ग्राउंडिंग की परिभाषा
ग्राउंडिंग (Grounding) को हिंदी में भू-संपर्कन या अर्थिंग भी कहते हैं।
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ग्राउंडिंग की परिभाषा (Definition of Grounding):
सामान्य शब्दों में, ग्राउंडिंग किसी आवेशित (charged) वस्तु या विद्युत प्रणाली के भाग को पृथ्वी (Earth) से जोड़ने की प्रक्रिया है।
उद्देश्य:
इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना है। पृथ्वी एक बहुत बड़ा चालक (conductor) है और आवेश (charge) को साझा करने की अनुमति देती है।
कार्य:
जब किसी चालक को पृथ्वी से जोड़ा जाता है, तो पृथ्वी लगभग सभी अतिरिक्त आवेश को ग्रहण कर लेती है, जिससे वह वस्तु शून्य (zero) आवेश पर आ जाती है।
विद्युत प्रणालियों में, ग्राउंडिंग दोष धाराओं (fault currents) को पृथ्वी में प्रवाहित करने के लिए एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करती है, जिससे खतरनाक वोल्टेज संचय को रोका जा सके।
यह बिजली के उपकरणों को बिजली गिरने या वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से बचाता है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के संदर्भ में मुख्य रूप से दो अवधारणाएँ हैं:
- ग्राउंडिंग: लाइव पार्ट (जिसमें सामान्य स्थिति में करंट बह रहा होता है, जैसे कि न्यूट्रल पॉइंट) को ज़मीन से जोड़ना। इसका उपयोग वोल्टेज के स्तर को स्थिर रखने और उपकरणों को क्षणिक वोल्टेज स्पाइक्स से बचाने के लिए किया जाता है।
- अर्थिंग: उपकरण के नॉन-करंट-कैरीइंग पार्ट (जैसे धातु का फ्रेम या बॉडी) को ज़मीन से जोड़ना। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली के झटके को रोकना है ताकि खराबी की स्थिति में करंट कम प्रतिरोध वाले रास्ते से ज़मीन में चला जाए, न कि किसी व्यक्ति से होकर गुजरे।
ग्राउंडिंग का उद्देश्य
ग्राउंडिंग (Grounding) जिसे भू-संपर्कन या अर्थिंग भी कहा जाता है, का प्राथमिक उद्देश्य विद्युत प्रणालियों और मनुष्यों को सुरक्षा प्रदान करना है।
ग्राउंडिंग के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. व्यक्तियों को बिजली के झटके से बचाना
यह सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
- जब किसी उपकरण के धातु के शरीर (जैसे फ्रिज या वाशिंग मशीन) में इंसुलेशन खराब होने के कारण गलती से करंट आ जाता है (जिसे दोष धारा या Fault Current कहते हैं), तो ग्राउंडिंग वह करंट सुरक्षित रूप से पृथ्वी में भेज देती है।
- ग्राउंडिंग एक कम-प्रतिरोध (Low-Resistance) वाला मार्ग प्रदान करती है। करंट हमेशा कम प्रतिरोध वाले मार्ग से होकर प्रवाहित होना चाहता है।
- यदि ग्राउंडिंग नहीं होगी, तो उपकरण छूने वाले व्यक्ति के शरीर से होकर करंट ज़मीन में जाएगा, जिससे उसे गंभीर बिजली का झटका लग सकता है।
2. उपकरणों को नुकसान से बचाना
ग्राउंडिंग बिजली के उपकरणों को उच्च वोल्टेज से बचाती है:
- दोष धाराओं को दूर करना: यह दोष धाराओं (जैसे शॉर्ट सर्किट या लीकेज करंट) को पृथ्वी में प्रवाहित करके उपकरणों को जलने या क्षतिग्रस्त होने से बचाती है।
- बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection): बिजली गिरने (लाइटनिंग सर्ज) की स्थिति में, ग्राउंडिंग अत्यधिक वोल्टेज को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में डिस्चार्ज कर देती है, जिससे संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
- वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability): ग्राउंडिंग विद्युत प्रणाली में वोल्टेज के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है, जिससे ओवरलोड या अचानक वोल्टेज में उतार-चढ़ाव (Spikes) से होने वाली क्षति कम हो जाती है।
3. आग के खतरों को कम करना
- जब कोई खराबी आती है और अतिरिक्त करंट उत्पन्न होता है, तो ग्राउंडिंग इसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी में भेजकर उस गर्मी को बनने से रोकती है जो आग का कारण बन सकती है।
4. सिस्टम की स्थिरता बनाए रखना
- ग्राउंडिंग सिस्टम में एक स्थिर वोल्टेज स्तर बनाए रखने में मदद करती है, जिससे पूरे विद्युत तंत्र का विश्वसनीय और सही तरीके से संचालन सुनिश्चित होता है।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग का प्राथमिक उद्देश्य पृथ्वी पर दोष धाराओं को सुरक्षित रूप से ले जाकर वोल्टेज संचय को रोकना और इस प्रकार जीवन और उपकरणों दोनों की सुरक्षा करना है।
ग्राउंडिंग का कार्य
ग्राउंडिंग (Grounding) जिसे भू-संपर्कन या अर्थिंग भी कहते हैं, एक विद्युत प्रणाली में निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य करती है:
1. सुरक्षा प्रदान करना (Safety Provision)
ग्राउंडिंग का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण कार्य मनुष्यों को बिजली के झटके से बचाना है।
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दोष धारा का विसर्जन (Discharge of Fault Current): जब किसी उपकरण के धातु के आवरण (Metal Body) में किसी खराबी (जैसे तार का कटना या इंसुलेशन फेल होना) के कारण गलती से करंट आ जाता है, तो ग्राउंडिंग एक कम प्रतिरोध (Low Resistance) वाला सुरक्षित मार्ग प्रदान करती है।
- यह दोष धारा (Fault Current) इस कम प्रतिरोध वाले मार्ग से होकर सीधे पृथ्वी (Earth) में चली जाती है।
- इससे उपकरण को छूने वाले व्यक्ति के शरीर से होकर करंट प्रवाहित होने का खतरा समाप्त हो जाता है या कम हो जाता है।
- आग से बचाव: दोष धारा को तुरंत पृथ्वी में भेजने से चिंगारी निकलने या अत्यधिक गर्मी पैदा होने का जोखिम कम हो जाता है, जिससे आग लगने का खतरा टल जाता है।
2. वोल्टेज को स्थिर रखना (Voltage Stabilization)
- ग्राउंडिंग यह सुनिश्चित करती है कि विद्युत प्रणाली में वोल्टेज का स्तर एक शून्य संदर्भ विभव (Zero Potential Reference) पर स्थिर रहे।
- यह ओवरलोड या सिस्टम में अचानक बदलाव के कारण होने वाले खतरनाक वोल्टेज संचय (Voltage Buildup) को रोकती है, जिससे सुचारु और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित होता है।
3. उपकरणों की सुरक्षा (Equipment Protection)
- सर्ज़ प्रोटेक्शन (Surge Protection): ग्राउंडिंग बिजली गिरने (Lightning Strike) या बिजली की लाइन में किसी अन्य गड़बड़ी (Switching Surges) के कारण उत्पन्न होने वाले अत्यधिक वोल्टेज स्पाइक्स (Spikes) को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में विलीन कर देती है।
- यह संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है और उनकी जीवन अवधि को बढ़ाती है।
4. न्यूट्रल को संदर्भ देना (Neutral Referencing)
- ट्रांसफॉर्मर के स्टार पॉइंट (Neutral Point) को ग्राउंडिंग से जोड़कर, सिस्टम को एक निश्चित वोल्टेज संदर्भ दिया जाता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम के फेज वायर और जमीन के बीच वोल्टेज एक सुरक्षित सीमा के भीतर रहे।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग का कार्य दोष की स्थिति में अतिरिक्त और खतरनाक विद्युत ऊर्जा को पृथ्वी में फैलाकर, जीवन, उपकरण और सिस्टम की स्थिरता को सुनिश्चित करना है।
ग्राउंडिंग का कार्य सिद्धांत
ग्राउंडिंग (Grounding) या भू-संपर्कन का कार्य सिद्धांत (Working Principle) दो मूलभूत विद्युत सिद्धांतों पर आधारित है: न्यूनतम प्रतिरोध का मार्ग (Path of Least Resistance) और शून्य विभव संदर्भ (Zero Potential Reference)।
ग्राउंडिंग सिस्टम इन सिद्धांतों पर कैसे कार्य करता है, इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
1. न्यूनतम प्रतिरोध का मार्ग (Path of Least Resistance)
यह सिद्धांत ओह्म के नियम (V = IR) पर आधारित है, जिसके अनुसार विद्युत धारा (Electric Current) हमेशा वह मार्ग चुनती है जहाँ प्रतिरोध (Resistance) सबसे कम हो।
- सामान्य स्थिति में: विद्युत धारा को केवल लाइव तार (Phase/Hot Wire) और न्यूट्रल तार के बीच प्रवाहित होना चाहिए। ग्राउंडिंग तार में कोई करंट नहीं बहता है क्योंकि सर्किट पूरा नहीं होता है।
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दोष की स्थिति में (Fault Condition):
- जब किसी उपकरण के धातु के खोल (Metal Body) में कोई खराबी (जैसे शॉर्ट सर्किट या इंसुलेशन टूटना) के कारण गलती से करंट आ जाता है (दोष धारा), तो यह धातु का खोल चार्ज हो जाता है।
- ग्राउंडिंग तार को इस खोल से जोड़ा जाता है और उसे एक अत्यधिक कम प्रतिरोध वाले मार्ग (अर्थिंग रॉड या प्लेट) के माध्यम से सीधे पृथ्वी में गाड़ा जाता है।
- चूंकि मानव शरीर का प्रतिरोध (Body Resistance) ग्राउंडिंग तार के प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है, इसलिए दोष धारा कम प्रतिरोध वाले मार्ग (ग्राउंडिंग तार) से होकर तुरंत पृथ्वी में चली जाती है।
- इससे उपकरण को छूने वाले व्यक्ति को बिजली का झटका नहीं लगता है, क्योंकि उसके शरीर से नाममात्र का ही करंट प्रवाहित होता है।
2. शून्य विभव संदर्भ (Zero Potential Reference)
पृथ्वी (Earth) को एक विशाल चालक (Huge Conductor) माना जाता है जिसका विभव (Potential) हमेशा शून्य वोल्ट (Zero Volts) माना जाता है।
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आवेश विसर्जन (Charge Dissipation): जब किसी चालक वस्तु को ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Earth Electrode) के माध्यम से पृथ्वी से जोड़ा जाता है, तो अतिरिक्त आवेश (Excess Charge) पृथ्वी में स्थानांतरित हो जाता है।
- यह आवेशित वस्तु शून्य विभव पर आ जाती है।
- विद्युत प्रणालियों में, ग्राउंडिंग यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी समय, उपकरण की धातु की बॉडी का विभव शून्य के करीब रहे।
- वोल्टेज स्थिरता: दोष की स्थिति में दोष धारा को पृथ्वी में प्रवाहित करके, यह खतरनाक वोल्टेज संचय (Voltage Buildup) को रोकती है और पूरे सिस्टम में वोल्टेज के स्तर को स्थिर (Stablized) रखती है।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग का कार्य सिद्धांत यह है कि यह दोष धाराओं को कम प्रतिरोध वाला वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है, जिससे वे खतरनाक वोल्टेज स्तर उत्पन्न किए बिना सुरक्षित रूप से पृथ्वी (शून्य विभव) में विसर्जित हो सकें।
ग्राउंडिंग के प्रकार
ग्राउंडिंग (Grounding) या भू-संपर्कन के प्रकारों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
अर्थिंग इलेक्ट्रोड के आधार पर प्रकार (Based on Earthing Electrode/Installation Method): यह वह तरीका है जिससे ज़मीन के अंदर इलेक्ट्रोड गाड़ा जाता है।सिस्टम ग्राउंडिंग के प्रकार (Based on System Neutral Connection): यह बताता है कि विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट को ज़मीन से कैसे जोड़ा गया है।
1. अर्थिंग इलेक्ट्रोड के आधार पर मुख्य प्रकार
इन प्रकारों का उपयोग उपकरण की सुरक्षा (Equipment Earthing) के लिए किया जाता है, जहाँ उपकरण के धातु के भाग को ज़मीन से जोड़ा जाता है।
A. प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)
- विधि: इस विधि में एक बड़ी कॉपर (तांबा) या गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) प्लेट को लंबवत (vertically) ज़मीन में काफी गहराई तक गाड़ा जाता है।
- उपयोग: इसका उपयोग आमतौर पर बड़े सबस्टेशनों और पावर जनरेशन प्लांट में किया जाता है, जहाँ कम प्रतिरोध (Low Resistance) और उच्च दोष धारा (High Fault Current) वहन क्षमता की आवश्यकता होती है।
B. पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing)
- विधि: यह सबसे आम और लोकप्रिय तरीका है। इसमें एक गैल्वेनाइज्ड आयरन (GI) पाइप को ज़मीन में गाड़ा जाता है। पाइप के चारों ओर नमक और चारकोल (कोयला) की परत बिछाई जाती है ताकि मिट्टी का प्रतिरोध कम हो सके।
- उपयोग: घरों, छोटे-से-मध्यम आकार की औद्योगिक प्रतिष्ठानों और वाणिज्यिक भवनों में व्यापक रूप से उपयोग होता है।
C. रॉड अर्थिंग (Rod Earthing)
- विधि: इस विधि में कॉपर या GI की एक लंबी रॉड को हथौड़े की मदद से ज़मीन में गाड़ा जाता है।
- उपयोग: यह उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ ज़मीन पथरीली नहीं है और आसानी से नमी वाली ज़मीन तक पहुँचा जा सकता है।
D. स्ट्रिप/वायर अर्थिंग (Strip/Wire Earthing)
- विधि: इसमें कॉपर या GI की स्ट्रिप्स या गोल तार को ज़मीन की सतह से थोड़ा नीचे क्षैतिज (horizontally) रूप से दफनाया जाता है।
- उपयोग: यह विशेष रूप से उन स्थानों पर उपयोग होती है जहाँ रॉड या पाइप को गहराई तक गाड़ना मुश्किल होता है, जैसे चट्टानी क्षेत्र।
2. सिस्टम ग्राउंडिंग के प्रकार (Neutral Grounding)
यह उच्च वोल्टेज प्रणालियों (जैसे ट्रांसफार्मर) में न्यूट्रल पॉइंट को ज़मीन से जोड़ने के तरीके से संबंधित है ताकि सिस्टम की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इसके मुख्य तीन प्रकार हैं:
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प्रकार (Type)
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विवरण (Description)
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मुख्य उद्देश्य (Main Purpose)
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सॉलिड ग्राउंडिंग
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न्यूट्रल को सीधे बिना किसी रुकावट के ज़मीन से जोड़ा जाता है।
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दोष धाराओं का त्वरित निस्तारण, सरल और सबसे आम।
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रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग
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न्यूट्रल और ज़मीन के बीच एक प्रतिरोधक (Resistor) जोड़ा जाता है।
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दोष धारा को एक नियंत्रित सीमा तक सीमित करना।
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रिएक्टेंस ग्राउंडिंग
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न्यूट्रल और ज़मीन के बीच एक इंडक्टर (Inductor) (रिएक्टर) जोड़ा जाता है।
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दोष धारा को नियंत्रित करना और क्षणिक ओवर-वोल्टेज (Transient Over-voltages) को कम करना।
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उपकरण ग्राउंडिंग
उपकरण ग्राउंडिंग (Equipment Grounding) एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है जिसका उपयोग विद्युत उपकरणों को बिजली के झटके से बचाने और उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
यहाँ इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
उपकरण ग्राउंडिंग (Equipment Grounding) क्या है?
उपकरण ग्राउंडिंग का अर्थ है विद्युत उपकरण के धातु के बाहरी आवरण (Metallic Enclosure) को पृथ्वी (Ground) से एक निम्न-प्रतिरोध पथ (low-resistance path) के माध्यम से जोड़ना।
यह कनेक्शन आमतौर पर एक ग्राउंडिंग कंडक्टर (जैसे कि हरे रंग का तार) के माध्यम से किया जाता है, जो उपकरण को मुख्य ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड सिस्टम से जोड़ता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है? (उद्देश्य)
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की खराबी (fault) होने पर, उपकरण के धातु के हिस्सों पर खतरनाक वोल्टेज (potential) जमा न हो।
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बिजली के झटके से सुरक्षा (Shock Protection):
- यदि एक "लाइव" तार (live wire) गलती से उपकरण के धातु के आवरण को छू लेता है (उदाहरण के लिए, इन्सुलेशन फेल होने के कारण), तो ग्राउंडिंग तार तुरंत फॉल्ट करंट को जमीन में ले जाता है।
- यह उपकरण के आवरण को "ग्राउंड पोटेंशियल" (शून्य वोल्टेज) पर रखता है, जिससे किसी व्यक्ति के उपकरण को छूने पर बिजली का झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।
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सर्किट प्रोटेक्शन को सक्रिय करना (Activate Protection):
- ग्राउंडिंग के कारण बहुत अधिक फॉल्ट करंट (Fault Current) प्रवाहित होता है, जो तुरंत फ्यूज (Fuse) या सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) को ट्रिप कर देता है।
- इससे बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद हो जाती है, जो उपकरण और वायरिंग को क्षति से बचाता है और खतरे को कम करता है।
उपकरण ग्राउंडिंग सिस्टम के मुख्य घटक
- ग्राउंडिंग कंडक्टर (Grounding Conductor/Wire): यह वह तार है जो उपकरण के चेसिस (Chassis) को ग्राउंडिंग टर्मिनल से जोड़ता है (अक्सर हरे या नंगे तांबे का तार)।
- ग्राउंडिंग टर्मिनल (Grounding Terminal): यह बिजली के आउटलेट या पैनल में वह बिंदु होता है जहाँ ग्राउंडिंग कंडक्टर जुड़ा होता है।
- ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Grounding Electrode): यह जमीन में गड़ा हुआ एक चालक (जैसे कि तांबे की छड़ या धातु की प्लेट) होता है जो पूरे सिस्टम को पृथ्वी से भौतिक रूप से जोड़ता है।
- ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड कंडक्टर (Grounding Electrode Conductor): यह ग्राउंडिंग टर्मिनल को ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड से जोड़ता है।
ग्राउंडिंग और न्यूट्रल में अंतर
ग्राउंडिंग और न्यूट्रल (Neutral) अक्सर भ्रमित करते हैं, लेकिन वे अलग-अलग उद्देश्य पूरा करते हैं:
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विशेषता
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ग्राउंडिंग (Ground/भू-सम्पर्कन)
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न्यूट्रल (Neutral/तटस्थ)
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उद्देश्य
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सुरक्षा: गलती (Fault) होने पर व्यक्तियों और उपकरणों की रक्षा करना।
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सर्किट पूर्ण करना: सामान्य परिचालन के दौरान करंट का वापसी पथ प्रदान करना।
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सामान्य स्थिति
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करंट नहीं: सामान्यतः इसमें करंट प्रवाहित नहीं होता है।
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करंट प्रवाहित: सामान्य परिचालन के दौरान इसमें करंट प्रवाहित होता है।
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रंग कोड
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हरा, पीला/हरा धारीदार, या नंगा तांबा।
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काला/नीला (DC), सफेद या हल्का ग्रे (AC)।
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ग्राउंडिंग और अर्थिंग के बीच अंतर
ग्राउंडिंग (Grounding) और अर्थिंग (Earthing) दो शब्द हैं जिनका उपयोग अक्सर एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से, खासकर विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों (जैसे US बनाम UK/India) में, उनके अर्थ और अनुप्रयोग में एक महत्वपूर्ण अंतर होता है।
ग्राउंडिंग बनाम अर्थिंग: मुख्य अंतर
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विशेषता
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अर्थिंग (Earthing) - उपकरण सुरक्षा
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ग्राउंडिंग (Grounding) - सिस्टम सुरक्षा
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संरक्षित भाग
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गैर-धारा वाहक भाग (Dead Part): उपकरण के धातु के आवरण, चेसिस, आदि।
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धारा वाहक भाग (Live Part): ट्रांसफार्मर या जनरेटर का न्यूट्रल (Neutral) बिंदु, आदि।
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मुख्य उद्देश्य
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मानव सुरक्षा: गलती होने पर बिजली के झटके से बचाना।
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सिस्टम सुरक्षा: सिस्टम को असंतुलन (unbalance), ओवरवोल्टेज और बिजली गिरने से बचाना।
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सामान्य स्थिति
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करंट नहीं: सामान्य परिचालन के दौरान इसमें कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है (सिर्फ लीकेज करंट)।
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करंट प्रवाहित: सामान्य परिचालन के दौरान भी न्यूट्रल में करंट प्रवाहित हो सकता है (असंतुलित लोड के कारण)।
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स्थान
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यह उपकरण बॉडी और अर्थ पिट के बीच स्थित होता है।
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यह सिस्टम न्यूट्रल और अर्थ (जमीन) के बीच स्थित होता है।
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प्रभावी क्षेत्र
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व्यक्तिगत उपकरण या मशीन की सुरक्षा।
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पूरे विद्युत सिस्टम (जैसे सबस्टेशन या ट्रांसफार्मर) की सुरक्षा।
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1. अर्थिंग (Earthing) - मानव सुरक्षा के लिए
अर्थिंग का मतलब है किसी भी विद्युत उपकरण के धातु के बाहरी आवरण (वह भाग जिसमें सामान्यतः करंट नहीं होता) को निम्न-प्रतिरोध तार के माध्यम से सीधे पृथ्वी (जमीन) से जोड़ना।
- उदाहरण: आपके घर के रेफ्रिजरेटर, कंप्यूटर या वाशिंग मशीन के प्लग में तीसरा, मोटा पिन (अर्थ पिन) उपकरण की बॉडी को ज़मीन से जोड़ता है।
- कार्य: यदि लाइव वायर गलती से उपकरण की बॉडी को छू ले, तो फॉल्ट करंट तुरंत अर्थ वायर के माध्यम से ज़मीन में चला जाता है। इससे बॉडी का वोल्टेज शून्य हो जाता है और सर्किट ब्रेकर (MCB) या फ्यूज ट्रिप हो जाता है, जिससे व्यक्ति को झटका नहीं लगता।
2. ग्राउंडिंग (Grounding) - सिस्टम सुरक्षा के लिए
ग्राउंडिंग (या सिस्टम ग्राउंडिंग) का मतलब है विद्युत प्रणाली के एक करंट-वाहक भाग (आमतौर पर ट्रांसफार्मर या जनरेटर का न्यूट्रल बिंदु) को सीधे पृथ्वी से जोड़ना।
- उदाहरण: सबस्टेशन या वितरण ट्रांसफार्मर पर न्यूट्रल पॉइंट को ज़मीन से जोड़ा जाता है।
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कार्य:
- यह न्यूट्रल पॉइंट को शून्य विभव (Zero Potential) पर स्थिर करता है।
- यह बिजली के ओवरलोड (Overload) या असंतुलन (Unbalance) की स्थिति में अतिरिक्त करंट को ज़मीन में सुरक्षित रूप से प्रवाहित करने का मार्ग देता है, जिससे सिस्टम और उससे जुड़े उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
ग्राउंडिंग के घटक
ग्राउंडिंग सिस्टम (Grounding System) को प्रभावी और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घटक एक साथ काम करते हैं। यहाँ विद्युत ग्राउंडिंग के प्रमुख घटक दिए गए हैं, जिन्हें अक्सर "अर्थिंग" भी कहा जाता है:
ग्राउंडिंग सिस्टम के मुख्य घटक
ग्राउंडिंग सिस्टम के मुख्य रूप से तीन प्रमुख भाग होते हैं, जो एक सुरक्षित निम्न-प्रतिरोध पथ (low-resistance path) बनाने के लिए आवश्यक हैं:
1. ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Grounding Electrode)
यह सिस्टम का वह मुख्य भाग है जो सीधे पृथ्वी (जमीन) के साथ संपर्क स्थापित करता है। इसका उद्देश्य फॉल्ट करंट (fault current) को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करना है।
- परिभाषा: एक चालक (Conductor) जिसे पृथ्वी की सतह के नीचे गाड़ा या स्थापित किया जाता है।
- सामग्री: आमतौर पर तांबा (Copper) या जस्तीकृत स्टील (Galvanized Steel) की छड़ें, प्लेटें या स्ट्रिप्स का उपयोग किया जाता है।
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प्रकार:
- ग्राउंड रॉड (Ground Rod/छड़): ये सबसे आम हैं—तांबे की लेपित छड़ें जिन्हें ज़मीन में लंबवत (vertically) गाड़ दिया जाता है (आमतौर पर न्यूनतम 8 फीट या 2.5 मीटर)।
- ग्राउंड प्लेट (Ground Plate): तांबे या गैल्वेनाइज्ड लोहे की प्लेटें, जिनका उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ मिट्टी का प्रतिरोध अधिक होता है।
- प्राकृतिक इलेक्ट्रोड: भवन की नींव में दबी हुई धातु संरचनाएं, जैसे प्रबलित कंक्रीट (Rebar)।
2. ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड कंडक्टर (Grounding Electrode Conductor - GEC)
यह वह तार या केबल है जो विद्युत प्रणाली को ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड से जोड़ता है।
- परिभाषा: यह चालक मुख्य विद्युत पैनल या सर्विस इक्विपमेंट के ग्राउंडिंग बस बार को सीधे ग्राउंड रॉड से जोड़ता है।
- सामग्री: उच्च चालकता वाला तांबा या एल्यूमीनियम तार। इसे फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से वहन करने के लिए पर्याप्त मोटाई (गेज) का होना चाहिए।
- कार्य: यह फॉल्ट करंट के लिए निम्न-प्रतिरोध वाला मुख्य मार्ग प्रदान करता है।
3. उपकरण ग्राउंडिंग कंडक्टर (Equipment Grounding Conductor - EGC)
यह वह तार है जो उपकरण के धातु के आवरणों को ग्राउंडिंग सिस्टम से जोड़ता है।
- परिभाषा: यह तार उपकरण (जैसे मोटर, मशीन या आउटलेट) के धातु के बाह्य भागों को मुख्य विद्युत पैनल के ग्राउंड बस बार से जोड़ता है।
- रंग: आमतौर पर यह हरा (Green) या नंगा तांबा (Bare Copper) होता है।
- कार्य: यह सुनिश्चित करता है कि फॉल्ट होने पर उपकरण के छूने योग्य भाग शून्य वोल्टेज (Ground Potential) पर बने रहें, जिससे बिजली का झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।
4. ग्राउंड बस बार (Ground Bus Bar)
यह मुख्य विद्युत पैनल या डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड के अंदर एक केंद्रीय टर्मिनल होता है।
- परिभाषा: पैनल के अंदर एक धातु की पट्टी या टर्मिनल ब्लॉक।
- कार्य: यह वह साझा बिंदु है जहाँ सभी उपकरण ग्राउंडिंग कंडक्टर (EGC), न्यूट्रल कंडक्टर, और ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड कंडक्टर (GEC) आपस में जुड़े होते हैं (हालांकि न्यूट्रल और ग्राउंड केवल सर्विस एंट्री पॉइंट पर ही जुड़े होते हैं)।
5. ग्राउंड पिट/अर्थ पिट (Ground Pit / Earth Pit)
यह एक संरचना है जो ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड को घेरती है।
- परिभाषा: इलेक्ट्रोड को मिट्टी में गाड़ने के बाद उसके ऊपर बनाया गया एक छोटा गड्ढा या चैम्बर।
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कार्य:
- रखरखाव: यह इलेक्ट्रोड और GEC कनेक्शन के निरीक्षण और रखरखाव की अनुमति देता है।
- कंडक्टिविटी बढ़ाना: कई बार पिट में कोयला और नमक जैसे पदार्थ डाले जाते हैं ताकि ज़मीन की चालकता (Conductivity) बनी रहे, खासकर शुष्क क्षेत्रों में।
इन सभी घटकों को इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि वे एक सतत (Continuous) और कम-प्रतिरोध वाला पथ प्रदान करें ताकि बिजली की खराबी की स्थिति में करंट सुरक्षित रूप से जमीन में समा जाए।
ग्राउंडिंग का निर्माण
ग्राउंडिंग सिस्टम (Earthing System) का निर्माण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके लिए सही योजना, सामग्री और स्थापना विधि की आवश्यकता होती है। इसे करने के दो मुख्य तरीके हैं: पारंपरिक प्लेट/पाइप अर्थिंग और आधुनिक केमिकल (रॉड) अर्थिंग।
यहाँ पारंपरिक अर्थिंग के निर्माण की चरण-दर-चरण प्रक्रिया दी गई है:
ग्राउंडिंग/अर्थिंग का निर्माण (पारंपरिक विधि)
ग्राउंडिंग सिस्टम के निर्माण का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी के साथ एक स्थायी, निम्न-प्रतिरोध संपर्क बनाना है, जो आमतौर पर 1 Omega से 8 Omega के बीच होना चाहिए (मानक और अनुप्रयोग के अनुसार)।
1. स्थल चयन और खुदाई (Site Selection & Excavation)
- स्थान: ऐसी जगह चुनें जहाँ की मिट्टी में नमी (Moisture) अच्छी हो, ताकि प्रतिरोध (Resistance) कम रहे। यह भी सुनिश्चित करें कि जगह लोगों की पहुँच से दूर और सुरक्षित हो।
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गड्ढा खोदना:
- प्लेट अर्थिंग के लिए: लगभग 2 \text{ फीट} \times 2 \text{ फीट} का चौकोर गड्ढा खोदें। इसकी गहराई लगभग 5 फीट से 10 फीट तक हो सकती है, जहाँ तक संभव हो नमी वाली परत तक पहुँचना आवश्यक है।
- पाइप अर्थिंग के लिए: एक 38 \text{ मिमी} व्यास के GI पाइप को 2.5 से 3 मीटर की गहराई तक गाड़ने के लिए आवश्यक गड्ढा खोदें।
2. ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड की स्थापना (Electrode Installation)
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प्लेट/पाइप लगाना:
- प्लेट/पाइप इलेक्ट्रोड को गड्ढे के तल पर लंबवत (Vertically) रखें। (प्लेट का आकार सामान्यतः 60 { x } 60 { सेमी} या 50 { x } 50 { सेमी} हो सकता है)।
- प्लेट/पाइप को एक ग्राउंडिंग स्ट्रिप (पट्टी) या मोटे तार से जोड़ें। यह जोड़ बोल्ट और वॉशर या हॉट मेल्ट वेल्डिंग (Hot Melt Welding) द्वारा मजबूत और जंग-प्रतिरोधी होना चाहिए।
3. भरण सामग्री डालना (Adding Backfill Material)
यह चरण ग्राउंडिंग प्रतिरोध को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
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सामग्री: इलेक्ट्रोड के चारों ओर नमक (Salt) और लकड़ी का कोयला (Charcoal) की परतें डाली जाती हैं।
- पहले कोयले की एक परत, फिर नमक की एक परत, फिर कोयले की एक परत - इस क्रम में भरण सामग्री को गड्ढे में भरते हैं।
- नमक पानी को अवशोषित करके मिट्टी में आयनों (Ions) की सांद्रता बढ़ाता है, जिससे चालकता (Conductivity) बढ़ती है।
- कोयला नमी को बनाए रखने और जंग लगने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है।
- केमिकल अर्थिंग: आधुनिक प्रणालियों में, इसके बजाय एक अर्थ एन्हांसिंग कंपाउंड (अर्थिंग केमिकल पाउडर) का उपयोग किया जाता है, जिसे पानी के साथ मिलाकर रोड के चारों ओर डाला जाता है। यह बार-बार पानी डालने की आवश्यकता को कम करता है।
4. इलेक्ट्रोड कंडक्टर कनेक्शन (GEC Connection)
- कनेक्शन: ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड से निकाली गई स्ट्रिप या तार को मुख्य विद्युत पैनल में स्थित ग्राउंड बस बार से जोड़ा जाता है।
- सुरक्षा: इस तार को यांत्रिक क्षति से बचाने के लिए इसे GI पाइप के माध्यम से सतह तक लाना चाहिए।
5. अर्थ पिट चैम्बर (Earth Pit Chamber)
- निर्माण: सतह पर, इलेक्ट्रोड के ऊपर एक निरीक्षण चैम्बर (Inspection Chamber) या ढक्कन वाला सीमेंट का पिट बनाया जाता है।
- उद्देश्य: यह रखरखाव (पानी डालना) और परीक्षण (रेजिस्टेंस चेक) के लिए पहुँच प्रदान करता है।
6. परीक्षण (Testing)
- रेजिस्टेंस मापन: इंस्टॉलेशन के बाद, पूरे सिस्टम के ग्राउंड रेजिस्टेंस को अर्थ टेस्टर (Earth Tester) या मेगर का उपयोग करके मापा जाता है।
- मानक: यह सुनिश्चित किया जाता है कि रेजिस्टेंस वांछित सुरक्षा मानक (आमतौर पर 8 { ओम} से कम, आदर्श रूप से 1 { ओम} से कम) को पूरा करता है। यदि मान अधिक आता है, तो नमी बढ़ाने के लिए गड्ढे में पानी डाला जाता है या एक और इलेक्ट्रोड जोड़ा जाता है।
ग्राउंडिंग के लाभ
ग्राउंडिंग (Grounding) या अर्थिंग विद्युत सुरक्षा का आधार स्तंभ है। इसके कई महत्वपूर्ण लाभ हैं जो न केवल उपकरणों बल्कि जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
यहाँ ग्राउंडिंग के प्रमुख लाभ दिए गए हैं:
ग्राउंडिंग के मुख्य लाभ
1. बिजली के झटके से सुरक्षा (Protection from Electrical Shock)
यह ग्राउंडिंग का सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक लाभ है।
- सुरक्षित पथ: यदि किसी खराबी (Fault) के कारण लाइव (Live) तार गलती से उपकरण के धात्विक आवरण को छू लेता है, तो ग्राउंडिंग तार तुरंत इस फॉल्ट करंट को कम प्रतिरोध वाले मार्ग से सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित कर देता है।
- शून्य विभव: इससे उपकरण का आवरण शून्य विभव (Zero Potential) पर बना रहता है। जब कोई व्यक्ति उपकरण को छूता है, तो करंट व्यक्ति के शरीर से प्रवाहित होने के बजाय ग्राउंड तार से प्रवाहित हो जाता है, जिससे बिजली का झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।
2. सर्किट सुरक्षा उपकरणों का सक्रियण (Activation of Protection Devices)
ग्राउंडिंग, फ्यूज और सर्किट ब्रेकर (Circuit Breakers) जैसे सुरक्षा उपकरणों को कुशलता से काम करने में सक्षम बनाता है।
- उच्च करंट: फॉल्ट करंट को जमीन में प्रवाहित करने के लिए एक निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करके, ग्राउंडिंग यह सुनिश्चित करता है कि फॉल्ट की स्थिति में करंट का मान बहुत अधिक हो जाए।
- तेज ट्रिपिंग: करंट के उच्च मान से फ्यूज तुरंत पिघल जाता है या सर्किट ब्रेकर तुरंत ट्रिप (Trip) हो जाता है। इससे आपूर्ति तुरंत बंद हो जाती है, जिससे उपकरण और वायरिंग को क्षति से बचाया जा सकता है।
3. ओवरवोल्टेज सुरक्षा (Overvoltage Protection)
ग्राउंडिंग सिस्टम ओवरवोल्टेज की खतरनाक घटनाओं से बचाव करता है।
- आकाशीय बिजली: जब आकाशीय बिजली (Lightning) सिस्टम पर हमला करती है, तो ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड इस अत्यधिक उच्च वोल्टेज और करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में फैला देता है, जिससे उपकरणों को गंभीर क्षति से बचाया जा सकता है।
- सर्जेस (Surges): सिस्टम में होने वाले अन्य क्षणिक सर्ज (Transient Surges) को भी ग्राउंडिंग सिस्टम द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
4. वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization)
ग्राउंडिंग विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल बिंदु को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- संदर्भ बिंदु: यह न्यूट्रल कंडक्टर को पृथ्वी के शून्य विभव पर स्थिर करता है, जिससे सिस्टम में वोल्टेज को एक स्थिर संदर्भ बिंदु मिलता है।
- असंतुलन को कम करना: यह अनियंत्रित वोल्टेज परिवर्तनों को रोकता है, खासकर जब सिस्टम में लोड असंतुलित (Unbalanced Load) हो।
5. ट्रांसफार्मर और मोटर्स की सुरक्षा
- ग्राउंडिंग ट्रांसफार्मर वाइंडिंग और मोटर कॉइल्स में उच्च वोल्टेज स्ट्रेस (High Voltage Stress) को कम करने में मदद करता है, जिससे उनका इन्सुलेशन विफल होने से बचता है और उपकरणों का जीवनकाल बढ़ता है।
6. विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप में कमी (Reduction in EMI)
- ग्राउंडिंग सिस्टम विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (Electromagnetic Interference - EMI) को कम करने में मदद करता है। यह संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक है (जैसे कंप्यूटर और संचार उपकरण), जो एक स्वच्छ और स्थिर ग्राउंड रेफरेंस पर निर्भर करते हैं।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग एक अदृश्य सुरक्षा कवच है जो यह सुनिश्चित करता है कि विद्युत ऊर्जा का उपयोग सुरक्षित और कुशल तरीके से हो।
आधारभूत स्तर के प्रश्न
मैं आपको ग्राउंडिंग/अर्थिंग (Grounding/Earthing) से संबंधित कुछ आधारभूत स्तर के प्रश्न पूछ सकता हूँ।
आपके ज्ञान का परीक्षण करने के लिए, क्या आप इन सवालों के जवाब दे सकते हैं?
आधारभूत ग्राउंडिंग प्रश्नोत्तरी
1. ग्राउंडिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) केवल सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करना।
b) उपकरणों को बिजली की आपूर्ति बढ़ाना।
c) बिजली के झटके से व्यक्तियों की सुरक्षा करना।
d) केवल न्यूट्रल तार को सहारा देना।
2. एक उपकरण के धातु के बाहरी आवरण को ज़मीन से जोड़ने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
a) न्यूट्रलाइजिंग (Neutralizing)
b) अर्थिंग/उपकरण ग्राउंडिंग (Earthing/Equipment Grounding)
c) फ़ेज़िंग (Phasing)
d) शॉर्ट सर्किट (Short Circuit)
3. एक प्रभावी ग्राउंडिंग सिस्टम का प्रतिरोध (Resistance) कितना होना चाहिए?
a) 100 ओम से अधिक।
b) जितना अधिक हो उतना अच्छा।
c) 8 ओम से कम (आमतौर पर 5 ओम से भी कम)।
d) इसका प्रतिरोध से कोई लेना-देना नहीं है।
4. अर्थिंग के लिए आमतौर पर किस रंग के तार का उपयोग किया जाता है?
a) लाल (Red)
b) काला (Black)
c) सफेद (White)
d) हरा (Green) या नंगा तांबा (Bare Copper)
5. ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Grounding Electrode) को पृथ्वी में क्यों गाड़ा जाता है?
a) नमी से बचाने के लिए।
b) करंट के लिए निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करने के लिए।
c) यह सौंदर्य की दृष्टि से अच्छा लगता है।
d) केवल ओवरहेड लाइनों को सहारा देने के लिए।
कृपया अपने जवाब दें! मैं आपको सही उत्तर और आवश्यक स्पष्टीकरण प्रदान करूँगा।
ग्राउंडिंग क्या है?
ग्राउंडिंग (Grounding) या अर्थिंग (Earthing) विद्युत सुरक्षा का एक मूलभूत सिद्धांत है।
ग्राउंडिंग क्या है?
परिभाषा:
ग्राउंडिंग का तात्पर्य किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण के धात्विक (Metallic) गैर-धारा-वाहक भागों को जानबूझकर और भौतिक रूप से एक निम्न-प्रतिरोध पथ (low-resistance path) के माध्यम से पृथ्वी (Ground) से जोड़ना है।
इसे उपकरण ग्राउंडिंग (Equipment Grounding) भी कहते हैं, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षा है।
यह क्यों किया जाता है? (उद्देश्य)
ग्राउंडिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की विद्युत खराबी (Electrical Fault) की स्थिति में:
- बिजली के झटके से सुरक्षा: उपकरण के बाहरी धातु के हिस्सों पर खतरनाक वोल्टेज (Potential) जमा न हो। यदि कोई "लाइव" तार गलती से उपकरण की बाहरी बॉडी को छूता है, तो ग्राउंडिंग तार उस फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से ज़मीन में प्रवाहित कर देता है, जिससे व्यक्ति को झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।
- सुरक्षा उपकरणों का सक्रियण: यह उच्च फॉल्ट करंट के लिए एक आसान रास्ता प्रदान करता है। करंट के अचानक बढ़ने से फ्यूज (Fuse) या सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) तुरंत ट्रिप हो जाता है, जिससे बिजली की आपूर्ति कट जाती है और उपकरण सुरक्षित हो जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
- निम्न-प्रतिरोध पथ: ग्राउंडिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले तार (आमतौर पर हरे रंग का) का प्रतिरोध (Resistance) बहुत कम होना चाहिए ताकि करंट आसानी से जमीन में जा सके।
- ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड: यह कनेक्शन एक तांबे की छड़ या प्लेट के माध्यम से किया जाता है जिसे ज़मीन में गाड़ा जाता है, जिसे ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड कहते हैं।
ग्राउंडिंग एक सुरक्षा प्रणाली है जो विद्युत ऊर्जा का उपयोग करते समय जीवन और संपत्ति दोनों की रक्षा करती है।
ग्राउंडिंग की आवश्यकता क्यों होती है?
ग्राउंडिंग (Grounding) की आवश्यकता मुख्य रूप से सुरक्षा और विद्युत प्रणाली के स्थायित्व (Stability) के लिए होती है। यह किसी भी विद्युत स्थापना (Electrical Installation) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
यहाँ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि ग्राउंडिंग क्यों आवश्यक है:
ग्राउंडिंग की आवश्यकता क्यों होती है?
ग्राउंडिंग तीन मुख्य क्षेत्रों में सुरक्षा और कार्यक्षमता सुनिश्चित करती है:
1. बिजली के झटके से मानव सुरक्षा (Personal Safety from Shocks)
यह ग्राउंडिंग का सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
- फॉल्ट की स्थिति में: यदि किसी उपकरण (जैसे फ्रिज या मोटर) के अंदर का "लाइव" (Live) तार गलती से उपकरण के बाहरी धातु के आवरण को छू लेता है (इन्सुलेशन फेल होने के कारण), तो वह आवरण भी विद्युतीकृत हो जाता है।
- सुरक्षित मार्ग: अगर कोई व्यक्ति उस उपकरण को छूता है, तो करंट उसके शरीर से प्रवाहित होने की कोशिश करेगा। लेकिन ग्राउंडिंग के कारण, फॉल्ट करंट को एक निम्न-प्रतिरोध वाला रास्ता (ग्राउंड तार) मिल जाता है, जिससे करंट व्यक्ति के बजाय सीधे ज़मीन में चला जाता है।
- परिणाम: उपकरण की बॉडी का वोल्टेज शून्य (Ground Potential) पर बना रहता है, और व्यक्ति को बिजली का झटका नहीं लगता है।
2. सर्किट सुरक्षा उपकरणों का सक्रियण (Activation of Protective Devices)
ग्राउंडिंग, सुरक्षा उपकरणों (जैसे फ्यूज और सर्किट ब्रेकर) को तेज़ी से काम करने में सक्षम बनाता है।
- उच्च फॉल्ट करंट: जब कोई लाइव तार ग्राउंड से जुड़ता है, तो प्रतिरोध (Resistance) बहुत कम होने के कारण अचानक से बहुत अधिक फॉल्ट करंट प्रवाहित होता है।
- तेज ट्रिपिंग: करंट के इस उच्च मान से सर्किट ब्रेकर (MCB) या फ्यूज तुरंत ट्रिप हो जाता है।
- परिणाम: विद्युत आपूर्ति तुरंत कट जाती है, जिससे फॉल्ट की स्थिति समाप्त हो जाती है और वायरिंग, उपकरण को क्षति से बचाया जा सकता है।
3. ओवरवोल्टेज और सर्ज से सुरक्षा (Protection from Overvoltage)
ग्राउंडिंग सिस्टम बाहरी और आंतरिक वोल्टेज सर्ज (Surge) से सुरक्षा प्रदान करता है।
- आकाशीय बिजली (Lightning): जब बिजली गिरती है, तो यह अत्यधिक उच्च वोल्टेज ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड के माध्यम से सुरक्षित रूप से जमीन में फैल जाता है। इससे संवेदनशील उपकरण (जैसे कंप्यूटर, टीवी) सुरक्षित रहते हैं।
- सिस्टम सर्ज: सिस्टम में किसी भी क्षणिक (Transient) या अस्थिर वोल्टेज वृद्धि को भी ग्राउंडिंग सिस्टम द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
4. वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization)
- ग्राउंडिंग विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल (Neutral) बिंदु को पृथ्वी के शून्य विभव पर बनाए रखता है। यह एक स्थिर संदर्भ बिंदु प्रदान करता है, जिससे सिस्टम में वोल्टेज असंतुलन और अनियंत्रित वोल्टेज परिवर्तनों को रोका जा सकता है।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है जो विद्युत ऊर्जा का उपयोग करते समय जानलेवा झटके को रोकने, उपकरणों को बचाने, और विद्युत प्रणाली को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है।
ग्राउंडिंग का मुख्य कार्य क्या है?
ग्राउंडिंग (Grounding) का मुख्य कार्य बहुत स्पष्ट और महत्वपूर्ण है: व्यक्तियों और उपकरणों को विद्युत खतरों से बचाना।
इसे तीन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है:
ग्राउंडिंग का मुख्य कार्य
1. बिजली के झटके से मानव जीवन की रक्षा करना (Primary Role)
यह ग्राउंडिंग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
- सुरक्षित निम्न-प्रतिरोध पथ: ग्राउंडिंग का प्राथमिक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि उपकरण (जैसे रेफ्रिजरेटर, मोटर) के धातु के आवरण पर गलती से करंट प्रवाहित हो जाए (इन्सुलेशन विफल होने पर), तो वह करंट किसी व्यक्ति के शरीर से प्रवाहित होने के बजाय, निम्न-प्रतिरोध वाले ग्राउंडिंग तार के माध्यम से सीधे ज़मीन में चला जाए।
- शून्य विभव बनाए रखना: यह उपकरण के बाहरी हिस्से को सुरक्षित शून्य विभव (Zero Potential) पर बनाए रखता है।
2. सर्किट सुरक्षा उपकरणों को ट्रिप करना (Fault Clearing)
ग्राउंडिंग का एक महत्वपूर्ण कार्य यह सुनिश्चित करना है कि फॉल्ट की स्थिति को तुरंत समाप्त किया जा सके।
- उच्च करंट का निर्माण: ग्राउंडिंग एक निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करता है। जब लाइव तार ग्राउंड से जुड़ता है, तो प्रतिरोध कम होने के कारण अचानक से बहुत अधिक फॉल्ट करंट उत्पन्न होता है।
- तेज ट्रिपिंग: यह उच्च करंट तुरंत फ्यूज को पिघला देता है या सर्किट ब्रेकर (MCB) को ट्रिप कर देता है।
- परिणाम: इससे बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद हो जाती है, जो आग लगने या उपकरण को गंभीर क्षति होने से बचाता है।
3. वोल्टेज को स्थिर करना (Voltage Stabilization)
- ग्राउंडिंग, विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल (Neutral) बिंदु को पृथ्वी के शून्य विभव पर स्थिर करता है, जिससे सिस्टम को एक स्थिर संदर्भ बिंदु मिलता है।
- यह ओवरवोल्टेज (Overvoltage) और बिजली गिरने की स्थिति में अतिरिक्त ऊर्जा को सुरक्षित रूप से ज़मीन में फैलाकर उपकरणों की सुरक्षा करता है।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग का मुख्य कार्य एक सुरक्षित मार्ग (Safety Path) प्रदान करना है, ताकि फॉल्ट करंट नियंत्रित होकर प्रवाहित हो और सुरक्षा उपकरण (MCB/Fuse) उसे तुरंत काट सकें, जिससे जान-माल की रक्षा हो सके।
अर्थिंग और ग्राउंडिंग में क्या अंतर है?
अर्थिंग (Earthing) और ग्राउंडिंग (Grounding) दो शब्द हैं जिनका उपयोग अक्सर एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से (विशेषकर IEC/भारतीय मानकों के अनुसार) उनके कार्य और उद्देश्य में एक महत्वपूर्ण अंतर होता है।
यहाँ मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से बताया गया है:
अर्थिंग (Earthing) बनाम ग्राउंडिंग (Grounding)
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विशेषता
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अर्थिंग (Earthing)
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ग्राउंडिंग (Grounding)
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संरक्षित भाग
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गैर-धारा वाहक भाग (Non-Current Carrying Part): उपकरण का धातु आवरण (Metal Body), चेसिस, आदि।
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धारा वाहक भाग (Current Carrying Part): ट्रांसफार्मर या जनरेटर का न्यूट्रल (Neutral) बिंदु, आदि।
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मुख्य उद्देश्य
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मानव और उपकरण सुरक्षा: गलती (Fault) होने पर बिजली के झटके से बचाना। इसे उपकरण अर्थिंग भी कहते हैं।
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सिस्टम सुरक्षा: वोल्टेज असंतुलन (Unbalance), ओवरवोल्टेज और बिजली गिरने से विद्युत प्रणाली को बचाना। इसे सिस्टम ग्राउंडिंग भी कहते हैं।
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सामान्य स्थिति
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करंट नहीं: सामान्य परिचालन के दौरान इसमें कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है।
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करंट प्रवाहित: असंतुलित लोड की स्थिति में न्यूट्रल में करंट प्रवाहित होता है।
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भौगोलिक उपयोग
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यूरोप, भारत और IEC मानकों में अधिक प्रचलित।
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नॉर्थ अमेरिका (NEC) में अधिक प्रचलित, जहाँ यह दोनों कार्यों को कवर करता है।
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कनेक्शन बिंदु
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उपकरण की बॉडी अर्थिंग कंडक्टर अर्थ इलेक्ट्रोड।
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ट्रांसफार्मर का न्यूट्रल पॉइंट ग्राउंडिंग कंडक्टर अर्थ इलेक्ट्रोड।
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1. अर्थिंग (Earthing) का कार्य (मानव सुरक्षा)
अर्थिंग का मुख्य फोकस व्यक्तिगत सुरक्षा पर होता है।
- यह उपकरण के उस हिस्से (जैसे धातु का केसिंग) को ज़मीन से जोड़ता है जिसमें सामान्यतः करंट नहीं होता।
- यदि अंदर का लाइव तार इन्सुलेशन टूटने के कारण धातु की बॉडी को छूता है, तो अर्थिंग तार तुरंत उच्च फॉल्ट करंट को ज़मीन में प्रवाहित करता है, जिससे सर्किट ब्रेकर या फ्यूज सक्रिय हो जाता है।
- यह उपकरण की बॉडी को शून्य विभव (Zero Potential) पर बनाए रखता है।
2. ग्राउंडिंग (Grounding) का कार्य (सिस्टम सुरक्षा)
ग्राउंडिंग का मुख्य फोकस विद्युत प्रणाली की सुरक्षा और स्थायित्व पर होता है।
- यह विद्युत उत्पादन या वितरण प्रणाली के करंट-वाहक भाग (जैसे ट्रांसफार्मर का न्यूट्रल बिंदु) को ज़मीन से जोड़ता है।
- यह न्यूट्रल बिंदु को स्थिर करता है और ओवरवोल्टेज या असंतुलन की स्थिति में अत्यधिक करंट को सुरक्षित रूप से ज़मीन में प्रवाहित करने का मार्ग प्रदान करता है।
- इसका उद्देश्य सिस्टम को सुरक्षित रूप से संचालित करना है, न कि केवल मानव को झटका लगने से बचाना।
संक्षेप में:
- अर्थिंग = मानव/उपकरण की बॉडी की सुरक्षा (सुरक्षात्मक)
- ग्राउंडिंग = न्यूट्रल/सिस्टम की सुरक्षा (कार्यात्मक)
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड क्या होता है?
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Grounding Electrode), जिसे सामान्यतः अर्थ इलेक्ट्रोड भी कहा जाता है, ग्राउंडिंग सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण और मूलभूत घटक है।
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड क्या होता है?
परिभाषा:
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड एक विद्युत चालक (Electrical Conductor) होता है जिसे जानबूझकर मिट्टी (पृथ्वी) के अंदर या उसके संपर्क में गाड़ा या स्थापित किया जाता है। इसका मुख्य कार्य विद्युत प्रणाली को पृथ्वी के साथ एक निम्न-प्रतिरोध पथ के माध्यम से भौतिक रूप से जोड़ना है।
कार्य और महत्व
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फॉल्ट (Fault), आकाशीय बिजली (Lightning), या क्षणिक सर्ज (Transient Surge) की स्थिति में उत्पन्न होने वाला खतरनाक करंट या वोल्टेज सुरक्षित रूप से पृथ्वी में फैल जाए (dissipate)।
- करंट का फैलाव: यह फॉल्ट करंट को बड़ी सतह क्षेत्र में फैलाने के लिए एक रास्ता प्रदान करता है, जिससे करंट का घनत्व कम हो जाता है और बिजली का झटका लगने का खतरा कम हो जाता है।
- स्थिर वोल्टेज संदर्भ: यह पूरे विद्युत प्रणाली के लिए एक स्थिर शून्य विभव (Zero Potential) संदर्भ बिंदु स्थापित करता है।
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड के प्रकार
विद्युत मानकों के अनुसार कई प्रकार के ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है:
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प्रकार
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विवरण
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उपयोग
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ग्राउंड रॉड (Ground Rod)
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तांबे की परत चढ़ी हुई स्टील की लंबी छड़ें (आमतौर पर 8 फीट या 2.5 { मीटर} लंबी) जिन्हें जमीन में लंबवत गाड़ा जाता है।
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सबसे आम और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला प्रकार।
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ग्राउंड प्लेट (Ground Plate)
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तांबे या जस्तीकृत (Galvanized) लोहे की प्लेटें जिन्हें नमी वाली मिट्टी में लंबवत रूप से गाड़ा जाता है।
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जहाँ गहराई तक रॉड गाड़ना मुश्किल हो या मिट्टी का प्रतिरोध बहुत अधिक हो।
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ग्राउंड रिंग (Ground Ring)
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तांबे का नंगा कंडक्टर जो भवन या संरचना के चारों ओर दफन किया जाता है।
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बड़े औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए।
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पाइप इलेक्ट्रोड (Pipe Electrode)
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जस्तीकृत स्टील (GI) या कास्ट आयरन के पाइप, जिन्हें नमी वाली परत तक गाड़ा जाता है।
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पारंपरिक भारतीय अर्थिंग प्रणालियों में उपयोग किया जाता था।
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प्राकृतिक इलेक्ट्रोड
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भवन की नींव में दबे हुए संरचनात्मक स्टील (Rebar) या धातु के जल पाइप (हालांकि अब पानी के पाइप पर निर्भर रहने की सलाह नहीं दी जाती)।
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अतिरिक्त या सहायक ग्राउंडिंग के रूप में।
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एक प्रभावी ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का निर्माण मिट्टी में न्यूनतम प्रतिरोध (आमतौर पर 5 { ओम} से कम) सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, जिसके लिए अक्सर रॉड के चारों ओर बेंटोनाइट (Bentonite) जैसे अर्थ एन्हांसिंग कंपाउंड का उपयोग किया जाता है।
एक अच्छी जमीन का सामान्य प्रतिरोध कितना होता है?
एक अच्छी ग्राउंडिंग (Earthing) प्रणाली का प्रतिरोध (Resistance) अनुप्रयोग और सुरक्षा मानकों के आधार पर अलग-अलग होता है, लेकिन लक्ष्य हमेशा कम से कम प्रतिरोध प्राप्त करना होता है।
यहाँ विभिन्न मानकों और अनुप्रयोगों के अनुसार सामान्य प्रतिरोध मान दिए गए हैं:
ग्राउंडिंग प्रतिरोध (Grounding Resistance) के मानक
आदर्श रूप से,
ग्राउंडिंग का प्रतिरोध शून्य (Zero Ohms) होना चाहिए ताकि फॉल्ट करंट बिना किसी बाधा के सीधे ज़मीन में जा सके, लेकिन यह व्यवहार में असंभव है।
इसलिए,
विभिन्न सुरक्षा और औद्योगिक निकाय निम्न मानों की सिफारिश करते हैं:
1. सामान्य लक्ष्य (Common Goal)
- 5 ओम (Ohms) या उससे कम: यह अधिकांश औद्योगिक, वाणिज्यिक और दूरसंचार (Telecommunication) प्रणालियों के लिए एक व्यापक रूप से स्वीकृत मानक है। NFPA (National Fire Protection Association) और IEEE (Institute of Electrical and Electronics Engineers) जैसी प्रमुख एजेंसियां आमतौर पर 5 { ओम} या उससे कम के प्रतिरोध की सलाह देती हैं।
- घरेलू वायरिंग (Domestic Wiring): आमतौर पर 5 { ओम} से कम होना चाहिए।
2. महत्वपूर्ण और उच्च-सुरक्षा अनुप्रयोग
संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उच्च-सुरक्षा वाले स्थानों के लिए, प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए:
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अनुप्रयोग
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अनुशंसित प्रतिरोध (अधिकतम)
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पावर सबस्टेशन (Power Substation)
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1 { ओम} या उससे कम (बड़े स्टेशनों के लिए इससे भी कम)
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संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
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1 { ओम} से 5 { ओम} के बीच (डेटा सेंटर, अस्पताल, प्रयोगशाला)
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आकाशीय बिजली संरक्षण (Lightning Protection)
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10 { ओम} से कम (अक्सर 1 { ओम} लक्षित होता है)
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3. न्यूनतम कोड आवश्यकता (NEC)
अमेरिकी नेशनल इलेक्ट्रिकल कोड (NEC) की आवश्यकताएँ बताती हैं:
- यदि एक ही ग्राउंड रॉड (Ground Rod) का उपयोग किया जाता है, तो उसका प्रतिरोध 25 { ओम} या उससे कम होना चाहिए।
- यदि प्रतिरोध 25 { ओम} से अधिक आता है, तो एक अतिरिक्त ग्राउंड रॉड स्थापित करना अनिवार्य है (भले ही दूसरी रॉड लगाने के बाद प्रतिरोध 25 { ओम} से कम हो या नहीं, इसकी जाँच करना कोड के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिए आवश्यक है)।
निष्कर्ष:
हालांकि 25 { ओम} NEC की न्यूनतम कानूनी आवश्यकता हो सकती है, एक अच्छी और सुरक्षित ग्राउंडिंग प्रणाली के लिए आपको हमेशा 5 { ओम} या उससे कम (और आदर्श रूप से 1 { ओम} के करीब) के प्रतिरोध का लक्ष्य रखना चाहिए।
सॉलिड ग्राउंडिंग क्या है?
सॉलिड ग्राउंडिंग (Solid Grounding) विद्युत प्रणालियों में उपयोग किए जाने वाले ग्राउंडिंग के सबसे सरल और सामान्य प्रकारों में से एक है। इसे कई बार इफेक्टिव ग्राउंडिंग (Effectively Grounded) भी कहा जाता है।
सॉलिड ग्राउंडिंग (Solid Grounding) क्या है?
सॉलिड ग्राउंडिंग का अर्थ है विद्युत प्रणाली के किसी एक करंट-वाहक बिंदु (आमतौर पर न्यूट्रल पॉइंट) को बिना किसी प्रतिरोधक (Resistor), रिएक्टर (Reactor) या फ्यूज के सीधे पृथ्वी (Ground) से जोड़ना।
- सीधा कनेक्शन: न्यूट्रल और ग्राउंड के बीच का पथ केवल एक कंडक्टर (तार या बस बार) होता है, जिसका प्रतिरोध व्यावहारिक रूप से शून्य (या बहुत कम) होता है।
मुख्य उद्देश्य
सॉलिड ग्राउंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से निम्न-वोल्टेज वितरण प्रणालियों (Low-Voltage Distribution Systems, जैसे 400/230 { V}) में किया जाता है, और इसके दो प्रमुख उद्देश्य हैं:
- वोल्टेज स्थिरीकरण: यह न्यूट्रल पॉइंट को पृथ्वी के शून्य विभव पर स्थिर रखता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रत्येक फेज़ (Phase) का वोल्टेज हमेशा एक ज्ञात और सुरक्षित मान (जैसे 230 { V}) पर बना रहे।
- फॉल्ट क्लियरिंग: ग्राउंड फॉल्ट (Ground Fault) की स्थिति में, निम्न-प्रतिरोध पथ के कारण फॉल्ट करंट का मान बहुत अधिक हो जाता है, जो तुरंत ओवरकरंट सुरक्षा उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर या फ्यूज) को ट्रिप कर देता है।
सॉलिड ग्राउंडिंग के लाभ
- सरलता: यह स्थापित करने का सबसे सरल और सस्ता तरीका है।
- निम्न ओवरवोल्टेज: यह लाइटनिंग या स्विचिंग सर्ज के कारण होने वाले ट्रांजिएंट ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) को सबसे प्रभावी ढंग से सीमित करता है।
- विश्वसनीय फॉल्ट क्लियरिंग: फॉल्ट करंट का उच्च मान होने के कारण, सुरक्षा उपकरण विश्वसनीय रूप से और तेज़ी से सक्रिय हो जाते हैं।
सीमाएँ/नुकसान
- उच्च फॉल्ट करंट: ग्राउंड फॉल्ट होने पर करंट का मान बहुत अधिक हो सकता है, जिससे उपकरण और कंडक्टरों को क्षति पहुँच सकती है।
- बिजली के झटके का खतरा: यदि फॉल्ट करंट जल्दी से साफ न हो, तो उच्च फॉल्ट करंट के कारण ग्राउंडिंग सिस्टम के पास स्टेप और टच पोटेंशियल (Step and Touch Potential) का खतरा बढ़ सकता है।
उपयोग
सॉलिड ग्राउंडिंग सबसे आम है और इसका उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक और हल्के औद्योगिक वितरण प्रणालियों में किया जाता है।
रेज़िस्टेंस ग्राउंडिंग क्या है?
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (Resistance Grounding) विद्युत प्रणालियों में ग्राउंडिंग की एक उन्नत विधि है, जिसका उपयोग अक्सर मध्यम-वोल्टेज प्रणालियों (3.3 { kV} से 33 { kV} के बीच) में किया जाता है।
यह सॉलिड ग्राउंडिंग (Solid Grounding) के विपरीत काम करता है।
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (Resistance Grounding) क्या है?
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग एक प्रकार की न्यूट्रल ग्राउंडिंग विधि है, जिसमें विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट और पृथ्वी (Ground) के बीच जानबूझकर एक प्रतिरोधक (Resistor) या न्यूट्रल ग्राउंडिंग रेजिस्टर (NGR) जोड़ा जाता है।
यह कैसे काम करता है?
- प्रतिरोधक का जोड़: न्यूट्रल पॉइंट को सीधे ज़मीन से जोड़ने के बजाय, एक उच्च-शक्ति वाला रेजिस्टर श्रृंखला (Series) में जोड़ा जाता है।
- करंट सीमित करना: यह रेजिस्टर जानबूझकर फॉल्ट करंट (Ground Fault Current) के प्रवाह को एक पूर्व निर्धारित मान तक सीमित कर देता है (सॉलिड ग्राउंडिंग की तरह इसे बहुत अधिक नहीं होने देता)।
- सुरक्षा और पहचान: यह सीमित करंट सुरक्षा उपकरणों को ट्रिप करने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन यह इतना कम होता है कि उपकरणों (जैसे जनरेटर, ट्रांसफार्मर) को थर्मल या यांत्रिक क्षति न पहुँचे।
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग के लाभ
- फॉल्ट करंट को सीमित करना: यह सबसे बड़ा लाभ है। यह ग्राउंड फॉल्ट करंट को उस स्तर तक सीमित कर देता है जो मशीन वाइंडिंग्स (Winding) को गंभीर नुकसान नहीं पहुँचाता।
- क्षणिक ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) में कमी: यह आकाशीय बिजली या स्विचिंग ऑपरेशन के कारण उत्पन्न होने वाले उच्च वोल्टेज स्पाइक्स को प्रभावी ढंग से कम करता है।
- मेकेनिकल स्ट्रेस में कमी: चूँकि फॉल्ट करंट सीमित होता है, यह उपकरण पर लगने वाले यांत्रिक बल (Mechanical Stress) को कम करता है, जिससे उपकरणों का जीवनकाल बढ़ जाता है।
- चयनशील फॉल्ट क्लियरिंग: कुछ सिस्टमों में, यह सीमित करंट फॉल्ट की पहचान की अनुमति देता है, जिससे ऑपरेटरों को उत्पादन को तुरंत रोके बिना फॉल्ट को साफ़ करने का समय मिल जाता है।
सीमाएँ/नुकसान
- अतिरिक्त उपकरण: सिस्टम में एक अतिरिक्त घटक (NGR) जोड़ने की आवश्यकता होती है, जिससे लागत और रखरखाव बढ़ जाता है।
- उच्च वोल्टेज के लिए कम प्रभावी: यह विधि बहुत उच्च वोल्टेज (जैसे 66 { kV} से ऊपर) वाली प्रणालियों के लिए कम उपयुक्त हो सकती है।
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग एक उन्नत तकनीक है जो सुरक्षा और विश्वसनीयता के बीच संतुलन प्रदान करती है।
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग क्या है?
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग (Reactance Grounding) भी रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग की तरह एक प्रकार की न्यूट्रल ग्राउंडिंग विधि है, जिसका उपयोग मध्यम और उच्च वोल्टेज प्रणालियों में ग्राउंड फॉल्ट करंट को सीमित करने के लिए किया जाता है।
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग (Reactance Grounding) क्या है?
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग में,
विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल पॉइंट और पृथ्वी (Ground) के बीच जानबूझकर एक रिएक्टर (Reactor) या इंडक्टर (Inductor) जोड़ा जाता है।
- रिएक्टर का उपयोग: यह रिएक्टर (या इंडक्टर) करंट के प्रवाह का विरोध करने के लिए इंडक्टिव रिएक्टेंस (X_L) का उपयोग करता है।
- करंट सीमित करना: रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग की तरह, इसका मुख्य उद्देश्य भी ग्राउंड फॉल्ट करंट के मान को एक सुरक्षित स्तर तक सीमित करना है ताकि उपकरणों को यांत्रिक (Mechanical) और ऊष्मीय (Thermal) क्षति से बचाया जा सके।
यह कैसे काम करता है?
जब ग्राउंड फॉल्ट होता है:
- रिएक्टर तत्काल फॉल्ट करंट के प्रवाह का विरोध करता है।
- यह करंट को एक सीमित मान पर रखता है, जो सुरक्षा उपकरणों को सक्रिय करने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन वाइंडिंग्स (Windings) और कंडक्टरों को नुकसान पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
- रेजिस्टेंस के विपरीत, रिएक्टर मुख्य रूप से रिएक्टिव पावर को संभालता है, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य परिचालन में कम वास्तविक ऊर्जा हानि (Real Power Loss) होती है।
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग के लाभ
- कम सक्रिय शक्ति हानि (Low Real Power Loss): चूँकि रिएक्टर केवल रिएक्टेंस (X_L) प्रदान करता है, इसमें रेजिस्टर (R) की तुलना में बहुत कम सक्रिय शक्ति (Wattage) की हानि होती है।
- फॉल्ट करंट का नियंत्रण: यह फॉल्ट करंट को प्रभावी ढंग से सीमित करता है, जिससे जनरेटर और ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग्स पर यांत्रिक बल (Mechanical Stress) कम होता है।
- दक्षता: लंबी अवधि में यह रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग की तुलना में अधिक ऊर्जा कुशल हो सकता है।
सीमाएँ/नुकसान
- उच्च क्षणिक ओवरवोल्टेज (High Transient Overvoltage): यह सबसे बड़ा नुकसान है। रिएक्टर, सिस्टम में इंडक्टिव और कैपेसिटिव रिएक्टेंस के बीच अनुनाद (Resonance) की स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिससे क्षणिक ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है।
- डिजाइन जटिलता: प्रणाली के रिएक्टेंस के सटीक संतुलन की आवश्यकता के कारण डिजाइन जटिल हो सकता है।
उपयोग
रिएक्टेंस ग्राउंडिंग का उपयोग अक्सर बड़े जनरेटर और ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट पर किया जाता है, जहाँ उच्च क्षमता वाले फॉल्ट करंट को नियंत्रित करना आवश्यक होता है। इसका चयन सिस्टम के ओवरवोल्टेज सहिष्णुता और फॉल्ट करंट सीमा आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।
मध्यवर्ती स्तर के आधारभूत
विद्युत प्रणालियों में न्यूट्रल को ग्राउंडेड क्यों किया जाता है?
विद्युत प्रणालियों में न्यूट्रल को ग्राउंडेड (Neutral Grounding) करने का कार्य सिस्टम ग्राउंडिंग कहलाता है, और यह सुरक्षा और परिचालन दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहाँ मुख्य कारण दिए गए हैं कि विद्युत प्रणालियों में न्यूट्रल को ग्राउंडेड क्यों किया जाता है:
न्यूट्रल को ग्राउंडेड करने के मुख्य कारण
1. वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization)
- स्थिर संदर्भ बिंदु: ग्राउंडिंग न्यूट्रल कंडक्टर को पृथ्वी के शून्य विभव (Zero Potential) पर स्थिर कर देता है।
- समान फेज़ वोल्टेज: यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक फेज़ (Phase) और न्यूट्रल के बीच का वोल्टेज हमेशा एक ज्ञात और स्थिर मान (जैसे 230 { V} या 120 { V}) पर बना रहे, भले ही लोड संतुलित (Balanced) न हो।
- फ्लोटिंग न्यूट्रल की रोकथाम: यदि न्यूट्रल ग्राउंडेड नहीं होता, तो उसे "फ्लोटिंग न्यूट्रल" कहा जाता है। ग्राउंड फॉल्ट या लोड असंतुलन की स्थिति में, यह न्यूट्रल पॉइंट पृथ्वी के सापेक्ष एक उच्च विभव पर तैर सकता है, जिससे फेज़ वोल्टेज खतरनाक रूप से बढ़ सकता है और उपकरणों को क्षति हो सकती है।
2. ग्राउंड फॉल्ट क्लियरिंग (Ground Fault Clearing)
ग्राउंडिंग सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्रों में से एक है।
- फॉल्ट करंट पथ: न्यूट्रल ग्राउंडिंग, ग्राउंड फॉल्ट (जब लाइव तार गलती से ज़मीन से छू जाए) होने पर फॉल्ट करंट को वापस स्रोत (Source) तक आने के लिए एक स्पष्ट और निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करता है।
- सुरक्षा उपकरणों का सक्रियण: यह उच्च फॉल्ट करंट सुरक्षात्मक उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर या फ्यूज) को तुरंत ट्रिप करने के लिए पर्याप्त होता है।
- परिणाम: ट्रिपिंग से फॉल्ट वाला हिस्सा तुरंत आइसोलेट हो जाता है, जिससे सिस्टम की आगे की क्षति और आग लगने का खतरा टल जाता है।
3. ओवरवोल्टेज से सुरक्षा (Protection against Overvoltages)
ग्राउंडिंग क्षणिक और स्थायी दोनों तरह के ओवरवोल्टेज से सुरक्षा प्रदान करता है।
- आकाशीय बिजली: न्यूट्रल ग्राउंडिंग आकाशीय बिजली के कारण उत्पन्न होने वाले अत्यधिक उच्च वोल्टेज को सुरक्षित रूप से जमीन में फैला देता है।
- स्विचिंग सर्ज: सर्किट को चालू या बंद करने (स्विचिंग) से उत्पन्न होने वाले क्षणिक वोल्टेज (Transient Voltage) स्पाइक्स को भी ग्राउंडिंग द्वारा प्रभावी ढंग से सीमित किया जाता है, जिससे उपकरणों का इन्सुलेशन (Insulation) विफल होने से बचता है।
4. लाइन-टू-ग्राउंड फॉल्ट को सीमित करना
- ग्राउंडेड सिस्टम में, यदि एक फेज़ कंडक्टर गलती से ज़मीन से छूता है, तो केवल उस फेज़ का वोल्टेज ही प्रभावित होता है (वोल्टेज गिर जाता है)।
- अन-ग्राउंडेड सिस्टम (Ungrounded System): इसके विपरीत, अन-ग्राउंडेड सिस्टम में, एक फेज़-टू-ग्राउंड फॉल्ट होने पर बाकी दोनों फेज़ों का वोल्टेज खतरनाक रूप से बढ़ सकता है (लाइन-टू-लाइन वोल्टेज के बराबर), जिससे स्वस्थ फेज़ों पर जुड़े उपकरण खराब हो सकते हैं।
संक्षेप में,
न्यूट्रल ग्राउंडिंग विद्युत प्रणाली को न केवल अधिक सुरक्षित बनाता है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि यह एक स्थिर और विश्वसनीय तरीके से संचालित हो।
यदि ग्राउंडिंग प्रदान नहीं की जाती है तो क्या होगा?
यदि किसी विद्युत प्रणाली या उपकरण में ग्राउंडिंग (Earthing) प्रदान नहीं की जाती है, तो कई गंभीर सुरक्षा जोखिम और परिचालन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ग्राउंडिंग की अनुपस्थिति सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक को हटा देती है।
यहाँ प्रमुख परिणाम दिए गए हैं जो ग्राउंडिंग प्रदान न करने पर हो सकते हैं:
ग्राउंडिंग प्रदान न करने के परिणाम
1. बिजली के झटके का गंभीर खतरा (Severe Shock Hazard)
यह सबसे महत्वपूर्ण खतरा है।
- खतरनाक वोल्टेज: यदि उपकरण का इन्सुलेशन विफल हो जाता है और लाइव (Live) तार गलती से उपकरण के धात्विक आवरण को छू लेता है, तो उस आवरण पर खतरनाक वोल्टेज (Potential) आ जाता है।
- कोई सुरक्षित मार्ग नहीं: ग्राउंडिंग न होने पर, फॉल्ट करंट के लिए कोई निम्न-प्रतिरोध पथ (low-resistance path) उपलब्ध नहीं होता है।
- परिणाम: यदि कोई व्यक्ति उस विद्युतीकृत उपकरण को छूता है, तो करंट उसके शरीर से होकर सीधे ज़मीन में जाएगा। मानव शरीर तब फॉल्ट करंट के लिए एकमात्र उपलब्ध मार्ग बन जाता है, जिससे बिजली का गंभीर झटका लग सकता है या मृत्यु हो सकती है।
2. सुरक्षा उपकरणों का निष्क्रिय रहना (Failure of Protective Devices)
सर्किट ब्रेकर (Circuit Breakers) और फ्यूज (Fuses) जैसे सुरक्षा उपकरण ठीक से काम नहीं कर पाएंगे।
- कम फॉल्ट करंट: ग्राउंडिंग न होने पर, जब फॉल्ट होता है, तो करंट को वापस स्रोत (Source) तक जाने के लिए उच्च-प्रतिरोध वाला पथ (जैसे हवा, लकड़ी, या व्यक्ति का शरीर) मिलता है। इससे फॉल्ट करंट का मान बहुत कम रहता है।
- ट्रिपिंग में विफलता: करंट का मान इतना कम होता है कि वह सर्किट ब्रेकर या फ्यूज को ट्रिप करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
- परिणाम: फॉल्ट जारी रहता है और करंट बहता रहता है, जिससे उपकरण लगातार विद्युतीकृत रहता है और आग लगने का खतरा बना रहता है।
3. ओवरवोल्टेज और अस्थिरता (Overvoltage and Instability)
सिस्टम वोल्टेज अस्थिर हो जाता है और अनियंत्रित रूप से बढ़ सकता है।
- फ्लोटिंग न्यूट्रल: न्यूट्रल पॉइंट ग्राउंडेड न होने पर "फ्लोटिंग" (Floating) हो जाता है।
- वोल्टेज सर्ज: बिजली गिरने (Lightning) या सिस्टम में स्विचिंग क्रियाओं (Switching Surges) से उत्पन्न होने वाला अत्यधिक उच्च वोल्टेज सुरक्षित रूप से जमीन में फैल नहीं पाता।
- फेज़ वोल्टेज में वृद्धि: ग्राउंड फॉल्ट या असंतुलित लोड की स्थिति में, न्यूट्रल पॉइंट विस्थापित हो सकता है, जिससे स्वस्थ फेज़ों पर वोल्टेज खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। यह वोल्टेज वृद्धि उपकरण के इन्सुलेशन को क्षति पहुँचा सकती है, जिससे वह स्थायी रूप से खराब हो सकता है।
4. आग का खतरा (Fire Hazard)
- ग्राउंड फॉल्ट होने पर, करंट अनियंत्रित रूप से उच्च-प्रतिरोध वाले रास्तों से बह सकता है (जैसे लकड़ी के बीम या भवन की धातु संरचनाएं)।
- इससे अत्यधिक गर्मी (Heat) उत्पन्न होती है, जो उन क्षेत्रों में आग लगा सकती है जो ज्वलनशील (Flammable) सामग्री से बने हैं।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग प्रदान न करना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है जो जीवन और संपत्ति दोनों को गंभीर खतरे में डालता है। यह बिजली के झटके को रोकने, उपकरणों की सुरक्षा करने और विद्युत प्रणाली को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य है।
उन्नत स्तर के आधारभूत प्रश्न
यह एक अच्छा विषय है। चूंकि आपने उन्नत स्तर (Advanced Level) के आधारभूत प्रश्न (Fundamental Questions) पूछे हैं, मैं ग्राउंडिंग, फॉल्ट एनालिसिस और सुरक्षा प्रणालियों से संबंधित कुछ जटिल अवधारणाएँ प्रस्तुत कर सकता हूँ।
यहाँ कुछ प्रश्न और उनके उत्तर हैं जो विषय की गहरी समझ का परीक्षण करते हैं:
1. ग्राउंडिंग और फॉल्ट एनालिसिस (Grounding and Fault Analysis)
प्रश्न 1: जीरो सीक्वेंस करंट (Zero Sequence Current) और ग्राउंड फॉल्ट का क्या संबंध है?
उत्तर: जीरो सीक्वेंस करंट ({I}_0) केवल तभी प्रवाहित होता है जब विद्युत प्रणाली में असंतुलित (Unbalanced) फॉल्ट होता है, जैसे कि एक ग्राउंड फॉल्ट (सिंगल लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट या डबल लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट)।
परिभाषा: थ्री-फेज़ प्रणाली में, जीरो सीक्वेंस करंट तीनों फेज़ों में समान मान और फेज़ (Phase) वाला करंट होता है।
I_0 = {1}{3} (I_a + I_b + I_c)
संबंध: संतुलित (Balanced) स्थिति में ({I}_a + {I}_b + {I}_c = 0), इसलिए {I}_0 शून्य होता है। जब ग्राउंड फॉल्ट होता है, तो न्यूट्रल पॉइंट में एक नेट करंट (जो न्यूट्रल ग्राउंडिंग के माध्यम से प्रवाहित होता है) उत्पन्न होता है। यह न्यूट्रल करंट ({I}_n) हमेशा जीरो सीक्वेंस करंट के तीन गुना के बराबर होता है: {I}_n = 3 {I}_0
जीरो सीक्वेंस करंट की उपस्थिति ही वह मूल सिद्धांत है जिस पर ग्राउंड फॉल्ट रिले (जैसे 50G या 51G) काम करते हैं। वे इस {I}_0 को मापकर ग्राउंड फॉल्ट का पता लगाते हैं।
प्रश्न 2: सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड के डिज़ाइन में 'GPR' और 'स्टेप पोटेंशियल' को कम करने के लिए कौन सा कारक सबसे महत्वपूर्ण है?
उत्तर: सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड के डिज़ाइन में GPR (Ground Potential Rise) और स्टेप/टच पोटेंशियल को कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक ग्राउंडिंग ग्रिड की मैश डेन्सिटी (Mesh Density) और कंडक्टर की गहराई है।
- मैश डेन्सिटी: कंडक्टरों के बीच की दूरी कम करके (अर्थात्, मैश को घना करके), ग्रिड फॉल्ट करंट को एक छोटे से क्षेत्र के बजाय बड़े क्षेत्र में अधिक समान रूप से फैलाता है।
- इससे मिट्टी की सतह पर वोल्टेज ग्रेडिएंट कम हो जाता है, जिससे स्टेप और टच पोटेंशियल कम होता है।
- कंडक्टर की गहराई: ग्रिड को गहरा गाड़ने से, यह मिट्टी के अधिक नम और निम्न-प्रतिरोध वाले क्षेत्रों के संपर्क में आता है, जिससे कुल ग्राउंडिंग प्रतिरोध (R_ground) कम होता है। {GPR} = {I}_{{fault}} × {R}_{{ground}} होने के कारण, R_{{ground}} कम होने पर GPR भी कम होता है।
2. सुरक्षा और ग्राउंडिंग तकनीक (Protection and Grounding Techniques)
प्रश्न 3: लो-रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (LRG) और हाई-रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (HRG) के बीच मौलिक अंतर क्या है और HRG कहाँ उपयोग होता है?
उत्तर: मौलिक अंतर यह है कि वे ग्राउंड फॉल्ट करंट को कैसे नियंत्रित करते हैं और फॉल्ट की स्थिति में सिस्टम को कैसे संचालित होने देते हैं।
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विशेषता
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लो-रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (LRG)
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हाई-रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (HRG)
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प्रतिरोध का मान
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कम (आमतौर पर 25 {Ohms} से कम)
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उच्च (फॉल्ट करंट को 5 {A} या 10 {A} तक सीमित करता है)
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उद्देश्य
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फॉल्ट करंट को जल्दी और कुशलता से हटाना।
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फॉल्ट करंट को सीमित करना ताकि सिस्टम पहले फॉल्ट के दौरान भी चलना जारी रखे।
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पहला फॉल्ट
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फॉल्ट होने पर सर्किट ब्रेकर द्वारा तुरंत ट्रिपिंग।
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फॉल्ट होने पर केवल अलार्म बजता है; ट्रिपिंग नहीं होती।
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उपयोग
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उच्च-वोल्टेज वितरण प्रणालियाँ, कमर्शियल/इंडस्ट्रियल बिल्डिंग।
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निरंतर प्रक्रिया उद्योग (Continuous Process Industries) जहाँ ट्रिपिंग से बड़ा नुकसान हो सकता है (जैसे पेपर मिल, माइनिंग, डेटा सेंटर)।
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HRG का उपयोग उन औद्योगिक वातावरणों में किया जाता है जहाँ सेवा की निरंतरता सर्वोपरि है। यह कर्मियों को फॉल्ट का पता लगाने और उसे दूर करने का समय देता है, जबकि सिस्टम बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।
प्रश्न 4: लाइटनिंग अरेस्टर (LA) और सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (SPD) के बीच मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: दोनों ही ओवरवोल्टेज से बचाते हैं, लेकिन वे जिस प्रकार के सर्ज को संभालते हैं और जहाँ स्थापित होते हैं, उसमें अंतर होता है:
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विशेषता
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लाइटनिंग अरेस्टर (LA)
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सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (SPD)
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सुरक्षित सर्ज का प्रकार
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बाहरी सर्ज (External Surges): मुख्य रूप से बिजली गिरने से उत्पन्न विशाल, उच्च ऊर्जा वाले ट्रांज़िएंट।
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आंतरिक सर्ज (Internal Surges): उपकरणों को स्विच करने, मोटर शुरू करने आदि से उत्पन्न छोटे, लगातार होने वाले सर्ज।
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ऊर्जा क्षमता
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बहुत उच्च (मेगा-एम्पीयर रेंज तक)।
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मध्यम से निम्न।
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स्थापना स्थान
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प्राथमिक सबस्टेशन, बिजली लाइनों के पास, बड़े ट्रांसफार्मर के टर्मिनल।
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मुख्य वितरण पैनल, सब-पैनल, और व्यक्तिगत उपकरण के पास।
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संक्षेप में,
LA सिस्टम में प्रवेश करने वाले बड़ी ऊर्जा वाले सर्ज को नियंत्रित करता है, जबकि SPD उस ऊर्जा के बचे हुए हिस्से को सीमित करके नाजुक आंतरिक उपकरणों को बचाता है।
स्टेप पोटेंशियल क्या है?
स्टेप पोटेंशियल (Step Potential) क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) में इस्तेमाल किया जाने वाला एक आदर्शकृत (idealized) तंत्र है।
यह एक ऐसा पोटेंशियल (विभव) है जिसका मान एक निश्चित बिंदु (x=0 मान लीजिए) से पहले शून्य होता है और उस बिंदु पर अचानक एक स्थिर, सकारात्मक मान (V_0) तक बढ़ जाता है।
V(x) = {cases} 0, & x < 0 V_0, & x ge 0 {cases}
मुख्य बातें:
- मॉडलिंग (Modeling): इसका उपयोग आपतित (incident), परावर्तित (reflected) और संचारित (transmitted) पदार्थ तरंगों (matter waves) के व्यवहार को मॉडल करने के लिए किया जाता है।
- श्रोडिंगर समीकरण (Schrödinger Equation): इस समस्या को हल करने में समय-स्वतंत्र श्रोडिंगर समीकरण (time-independent Schrödinger equation) को कण के लिए हल करना शामिल है।
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शास्त्रीय यांत्रिकी से अंतर (Difference from Classical Mechanics):
- जब कण की ऊर्जा पोटेंशियल की ऊँचाई से अधिक होती है (E > V_0): शास्त्रीय रूप से, कण पूरी तरह से पार हो जाएगा (संपूर्ण संचरण)। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी में, कण का कुछ हिस्सा परावर्तित (reflected) हो जाता है, भले ही उसकी ऊर्जा पोटेंशियल स्टेप से अधिक हो।
- जब कण की ऊर्जा पोटेंशियल की ऊँचाई से कम होती है (E < V_0): शास्त्रीय रूप से, कण वापस उछल जाएगा (पूर्ण परावर्तन)। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी में, कण को स्टेप के दूसरी ओर (x > 0) में खोजने की परिमित प्रायिकता (finite probability) होती है, भले ही उसकी ऊर्जा पर्याप्त न हो। हालांकि, वेव फंक्शन (तरंग फलन) इस क्षेत्र में तेजी से क्षय (decay) होता है।
यह अवधारणा क्वांटम यांत्रिकी के मूलभूत सिद्धांतों, जैसे आंशिक परावर्तन और संचरण (partial reflection and transmission) और वेव फंक्शन की निरंतरता (continuity of the wave function) को समझने में मदद करती है।
इलेक्ट्रोड को ग्राउंड करने के मानक तरीके क्या हैं?
इलेक्ट्रोड को ग्राउंड करने (या अर्थिंग) के मानक तरीके यह सुनिश्चित करते हैं कि विद्युत दोष (electrical fault) होने पर अतिरिक्त या लीकेज करंट (fault current) सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित हो जाए, जिससे विद्युत उपकरणों और मनुष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड के मानक प्रकार (Standard Types of Grounding Electrodes)
विभिन्न प्रकार के ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोडों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें मिट्टी की स्थिति, आवश्यक प्रतिरोध (resistance) और अनुप्रयोग (application) के आधार पर चुना जाता है:
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इलेक्ट्रोड का प्रकार (Type of Electrode)
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विवरण (Description)
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रॉड अर्थिंग (Rod Earthing)
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जीआई (Galvanized Iron) या कॉपर (Copper) से बनी लंबी, नुकीली छड़ें (rods) जिन्हें लंबवत (vertically) जमीन में गाड़ा जाता है। यह सबसे आम तरीका है।
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पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing)
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जीआई या कॉपर से बने छिद्रित पाइपों (perforated pipes) का उपयोग किया जाता है। गड्ढे को नमक और कोयले की परतों से भरा जाता है ताकि मिट्टी की चालकता (conductivity) बनी रहे।
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प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)
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कॉपर या जीआई की एक बड़ी प्लेट को लंबवत रूप से गहरे गड्ढे में दफनाया जाता है। यह आमतौर पर बड़े सबस्टेशन और पावर स्टेशनों में उपयोग किया जाता है जहाँ कम प्रतिरोध की आवश्यकता होती है।
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स्ट्रिप या वायर अर्थिंग (Strip/Wire Earthing)
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कॉपर या जीआई स्ट्रिप्स या तारों को उथले खाइयों (trenches) में क्षैतिज रूप से (horizontally) दफनाया जाता है। यह चट्टानी या उथली मिट्टी (shallow soil) में उपयोगी है जहाँ छड़ें गाड़ना मुश्किल हो।
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फाउंडेशन अर्थ इलेक्ट्रोड (Foundation Earth Electrode)
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इसे यूफर ग्राउंड (Ufer Ground) भी कहा जाता है। इसमें कंक्रीट में दबे हुए भवन की स्टील सुदृढीकरण (steel reinforcement) या कंक्रीट-एन्केस्ड कंडक्टरों का उपयोग किया जाता है, जो कम प्रतिरोध प्रदान करता है।
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स्थापना के मानक मानदंड (Standard Installation Criteria)
सुरक्षित और प्रभावी ग्राउंडिंग के लिए कुछ महत्वपूर्ण मानक दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है:
- गहराई (Depth): इलेक्ट्रोड को पर्याप्त गहराई तक गाड़ा जाना चाहिए ताकि वे स्थायी रूप से नम मिट्टी (moist soil) के संपर्क में रहें, क्योंकि नमी चालकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। आमतौर पर, रॉड इलेक्ट्रोड को लगभग 2.5 मीटर (लगभग 8 फीट) या उससे अधिक की गहराई तक गाड़ने की सलाह दी जाती है।
- सामग्री (Material): ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड के लिए कॉपर (उत्कृष्ट चालकता और संक्षारण प्रतिरोध के कारण) या जस्ती स्टील (Galvanized Steel) का उपयोग किया जाता है।
- प्रतिरोध (Resistance): ग्राउंडिंग सिस्टम का कुल प्रतिरोध यथासंभव कम होना चाहिए। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों (जैसे NEC, IEC) के अनुसार, सामान्य अनुप्रयोगों के लिए ग्राउंड प्रतिरोध 25 ओम (Ohms) से कम होना चाहिए, और संवेदनशील प्रणालियों के लिए यह अक्सर 5.0 ओम से भी कम होता है।
- मल्टीपल इलेक्ट्रोड (Multiple Electrodes): यदि एक इलेक्ट्रोड से आवश्यक प्रतिरोध प्राप्त नहीं होता है, तो एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी (spacing) (आमतौर पर गाड़े गए रॉड की लंबाई के बराबर) पर कई इलेक्ट्रोड समानांतर में (in parallel) स्थापित किए जाते हैं ताकि कुल प्रतिरोध कम हो सके।
- बॉन्डिंग (Bonding): यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी धातु के हिस्से एक ही विद्युत क्षमता (potential) पर हैं, सभी धातु के बाड़ों (enclosures), पाइपों और इलेक्ट्रोडों को एक ही ग्राउंड बिंदु से मजबूती से जोड़ा (bonded) जाता है।
ग्राउंडिंग के लिए कौन सा आईएस मानक उपयोग किया जाता है?
ग्राउंडिंग (Grounding) या अर्थिंग (Earthing) के लिए भारत में जो मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण मानक (Standard) इस्तेमाल किया जाता है, वह है:
IS 3043: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग
(IS 3043: Code of Practice for Earthing)
यह भारतीय मानक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा जारी किया गया सबसे व्यापक दस्तावेज़ है जो भारत में इलेक्ट्रिकल अर्थिंग सिस्टम के डिज़ाइन, स्थापना, निरीक्षण और रखरखाव के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बातें और संबंधित मानक
1. IS 3043: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर अर्थिंग (नवीनतम संस्करण: IS 3043:2018)
- उद्देश्य: यह मानक सुरक्षात्मक अर्थिंग (Protective Earthing - उपकरणों और मानव की सुरक्षा के लिए) और सिस्टम अर्थिंग (System Earthing - जैसे न्यूट्रल ग्राउंडिंग) दोनों के लिए नियम और प्रक्रियाएं निर्धारित करता है।
- कवरेज: यह विभिन्न प्रकार के अर्थिंग इलेक्ट्रोड (रॉड, पाइप, प्लेट), आवश्यक अर्थ प्रतिरोध मान, मिट्टी की चालकता में सुधार के तरीके और विभिन्न प्रकार की प्रतिष्ठानों (पावर स्टेशन, सबस्टेशन, आवासीय) के लिए विशिष्ट आवश्यकताएँ शामिल करता है।
2. IS 732: कोड ऑफ़ प्रैक्टिस फॉर इलेक्ट्रिकल वायरिंग इंस्टॉलेशन्स
- यह मानक इलेक्ट्रिकल वायरिंग की स्थापना के लिए सुरक्षित प्रथाओं को स्थापित करता है, जिसमें सभी धातु के बाड़ों और उजागर प्रवाहकीय भागों के लिए उचित ग्राउंडिंग प्रावधानों को अनिवार्य करना भी शामिल है।
3. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) विनियम, 2010
- ये सरकारी नियम बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित सुरक्षा आवश्यकताओं को अनिवार्य करते हैं, जिसमें अर्थिंग और लीकेज प्रोटेक्शन (Fault Current Protection) के लिए सख्त नियम शामिल हैं।
अनुमत अर्थ प्रतिरोध मान (Permissible Earth Resistance Values)
IS 3043 के अनुसार, ग्राउंडिंग सिस्टम का प्रतिरोध जितना कम हो उतना बेहतर है। संदर्भ के लिए कुछ सामान्य अनुशंसित मान इस प्रकार हैं (ये मान मिट्टी की स्थिति और स्थापना के आधार पर भिन्न हो सकते हैं):
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सुविधा का प्रकार (Type of Facility)
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अनुशंसित अधिकतम प्रतिरोध (Recommended Max Resistance)
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बड़े पावर स्टेशन
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0.5 Omega (ओह्म)
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बड़े सबस्टेशन (EHT)
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1.0 Omega (ओह्म)
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सामान्य घरेलू/आवासीय स्थापना
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5.0 Omega (ओह्म)
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ट्रांसफार्मर स्ट्रक्चर (DTR)
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5.0 Omega (ओह्म)
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यह मानक विद्युत सुरक्षा और उपकरण की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आधारभूत दिशानिर्देश प्रदान करता है।
ग्राउंडिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले तांबे के तार का न्यूनतम आकार क्या है?
ग्राउंडिंग (Earthing) के लिए उपयोग किए जाने वाले तांबे के तार (कॉपर कंडक्टर) का न्यूनतम आकार कई कारकों पर निर्भर करता है, लेकिन इसका निर्धारण मुख्य रूप से सर्किट के फेज़ कंडक्टर के आकार और भारतीय मानक (IS 3043) के दिशानिर्देशों के आधार पर किया जाता है।
IS 3043 में न्यूनतम आकार को परिभाषित करने के लिए तीन मुख्य नियम हैं:
तांबे के अर्थिंग कंडक्टर के न्यूनतम आकार के नियम (IS 3043 के अनुसार)
ग्राउंडिंग कंडक्टर (Earth Conductor) का क्रॉस-सेक्शनल एरिया (Cross-sectional Area) निम्नलिखित नियमों पर आधारित होता है:
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फेज़ कंडक्टर का साइज़ (Sq. mm)
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तांबे के अर्थ कंडक्टर का साइज़ (Sq. mm)
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16 वर्ग मिलीमीटर (sq. mm) से कम
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फेज़ कंडक्टर के साइज़ के बराबर (यानी, न्यूनतम साइज़ 1.5 {sq. mm} से कम नहीं होना चाहिए)
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16 sq. mm से 35 sq. mm तक
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16 वर्ग मिलीमीटर (sq. mm)
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35 sq. mm से अधिक
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फेज़ कंडक्टर के साइज़ का आधा ({Phase Conductor}/2)
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उदाहरण:
- यदि आपके घर की वायरिंग में मेन फेज़ कंडक्टर का साइज़ 4 sq. mm (16 sq. mm से कम) है, तो अर्थिंग कंडक्टर का न्यूनतम साइज़ भी 4 sq. mm होना चाहिए।
- यदि फेज़ कंडक्टर का साइज़ 25 sq. mm (16 से 35 sq. mm की सीमा में) है, तो अर्थिंग कंडक्टर का न्यूनतम साइज़ 16 sq. mm होना चाहिए।
न्यूनतम सामान्य आवश्यकताएँ
आवासीय (Residential) या सामान्य प्रकाश व्यवस्था (Lighting) के अनुप्रयोगों में, जहाँ तार का साइज़ कम होता है, अर्थिंग कंडक्टर का साइज़ कम से कम 2.5 sq. mm तांबा (Copper) या 6 SWG (स्टील/जीआई के लिए) का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, बशर्ते यह फेज़ कंडक्टर के साइज़ के बराबर हो।
ध्यान दें: यह साइज़िंग लीकेज करंट (fault current) को सुरक्षित रूप से संभालने की क्षमता पर आधारित होती है, न कि केवल कम प्रतिरोध पर। मोटा तार हमेशा बेहतर होता है, लेकिन यह न्यूनतम आवश्यकता है।
बिजली से बचाव में ग्राउंडिंग की क्या भूमिका है?
बिजली से बचाव (Lightning Protection) में ग्राउंडिंग (Earthing) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ग्राउंडिंग सिस्टम, बिजली की अत्यधिक ऊर्जा (high energy) को सुरक्षित रूप से अवशोषित (absorb) करके उसे पृथ्वी में फैला देता है, जिससे इमारतों, उपकरणों और मनुष्यों को क्षति से बचाया जा सके।
ग्राउंडिंग को आमतौर पर लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम (LPS) का टर्मिनेशन पॉइंट माना जाता है।
बिजली से बचाव में ग्राउंडिंग की मुख्य भूमिकाएँ
ग्राउंडिंग के बिना, बिजली संरक्षण प्रणाली (Lightning Protection System) काम नहीं कर सकती। इसकी तीन मुख्य भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
1. बिजली के पथ को पूरा करना (Completing the Path of Lightning)
- लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) या एयर टर्मिनेशन (Air Termination): यह धातु की छड़ें या जाली (rods or mesh) बिजली को पकड़ती हैं।
- डाउन कंडक्टर (Down Conductor): ये तार बिजली के करंट को इमारत के ऊपरी हिस्से से सीधे नीचे लाते हैं।
- अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode/Grounding): अंत में, डाउन कंडक्टर अर्थ इलेक्ट्रोड (जैसे रॉड या प्लेट) से जुड़ता है, जो अत्यधिक बिजली करंट को अवशोषित करके उसे सुरक्षित रूप से मिट्टी में फैला देता है।
2. स्टेप और टच पोटेंशियल को कम करना (Reducing Step and Touch Potential)
जब बिजली का करंट ग्राउंड इलेक्ट्रोड में प्रवेश करता है, तो यह इलेक्ट्रोड के आसपास की मिट्टी में एक विद्युत क्षमता ग्रेडिएंट (electrical potential gradient) बनाता है।
- स्टेप पोटेंशियल (Step Potential): यह इलेक्ट्रोड के आसपास खड़े व्यक्ति के पैरों के बीच उत्पन्न होने वाला संभावित अंतर (Potential Difference) है, जो खतरनाक हो सकता है।
- टच पोटेंशियल (Touch Potential): यह एक व्यक्ति के हाथ और पैर के बीच उत्पन्न होने वाला संभावित अंतर है जब वह एक ग्राउंडेड वस्तु को छूता है।
एक व्यापक और कम प्रतिरोध वाला ग्राउंडिंग सिस्टम (जैसे कई समानांतर रॉड या रिंग इलेक्ट्रोड) इस क्षमता ग्रेडिएंट को तेजी से फैलाता है, जिससे स्टेप और टच पोटेंशियल कम हो जाता है और पास खड़े लोगों को बिजली का झटका लगने का खतरा कम हो जाता है।
3. सिस्टम इक्विपोटेंशियल सुनिश्चित करना (Ensuring System Equipotential)
- ग्राउंडिंग सिस्टम बॉन्डिंग (Bonding) के माध्यम से इमारत के सभी धातु के हिस्सों (पाइप, संरचनात्मक स्टील, उपकरण बाड़े) को एक ही सामान्य ग्राउंड से जोड़ता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि जब बिजली गिरती है, तो इमारत के भीतर के सभी धातु के हिस्से लगभग समान विद्युत क्षमता (Same Electrical Potential) पर रहें।
- इससे आस-पास की धातु की वस्तुओं के बीच स्पार्किंग (Sparking) या हानिकारक साइड फ्लैश (Side Flash) को रोका जा सकता है, जो आग लगने या संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को क्षति पहुँचाने का प्रमुख कारण है।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग सुरक्षा वाल्व (Safety Valve) की तरह काम करती है जो बिजली की ऊर्जा को नियंत्रित करती है और उसे मनुष्यों, उपकरणों और संरचनाओं से दूर ले जाती है।
फ्लोटिंग न्यूट्रल क्या है?
फ्लोटिंग न्यूट्रल (Floating Neutral) एक ऐसी स्थिति है जो एक तीन-फेज़ (Three-Phase) विद्युत प्रणाली में तब उत्पन्न होती है जब सिस्टम का न्यूट्रल बिंदु (Neutral Point) या तो जानबूझकर या गलती से ग्राउंड (Earth) से जुड़ा नहीं होता है, या फिर इसका ग्राउंड से कनेक्शन कट जाता है।
जब न्यूट्रल ग्राउंड से जुड़ा नहीं होता है, तो यह विद्युत रूप से "अस्थिर" या "तैरता हुआ" (Floating) माना जाता है।
फ्लोटिंग न्यूट्रल की उत्पत्ति
यह स्थिति आमतौर पर ट्रांसफार्मर के द्वितीयक पक्ष (Secondary Side) पर या जनरेटर के स्टार (Star) कनेक्शन में उत्पन्न होती है, खासकर उन प्रणालियों में जहाँ:
- ग्राउंडिंग दोष (Grounding Fault): न्यूट्रल तार या अर्थिंग कनेक्शन टूट जाता है।
- असंतुलित लोड (Unbalanced Load): तीन फेज़ों पर लोड (Load) समान रूप से वितरित नहीं होता है।
- जानबूझकर आइसोलेशन (Intentional Isolation): कुछ औद्योगिक प्रणालियों में, न्यूट्रल को जानबूझकर ग्राउंड से अलग रखा जाता है ताकि पहले ग्राउंड फॉल्ट की स्थिति में सिस्टम का संचालन जारी रहे (हालांकि, इसके अपने जोखिम हैं)।
फ्लोटिंग न्यूट्रल के गंभीर परिणाम
फ्लोटिंग न्यूट्रल की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर असंतुलित लोड वाली प्रणालियों में, क्योंकि यह वोल्टेज वितरण को अनियंत्रित कर देती है:
1. न्यूट्रल शिफ्ट और वोल्टेज अनियंत्रण (Neutral Shift and Voltage Uncontrol)
- जब लोड असंतुलित होता है, तो न्यूट्रल बिंदु अपने शून्य संभावित (Zero Potential) से हटकर उस फेज़ की ओर "शिफ्ट" हो जाता है जिस पर लोड कम है।
- इसके परिणामस्वरूप, हल्के लोड वाले फेज़ों पर वोल्टेज खतरनाक रूप से बढ़ जाता है (Overvoltage), जबकि भारी लोड वाले फेज़ों पर वोल्टेज गिर जाता है (Undervoltage)।
2. उपकरणों को क्षति (Damage to Equipment)
- वोल्टेज में यह भारी उतार-चढ़ाव (Fluctuation) उपकरणों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
- उदाहरण के लिए, 230 V पर चलने वाले घरेलू उपकरण (जैसे बल्ब, रेफ्रिजरेटर) उच्च वोल्टेज (300 V या अधिक) प्राप्त करके तुरंत जल सकते हैं या स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
3. सुरक्षा जोखिम (Safety Hazard)
- यद्यपि ग्राउंड फॉल्ट सुरक्षा प्रणालियाँ अक्सर इस स्थिति में ट्रिप हो जाती हैं, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है, तो सिस्टम के धातु के हिस्सों पर अस्थिर वोल्टेज खतरनाक शॉक पोटेंशियल (Shock Potential) उत्पन्न कर सकता है।
समाधान (Remedy)
फ्लोटिंग न्यूट्रल की समस्या का एकमात्र मानक समाधान यह सुनिश्चित करना है कि सिस्टम का न्यूट्रल बिंदु ठोस रूप से ग्राउंडेड (Solidly Earthed) हो।
- एक अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया और स्थापित ग्राउंडिंग सिस्टम (IS 3043 के अनुसार) यह सुनिश्चित करता है कि न्यूट्रल बिंदु हमेशा शून्य संभावित पर स्थिर रहे, जिससे फेज़ वोल्टेज हमेशा नियंत्रित रहे, भले ही लोड कुछ हद तक असंतुलित हो।
मल्टीपल ग्राउंडिंग क्या है?
मल्टीपल ग्राउंडिंग (Multiple Grounding), जिसे आमतौर पर मल्टीपल अर्थिंग या मल्टीपल ग्राउंडेड न्यूट्रल (MGN) सिस्टम कहा जाता है, एक विद्युत वितरण प्रणाली (Electrical Distribution System) में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक मानक प्रथा है।
मल्टीपल ग्राउंडिंग क्या है?
मल्टीपल ग्राउंडिंग का अर्थ है कि एक ही विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल कंडक्टर (Neutral Conductor) को उसके पूरे वितरण पथ के दौरान कई बिंदुओं पर जानबूझकर और नियमित अंतराल पर पृथ्वी (Earth) से जोड़ा जाता है।
यह सिंगल पॉइंट ग्राउंडिंग (जहाँ न्यूट्रल केवल एक ही स्थान, आमतौर पर ट्रांसफार्मर पर, ग्राउंड होता है) के विपरीत है।
मल्टीपल ग्राउंडिंग का उद्देश्य और लाभ
मल्टीपल ग्राउंडिंग सिस्टम कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और परिचालन लाभ प्रदान करता है:
1. न्यूट्रल पोटेंशियल को स्थिर करना (Stabilizing Neutral Potential)
- समस्या: यदि न्यूट्रल केवल ट्रांसफार्मर पर ग्राउंडेड है और ट्रांसफार्मर से दूर लाइन पर असंतुलित लोड (Unbalanced Load) या कोई फॉल्ट (Fault) आता है, तो न्यूट्रल का पोटेंशियल (विभव) शून्य से हटकर "फ्लोट" कर सकता है (जैसा कि हमने फ्लोटिंग न्यूट्रल में चर्चा की)।
- समाधान: न्यूट्रल को कई बिंदुओं पर ग्राउंड करने से यह सुनिश्चित होता है कि पूरे नेटवर्क में न्यूट्रल पोटेंशियल लगभग शून्य (Zero Potential) पर स्थिर बना रहे, जिससे फेज़-टू-न्यूट्रल वोल्टेज नियंत्रित रहता है।
2. फॉल्ट करंट पाथ प्रदान करना (Providing Multiple Fault Current Paths)
- जब किसी फेज़ कंडक्टर में अर्थ फॉल्ट होता है, तो मल्टीपल ग्राउंडिंग फॉल्ट करंट को ट्रांसफार्मर तक वापस जाने के लिए कई समानांतर पथ (Parallel Paths) प्रदान करती है।
- यह करंट को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करने में मदद करता है, जिससे सर्किट प्रोटेक्शन डिवाइस (जैसे फ्यूज या सर्किट ब्रेकर) को तेज़ी से ट्रिप होने और फॉल्ट को क्लियर करने में मदद मिलती है।
3. बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection)
- मल्टीपल ग्राउंडिंग से डाउनस्ट्रीम उपकरणों और संरचनाओं को बिजली के झटके (Surges) से बेहतर सुरक्षा मिलती है। बिजली का अत्यधिक करंट कई ग्राउंड पॉइंट्स के माध्यम से पृथ्वी में फैल जाता है, जिससे स्थानीय प्रतिरोध (Local Resistance) और ओवरवॉल्टेज (Overvoltage) कम होता है।
4. स्टेप और टच पोटेंशियल कम करना (Minimizing Step and Touch Potential)
- सिंगल ग्राउंडिंग की तुलना में, मल्टीपल ग्राउंडिंग फॉल्ट करंट को एक छोटे से क्षेत्र के बजाय एक बड़े क्षेत्र में फैला देता है। इससे इलेक्ट्रोड के आसपास का पोटेंशियल ग्रेडिएंट कम हो जाता है, जिससे लोगों के लिए खतरनाक स्टेप पोटेंशियल और टच पोटेंशियल का खतरा कम हो जाता है।
कहाँ उपयोग किया जाता है?
मल्टीपल ग्राउंडेड न्यूट्रल (MGN) सिस्टम का उपयोग मुख्य रूप से बिजली वितरण नेटवर्क (जैसे स्थानीय सबस्टेशन से आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों तक बिजली ले जाने वाली ओवरहेड लाइनें) में किया जाता है।
भारतीय मानक IS 3043 और अन्य विद्युत संहिताएँ वितरण प्रणालियों में सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मल्टीपल ग्राउंडिंग को प्रोत्साहित करती हैं।
मिट्टी के गड्ढे को नमक और कोयले से क्यों भरा जाता है?
मिट्टी के गड्ढे (Earthing Pit) को नमक (Salt) और कोयले (Charcoal) से भरने की प्रथा पारंपरिक और प्रभावी तरीका है जिसका उपयोग अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode) के चारों ओर की मिट्टी की चालकता (Conductivity) को बेहतर बनाने और ग्राउंडिंग प्रतिरोध (Earthing Resistance) को कम करने के लिए किया जाता है।
यह अभ्यास विशेष रूप से पाइप अर्थिंग (Pipe Earthing) और प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing) जैसी पारंपरिक प्रणालियों में महत्वपूर्ण है।
नमक और कोयले का कार्य (Function of Salt and Charcoal)
1. नमक (Salt - Sodium Chloride - {NaCl})
- कार्य: मिट्टी की चालकता बढ़ाना।
- तंत्र: नमक एक इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) है। जब यह मिट्टी में मौजूद नमी के संपर्क में आता है, तो यह सोडियम ({Na}^+) और क्लोराइड ({Cl}^-) आयनों में टूट जाता है।
- ये आयन मिट्टी के माध्यम से विद्युत आवेश (Electrical Charge) के प्रवाह को सुविधाजनक बनाते हैं। जब कोई लीकेज करंट (Fault Current) प्रवाहित होता है, तो ये गतिशील आयन करंट को आसानी से पृथ्वी में फैला देते हैं, जिससे ग्राउंडिंग प्रतिरोध (Ground Resistance) का मान तेजी से कम हो जाता है।
2. कोयला (Charcoal / Wood Coal)
- कार्य: नमी को बनाए रखना (Moisture Retention) और इलेक्ट्रोड को संक्षारण से बचाना।
-
तंत्र:
- नमी अवशोषण: कोयला प्रकृति में झरझरा (Porous) होता है और इसमें उच्च जल अवशोषण क्षमता होती है। यह इलेक्ट्रोड के चारों ओर की मिट्टी को लंबे समय तक नम (Moist) बनाए रखता है। नमी की उपस्थिति आयनिक चालकता के लिए आवश्यक है। सूखी मिट्टी का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
- संक्षारण रोकथाम: कोयला प्रकृति में अकार्बनिक (Inorganic) होता है और इसमें कार्बन होता है, जो रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय होता है। यह अर्थिंग इलेक्ट्रोड (विशेषकर गैल्वनाइज्ड आयरन - GI) को मिट्टी में मौजूद हानिकारक रसायनों और इलेक्ट्रोलाइटिक संक्षारण (Electrolytic Corrosion) से बचाता है, जिससे इलेक्ट्रोड का जीवनकाल बढ़ जाता है।
गड्ढे में व्यवस्था (Arrangement in the Pit)
अर्थिंग गड्ढे में, नमक और कोयले को एकान्तर परतों (Alternate Layers) में व्यवस्थित किया जाता है, जिसमें इलेक्ट्रोड बीच में होता है।
- सबसे पहले इलेक्ट्रोड को गड्ढे में डाला जाता है।
- इसके चारों ओर कोयले की एक मोटी परत बिछाई जाती है।
- फिर नमक की एक परत डाली जाती है।
- यह क्रम तब तक दोहराया जाता है जब तक गड्ढा लगभग भर न जाए।
- गड्ढे के शीर्ष पर पानी डालने की व्यवस्था भी रखी जाती है ताकि इलेक्ट्रोलाइट (नमक) लगातार सक्रिय रहे।
आधुनिक दृष्टिकोण (Modern Approach)
हालांकि नमक और कोयले का उपयोग प्रभावी है, लेकिन आधुनिक प्रतिष्ठानों में, विशेष रूप से उच्च सुरक्षा आवश्यकताओं वाले उद्योगों में, इनका स्थान अब ग्राउंड एन्हांसमेंट मटेरियल (GEM) जैसे बेनटोनाइट (Bentonite) या अन्य कम प्रतिरोध वाले रसायनों ने ले लिया है। ये पदार्थ मिट्टी को दूषित किए बिना अधिक स्थायी और संगत ग्राउंडिंग प्रतिरोध प्रदान करते हैं।
पृथ्वी के प्रतिरोध को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
पृथ्वी या मिट्टी का प्रतिरोध (Earth Resistance or Soil Resistivity) वह सबसे महत्वपूर्ण कारक है जो एक प्रभावी ग्राउंडिंग (Earthing) प्रणाली के डिज़ाइन को प्रभावित करता है। मिट्टी का प्रतिरोध जितना कम होगा, ग्राउंडिंग प्रणाली उतनी ही बेहतर काम करेगी।
कई कारक हैं जो मिट्टी के प्रतिरोध को प्रभावित करते हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
1. मिट्टी की प्रकृति और संरचना (Nature and Composition of Soil)
मिट्टी के प्रकार में अंतर प्रतिरोध को बहुत अधिक प्रभावित करता है:
- चट्टानी/रेतीली मिट्टी (Rocky/Sandy Soil): इसका प्रतिरोध बहुत उच्च होता है, क्योंकि इसमें नमी धारण करने की क्षमता कम होती है और यह खराब चालक होती है।
- गीली दोमट मिट्टी (Wet Loamy Soil): इसका प्रतिरोध कम होता है, क्योंकि इसमें लवण (Salts) और नमी होती है, जो आयनिक चालकता (Ionic Conductivity) को बढ़ावा देती है।
- कचरा/कार्बनिक मिट्टी (Black Cotton Soil): इसमें उच्च नमी होती है, इसलिए इसका प्रतिरोध मध्यम से कम होता है।
2. नमी (Moisture Content)
यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
- मिट्टी में नमी की उपस्थिति विद्युत धारा को प्रवाहित करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइटिक समाधान (Electrolytic Solution) प्रदान करती है।
- जैसे-जैसे नमी का स्तर बढ़ता है, मिट्टी का प्रतिरोध तेजी से घटता है। हालांकि, एक निश्चित स्तर (आमतौर पर 20-30%) के बाद, नमी बढ़ाने पर प्रतिरोध में कमी की दर कम हो जाती है।
- चूंकि मिट्टी में नमी का स्तर मौसम (बारिश, सूखा) के साथ बदलता रहता है, इसलिए ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड को स्थायी रूप से नम क्षेत्र में गाड़ने की आवश्यकता होती है।
3. तापमान (Temperature)
- मिट्टी का तापमान भी प्रतिरोध को प्रभावित करता है।
- जैसे-जैसे मिट्टी का तापमान हिमांक (Freezing Point, 0^ {C}) से नीचे जाता है, मिट्टी में मौजूद पानी जम जाता है और आयनिक गति (Ionic Movement) रुक जाती है, जिससे प्रतिरोध अत्यधिक बढ़ जाता है।
- सामान्य ऑपरेटिंग तापमान सीमा में, तापमान का प्रभाव नमी जितना महत्वपूर्ण नहीं होता।
4. इलेक्ट्रोलाइट्स या लवण की सान्द्रता (Concentration of Electrolytes/Salts)
- मिट्टी में प्राकृतिक रूप से घुले हुए लवण, खनिज और एसिड (जैसे नमक और कोयले में) चालकता के लिए आयन प्रदान करते हैं।
- जितनी अधिक लवण की सान्द्रता होगी, मिट्टी उतनी ही बेहतर चालक होगी और प्रतिरोध उतना ही कम होगा।
- यही कारण है कि ग्राउंडिंग पिट में नमक और कोयला मिलाया जाता है, क्योंकि वे कृत्रिम रूप से इलेक्ट्रोलाइट सान्द्रता को बढ़ाते हैं।
5. इलेक्ट्रोड का आकार और गहराई (Electrode Size and Depth)
- गहराई (Depth): इलेक्ट्रोड को जितना अधिक गहराई तक गाड़ा जाता है, उसके स्थायी रूप से नम मिट्टी और बड़े मिट्टी के क्षेत्र के संपर्क में आने की संभावना उतनी ही अधिक होती है, जिससे प्रतिरोध कम होता है।
- आकार (Size): एक बड़ा इलेक्ट्रोड (लंबा रॉड या बड़ी प्लेट) मिट्टी के साथ अधिक सतह क्षेत्र (Surface Area) प्रदान करता है, जिससे करंट को फैलने के लिए अधिक जगह मिलती है। इससे भी ग्राउंडिंग प्रतिरोध कम होता है।
सिस्टम ग्राउंडिंग और इक्विपमेंट ग्राउंडिंग में क्या अंतर है?
सिस्टम ग्राउंडिंग (System Grounding) और इक्विपमेंट ग्राउंडिंग (Equipment Grounding) दोनों ही विद्युत सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके उद्देश्य, कनेक्शन का स्थान और सुरक्षा का दायरा अलग-अलग होता है।
संक्षेप में,
सिस्टम ग्राउंडिंग पूरे विद्युत सर्किट को सुरक्षित करती है और वोल्टेज को स्थिर करती है, जबकि इक्विपमेंट ग्राउंडिंग व्यक्ति को बिजली के झटके से बचाती है।
मुख्य अंतरों का सारांश
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विशेषता (Feature)
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सिस्टम ग्राउंडिंग (System Grounding)
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इक्विपमेंट ग्राउंडिंग (Equipment Grounding)
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उद्देश्य
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सिस्टम की सुरक्षा (उपकरणों और सर्किट की)। वोल्टेज को स्थिर करना और ओवरवॉल्टेज को सीमित करना।
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मानव सुरक्षा (बिजली के झटके से बचाना)। उपकरण की धातु बॉडी पर लीकेज करंट के निर्माण को रोकना।
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कनेक्शन बिंदु
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विद्युत प्रणाली के करंट-ले जाने वाले हिस्से (Current-Carrying Part), जैसे ट्रांसफार्मर का न्यूट्रल बिंदु या जनरेटर का स्टार पॉइंट।
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विद्युत उपकरणों के करंट-नहीं-ले जाने वाले धातु के हिस्से (Non-Current-Carrying Metal Parts), जैसे मोटर की बॉडी, पैनल का बाड़ा, फ्रिज का बाहरी खोल।
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प्रवाह पथ
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फॉल्ट करंट को सोर्स (उदा. ट्रांसफार्मर) पर वापस जाने के लिए एक जानबूझकर कम-प्रतिरोध पथ प्रदान करना।
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फॉल्ट करंट को सीधे पृथ्वी में मोड़ना और सर्किट ब्रेकर/फ्यूज को ट्रिप कराना।
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परिणाम
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वोल्टेज का नियंत्रण और ओवरकरंट सुरक्षा उपकरणों का सुनिश्चित और तेज संचालन।
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धातु की सतह पर शून्य संभावित (Zero Potential) बनाए रखना, जिससे छूने पर झटका न लगे।
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उदाहरण
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ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट को ग्राउंड इलेक्ट्रोड से जोड़ना।
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थ्री-पिन प्लग में तीसरा पिन (अर्थ पिन) उपकरण की बॉडी से जुड़ा होना।
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विस्तृत उद्देश्य
1. सिस्टम ग्राउंडिंग
सिस्टम ग्राउंडिंग का प्राथमिक उद्देश्य वोल्टेज को सीमित और स्थिर करना है।
- यह बिजली गिरने (lightning), लाइन सर्ज (line surges), या गलती से उच्च वोल्टेज लाइनों के संपर्क में आने के कारण होने वाले अत्यधिक वोल्टेज (Overvoltage) को सुरक्षित रूप से सीमित करता है।
- यह न्यूट्रल को शून्य संभावित पर स्थिर करके, फेज़ों के बीच वोल्टेज संतुलन बनाए रखने में मदद करता है (विशेष रूप से अनबैलेंस लोड की स्थिति में), जिससे उपकरणों को क्षति से बचाया जाता है।
- यह एक आवश्यक फॉल्ट करंट रिटर्न पाथ प्रदान करके ओवरकरंट सुरक्षा उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर) को सुनिश्चित करता है कि वे ग्राउंड फॉल्ट होने पर तेज़ी से काम करें।
2. इक्विपमेंट ग्राउंडिंग
इक्विपमेंट ग्राउंडिंग का प्राथमिक उद्देश्य मानव सुरक्षा है।
- किसी इन्सुलेशन विफलता (insulation failure) की स्थिति में, यदि फेज़ तार गलती से मोटर की धातु की बॉडी को छूता है, तो बॉडी पर लाइव वोल्टेज आ जाता है।
- इक्विपमेंट ग्राउंडिंग, धातु की बॉडी से जुड़ा होने के कारण, इस लीकेज करंट को कम-प्रतिरोध वाले पथ से तुरंत पृथ्वी में प्रवाहित कर देता है।
- इससे बॉडी का पोटेंशियल शून्य पर बना रहता है, और ओवरकरंट प्रोटेक्शन डिवाइस (MCB) तुरंत ट्रिप हो जाता है, जिससे उस उपकरण को छूने वाले व्यक्ति को बिजली का झटका लगने से बचाया जा सकता है।
हमें नियमित रूप से ग्राउंडिंग क्यों बनाए रखनी चाहिए?
हमें नियमित रूप से ग्राउंडिंग (Earthing) बनाए रखनी चाहिए क्योंकि यह किसी भी विद्युत स्थापना (Electrical Installation) की सुरक्षा और स्थिरता (Safety and Stability) का आधार है। ग्राउंडिंग रखरखाव की कमी से गंभीर सुरक्षा जोखिम, उपकरण क्षति और वित्तीय नुकसान हो सकता है।
यहाँ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि नियमित ग्राउंडिंग रखरखाव क्यों आवश्यक है:
1. सुरक्षा जोखिमों को कम करना (Mitigating Safety Risks)
- शॉक प्रोटेक्शन (Shock Protection): ग्राउंडिंग का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी उपकरण के धातु के बाड़े (Metal Enclosures) हमेशा शून्य संभावित (Zero Potential) पर रहें। यदि ग्राउंडिंग सिस्टम खराब हो जाता है, तो उपकरण के बॉडी पर लीकेज करंट (Leakage Current) जमा हो सकता है, और इसे छूने पर व्यक्ति को गंभीर बिजली का झटका लग सकता है।
- आग से बचाव: खराब ग्राउंडिंग के कारण दोषपूर्ण करंट (Fault Current) अनपेक्षित रास्तों (जैसे इमारत की संरचना या पाइपिंग) से प्रवाहित हो सकता है, जिससे अत्यधिक ताप (Overheating) उत्पन्न होता है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
2. ग्राउंडिंग प्रतिरोध बनाए रखना (Maintaining Low Grounding Resistance)
- चालकता में गिरावट: समय के साथ, ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड के चारों ओर की मिट्टी सूख सकती है, या नमक और कोयले (यदि उपयोग किए गए हैं) की चालकता कम हो सकती है।
- संक्षारण (Corrosion): मिट्टी में मौजूद नमी, लवण और रासायनिक तत्व धीरे-धीरे अर्थ इलेक्ट्रोड (विशेषकर GI) को संक्षारित (Corrode) कर देते हैं, जिससे कंडक्टर का क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्र कम हो जाता है और प्रतिरोध बढ़ जाता है।
- नियमित माप: नियमित रखरखाव में ग्राउंडिंग प्रतिरोध को मापने (जैसे फॉल-ऑफ-पोटेंशियल विधि का उपयोग करके) और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है कि यह IS 3043 द्वारा अनुशंसित अधिकतम सीमा (जैसे 5 ओम) के भीतर बना रहे।
3. उपकरण और सर्किट की सुरक्षा (Protecting Equipment and Circuits)
- ओवरकरंट प्रोटेक्शन का सही संचालन: एक उच्च प्रतिरोध वाला ग्राउंडिंग सिस्टम यह सुनिश्चित नहीं कर सकता कि ग्राउंड फॉल्ट होने पर फॉल्ट करंट पर्याप्त रूप से प्रवाहित हो। नतीजतन, सर्किट ब्रेकर (MCB/MCCB) या फ्यूज धीमी गति से ट्रिप हो सकते हैं या ट्रिप नहीं हो सकते, जिससे उपकरण लंबे समय तक उच्च करंट के संपर्क में बने रहते हैं और स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
- वोल्टेज स्थिरता: ग्राउंडिंग सिस्टम ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल वोल्टेज को स्थिर रखता है। यदि ग्राउंडिंग विफल हो जाती है (फ्लोटिंग न्यूट्रल), तो वोल्टेज नियंत्रण से बाहर हो सकता है और नाजुक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है।
4. बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection)
- बिजली गिरने की स्थिति में, ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड को सेकंड के एक अंश में लाखों एम्पीयर का करंट सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करना होता है।
- यदि इलेक्ट्रोड क्षतिग्रस्त या संक्षारित है, तो यह इतनी बड़ी ऊर्जा को कुशलता से नहीं संभाल पाएगा, जिससे बिजली का करंट इमारत या उपकरणों के माध्यम से अनपेक्षित रूप से प्रवाहित हो सकता है और गंभीर क्षति हो सकती है।
आवश्यक रखरखाव कार्य
नियमित ग्राउंडिंग बनाए रखने के लिए आमतौर पर निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं:
- प्रतिरोध मापन: वर्ष में कम से कम एक बार अर्थ प्रतिरोध को मापना।
- दृश्य निरीक्षण (Visual Inspection): सभी अर्थिंग कनेक्शन, कंडक्टर और इलेक्ट्रोड के सिरों की जांच करना।
- आयनिक सक्रियण (Ionic Activation): पारंपरिक गड्ढों में नमी और चालकता बनाए रखने के लिए पानी और नमक डालना।
नियमित रखरखाव जीवन, संपत्ति और डेटा की सुरक्षा के लिए बीमा पॉलिसी की तरह है।
ग्राउंड फॉल्ट करंट क्या होता है?
ग्राउंड फॉल्ट करंट (Ground Fault Current), जिसे हिंदी में भू-दोष धारा या अर्थ फॉल्ट करंट कहते हैं, वह असामान्य विद्युत धारा है जो तब प्रवाहित होती है जब किसी विद्युत प्रणाली का लाइव (फेज़) कंडक्टर या कोई अन्य करंट-ले जाने वाला भाग गलती से ग्राउंडेड (Earthed) वस्तु को छू लेता है।
सरल शब्दों में,
यह वह बिजली है जो अपने सामान्य रिटर्न पाथ (न्यूट्रल तार) से भटककर एक छोटे रास्ते (Short Path) से जमीन (Earth) में चली जाती है।
ग्राउंड फॉल्ट करंट कैसे उत्पन्न होता है?
ग्राउंड फॉल्ट करंट उत्पन्न होने के मुख्य कारण और तरीके निम्नलिखित हैं:
- इंसुलेशन क्षति (Insulation Damage): तार का इन्सुलेशन पुराना होने, अत्यधिक गर्मी या यांत्रिक क्षति के कारण टूट जाता है, जिससे लाइव तार पास की किसी धातु की सतह (जैसे मोटर का खोल या उपकरण की बॉडी) को छू लेता है।
- पानी/नमी की उपस्थिति: रसोई, बाथरूम या बाहरी आउटलेट जैसे गीले स्थानों में, पानी एक प्रवाहकीय पुल (Conductive Bridge) के रूप में कार्य करता है, जिससे बिजली सीधे जमीन में चली जाती है।
- वायरिंग त्रुटि: गलत वायरिंग के कारण लाइव तार सीधे ग्राउंड तार या ग्राउंड से जुड़े धातु के ढांचे (जैसे कंड्यूट पाइप) को छू लेता है।
ग्राउंड फॉल्ट करंट का खतरा
यह करंट बेहद खतरनाक होता है क्योंकि:
- मानव सुरक्षा: जब लाइव करंट उपकरण की धातु बॉडी को छूता है, तो बॉडी पर खतरनाक वोल्टेज आ जाता है। यदि कोई व्यक्ति उस बॉडी को छूता है, तो करंट व्यक्ति के शरीर से होकर जमीन में प्रवाहित होता है, जिससे गंभीर या घातक बिजली का झटका लग सकता है।
- उपकरण क्षति: चूंकि ग्राउंड फॉल्ट अक्सर कम प्रतिरोध वाला पथ होता है, इसलिए करंट का मान अचानक और खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिससे तारों में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है और उपकरणों को नुकसान पहुँचता है।
- आग का खतरा: अत्यधिक गर्मी और संभावित रूप से उत्पन्न होने वाली आर्क (Arc) के कारण आग लगने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
सुरक्षा उपाय (Ground Fault Protection)
ग्राउंड फॉल्ट करंट के खतरों से बचने के लिए, ग्राउंड फॉल्ट सर्किट इंटरप्टर (GFCI) या रेसिडुअल करंट डिवाइस (RCD/RCCB) जैसे सुरक्षा उपकरण उपयोग किए जाते हैं।
- ये उपकरण लाइव (फेज़) और न्यूट्रल तार में प्रवाहित करंट की लगातार तुलना करते हैं।
- सामान्य स्थिति में, ये करंट बराबर होते हैं। ग्राउंड फॉल्ट होने पर, करंट का एक हिस्सा जमीन में चला जाता है, जिससे लाइव और न्यूट्रल करंट असंतुलित (Unbalanced) हो जाते हैं।
- यह असंतुलन (अर्थात, ग्राउंड फॉल्ट करंट) होने पर, GFCI/RCCB तुरंत सर्किट को काट देता है, आमतौर पर 30 मिलीएम्पीयर (mA) से अधिक रिसाव होने पर, जिससे व्यक्ति को झटका लगने से पहले ही बिजली बंद हो जाती है।
संचार प्रणालियों में आधारभूत प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है?
संचार प्रणालियों (Communication Systems) में आधारभूत प्रशिक्षण (Base Training) का उद्देश्य संदर्भ के आधार पर भिन्न हो सकता है। यह आमतौर पर या तो सिस्टम के डिजाइन और संचालन (System Design and Operation) से संबंधित होता है या फिर प्रशिक्षण डेटा (Training Data) से संबंधित होता है जिसका उपयोग मशीन लर्निंग-आधारित संचार प्रणालियों में किया जाता है।
आपके प्रश्न को संचार प्रणालियों के बुनियादी संचालन और रखरखाव (Basic Operation and Maintenance) से संबंधित मानते हुए, यहाँ मुख्य उद्देश्य दिए गए हैं:
1. तकनीकी दक्षता और सुरक्षा (Technical Proficiency and Safety)
आधारभूत प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारी संचार उपकरणों को सही ढंग से संचालित, स्थापित और बनाए रखने में सक्षम हों।
- सुरक्षित संचालन: कर्मचारियों को उच्च वोल्टेज उपकरण, रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन, और टावर पर चढ़ने जैसे संभावित खतरनाक कार्यों से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं को सिखाना।
- उपकरणों की समझ: ट्रांसमीटर, रिसीवर, एंटीना, फ़िल्टर और मॉड्युलेटर जैसे महत्वपूर्ण घटकों के कार्य सिद्धांत और उनके सही उपयोग को समझाना।
- न्यूनतम क्षति: उपकरणों को गलत तरीके से संभालने या स्थापित करने से होने वाली क्षति को रोकना, जिससे महंगे उपकरणों का जीवनकाल बढ़ सके।
2. सिस्टम की विश्वसनीयता और डाउनटाइम कम करना (System Reliability and Reduced Downtime)
संचार प्रणालियों को 24/7 उच्च विश्वसनीयता के साथ काम करना होता है।
- दोष निवारण (Troubleshooting): कर्मचारियों को सामान्य और जटिल त्रुटियों की पहचान करने और उनका शीघ्रता से निवारण करने के लिए आवश्यक विश्लेषणात्मक कौशल प्रदान करना।
- तेज़ बहाली (Fast Recovery): फॉल्ट या ब्रेकडाउन की स्थिति में, प्रशिक्षित टीम सिस्टम को जल्द से जल्द बहाल कर सकती है, जिससे सेवा में रुकावट (downtime) कम हो जाती है।
- नियमित रखरखाव: निर्धारित रखरखाव प्रक्रियाओं का सही पालन करना सिखाना, जिससे अचानक आने वाले फॉल्ट्स की संभावना कम हो।
3. मानकों का अनुपालन (Adherence to Standards and Regulations)
संचार प्रणालियों को स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं (जैसे भारत में TRAI) द्वारा निर्धारित सख्त मानकों का पालन करना होता है।
- नियामक ज्ञान: आवृत्ति आवंटन (Frequency Allocation), ट्रांसमिशन पावर सीमाएं, उत्सर्जन मानक और सुरक्षा कोड जैसे कानूनी और तकनीकी मानकों की जानकारी देना।
- दस्तावेज़ीकरण: सभी स्थापना, मरम्मत और रखरखाव गतिविधियों का उचित दस्तावेज़ीकरण करना सिखाना, जो नियामक अनुपालन के लिए आवश्यक है।
4. नई प्रौद्योगिकियों के लिए तैयारी (Preparation for New Technologies)
संचार उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है (जैसे 4G से 5G और उससे आगे का विकास)।
- कौशल अद्यतन (Skill Upgradation): आधारभूत प्रशिक्षण एक मजबूत नींव बनाता है, जिससे कर्मचारियों के लिए नई और जटिल तकनीकों (जैसे सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो, MIMO, एज कंप्यूटिंग) को सीखना और अपनाना आसान हो जाता है।
यदि आप इस प्रश्न को मशीन लर्निंग (ML) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित संचार प्रणालियों के संदर्भ में पूछ रहे थे, तो आधारभूत प्रशिक्षण का उद्देश्य मॉडल को पर्याप्त डेटासेट पर प्रशिक्षित करना होता है ताकि वह:
- सिग्नल को पहचान सके।
- चैनल की स्थिति का अनुमान लगा सके।
- नॉइज़ (Noise) को फ़िल्टर कर सके।
क्या हम लाइटनिंग अरेस्टर और उपकरणों के लिए एक ही ग्राउंडिंग का उपयोग कर सकते हैं?
बिजली अरेस्टर (Lightning Arrester) और सामान्य विद्युत उपकरणों (Equipment) के लिए आदर्श रूप से एक ही ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड या ग्राउंडिंग सिस्टम का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि कुछ अपवाद और विशेष परिस्थितियों में इन्हें जोड़ा जाता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से इन्हें अलग रखना एक मानक अभ्यास है।
मुख्य कारण: ऊर्जा का अंतर (Difference in Energy)
लाइटनिंग अरेस्टर (LA) और उपकरण ग्राउंडिंग को अलग रखने का मुख्य कारण बिजली के करंट की विशाल ऊर्जा है।
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लाइटनिंग अरेस्टर (LA) ग्राउंडिंग:
- LA का उद्देश्य बिजली गिरने के दौरान लाखों एम्पीयर तक के अत्यधिक उच्च करंट को सुरक्षित रूप से और तेज़ी से पृथ्वी में प्रवाहित करना है।
- यह बिजली का झटका अस्थायी (Momentary) होता है, लेकिन यह ग्राउंड इलेक्ट्रोड के चारों ओर एक अत्यधिक उच्च क्षणिक विभव वृद्धि (Transient High Potential Rise) उत्पन्न करता है।
- उपकरण (Equipment) ग्राउंडिंग:
- उपकरण ग्राउंडिंग का उद्देश्य उपकरणों के धातु बॉडी पर जीरो पोटेंशियल (Zero Potential) बनाए रखना और हजारों एम्पीयर तक के छोटे, दोषपूर्ण करंट (Fault Current) को क्लियर करना है।
खतरा: विभव युग्मन (Potential Coupling)
यदि आप दोनों के लिए एक ही ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का उपयोग करते हैं, तो जब बिजली गिरती है:
- LA द्वारा पृथ्वी में प्रवाहित होने वाला भारी करंट, संयुक्त ग्राउंड इलेक्ट्रोड में एक उच्च क्षणिक विभव उत्पन्न करेगा।
- यह विभव तुरंत सभी उपकरणों की बॉडी (जो उसी इलेक्ट्रोड से जुड़ी हैं) में स्थानांतरित हो जाएगा।
- इससे उपकरणों को भारी क्षति हो सकती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह एक भयानक सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है, क्योंकि उपकरण की बॉडी क्षण भर के लिए लाइव हो जाएगी, जिससे छूने वाले किसी भी व्यक्ति को घातक झटका लग सकता है।
मानक समाधान: पृथक्करण और बॉन्डिंग (Separation and Bonding)
सुरक्षा और मानक अभ्यास निम्नलिखित समाधानों का सुझाव देते हैं:
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पृथक ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (Separate Grounding Electrodes):
- लाइटनिंग अरेस्टर के लिए एक समर्पित ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (जिसे लाइटनिंग अर्थ कहा जाता है) स्थापित करें।
- उपकरणों के लिए एक अलग ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड (जिसे सिस्टम या उपकरण अर्थ कहा जाता है) स्थापित करें।
- दोनों इलेक्ट्रोड को भौतिक रूप से एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर रखें (आमतौर पर अरेस्टर की रॉड की लंबाई से दोगुना)।
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समविभव बॉन्डिंग (Equipotential Bonding):
- हालांकि दोनों इलेक्ट्रोडों को अलग-अलग गाड़ा जाता है, उन्हें सुरक्षा के लिए जमीन के नीचे एक बॉन्डिंग कंडक्टर (Bonding Conductor) का उपयोग करके जोड़ा जाना चाहिए।
- यह बॉन्डिंग यह सुनिश्चित करती है कि सभी धातु के हिस्से अंततः एक ही विद्युत क्षमता (Electrical Potential) पर रहें, जिससे आस-पास की धातु संरचनाओं के बीच खतरनाक साइड-फ्लैशिंग (Side-Flashing) (यानी, एक इलेक्ट्रोड से दूसरे में आर्क) रोका जा सके।
- यह बॉन्डिंग ग्राउंडिंग सिस्टम को एकल, व्यापक प्रणाली में बदल देती है, जो फॉल्ट करंट को कुशलता से प्रबंधित करती है।
निष्कर्ष: आपको भौतिक रूप से अलग-अलग इलेक्ट्रोड का उपयोग करना चाहिए, लेकिन समविभव सुनिश्चित करने के लिए उन्हें बॉन्डिंग द्वारा जोड़ना आवश्यक है।
ग्राउंडिंग सिस्टम में फॉल्ट करंट की गणना करने का सूत्र क्या है?
ग्राउंडिंग सिस्टम में फॉल्ट करंट (Ground Fault Current) की गणना करना विद्युत प्रणाली के डिज़ाइन और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
फॉल्ट करंट का मान मुख्य रूप से वोल्टेज और फॉल्ट लूप में कुल प्रतिबाधा (Total Impedance) पर निर्भर करता है। यह गणना अक्सर ओम के नियम (Ohm's Law) के सिद्धांतों पर आधारित होती है, लेकिन इसमें प्रतिबाधा (Impedance) को शामिल किया जाता है।
ग्राउंड फॉल्ट करंट की गणना का सामान्य सूत्र
सबसे सामान्य और मूलभूत सूत्र, जो अधिकतम संभावित दोष धारा (Maximum Prospective Fault Current) का अनुमान लगाता है, वह है:
I_f = {V_p}/{Z_f}
यहाँ:
- I_f = ग्राउंड फॉल्ट करंट (Ground Fault Current) (एम्पीयर में)
- V_p = वह फेज़ वोल्टेज (Phase Voltage) जो फॉल्ट होने के दौरान ग्राउंडिंग सिस्टम पर पड़ता है (वोल्ट में)। यह अक्सर सिस्टम का फेज़-टू-न्यूट्रल वोल्टेज होता है (जैसे भारत में 230 {V})।
- Z_f = फॉल्ट करंट के पाथ में मौजूद कुल प्रतिबाधा (Total Impedance) (ओम में)।
कुल प्रतिबाधा (Z_f) का विस्तार
फॉल्ट करंट के पाथ की कुल प्रतिबाधा (Z_f) एक सरल प्रतिरोध (Resistance) नहीं है, बल्कि इसमें फॉल्ट लूप में मौजूद सभी तत्वों की प्रतिबाधा (Impedance) शामिल होती है:
Z_f Z_{{source}} + Z_{{cable}} + R_{{fault}} + R_{{ground}}
यहाँ घटकों का अर्थ है:
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घटक (Component)
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प्रतीक (Symbol)
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विवरण (Description)
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सोर्स प्रतिबाधा
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Z_{{source}}
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ट्रांसफार्मर, जनरेटर और पावर स्टेशन की प्रतिबाधा। यह करंट की आपूर्ति को सीमित करने वाला मुख्य कारक है।
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केबल प्रतिबाधा
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Z_{{cable}}
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कंडक्टरों (फेज़ और ग्राउंड) और ट्रांसमिशन लाइन की प्रतिबाधा।
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फॉल्ट प्रतिरोध
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R_{{fault}}
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फॉल्ट बिंदु पर प्रतिरोध (जैसे, आर्क प्रतिरोध, संपर्क प्रतिरोध)। यह अक्सर गणना में उपेक्षित (Neglected) किया जाता है या शून्य माना जाता है ताकि अधिकतम संभावित करंट का अनुमान लगाया जा सके।
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ग्राउंडिंग प्रतिरोध
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R_{{ground}}
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अर्थ इलेक्ट्रोड (Earth Electrode) और पृथ्वी का प्रतिरोध (Grounding Resistance)।
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गणना में व्यावहारिक दृष्टिकोण
व्यावहारिक गणनाएँ अक्सर अधिकतम करंट (Worst Case Scenario) का पता लगाने पर केंद्रित होती हैं, इसलिए:
- फॉल्ट प्रतिरोध (R_{{fault}}) को अक्सर शून्य माना जाता है।
- फॉल्ट करंट को सीमित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक सोर्स प्रतिबाधा (Z_{{source}}) है।
यदि हम केवल ग्राउंडिंग सिस्टम की गुणवत्ता के कारण होने वाले फॉल्ट करंट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो सबसे सरल (लेकिन कम सटीक) सूत्र होगा:
I_f {V_{{LL}}}/{sqrt{3} × R_{{ground}}}
जहाँ V_{{LL}} फेज़-टू-फेज़ वोल्टेज है और R_{{ground}} ग्राउंडिंग सिस्टम का कुल प्रतिरोध है।
महत्वपूर्ण नोट: उच्च-शक्ति प्रणालियों (High-Power Systems) के लिए, फॉल्ट करंट की गणना सरल सूत्रों के बजाय विस्तृत फॉल्ट स्टडी (Fault Study) सॉफ्टवेयर और समतुल्य सर्किट मॉडल का उपयोग करके की जाती है, जो फेज़ कोणों और रिएक्टेंस (Reactance) को ध्यान में रखते हैं।
यदि समय के साथ ग्राउंडिंग प्रतिरोध बढ़ता है तो क्या होगा?
यदि समय के साथ ग्राउंडिंग प्रतिरोध (Earthing Resistance) बढ़ता है, तो विद्युत प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता दोनों पर कई गंभीर और खतरनाक प्रभाव पड़ते हैं। यह एक बहुत ही जोखिम भरी स्थिति है।
1. मानव सुरक्षा जोखिम (Increased Risk to Human Life)
ग्राउंडिंग का प्राथमिक उद्देश्य मानव जीवन की सुरक्षा करना है। प्रतिरोध बढ़ने पर यह उद्देश्य विफल हो जाता है:
- खतरनाक टच पोटेंशियल (Dangerous Touch Potential): यदि उपकरण में कोई फॉल्ट आता है और लाइव करंट धातु की बॉडी को छूता है, तो ग्राउंडिंग सिस्टम इस करंट को सुरक्षित रूप से हटा नहीं पाएगा। बढ़े हुए प्रतिरोध के कारण, फॉल्ट करंट धीमा हो जाएगा, और उपकरण की बॉडी पर खतरनाक वोल्टेज (टच पोटेंशियल) बन जाएगा। इसे छूने वाले व्यक्ति को गंभीर या घातक बिजली का झटका लग सकता है।
- सर्किट ब्रेकर का विफल होना: उच्च प्रतिरोध के कारण, फॉल्ट करंट का मान इतना कम हो सकता है कि यह सर्किट प्रोटेक्शन डिवाइस (MCB/MCCB) को ट्रिप करने के लिए अपर्याप्त हो। फॉल्ट करंट प्रवाहित होता रहेगा, लेकिन सर्किट कट नहीं होगा।
2. उपकरणों और संपत्ति को क्षति (Damage to Equipment and Property)
- उच्च वोल्टेज स्ट्रेस: यदि ग्राउंडिंग प्रतिरोध बढ़ जाता है, तो फॉल्ट की स्थिति में वोल्टेज खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है (वोल्टेज ड्रॉप V = I × R के अनुसार)। यह उच्च वोल्टेज उपकरणों के इन्सुलेशन (Insulation) को नष्ट कर सकता है और उन्हें स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है।
- आग का खतरा: फॉल्ट करंट, जो अब अपने इच्छित ग्राउंडिंग पाथ से प्रवाहित नहीं हो रहा है, वह वैकल्पिक, अनपेक्षित पथों (जैसे बिल्डिंग के धातु के ढांचे, गैस या पानी के पाइप) से प्रवाहित होने की कोशिश करेगा। ये अनपेक्षित पाथ गर्म हो सकते हैं और आग लगने का कारण बन सकते हैं।
- सर्किट इंटरप्टर का धीमा संचालन: सुरक्षा उपकरणों के धीमी गति से कार्य करने के कारण, उपकरण और वायरिंग लंबे समय तक उच्च करंट के संपर्क में रहते हैं, जिससे उनकी आयु कम हो जाती है।
3. सिस्टम की अस्थिरता (System Instability and Unreliability)
- वोल्टेज का अस्थिर होना (Floating Neutral): सिस्टम ग्राउंडिंग (Neutral Grounding) का प्रतिरोध बढ़ने से न्यूट्रल पॉइंट अस्थिर हो सकता है और अपने शून्य पोटेंशियल से हटकर शिफ्ट हो सकता है। इससे फेज़-टू-न्यूट्रल वोल्टेज असंतुलित हो जाएगा, जिससे उपकरण या तो ओवरवॉल्टेज या अंडरवॉल्टेज का सामना करेंगे।
- सर्ज प्रोटेक्शन की विफलता: बिजली गिरने (Lightning) या क्षणिक सर्ज (Transient Surges) की स्थिति में, उच्च ग्राउंडिंग प्रतिरोध सर्ज ऊर्जा को कुशलता से पृथ्वी में प्रवाहित नहीं होने देगा, जिससे यह ऊर्जा संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (कंप्यूटर, सर्वर) में प्रवेश कर जाएगी और उन्हें नष्ट कर देगी।
संक्षेप में,
ग्राउंडिंग प्रतिरोध का बढ़ना एक सुरक्षित और विश्वसनीय विद्युत प्रणाली के पतन की शुरुआत है। इसीलिए IS 3043 मानक के अनुसार नियमित रूप से ग्राउंडिंग प्रतिरोध का मापन और रखरखाव (जैसे पानी और नमक डालना) आवश्यक है।
सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड क्या है?
सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड (Substation Grounding Grid) एक अंतर्निहित सुरक्षा प्रणाली है जिसे विशेष रूप से विद्युत सबस्टेशनों (Electrical Substations) और पावर प्लांट्स के नीचे डिज़ाइन और स्थापित किया जाता है।
यह ग्रिड सबस्टेशन के अंदर और उसके आसपास काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महंगे उपकरणों को क्षति से बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड क्या है?
यह मुख्य रूप से नंगे तांबे के कंडक्टरों (Bare Copper Conductors) का एक नेटवर्क होता है, जिन्हें सबस्टेशन के पूरे क्षेत्र के नीचे क्षैतिज रूप से, एक ग्रिड पैटर्न (जाली/Mesh) में, उथली गहराई पर दफनाया जाता है।
{Grids} {Horizontally buried bare copper conductors in a mesh pattern.}
मुख्य उद्देश्य:
मानव सुरक्षा: फॉल्ट (दोष) की स्थिति में स्टेप पोटेंशियल (Step Potential) और टच पोटेंशियल (Touch Potential) को कम करना।
- उपकरण सुरक्षा: बिजली और अन्य क्षणिक सर्ज (Transient Surges) की ऊर्जा को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में फैलाना।
- सिस्टम स्थिरता: सभी उपकरणों के धातु के बाड़ों को समविभव (Equipotential) पर बनाए रखना।
ग्रिड के मुख्य कार्य और लाभ
सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड का डिजाइन विशेष रूप से सबस्टेशन में होने वाले उच्च फॉल्ट करंट को संभालने के लिए किया जाता है:
1. स्टेप और टच पोटेंशियल नियंत्रण (Control of Step and Touch Potential)
जब सबस्टेशन पर कोई बड़ा फॉल्ट आता है, तो एक बहुत बड़ा फॉल्ट करंट ग्राउंडिंग ग्रिड में प्रवेश करता है।
- बिना ग्रिड के: करंट एक छोटे से क्षेत्र में केंद्रित हो जाएगा, जिससे उस स्थान के पास की जमीन पर बहुत अधिक वोल्टेज ग्रेडिएंट (Potential Gradient) उत्पन्न होगा, जो पास खड़े या चलने वाले कर्मियों के लिए घातक हो सकता है।
- ग्रिड के साथ: ग्रिड फॉल्ट करंट को पूरे क्षेत्र में समान रूप से फैला देता है। यह मिट्टी की सतह पर वोल्टेज के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करता है, जिससे कर्मियों को झटका लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।
2. समविभव सुनिश्चित करना (Ensuring Equipotential)
- ग्राउंडिंग ग्रिड से सभी धातु संरचनाओं (जैसे ट्रांसफार्मर, सर्किट ब्रेकर, स्विचगियर और बाड़ों) को जोड़ा जाता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि फॉल्ट की स्थिति में भी, सबस्टेशन के भीतर की सभी धातु की वस्तुएँ एक ही विद्युत क्षमता पर हों, जिससे दो वस्तुओं के बीच कोई हानिकारक संभावित अंतर (Potential Difference) न हो और साइड-फ्लैशिंग (Side-Flashing) रोका जा सके।
3. फॉल्ट करंट पाथ प्रदान करना
- ग्रिड एक मजबूत, कम-प्रतिरोध वाला पाथ प्रदान करता है ताकि ग्राउंड फॉल्ट करंट सबस्टेशन में ही सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित हो जाए।
- यह ओवरकरंट सुरक्षा उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर) को तेज़ी से फॉल्ट को क्लियर करने की अनुमति देता है, जिससे सबस्टेशन उपकरणों को क्षति से बचाया जा सके।
डिजाइन मानक
सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड का डिज़ाइन अत्यंत जटिल होता है और इसमें मिट्टी के प्रतिरोध, अधिकतम संभावित फॉल्ट करंट, और क्लीयरिंग समय जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है। भारत में, इसके लिए IS 3043 और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर IEEE Std 80 जैसे मानकों का पालन किया जाता है।
ग्राउंडिंग पर सूखी मिट्टी का क्या प्रभाव पड़ता है?
ग्राउंडिंग (Earthing) पर सूखी मिट्टी (Dry Soil) का प्रभाव अत्यधिक नकारात्मक और सीधा होता है। सूखी मिट्टी ग्राउंडिंग प्रणाली की प्रभावशीलता को कम करने वाला सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक कारक है।
सूखी मिट्टी का प्रभाव: प्रतिरोध में भारी वृद्धि
सूखी मिट्टी का सबसे बड़ा प्रभाव यह होता है कि यह ग्राउंडिंग प्रतिरोध (Earthing Resistance) को खतरनाक रूप से बढ़ा देती है।
- चालकता का अभाव: विद्युत धारा का प्रवाह (विशेष रूप से फॉल्ट करंट) मिट्टी में मौजूद आयनों (Ions) के माध्यम से होता है। इन आयनों को गति करने के लिए नमी (पानी) की आवश्यकता होती है, जो एक इलेक्ट्रोलाइटिक घोल (Electrolytic Solution) के रूप में कार्य करती है।
- आयनों की निष्क्रियता: जब मिट्टी सूख जाती है, तो आयन गति करना बंद कर देते हैं या उनकी गति बहुत धीमी हो जाती है।
- प्रतिरोध में वृद्धि: नमी की कमी के कारण मिट्टी की चालकता (Conductivity) बहुत कम हो जाती है, और प्रतिरोध (Resistance) घातक रूप से बढ़ जाता है।
संख्यात्मक उदाहरण:
सूखी, रेतीली मिट्टी का प्रतिरोध नम मिट्टी की तुलना में हजारों गुना अधिक हो सकता है। जबकि अच्छी ग्राउंडिंग के लिए प्रतिरोध 5 {Ohms} से कम होना चाहिए, सूखी मिट्टी में यह आसानी से 100 {Ohms} से ऊपर जा सकता है।
बढ़े हुए प्रतिरोध के परिणाम
जैसा कि हमने पहले चर्चा की है, ग्राउंडिंग प्रतिरोध बढ़ने के कारण निम्नलिखित गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं:
- सुरक्षा विफलता: उच्च प्रतिरोध के कारण फॉल्ट करंट सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित नहीं हो पाता। इससे उपकरण की धातु बॉडी पर खतरनाक टच पोटेंशियल बन जाता है, जिससे बिजली के झटके का खतरा बढ़ जाता है।
- सुरक्षा उपकरण की विफलता: फॉल्ट करंट का मान इतना कम रह सकता है कि वह सर्किट ब्रेकर या फ्यूज को ट्रिप न करा पाए, जिससे उपकरण और वायरिंग को क्षति पहुँचती रहती है।
- वोल्टेज अस्थिरता: सूखी मिट्टी न्यूट्रल पॉइंट को प्रभावी ढंग से ग्राउंड नहीं कर पाती, जिससे सिस्टम में वोल्टेज अस्थिर (Floating Neutral) हो सकता है और उपकरणों को नुकसान पहुँच सकता है।
समाधान: नमी बनाए रखना
सूखी मिट्टी के प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाते हैं:
- गहराई बढ़ाना: इलेक्ट्रोड को मिट्टी में अधिक गहराई तक गाड़ना, जहाँ नमी का स्तर पूरे वर्ष अधिक स्थिर रहता है।
- ग्राउंड एन्हांसमेंट मटेरियल (GEM): इलेक्ट्रोड के चारों ओर विशेष यौगिकों (जैसे बेनटोनाइट, जो नमी को सोखते हैं) का उपयोग करना।
- नियमित पानी डालना: यदि पारंपरिक नमक और कोयले का उपयोग किया गया है, तो गड्ढे को नम रखने के लिए नियमित रूप से पानी डालने की व्यवस्था करना।
सूखी मिट्टी की स्थिति में प्रभावी ग्राउंडिंग बनाए रखना एक सतत रखरखाव कार्य है।
ग्राउंड लूप क्या है?
ग्राउंड लूप (Ground Loop), जिसे हिंदी में भू-पाश या अर्थ लूप कहा जाता है, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में एक सामान्य समस्या है जो अवांछित नॉइज़ (Noise) और इंटरफेरेंस (Interference) पैदा करती है।
यह तब उत्पन्न होता है जब किसी प्रणाली के दो या दो से अधिक घटकों को एक ही संदर्भ बिंदु (Ground) से जोड़ने के लिए कई पथ (Multiple Paths) मौजूद होते हैं, और इन पथों के बीच विद्युत क्षमता (Electrical Potential) में अंतर होता है।
ग्राउंड लूप कैसे बनता है?
- एकाधिक ग्राउंड पथ: जब दो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे कंप्यूटर और ऑडियो मिक्सर) को एक सिग्नल केबल (जिसका शील्ड/कवच भी ग्राउंड से जुड़ा हो) और साथ ही उनके अलग-अलग पावर सप्लाई कॉर्ड के माध्यम से ग्राउंडिंग सिस्टम से जोड़ा जाता है।
- ग्राउंड पोटेंशियल में अंतर: हालाँकि सभी ग्राउंड बिंदु आदर्श रूप से शून्य वोल्ट पर होने चाहिए, वास्तविक दुनिया में, अलग-अलग ग्राउंडिंग बिंदुओं पर हमेशा थोड़ा सा प्रतिरोध (Resistance) और विद्युत क्षमता का अंतर होता है।
- करंट का प्रवाह: यह संभावित अंतर एक छोटे से करंट (Ground Loop Current) को बनाता है जो दोनों उपकरणों के बीच के सिग्नल केबल (शील्ड) और ग्राउंडिंग पाथ में एक लूप (पाश) में प्रवाहित होना शुरू कर देता है।
ग्राउंड लूप के परिणाम
यह प्रवाहित होने वाला ग्राउंड लूप करंट, सिग्नल केबल में एक अवांछित वोल्टेज (नॉइज़) प्रेरित करता है।
- ऑडियो प्रणालियों में: यह सबसे आम समस्या है और इसके कारण गुंजन (Humming) या भिनभिनाहट (Buzzing) की आवाज़ सुनाई देती है (आमतौर पर 50 हर्ट्ज़ या 60 हर्ट्ज़ पावर लाइन आवृत्ति पर)।
- वीडियो प्रणालियों में: यह हस्तक्षेप अवांछित पट्टियों (Rolling Bars) या छवि विकृतियों (Image Distortions) के रूप में दिखाई दे सकता है।
- डेटा प्रणालियों में: यह डेटा ट्रांसमिशन में त्रुटियाँ (Errors) या संचार में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ग्राउंड लूप को हल करने के तरीके
ग्राउंड लूप को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका यह सुनिश्चित करना है कि सिस्टम में केवल एक ही ग्राउंड संदर्भ बिंदु (Single Point Grounding) हो:
- सिंगल पॉइंट ग्राउंडिंग: यह सुनिश्चित करना कि सभी सिग्नल केबल और उपकरण केवल एक ही समर्पित ग्राउंडिंग बिंदु से जुड़े हों।
- ग्राउंड आइसोलेटर: ऑडियो या वीडियो सिग्नल पाथ में ट्रांसफॉर्मर-आधारित आइसोलेटर का उपयोग करना। यह डिवाइस सिग्नल को पास होने देती है लेकिन ग्राउंड लूप करंट को अवरुद्ध कर देती है।
- ऑप्टिकल आइसोलेशन: हाई-स्पीड डेटा और कंट्रोल सिस्टम में, सिग्नल ट्रांसमिशन के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल का उपयोग करना, जो विद्युत रूप से पूरी तरह से पृथक (Isolated) होती हैं।
- बैलेंस्ड केबलिंग: ऑडियो प्रणालियों में, बैलेंस्ड XLR केबल का उपयोग करना, जो नॉइज़ रिजेक्शन के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
ग्राउंड लूप समस्याएँ आमतौर पर तब उत्पन्न होती हैं जब आप जटिल इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को जोड़ते हैं, खासकर जब वे अलग-अलग पावर आउटलेट से संचालित हो रही हों।
मोटर वाहन प्रणालियों में सॉलिड ग्राउंडिंग की तुलना में रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग को क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
मोटर वाहन प्रणालियों (Motor Vehicle Systems), विशेष रूप से बड़े वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicles), बसें, और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) के सहायक हाई-वोल्टेज सब-सिस्टम्स में, सॉलिड ग्राउंडिंग (Solid Grounding) की तुलना में रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (Resistance Grounding) को प्राथमिकता दी जाती है।
यह प्राथमिकता मुख्य रूप से ओवरकरंट (Overcurrent) और ट्रांज़िएंट ओवरवोल्टेज (Transient Overvoltage) को नियंत्रित करने और सिस्टम की विश्वसनीयता (Reliability) बढ़ाने पर केंद्रित होती है।
मुख्य अंतर: सॉलिड ग्राउंडिंग बनाम रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग
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विशेषता (Feature)
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सॉलिड ग्राउंडिंग (Solid Grounding)
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रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग (Resistance Grounding)
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न्यूट्रल कनेक्शन
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न्यूट्रल को सीधे, बिना किसी रुकावट के पृथ्वी/चेसिस से जोड़ा जाता है।
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न्यूट्रल को एक रेजिस्टर (Resistor) के माध्यम से पृथ्वी/चेसिस से जोड़ा जाता है।
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ग्राउंड फॉल्ट करंट
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फॉल्ट करंट अत्यधिक उच्च होता है (स्रोत की प्रतिबाधा द्वारा सीमित)।
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फॉल्ट करंट का मान सीमित होता है (रेजिस्टर के मान द्वारा नियंत्रित)।
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वोल्टेज सर्ज (Surge)
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ट्रांज़िएंट ओवरवोल्टेज अक्सर उच्च और अनियंत्रित होते हैं।
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रेजिस्टर, ट्रांज़िएंट ओवरवोल्टेज को दबाता (Dampens) और सीमित करता है।
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रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग को प्राथमिकता देने के कारण
मोटर वाहन प्रणालियों में रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग का उपयोग करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. फॉल्ट करंट को सीमित करना (Limiting Fault Current)
- समस्या: वाहन प्रणालियों में, फॉल्ट अक्सर चेसिस (Chassis) या बॉडी में होता है। सॉलिड ग्राउंडिंग में, जब कोई फॉल्ट होता है, तो करंट का मान इतना अधिक होता है कि यह कंडक्टर, वाइंडिंग और सर्किट ब्रेकर को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है, जिससे मरम्मत की लागत और डाउनटाइम बढ़ जाता है।
- समाधान: रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग फॉल्ट करंट को एक सुरक्षित, पूर्व-निर्धारित स्तर तक सीमित कर देती है। इससे फॉल्ट होने पर भी सिस्टम के घटकों को भौतिक क्षति कम होती है।
2. ट्रांज़िएंट ओवरवोल्टेज को कम करना (Reducing Transient Overvoltages)
- मोटर वाहन प्रणालियों में, स्विचिंग ऑपरेशन (जैसे इंडक्टिव लोड को ऑन/ऑफ करना) या बाहरी प्रभाव (जैसे पास से बिजली गुजरना) के कारण अस्थायी उच्च वोल्टेज स्पाइक्स (Spikes) उत्पन्न होते हैं।
- रेजिस्टर इन क्षणिक ओवरवोल्टेज को प्रभावी ढंग से दबाता (Dampens) है, जिससे सिस्टम के नाजुक इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण इकाइयों (ECUs) और सेंसर को क्षति से बचाया जा सके।
3. सेलेक्टिव फॉल्ट क्लियरिंग (Selective Fault Clearing)
- उच्च विश्वसनीयता वाले सिस्टम (जैसे सैन्य वाहन या आपातकालीन बसें) में, रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग की डिज़ाइन ऐसी हो सकती है कि पहले ग्राउंड फॉल्ट पर सिस्टम तुरंत ट्रिप न हो।
- यह चालक दल को दोषपूर्ण स्थिति में भी थोड़े समय के लिए ऑपरेशन जारी रखने की अनुमति देता है, जब तक कि वाहन को सुरक्षित स्थान पर न ले जाया जा सके। (यह सुविधा आमतौर पर उच्च-प्रतिरोध ग्राउंडिंग प्रणालियों में पाई जाती है।)
4. आर्क फ्लैश जोखिम कम करना (Mitigating Arc Flash Hazard)
- उच्च ऊर्जा वाली प्रणालियों में, उच्च फॉल्ट करंट के कारण खतरनाक आर्क फ्लैश (Arc Flash) उत्पन्न हो सकता है, जिससे कर्मियों को गंभीर जलन हो सकती है।
- रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग फॉल्ट करंट को सीमित करके आर्क फ्लैश की संभावना और तीव्रता को कम करती है।
संक्षेप में,
रेजिस्टेंस ग्राउंडिंग, फॉल्ट की स्थिति में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को नियंत्रित करती है, जिससे मोटर वाहन प्रणाली अधिक लचीली, सुरक्षित और टिकाऊ बनती है, जबकि सॉलिड ग्राउंडिंग केवल सबसे तेज़ फॉल्ट क्लीयरिंग पर ध्यान केंद्रित करती है।
पीटरसन कैल (रेजोनेंट ग्राउंडिंग) क्या है?
पीटरसन कॉइल (Petersen Coil), जिसे रेजोनेंट ग्राउंडिंग (Resonant Grounding) या आर्क सप्रेशन कॉइल (Arc Suppression Coil) के नाम से भी जाना जाता है, एक विशेष प्रकार की ग्राउंडिंग प्रणाली है जिसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (HV) पारेषण और वितरण प्रणालियों में किया जाता है ताकि ग्राउंड फॉल्ट (Earth Fault) को जल्दी और सुरक्षित रूप से क्लियर किया जा सके।
इसका आविष्कार 1917 में वाल्डेमर पीटरसन ने किया था।
पीटरसन कॉइल क्या है?
पीटरसन कॉइल अनिवार्य रूप से एक समायोज्य इंडक्टर (Adjustable Inductor) होता है, जिसे सबस्टेशन में ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट और ग्राउंड के बीच जोड़ा जाता है।
कार्य सिद्धांत: अनुनाद (Resonance)
इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब किसी एक फेज़ में ग्राउंड फॉल्ट हो, तो कॉइल द्वारा इंडक्टिव रूप से खींचा गया करंट, फॉल्ट बिंदु पर प्रवाहित होने वाले कैपेसिटिव ग्राउंड फॉल्ट करंट को निष्क्रिय (Neutralize) कर दे।
ग्राउंड फॉल्ट: जब एक फेज़ ग्राउंड से संपर्क करता है, तो स्वस्थ (Unfaulted) फेज़ों में वोल्टेज बढ़ जाता है, जिससे लाइन-टू-ग्राउंड कैपेसिटेंस (Capacitance) के माध्यम से एक कैपेसिटिव करंट (I_c) फॉल्ट बिंदु पर प्रवाहित होता है।
पीटरसन कॉइल: पीटरसन कॉइल न्यूट्रल से ग्राउंड में एक विपरीत, इंडक्टिव करंट (I_L) खींचता है।
अनुनाद (Resonance): कॉइल के इंडक्टेंस को इस प्रकार ट्यून (Tune) किया जाता है कि इंडक्टिव करंट का मान और फेज़ (Phase) कैपेसिटिव करंट के मान के बराबर और विपरीत हो।
I_L = I_c
परिणामस्वरूप, फॉल्ट बिंदु पर शुद्ध फॉल्ट करंट (Net Fault Current) शून्य या शून्य के बहुत करीब हो जाता है।
रेजोनेंट ग्राउंडिंग के लाभ (Benefits of Petersen Coil)
पीटरसन कॉइल का उपयोग करने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं, खासकर उन प्रणालियों में जहाँ विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है:
- अस्थायी फॉल्ट का स्वतः-समाधान (Self-Extinguishing of Transient Faults): चूंकि शुद्ध फॉल्ट करंट लगभग शून्य हो जाता है, फॉल्ट बिंदु पर बनने वाली आर्क (Arc) को बनाए रखने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती। अधिकांश क्षणिक ग्राउंड फॉल्ट (जैसे पेड़ की टहनी का छूना) सेकंड के भीतर स्वतः ही बुझ (Self-Extinguish) जाते हैं।
- सेवा की निरंतरता (Continuity of Service): अधिकांश ग्राउंड फॉल्ट के स्वतः क्लियर हो जाने के कारण, सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे सिस्टम ऑपरेशन में रुकावट (Interruption) नहीं आती और सेवा की निरंतरता बनी रहती है, जो विशेष रूप से ग्रामीण या वितरण नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण है।
- उपकरणों को कम क्षति: फॉल्ट करंट को सीमित करने से ट्रांसफार्मर और लाइन इंसुलेशन को होने वाली क्षति कम हो जाती है।
- ओवरवोल्टेज को सीमित करना: यह सिस्टम के स्वस्थ फेज़ों पर फॉल्ट की स्थिति में उत्पन्न होने वाले ओवरवोल्टेज को भी सीमित करने में मदद करता है।
पीटरसन कॉइल प्रणाली का उपयोग आमतौर पर 11 {kV} से 66 {kV} तक की उच्च वोल्टेज प्रणालियों में किया जाता है जहाँ विश्वसनीयता और निरंतर बिजली आपूर्ति सर्वोपरि होती है।
सामान्य भू-विभव वृद्धि (जीपीआर) क्या है?
सामान्य भू-विभव वृद्धि (Ground Potential Rise - GPR), जिसे हिंदी में भू-विभव उत्थान या ग्राउंड पोटेंशियल राइज़ भी कहा जाता है, एक गंभीर घटना है जो तब घटित होती है जब अत्यधिक विद्युत धारा (जैसे ग्राउंड फॉल्ट करंट, लाइटनिंग स्ट्राइक करंट) एक सीमित क्षेत्र में मौजूद ग्राउंडिंग सिस्टम (अर्थ इलेक्ट्रोड या ग्रिड) में प्रवेश करती है और पृथ्वी में प्रवाहित होती है।
GPR क्या है और यह कैसे होता है?
जब एक बड़ा फॉल्ट करंट ग्राउंड इलेक्ट्रोड या ग्रिड में प्रवेश करता है, तो ग्राउंडिंग सिस्टम का प्रतिरोध (Resistance) शून्य नहीं होता है। ओम के नियम (V = I × R) के अनुसार:
{GPR} (V) = I_{{fault}} × R_{{ground}}
यहाँ:
- I_{{fault}} = ग्राउंडिंग सिस्टम में प्रवाहित होने वाला फॉल्ट करंट (एम्पीयर में)।
- R_{{ground}} = ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड या ग्रिड का कुल ग्राउंडिंग प्रतिरोध (ओम में)।
GPR यह दर्शाता है कि ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का विभव (Potential) आस-पास के संदर्भ पृथ्वी (Remote Earth) के विभव (जो शून्य माना जाता है) की तुलना में कितना बढ़ गया है। इसे ही GPR कहा जाता है।
उदाहरण के लिए:
यदि 10,000 {A} का फॉल्ट करंट 0.5 {Ohm} के ग्राउंडिंग ग्रिड में प्रवाहित होता है, तो GPR 5,000 {V} (10,000 × 0.5) होगा। इसका मतलब है कि पूरा सबस्टेशन ग्राउंड ग्रिड क्षण भर के लिए 5,000 {V} पर चला जाता है।
GPR के परिणाम और खतरे
GPR का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव मानव सुरक्षा और उपकरणों की क्षति पर पड़ता है:
1. मानव सुरक्षा: स्टेप और टच पोटेंशियल
जब GPR होता है, तो ग्राउंडिंग सिस्टम के आसपास की जमीन पर एक वोल्टेज ग्रेडिएंट (Voltage Gradient) बन जाता है।
- टच पोटेंशियल (Touch Potential): सबस्टेशन बाड़े (जिसे GPR के कारण उच्च विभव प्राप्त हो गया है) और व्यक्ति के पैरों के बीच उत्पन्न विभव अंतर, जो घातक हो सकता है।
- स्टेप पोटेंशियल (Step Potential): ज़मीन पर खड़े व्यक्ति के दोनों पैरों के बीच उत्पन्न विभव अंतर।
इन विभवों को नियंत्रित करने के लिए ही सबस्टेशन ग्राउंडिंग ग्रिड को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि GPR की घटना में भी, स्टेप और टच पोटेंशियल का मान मानव शरीर को सुरक्षित सीमा के भीतर रखे।
2. उपकरणों को क्षति
- कम्युनिकेशन और सिग्नलिंग लाइन्स: यदि संचार केबल (जैसे टेलीफोन लाइन, डेटा केबल) सबस्टेशन ग्राउंड से जुड़ी हुई हैं, और GPR होता है, तो यह उच्च विभव इन संचार लाइनों के माध्यम से बाहर निकलकर दूर स्थित संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे कंप्यूटर, स्विचगियर) को नष्ट कर सकता है।
GPR को कम करने के उपाय
GPR को पूरी तरह से समाप्त करना असंभव है, लेकिन इसे सुरक्षित स्तर तक सीमित किया जा सकता है:
- ग्राउंडिंग प्रतिरोध को कम करना: एक बड़ा और अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया ग्राउंडिंग ग्रिड स्थापित करके कुल ग्राउंडिंग प्रतिरोध (R_{{ground}}) को कम करना।
- समविभव बॉन्डिंग (Equipotential Bonding): सभी धातु संरचनाओं को एक साथ बांधना ताकि वे GPR के दौरान एक ही विभव पर उठें, जिससे उनके बीच कोई खतरनाक विभव अंतर न हो।
- ग्राउंडिंग एनहांसमेंट मटेरियल (GEM): उच्च प्रतिरोध वाली मिट्टी में GPR को सीमित करने के लिए बेनटोनाइट जैसे पदार्थों का उपयोग करना।
GPR की गणना सबस्टेशन डिज़ाइन का एक अनिवार्य हिस्सा है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि GPR का मान, सुरक्षा मानकों द्वारा निर्धारित अधिकतम अनुमेय सीमा (Allowable Limit) से नीचे रहे।
ग्राउंडिंग के लिए तांबे को क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
ग्राउंडिंग (Earthing) प्रणालियों के लिए तांबे (Copper) को प्राथमिकता देने के कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जो इसकी उत्कृष्ट विद्युत विशेषताओं और स्थायित्व से जुड़े हैं।
1. उत्कृष्ट चालकता (Excellent Conductivity)
- तांबा चांदी (Silver) के बाद दूसरा सबसे अच्छा विद्युत चालक (Electrical Conductor) है।
- ग्राउंडिंग का मुख्य उद्देश्य फॉल्ट करंट या सर्ज करंट को कम से कम प्रतिरोध के साथ सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करना है। तांबे का निम्न प्रतिरोध यह सुनिश्चित करता है कि फॉल्ट करंट तेजी से और कुशलता से फैल जाए, जिससे GPR (Ground Potential Rise) कम हो और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- तुलना: एल्युमीनियम की तुलना में, समान क्रॉस-सेक्शन वाले तांबे में प्रतिरोध काफी कम होता है।
2. संक्षारण प्रतिरोध (Corrosion Resistance)
- तांबा प्राकृतिक रूप से संक्षारण प्रतिरोधी होता है। जब तांबा मिट्टी में या नमी के संपर्क में आता है, तो यह ऑक्सीकृत होकर एक स्थिर, सुरक्षात्मक परत (पैटीना) बनाता है।
- यह परत तांबे को आगे के क्षरण से बचाती है।
- ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड को मिट्टी में गाड़ा जाता है जहाँ नमी, लवण, और एसिड होते हैं। तांबे का यह संक्षारण प्रतिरोध सुनिश्चित करता है कि ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड का प्रतिरोध समय के साथ स्थिर बना रहे और उसका जीवनकाल लंबा हो। गैल्वनाइज्ड आयरन (GI) रॉड में, जस्ते (Zinc) की परत क्षतिग्रस्त होने पर कोर आयरन तेजी से संक्षारित होता है।
3. उच्च गलनांक और यांत्रिक शक्ति (High Melting Point and Mechanical Strength)
- बिजली गिरने या गंभीर फॉल्ट की स्थिति में, ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड को क्षण भर के लिए अत्यधिक उच्च करंट (हजारों एम्पीयर) का सामना करना पड़ता है।
- यह उच्च करंट अत्यधिक ताप उत्पन्न करता है। तांबे का उच्च गलनांक यह सुनिश्चित करता है कि तीव्र ताप की स्थिति में भी इलेक्ट्रोड पिघले या नष्ट न हो।
- तांबा लचीला (Ductile) और मजबूत होता है, जिससे इसे इलेक्ट्रोड के रूप में गाड़ने और कनेक्शन बनाने में आसानी होती है।
4. लागत-दक्षता (Cost-Effectiveness over Life)
- हालांकि तांबे की प्रारंभिक लागत GI रॉड की तुलना में अधिक होती है, लेकिन इसकी लंबी सेवा आयु (Service Life) और स्थिर निम्न प्रतिरोध के कारण, यह लंबी अवधि में अधिक लागत-प्रभावी सिद्ध होता है। विश्वसनीयता की दृष्टि से, तांबा जोखिम को कम करता है।
तांबे का उपयोग कहाँ होता है?
- अर्थिंग रॉड/प्लेट: तांबे की बनी हुई।
- ग्राउंडिंग कंडक्टर: सबस्टेशन ग्रिड और डाउन कंडक्टर के लिए नंगे तांबे के तार।
सुरक्षा के लिए,
जहां भी संभव हो, ग्राउंडिंग के लिए तांबे को प्राथमिकता दी जाती है, खासकर संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों वाले स्थानों और उच्च-शक्ति वाले सबस्टेशनों में।
ट्रांसमिशन लाइन में ग्राउंड वायर की क्या भूमिका होती है?
ट्रांसमिशन लाइन में ग्राउंड वायर (Ground Wire), जिसे अक्सर ओवरहेड ग्राउंड वायर (Overhead Ground Wire) या शील्ड वायर (Shield Wire) कहा जाता है, विद्युत पारेषण प्रणाली की सुरक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है।
यह तार आमतौर पर ट्रांसमिशन टावर के शीर्ष (Top) पर, फेज़ कंडक्टरों से ऊपर लगाया जाता है।
इसकी भूमिका मुख्य रूप से दो प्रमुख कार्यों पर केंद्रित होती है:
1. प्राथमिक भूमिका: आकाशीय बिजली से सुरक्षा (Lightning Protection)
ग्राउंड वायर का सबसे महत्वपूर्ण कार्य ट्रांसमिशन लाइनों को सीधे आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strikes) से बचाना है।
- इंटरसेप्शन (Interception): चूंकि यह तार भौतिक रूप से सबसे ऊंचा होता है, इसलिए यह लाइन के फेज़ कंडक्टरों के लिए एक प्राथमिक अवरोधक (Primary Interceptor) के रूप में कार्य करता है। बिजली का झटका सीधे इस तार पर पड़ता है।
- करंट डाइवर्जन (Current Diversion): ग्राउंड वायर, टावर संरचना के माध्यम से सीधे ग्राउंडिंग सिस्टम से जुड़ा होता है। जब बिजली गिरती है, तो विशाल बिजली का करंट इस निम्न-प्रतिरोध पथ (Low-Resistance Path) का उपयोग करके सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित हो जाता है।
- परिणाम: यह फेज़ कंडक्टरों को बिजली के ओवरवोल्टेज से बचाता है, जिससे इंसुलेटरों के फ्लैशओवर (Flashover) होने और परिणामस्वरूप लाइन के ट्रिप होने की संभावना कम हो जाती है। इसे शील्डिंग प्रभाव कहा जाता है।
2. द्वितीयक भूमिका: सिस्टम स्थिरता और संचार (System Stability and Communication)
ग्राउंड वायर कई अन्य परिचालन लाभ भी प्रदान करता है:
- ग्राउंड रेफरेंस (Ground Reference): यह पूरे सिस्टम को एक स्थिर ग्राउंड संदर्भ प्रदान करके फेज़ वोल्टेज को स्थिर रखने में मदद करता है।
- इंड्यूस्ड नॉइज़ कम करना: यह तार बाहरी स्रोतों, जैसे कि आस-पास की अन्य लाइनों से प्रेरित (Induced) होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक नॉइज़ और ट्रांज़िएंट्स को कम करने में भी मदद करता है।
-
ओपीजीडब्ल्यू (OPGW) के रूप में उपयोग: आधुनिक प्रणालियों में, ग्राउंड वायर को अक्सर एक विशेष प्रकार के तार से बदला जाता है जिसे ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (Optical Ground Wire - OPGW) कहते हैं।
- OPGW में, पारंपरिक ग्राउंड वायर के अंदर एक फाइबर ऑप्टिक केबल होती है।
- यह केबल पावर कंपनी को संचार (Communication), सिस्टम मॉनिटरिंग (जैसे SCADA), फॉल्ट डिटेक्शन और डेटा ट्रांसमिशन के लिए एक उच्च गति वाला, विद्युत रूप से पृथक (Electrically Isolated) चैनल प्रदान करती है। इस तरह, एक ही तार दोहरी भूमिका निभाता है।
संक्षेप में,
ग्राउंड वायर ट्रांसमिशन लाइन की विश्वसनीयता (Reliability) सुनिश्चित करता है और बिजली के कारण होने वाली क्षति और आउटेज से बचाता है।
न्यूट्रल और ग्राउंड वायर में क्या अंतर है?
न्यूट्रल वायर (Neutral Wire) और ग्राउंड वायर (Ground Wire) दोनों ही विद्युत प्रणालियों में शून्य या शून्य के करीब विभव (Potential) पर काम करते हैं, लेकिन उनके कार्य और उद्देश्य मौलिक रूप से अलग होते हैं।
संक्षेप में, न्यूट्रल वायर सर्किट पूरा करता है, जबकि ग्राउंड वायर सुरक्षा प्रदान करता है।
मुख्य अंतरों का सारांश
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विशेषता (Feature)
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न्यूट्रल वायर (Neutral Wire)
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ग्राउंड वायर (Ground Wire) / अर्थिंग वायर (Earthing Wire)
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मुख्य उद्देश्य
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सर्किट को पूरा करना और करंट को वापस स्रोत (Source) तक ले जाना।
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उपकरणों को बिजली के झटके से सुरक्षा देना।
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करंट का प्रवाह
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सामान्य परिचालन के दौरान करंट प्रवाहित होता है। यह एक आवश्यक करंट-ले जाने वाला कंडक्टर है।
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सामान्य परिचालन के दौरान कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है। यह केवल फॉल्ट की स्थिति में सक्रिय होता है।
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कनेक्शन बिंदु
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ट्रांसफार्मर के स्टार पॉइंट से निकलता है, जिसे एक बिंदु पर ग्राउंड किया जाता है।
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उपकरणों के धातु के बाड़ों (Metal Enclosures) से जुड़ा होता है और सीधे पृथ्वी में गाड़े गए इलेक्ट्रोड से जुड़ा होता है।
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कार्य प्रणाली
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फेज़ वायर से आने वाले करंट के लिए एक रिटर्न पाथ प्रदान करता है।
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फॉल्ट करंट को मानव शरीर के बजाय सीधे पृथ्वी में मोड़ देता है।
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रंग कोड
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काला या नीला (भारत में मानक)।
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हरा या हरा-पीला धारीदार (Green or Green-Yellow Striped)।
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विस्तृत कार्यप्रणाली
1. न्यूट्रल वायर (सामान्य परिचालन)
- सर्किट पूर्ण करना: सिंगल-फेज़ AC सर्किट में, फेज़ (Phase) तार से करंट आता है और लोड (उपकरण) से होकर न्यूट्रल तार के माध्यम से वापस स्रोत (ट्रांसफार्मर) तक जाता है। न्यूट्रल के बिना, सर्किट अधूरा रह जाता है और उपकरण काम नहीं करेगा।
- वोल्टेज संतुलन: थ्री-फेज़ प्रणालियों में, न्यूट्रल वायर फेज़ों के बीच वोल्टेज को स्थिर रखता है और असंतुलित लोड (Unbalanced Load) करंट को वहन करता है।
- ग्राउंडिंग से संबंध: न्यूट्रल वायर को सुरक्षा और वोल्टेज स्थिरता के लिए ट्रांसफार्मर या सर्विस प्रवेश बिंदु पर ग्राउंड किया जाता है।
2. ग्राउंड वायर (केवल सुरक्षा)
- सुरक्षात्मक पथ: ग्राउंड वायर का उद्देश्य सुरक्षात्मक है। यदि उपकरण के अंदर तार क्षतिग्रस्त हो जाता है और लाइव फेज़ तार गलती से फ्रिज, कंप्यूटर या मोटर जैसी धातु की बॉडी को छूता है, तो बॉडी "लाइव" हो जाती है।
- फॉल्ट करंट को हटाना: ग्राउंड वायर एक निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करके इस खतरनाक लीकेज करंट को तुरंत और सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करता है।
- ब्रेकर ट्रिपिंग: ग्राउंड वायर फॉल्ट करंट को इतना बड़ा बना देता है कि सर्किट ब्रेकर (MCB) या फ्यूज तुरंत ट्रिप हो जाए। यह पावर सप्लाई को काट देता है और बिजली के झटके के जोखिम को समाप्त कर देता है।
मिश्रण से बचें
न्यूट्रल और ग्राउंड वायर को सर्किट के किसी भी बिंदु पर (सिवाय मुख्य सर्विस पैनल या ट्रांसफार्मर पर) आपस में जोड़ना नहीं चाहिए। यदि वे लोड साइड पर जुड़ जाते हैं, तो ग्राउंड वायर (जो केवल सुरक्षा के लिए है) सामान्य परिचालन के दौरान करंट ले जाना शुरू कर देगा, जिससे सुरक्षात्मक तंत्र विफल हो सकता है और बिजली के झटके का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ग्राउंडिंग सिस्टम में बॉन्डिंग क्या है?
ग्राउंडिंग सिस्टम में बॉन्डिंग (Bonding) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा अवधारणा है, जिसका हिंदी में अर्थ बंधन या जोड़ना होता है।
बॉन्डिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्युत फॉल्ट या सर्ज की स्थिति में, विद्युत प्रणाली के भीतर के सभी उजागर धातु के हिस्से (Exposed Metal Parts) समान विद्युत विभव (Same Electrical Potential) पर रहें।
बॉन्डिंग की परिभाषा और उद्देश्य
बॉन्डिंग, विभिन्न धातु के हिस्सों को एक निम्न-प्रतिरोध पथ (Low-Resistance Path) के माध्यम से आपस में स्थायी रूप से जोड़ने की प्रक्रिया है।
मुख्य उद्देश्य: समविभव बनाना (Achieving Equipotentiality)
- बॉन्डिंग का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दो अलग-अलग धातु की वस्तुओं के बीच कोई खतरनाक विभव अंतर (Potential Difference) न हो, भले ही उस समय ग्राउंडिंग सिस्टम में भारी करंट प्रवाहित हो रहा हो (जैसे ग्राउंड फॉल्ट या लाइटनिंग स्ट्राइक)।
- यदि दो धातु की वस्तुओं के बीच विभव अंतर होता है, और कोई व्यक्ति उन दोनों को एक साथ छूता है, तो वह व्यक्ति सर्किट का हिस्सा बन जाएगा और उसे गंभीर बिजली का झटका लगेगा। बॉन्डिंग इस खतरे को समाप्त करती है।
बॉन्डिंग के प्रकार और अनुप्रयोग
बॉन्डिंग को कई अलग-अलग संदर्भों में लागू किया जाता है:
1. इक्विपमेंट बॉन्डिंग (Equipment Bonding)
- इसका अर्थ है कि सभी विद्युत उपकरणों के करंट-नहीं-ले जाने वाले धातु के बाड़े (Non-Current-Carrying Metal Enclosures) को ग्राउंडिंग कंडक्टर (अर्थ वायर) के माध्यम से एक साथ जोड़ना।
- उदाहरण: मोटर की बॉडी, स्विचगियर पैनल, धातु कंड्यूट, और उपकरणों के फ्रेम सभी को एक बॉन्डिंग कंडक्टर से जोड़ा जाता है।
2. सिस्टम बॉन्डिंग (System Bonding)
- यह सुनिश्चित करता है कि विद्युत प्रणाली के न्यूट्रल कंडक्टर को केवल एक ही स्थान पर ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाए। यह वह स्थान है जहाँ न्यूट्रल और ग्राउंड वायर आपस में जुड़ते हैं (आमतौर पर मुख्य सर्विस पैनल)।
- यह बॉन्डिंग ग्राउंड फॉल्ट करंट को सोर्स (स्रोत) तक वापस जाने के लिए एक जानबूझकर पाथ प्रदान करती है।
3. स्ट्रक्चरल बॉन्डिंग (Structural Bonding)
- इसमें इमारत के धातु के ढांचे, पाइपिंग सिस्टम (जैसे पानी और गैस पाइप), वेंटिलेशन नलिकाएँ, और बिजली संरक्षण प्रणाली (Lightning Protection System) के कंडक्टरों को मुख्य ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड या ग्रिड से जोड़ना शामिल है।
- उद्देश्य: किसी भी सर्ज या लाइटनिंग करंट को संरचना के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आर्क (Arc) होने (साइड-फ्लैशिंग) से रोकना और सभी धातु के हिस्सों को एक ही संदर्भ विभव पर रखना।
बॉन्डिंग बनाम ग्राउंडिंग
यह समझना महत्वपूर्ण है कि बॉन्डिंग और ग्राउंडिंग अलग-अलग हैं लेकिन एक दूसरे पर निर्भर हैं:
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विशेषता
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बॉन्डिंग (Bonding)
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ग्राउंडिंग (Grounding)
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कार्य
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दो वस्तुओं के बीच विभव को समान करना।
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सिस्टम को पृथ्वी (Earth) के शून्य विभव से जोड़ना।
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उद्देश्य
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विभव अंतर (Potential Difference) को समाप्त करके टच पोटेंशियल के खतरे को कम करना।
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फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित करके GPR को नियंत्रित करना।
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परिणाम
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सभी धातु के हिस्से एक-दूसरे के सापेक्ष सुरक्षित होते हैं।
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संपूर्ण प्रणाली पृथ्वी के संदर्भ में सुरक्षित होती है।
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निष्कर्ष: बॉन्डिंग एक मजबूत ग्राउंडिंग सिस्टम का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो फॉल्ट या लाइटनिंग की स्थिति में सभी धातु के हिस्सों को एक साथ जोड़कर व्यक्तिगत सुरक्षा के अंतिम स्तर को सुनिश्चित करता है।
सभी उपकरणों की ग्राउंडिंग आपस में क्यों जुड़ी होनी चाहिए?
सभी उपकरणों की ग्राउंडिंग (Earthing) आपस में जुड़ी हुई (Interconnected) होनी चाहिए, यह विद्युत सुरक्षा का एक मूलभूत सिद्धांत है। इसे तकनीकी रूप से बॉन्डिंग (Bonding) और समविभव सुनिश्चित करना (Ensuring Equipotentiality) कहा जाता है।
यह कनेक्शन मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण सुरक्षा और परिचालन उद्देश्यों को पूरा करता है:
1. सुरक्षा: खतरनाक विभव अंतर को समाप्त करना (Eliminating Dangerous Potential Difference)
यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
- विभव अंतर का खतरा: मान लीजिए कि आपके पास दो अलग-अलग उपकरण हैं, एक मोटर (M1) और एक धातु का पैनल (P1), और दोनों को अलग-अलग ग्राउंडिंग रॉड (G1 और G2) से जोड़ा गया है। यदि मोटर M1 में कोई बड़ा ग्राउंड फॉल्ट आता है, तो फॉल्ट करंट रॉड G1 में प्रवाहित होगा, जिससे V = I × R के अनुसार G1 के आसपास की जमीन पर उच्च विभव वृद्धि (GPR) होगी।
- बिजली का झटका: जबकि M1 का पोटेंशियल बढ़ गया है, पैनल P1 (जो G2 से जुड़ा है) का पोटेंशियल अलग रहेगा। यदि कोई व्यक्ति M1 की बॉडी को छूता है और गलती से उसी समय P1 को भी छूता है, तो व्यक्ति M1 और P1 के बीच के विभव अंतर के कारण एक बड़े और घातक बिजली के झटके का शिकार हो सकता है।
- समाधान (बॉन्डिंग): सभी ग्राउंडिंग इलेक्ट्रोड और धातु के हिस्सों को आपस में जोड़कर (बॉन्डिंग), यह सुनिश्चित किया जाता है कि फॉल्ट की स्थिति में, वे सभी एक साथ समान विभव पर उठें। इस प्रकार, उनके बीच कोई विभव अंतर नहीं रहता और छूने पर शॉक का खतरा समाप्त हो जाता है।
2. फॉल्ट करंट पाथ का अनुकूलन (Optimizing Fault Current Path)
- ग्राउंडिंग को आपस में जोड़ने से एक ग्रिड या मैश (Mesh) जैसा नेटवर्क बनता है।
- यह नेटवर्क फॉल्ट करंट को पृथ्वी में प्रवाहित होने के लिए अनेक समानांतर पाथ प्रदान करता है।
- समांतर पाथ कुल प्रतिरोध (Total Resistance) को कम करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जब कोई ग्राउंड फॉल्ट होता है, तो करंट का मान इतना अधिक हो कि यह सुरक्षात्मक उपकरणों (जैसे सर्किट ब्रेकर या रिले) को तेजी से ट्रिप कर सके।
- कम प्रतिरोध GPR को भी कम करता है।
3. सर्ज और नॉइज़ नियंत्रण (Surg and Noise Control)
- सर्ज का फैलाव: लाइटनिंग या स्विचिंग सर्ज की स्थिति में, आपस में जुड़े हुए ग्राउंडिंग कंडक्टर सर्ज ऊर्जा को पूरे क्षेत्र में प्रभावी ढंग से फैला देते हैं। यह ऊर्जा को एक ही इलेक्ट्रोड पर केंद्रित होने से रोकता है, जिससे उपकरणों की सुरक्षा होती है।
- ग्राउंड लूप समस्या को कम करना (जटिल प्रणालियों में): जबकि अलग-अलग ग्राउंडिंग बिंदुओं से ग्राउंड लूप की समस्या हो सकती है, एक अच्छी तरह से डिज़ाइन की गई, कम-प्रतिरोध वाली इंटरकनेक्टेड ग्राउंडिंग प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि संपूर्ण क्षेत्र एक एकल, बड़े ग्राउंड प्लेन के रूप में कार्य करे। यह नाजुक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय संदर्भ विभव (Reference Potential) प्रदान करता है, जिससे नॉइज़ और हस्तक्षेप (Interference) कम होता है।
संक्षेप में,
सभी उपकरणों की ग्राउंडिंग को आपस में जोड़ना (बॉन्ड करना) एक एकल, समविभव सुरक्षा प्रणाली बनाता है जो मानव जीवन की सुरक्षा और विद्युत प्रणालियों की स्थिरता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
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