींव होते हैं, और उन्हें पाँच मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
यह प्रणाली का प्रारंभिक बिंदु है। आपूर्तिकर्ता वे संस्थाएँ या व्यक्ति हैं जो कच्चे माल, घटक, या तैयार उत्पाद प्रदान करते हैं जिनकी आवश्यकता कंपनी को अपने उत्पाद बनाने या अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए होती है।
यह वह जगह है जहाँ कच्चे माल को संसाधित (Processed) किया जाता है और अंतिम उत्पाद में परिवर्तित किया जाता है।
यह वह घटक है जो आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों के बीच आपूर्ति और मांग के असंतुलन को प्रबंधित करता है। इसमें तैयार माल और कच्चे माल दोनों का भंडारण शामिल है।
यह वह प्रणाली है जो उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से ले जाती है—आपूर्तिकर्ताओं से निर्माता तक, और फिर निर्माता से अंतिम ग्राहक तक।
यह आपूर्ति श्रृंखला का अंतिम बिंदु है। खुदरा विक्रेता (जैसे स्टोर) वे हैं जो ग्राहकों को उत्पाद बेचते हैं, और ग्राहक अंतिम उपभोक्ता होते हैं।
उपरोक्त भौतिक घटकों के अलावा, आपूर्ति प्रणाली को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए कुछ अमूर्त (Intangible) घटक आवश्यक हैं:
आपूर्ति प्रणाली का लेआउट (Layout of a Supply System) आमतौर पर एक भौतिक वितरण प्रणाली या विद्युत आपूर्ति नेटवर्क के डिज़ाइन को संदर्भित करता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस संदर्भ में 'आपूर्ति प्रणाली' की बात कर रहे हैं।
यहाँ हम दोनों सबसे सामान्य संदर्भों—विद्युत वितरण प्रणाली और वेयरहाउस/वितरण केंद्र लेआउट—पर विचार करेंगे।
विद्युत वितरण प्रणाली के लेआउट को आमतौर पर उसकी विश्वसनीयता और लागत के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मुख्य लेआउट इस प्रकार हैं:
संरचना: यह सबसे सरल और सस्ता लेआउट है। इसमें एक एकल फीडर (Feeder) एक सबस्टेशन से निकलता है और अलग-अलग वितरण ट्रांसफॉर्मर को सीधे शक्ति की आपूर्ति करता है।
https://dkrajwar.blogspot.com/2025/12/types-of-supply-systems-in-electrical.htmlविशेषता: शक्ति का प्रवाह केवल एक दिशा में होता है।
लाभ: निर्माण में सस्ता और सरल।
हानि: यदि फीडर के किसी भी बिंदु पर कोई खराबी आती है, तो पूरी लाइन में आपूर्ति बाधित हो जाती है (कम विश्वसनीयता)।
यह उत्पाद को कुशलतापूर्वक प्राप्त करने, संग्रहीत करने और भेजने के लिए वेयरहाउस के भीतर स्थान और उपकरणों की व्यवस्था को संदर्भित करता है। एक प्रभावी लेआउट निम्नलिखित पर निर्भर करता है:
वितरण प्रणालियों (Distribution Systems) के प्रकार को कई अलग-अलग आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस क्षेत्र की बात कर रहे हैं। यहाँ दो मुख्य संदर्भों में वर्गीकरण दिए गए हैं:
विद्युत वितरण प्रणाली में, वर्गीकरण मुख्य रूप से धारा की प्रकृति (AC/DC), संरचना/लेआउट, और उपयोग किए गए कंडक्टर की विधि (Installation Method) पर आधारित होता है।
यह वर्गीकरण विश्वसनीयता और लागत पर आधारित है, जैसा कि पिछले उत्तर में बताया गया था:
व्यवसाय और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में, 'वितरण प्रणाली' यह बताती है कि उत्पाद को विनिर्माण से ग्राहक तक कैसे पहुँचाया जाता है।
यह वर्गीकरण इस बात पर आधारित है कि निर्माता अपने उत्पादों को बाजार में कैसे वितरित करता है:
यह वर्गीकरण इस बात पर आधारित है कि निर्माता और अंतिम उपभोक्ता के बीच कितने मध्यस्थ (Intermediaries) शामिल हैं:
आधुनिक आपूर्ति प्रणालियों को उनके तकनीकी एकीकरण, लचीलेपन और ग्राहक-केंद्रितता के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
यहाँ कुछ सबसे उन्नत (आधुनिक) आपूर्ति प्रणालियाँ और उनके पीछे की अवधारणाएँ दी गई हैं:
यह पारंपरिक आपूर्ति श्रृंखला का डिजिटल रूपांतरण है, जो भौतिक संचालन को डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ता है।
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विशेषता (Feature) |
विवरण (Description) |
|---|---|
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पारदर्शिता (Transparency) |
एंड-टू-एंड (End-to-End) दृश्यता प्रदान करती है, जिससे उत्पादों और सूचनाओं को ट्रैक करना आसान हो जाता है। |
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विश्लेषिकी (Analytics) |
बड़े डेटा और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करके मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाता है और निर्णय लिए जाते हैं। |
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स्वचालन (Automation) |
वेयरहाउस संचालन और लॉजिस्टिक्स प्रक्रियाओं में रोबोटिक्स, ड्रोन और स्वचालित निर्देशित वाहनों (AGVs) का उपयोग। |
यह प्रणाली बाजार की अप्रत्याशित मांग और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं पर तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
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विशेषता (Feature) |
विवरण (Description) |
|---|---|
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मांग-संचालित (Demand-Driven) |
उत्पादन और खरीद को पूर्वानुमान के बजाय वास्तविक ग्राहक मांग संकेतों से प्रेरित किया जाता है (Push के बजाय Pull)। |
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वर्चुअल इन्वेंटरी (Virtual Inventory) |
वास्तविक स्टॉक को कई स्थानों पर रखते हुए भी ग्राहकों को एक एकीकृत सूची दृश्य प्रदान करना। |
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क्षमता का लचीलापन |
उत्पादन या रसद क्षमता को मांग के अनुसार तेजी से बढ़ाने या घटाने की क्षमता। |
यह एक ऐसा मॉडल है जो पूरी आपूर्ति श्रृंखला को ग्राहक की मांग के साथ संरेखित करता है, बिचौलियों को हटाता है और प्रत्येक भागीदार को ग्राहक की वास्तविक आवश्यकता पर प्रतिक्रिया करने के लिए सशक्त बनाता है।
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विशेषता (Feature) |
विवरण (Description) |
|---|---|
|
अंतःक्रियाशीलता (Interoperability) |
सभी भागीदार (आपूर्तिकर्ता, निर्माता, वितरक) साझा डेटा प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम करते हैं। |
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उत्पादन की गति |
'सही समय पर' (Just-in-Time) सिद्धांतों को लागू करके अनावश्यक स्टॉक और देरी को कम करना। |
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जोखिम प्रबंधन |
मांग और आपूर्ति दोनों तरफ के जोखिमों को सामूहिक रूप से ट्रैक और प्रबंधित किया जाता है। |
यह प्रणाली व्यवधानों (Disruptions)—जैसे महामारी, प्राकृतिक आपदा या भू-राजनीतिक अस्थिरता—का सामना करने और उनसे जल्दी उबरने की क्षमता पर केंद्रित है।
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विशेषता (Feature) |
विवरण (Description) |
|---|---|
|
बहु-सोर्सिंग (Multi-Sourcing) |
किसी एक स्थान या आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न भौगोलिक स्थानों से स्रोतों का उपयोग करना। |
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बफ़र स्टॉक (Buffer Stock) |
महत्वपूर्ण वस्तुओं का एक सुरक्षा स्टॉक (Safety Stock) रणनीतिक रूप से बनाए रखना। |
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विकेन्द्रीकृत विनिर्माण (Decentralized Manufacturing) |
क्षेत्रीय या स्थानीय उत्पादन इकाइयों का एक नेटवर्क बनाना ताकि एक क्षेत्र में विफलता का असर दूसरों पर न पड़े। |
आधुनिक आपूर्ति प्रणाली इन प्रौद्योगिकियों के कारण ही संभव हो पाई हैं:
संक्षेप में,
उन्नत आपूर्ति प्रणालियाँ दक्षता, पारदर्शिता, लचीलापन और ग्राहक संतुष्टि को अधिकतम करने के लिए डिजिटल टूल, सहयोग और डेटा का लाभ उठाती हैं।
यहाँ भारतीय मानक (Indian Standard) के अनुसार मुख्य वोल्टेज स्तरों का वर्गीकरण और उनके उपयोग दिए गए हैं:
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स्तर (Level) |
वोल्टेज रेंज |
विशिष्ट वोल्टेज उदाहरण |
उपयोग (Application) |
|---|---|---|---|
|
उत्पादन (Generation) |
मध्यम |
11 {kV} से 25 {kV} |
बिजली संयंत्रों में उत्पन्न होने वाला प्रारंभिक वोल्टेज। |
|
अति उच्च संचरण (EHV Transmission) |
220 {kV} से अधिक |
400 {kV}; 765 {kV}; (कुछ स्थानों पर 1200 {kV}) |
लंबी दूरी तक और भारी मात्रा में शक्ति के थोक संचरण के लिए (पावर ग्रिड की रीढ़)। |
|
उच्च संचरण (HV Transmission) |
66 {kV} से 132 {kV} |
132 {kV}; 220 {kV} |
विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के मुख्य सबस्टेशनों तक शक्ति पहुँचाना। |
|
उप-संचरण (Sub-Transmission) |
33 {kV} से 66 {kV} |
33 {kV}; 66 {kV} |
शहरी क्षेत्रों के बाहरी किनारों पर मुख्य सबस्टेशनों से बड़े वितरण सबस्टेशनों तक। |
|
प्राथमिक वितरण (Primary Distribution) |
मध्यम वोल्टेज |
11 {kV}; 33 {kV} |
वितरण सबस्टेशनों से स्थानीय वितरण ट्रांसफार्मर तक। बड़े औद्योगिक उपभोक्ता सीधे इस वोल्टेज पर बिजली लेते हैं। |
|
माध्यमिक/निम्न वितरण (Secondary/Low Distribution) |
निम्न वोल्टेज |
400 {V} (लाइन से लाइन) |
गली के ट्रांसफार्मर से घरों और छोटे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं तक। |
|
घरेलू आपूर्ति (Domestic Supply) |
निम्न वोल्टेज |
230 {V} (लाइन से न्यूट्रल) |
भारत में घरों और छोटे कार्यालयों में उपयोग होने वाली मानक एकल-फेज़ वोल्टेज। |
उच्च वोल्टेज का उपयोग संचरण के लिए इसलिए किया जाता है क्योंकि यह शक्ति हानि (Power Loss) को कम करता है।
चूँकि {Power} (P) = V × I होता है, यदि आप वोल्टेज (V) बढ़ाते हैं, तो समान शक्ति संचारित करने के लिए धारा (I) कम हो जाती है।
चूँकि शक्ति हानि (Power Loss) P_{{loss}} = I^2 R के समानुपाती होती है, धारा (I) कम होने से हानि नाटकीय रूप से कम हो जाती है।
संक्षेप में,
शक्ति को पहले बढ़ाकर लंबी दूरी तक भेजा जाता है (संचरण), और फिर इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर सुरक्षित स्तर पर लाया जाता है (वितरण) ताकि उपभोक्ता इसका उपयोग कर सकें।
विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) एक जटिल और एकीकृत नेटवर्क है जो विद्युत ऊर्जा को उसके उत्पादन स्थल से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य करता है।
यहाँ इस पूरी प्रणाली का एक संक्षिप्त और व्यापक सारांश दिया गया है, जिसे मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:
यह प्रणाली का शुरुआती चरण है, जहाँ विद्युत ऊर्जा का निर्माण होता है।
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
प्रक्रिया |
यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को प्रत्यावर्तक (Alternator) की सहायता से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना। |
|
स्रोत |
कोयला (थर्मल), पानी (हाइड्रो), परमाणु ऊर्जा, गैस, या नवीकरणीय स्रोत जैसे सौर और पवन ऊर्जा। |
|
वोल्टेज स्तर |
मध्यम वोल्टेज पर उत्पादन होता है (जैसे 11 {kV} से 25 {kV})। |
यह उत्पादन केंद्र से दूर स्थित खपत केंद्रों तक बिजली पहुँचाने की प्रक्रिया है।
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
कार्य |
उत्पादन के बाद, वोल्टेज को स्टेप-अप ट्रांसफार्मर का उपयोग करके अति उच्च वोल्टेज (EHV) स्तर तक बढ़ाया जाता है (जैसे 400 {kV}, 765 {kV})। |
|
उद्देश्य |
लंबी दूरी के संचरण के दौरान शक्ति हानि (I^2R loss) को कम करना और दक्षता बढ़ाना। |
|
नेटवर्क |
हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें और ग्रिड (Grid) सिस्टम। |
यह अंतिम चरण है जहाँ उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए उच्च वोल्टेज को सुरक्षित निम्न वोल्टेज स्तर तक कम किया जाता है।
|
विशेषता |
विवरण |
|---|---|
|
प्राथमिक वितरण |
स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर का उपयोग करके वोल्टेज को मध्यम स्तर पर लाया जाता है (जैसे 33 {kV}, 11 {kV})। यह औद्योगिक ग्राहकों तक पहुँचता है। |
|
माध्यमिक वितरण |
स्थानीय वितरण ट्रांसफार्मर का उपयोग करके वोल्टेज को सबसे निचले स्तर तक घटाया जाता है: 400 V (तीन-फेज़ आपूर्ति के लिए) और 230 V (एकल-फेज़ घरेलू आपूर्ति के लिए)। |
|
नेटवर्क |
निम्न वोल्टेज वाली ओवरहेड या भूमिगत लाइनें जो घरों और व्यवसायों तक पहुँचती हैं। |
विद्युत आपूर्ति प्रणाली को विभिन्न मानकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
|
वर्गीकरण आधार |
मुख्य प्रकार |
|---|---|
|
धारा की प्रकृति |
प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC)। |
|
चरणों की संख्या |
एकल फेज़ (1 phi ) और तीन फेज़ (3 phi )। |
|
लेआउट/संरचना |
रेडियल (Radial), रिंग मेन (Ring Main), और इंटरकनेक्टेड (Interconnected)। |
|
वोल्टेज स्तर |
EHV/HV संचरण (जैसे 400 {kV}) और MV/LV वितरण (जैसे 11 {kV}, 230 {V})। |
यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि बिजली का उत्पादन एक ही स्थान पर हो, कुशलतापूर्वक लंबी दूरी तक यात्रा करे, और फिर सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से हमारे उपकरणों और घरों तक पहुँचे।
विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) का निष्कर्ष यह है कि यह किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था और समाज की जीवनरेखा है। यह एक जटिल और बहु-स्तरीय नेटवर्क है जिसे दक्षता, विश्वसनीयता और सुरक्षा तीन मुख्य उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है।
पूरी प्रणाली तीन प्रमुख और अंतर्संबंधित चरणों में काम करती है:
आधुनिक विद्युत प्रणालियाँ निम्नलिखित चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिसके लिए वे निरंतर विकसित हो रही हैं:
संक्षेप में,
विद्युत आपूर्ति प्रणाली शक्ति उत्पादन, उच्च वोल्टेज संचरण, और चरणबद्ध निम्न वोल्टेज वितरण का एक समन्वयित प्रयास है जो सुनिश्चित करता है कि आधुनिक समाज की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएँ सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती तरीके से पूरी हों।
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