अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

विद्युत अभियांत्रिकी में आपूर्ति प्रणाली के प्रकार (Types of Supply Systems in Electrical Engineering)

विद्युत अभियांत्रिकी में आपूर्ति प्रणाली के प्रकार?

विद्युत अभियांत्रिकी में आपूर्ति प्रणाली के प्रकार (Types of Supply Systems in Electrical Engineering)

​विद्युत आपूर्ति प्रणालियों को विभिन्न मापदंडों के आधार पर कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है।

​1. धारा (Current) के प्रकार के आधार पर:

  • AC (प्रत्यावर्ती धारा) प्रणाली (Alternating Current System):
    • ​इस प्रणाली में धारा की दिशा और मान समय के साथ बदलते रहते हैं।
    • तीन-फेज, तीन-तार प्रणाली (3-phase, 3-wire system): मुख्य रूप से विद्युत शक्ति के उत्पादन और पारेषण (Generation and Transmission) के लिए उपयोग की जाती है क्योंकि यह अधिक किफायती होती है।
    • तीन-फेज, चार-तार प्रणाली (3-phase, 4-wire system): मुख्य रूप से वितरण (Distribution) के लिए उपयोग की जाती है, जो एकल-फेज और तीन-फेज दोनों तरह के भार (load) को सप्लाई करती है।
    • एकल-फेज, दो-तार प्रणाली (Single-phase, 2-wire system) और एकल-फेज, तीन-तार प्रणाली (Single-phase, 3-wire system): छोटे उपभोक्ताओं (जैसे घरों) को बिजली वितरण के लिए।
  • DC (दिष्ट धारा) प्रणाली (Direct Current System):
    • ​इस प्रणाली में धारा एक ही दिशा में बहती है।
    • DC दो-तार प्रणाली (DC two-wire system) और DC तीन-तार प्रणाली (DC three-wire system)
    • ​आजकल AC प्रणाली को उत्पादन और पारेषण के लिए सर्वव्यापी रूप से अपनाया गया है।

​2. स्थापना के तरीके के आधार पर:

  • ओवरहेड प्रणाली (Overhead System): इसमें खंभों के सहारे हवा में चालक तारों का उपयोग किया जाता है। यह भूमिगत प्रणाली की तुलना में सस्ती होती है।
  • भूमिगत प्रणाली (Underground System): इसमें भूमिगत केबलों का उपयोग किया जाता है। यह अधिक सुरक्षित और सौंदर्यपूर्ण होती है लेकिन अधिक महंगी होती है।

​3. वोल्टेज स्तर के आधार पर:

​विद्युत आपूर्ति संहिता (Electrical Supply Code) के अनुसार, वोल्टेज स्तर के आधार पर वर्गीकरण:

  • निम्न दाब (Low Voltage - LV): सामान्यतः 50V से 1000V तक।
  • उच्च दाब (High Voltage - HV): सामान्यतः 1kV से 35kV तक।
  • अतिरिक्त उच्च दाब (Extra High Voltage - EHV): सामान्यतः 35kV से ऊपर।

​4. रूपांतरण के प्रकार के आधार पर (Power Conversion):

​ये वर्गीकरण अक्सर विशिष्ट उपकरणों के लिए बिजली आपूर्ति (Power Supply Units) के संदर्भ में होता है:


इनपुट की प्रकृति

           आउटपुट की प्रकृति

उदाहरण

AC

           DC

         दिष्टकारी (Rectifier), AC-DC परिवर्तक

AC

           AC

         साइक्लोकन्वर्टर (Cycloconverter), आवृत्ति परिवर्तक

DC

           AC

         इन्वर्टर (Inverter), DC-AC परिवर्तक

DC

           DC

         DC-DC परिवर्तक


  • स्विच मोड पावर सप्लाई (SMPS): यह एक उच्च दक्षता वाली बिजली आपूर्ति है जो बिजली को कुशलतापूर्वक परिवर्तित करने के लिए स्विचिंग रेगुलेटर का उपयोग करती है। यह स्मार्टफोन और कंप्यूटर में बहुत आम है।
  • अनवरत शक्ति आपूर्ति (UPS - Uninterruptible Power Supply): यह बिजली कटौती के दौरान उपकरणों को सुरक्षित रूप से बंद करने की अनुमति देने के लिए बैटरी से बैकअप पावर प्रदान करती है।



आपूर्ति प्रणाली का वर्गीकरण?

 आपूर्ति प्रणाली (Supply System) के वर्गीकरण को समझना थोड़ा व्यापक है, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस संदर्भ में 'आपूर्ति प्रणाली' की बात कर रहे हैं—

जैसे, आर्थिक और व्यावसायिक संदर्भ में, या इंजीनियरिंग और भौतिकी के संदर्भ में (जैसे, बिजली या जल की आपूर्ति)।

​यहाँ सबसे सामान्य और व्यापक वर्गीकरण दिए गए हैं:

सामान्य व्यावसायिक आपूर्ति श्रृंखला का वर्गीकरण (Classification of General Business Supply Chain)

​व्यवसाय और प्रबंधन के संदर्भ में, एक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अक्सर उसकी संरचना, कार्यक्षेत्र (Scope), या प्रबंधन के दृष्टिकोण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

​1. संरचना के आधार पर (Based on Structure)

वर्गीकरण (Classification)

विवरण (Description)

पारंपरिक/रेखीय श्रृंखला (Traditional/Linear Chain)

यह एक सीधा प्रवाह है: आपूर्तिकर्ता  निर्माता  वितरक  खुदरा विक्रेता  ग्राहक। इसमें प्रत्येक चरण स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।

एकीकृत श्रृंखला (Integrated Chain)

इसमें सभी प्रतिभागी (आपूर्तिकर्ता से ग्राहक तक) सूचना और प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए एक साथ काम करते हैं। आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (SCM) इसी पर केंद्रित है।

जटिल नेटवर्क (Complex Network)

यह एक सरल श्रृंखला के बजाय आपूर्तिकर्ताओं, निर्माताओं और ग्राहकों का एक जटिल जाल होता है, जहाँ अनेक नोड्स (nodes) होते हैं।


2. फैलाव/कार्यक्षेत्र के आधार पर (Based on Reach/Scope)

वर्गीकरण (Classification)

विवरण (Description)

घरेलू/राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Domestic/National SC)

यह केवल एक ही देश की सीमाओं के भीतर संचालित होती है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global SC)

यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित होती है, जिसमें विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ता, उत्पादन स्थल और बाजार शामिल होते हैं।


इंजीनियरिंग और भौतिकी में आपूर्ति प्रणाली (Supply System in Engineering and Physics)

​यदि आपका आशय ऊर्जा (Energy), जल (Water), या गैस (Gas) जैसी भौतिक चीज़ों की आपूर्ति से है, तो वर्गीकरण स्रोत, वितरण माध्यम और कार्यप्रणाली पर आधारित होता है।

​1. विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System)

  • उत्पादन प्रणाली (Generation System): वह प्रणाली जो बिजली पैदा करती है (जैसे, थर्मल, हाइड्रो, सोलर प्लांट)।
  • पारेषण प्रणाली (Transmission System): उच्च वोल्टेज पर लंबी दूरी तक बिजली ले जाने वाली ग्रिड (Substations and power lines)।
  • वितरण प्रणाली (Distribution System): उपभोक्ताओं तक बिजली पहुँचाने के लिए पारेषण वोल्टेज को कम करने वाली प्रणाली (Local feeders and transformers)।

​2. जल आपूर्ति प्रणाली (Water Supply System)

  • स्रोत प्रणाली (Source System): जल के स्रोत को शामिल करती है (जैसे, नदी, झील, भूजल)।
  • उपचार प्रणाली (Treatment System): जल को पीने योग्य बनाने के लिए फ़िल्टरिंग और कीटाणुशोधन (Disinfection) की प्रक्रिया।
  • भंडारण और वितरण प्रणाली (Storage and Distribution System): पानी को ऊँची टंकियों में संग्रहित करना और पाइपलाइनों के माध्यम से घरों तक पहुँचाना।

सैन्य और लॉजिस्टिक्स में वर्गीकरण (Classification in Military and Logistics)

​सैन्य और आपदा राहत में, आपूर्ति को अक्सर उसकी प्रकृति और आवश्यकता के समय के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

  • कक्षा I: उपभोग्य वस्तुएँ (Class I: Consumables): भोजन और पानी।
  • कक्षा II: विविध उपकरण (Class II: Miscellaneous Equipment): कपड़े, टूल किट।
  • कक्षा III: पेट्रोलियम, तेल, और स्नेहक (POL: Petroleum, Oil, and Lubricants): ईंधन।




धारा की प्रकृति के अनुसार?

 विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) के संदर्भ में है, क्योंकि 'धारा की प्रकृति' (यानी, प्रत्यावर्ती धारा या दिष्ट धारा) का वर्गीकरण इसी क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण होता है।

​धारा (Current) की प्रकृति के अनुसार विद्युत आपूर्ति प्रणाली को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

​1. प्रत्यावर्ती धारा (AC - Alternating Current) आपूर्ति प्रणाली

​प्रत्यावर्ती धारा (AC) वह विद्युत धारा है जिसकी दिशा और परिमाण (Magnitude) समय-समय पर एक चक्र में बदलते रहते हैं। यह सबसे सामान्य प्रकार की विद्युत आपूर्ति प्रणाली है जिसका उपयोग घरों और उद्योगों में होता है।

AC आपूर्ति प्रणाली के लाभ:

  • दक्ष पारेषण (Efficient Transmission): इसे उच्च वोल्टेज (High Voltage) पर लंबी दूरी तक कम हानि के साथ पारेषित (Transmit) किया जा सकता है।
  • सरल रूपांतरण (Easy Transformation): ट्रांसफार्मर का उपयोग करके वोल्टेज स्तर को आसानी से बढ़ाया (Step-up) या घटाया (Step-down) जा सकता है।

AC वितरण प्रणाली का उप-वर्गीकरण (Distribution Sub-classification):

​AC प्रणाली को फेज़ (Phase) की संख्या के आधार पर आगे वर्गीकृत किया जाता है:

वर्गीकरण (Classification)

विवरण (Description)

उपयोग (Application)

एकल फेज़ (Single Phase - 1$\phi$)

इसमें एक फेज़ तार (Phase Wire) और एक उदासीन तार (Neutral Wire) होता है।

घरेलू उपकरण, प्रकाश व्यवस्था (Lighting), छोटे लोड।

तीन फेज़ (Three Phase - 3$\phi$)

इसमें तीन फेज़ तार होते हैं (L1, L2, L3) और अक्सर एक उदासीन तार भी होता है।

औद्योगिक मोटर, भारी मशीनरी, विद्युत उत्पादन और पारेषण।


2. दिष्ट धारा (DC - Direct Current) आपूर्ति प्रणाली

​दिष्ट धारा (DC) वह विद्युत धारा है जिसकी दिशा और परिमाण समय के साथ नहीं बदलते हैं; यह एक ही दिशा में बहती है।

DC आपूर्ति प्रणाली के लाभ:

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आदर्श: अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (जैसे, कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन) DC पर काम करते हैं।
  • भंडारण (Storage): DC को बैटरी में आसानी से संग्रहित किया जा सकता है।

DC आपूर्ति प्रणाली के उप-वर्गीकरण:

​DC प्रणाली को वोल्टेज स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:


वर्गीकरण (Classification)

विवरण (Description)

उपयोग (Application)

दो-तार प्रणाली (Two-Wire System)

इसमें एक धनात्मक (+) और एक ऋणात्मक (-) तार होता है।

बैटरी, छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट।

तीन-तार प्रणाली (Three-Wire System)

इसमें दो बाहरी तार (+/-) और एक केंद्रीय तार (Neutral) होता है।

कुछ विशेष औद्योगिक और पुराने वितरण प्रणालियाँ।


विशेषता

प्रत्यावर्ती धारा (AC)

दिष्ट धारा (DC)

दिशा

दिशा बदलती रहती है (आवधिक रूप से)।

दिशा स्थिर रहती है।

उत्पादन

प्रत्यावर्तक (Alternator) द्वारा।

दिष्ट धारा जनित्र (Dynamo), बैटरी, सौर सेल द्वारा।

पारेषण

लंबी दूरी के लिए आदर्श (कम हानि)।

लंबी दूरी के लिए अधिक हानिदायक (अपवाद: HVDC)।




चरणों की संख्या के अनुसार?

विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) के वर्गीकरण के संदर्भ में है, तो 'चरणों की संख्या' या 'फेज़ की संख्या' (Number of Phases) के अनुसार विद्युत आपूर्ति प्रणाली को मुख्य रूप से दो प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

​1. एकल फेज़ (Single Phase - 1 phi) आपूर्ति प्रणाली

​यह सबसे सामान्य प्रणाली है जिसका उपयोग छोटे लोड और घरेलू ज़रूरतों के लिए किया जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • संरचना: इस प्रणाली में आमतौर पर दो तार होते हैं:
    1. ​एक फेज़ तार (Phase/Live Wire), जिसमें प्रत्यावर्ती वोल्टेज होता है।
    2. ​एक उदासीन तार (Neutral Wire), जो सर्किट को पूरा करने के लिए वापसी का मार्ग प्रदान करता है और पृथ्वी के संदर्भ में शून्य वोल्टेज पर होता है।
  • वोल्टेज: भारत में, एकल फेज़ की मानक वोल्टेज 230 {V} (वोल्ट) होती है।
  • उपयोग: इसका उपयोग घरों, कार्यालयों, प्रकाश व्यवस्था (Lighting), पंखों, छोटे हीटरों और अन्य एकल-फेज़ मोटरों को चलाने के लिए किया जाता है।
  • हानि: यह बड़े औद्योगिक मोटरों या बहुत भारी उपकरणों के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इसकी शक्ति (Power) सीमित होती है।

​2. तीन फेज़ (Three Phase - 3 phi) आपूर्ति प्रणाली

​यह प्रणाली उच्च शक्ति (High Power) वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाती है। विद्युत उत्पादन और पारेषण (Generation and Transmission) हमेशा तीन फेज़ में ही किया जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • संरचना: इस प्रणाली में आमतौर पर तीन फेज़ तार होते हैं, जिन्हें {R, Y, B} (या {L}1, {L}2, {L}3) कहा जाता है। इन तीनों फेज़ों के बीच वोल्टेज एक दूसरे से 120 circ के कोणीय अंतर (Phase difference) पर होता है।
  • तारों की संख्या: यह दो तरह की होती है:
    • तीन तार प्रणाली (Three-Wire System): केवल तीन फेज़ तार।
    • चार तार प्रणाली (Four-Wire System): तीन फेज़ तार और एक उदासीन (Neutral) तार।
  • वोल्टेज: तीन फेज़ प्रणाली में दो प्रकार के वोल्टेज होते हैं:
    • फेज़ वोल्टेज (V_p): फेज़ तार और उदासीन तार के बीच का वोल्टेज (जैसे 230 {V})।
    • लाइन वोल्टेज (V_L): किन्हीं भी दो फेज़ तारों के बीच का वोल्टेज (जैसे 400 {V})।
  • उपयोग: बड़ी औद्योगिक मोटरें, भारी मशीनरी, लिफ्ट, केंद्रीकृत एयर कंडीशनिंग सिस्टम और विद्युत शक्ति का पारेषण।
  • लाभ: यह प्रणाली निरंतर, उच्च और स्थिर शक्ति प्रदान करती है, और तीन फेज़ मोटरें स्वयं-प्रारंभिक (Self-starting) होती हैं।

तुलनात्मक सारणी (Comparative Table)

विशेषता

एकल फेज़ (1 phi )

तीन फेज़ (3 phi )

तारों की संख्या

2 (फेज़ और उदासीन)

3 या 4 (फेज़ और उदासीन)

वोल्टेज

230 {V} (लाइन से उदासीन)

400 {V} (लाइन से लाइन); 230 {V} (लाइन से उदासीन)

शक्ति आपूर्ति

निम्न से मध्यम शक्ति

उच्च शक्ति

अनुप्रयोग

घर, प्रकाश व्यवस्था

उद्योग, भारी मशीनरी, पारेषण

क्षमता

सीमित

बहुत अधिक





संबंध की प्रकृति के अनुसार?

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply Chain Management - SCM) के संदर्भ में है, जहाँ भागीदारों (आपूर्तिकर्ताओं, निर्माताओं, वितरकों) के बीच संबंध की प्रकृति एक महत्वपूर्ण वर्गीकरण आधार है। संबंध की प्रकृति यह निर्धारित करती है कि जानकारी, जोखिम और लाभ कैसे साझा किए जाते हैं, और सहयोग का स्तर क्या है।

​संबंध की प्रकृति के अनुसार आपूर्ति प्रणाली (या आपूर्ति श्रृंखला) को मोटे तौर पर निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

संबंध की प्रकृति के अनुसार आपूर्ति श्रृंखला का वर्गीकरण

​1. लेनदेन-आधारित संबंध (Transactional Relationship)

​यह संबंध आपूर्ति श्रृंखला में सबसे बुनियादी और अल्पकालिक प्रकार का होता है।

  • प्रकृति: यह विशुद्ध रूप से मूल्य (Price) और मात्रा (Quantity) पर केंद्रित होता है। भागीदार एक-दूसरे के साथ बहुत कम जानकारी साझा करते हैं।
  • अवधि: यह संबंध केवल एक विशिष्ट लेनदेन या एक बार की खरीद के लिए होता है।
  • विश्वास: इसमें विश्वास का स्तर (Trust Level) बहुत कम होता है। भागीदार एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी या प्रतिपक्षी के रूप में देखते हैं।
  • मुख्य उद्देश्य: न्यूनतम संभव मूल्य पर सामान खरीदना और लाभ को अधिकतम करना।
  • उदाहरण: किसी वस्तु के लिए सबसे कम बोली लगाने वाले आपूर्तिकर्ता का चयन करना, जहाँ बार-बार आपूर्तिकर्ता को बदला जा सकता है।

​2. सहयोगी संबंध (Collaborative Relationship)

​इस प्रकार का संबंध दीर्घकालिक दक्षता और आपसी लाभ पर केंद्रित होता है।

  • प्रकृति: इसमें भागीदार संयुक्त रूप से समस्याओं का समाधान करते हैं और जोखिमों तथा लाभों को साझा करते हैं। सूचना का प्रवाह (Information Flow) उच्च और पारदर्शी होता है।
  • अवधि: यह मध्यम से दीर्घकालिक संबंध होता है।
  • विश्वास: इसमें विश्वास का उच्च स्तर होता है। संगठन एक-दूसरे की प्रक्रियाओं को समझने और सुधारने के लिए निवेश करते हैं।
  • मुख्य उद्देश्य: लागत कम करने, गुणवत्ता सुधारने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए तालमेल (Synergy) बनाना।
  • उदाहरण: संयुक्त रूप से नए उत्पादों का विकास करना, या मांग के पूर्वानुमान (Demand Forecasting) के लिए ग्राहक और आपूर्तिकर्ता के बीच डेटा साझा करना।

​3. सामरिक गठबंधन/रणनीतिक साझेदारी (Strategic Alliance/Partnership)

​यह सहयोग का उच्चतम स्तर है, जो आपूर्ति श्रृंखला के भीतर पूर्ण एकीकरण (Integration) की ओर जाता है।

  • प्रकृति: इसमें भागीदार अपने मूल दक्षताओं (Core Competencies) को साझा करते हैं और एक-दूसरे के संचालन में गहरे स्तर पर एकीकृत होते हैं।
  • अवधि: यह बहुत दीर्घकालिक और स्थायी संबंध होता है।
  • विश्वास: यह सबसे अधिक विश्वास वाला संबंध है। साझेदार लगभग एक ही कंपनी के विस्तारित विभाग की तरह काम करते हैं।
  • मुख्य उद्देश्य: बाजार में सामूहिक प्रतिस्पर्धी लाभ (Competitive Advantage) प्राप्त करना, और एक एकीकृत इकाई के रूप में कार्य करना।
  • उदाहरण: वेंडर मैनेज्ड इन्वेंट्री (VMI) - जहाँ आपूर्तिकर्ता सीधे ग्राहक के स्टॉक स्तरों का प्रबंधन करता है; या दो कंपनियों का किसी तीसरे बाज़ार में संयुक्त रूप से प्रवेश करना।

​यह वर्गीकरण दर्शाता है कि किसी भी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता उसके भागीदारों के बीच संबंधों की गहराई और गुणवत्ता पर निर्भर करती है।




संचरण वोल्टेज स्तर के अनुसार?

विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) के संदर्भ में है, और विशेष रूप से विद्युत संचरण (Transmission) और वितरण (Distribution) के वर्गीकरण से संबंधित है।

​संचरण वोल्टेज स्तर (Transmission Voltage Level) के अनुसार, विद्युत आपूर्ति प्रणाली को चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। वोल्टेज जितना अधिक होता है, वह उतनी ही लंबी दूरी के संचरण के लिए उपयोग होता है, जबकि कम वोल्टेज वितरण के लिए उपयोग होता है।

संचरण वोल्टेज स्तर के अनुसार वर्गीकरण

​1. अति उच्च वोल्टेज (Extra High Voltage - EHV) संचरण

​यह सबसे उच्च वोल्टेज स्तर है, जिसका उपयोग बहुत लंबी दूरी तक भारी मात्रा में विद्युत शक्ति को पारेषित (Transmit) करने के लिए किया जाता है।

  • वोल्टेज रेंज (Voltage Range): 220 {kV}, 400 {kV}, 765 {kV} और उससे ऊपर।
  • उपयोग: मुख्य उत्पादन केंद्रों (Generation Stations) को प्रमुख लोड केंद्रों (Major Load Centres) से जोड़ना। यह ग्रिड में शक्ति की थोक आवाजाही के लिए रीढ़ की हड्डी (Backbone) के रूप में कार्य करता है।
  • लाभ: उच्च वोल्टेज पर संचरण करने से I^2R के रूप में होने वाली शक्ति हानि (Power Loss) बहुत कम हो जाती है।

​2. उच्च वोल्टेज (High Voltage - HV) संचरण

​यह EHV से थोड़ा कम होता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से शहरों के बाहरी क्षेत्रों या बड़े औद्योगिक क्षेत्रों तक शक्ति पहुँचाने के लिए किया जाता है।

  • वोल्टेज रेंज: 66 {kV} और 132 {kV}।
  • उपयोग: उप-संचरण (Sub-transmission) और ग्रिड के भीतर विभिन्न सबस्टेशनों को जोड़ना।

​3. मध्यम वोल्टेज (Medium Voltage - MV) वितरण

​इस स्तर पर वोल्टेज को काफी कम कर दिया जाता है, और यह प्राथमिक वितरण प्रणाली (Primary Distribution System) का हिस्सा बनता है। यह सबस्टेशन से औद्योगिक या बड़े वाणिज्यिक उपभोक्ताओं तक शक्ति पहुँचाता है।

  • वोल्टेज रेंज: 3.3 {kV}, 6.6 {kV}, 11 {kV} और 33 {kV}।
  • उपयोग: शहरी क्षेत्रों के अंदरूनी हिस्सों में वितरण सबस्टेशनों तक शक्ति पहुँचाना। बड़े कारखाने और संस्थान सीधे इस वोल्टेज पर आपूर्ति लेते हैं।

​4. निम्न वोल्टेज (Low Voltage - LV) वितरण

​यह अंतिम चरण है जहाँ शक्ति को उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए सबसे निचले स्तर तक कम किया जाता है।

  • वोल्टेज रेंज: 400 {V} (लाइन से लाइन) और 230 {V} (लाइन से उदासीन)।
  • उपयोग: घरों, छोटे व्यवसायों और सामान्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं तक सीधे शक्ति पहुँचाना।

वोल्टेज स्तरों का क्रम

क्रम

स्तर (Level)

वोल्टेज रेंज (भारत में मानक)

मुख्य कार्य (Primary Function)

1.

अति उच्च संचरण (EHV)

220 {kV} से ऊपर

लंबी दूरी का थोक संचरण (Bulk Power Transmission)

2.

उच्च संचरण (HV)

66 {kV}, 132 {kV}

उप-संचरण और बड़े सबस्टेशनों को जोड़ना

3.

मध्यम वितरण (MV)

11 {kV}, 33 {kV}

प्राथमिक वितरण, औद्योगिक ग्राहकों को आपूर्ति

4.

निम्न वितरण (LV)

230 {V}, 400 {V}

माध्यमिक वितरण, घरेलू और वाणिज्यिक ग्राहकों को आपूर्ति



यह वर्गीकरण दर्शाता है कि कैसे विद्युत शक्ति को कुशलतापूर्वक लंबी दूरी तक पहुँचाने और फिर सुरक्षित रूप से उपभोक्ताओं तक वितरण के लिए चरणों में वोल्टेज को समायोजित किया जाता है।






आपूर्ति प्रणाली के घटक?

आपूर्ति प्रणाली (Supply System), जिसे अक्सर आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के रूप में समझा जाता है, वह नेटवर्क है जो किसी उत्पाद या सेवा को उसके मूल स्रोत से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने में शामिल होता है।

​इसके मुख्य घटक (Components) किसी भी व्यवसाय के लिए आवश्यक नींव होते हैं, और उन्हें पाँच मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

आपूर्ति प्रणाली (आपूर्ति श्रृंखला) के मुख्य घटक

​1. आपूर्तिकर्ता (Suppliers) - स्रोत

​यह प्रणाली का प्रारंभिक बिंदु है। आपूर्तिकर्ता वे संस्थाएँ या व्यक्ति हैं जो कच्चे माल, घटक, या तैयार उत्पाद प्रदान करते हैं जिनकी आवश्यकता कंपनी को अपने उत्पाद बनाने या अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए होती है।

  • मुख्य भूमिका: आवश्यक इनपुट (सामग्री, ऊर्जा, सेवाएँ) प्रदान करना।
  • उदाहरण: किसी कारखाने को स्टील, प्लास्टिक या इलेक्ट्रॉनिक चिप्स की आपूर्ति करने वाली कंपनियाँ।

​2. विनिर्माण/उत्पादन इकाई (Manufacturing/Production Unit) - परिवर्तन

​यह वह जगह है जहाँ कच्चे माल को संसाधित (Processed) किया जाता है और अंतिम उत्पाद में परिवर्तित किया जाता है।

  • मुख्य भूमिका: कच्चे माल को मूल्यवर्धित (Value-added) तैयार उत्पादों में बदलना।
  • उदाहरण: असेंबली लाइन, प्रोसेसिंग प्लांट, या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर।

​3. भण्डारण/सूची (Inventory/Warehousing) - भंडारण

​यह वह घटक है जो आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों के बीच आपूर्ति और मांग के असंतुलन को प्रबंधित करता है। इसमें तैयार माल और कच्चे माल दोनों का भंडारण शामिल है।

  • मुख्य भूमिका: मांग में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए उत्पादों को संग्रहित और व्यवस्थित करना।
  • उदाहरण: गोदाम (Warehouses), वितरण केंद्र (Distribution Centers)।

​4. वितरण/परिवहन (Distribution/Transportation) - गति

​यह वह प्रणाली है जो उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से ले जाती है—आपूर्तिकर्ताओं से निर्माता तक, और फिर निर्माता से अंतिम ग्राहक तक।

  • मुख्य भूमिका: उत्पादों की समय पर और कुशल आवाजाही सुनिश्चित करना।
  • उदाहरण: ट्रक, ट्रेन, हवाई जहाज, शिपिंग कंटेनर और अंतिम-मील वितरण के लिए डिलीवरी वैन।

​5. खुदरा विक्रेता/ग्राहक (Retailers/Customer) - गंतव्य

​यह आपूर्ति श्रृंखला का अंतिम बिंदु है। खुदरा विक्रेता (जैसे स्टोर) वे हैं जो ग्राहकों को उत्पाद बेचते हैं, और ग्राहक अंतिम उपभोक्ता होते हैं।

  • मुख्य भूमिका: उत्पाद का उपभोग या उपयोग करना, और मांग की जानकारी (Demand Data) वापस श्रृंखला में भेजना।
  • उदाहरण: सुपरमार्केट, ऑनलाइन स्टोर, और व्यक्तिगत उपभोक्ता।

सहायक घटक (Supporting Components)

​उपरोक्त भौतिक घटकों के अलावा, आपूर्ति प्रणाली को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए कुछ अमूर्त (Intangible) घटक आवश्यक हैं:

  • सूचना प्रवाह (Information Flow): मांग का पूर्वानुमान, ऑर्डर की स्थिति, सूची स्तर और शिपिंग डेटा का साझाकरण। यह आपूर्ति श्रृंखला का इंजन है।
  • वित्तीय प्रवाह (Financial Flow): भुगतान, क्रेडिट शर्तें, और लेनदेन से संबंधित अन्य मौद्रिक आदान-प्रदान।
  • संबंध प्रबंधन (Relationship Management): आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के साथ सहयोग और विश्वास का निर्माण।




आपूर्ति प्रणाली का लेआउट?

आपूर्ति प्रणाली का लेआउट (Layout of a Supply System) आमतौर पर एक भौतिक वितरण प्रणाली या विद्युत आपूर्ति नेटवर्क के डिज़ाइन को संदर्भित करता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस संदर्भ में 'आपूर्ति प्रणाली' की बात कर रहे हैं।

​यहाँ हम दोनों सबसे सामान्य संदर्भों—विद्युत वितरण प्रणाली और वेयरहाउस/वितरण केंद्र लेआउट—पर विचार करेंगे।

​1. विद्युत आपूर्ति प्रणाली का लेआउट (Electrical Supply System Layout)

​विद्युत वितरण प्रणाली के लेआउट को आमतौर पर उसकी विश्वसनीयता और लागत के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मुख्य लेआउट इस प्रकार हैं:

​A. रेडियल लेआउट (Radial Layout / Radial System)

संरचना: यह सबसे सरल और सस्ता लेआउट है। इसमें एक एकल फीडर (Feeder) एक सबस्टेशन से निकलता है और अलग-अलग वितरण ट्रांसफॉर्मर को सीधे शक्ति की आपूर्ति करता है।

https://dkrajwar.blogspot.com/2025/12/types-of-supply-systems-in-electrical.html

विशेषता: शक्ति का प्रवाह केवल एक दिशा में होता है।

लाभ: निर्माण में सस्ता और सरल।

हानि: यदि फीडर के किसी भी बिंदु पर कोई खराबी आती है, तो पूरी लाइन में आपूर्ति बाधित हो जाती है (कम विश्वसनीयता)।


B. रिंग मेन लेआउट (Ring Main Layout / Ring Main System)

  • संरचना: इसमें प्रत्येक वितरण ट्रांसफॉर्मर को दो तरफ से शक्ति की आपूर्ति मिलती है, जिससे एक बंद लूप (Ring) बनता है।
  • विशेषता: यदि रिंग का एक सिरा विफल हो जाता है, तो शक्ति दूसरे सिरे से आपूर्ति की जाती है।
  • लाभ: रेडियल सिस्टम की तुलना में अधिक विश्वसनीय और कम वोल्टेज उतार-चढ़ाव।
  • हानि: निर्माण में रेडियल सिस्टम से अधिक महंगा।

​C. इंटरकनेक्टेड लेआउट (Interconnected Layout / Grid System)

  • संरचना: यह कई सबस्टेशनों को जोड़ता है और ग्रिड बनाता है। इसमें विभिन्न फीडर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
  • विशेषता: किसी भी सबस्टेशन की विफलता की स्थिति में, अन्य सबस्टेशन क्षेत्र को शक्ति प्रदान कर सकते हैं।
  • लाभ: सबसे विश्वसनीय प्रणाली, लोड के अचानक बढ़ने पर भी आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • हानि: सबसे जटिल और महंगा लेआउट।

​2. भण्डारण आपूर्ति (वेयरहाउस) लेआउट (Warehouse Supply Layout)

​यह उत्पाद को कुशलतापूर्वक प्राप्त करने, संग्रहीत करने और भेजने के लिए वेयरहाउस के भीतर स्थान और उपकरणों की व्यवस्था को संदर्भित करता है। एक प्रभावी लेआउट निम्नलिखित पर निर्भर करता है:

​A. गोदाम के मुख्य क्षेत्र (Main Areas of a Warehouse)

  1. प्राप्त करने का क्षेत्र (Receiving Area): जहाँ ट्रक से सामग्री को अनलोड किया जाता है और गुणवत्ता जाँच (Quality Check) की जाती है।
  2. भंडारण क्षेत्र (Storage Area): यह गोदाम का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जहाँ उत्पादों को रैक्स (Racks) या पैलेट्स (Pallets) पर व्यवस्थित किया जाता है।
  3. ऑर्डर पिकिंग क्षेत्र (Order Picking Area): वह स्थान जहाँ से ग्राहक के ऑर्डर को पूरा करने के लिए उत्पादों को निकाला जाता है।
  4. शिप्पिंग/प्रेषण क्षेत्र (Shipping Area): जहाँ उत्पादों को पैक किया जाता है, लोड किया जाता है और वितरण के लिए बाहर भेजा जाता है।

​B. सामान्य लेआउट शैलियाँ (Common Layout Styles)

  • U-आकार का लेआउट (U-shaped Layout): प्राप्त करने का क्षेत्र और शिपिंग क्षेत्र गोदाम के एक ही तरफ होते हैं। यह सामग्री को कम दूरी तक स्थानांतरित करने की अनुमति देता है।
  • सीधा-प्रवाह लेआउट (Straight-Flow Layout): प्राप्त करने का क्षेत्र एक तरफ होता है और शिपिंग क्षेत्र विपरीत दिशा में होता है। सामग्री एक सीधी रेखा में चलती है।



वितरण प्रणालियों के प्रकार?

वितरण प्रणालियों (Distribution Systems) के प्रकार को कई अलग-अलग आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस क्षेत्र की बात कर रहे हैं। यहाँ दो मुख्य संदर्भों में वर्गीकरण दिए गए हैं:

​1. विद्युत वितरण प्रणालियों के प्रकार (Types of Electrical Distribution Systems)

​विद्युत वितरण प्रणाली में, वर्गीकरण मुख्य रूप से धारा की प्रकृति (AC/DC), संरचना/लेआउट, और उपयोग किए गए कंडक्टर की विधि (Installation Method) पर आधारित होता है।

​A. धारा की प्रकृति के अनुसार (Based on Nature of Current)

  1. प्रत्यावर्ती धारा (AC) वितरण प्रणाली:
    • प्राथमिक वितरण: उच्च वोल्टेज पर सबस्टेशन से वितरण ट्रांसफार्मर तक। (जैसे 11 {kV}, 33 {kV})
    • माध्यमिक वितरण: कम वोल्टेज पर वितरण ट्रांसफार्मर से अंतिम उपभोक्ता तक। (जैसे 400 {V}/230 {V})
  2. दिष्ट धारा (DC) वितरण प्रणाली:
    • ​यह अब दुर्लभ है, लेकिन कुछ विशेष अनुप्रयोगों (जैसे ट्रैक्शन सिस्टम, बैटरी चार्जिंग) में उपयोग किया जाता है।

​B. डिज़ाइन या लेआउट के अनुसार (Based on Design or Layout)

​यह वर्गीकरण विश्वसनीयता और लागत पर आधारित है, जैसा कि पिछले उत्तर में बताया गया था:

  1. रेडियल प्रणाली (Radial System): सबसे सरल और कम विश्वसनीय। शक्ति एक ही दिशा में बहती है।
  2. रिंग मेन प्रणाली (Ring Main System): अधिक विश्वसनीय, क्योंकि प्रत्येक बिंदु को दो दिशाओं से फीड किया जाता है।
  3. इंटरकनेक्टेड ग्रिड प्रणाली (Interconnected Grid System): सबसे विश्वसनीय और जटिल।

​C. निर्माण की विधि के अनुसार (Based on Construction/Installation Method)

  1. ओवरहेड प्रणाली (Overhead System): कंडक्टर को खंभों या टावरों पर इंसुलेटर का उपयोग करके हवा में स्थापित किया जाता है। यह सबसे सामान्य और सस्ता तरीका है।
  2. भूमिगत प्रणाली (Underground System): कंडक्टर (केबल) को ज़मीन के नीचे दफनाया जाता है। यह सुरक्षित और सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर है, लेकिन महंगा है।

​2. भौतिक वितरण प्रणालियों के प्रकार (Types of Physical Distribution Systems)

​व्यवसाय और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में, 'वितरण प्रणाली' यह बताती है कि उत्पाद को विनिर्माण से ग्राहक तक कैसे पहुँचाया जाता है।

​A. वितरण के प्रकार (Types of Distribution/Coverage Strategy)

​यह वर्गीकरण इस बात पर आधारित है कि निर्माता अपने उत्पादों को बाजार में कैसे वितरित करता है:

  1. सघन वितरण (Intensive Distribution):
    • उद्देश्य: उत्पाद को हर संभव आउटलेट में उपलब्ध कराना।
    • उपयोग: सुविधा उत्पाद (Convenience Goods) जैसे पेय, सिगरेट, अखबार।
  2. चयनात्मक वितरण (Selective Distribution):
    • उद्देश्य: उत्पाद को केवल चुनिंदा, योग्य आउटलेट में उपलब्ध कराना।
    • उपयोग: खरीदारी उत्पाद (Shopping Goods) जैसे कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर।
  3. अनन्य वितरण (Exclusive Distribution):
    • उद्देश्य: उत्पाद को एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में केवल एक ही आउटलेट के माध्यम से उपलब्ध कराना।
    • उपयोग: लक्जरी उत्पाद (Luxury Goods) जैसे महंगी कारें या डिजाइनर कपड़े।

​B. वितरण चैनल के प्रकार (Types of Distribution Channels)

​यह वर्गीकरण इस बात पर आधारित है कि निर्माता और अंतिम उपभोक्ता के बीच कितने मध्यस्थ (Intermediaries) शामिल हैं:

  1. प्रत्यक्ष चैनल (Direct Channel / Zero-Level Channel):
    • ​निर्माता उपभोक्ता।
    • उदाहरण: फैक्टरी आउटलेट, ऑनलाइन स्टोर, या सीधे खेत से बेचना।
  2. अप्रत्यक्ष चैनल (Indirect Channel):
    • एक-स्तरीय (One-Level): निर्माता  खुदरा विक्रेता  उपभोक्ता।
    • दो-स्तरीय (Two-Level): निर्माता  थोक विक्रेता  खुदरा विक्रेता उपभोक्ता। (सबसे सामान्य)
    • तीन-स्तरीय (Three-Level): निर्माता  एजेंट  थोक विक्रेता  खुदरा विक्रेता  उपभोक्ता।





उन्नत (आधुनिक) आपूर्ति प्रणालियाँ?

आपने आधुनिक आपूर्ति प्रणालियों (Advanced/Modern Supply Systems) के बारे में पूछा है। आज के वैश्वीकृत, डिजिटल और तेजी से बदलते व्यावसायिक माहौल में, आपूर्ति प्रणाली को अब एक साधारण रैखिक श्रृंखला (Linear Chain) नहीं माना जाता है, बल्कि एक जटिल, लचीला और डेटा-संचालित नेटवर्क माना जाता है।

​आधुनिक आपूर्ति प्रणालियों को उनके तकनीकी एकीकरण, लचीलेपन और ग्राहक-केंद्रितता के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

​यहाँ कुछ सबसे उन्नत (आधुनिक) आपूर्ति प्रणालियाँ और उनके पीछे की अवधारणाएँ दी गई हैं:

​1. डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला (Digital Supply Chain - DSC)

​यह पारंपरिक आपूर्ति श्रृंखला का डिजिटल रूपांतरण है, जो भौतिक संचालन को डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ता है।

विशेषता (Feature)

विवरण (Description)

पारदर्शिता (Transparency)

एंड-टू-एंड (End-to-End) दृश्यता प्रदान करती है, जिससे उत्पादों और सूचनाओं को ट्रैक करना आसान हो जाता है।

विश्लेषिकी (Analytics)

बड़े डेटा और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करके मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाता है और निर्णय लिए जाते हैं।

स्वचालन (Automation)

वेयरहाउस संचालन और लॉजिस्टिक्स प्रक्रियाओं में रोबोटिक्स, ड्रोन और स्वचालित निर्देशित वाहनों (AGVs) का उपयोग।


2. लचीली आपूर्ति श्रृंखला (Agile Supply Chain)

​यह प्रणाली बाजार की अप्रत्याशित मांग और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं पर तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

विशेषता (Feature)

विवरण (Description)

मांग-संचालित (Demand-Driven)

उत्पादन और खरीद को पूर्वानुमान के बजाय वास्तविक ग्राहक मांग संकेतों से प्रेरित किया जाता है (Push के बजाय Pull)।

वर्चुअल इन्वेंटरी (Virtual Inventory)

वास्तविक स्टॉक को कई स्थानों पर रखते हुए भी ग्राहकों को एक एकीकृत सूची दृश्य प्रदान करना।

क्षमता का लचीलापन

उत्पादन या रसद क्षमता को मांग के अनुसार तेजी से बढ़ाने या घटाने की क्षमता।


3. मांग-संचालित मूल्य नेटवर्क (Demand-Driven Value Network - DDVN)

​यह एक ऐसा मॉडल है जो पूरी आपूर्ति श्रृंखला को ग्राहक की मांग के साथ संरेखित करता है, बिचौलियों को हटाता है और प्रत्येक भागीदार को ग्राहक की वास्तविक आवश्यकता पर प्रतिक्रिया करने के लिए सशक्त बनाता है।

विशेषता (Feature)

विवरण (Description)

अंतःक्रियाशीलता (Interoperability)

सभी भागीदार (आपूर्तिकर्ता, निर्माता, वितरक) साझा डेटा प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम करते हैं।

उत्पादन की गति

'सही समय पर' (Just-in-Time) सिद्धांतों को लागू करके अनावश्यक स्टॉक और देरी को कम करना।

जोखिम प्रबंधन

मांग और आपूर्ति दोनों तरफ के जोखिमों को सामूहिक रूप से ट्रैक और प्रबंधित किया जाता है।


4. लचीली आपूर्ति श्रृंखला (Resilient Supply Chain)

​यह प्रणाली व्यवधानों (Disruptions)—जैसे महामारी, प्राकृतिक आपदा या भू-राजनीतिक अस्थिरता—का सामना करने और उनसे जल्दी उबरने की क्षमता पर केंद्रित है।


विशेषता (Feature)

विवरण (Description)

बहु-सोर्सिंग (Multi-Sourcing)

किसी एक स्थान या आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न भौगोलिक स्थानों से स्रोतों का उपयोग करना।

बफ़र स्टॉक (Buffer Stock)

महत्वपूर्ण वस्तुओं का एक सुरक्षा स्टॉक (Safety Stock) रणनीतिक रूप से बनाए रखना।

विकेन्द्रीकृत विनिर्माण (Decentralized Manufacturing)

क्षेत्रीय या स्थानीय उत्पादन इकाइयों का एक नेटवर्क बनाना ताकि एक क्षेत्र में विफलता का असर दूसरों पर न पड़े।



5. भविष्य की प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Technologies)

​आधुनिक आपूर्ति प्रणाली इन प्रौद्योगिकियों के कारण ही संभव हो पाई हैं:

  • IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स): वेयरहाउस, ट्रक और शिपिंग कंटेनरों से वास्तविक समय का डेटा एकत्र करना (जैसे तापमान, स्थान, कंपन)।
  • ब्लॉकचेन (Blockchain): आपूर्ति श्रृंखला में लेन-देन और उत्पादों की उत्पत्ति का एक अपरिवर्तनीय (Immutable) और पारदर्शी रिकॉर्ड बनाना, जिससे प्रामाणिकता (Authenticity) सुनिश्चित होती है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): जटिल पैटर्न की पहचान करना, इन्वेंट्री को अनुकूलित करना, और रूटिंग और लोडिंग निर्णय लेना।

संक्षेप में, 

उन्नत आपूर्ति प्रणालियाँ दक्षता, पारदर्शिता, लचीलापन और ग्राहक संतुष्टि को अधिकतम करने के लिए डिजिटल टूल, सहयोग और डेटा का लाभ उठाती हैं।




उदाहरण के लिए वोल्टेज स्तर (भारतीय मानक)?

आपने भारत में प्रचलित वोल्टेज स्तरों (Voltage Levels) के उदाहरण के बारे में पूछा है। विद्युत आपूर्ति प्रणाली में, वोल्टेज को बिजली के उत्पादन, संचरण (Transmission) और वितरण (Distribution) के आधार पर विभिन्न स्तरों में विभाजित किया गया है।

​यहाँ भारतीय मानक (Indian Standard) के अनुसार मुख्य वोल्टेज स्तरों का वर्गीकरण और उनके उपयोग दिए गए हैं:

भारतीय मानक वोल्टेज स्तर (Indian Standard Voltage Levels)

स्तर (Level)

वोल्टेज रेंज

विशिष्ट वोल्टेज उदाहरण

उपयोग (Application)

उत्पादन (Generation)

मध्यम

11 {kV} से 25 {kV}

बिजली संयंत्रों में उत्पन्न होने वाला प्रारंभिक वोल्टेज।

अति उच्च संचरण (EHV Transmission)

220 {kV} से अधिक

400 {kV}; 765 {kV}; (कुछ स्थानों पर 1200 {kV})

लंबी दूरी तक और भारी मात्रा में शक्ति के थोक संचरण के लिए (पावर ग्रिड की रीढ़)।

उच्च संचरण (HV Transmission)

66 {kV} से 132 {kV}

132 {kV}; 220 {kV}

विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के मुख्य सबस्टेशनों तक शक्ति पहुँचाना।

उप-संचरण (Sub-Transmission)

33 {kV} से 66 {kV}

33 {kV}; 66 {kV}

शहरी क्षेत्रों के बाहरी किनारों पर मुख्य सबस्टेशनों से बड़े वितरण सबस्टेशनों तक।

प्राथमिक वितरण (Primary Distribution)

मध्यम वोल्टेज

11 {kV}; 33 {kV}

वितरण सबस्टेशनों से स्थानीय वितरण ट्रांसफार्मर तक। बड़े औद्योगिक उपभोक्ता सीधे इस वोल्टेज पर बिजली लेते हैं।

माध्यमिक/निम्न वितरण (Secondary/Low Distribution)

निम्न वोल्टेज

400 {V} (लाइन से लाइन)

गली के ट्रांसफार्मर से घरों और छोटे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं तक।

घरेलू आपूर्ति (Domestic Supply)

निम्न वोल्टेज

230 {V} (लाइन से न्यूट्रल)

भारत में घरों और छोटे कार्यालयों में उपयोग होने वाली मानक एकल-फेज़ वोल्टेज।


क्यों उच्च वोल्टेज का उपयोग किया जाता है?

​उच्च वोल्टेज का उपयोग संचरण के लिए इसलिए किया जाता है क्योंकि यह शक्ति हानि (Power Loss) को कम करता है।

​चूँकि {Power} (P) = V × I होता है, यदि आप वोल्टेज (V) बढ़ाते हैं, तो समान शक्ति संचारित करने के लिए धारा (I) कम हो जाती है।

​चूँकि शक्ति हानि (Power Loss) P_{{loss}} = I^2 R के समानुपाती होती है, धारा (I) कम होने से हानि नाटकीय रूप से कम हो जाती है।

​संक्षेप में, 

शक्ति को पहले बढ़ाकर लंबी दूरी तक भेजा जाता है (संचरण), और फिर इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर सुरक्षित स्तर पर लाया जाता है (वितरण) ताकि उपभोक्ता इसका उपयोग कर सकें।




विद्युत आपूर्ति प्रणाली का सारांश?

विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) एक जटिल और एकीकृत नेटवर्क है जो विद्युत ऊर्जा को उसके उत्पादन स्थल से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य करता है।

​यहाँ इस पूरी प्रणाली का एक संक्षिप्त और व्यापक सारांश दिया गया है, जिसे मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:

​विद्युत आपूर्ति प्रणाली का सारांश

​1. उत्पादन (Generation)

​यह प्रणाली का शुरुआती चरण है, जहाँ विद्युत ऊर्जा का निर्माण होता है।

विशेषता

विवरण

प्रक्रिया

यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को प्रत्यावर्तक (Alternator) की सहायता से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना।

स्रोत

कोयला (थर्मल), पानी (हाइड्रो), परमाणु ऊर्जा, गैस, या नवीकरणीय स्रोत जैसे सौर और पवन ऊर्जा।

वोल्टेज स्तर

मध्यम वोल्टेज पर उत्पादन होता है (जैसे 11 {kV} से 25 {kV})।


2. संचरण (Transmission)

​यह उत्पादन केंद्र से दूर स्थित खपत केंद्रों तक बिजली पहुँचाने की प्रक्रिया है।

विशेषता

विवरण

कार्य

उत्पादन के बाद, वोल्टेज को स्टेप-अप ट्रांसफार्मर का उपयोग करके अति उच्च वोल्टेज (EHV) स्तर तक बढ़ाया जाता है (जैसे 400 {kV}, 765 {kV})।

उद्देश्य

लंबी दूरी के संचरण के दौरान शक्ति हानि (I^2R loss) को कम करना और दक्षता बढ़ाना।

नेटवर्क

हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें और ग्रिड (Grid) सिस्टम।



3. वितरण (Distribution)

​यह अंतिम चरण है जहाँ उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए उच्च वोल्टेज को सुरक्षित निम्न वोल्टेज स्तर तक कम किया जाता है।

विशेषता

विवरण

प्राथमिक वितरण

स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर का उपयोग करके वोल्टेज को मध्यम स्तर पर लाया जाता है (जैसे 33 {kV}, 11 {kV})। यह औद्योगिक ग्राहकों तक पहुँचता है।

माध्यमिक वितरण

स्थानीय वितरण ट्रांसफार्मर का उपयोग करके वोल्टेज को सबसे निचले स्तर तक घटाया जाता है: 400 V (तीन-फेज़ आपूर्ति के लिए) और 230 V (एकल-फेज़ घरेलू आपूर्ति के लिए)।

नेटवर्क

निम्न वोल्टेज वाली ओवरहेड या भूमिगत लाइनें जो घरों और व्यवसायों तक पहुँचती हैं।


आपूर्ति प्रणाली का वर्गीकरण (Classification Summary)

​विद्युत आपूर्ति प्रणाली को विभिन्न मानकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

वर्गीकरण आधार

मुख्य प्रकार

धारा की प्रकृति

प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC)।

चरणों की संख्या

एकल फेज़ (1 phi ) और तीन फेज़ (3 phi )।

लेआउट/संरचना

रेडियल (Radial), रिंग मेन (Ring Main), और इंटरकनेक्टेड (Interconnected)।

वोल्टेज स्तर

EHV/HV संचरण (जैसे 400 {kV}) और MV/LV वितरण (जैसे 11 {kV}, 230 {V})।


यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि बिजली का उत्पादन एक ही स्थान पर हो, कुशलतापूर्वक लंबी दूरी तक यात्रा करे, और फिर सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से हमारे उपकरणों और घरों तक पहुँचे।





विद्युत आपूर्ति प्रणाली का निष्कर्ष?

विद्युत आपूर्ति प्रणाली (Electrical Power Supply System) का निष्कर्ष यह है कि यह किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था और समाज की जीवनरेखा है। यह एक जटिल और बहु-स्तरीय नेटवर्क है जिसे दक्षता, विश्वसनीयता और सुरक्षा तीन मुख्य उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है।

​विद्युत आपूर्ति प्रणाली का निष्कर्ष (Conclusion of the Electrical Power Supply System)

​1. आधुनिक जीवन की अनिवार्यता

  • मूलभूत ढाँचा: विद्युत आपूर्ति प्रणाली उद्योगों, संचार, परिवहन और घरेलू जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत ढाँचा (Infrastructure) प्रदान करती है।
  • आर्थिक विकास: इसकी स्थिरता और गुणवत्ता सीधे तौर पर किसी देश के आर्थिक विकास और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

​2. तीन मुख्य चरण

​पूरी प्रणाली तीन प्रमुख और अंतर्संबंधित चरणों में काम करती है:

  1. उत्पादन (Generation): विभिन्न ऊर्जा स्रोतों (जैसे कोयला, जल, सौर, पवन) का उपयोग करके बिजली का निर्माण।
  2. संचरण (Transmission): शक्ति हानि (Power Loss) को कम करने के लिए वोल्टेज को बढ़ाकर, इसे लंबी दूरी तक कुशलतापूर्वक पहुँचाना।
  3. वितरण (Distribution): वोल्टेज को सुरक्षित स्तर (जैसे 230 {V} और 400 {V}) तक घटाकर इसे अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाना।

​3. वर्तमान चुनौतियाँ और भविष्य

​आधुनिक विद्युत प्रणालियाँ निम्नलिखित चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिसके लिए वे निरंतर विकसित हो रही हैं:

  • नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: सौर और पवन ऊर्जा जैसे परिवर्तनशील (Intermittent) स्रोतों को स्थिर ग्रिड में सफलतापूर्वक एकीकृत करना।
  • स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid): सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके आपूर्ति और मांग को वास्तविक समय में प्रबंधित करना, जिससे दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार हो सके।
  • लचीलापन (Resilience): साइबर हमलों, प्राकृतिक आपदाओं, या अचानक लोड परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले व्यवधानों का सामना करने की क्षमता को मजबूत करना।

​संक्षेप में,

विद्युत आपूर्ति प्रणाली शक्ति उत्पादन, उच्च वोल्टेज संचरण, और चरणबद्ध निम्न वोल्टेज वितरण का एक समन्वयित प्रयास है जो सुनिश्चित करता है कि आधुनिक समाज की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएँ सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती तरीके से पूरी हों।








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