अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

सर्किट ब्रेकर परीक्षण के प्रकार ( Type of Circuit Breaker Testing )

सर्किट ब्रेकर परीक्षण के प्रकार

सर्किट ब्रेकर के परीक्षण विभिन्न उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं। मुख्य रूप से, परीक्षणों को इन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

https://dkrajwar.blogspot.com/2025/12/type-of-circuit-breaker-testing.html

सर्किट ब्रेकर परीक्षण के प्रकार

​1. दृश्य निरीक्षण (Visual Inspection)

  • ​सर्किट ब्रेकर, उसके टॉगल, और संबंधित तारों की बाहरी क्षति, ढीले कनेक्शन, या गरमाहट (overheating) के संकेतों के लिए जाँच करना।

​2. ऑपरेशनल/कार्यात्मक परीक्षण (Operational/Functional Test)

  • टेस्ट बटन का उपयोग करके ट्रिपिंग: घरेलू ब्रेकरों में यह जाँचने के लिए टेस्ट बटन दबाया जाता है कि ब्रेकर बिजली के बिना भी यांत्रिक रूप से ट्रिप कर रहा है या नहीं।
  • लोड डिवाइस के साथ परीक्षण (Testing with Load Device): यह जाँचने के लिए कि ब्रेकर एक विशिष्ट भार पर ट्रिप करता है या नहीं।

​3. विद्युत परीक्षण (Electrical Tests)

निरंतरता के लिए परीक्षण (Continuity Test): ब्रेकर के बंद (closed) स्थिति में होने पर उसके टर्मिनल के बीच निरंतरता की जाँच करना, अक्सर एक मल्टीमीटर का उपयोग करके।

वोल्टेज आउटपुट की जाँच (Voltage Output Check): यह सुनिश्चित करने के लिए कि ब्रेकर के चालू होने पर आउटपुट टर्मिनल पर अपेक्षित वोल्टेज मिल रहा है।

न्यूनतम पिक-अप परीक्षण (Minimum Pick-Up Test): यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर निर्दिष्ट न्यूनतम करंट पर ट्रिप हो जाता है।

स्थैतिक प्रतिरोध या संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test): संपर्कों के माध्यम से माइक्रो-ओम मीटर का उपयोग करके प्रतिरोध (resistance) को मापना। उच्च प्रतिरोध असामान्य गर्मी और ऊर्जा की हानि का संकेत दे सकता है।

समय विश्लेषक परीक्षण (Timing Test): ब्रेकर के खुलने और बंद होने के समय को मिलीसेकंड में मापना, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि वह निर्माता के विनिर्देशों के भीतर कार्य कर रहा है।

4. थर्मल इमेजिंग (Thermal Imaging)

  • ​एक इन्फ्रारेड इमेजिंग कैमरा का उपयोग करके ब्रेकर और उसके कनेक्शन के तापमान वितरण की जाँच करना। असामान्य रूप से गर्म स्थान (हॉटस्पॉट) ढीले कनेक्शन या उच्च प्रतिरोध का संकेत देते हैं।

​5. शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता परीक्षण (Short-Circuit Breaking Capacity Test)

  • ​ये विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए प्रयोगशाला परीक्षण हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि ब्रेकर अधिकतम अपेक्षित शॉर्ट-सर्किट करंट को सुरक्षित रूप से बाधित (interrupt) कर सकता है।
    • रेटेड अंतिम शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता (I_{cu}): यह परीक्षण कार्यक्रम O - t - CO का उपयोग करता है। O का मतलब ओपन (ट्रिपिंग), t अंतराल है, और CO का मतलब क्लोज-ओपन (जुड़ना और फिर टूटना) है।
    • रेटेड ऑपरेटिंग शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता (I_{cs}): यह परीक्षण कार्यक्रम OT - CO - t - CO का उपयोग करता है।

​ये परीक्षण सुरक्षा और बिजली प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से किए जाते हैं।




फैक्ट्री परीक्षण (निर्माता स्तर का परीक्षण)

सर्किट ब्रेकर के निर्माण के बाद, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह अपेक्षित विनिर्देशों और मानकों के अनुसार काम कर रहा है, फैक्ट्री परीक्षण (Factory Testing) या निर्माता स्तर का परीक्षण किया जाता है। इन परीक्षणों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

फैक्ट्री परीक्षण (निर्माता स्तर का परीक्षण)

​1. प्रकार परीक्षण (Type Tests)

​ये परीक्षण किसी विशेष डिज़ाइन के पहले प्रोटोटाइप पर किए जाते हैं ताकि यह साबित किया जा सके कि ब्रेकर सभी रेटेड विशेषताओं की क्षमता को पूरा करता है। ये केवल एक बार किए जाते हैं, और एक बार सफल होने पर, वे उस पूरे डिज़ाइन को कवर करते हैं।

  • यांत्रिक परीक्षण (Mechanical Tests):
    • ​ब्रेकर की यांत्रिक क्षमता का परीक्षण करने के लिए इसे बार-बार खोला और बंद किया जाता है।
    • ​ब्रेकर को बिना किसी विफलता या यांत्रिक क्षति के निर्धारित गति से अपने कार्य को पूरा करना चाहिए।
  • थर्मल परीक्षण (Thermal Tests):
    • ​यह सुनिश्चित करने के लिए कि ब्रेकर रेटेड करंट को बिना अत्यधिक गरम हुए वहन कर सकता है।
    • ​रेटेड परिस्थितियों में पोल (poles) से रेटेड करंट प्रवाहित करने पर स्थिर तापमान वृद्धि की जाँच की जाती है (जैसे: 800A से कम करंट के लिए तापमान वृद्धि 40^circ C से अधिक नहीं होनी चाहिए)।
  • डाइलेक्ट्रिक/इंसुलेशन परीक्षण (Dielectric/Insulation Tests):
    • ​ब्रेकर की बिजली की आवृत्ति (power frequency) और आवेग वोल्टेज (impulse voltage) का सामना करने की क्षमता की जाँच करना।
    • ​इसमें मेगर परीक्षण (Megger Test) शामिल है, जहाँ इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापने के लिए उच्च डीसी वोल्टेज (जैसे 1 kV या 5 kV) लगाया जाता है।
  • शॉर्ट-सर्किट परीक्षण (Short-Circuit Tests):
    • ​सर्किट ब्रेकर की अधिकतम अपेक्षित शॉर्ट-सर्किट करंट को सफलतापूर्वक तोड़ने की क्षमता का परीक्षण करना। यह इसकी ब्रेकिंग क्षमता (I_{cu} और I_{cs}) को साबित करता है।

​2. रूटीन परीक्षण (Routine Tests)

​ये परीक्षण उत्पादित होने वाले प्रत्येक व्यक्तिगत सर्किट ब्रेकर पर किए जाते हैं। ये पुष्टि करते हैं कि निर्माण के दौरान कोई दोष नहीं आया है और ब्रेकर सामान्य रूप से काम करेगा। इन्हें अक्सर फैक्ट्री एक्सेप्टेंस टेस्ट (FAT) का हिस्सा माना जाता है।

  • संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test):
    • ​ब्रेकर के मुख्य संपर्कों के माध्यम से बहुत कम प्रतिरोध (माइक्रो-ओम रेंज) को मापना। उच्च प्रतिरोध हॉटस्पॉट और ऊर्जा हानि का कारण बन सकता है।
  • समय विश्लेषक परीक्षण (Timing Test):
    • ​ब्रेकर के खुलने (Opening) और बंद होने (Closing) के समय को मिलीसेकंड (milliseconds) में मापना। यह सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर सुरक्षा उपकरणों के साथ समन्वयित है।
  • न्यूनतम पिक-अप परीक्षण (Minimum Pick-Up Test):
    • ​यह जाँच करना कि ब्रेकर क्लोजिंग कॉइल और ट्रिप कॉइल के लिए रेटेड वोल्टेज के 80% जैसे न्यूनतम ऑपरेटिंग वोल्टेज पर ठीक से काम करता है या नहीं।
  • मैकेनिकल ऑपरेशन टेस्ट:
    • ​ब्रेकर को कुछ ऑपरेशन साइकल के लिए चलाना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सुचारू रूप से और बिना किसी जाम या असामान्य ध्वनि के काम कर रहा है।

फैक्ट्री परीक्षण, 

विशेष रूप से रूटीन परीक्षण, यह सुनिश्चित करते हैं कि ग्राहक को डिलीवर किया गया प्रत्येक ब्रेकर उच्चतम गुणवत्ता और परिचालन विश्वसनीयता का है।




फैक्ट्री परीक्षण का उद्देश्य

फैक्ट्री परीक्षण (Factory Testing) या निर्माता स्तर के परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि निर्मित सर्किट ब्रेकर निर्धारित मानकों (specified standards), प्रदर्शन आवश्यकताओं (performance requirements), और सुरक्षा विनिर्देशों (safety specifications) को पूरा करता है।

​इन परीक्षणों के प्रमुख उद्देश्य नीचे दिए गए हैं:

फैक्ट्री परीक्षण का उद्देश्य (Objective of Factory Testing)

​1. गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance)

  • दोषों का पता लगाना: उत्पादन प्रक्रिया के दौरान हुई किसी भी विनिर्माण त्रुटि (manufacturing defect) या घटक विफलता का पता लगाना।
  • मानकों का अनुपालन: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) या अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (IEC) जैसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

​2. प्रदर्शन सत्यापन (Performance Verification)

  • क्षमता की पुष्टि: यह सत्यापित करना कि ब्रेकर अपनी रेटेड शर्तों के तहत कार्य कर सकता है, जिसमें रेटेड वोल्टेज (Rated Voltage) और रेटेड करंट (Rated Current) शामिल है।
  • ब्रेकिंग क्षमता का सत्यापन:  सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ब्रेकर, किसी भी आपात स्थिति जैसे कि शॉर्ट-सर्किट या ओवरलोड के दौरान, निर्दिष्ट अधिकतम करंट को सुरक्षित रूप से और तुरंत बाधित (interrupt) कर सकता है।

​3. विश्वसनीयता और दीर्घायु (Reliability and Longevity)

  • यांत्रिक विश्वसनीयता: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर का यांत्रिक तंत्र (mechanical mechanism) (जैसे स्प्रिंग्स, इंटरलॉक) अपनी अपेक्षित ऑपरेटिंग साइकल के लिए बिना किसी विफलता के सुचारू रूप से कार्य करेगा।
  • इंसुलेशन की अखंडता: यह जाँच करना कि ब्रेकर का इंसुलेशन (विद्युत रोधन) उच्च वोल्टेज और आवेगों (impulses) का सामना करने के लिए पर्याप्त मजबूत है, जिससे इंटरनल फ्लैशओवर का खतरा कम हो जाता है।

​4. ग्राहक स्वीकृति और सुरक्षा (Customer Acceptance and Safety)

  • सुरक्षित संचालन: यह प्रमाणित करना कि ब्रेकर उपयोग के दौरान उपयोगकर्ता और संपत्ति दोनों के लिए सुरक्षित है। एक दोषपूर्ण ब्रेकर आग लगने या उपकरण को क्षति पहुँचाने का कारण बन सकता है।
  • वारंटी कवर: यदि ब्रेकर फैक्ट्री परीक्षणों में विफल रहता है, तो उसे ग्राहक को नहीं भेजा जाता है। इससे निर्माता की प्रतिष्ठा बनी रहती है और वारंटी दावों को कम करने में मदद मिलती है।

संक्षेप में, 

फैक्ट्री परीक्षण का उद्देश्य यह है कि ग्राहक को डिलीवर किया जाने वाला हर एक सर्किट ब्रेकर सुरक्षित, विश्वसनीय, और अपनी डिज़ाइन किए गए कार्य को त्रुटिहीन ढंग से करने में सक्षम हो।




परावैद्युत परीक्षण क्या होते हैं?

परावैद्युत परीक्षण (Dielectric Tests), जिन्हें इंसुलेशन परीक्षण (Insulation Tests) भी कहा जाता है, सर्किट ब्रेकर और अन्य विद्युत उपकरणों में इंसुलेशन की अखंडता और शक्ति की जाँच करने के लिए किए जाते हैं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ब्रेकर के सक्रिय घटक (लाइव पार्ट्स) और ग्राउंड (पृथ्वी) के बीच का इन्सुलेशन अपेक्षित वोल्टेज स्तरों और क्षणिक ओवरवोल्टेज (transient overvoltages) का सामना करने में सक्षम है।

परावैद्युत परीक्षण (Dielectric Tests)

​ये परीक्षण ब्रेकर के इन्सुलेटिंग माध्यम (जैसे हवा, SF6 गैस, तेल, या ठोस इन्सुलेटर) की विफलता वोल्टेज (breakdown voltage) को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण हैं। परावैद्युत परीक्षणों को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

​1. पावर फ़्रीक्वेंसी वोल्टेज परीक्षण (Power Frequency Voltage Test)

​यह ब्रेकर के इन्सुलेशन पर निर्दिष्ट अवधि (आमतौर पर 1 मिनट) के लिए सामान्य एसी (AC) आपूर्ति आवृत्ति पर एक बढ़ा हुआ वोल्टेज लागू करके किया जाता है।

  • उद्देश्य: सामान्य परिचालन स्थितियों में इन्सुलेशन की क्षमता का अनुकरण करना। यह जाँचता है कि ब्रेकर बिना फ्लैशओवर (हवा के माध्यम से आर्क) या पंक्चर (इंसुलेशन के माध्यम से स्थायी विफलता) के उस बढ़े हुए वोल्टेज को झेल सकता है या नहीं।
  • प्रक्रिया: ब्रेकर पर धीरे-धीरे एक उच्च एसी वोल्टेज लगाया जाता है और एक मिनट तक बनाए रखा जाता है।
  • सफलता मानदंड: ब्रेकर को बिना किसी विफलता या अत्यधिक रिसाव करंट के वोल्टेज को झेलना चाहिए।

​2. आवेग वोल्टेज परीक्षण (Impulse Voltage Test)

​यह परीक्षण बिजली गिरने (lightning strike) या स्विचिंग ऑपरेशन के कारण उत्पन्न होने वाले क्षणिक उच्च वोल्टेज का अनुकरण करता है। ये ओवरवोल्टेज बहुत कम अवधि के होते हैं (माइक्रोसेकंड में), लेकिन इनका आयाम (magnitude) बहुत अधिक होता है।

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर का इन्सुलेशन अचानक और क्षणिक वोल्टेज वृद्धि का सामना करने के लिए पर्याप्त मजबूत है।
  • प्रक्रिया:
    • लाइटनिंग इम्पल्स (बिजली आवेग): एक विशिष्ट तरंग का उपयोग किया जाता है (जैसे 1.2/50 mu s तरंग, जिसका अर्थ है 1.2 माइक्रोसेकंड में चरम तक पहुंचना और 50 माइक्रोसेकंड में चरम के आधे तक गिरना)।
    • स्विचिंग इम्पल्स (स्विचिंग आवेग): उच्च वोल्टेज वाले ब्रेकरों के लिए, एक लंबी अवधि की तरंग का उपयोग किया जाता है।
  • सफलता मानदंड: ब्रेकर को बिना फ्लैशओवर या पंक्चर के निर्धारित संख्या में आवेगों (pulses) को झेलना चाहिए।

​3. मेगर परीक्षण (Megger Test)

​यह परीक्षण इंसुलेशन प्रतिरोध (Insulation Resistance) को मापता है और यह सबसे आम परावैद्युत परीक्षणों में से एक है, जो फील्ड में भी किया जाता है।

  • उद्देश्य: इंसुलेटिंग सामग्री की वर्तमान रिसाव (leakage) को रोकने की क्षमता का मूल्यांकन करना। समय के साथ नमी, गंदगी, या उम्र बढ़ने के कारण इन्सुलेशन प्रतिरोध कम हो जाता है।
  • उपकरण: मेगर (Megohmmeter) नामक एक उपकरण का उपयोग किया जाता है, जो उच्च डीसी वोल्टेज (जैसे 500V, 1kV, 2.5kV, 5kV) उत्पन्न करता है।
  • सफलता मानदंड: इन्सुलेशन प्रतिरोध को मेगाओम (MOmega ) में मापा जाता है। एक स्वस्थ ब्रेकर के लिए रीडिंग बहुत अधिक होनी चाहिए (आमतौर पर G Omega रेंज में)। कम रीडिंग नमी या इन्सुलेशन क्षति का संकेत देती है।

​ये परीक्षण यह सुनिश्चित करते हैं कि सर्किट ब्रेकर का इन्सुलेशन मजबूत और विश्वसनीय है, जो उपकरणों और कर्मियों दोनों को विद्युत खतरों से बचाता है।




तापमान वृद्धि परीक्षण क्या है?

तापमान वृद्धि परीक्षण (Temperature Rise Test) सर्किट ब्रेकर के प्रकार परीक्षणों (Type Tests) में से एक है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षण है जो यह सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर सामान्य परिचालन स्थितियों में सुरक्षित रूप से और बिना ज़्यादा गरम हुए रेटेड करंट का वहन कर सकता है।

तापमान वृद्धि परीक्षण (Temperature Rise Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

​इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह मापना है कि सर्किट ब्रेकर के विभिन्न हिस्से—जैसे मुख्य संपर्क (main contacts), टर्मिनल (terminals), और कनेक्शन बिंदु—जब उनके माध्यम से रेटेड करंट लगातार बहता है, तो वे कितने गरम होते हैं।

  • सुरक्षा: यदि तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो इससे ब्रेकर के अंदर के इंसुलेशन (विद्युत रोधन), स्प्रिंग्स, या अन्य यांत्रिक घटकों को स्थायी क्षति पहुँच सकती है, जिससे ब्रेकर की विफलता हो सकती है।
  • दक्षता: अत्यधिक गर्मी ऊर्जा की हानि (I²R लॉस) का संकेत देती है, जो परिचालन लागत को बढ़ाती है।
  • मानक अनुपालन: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर IEC 60947-2 जैसे मानकों द्वारा निर्धारित तापमान सीमा का पालन करता है।

​2. सिद्धांत (Principle)

​जब एक विद्युत करंट (I) किसी कंडक्टर (प्रतिरोध R) के माध्यम से बहता है, तो यह ऊष्मा उत्पन्न करता है (Power = I^2R)। यह ऊष्मा तब तक बढ़ती है जब तक कि ऊष्मा के उत्पादन की दर, आसपास के वातावरण में ऊष्मा के संवहन (convection), चालन (conduction) और विकिरण (radiation) की दर के बराबर नहीं हो जाती। इस संतुलन बिंदु पर, तापमान स्थिर हो जाता है—इसे स्थिर तापमान (Steady-state temperature) कहा जाता है।

​3. प्रक्रिया (Procedure)

करंट लागू करना: ब्रेकर को उसके रेटेड निरंतर करंट (Rated Continuous Current) पर एक बाहरी स्रोत से जोड़ा जाता है।

स्थिरता की प्रतीक्षा: करंट को तब तक बहने दिया जाता है जब तक कि ब्रेकर के विभिन्न भागों का तापमान स्थिर (Steady) न हो जाए। स्थिरता आमतौर पर तब मानी जाती है जब लगातार तीन रीडिंग (जैसे, 10 मिनट के अंतराल पर) में तापमान में 1^circ C से अधिक का बदलाव न हो।

तापमान वृद्धि की गणना: तापमान वृद्धि (T_r) की गणना सूत्र द्वारा की जाती है:

T_r = T_{measured} - T_{ambient}


जहाँ, T_{measured} ब्रेकर का मापा गया तापमान है, और T_{ambient} आसपास के वातावरण का तापमान है।

4. मानक सीमाएँ (Standard Limits)

​मानक (जैसे IEC) यह निर्दिष्ट करते हैं कि ब्रेकर के विभिन्न हिस्सों के लिए अधिकतम अनुमेय तापमान वृद्धि क्या होनी चाहिए।

भाग (Part)

अधिकतम अनुमेय तापमान वृद्धि (उदाहरण)

मुख्य संपर्क (Main Contacts)

70^circ C

टर्मिनल (Terminals)

70^circ C

कॉइल/सोलनॉइड (Coils/Solenoids)

80^circ C से 105^circ C (इंसुलेशन वर्ग के आधार पर)


यह परीक्षण सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर को लंबे समय तक उसके रेटेड करंट पर इस्तेमाल करने पर भी वह सुरक्षित रहेगा और उसके इन्सुलेशन या यांत्रिक भागों को कोई क्षति नहीं पहुँचेगी।




शॉर्ट सर्किट परीक्षण

शॉर्ट सर्किट परीक्षण (Short-Circuit Test) सर्किट ब्रेकर के प्रकार परीक्षणों (Type Tests) में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे कठोर परीक्षण होता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ब्रेकर, किसी भी गंभीर विद्युत दोष (fault) की स्थिति में, अधिकतम संभावित शॉर्ट-सर्किट करंट को सुरक्षित रूप से बाधित (interrupt) करने की क्षमता रखता है।

शॉर्ट सर्किट परीक्षण (Short-Circuit Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

  • ब्रेकिंग क्षमता का सत्यापन: यह प्रमाणित करना कि ब्रेकर की रेटेड अल्टीमेट शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता (I_{cu}) और रेटेड सर्विस शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता (I_{cs}), निर्माता द्वारा बताए गए विनिर्देशों के अनुरूप हैं।
  • सुरक्षित विच्छेदन (Safe Interruption): यह सुनिश्चित करना कि शॉर्ट-सर्किट करंट को बाधित करते समय ब्रेकर पर कोई विस्फोटक क्षति (explosive damage) नहीं होती, और न ही ब्रेकर से कोई खतरनाक आर्क (Arc) बाहर निकलता है।
  • पुन: उपयोगिता: यह जाँच करना कि शॉर्ट-सर्किट को बाधित करने के बाद ब्रेकर फिर से बिना किसी बड़े आंतरिक क्षति के सामान्य रूप से कार्य करने के लिए तैयार है या नहीं (विशेष रूप से I_{cs} के मामले में)।

​2. परीक्षण सर्किट (Test Circuit)

​शॉर्ट सर्किट परीक्षण एक विशेष उच्च-शक्ति परीक्षण प्रयोगशाला (High-Power Test Laboratory) में किया जाता है।

  • जनरेटर/स्रोत: प्रयोगशाला में एक शक्तिशाली शॉर्ट-सर्किट जनरेटर या एक सिंक्रोनस मशीन होती है जो कुछ मिलीसेकंड के लिए रेटेड वोल्टेज पर विशाल करंट (हजारों एम्पीयर) प्रदान कर सकती है।
  • मापन उपकरण: करंट, वोल्टेज, और आर्क के समय को मिलीसेकंड की सटीकता के साथ रिकॉर्ड करने के लिए उच्च-गति वाले ऑसिलोस्कोप और ट्रांसड्यूसर का उपयोग किया जाता है।

​3. परीक्षण अनुक्रम (Test Sequences)

​IEC मानकों के अनुसार, ब्रेकिंग क्षमता को सत्यापित करने के लिए विशिष्ट अनुक्रम (sequences) का उपयोग किया जाता है:

क्षमता का प्रकार

परीक्षण अनुक्रम

उद्देश्य

रेटेड अल्टीमेट ब्रेकिंग क्षमता (I_{cu})

O - t - CO

यह सबसे कठोर परीक्षण है। यह जाँचता है कि ब्रेकर एक बार अपने अधिकतम दोष करंट को बाधित कर सकता है।

रेटेड सर्विस ब्रेकिंग क्षमता (I_{cs})

OT - CO - t - CO

यह ब्रेकर की बार-बार दोषों को बाधित करने और तुरंत सेवा में लौटने की क्षमता की जाँच करता है। I_{cs} का मान हमेशा I_{cu} से कम या उसके बराबर होता है।


  • प्रतीकों का अर्थ:
    • O (Open): ब्रेकर ट्रिप होता है और करंट को बाधित करता है।
    • CO (Close-Open): ब्रेकर जानबूझकर बंद किया जाता है, जबकि दोष अभी भी मौजूद है, और फिर तुरंत ट्रिप होकर बाधित करता है।
    • t (Time): दो ऑपरेशन के बीच का समय अंतराल, जो 1 से 3 मिनट तक होता है।

​4. सफलता मानदंड (Acceptance Criteria)

​शॉर्ट-सर्किट परीक्षण में सफलता सुनिश्चित करने के लिए, ब्रेकर को निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए:

  1. करंट विच्छेदन (Current Interruption): ब्रेकर को सफलतापूर्वक निर्धारित दोष करंट को बाधित करना चाहिए।
  2. यांत्रिक अखंडता: ब्रेकर को कोई विस्फोटक क्षति या संरचनात्मक विफलता नहीं होनी चाहिए।
  3. आर्क का नियंत्रण: आर्क (बिजली की चिंगारी) पूरी तरह से ब्रेकर के आर्क चेंबर के अंदर ही निहित (contained) होनी चाहिए।
  4. डाइलेक्ट्रिक टेस्ट: परीक्षण के बाद, ब्रेकर के इंसुलेशन की जाँच के लिए पावर फ्रीक्वेंसी वोल्टेज परीक्षण दोहराया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आंतरिक आर्क ने इन्सुलेशन को क्षति नहीं पहुँचाई है।
  5. पुन: संचालन: I_{cs} परीक्षण के बाद, ब्रेकर को बिना किसी यांत्रिक क्षति के सामान्य रूप से फिर से काम करने में सक्षम होना चाहिए।

​यह परीक्षण अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिजली प्रणाली की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है। यदि ब्रेकर शॉर्ट-सर्किट को साफ़ करने में विफल रहता है, तो यह सबस्टेशन या संयंत्र में विनाशकारी परिणाम दे सकता है।






यांत्रिक सहनशक्ति परीक्षण

यांत्रिक सहनशक्ति परीक्षण (Mechanical Endurance Test), जिसे यांत्रिक जीवन परीक्षण (Mechanical Life Test) भी कहा जाता है, सर्किट ब्रेकर के प्रकार परीक्षणों (Type Tests) में से एक है। यह परीक्षण ब्रेकर के आंतरिक संचालन तंत्र (internal operating mechanism) की दीर्घकालिक विश्वसनीयता और स्थायित्व को सुनिश्चित करता है।

यांत्रिक सहनशक्ति परीक्षण (Mechanical Endurance Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

​इस परीक्षण का मुख्य लक्ष्य यह सिद्ध करना है कि सर्किट ब्रेकर अपने संपूर्ण अपेक्षित सेवा जीवन (expected service life) के दौरान बिना किसी आंतरिक विफलता, घिसाव या यांत्रिक जाम के निर्माता द्वारा निर्दिष्ट संख्या में ऑन (ON) और ऑफ (OFF) ऑपरेशन चक्रों (Operating Cycles) को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है।

  • दीर्घायु का सत्यापन: यह जाँचता है कि ब्रेकर के पुर्जे (जैसे स्प्रिंग्स, लीवर, लच, और मूविंग कॉन्टैक्ट्स) बार-बार के उपयोग के तनाव को झेल सकते हैं।
  • पुनरावृत्ति (Repeatability): यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर का क्लोजिंग (closing) और ओपनिंग (opening) समय, और ओवरट्रैवल (overtravel) जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर, संचालन के हजारों चक्रों के बाद भी विनिर्देशों के भीतर बने रहते हैं।
  • घिसाव का मूल्यांकन: घिसाव (wear and tear) के संकेतों के लिए परीक्षण के बाद यांत्रिक घटकों का निरीक्षण करना।

​2. प्रक्रिया (Procedure)

  1. रेटेड वोल्टेज और कोई करंट नहीं: यह परीक्षण आम तौर पर ब्रेकर के रेटेड वोल्टेज पर, लेकिन कोई लोड करंट नहीं (यानी बिना बिजली के) किया जाता है। चूंकि यह केवल यांत्रिक तंत्र का परीक्षण करता है, इसलिए इसमें बिजली का आर्क शामिल नहीं होता है।
  2. चक्रों की संख्या: ब्रेकर को उसके रेटेड ऑपरेटिंग साइकल की संख्या के लिए स्वचालित रूप से चलाया जाता है।
    • ​उदाहरण के लिए:
      • लो वोल्टेज सर्किट ब्रेकर (LV CB): 10,000 से 25,000 यांत्रिक संचालन चक्र।
      • हाई वोल्टेज सर्किट ब्रेकर (HV CB): 1,000 से 10,000 यांत्रिक संचालन चक्र (चूंकि HV ब्रेकर LV ब्रेकरों की तुलना में कम बार संचालित होते हैं)।
  3. ऑपरेटिंग अनुक्रम: ब्रेकर को लगातार क्लोज-ओपन (Close-Open) अनुक्रम में चलाया जाता है। दो संचालन के बीच एक छोटा विराम होता है ताकि ऑपरेटिंग कॉइल को ठंडा होने का समय मिल सके और तंत्र को चार्ज होने का समय मिल सके।
  4. निरंतर निगरानी: परीक्षण के दौरान, ऑपरेशन के समय और पुल-इन (pull-in) और ड्रॉप-आउट (drop-out) वोल्टेज जैसे यांत्रिक मापदंडों की निगरानी की जाती है।

​3. सफलता मानदंड (Acceptance Criteria)

​यांत्रिक सहनशक्ति परीक्षण में सफल होने के लिए, ब्रेकर को निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए:

  1. चक्रों को पूरा करना: ब्रेकर को बिना किसी जाम (jamming), फँसने (sticking), या विफलता के निर्धारित संख्या में ऑपरेशन चक्रों को पूरा करना चाहिए।
  2. यांत्रिक अखंडता: परीक्षण के बाद, सभी मुख्य यांत्रिक भागों (जैसे: कॉइल, स्प्रिंग्स, इन्टरलॉक, और टॉगल) का निरीक्षण किया जाता है। उनमें स्थायी विरूपण (permanent deformation), फ्रैक्चर या अत्यधिक घिसाव नहीं होना चाहिए।
  3. ऑपरेटिंग समय: ब्रेकर का ओपनिंग (opening) और क्लोजिंग (closing) समय परीक्षण से पहले और बाद में निर्माता के विनिर्देशों के भीतर रहना चाहिए।

​यह परीक्षण सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर की यांत्रिक संरचना मजबूत है और वह अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान विश्वसनीय रूप से काम करेगा, भले ही उसे कितनी भी बार संचालित किया जाए।






नियमित परीक्षण

नियमित परीक्षण (Routine Tests), जिन्हें कारखाना स्वीकृति परीक्षण (Factory Acceptance Tests - FAT) का हिस्सा भी माना जाता है, वे परीक्षण हैं जो उत्पादित होने वाले प्रत्येक व्यक्तिगत सर्किट ब्रेकर पर किए जाते हैं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ब्रेकर विनिर्देशों के अनुरूप निर्मित हुआ है और उसमें निर्माण संबंधी कोई दोष नहीं है।

​प्रकार परीक्षण (Type Tests) जहाँ डिज़ाइन की पुष्टि करते हैं, वहीं नियमित परीक्षण उत्पादन गुणवत्ता की पुष्टि करते हैं।

नियमित परीक्षण (Routine Tests)

​नियमित परीक्षणों की सूची प्रकार और वोल्टेज स्तर के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती है, लेकिन मुख्य रूप से निम्नलिखित परीक्षण शामिल होते हैं:

​1. यांत्रिक परिचालन परीक्षण (Mechanical Operation Test)

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर का क्लोजिंग (closing) और ओपनिंग (opening) तंत्र सुचारू रूप से कार्य कर रहा है।
  • प्रक्रिया: ब्रेकर को कुछ सीमित संख्या में ऑन (ON) और ऑफ (OFF) चक्रों के लिए बिना विद्युत लोड के संचालित किया जाता है।
  • जाँच: तंत्र की आवाज़, स्प्रिंग चार्जिंग, और इंटरलॉक की सही कार्यप्रणाली की जाँच की जाती है।

​2. संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test)

  • उद्देश्य: मुख्य चलने वाले (moving) और स्थिर (fixed) संपर्कों के बीच कम प्रतिरोध की पुष्टि करना। उच्च प्रतिरोध अत्यधिक ताप (hotspots) और ऊर्जा हानि का कारण बनता है।
  • प्रक्रिया: संपर्कों के माध्यम से एक नियंत्रित डीसी करंट (जैसे 100A या 200A) भेजा जाता है और एक विशेष उपकरण (माइक्रो-ओम मीटर) का उपयोग करके वोल्टेज ड्रॉप मापा जाता है।
  • गणना: प्रतिरोध को R = V/I का उपयोग करके माइक्रो-ओम ( mu Omega) में गणना की जाती है।

​3. मुख्य परिपथ पर वोल्टेज परीक्षण (Voltage Test on Main Circuit)

​यह एक डाइलेक्ट्रिक परीक्षण है जो यह सत्यापित करता है कि ब्रेकर का इन्सुलेशन निर्माण प्रक्रिया से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है।

  • उद्देश्य: ब्रेकर के सक्रिय भागों और ग्राउंड के बीच इन्सुलेशन की अखंडता की जाँच करना।
  • प्रक्रिया: ब्रेकर के मुख्य परिपथ पर एक निर्दिष्ट पावर फ्रीक्वेंसी वोल्टेज (Power Frequency Voltage) एक मिनट के लिए लगाया जाता है।
  • जाँच: किसी भी फ्लैशओवर या पंक्चर का पता लगाया जाता है।

​4. सहायक एवं नियंत्रण परिपथ पर परीक्षण (Tests on Auxiliary and Control Circuits)

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर के ट्रिप कॉइल (Trip Coil), क्लोजिंग कॉइल (Closing Coil), और अन्य सहायक उपकरण (जैसे मोटर, हीटर) ठीक से काम कर रहे हैं।
  • प्रक्रिया: इन कॉइलों को उनके रेटेड वोल्टेज पर संचालित किया जाता है।
  • जाँच: कॉइल के प्रतिरोध और न्यूनतम पिक-अप वोल्टेज की जाँच की जाती है।

​5. पोल पृथक्करण की जाँच (Check of Pole Separation)

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि जब ब्रेकर खुली (open) स्थिति में हो, तो सभी पोल के संपर्कों के बीच की दूरी IEC मानकों के अनुसार पर्याप्त है। यह दूरी दोष (fault) को बाधित करने के बाद आर्क को बुझाने के लिए महत्वपूर्ण होती है।
  • प्रक्रिया: एक गेज या सटीक मापने वाले उपकरण का उपयोग करके भौतिक दूरी को मापा जाता है।

​इन नियमित परीक्षणों का सफल समापन यह गारंटी देता है कि ब्रेकर ग्राहक को सुरक्षित रूप से और अपनी पूरी कार्यक्षमता के साथ वितरित किया जा सकता है।




संपर्क प्रतिरोध परीक्षण

संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test) नियमित परीक्षणों (Routine Tests) और फील्ड परीक्षणों (Field Tests) दोनों में एक महत्वपूर्ण परीक्षण है। यह सर्किट ब्रेकर के मुख्य संपर्कों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य का मूल्यांकन करता है।

संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

​इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य सर्किट ब्रेकर के मुख्य संपर्कों से होकर गुजरने वाले करंट के मार्ग में आने वाले विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) को मापना है।

  • तापमान नियंत्रण: यदि संपर्कों का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, तो {I}^2{R} के नियम के अनुसार, यह अत्यधिक गर्मी (Heat) उत्पन्न करता है। यह अत्यधिक गर्मी ब्रेकर के आंतरिक घटकों, इन्सुलेशन और स्प्रिंग्स को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है, जिससे ब्रेकर की विफलता हो सकती है।
  • ऊर्जा दक्षता: कम प्रतिरोध ऊर्जा हानि को कम करता है और परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) सुनिश्चित करता है।
  • संपर्क की स्थिति: यह परीक्षण संपर्कों पर अत्यधिक घिसाव (wear), जंग (corrosion), या ढीलेपन (looseness) का संकेत देता है।

​2. उपकरण (Equipment)

​इस परीक्षण के लिए एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है जिसे माइक्रो-ओम मीटर (Micro-Ohm Meter) या डीएलआरओ (Digital Low Resistance Ohmmeter) कहा जाता है।

  • ​यह उपकरण बहुत उच्च सटीकता के साथ माइक्रो-ओम ( mu Omega) (एक ओम का दस लाखवाँ हिस्सा) रेंज में प्रतिरोध को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • ​यह परीक्षण के लिए एक स्थिर डीसी करंट (Stable DC Current) स्रोत (आमतौर पर 100A, 200A, या उससे अधिक) प्रदान करता है।

​3. परीक्षण प्रक्रिया (Test Procedure)

​संपर्क प्रतिरोध को मापने के लिए चार-टर्मिनल (केल्विन) विधि का उपयोग किया जाता है, जो मापन तारों के प्रतिरोध के प्रभाव को समाप्त करती है:

करंट इंजेक्ट करना: उपकरण से दो करंट लीड्स (C1 और C2) को ब्रेकर के इनपुट और आउटपुट टर्मिनलों पर जोड़ा जाता है।

वोल्टेज मापना: दो वोल्टेज लीड्स (V1 और V2) को उन बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है जिनके प्रतिरोध को मापा जाना है (अर्थात, ब्रेकर के दोनों टर्मिनलों पर जितना संभव हो सके संपर्कों के करीब)।

ब्रेकर क्लोज करना: ब्रेकर को बंद (Closed) स्थिति में लाया जाता है ताकि करंट संपर्कों के माध्यम से प्रवाहित हो सके।

मापन: उपकरण द्वारा प्रवाहित करंट (I) और संपर्कों पर होने वाले वोल्टेज ड्रॉप (V) को मापा जाता है।

गणना: संपर्क प्रतिरोध की गणना ओम के नियम का उपयोग करके की जाती है:

4. स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria)

  • कम प्रतिरोध: संपर्क प्रतिरोध का मान हमेशा बहुत कम होना चाहिए, आमतौर पर कुछ माइक्रो-ओम ( mu Omega) या अधिकतम मिली-ओम ({m} Omega) रेंज में।
  • समानता: ब्रेकर के सभी पोल (तीन-फेज ब्रेकर में R, Y, B पोल) का प्रतिरोध मान एक दूसरे के बहुत करीब होना चाहिए।
  • मानक तुलना: मापा गया मान निर्माता द्वारा प्रदान किए गए फैक्ट्री संदर्भ मान या IEC मानकों द्वारा अनुमत अधिकतम मान से अधिक नहीं होना चाहिए।
    • उदाहरण: यदि किसी नए ब्रेकर का प्रतिरोध 30  mu Omega है, तो यदि सेवा के दौरान यह मान 60 mu Omega (यानी दोगुना) से अधिक हो जाता है, तो ब्रेकर को रखरखाव की आवश्यकता हो सकती है।

​यदि रीडिंग उच्च आती है, तो यह ढीले बोल्ट, दूषित संपर्क सतहों, या अत्यधिक संपर्क घिसाव का संकेत हो सकता है, जिससे मरम्मत या प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है।






इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण

इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण (Insulation Resistance Test) भी एक प्रकार का परावैद्युत परीक्षण (Dielectric Test) है, जिसे अक्सर मेगर परीक्षण (Megger Test) के नाम से जाना जाता है। यह सर्किट ब्रेकर और अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से किया जाने वाला एक मूलभूत परीक्षण है।

इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण (Insulation Resistance Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

​इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह मापना है कि सर्किट ब्रेकर के विभिन्न सक्रिय घटकों (live components) के बीच या सक्रिय घटकों और अर्थ (ground) के बीच स्थापित विद्युत रोधन सामग्री (insulating material) की गुणवत्ता कैसी है।

  • रिसाव करंट का मूल्यांकन: यह इन्सुलेशन की क्षमता का मूल्यांकन करता है कि वह लीकेज करंट (रिसाव करंट) को कितने प्रभावी ढंग से दबाता है। एक मजबूत इन्सुलेशन उच्च प्रतिरोध प्रदान करेगा और लीकेज करंट को कम रखेगा।
  • दोषों का पता लगाना: यह नमी, गंदगी, इन्सुलेशन की उम्र बढ़ने (ageing), या यांत्रिक क्षति के कारण होने वाले दोषों का पता लगाने में मदद करता है, जो समय के साथ इन्सुलेशन प्रतिरोध को कम करते हैं।
  • ब्रेकडाउन रोकथाम: कम इन्सुलेशन प्रतिरोध अंततः डाइलेक्ट्रिक ब्रेकडाउन या शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है। यह परीक्षण उस विफलता को होने से पहले ही पहचान लेता है।

​2. उपकरण (Equipment)

​परीक्षण के लिए मेगर (Megohmmeter) नामक एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है।

  • ​मेगर एक पोर्टेबल उपकरण है जो उच्च डीसी वोल्टेज (जैसे 500V, 1000V, 2500V, या 5000V) उत्पन्न करता है और प्रतिरोध को मेगाओम ( {M} Omega) या गीगाओम ({G} Omega) में मापता है।

​3. परीक्षण प्रक्रिया (Test Procedure)

​मेगर परीक्षण सर्किट ब्रेकर के विभिन्न भागों पर किया जाता है:

  1. पोल से पोल (Pole-to-Pole): एक ही ब्रेकर के विभिन्न फेज़ (R, Y, B) के संपर्कों के बीच।
  2. पोल से ग्राउंड (Pole-to-Ground): ब्रेकर के प्रत्येक पोल और ब्रेकर फ्रेम या ग्राउंडेड बॉडी के बीच।
  3. संपर्कों के पार (Across Open Contacts): जब ब्रेकर खुली (Open) स्थिति में हो, तब इनपुट और आउटपुट टर्मिनल के बीच (यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्क शमन माध्यम ठीक से कार्य कर रहा है)।
  • प्रक्रिया: मेगर की लीड्स को मापे जाने वाले दो बिंदुओं से जोड़ा जाता है। मेगर चालू किया जाता है और निर्दिष्ट डीसी वोल्टेज को आमतौर पर 60 सेकंड के लिए लगाया जाता है।
  • अवशोषण प्रभाव: रीडिंग की शुरुआत में इन्सुलेशन में चार्ज होने के कारण प्रतिरोध कम होता है, और धीरे-धीरे एक स्थिर मान तक बढ़ जाता है।

​4. स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria)

​इन्सुलेशन प्रतिरोध का मूल्य पर्यावरणीय कारकों (जैसे तापमान, आर्द्रता) पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः:


मूल्य: मापा गया प्रतिरोध मान बहुत अधिक होना चाहिए। गीगाओम ({G} Omega) रेंज की रीडिंग एक मजबूत और स्वस्थ इन्सुलेशन का संकेत देती है।

न्यूनतम सीमा: एक सामान्य नियम के अनुसार, इन्सुलेशन प्रतिरोध 1000V + (1M Omega kV) से कम नहीं होना चाहिए (हालाँकि विशिष्ट उपकरण मानकों में इसका अलग मूल्य निर्धारित होता है)।

ध्रुवीकरण सूचकांक (Polarization Index - PI): कुछ मामलों में, PI की गणना की जाती है, जो 10 मिनट की रीडिंग और 1 मिनट की रीडिंग का अनुपात होता है।

{PI} = {{IR at } 10 { minutes}}/{{IR at } 1 { minute}}


PI का मान 2.0 या उससे अधिक होने पर इन्सुलेशन को आमतौर पर अच्छी स्थिति में माना जाता है। कम PI मान इन्सुलेशन में नमी या गंभीर प्रदूषण का संकेत देता है।

यह परीक्षण यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है कि ब्रेकर बिना किसी खतरनाक लीकेज करंट के सुरक्षित रूप से काम करेगा।





परिचालन परीक्षण

परिचालन परीक्षण (Operational Tests) या कार्यात्मक परीक्षण (Functional Tests) वह प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि सर्किट ब्रेकर, दोष (fault) की स्थिति को महसूस करने के बाद, सही समय पर और सही तरीके से प्रतिक्रिया करता है। ये परीक्षण ब्रेकर के इलेक्ट्रिकल प्रोटेक्शन (विद्युत सुरक्षा) और यांत्रिक तंत्र के बीच तालमेल की जाँच करते हैं।

​परिचालन परीक्षणों को विभिन्न प्रकार के ब्रेकरों के लिए अलग-अलग तरीके से किया जाता है:

परिचालन परीक्षण (Operational Tests)

​1. ट्रिपिंग ऑपरेशन परीक्षण (Tripping Operation Test)

​यह परीक्षण ब्रेकर के ट्रिपिंग कॉइल, नियंत्रण सर्किट और यांत्रिक तंत्र की कार्यक्षमता को सत्यापित करता है।

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर की ट्रिप कॉइल (Trip Coil) को कमांड मिलने पर वह सफलतापूर्वक ब्रेकर को खोलती है।
  • प्रक्रिया:
    • न्यूनतम पिक-अप वोल्टेज: ट्रिप कॉइल पर न्यूनतम आवश्यक वोल्टेज (रेटेड वोल्टेज का 70% से 80%) लगाकर यह जाँच की जाती है कि कॉइल सक्रिय होता है या नहीं।
    • बाहरी ट्रिप कमांड: ब्रेकर को एक बाहरी रिले या कंट्रोल पैनल से कमांड भेजकर ट्रिप कराया जाता है।
  • सफलता मानदंड: ब्रेकर को कमांड मिलने के तुरंत बाद और न्यूनतम वोल्टेज पर भी सफलतापूर्वक ट्रिप हो जाना चाहिए।

​2. क्लोजिंग ऑपरेशन परीक्षण (Closing Operation Test)

​यह परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर का क्लोजिंग तंत्र और स्प्रिंग-चार्जिंग मोटर (यदि मौजूद हो) ठीक से काम कर रहे हैं।

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि क्लोजिंग कॉइल (Closing Coil) या चार्जिंग मोटर सही ढंग से ब्रेकर को बंद (ON) करने की स्थिति में लाते हैं।
  • प्रक्रिया:
    • क्लोजिंग कमांड: ब्रेकर को स्थानीय रूप से या दूर से (remote) क्लोजिंग कमांड दी जाती है।
    • न्यूनतम क्लोजिंग वोल्टेज: क्लोजिंग कॉइल पर न्यूनतम वोल्टेज लगाकर जाँच की जाती है कि ब्रेकर सफलतापूर्वक बंद हो जाता है या नहीं।

​3. इंटरलॉक और सुरक्षा जाँच (Interlock and Safety Checks)

​सर्किट ब्रेकरों में अक्सर सुरक्षा के लिए कई इंटरलॉक होते हैं, जिन्हें काम करना चाहिए।

  • स्प्रिंग डिस्चार्ज इंटरलॉक: यदि ब्रेकर का स्प्रिंग तंत्र पूरी तरह से चार्ज नहीं हुआ है, तो यह जाँच की जाती है कि ब्रेकर को बंद होने की अनुमति नहीं है।
  • डोर इंटरलॉक: कुछ ब्रेकरों में, जब ब्रेकर का दरवाजा खुला होता है, तो उन्हें बंद होने से रोकने के लिए इंटरलॉक होते हैं।
  • एंटी-पंपिंग सुविधा: यह सुनिश्चित करना कि एक बार बंद होने के बाद, क्लोजिंग कमांड को लगातार दबाए रखने पर भी ब्रेकर बार-बार बंद और खुलता न रहे।

​4. समय विश्लेषक परीक्षण (Timing Test)

​यह हाई-वोल्टेज और मीडियम-वोल्टेज ब्रेकरों के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन परीक्षण है।

  • उद्देश्य: यह मिलीसेकंड (milliseconds) में सटीक रूप से मापना कि ट्रिप कमांड दिए जाने से लेकर संपर्कों के खुलने तक, और क्लोजिंग कमांड दिए जाने से लेकर संपर्कों के बंद होने तक कितना समय लगता है।
  • महत्व: यह समय रिले सुरक्षा योजना के साथ समन्वय (coordination) के लिए महत्वपूर्ण है। यदि ब्रेकर धीरे काम करता है, तो दोष (fault) उपकरणों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
  • सफलता मानदंड: मापा गया समय निर्माता के विनिर्देशों (जैसे 3 चक्र या 50 मिलीसेकंड) के भीतर होना चाहिए।

​ये परिचालन परीक्षण यह पुष्टि करते हैं कि सर्किट ब्रेकर की इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा और यांत्रिक मांसपेशियां सामंजस्य में काम करती हैं, जो बिजली प्रणाली की सुरक्षा का आधार है।




फील्ड/साइट कमीशनिंग परीक्षण

फील्ड/साइट कमीशनिंग परीक्षण (Field/Site Commissioning Tests) वे परीक्षण होते हैं जो सर्किट ब्रेकर को फैक्ट्री से लाकर उसके अंतिम इंस्टॉलेशन स्थान (सबस्टेशन या संयंत्र) पर स्थापित करने के बाद किए जाते हैं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ब्रेकर परिवहन, स्थापना, और कनेक्शन प्रक्रिया के दौरान क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है और वह तत्काल सेवा में डालने के लिए तैयार है।

​फील्ड परीक्षण अक्सर नियमित (Routine) परीक्षणों का एक छोटा संस्करण होते हैं।

फील्ड/साइट कमीशनिंग परीक्षण (Field/Site Commissioning Tests)

​फील्ड परीक्षणों को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

​1. दृश्य और यांत्रिक जाँच (Visual and Mechanical Checks)

​ये सबसे पहले और सबसे सरल परीक्षण होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि स्थापना सही ढंग से की गई है।

  • बाहरी निरीक्षण: ब्रेकर, उसके टॉगल, और बुशिंग्स पर टूटना (cracks), डैमेज, या तेल/गैस रिसाव (SF6 ब्रेकरों में) के संकेतों की जाँच करना।
  • अलाइनमेंट और माउंटिंग: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर नींव पर ठीक से और लंबवत (plumb) माउंट किया गया है।
  • कनेक्शन की जाँच: सभी पावर केबल और कंट्रोल वायरिंग के टाइट और सुरक्षित कनेक्शन की पुष्टि करना।
  • गैस का दबाव: SF6 गैस वाले ब्रेकरों में गैस के दबाव की जाँच करना और यह सुनिश्चित करना कि यह निर्माता के विनिर्देशों के भीतर है।
  • यांत्रिक परिचालन: ब्रेकर को कुछ चक्रों के लिए मैन्युअल रूप से (Manual) या विद्युत रूप से (Electrical) संचालित करके यह जाँच करना कि कोई जाम या असामान्य शोर तो नहीं है।

​2. विद्युत अखंडता परीक्षण (Electrical Integrity Tests)

​ये परीक्षण ब्रेकर की आंतरिक स्थिति को मापने के लिए किए जाते हैं।

​A. इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण (Insulation Resistance Test - Megger)

  • उद्देश्य: यह सत्यापित करना कि परिवहन के दौरान नमी या गंदगी के कारण इन्सुलेशन प्रतिरोध कम नहीं हुआ है।
  • मापन: पोल-टू-पोल, पोल-टू-ग्राउंड, और खुले संपर्कों के पार इन्सुलेशन प्रतिरोध को मापना।
  • स्वीकार्यता: रीडिंग को फैक्ट्री रीडिंग के समान या मानकों द्वारा अनुमत न्यूनतम सीमा से ऊपर होना चाहिए।

​B. संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test - \mu\Omega Meter)

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर को स्थापित करते समय या बसबार कनेक्ट करते समय कोई ढीला या दूषित कनेक्शन नहीं हुआ है।
  • मापन: सर्किट ब्रेकर के माध्यम से प्रवाहित होते समय सभी पोल के मुख्य संपर्कों का प्रतिरोध मापना।

​C. नियंत्रण परिपथों की निरंतरता (Control Circuit Continuity)

  • उद्देश्य: यह जाँच करना कि ट्रिपिंग, क्लोजिंग, और अलार्म सर्किट सही ढंग से वायर्ड और कनेक्टेड हैं।
  • मापन: ट्रिप और क्लोज कॉइल की निरंतरता की जाँच करना और यह सुनिश्चित करना कि वे सही ढंग से सक्रिय हो रहे हैं।

​3. परिचालन और समय परीक्षण (Operational and Timing Tests)

​ये परीक्षण यह सुनिश्चित करते हैं कि ब्रेकर सिस्टम के साथ समन्वय (coordination) में काम करेगा।

​A. न्यूनतम परिचालन वोल्टेज परीक्षण

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ट्रिपिंग और क्लोजिंग कॉइल न्यूनतम रेटेड वोल्टेज (आमतौर पर 70% से 85%) पर भी सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं।
  • जाँच: ट्रिपिंग और क्लोजिंग कॉइल पर धीरे-धीरे वोल्टेज कम करके ब्रेकर के ट्रिप होने और क्लोज होने की जाँच करना।

​B. टाइमिंग टेस्ट (Timing Test)

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर की ओपनिंग (opening) और क्लोजिंग (closing) गति निर्माता के विनिर्देशों के भीतर है।
  • महत्व: सुरक्षा रिले के सही संचालन और दोष को तेज़ी से हटाने के लिए सटीक समय महत्वपूर्ण है।
  • मापन: ट्रिप कमांड दिए जाने से लेकर संपर्कों के अलग होने तक का समय मिलीसेकंड में मापना।

​फील्ड/साइट कमीशनिंग परीक्षणों का सफलतापूर्वक पूरा होना ग्राहक को यह अंतिम आश्वासन देता है कि सर्किट ब्रेकर सुरक्षित, विश्वसनीय है, और बिजली प्रणाली को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार है।





समय परीक्षण

समय परीक्षण (Timing Test), जिसे टाइमिंग एनालाइजर टेस्ट (Timing Analyzer Test) भी कहा जाता है, सर्किट ब्रेकर के परिचालन परीक्षणों (Operational Tests) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर मध्यम और उच्च वोल्टेज वाले ब्रेकरों के लिए।

​यह परीक्षण मिलीसेकंड (milliseconds) की सटीकता के साथ यह मापता है कि सर्किट ब्रेकर का यांत्रिक तंत्र और आर्क बुझाने वाला तंत्र कितनी तेजी से काम करता है।

समय परीक्षण (Timing Test)

​1. उद्देश्य (Objective)

  • स्पीड सत्यापन: यह सुनिश्चित करना कि ब्रेकर की ओपनिंग (खुलने) और क्लोजिंग (बंद होने) की गति निर्माता के विनिर्देशों (Specifications) के अनुरूप है।
  • सुरक्षा समन्वय: दोष (fault) को हटाने के लिए ब्रेकर का समय, सुरक्षा रिले (Protection Relays) के संचालन समय के साथ समन्वयित (coordinated) होना चाहिए। यदि ब्रेकर धीमा है, तो रिले ट्रिप कमांड देने के बाद भी दोष जारी रहेगा, जिससे उपकरणों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
  • यांत्रिक स्वास्थ्य: समय में कोई भी विसंगति (जैसे बहुत धीमा या बहुत तेज संचालन) ऑपरेटिंग तंत्र (Operating Mechanism) में समस्याओं (जैसे घर्षण, जाम, कमजोर स्प्रिंग्स, या हाइड्रोलिक/न्यूमेटिक दबाव में कमी) का संकेत देती है।
  • पोल तुल्यकालन (Pole Simultaneity): यह सुनिश्चित करना कि तीन-फेज ब्रेकर में तीनों पोल (R, Y, B) एक ही समय पर (simultaneously) खुलते और बंद होते हैं।

​2. परीक्षण मापदंड (Measured Parameters)

​टाइमिंग टेस्ट निम्नलिखित महत्वपूर्ण समय अंतराल को मापता है:

समय अंतराल (Timing Interval)

परिभाषा (Definition)

ऑपरेटिंग टाइम (Operating Time)

ट्रिप कॉइल के ऊर्जायित (energized) होने के क्षण से लेकर मुख्य संपर्कों के अलग होने तक का समय।

क्लोजिंग टाइम (Closing Time)

क्लोजिंग कॉइल के ऊर्जायित होने के क्षण से लेकर मुख्य संपर्कों के जुड़ने तक का समय।

प्री-आर्क टाइम (Pre-Arc Time)

क्लोजिंग कमांड के बाद, संपर्कों के स्पर्श होने से लेकर, आर्क के शुरू होने तक का समय (विशेष रूप से शॉर्ट-सर्किट की स्थिति में)।

पोल फैलाव (Pole Span/Scatter)

तीनों पोल के खुलने/बंद होने के समय में अधिकतम अंतर। यह अंतर अक्सर कुछ मिलीसेकंड से अधिक नहीं होना चाहिए।


3. उपकरण और प्रक्रिया (Equipment and Procedure)

  • टाइमिंग एनालाइजर (Timing Analyzer): एक विशेष उपकरण जो बहुत उच्च रिज़ॉल्यूशन (माइक्रोसेकंड) पर समय को रिकॉर्ड करता है।
  • प्रक्रिया:
    1. ​टाइमिंग एनालाइजर को ब्रेकर के ट्रिप और क्लोज कॉइल (कमांड को रिकॉर्ड करने के लिए) और मुख्य संपर्कों (संपर्क की स्थिति को रिकॉर्ड करने के लिए) से जोड़ा जाता है।
    2. ओपनिंग टेस्ट: ब्रेकर को बंद (ON) स्थिति में रखा जाता है, और एनालाइजर के माध्यम से ट्रिप कमांड दी जाती है। उपकरण ट्रिप कॉइल के सक्रिय होने और संपर्कों के खुलने के बीच का समय रिकॉर्ड करता है।
    3. क्लोजिंग टेस्ट: ब्रेकर को खुली (OFF) स्थिति में रखा जाता है, और क्लोजिंग कमांड दी जाती है। उपकरण क्लोजिंग कॉइल के सक्रिय होने और संपर्कों के बंद होने के बीच का समय रिकॉर्ड करता है।
    4. डाटा विश्लेषण: मापा गया समय निर्माता द्वारा प्रदान किए गए संदर्भ समय से तुलना किया जाता है।

​4. स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria)

  • समय सीमा: मापा गया समय, ब्रेकर के रेटेड ऑपरेटिंग टाइम से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • पोल सिंक्रनाइज़ेशन: तीनों पोल के खुलने या बंद होने के समय में अंतर एक सीमित सीमा (जैसे 5 मिलीसेकंड) के भीतर होना चाहिए।
  • पुनरावृत्ति (Consistency): एक ही ब्रेकर पर बार-बार परीक्षण करने पर रीडिंग में बहुत कम विचलन (Variation) होना चाहिए।

​यदि समय परीक्षण से पता चलता है कि ब्रेकर निर्धारित समय से अधिक धीमा है, तो यह दर्शाता है कि ब्रेकर को सर्विस (रखरखाव) की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह आपातकाल में अपनी सुरक्षात्मक भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा सके।





गतिशील संपर्क प्रतिरोध मापन

गतिशील संपर्क प्रतिरोध मापन (Dynamic Contact Resistance Measurement - DCRM) एक उन्नत नैदानिक (diagnostic) परीक्षण है जो सर्किट ब्रेकर के मुख्य संपर्कों और आर्क संपर्कों की स्थिति का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह नियमित स्थैतिक संपर्क प्रतिरोध मापन (Static Contact Resistance Measurement - SCRM) से कहीं अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

​DCRM में, संपर्क प्रतिरोध को ब्रेकर के चलने (moving) के दौरान, यानी जब वह खुल रहा (opening) या बंद हो रहा (closing) होता है, तब मापा जाता है।

गतिशील संपर्क प्रतिरोध मापन (DCRM)

​1. उद्देश्य (Objective)

​DCRM का मुख्य उद्देश्य ब्रेकर के अंदर होने वाली यांत्रिक और विद्युत समस्याओं की पहचान करना है, जिन्हें स्थिर अवस्था में मापा नहीं जा सकता।

  • संपर्क की गुणवत्ता: मुख्य संपर्कों और आर्क संपर्कों के बीच सामंजस्य (alignment) और ओवरलैप की जाँच करना।
    • यांत्रिक गति: ब्रेकर के तंत्र (mechanism) में अवरोधों (obstructions), घर्षण (friction), या स्प्रिंग बल में कमी के कारण होने वाली असामान्यताओं का पता लगाना।
    • आर्क संपर्क की स्थिति: यह जाँच करना कि आर्क संपर्क कितनी देर तक करंट वहन करते हैं, और क्या वे जलने (eroded) या दूषित (contaminated) हो गए हैं।
    • आर्क संपर्क से मुख्य संपर्क में संक्रमण: यह सुनिश्चित करना कि करंट का प्रवाह आर्क संपर्क से मुख्य संपर्क में और इसके विपरीत, सुचारू रूप से हो रहा है।

    ​2. सिद्धांत (Principle)

    1. करंट इंजेक्शन: एक स्थिर डीसी करंट (आमतौर पर 100A से 300A) ब्रेकर के माध्यम से इंजेक्ट किया जाता है, जबकि ब्रेकर बंद (closed) होता है।
    2. मापन: ब्रेकर को खोला (open) या बंद किया (closed) जाता है। इस पूरी गति के दौरान, संपर्कों के पार होने वाले वोल्टेज ड्रॉप (V) को एक उच्च-सटीकता, उच्च-नमूना-दर (high-sample-rate) डेटा अधिग्रहण प्रणाली द्वारा लगातार रिकॉर्ड किया जाता है।
    3. प्रतिरोध प्रोफ़ाइल: प्रतिरोध (R = V/I) को संपर्क की गति या समय के फलन (function) के रूप में प्लॉट किया जाता है।

    ​3. DCRM वक्र का विश्लेषण (Analysis of DCRM Curve)

    ​एक विशिष्ट DCRM वक्र, जो प्रतिरोध को समय के मुकाबले प्लॉट करता है, निम्नलिखित चरणों को दर्शाता है:

    1. आरंभिक निम्न प्रतिरोध (Initial Low Resistance): वक्र ब्रेकर की स्थिर बंद स्थिति से शुरू होता है। इस बिंदु पर मापा गया प्रतिरोध, SCRM परीक्षण के समान होता है, और यह मुख्य संपर्कों का प्रतिरोध होता है।
    2. प्रतिरोध में वृद्धि (Resistance Increase): जैसे ही ब्रेकर खुलना शुरू करता है, मुख्य संपर्क अलग हो जाते हैं। करंट अब आर्क संपर्क (Arc Contacts) से प्रवाहित होना शुरू हो जाता है, जिसका प्रतिरोध मुख्य संपर्कों की तुलना में थोड़ा अधिक होता है। वक्र में एक हल्का उभार आता है।
    3. आर्क संपर्क का वियोग (Arc Contact Separation): आर्क संपर्क अलग होने से ठीक पहले, प्रतिरोध में तेजी से वृद्धि होती है।
    4. प्रतिरोध में अनंत वृद्धि (Resistance Goes to Infinity): जैसे ही आर्क संपर्क पूरी तरह से अलग हो जाते हैं, सर्किट टूट जाता है, और मापा गया प्रतिरोध अनंत तक चला जाता है।

    ​4. DCRM से प्राप्त जानकारी

    • संपर्क की स्थिति: वक्र में कोई भी अनियमितता (जैसे उच्च चोटियाँ या अचानक गिरावट) यह संकेत देती है कि संपर्क की सतह जल गई है, दूषित है, या उसका अलाइनमेंट खराब है।
    • आर्क संपर्क का क्षरण (Erosion): यदि आर्क संपर्क का प्रतिरोध सामान्य से अधिक है, तो यह अत्यधिक आर्क क्षति (arcing damage) का संकेत है।
    • यांत्रिक तुल्यकालन: वक्र यह पुष्टि करता है कि तीनों पोल के संपर्क एक ही समय पर अलग हो रहे हैं या नहीं। वक्र के आकार और समय में अंतर यांत्रिक समस्या का संकेत देता है।

    ​DCRM परीक्षण एक शक्तिशाली उपकरण है जो निवारक रखरखाव (preventive maintenance) कर्मियों को बिना ब्रेकर को पूरी तरह से खोले, उसके आंतरिक स्वास्थ्य का आकलन करने में मदद करता है।






    ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण परीक्षण

    ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण परीक्षण (Trip Circuit Supervision Test - TCS Test) विद्युत सबस्टेशन और पावर सिस्टम में सबसे महत्वपूर्ण सहायक परीक्षणों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्किट ब्रेकर की ट्रिपिंग क्रियाविधि (tripping mechanism) हमेशा काम करने के लिए तैयार है।

    ​एक सर्किट ब्रेकर को तभी ट्रिप होना चाहिए जब एक सुरक्षा रिले (Protection Relay) उसे कमांड दे। यदि ब्रेकर का ट्रिप सर्किट विफल हो जाता है, तो फॉल्ट (दोष) की स्थिति में भी ब्रेकर नहीं खुलेगा, जिससे पूरी प्रणाली को गंभीर क्षति हो सकती है। TCS का काम इस विफलता को पहले ही पहचान कर अलार्म (चेतावनी) देना है।

    ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण परीक्षण (TCS Test)

    ​1. उद्देश्य (Objective)

    • निरंतरता जाँच: ट्रिप कॉइल (Trip Coil), डीसी आपूर्ति फ्यूज, और कंट्रोल वायरिंग सहित पूरे ट्रिप सर्किट में निरंतरता (continuity) बनाए रखने की पुष्टि करना।
    • तैयारी सत्यापन: यह सुनिश्चित करना कि सुरक्षा रिले से ट्रिप कॉइल तक का पूरा मार्ग खुला (open) नहीं है और ट्रिप कमांड को सक्रिय करने के लिए हमेशा तैयार है।
    • विफलता चेतावनी: ट्रिप सर्किट में कोई भी खुलापन (open circuit) या दोष आने पर तुरंत एक अलार्म सक्रिय करना, ताकि रखरखाव कर्मी इसे सेवा में आने से पहले ठीक कर सकें।

    ​2. सिद्धांत (Principle)

    ​TCS योजना में आमतौर पर एक पर्यवेक्षण रिले (Supervision Relay) शामिल होता है, जो ट्रिप कॉइल सर्किट पर लगातार एक छोटा सा डीसी करंट या वोल्टेज की निगरानी करता है।

    • ​सामान्य स्थिति में (सर्किट स्वस्थ होने पर), यह करंट/वोल्टेज एक विशिष्ट सीमा के भीतर होता है, और रिले निष्क्रिय रहता है।
    • ​यदि सर्किट कहीं से खुल जाता है (Open Circuit), तो करंट शून्य हो जाता है या वोल्टेज बदल जाता है, और पर्यवेक्षण रिले तुरंत सक्रिय होकर एक अलार्म सिग्नल भेजता है।

    ​3. परीक्षण प्रक्रिया (Test Procedure)

    ​यह परीक्षण विभिन्न ब्रेकर स्थितियों के लिए किया जाता है:

    ​A. ब्रेकर बंद स्थिति में TCS जाँच (Breaker Closed Position)

    1. ​सर्किट ब्रेकर को बंद (Closed) स्थिति में रखा जाता है (यानी, सेवा में)।
    2. ​जानबूझकर ट्रिप सर्किट के किसी हिस्से में खुलापन (discontinuity) पैदा किया जाता है। यह आमतौर पर ट्रिप कॉइल डीसी आपूर्ति के फ्यूज को निकालकर या ट्रिप सर्किट के एक लिन्क को खोलकर किया जाता है।
    3. सफलता मानदंड: TCS रिले को तत्काल सक्रिय होना चाहिए और कंट्रोल पैनल पर एक दृश्य (visual) और श्रव्य (audible) अलार्म उत्पन्न करना चाहिए।

    ​B. ब्रेकर खुला स्थिति में TCS जाँच (Breaker Open Position)

    ​ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण की आवश्यकता तब भी होती है जब ब्रेकर खुला (Out-of-Service) हो।

    1. ​सर्किट ब्रेकर को खुली (Open) स्थिति में रखा जाता है।
    2. ​अधिकांश TCS योजनाएँ सर्किट ब्रेकर के सहायक संपर्कों (Auxiliary Contacts) का उपयोग करके निगरानी पथ को स्विच करती हैं, ताकि ब्रेकर के खुले होने पर भी ट्रिप सर्किट के मुख्य भाग की निगरानी की जा सके।
    3. ​इसी तरह, इस स्थिति में भी जानबूझकर सर्किट में खुलापन पैदा किया जाता है।
    4. सफलता मानदंड: TCS रिले को फिर से सक्रिय होना चाहिए और अलार्म उत्पन्न करना चाहिए।

    ​4. ट्रिप सर्किट का कार्य परीक्षण (Functional Test of Trip Circuit)

    ​TCS की जाँच के अलावा, यह सुनिश्चित करने के लिए भी परीक्षण किया जाता है कि ट्रिप सर्किट न्यूनतम वोल्टेज पर काम करता है:

    • न्यूनतम पिक-अप वोल्टेज: ट्रिप कॉइल पर वोल्टेज को धीरे-धीरे कम किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि कॉइल रेटेड वोल्टेज के 70% से 85% (मानक के अनुसार) पर भी सफलतापूर्वक ब्रेकर को ट्रिप कर सकता है।

    ​यह परीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिजली प्रणाली की अंतिम रक्षा रेखा (last line of defense) की कार्यक्षमता को सत्यापित करता है। यदि यह परीक्षण विफल हो जाता है, तो ब्रेकर को तब तक सेवा में नहीं रखा जाता जब तक कि दोष ठीक न हो जाए।





    विशेष/उन्नत ब्रेकर परीक्षण

    विशेष/उन्नत ब्रेकर परीक्षण (Special/Advanced Breaker Tests) वे परीक्षण होते हैं जो सर्किट ब्रेकर के गहन नैदानिक (in-depth diagnostic) और दीर्घकालिक स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए किए जाते हैं। ये परीक्षण नियमित कमीशनिंग या रखरखाव का हिस्सा नहीं होते हैं, बल्कि आमतौर पर तब किए जाते हैं जब कोई समस्या संदेह में हो, या निवारक रखरखाव कार्यक्रम के एक भाग के रूप में।

    ​यहाँ कुछ प्रमुख विशेष/उन्नत ब्रेकर परीक्षण दिए गए हैं:

    विशेष/उन्नत ब्रेकर परीक्षण (Special/Advanced Tests)

    ​1. गतिशील संपर्क प्रतिरोध मापन (Dynamic Contact Resistance Measurement - DCRM)

    • उद्देश्य: ब्रेकर के खुलने और बंद होने की गति के दौरान संपर्क प्रतिरोध में परिवर्तन को मापना। यह परीक्षण स्थिर (static) प्रतिरोध परीक्षण से चूक गए आंतरिक संपर्क समस्याओं (जैसे घिसाव, दूषित आर्क संपर्क या अलाइनमेंट की समस्या) को उजागर करता है।
    • निष्कर्ष: प्रतिरोध के ग्राफ में अनियमितताएँ या पोल के बीच समय के अंतर से यांत्रिक दोषों या संपर्क सतहों के क्षरण (erosion) का पता चलता है।

    ​2. अल्ट्रासोनिक और ध्वनिक उत्सर्जन परीक्षण (Ultrasonic and Acoustic Emission Test)

    • उद्देश्य: ब्रेकर के यांत्रिक संचालन के दौरान या उसके अंदर आंशिक निर्वहन (Partial Discharge - PD) की घटनाओं का पता लगाने के लिए असामान्य या उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनियों की निगरानी करना।
    • प्रक्रिया: एक अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर का उपयोग ब्रेकर की बॉडी पर किया जाता है।
    • निष्कर्ष:
      • आंतरिक दोष: असामान्य ध्वनि (जैसे ढीले पुर्जे या घर्षण) या दोषपूर्ण गैस वाल्व।
      • PD गतिविधि: इन्सुलेशन दोषों के कारण होने वाली PD गतिविधि उच्च-वोल्टेज ब्रेकरों में एक गंभीर प्रारंभिक चेतावनी संकेत है।

    ​3. SF6 गैस गुणवत्ता विश्लेषण (SF6 Gas Quality Analysis)

    • उद्देश्य: SF6 गैस से भरे उच्च-वोल्टेज सर्किट ब्रेकरों में गैस की शुद्धता और नमी सामग्री की जाँच करना।
    • प्रक्रिया: ब्रेकर से गैस का नमूना लिया जाता है और इसकी जाँच की जाती है:
      • नमी (Moisture): उच्च नमी इन्सुलेशन को कम कर सकती है और आर्क शमन के दौरान हाइड्रोफ्लोरिक एसिड बना सकती है।
      • शुद्धता (Purity): गैस में हवा या नाइट्रोजन जैसी अन्य गैसों के संदूषण की जाँच करना।
      • विघटन उत्पाद (Decomposition Products): आर्क के कारण बनने वाले विषाक्त और संक्षारक उत्पादों (जैसे {SO}_2) का पता लगाना, जो संपर्कों और इंसुलेटरों को नुकसान पहुंचाते हैं।

    ​4. ब्रेकर टाइमिंग विश्लेषण (High-Speed Timing Analysis)

    • उद्देश्य: मानक समय परीक्षण से परे जाकर, ब्रेकर के क्लोजिंग और ओपनिंग समय की गति, यात्रा की दूरी और संपर्क वेग को अत्यंत सटीकता के साथ मापना।
    • प्रक्रिया: एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन टाइमिंग एनालाइजर को ब्रेकर के ट्रिप कॉइल और क्लोजिंग कॉइल के साथ-साथ संपर्क गति सेंसर से जोड़ा जाता है।
    • निष्कर्ष: यात्रा-समय वक्र (Travel-Time Curve) में विचलन से ऑपरेटिंग तंत्र में स्प्रिंग तनाव में कमी, बफरिंग में समस्या, या तेल/गैस डैम्पिंग की समस्याओं का संकेत मिलता है।

    ​5. थर्मल इमेजिंग (Infrared/Thermal Imaging)

    • उद्देश्य: ब्रेकर के टर्मिनलों, बुशिंग्स और कनेक्शन बिंदुओं पर असामान्य ताप (hotspots) का पता लगाना, जबकि ब्रेकर लोड करंट वहन कर रहा हो।
    • निष्कर्ष: उच्च तापमान उच्च संपर्क प्रतिरोध, ढीले बोल्ट कनेक्शन, या आंतरिक संपर्क विफलता का संकेत देता है, जो पारंपरिक तरीकों से पता लगाना मुश्किल है।

    ​ये उन्नत परीक्षण सर्किट ब्रेकर के प्रारंभिक विफलताओं का पूर्वानुमान लगाने और योजनाबद्ध रखरखाव (planned maintenance) को निर्देशित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे बिजली प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।





    वैक्यूम बोतल अखंडता परीक्षण

    वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (Vacuum Circuit Breaker - VCB) में, वैक्यूम बोतल (Vacuum Interrupter - VI) सबसे महत्वपूर्ण घटक है। यह वह हिस्सा है जहाँ करंट को बाधित करने के लिए आर्क को बुझाया जाता है। वैक्यूम बोतल की अखंडता (Integrity) का तात्पर्य है कि इसके अंदर का उच्च वैक्यूम (High Vacuum) बरकरार है। यदि वैक्यूम लीक हो जाता है, तो ब्रेकर शॉर्ट सर्किट करंट को बाधित करने में विफल हो जाएगा।

    ​वैक्यूम बोतल की अखंडता की जाँच के लिए दो मुख्य परीक्षण किए जाते हैं:

     वैक्यूम बोतल अखंडता परीक्षण (Vacuum Bottle Integrity Test)

    ​1. वैक्यूम की जाँच के लिए उच्च वोल्टेज परीक्षण (High Voltage Test for Vacuum Check)

    ​यह सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण तरीका है, जो वैक्यूम बोतल की डाइलेक्ट्रिक शक्ति (Dielectric Strength) पर आधारित है।

    सिद्धांत (Principle):

    • ​यदि वैक्यूम इंटरप्टर के अंदर का वैक्यूम अच्छा है, तो अंदर की गैस (यदि कोई हो) का घनत्व बहुत कम होता है। ऐसे में, यह एक उत्कृष्ट इंसुलेटर के रूप में कार्य करता है और संपर्कों के बीच बहुत उच्च वोल्टेज को झेल सकता है।
    • ​यदि वैक्यूम लीक हो जाता है (अर्थात, बोतल के अंदर हवा/गैस भर जाती है), तो यह गैस आयनीकृत (ionized) हो जाती है और संपर्कों के बीच वोल्टेज को झेलने की क्षमता अचानक कम हो जाती है।

    प्रक्रिया (Procedure):

    1. वोल्टेज लागू करना: ब्रेकर के खुली (Open) स्थिति में, वैक्यूम इंटरप्टर के दोनों टर्मिनलों पर एक विशेष एसी या डीसी परीक्षण वोल्टेज (मेगा-वोल्टेज नहीं, बल्कि एक उच्च डीसी/एसी वोल्टेज, उदाहरण के लिए 20 kV से 60 kV तक) लगाया जाता है।
    2. समय अवधि: यह वोल्टेज आमतौर पर 60 सेकंड के लिए लगाया जाता है।

    स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria):

    • उच्च वैक्यूम: यदि वैक्यूम अखंड है, तो ब्रेकर इस परीक्षण वोल्टेज को बिना किसी आर्क या ब्रेकडाउन के झेल लेगा।
    • कम वैक्यूम (रिसाव): यदि वैक्यूम खराब हो गया है, तो वोल्टेज लगाने पर संपर्कों के बीच ब्रेकडाउन (आर्क) हो जाएगा, जो वैक्यूम बोतल की विफलता का संकेत देता है।

    ​2. संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Contact Resistance Test)

    ​हालाँकि यह सीधे वैक्यूम को नहीं मापता है, संपर्क प्रतिरोध परीक्षण (Static/DCRM) भी वैक्यूम इंटरप्टर के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

    उद्देश्य:

    • ​यह सुनिश्चित करना कि मुख्य संपर्कों का प्रतिरोध बहुत कम है।

    वैक्यूम से संबंध:

    • ​कुछ वैक्यूम इंटरप्टर में लीकेज के कारण आंतरिक धातुओं का ऑक्सीकरण हो सकता है, जिससे संपर्क प्रतिरोध बढ़ जाता है।
    • ​यदि संपर्क प्रतिरोध बहुत अधिक है, तो यह वैक्यूम इंटरप्टर के अंदर किसी गंभीर समस्या (रिसाव, संपर्क संदूषण) का संकेत हो सकता है।

    ​3. वैक्यूम गेज परीक्षण (Vacuum Gauge Test - दुर्लभ)

    ​यह विधि बहुत कम उपयोग की जाती है क्योंकि यह बहुत जटिल है:

    • प्रक्रिया: इस पद्धति में वैक्यूम इंटरप्टर के साथ एक पोर्टेबल वैक्यूम गेज या मैग्नेट्रॉन डिस्चार्ज गेज का उपयोग किया जाता है। यह गेज वैक्यूम बोतल के बाहर एक उच्च-आवृत्ति वाले चुंबकीय क्षेत्र को प्रेरित करता है, जिससे अंदर की गैस के आयनीकरण की दर मापी जाती है।
    • उपयोग: यह विधि आमतौर पर केवल निर्माण के दौरान या प्रयोगशाला की स्थितियों में उपयोग की जाती है, न कि फील्ड टेस्टिंग में।

    निष्कर्ष: 

    फील्ड में, उच्च वोल्टेज परीक्षण वैक्यूम बोतल की अखंडता की जाँच का सबसे तेज़, सबसे विश्वसनीय और सबसे सामान्य तरीका है। यदि यह परीक्षण विफल हो जाता है, तो पूरी वैक्यूम बोतल को बदला जाना चाहिए।





    आंशिक डिस्चार्ज परीक्षण

    आंशिक डिस्चार्ज परीक्षण (Partial Discharge Test - PD Test) उच्च वोल्टेज (High Voltage - HV) सर्किट ब्रेकरों और अन्य HV उपकरणों के ठोस और गैस इंसुलेशन की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण नैदानिक परीक्षण है। यह इन्सुलेशन विफलता की प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करता है, जिसे नज़रअंदाज़ करने पर उपकरण पूरी तरह से विफल हो सकता है।

    आंशिक डिस्चार्ज परीक्षण (Partial Discharge Test)

    ​1. आंशिक डिस्चार्ज (PD) क्या है?

    ​आंशिक डिस्चार्ज एक स्थानीयकृत विद्युत विसर्जन (localized electrical discharge) है जो दो कंडक्टरों के बीच इन्सुलेशन प्रणाली के केवल एक छोटे से हिस्से में होता है। यह इन्सुलेशन के माध्यम से पूरी तरह से पुल नहीं बनता है, इसलिए इसे "आंशिक" कहा जाता है।

    • PD के कारण: PD आमतौर पर इन्सुलेशन के अंदर मौजूद छोटे हवा के बुलबुले (Voids), अशुद्धियाँ (impurities), या तीखे किनारे (sharp edges) के कारण होता है।
    • नुकसान: समय के साथ, ये छोटे विसर्जन आस-पास के इन्सुलेशन को धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं, जिससे यह कमजोर हो जाता है और अंततः पूर्ण डाइलेक्ट्रिक ब्रेकडाउन का कारण बन सकता है।

    ​2. परीक्षण का उद्देश्य (Objective of PD Test)

    • प्रारंभिक विफलता का पता लगाना: उत्पादन प्रक्रिया के दौरान या ब्रेकर के सेवाकाल के दौरान इन्सुलेशन में पैदा हुए स्थानीय दोषों की पहचान करना।
    • इंसुलेशन स्वास्थ्य का आकलन: ब्रेकर के बुशिंग, गैस स्पेसर और इन्सुलेटिंग माध्यम (SF6 गैस या तेल) की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को मापना।
    • जीवन विस्तार का निर्धारण: इन्सुलेशन की वर्तमान स्थिति के आधार पर ब्रेकर के शेष उपयोगी जीवन (Remaining Useful Life) का अनुमान लगाना।

    ​3. PD मापन के तरीके (Methods of PD Measurement)

    ​PD विसर्जन ऊर्जा के विभिन्न रूपों को उत्पन्न करता है, जिनका पता लगाकर मापन किया जाता है:

    ​A. विद्युत मापन (Electrical Measurement)

    ​यह सबसे आम प्रयोगशाला और फील्ड विधि है।

    • सिद्धांत: PD घटना विद्युत सर्किट में बहुत छोटे, तेज करंट स्पंद (pulses) उत्पन्न करती है।
    • प्रक्रिया: एक विशेष युग्मन संधारित्र (Coupling Capacitor) और एक PD डिटेक्टर का उपयोग करके इन स्पंदों को मापा जाता है। परिणाम को आमतौर पर पिको-कूलम्ब (pico-coulombs - pC) में व्यक्त किया जाता है।

    ​B. अल्ट्रासोनिक/ध्वनिक मापन (Ultrasonic/Acoustic Measurement)

    • सिद्धांत: जब PD होता है, तो यह अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है।
    • प्रक्रिया: एक अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर (सेंसर) का उपयोग करके इन उच्च-आवृत्ति ध्वनियों का पता लगाया जाता है। यह विधि SF6 गैस वाले ब्रेकरों में बाहरी मापन के लिए बहुत उपयोगी है।

    ​C. UHF मापन (Ultra High Frequency Measurement)

    • सिद्धांत: SF6 गैस इंसुलेटेड ब्रेकरों में PD बहुत उच्च आवृत्ति वाली विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न करता है।
    • प्रक्रिया: ब्रेकर के अंदर स्थापित या बाहरी रूप से लगाए गए UHF सेंसर इन तरंगों का पता लगाते हैं। यह विधि बाहरी विद्युत हस्तक्षेप (interference) से कम प्रभावित होती है।

    ​4. स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria)

    ​PD का स्तर उपकरण के प्रकार, वोल्टेज रेटिंग और परीक्षण के मानक (IEC या IEEE) पर निर्भर करता है।

    • नया उपकरण (Type Test): नए ब्रेकरों के लिए, PD का स्तर शून्य या बहुत कम होना चाहिए (आमतौर पर 5 pC से 10 pC से कम)।
    • सेवा में उपकरण (Field Test): सेवा में मौजूद ब्रेकरों के लिए, यदि PD का स्तर बढ़ रहा है या किसी विशिष्ट थ्रेशोल्ड (Threshold) (जैसे 50 pC) को पार कर जाता है, तो यह रखरखाव या गहन जाँच का संकेत होता है।

    ​आंशिक डिस्चार्ज परीक्षण विद्युत उपकरणों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो अचानक विफलता के जोखिम को कम करता है और बिजली प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाता है।





    थर्मोग्राफी परीक्षण

    थर्मोग्राफी परीक्षण (Thermography Test), जिसे इन्फ्रारेड (Infrared) इमेजिंग या थर्मल इमेजिंग भी कहा जाता है, एक गैर-संपर्क (Non-Contact) और गैर-विनाशकारी (Non-Destructive) नैदानिक परीक्षण विधि है। यह सर्किट ब्रेकर सहित विद्युत उपकरणों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

    ​यह परीक्षण मुख्य रूप से असामान्य ताप (excessive heat) का पता लगाने पर केंद्रित है, जो विद्युत प्रणाली में उच्च प्रतिरोध या अन्य दोषों का एक महत्वपूर्ण संकेत है।

     थर्मोग्राफी परीक्षण (Thermography Test)

    ​1. उद्देश्य (Objective)

    ​थर्मोग्राफी का मुख्य उद्देश्य किसी उपकरण पर तापमान के वितरण को मापना और दृश्य रूप से प्रस्तुत करना है ताकि असामान्य रूप से गर्म स्थानों (Hotspots) की पहचान की जा सके।

    • उच्च प्रतिरोध का पता लगाना: उच्च तापमान का मुख्य कारण उच्च संपर्क प्रतिरोध (High Contact Resistance) होता है, जो ढीले कनेक्शन, दूषित संपर्क सतहों, या घटकों के अत्यधिक घिसाव के कारण उत्पन्न होता है ({Heat} propto I^2R)।
    • प्रारंभिक चेतावनी: हॉटस्पॉट अक्सर गंभीर विफलता (जैसे आग या विस्फोट) होने से पहले एक प्रारंभिक चेतावनी संकेत देते हैं।
    • लोड संतुलन: तीन-फेज प्रणालियों में, यह जाँचने के लिए कि क्या किसी एक फेज़ पर अत्यधिक करंट (ओवरलोड) बह रहा है, जिससे असमान हीटिंग हो रही है।
    • निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance): दोष को तब ठीक करना जब वह केवल एक हॉटस्पॉट हो, पूर्ण विफलता होने से पहले।

    ​2. उपकरण (Equipment)

    ​परीक्षण एक विशेष कैमरे का उपयोग करके किया जाता है जिसे इन्फ्रारेड कैमरा (Infrared Camera) या थर्मल इमेजर (Thermal Imager) कहा जाता है।

    • ​यह कैमरा इन्फ्रारेड ऊर्जा (Infrared Energy) (जिसे ऊष्मा के रूप में उत्सर्जित किया जाता है) को मापता है और इसे एक दृश्यमान रंगीन छवि में परिवर्तित करता है, जहाँ विभिन्न रंग अलग-अलग तापमान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
      • हल्के या सफेद/पीले रंग आमतौर पर उच्च तापमान (हॉटस्पॉट) दर्शाते हैं।
      • गहरे या नीले रंग कम तापमान वाले क्षेत्रों को दर्शाते हैं।

    ​3. परीक्षण प्रक्रिया (Procedure)

    1. लोड पर संचालन: थर्मोग्राफी परीक्षण तभी प्रभावी होता है जब सर्किट ब्रेकर सामान्य या पूर्ण लोड करंट वहन कर रहा हो। बिना लोड के कोई ऊष्मा उत्पन्न नहीं होगी।
    2. स्कैनिंग: तकनीशियन ब्रेकर और उसके आसपास के कनेक्शनों को एक उचित दूरी से स्कैन करता है।
    3. डाटा रिकॉर्डिंग: थर्मल छवियाँ रिकॉर्ड की जाती हैं और ब्रेकर के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर तापमान रीडिंग ली जाती हैं।
    4. तुलना और विश्लेषण: मापे गए तापमान की तुलना निम्नलिखित से की जाती है:
      • ​समान लोड ले जाने वाले स्वस्थ घटकों का तापमान।
      • ​आसपास के परिवेश का तापमान (T_{ambient})।
      • ​विनिर्माण मानक द्वारा अनुमत अधिकतम तापमान।

    ​4. स्वीकार्यता मानदंड (Acceptance Criteria)

    ​आमतौर पर, तापमान अंतर के आधार पर दोषों का मूल्यांकन किया जाता है।

    तापमान अंतर ( Delta T)

    विफलता का स्तर

    अनुशंसित कार्रवाई

    Delta T  le 10^circ C

    मामूली विसंगति

    अगली बार निरीक्षण तक निगरानी जारी रखें।

    10^circ C < Delta T  le 20^circ C

    मध्यम समस्या

    जल्द से जल्द रखरखाव का समय निर्धारित करें।

    Delta T > 20^circ C

    गंभीर समस्या

    तत्काल कार्रवाई या ब्रेकर को ऑफ़लाइन लेकर मरम्मत करें।

    यह परीक्षण ब्रेकर के आंतरिक घटकों जैसे कि टर्मिनलों, बुशिंग्स, मुख्य संपर्कों, और बसबार कनेक्शन के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए अत्यधिक प्रभावी है। चूंकि यह गैर-संपर्क है, इसे ब्रेकर को बंद किए बिना, सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।






    प्रकारवार ब्रेकर परीक्षण सारांश

    सर्किट ब्रेकर परीक्षणों का प्रकारवार सारांश, उनके उद्देश्य और निष्पादन के चरण के आधार पर, यहाँ दिया गया है:

    ​सर्किट ब्रेकर परीक्षण सारांश (Summary of Circuit Breaker Tests)

    परीक्षण का प्रकार

    निष्पादन का चरण

    मुख्य उद्देश्य

    सामान्य मापन/जाँच

    I. प्रकार परीक्षण (Type Tests)

    निर्माता (शुरुआती डिज़ाइन)

    ब्रेकर डिज़ाइन की क्षमता और मानकों के अनुरूपता को सिद्ध करना।

    1. शॉर्ट-सर्किट ब्रेकिंग क्षमता

    प्रयोगशाला

    ब्रेकर की अधिकतम दोष करंट को सुरक्षित रूप से बाधित करने की क्षमता।

    I_{cu} (अल्टीमेट) और I_{cs} (सर्विस) क्षमता का सत्यापन।

    2. यांत्रिक सहनशक्ति

    प्रयोगशाला

    यांत्रिक तंत्र का स्थायित्व और दीर्घायु।

    लाखों ऑपरेशन चक्रों के बाद विफलता या घिसाव की जाँच।

    3. तापमान वृद्धि

    प्रयोगशाला

    रेटेड करंट पर अत्यधिक गरम हुए बिना लगातार वहन करने की क्षमता।

    विभिन्न भागों पर स्थिर तापमान वृद्धि (Delta T) मापन।

    4. डाइलेक्ट्रिक/आवेग परीक्षण

    प्रयोगशाला

    इंसुलेशन की बिजली/स्विचिंग ओवरवोल्टेज का सामना करने की क्षमता।

    उच्च AC/DC वोल्टेज और आवेग (Impulse) वोल्टेज सहनशीलता।

    II. नियमित परीक्षण (Routine Tests)

    निर्माता (प्रत्येक इकाई)

    उत्पादन गुणवत्ता और विनिर्देशों के अनुरूपता सुनिश्चित करना।

    1. संपर्क प्रतिरोध

    फैक्ट्री

    मुख्य संपर्कों के माध्यम से निम्न प्रतिरोध की पुष्टि।

    माइक्रो-ओम ( mu Omega) में प्रतिरोध मापन।

    2. इन्सुलेशन प्रतिरोध (मेगर)

    फैक्ट्री

    आंतरिक इन्सुलेशन की अखंडता (नमी/दोष)।

    {M} Omega या {G} Omega में प्रतिरोध मापन।

    3. सहायक परिपथ जाँच

    फैक्ट्री

    नियंत्रण, ट्रिपिंग और क्लोजिंग कॉइल की कार्यक्षमता।

    कॉइल प्रतिरोध और न्यूनतम पिक-अप वोल्टेज।

    4. मैकेनिकल परिचालन

    फैक्ट्री

    सीमित संख्या में चक्रों के लिए तंत्र की सुचारू कार्यप्रणाली।

    ओपन/क्लोज बटन द्वारा कार्यात्मक जाँच।

    III. कमीशनिंग परीक्षण (Field/Site Tests)

    इंस्टॉलेशन साइट

    परिवहन/स्थापना क्षति की जाँच और सेवा के लिए तैयारी।

    1. दृश्य/यांत्रिक जाँच

    साइट

    बाहरी क्षति, गैस/तेल रिसाव और सही इंस्टॉलेशन।

    टॉगल, कनेक्शन, और गैस दबाव की जाँच।

    2. संपर्क प्रतिरोध

    साइट

    बसबार और ब्रेकर टर्मिनलों पर ढीले कनेक्शन/उच्च प्रतिरोध।

    माइक्रो-ओम मापन की तुलना फैक्ट्री रीडिंग से।

    3. इन्सुलेशन प्रतिरोध

    साइट

    स्थापना के दौरान इन्सुलेशन का संदूषण (नमी/गंदगी)।

    मेगर द्वारा R-Y, Y-B, और पोल-से-ग्राउंड मापन।

    4. समय विश्लेषण

    साइट

    ब्रेकर के खुलने और बंद होने की गति और तुल्यकालन।

    मिलीसेकंड में ओपनिंग/क्लोजिंग समय और पोल स्पैन मापन।

    5. ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण

    साइट

    ट्रिप सर्किट की निरंतर तैयारी।

    TCS रिले सक्रियण और अलार्म की जाँच।

    IV. विशेष/उन्नत परीक्षण (Advanced Tests)

    निवारक रखरखाव/समस्या निवारण

    दोषों की गहन पहचान और इन्सुलेशन स्वास्थ्य का आकलन।

    1. गतिशील संपर्क प्रतिरोध (DCRM)

    साइट

    ब्रेकर के चलने के दौरान संपर्क प्रतिरोध की प्रोफ़ाइल।

    संपर्क घिसाव, आर्क संपर्क की स्थिति का विश्लेषण।

    2. आंशिक डिस्चार्ज (PD)

    साइट

    उच्च वोल्टेज इंसुलेशन में स्थानीय दोषों की प्रारंभिक चेतावनी।

    पिको-कूलम्ब (\text{pC}) में PD गतिविधि का मापन।

    3. थर्मोग्राफी

    साइट (लोड पर)

    लोड वहन के दौरान उच्च प्रतिरोध के कारण होने वाले हॉटस्पॉट।

    इन्फ्रारेड कैमरे से तापमान अंतर (\Delta T) का मापन।

    4. वैक्यूम बोतल अखंडता

    साइट

    वैक्यूम सर्किट ब्रेकरों में वैक्यूम लीक की जाँच।

    खुले संपर्कों के पार उच्च वोल्टेज लगाकर डाइलेक्ट्रिक विफलता की जाँच।



    यह सारांश सर्किट ब्रेकर की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जाने वाले विभिन्न परीक्षणों के पदानुक्रम को स्पष्ट करता है।





    सर्किट ब्रेकर टेस्टिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

    सर्किट ब्रेकर टेस्टिंग (Circuit Breaker Testing) विद्युत प्रणालियों के सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह किसी भी औद्योगिक, वाणिज्यिक या उपयोगिता-स्तर की बिजली प्रणाली की सुरक्षा की आधारशिला है।

    ​यहां प्रमुख कारण दिए गए हैं कि सर्किट ब्रेकर परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है:

    सर्किट ब्रेकर टेस्टिंग की महत्ता (Importance of Circuit Breaker Testing)

    ​1. सुरक्षा और संरक्षण (Safety and Protection)

    ​सर्किट ब्रेकर का प्राथमिक कार्य दोषों (Faults) जैसे कि शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) और ओवरलोड (Overload) के दौरान उपकरणों और मानव जीवन की रक्षा करना है।

    • दोषों का पृथक्करण (Fault Isolation): परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि दोष की स्थिति में ब्रेकर निर्धारित समय के भीतर खुलेगा और केवल दोषपूर्ण खंड को सिस्टम से अलग करेगा। यदि ब्रेकर विफल हो जाता है, तो दोष बाकी स्वस्थ उपकरणों में फैल सकता है, जिससे व्यापक क्षति हो सकती है।
    • आग और विस्फोट की रोकथाम: यदि ब्रेकर समय पर ट्रिप नहीं करता है, तो अत्यधिक करंट से उत्पन्न ऊष्मा से आग लग सकती है या ब्रेकर स्वयं विस्फोट कर सकता है। समय परीक्षण और ट्रिप सर्किट पर्यवेक्षण परीक्षण इस जोखिम को कम करते हैं।

    ​2. विश्वसनीयता और सेवा निरंतरता (Reliability and Service Continuity)

    ​बिजली प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने के लिए ब्रेकर का सही काम करना आवश्यक है।

    • झूठे ट्रिप से बचाव (Avoiding False Trips): परीक्षण, जैसे कि न्यूनतम पिक-अप वोल्टेज जाँच, यह सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर केवल आवश्यक होने पर ही ट्रिप हो, न कि वोल्टेज में मामूली उतार-चढ़ाव या अन्य गैर-दोष स्थितियों पर, जिससे अनावश्यक बिजली कटौती से बचा जा सके।
    • तत्काल बहाली (Quick Restoration): यदि ब्रेकर ठीक से काम कर रहा है, तो दोष को तेज़ी से दूर किया जा सकता है, जिससे बिजली बहाली का समय (restoration time) कम हो जाता है और परिचालन लागत में कमी आती है।

    ​3. प्रदर्शन और दक्षता (Performance and Efficiency)

    ​परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि ब्रेकर उच्चतम दक्षता पर काम करे।

    • ऊर्जा हानि में कमी: संपर्क प्रतिरोध परीक्षण से यह पता चलता है कि क्या ब्रेकर के अंदर प्रतिरोध बढ़ गया है। उच्च प्रतिरोध ({I}^2 {R}) अधिक ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में बर्बाद करता है। थर्मोग्राफी परीक्षण और संपर्क प्रतिरोध परीक्षण इस समस्या को पहचानते हैं।
    • मानक अनुपालन: टेस्टिंग यह साबित करती है कि ब्रेकर राष्ट्रीय (जैसे BIS) और अंतर्राष्ट्रीय (जैसे IEC, IEEE) मानकों और विनिर्देशों के अनुरूप है, जो कानूनी और बीमा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    ​4. निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance)

    ​परीक्षण, उपकरणों की आसन्न विफलताओं का पूर्वानुमान लगाने में मदद करता है।

    • प्रारंभिक दोष पहचान: गतिशील संपर्क प्रतिरोध मापन (DCRM) और आंशिक डिस्चार्ज (PD) परीक्षण जैसे उन्नत परीक्षण, बड़ी विफलताएँ होने से पहले ही आंतरिक यांत्रिक घिसाव, कमजोर स्प्रिंग या इन्सुलेशन दोषों की पहचान कर लेते हैं।
    • मरम्मत का प्रबंधन: टेस्टिंग से प्राप्त डेटा रखरखाव कर्मियों को यह तय करने में मदद करता है कि कब और किस ब्रेकर को सर्विसिंग या बदलने की आवश्यकता है, जिससे महंगा आपातकालीन शटडाउन (emergency shutdown) रोका जा सकता है।

    संक्षेप में,

    सर्किट ब्रेकर टेस्टिंग एक निवेश है जो सुरक्षा, विश्वसनीयता, और दक्षता सुनिश्चित करके संभावित आपदाओं, महंगे उपकरणों के नुकसान और उत्पादन बंद होने से बचाता है।





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