बुचोलज़ रिले क्या है?
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बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) एक सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तेल से भरे बिजली ट्रांसफार्मर (Oil-filled power transformers) और रिएक्टरों में किया जाता है।
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यह एक गैस-संचालित (Gas-actuated) रिले है जो ट्रांसफार्मर के भीतर होने वाले आंतरिक दोषों (जैसे शॉर्ट सर्किट, इन्सुलेशन विफलता, या ओवरहीटिंग) से सुरक्षा प्रदान करता है।
बुचोलज़ रिले की मुख्य बातें:
- सुरक्षा का कार्य: यह ट्रांसफार्मर के अंदर उत्पन्न होने वाली किसी भी असामान्य स्थिति (दोष) का पता लगाता है।
- स्थिति: इसे ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंजर्वेटर टैंक (तेल जलाशय) को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है।
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कार्य प्रणाली:
- जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई छोटा दोष उत्पन्न होता है, तो तेल का अपघटन (decomposition) होता है और गैस के बुलबुले बनते हैं।
- ये बुलबुले बुचोलज़ रिले में जमा हो जाते हैं, जिससे रिले के ऊपरी हिस्से में लगा हुआ एक फ्लोट (float) नीचे जाता है और एक अलार्म बज जाता है (यानी, एक चेतावनी मिलती है)।
- यदि दोष बड़ा होता है, तो तेल का प्रवाह कंजर्वेटर टैंक की ओर तेज़ी से होता है। यह प्रवाह रिले में लगे दूसरे फ्लोट या फलक (vane) को सक्रिय करता है, जिससे तुरंत सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करने (यानी, ट्रांसफार्मर को बिजली के स्रोत से अलग करने) का संकेत मिलता है, जिससे बड़ी क्षति को रोका जा सकता है।
- उपयोग: यह आमतौर पर 500 kVA से अधिक रेटिंग वाले बड़े ट्रांसफार्मर में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि छोटे ट्रांसफार्मर के लिए यह आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होता है।
संक्षेप में,
बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर के स्वास्थ्य का "निगरानी" करता है और किसी भी आंतरिक खराबी की स्थिति में अलार्म बजाता है या ट्रांसफार्मर को तुरंत बंद कर देता है।
क्या आप बुचोलज़ रिले की कार्यप्रणाली (working principle) के बारे में और अधिक जानना चाहेंगे?
बुचोलज़ रिले की परिभाषा
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) की परिभाषा निम्नलिखित है:
बुचोलज़ रिले एक गैस और तेल-चालित सुरक्षा उपकरण है जिसे विशेष रूप से तेल से भरे बड़े बिजली ट्रांसफार्मर (Oil-filled power transformers) और रिएक्टरों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत परिभाषा
यह उपकरण ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंजर्वेटर टैंक (विस्तारक टैंक) को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है। इसका प्राथमिक कार्य ट्रांसफार्मर के भीतर होने वाले आंतरिक दोषों (Internal Faults) जैसे कि शॉर्ट सर्किट, इन्सुलेशन विफलता, या वाइंडिंग के अत्यधिक गर्म होने के कारण तेल के अपघटन (Decomposition) से उत्पन्न होने वाली गैसों और तेल के अचानक प्रवाह का पता लगाकर ट्रांसफार्मर को गंभीर क्षति से बचाना है।
यह दो चरणों में सुरक्षा प्रदान करता है:
- छोटा दोष (गैस संचय): धीरे-धीरे गैस जमा होने पर अलार्म सक्रिय करना।
- बड़ा दोष (तेल का तेज़ प्रवाह): बड़े दोष या आर्क बनने पर तेल के वेग के कारण तुरंत सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करके ट्रांसफार्मर को बिजली आपूर्ति से अलग करना।
बुचोलज़ रिले का निर्माण
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) की संरचना
बुचोलज़ रिले मूल रूप से एक तेल और गैस-चालित कंटेनर होता है जिसे ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंजर्वेटर टैंक (तेल जलाशय) के बीच की कनेक्टिंग पाइपलाइन में थोड़ा झुकाव (लगभग 3^\circ से 6^\circ) के साथ स्थापित किया जाता है।
मुख्य निर्माण भाग (Key Components)
बुचोलज़ रिले में मुख्य रूप से दो सक्रिय तत्व (दो अलग-अलग सुरक्षा चरण) होते हैं:
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ऊपरी तत्व (Upper Element) - अलार्म सर्किट के लिए
- फ्लोट (Float): यह एक खोखला, हल्का गोलाकार भाग होता है जो रिले कंटेनर में ट्रांसफार्मर के तेल की सतह पर तैरता रहता है।
- पारा स्विच (Mercury Switch): फ्लोट एक हिंज्ड आर्म (Hinged Arm) के माध्यम से एक पारा स्विच से जुड़ा होता है। सामान्य परिचालन में, तेल का स्तर ऊँचा होता है और फ्लोट ऊपर रहता है, जिससे पारा स्विच खुला रहता है।
- कार्य: जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई छोटा दोष (Minor Fault) होता है (जैसे वाइंडिंग का धीरे-धीरे गर्म होना), तो तेल के अपघटन से गैसें बनती हैं। ये गैसें रिले के ऊपरी भाग में जमा हो जाती हैं, जिससे तेल का स्तर गिर जाता है। फ्लोट नीचे चला जाता है, पारा स्विच को बंद कर देता है, और अलार्म बज जाता है।
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निचला तत्व (Lower Element) - ट्रिप सर्किट के लिए
- फ्लैप/वैन (Vane/Flap): यह रिले के निचले हिस्से में, तेल के प्रवाह मार्ग में, एक हिंज पर लगा होता है।
- पारा स्विच (Mercury Switch): यह फ्लैप से जुड़ा होता है। सामान्य स्थिति में, यह स्विच खुला रहता है।
- कार्य: जब ट्रांसफार्मर में कोई बड़ा दोष (Major Fault) होता है (जैसे गंभीर शॉर्ट सर्किट), तो बहुत तेज़ी से गैस बनती है, जिससे तेल अचानक मुख्य टैंक से कंजर्वेटर टैंक की ओर तेज गति से बहता है। तेल के इस तेज़ प्रवाह से फ्लैप धकेला जाता है, जो निचले पारा स्विच को बंद कर देता है, जिससे सर्किट ब्रेकर को ट्रिप होने का संकेत मिलता है और ट्रांसफार्मर तुरंत अलग हो जाता है।
अतिरिक्त भाग (Additional Parts)
- रिले कंटेनर (Relay Chamber): धातु का खोल जिसमें तेल और आंतरिक तंत्र होते हैं।
- गैस रिलीज़ कॉक (Gas Release Cock): यह रिले के शीर्ष पर स्थित होता है, जिसका उपयोग अलार्म बजने के बाद जमा हुई गैस के नमूने लेने या गैस को निकालने के लिए किया जाता है।
- टेस्ट कॉक (Test Cock): यह निचला कॉक है जिसका उपयोग रिले के ट्रिप तंत्र का परीक्षण करने के लिए किया जा सकता है।
बुचोलज़ रिले का कार्य सिद्धांत
बुचोलज़ रिले का कार्य सिद्धांत गैस और तेल के विस्थापन पर आधारित है, जो ट्रांसफार्मर के भीतर होने वाले आंतरिक दोषों के कारण उत्पन्न होते हैं। यह दोहरे-सुरक्षा तंत्र (Double-Protection Mechanism) पर काम करता है—एक छोटे दोष के लिए अलार्म और एक बड़े दोष के लिए ट्रिपिंग।
कार्य सिद्धांत (Working Principle)
बुचोलज़ रिले दो प्रमुख दोषों का पता लगाने के लिए दो अलग-अलग तत्वों का उपयोग करता है:
1. धीमी गति से विकसित होने वाले दोष (Small Faults - Alarm System)
- दोष का प्रकार: वाइंडिंग का हल्का ओवरहीटिंग, इन्सुलेशन का मामूली खराब होना, या कोर हीटिंग जैसे छोटे दोष।
- प्रतिक्रिया: इन दोषों के कारण ट्रांसफार्मर तेल (Transformer Oil) धीरे-धीरे विघटित होता है और ज्वलनशील गैसें (जैसे हाइड्रोजन, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड) पैदा होती हैं।
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क्रिया:
- ये गैसें, तेल से हल्की होने के कारण, ऊपर उठती हैं और रिले कंटेनर के शीर्ष भाग में जमा होने लगती हैं।
- गैसों के जमा होने से रिले के अंदर तेल का स्तर गिर जाता है।
- जब तेल का स्तर एक निश्चित बिंदु से नीचे आता है, तो ऊपरी भाग में लगा फ्लोट (Float) भी नीचे झुक जाता है।
- फ्लोट के नीचे झुकने से उससे जुड़ा पारा स्विच (Mercury Switch) बंद हो जाता है और एक अलार्म सर्किट सक्रिय हो जाता है।
- परिणाम: यह अलार्म ऑपरेटर को दोष की चेतावनी देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को बंद करके दोष की जाँच करने का समय मिल जाता है।
2. तेज़ी से विकसित होने वाले दोष (Major Faults - Trip System)
- दोष का प्रकार: गंभीर शॉर्ट सर्किट, आर्क फॉल्ट, या ज़बरदस्त अर्थ फॉल्ट जैसे बड़े और विनाशकारी दोष।
- प्रतिक्रिया: ये दोष बहुत अधिक ऊष्मा (Heat) उत्पन्न करते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में गैसें तेज़ी से बनती हैं और तेल वाष्पीकृत होता है, जिसके परिणामस्वरूप तेल का दबाव अचानक बढ़ जाता है।
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क्रिया:
- बढ़े हुए दबाव के कारण ट्रांसफार्मर का तेल मुख्य टैंक से कंजर्वेटर टैंक की ओर तेज गति से प्रवाहित होता है।
- यह तीव्र प्रवाह रिले के निचले हिस्से में लगे फ्लैप (Vane/Flap) से टकराता है।
- तेल के बल से फ्लैप धकेला जाता है, जो उससे जुड़े दूसरे पारा स्विच को बंद कर देता है।
- परिणाम: यह स्विच सीधे सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) को ट्रिप (Trip) होने का संकेत देता है, और ट्रांसफार्मर को तुरंत बिजली आपूर्ति से अलग कर दिया जाता है, जिससे महंगे उपकरण को विनाशकारी क्षति से बचाया जा सके।
संक्षेप में,
बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर के अंदर उत्पन्न होने वाली असामान्य गैस और असामान्य तेल प्रवाह दोनों पर प्रतिक्रिया करता है, जिससे यह ट्रांसफार्मर के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और विश्वसनीय सुरक्षा उपकरण बन जाता है।
बुचोलज़ रिले में गैस संचय क्या है?
बुचोलज़ रिले में गैस संचय ट्रांसफार्मर के भीतर एक आंतरिक दोष (Internal Fault) का प्राथमिक संकेत होता है। यह घटना ट्रांसफार्मर को गंभीर क्षति होने से पहले शुरुआती चेतावनी देने के लिए बुचोलज़ रिले के कार्य सिद्धांत का मुख्य आधार है।
गैस संचय का कारण और प्रक्रिया
गैस संचय तब होता है जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई छोटा या क्रमिक रूप से विकसित होने वाला दोष (Incipient Fault) उत्पन्न होता है।
1. दोष और ऊष्मा उत्पादन
- जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई दोष होता है (जैसे वाइंडिंग में हल्का ओवरहीटिंग, इन्सुलेशन का धीरे-धीरे टूटना, या कोर हीटिंग), तो दोष धाराओं के कारण अत्यधिक ऊष्मा (Heat) उत्पन्न होती है।
2. तेल का अपघटन (Decomposition of Oil)
- यह ऊष्मा ट्रांसफार्मर में भरे इंसुलेटिंग तेल (Transformer Oil) को विघटित (decompose) कर देती है।
- तेल के इस थर्मल अपघटन के परिणामस्वरूप विभिन्न ज्वलनशील गैसें (Flammable Gases) बनती हैं, जिनमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन (Hydrogen) की मात्रा अधिक होती है, साथ ही मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें भी होती हैं।
3. गैस का ऊपर उठना और फंसना
- ये गैसें तेल से बहुत हल्की होती हैं, इसलिए वे बुलबुलों के रूप में ऊपर की दिशा में उठती हैं।
- ये बुलबुले मुख्य टैंक से कंजर्वेटर टैंक की ओर जाने की कोशिश करते हैं।
- बुचोलज़ रिले मुख्य टैंक और कंजर्वेटर टैंक के बीच की पाइपलाइन में स्थापित होता है। इस रिले की संरचना ऐसी होती है कि यह इन गैस बुलबुलों को अपने ऊपरी भाग में फँसा लेता है (Trap)।
4. तेल स्तर में गिरावट और अलार्म
- जैसे-जैसे रिले के शीर्ष पर गैसें जमा होती जाती हैं, वे रिले के अंदर के तेल को नीचे की ओर विस्थापित (Displace) करती हैं।
- तेल का स्तर गिरने पर, ऊपरी भाग में लगा फ्लोट (Float) नीचे झुक जाता है।
- फ्लोट के नीचे झुकने से उससे जुड़ा मरकरी स्विच (Mercury Switch) बंद हो जाता है और अलार्म सर्किट सक्रिय हो जाता है, जो ऑपरेटर को चेतावनी देता है कि ट्रांसफार्मर के अंदर कोई समस्या विकसित हो रही है।
निष्कर्ष:
बुचोलज़ रिले में गैस संचय, ट्रांसफार्मर के इंसुलेशन सिस्टम की विफलता या असामान्य हीटिंग का पहला और सबसे महत्वपूर्ण संकेत है, जो समय पर निवारक कार्रवाई की अनुमति देता है।
बुचोलज़ रिले में तेल उछाल क्या है?
निश्चित रूप से। बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) में तेल उछाल (Oil Surge) एक महत्वपूर्ण घटना है जो गंभीर आंतरिक खराबी (severe internal fault) को इंगित करती है।
बुचोलज़ रिले तेल से भरे पावर ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण है। यह ट्रांसफॉर्मर के मुख्य टैंक और ऊपरी तेल भंडार (कंजर्वेटर टैंक) को जोड़ने वाली पाइपलाइन पर लगाया जाता है।
तेल उछाल का मतलब और क्रियाविधि (Meaning and Mechanism of Oil Surge):
- गंभीर खराबी (Severe Fault): जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर एक बड़ा दोष (जैसे वाइंडिंग में शॉर्ट सर्किट या अर्थ फॉल्ट) होता है, तो उत्पन्न होने वाली अत्यधिक ऊष्मा (excessive heat) ट्रांसफॉर्मर तेल को तेजी से वाष्पीकृत (rapidly vaporize) करती है और बड़ी मात्रा में गैस उत्पन्न करती है।
- दबाव की लहर (Pressure Wave): गैस का यह अचानक और भारी निर्माण (sudden and massive build-up) ट्रांसफॉर्मर के मुख्य टैंक के अंदर एक दबाव की लहर पैदा करता है।
- तेल का विस्थापन (Oil Displacement): इस दबाव के कारण, तेल अत्यधिक तेज़ी से और ज़ोर से बुचोलज़ रिले के माध्यम से कंजर्वेटर टैंक की ओर विस्थापित (displaced) होता है। तेल के इस तीव्र प्रवाह को ही तेल उछाल (Oil Surge) कहते हैं।
- ट्रिपिंग क्रिया (Tripping Action): बुचोलज़ रिले में, तेल के रास्ते में एक फलक (Vane) या निचला फ्लोट स्विच (Lower float switch) लगा होता है। यह तीव्र तेल उछाल इस फलक से टकराता है या निचले फ्लोट को हिलाता है, जिससे तुरंत ट्रिप सर्किट सक्रिय हो जाता है।
- ट्रांसफॉर्मर का अलगाव (Transformer Isolation): ट्रिप सर्किट ट्रांसफॉर्मर को बिजली की आपूर्ति से तुरंत अलग (isolate) कर देता है (सर्किट ब्रेकर को ट्रिप करके)। यह कार्रवाई गंभीर खराबी को और अधिक नुकसान पहुँचाने से पहले ही रोक देती है।
संक्षेप में:
- सामान्य दोष (Minor Fault): गैस के धीमे संचय (slow accumulation) से ऊपरी फ्लोट सक्रिय होता है और अलार्म बजता है।
- गंभीर दोष (Major Fault/Oil Surge): तेल के तेज़ बहाव (rapid flow) या उछाल से निचला फ्लोट/फलक सक्रिय होता है और ट्रांसफॉर्मर ट्रिप हो जाता है।
यह तेल उछाल तंत्र बुचोलज़ रिले को तेज प्रतिक्रिया (fast response) देने में सक्षम बनाता है, जो बड़े और विनाशकारी दोषों से ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
बुचोलज़ रिले का कार्य?
निश्चित रूप से। बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) का मुख्य कार्य तेल से भरे ट्रांसफॉर्मर को उसके आंतरिक दोषों (Internal Faults) से बचाना और प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning) देना है।
यह एक गैस-संचालित (Gas-actuated) सुरक्षा उपकरण है जो ट्रांसफॉर्मर के मुख्य टैंक और ऊपरी तेल भंडार (कंजर्वेटर टैंक) को जोड़ने वाली पाइपलाइन पर स्थापित होता है।
बुचोलज़ रिले के मुख्य कार्य (Main Functions of Buchholz Relay)
बुचोलज़ रिले दो प्रमुख दोष स्थितियों का पता लगाकर ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा करता है:
1. प्रारंभिक या छोटे दोषों का पता लगाना (Detecting Incipient/Minor Faults):
- खराबी (Faults): यह इंसुलेशन की मामूली विफलता (minor insulation failure), कोर का ज़्यादा गरम होना (core overheating) या वाइंडिंग के बीच छोटे शॉर्ट सर्किट जैसे प्रारंभिक दोषों का पता लगाता है।
- क्रियाविधि (Mechanism): जब ये छोटे दोष होते हैं, तो उत्पन्न गर्मी ट्रांसफॉर्मर तेल को धीरे-धीरे विघटित (decompose) करती है, जिससे ज्वलनशील गैस के छोटे बुलबुले (जैसे हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड) बनते हैं।
- परिणाम (Result): ये गैस के बुलबुले रिले के ऊपरी हिस्से में जमा हो जाते हैं। जब गैस की मात्रा एक निश्चित स्तर तक पहुँच जाती है, तो ऊपरी फ्लोट स्विच (Upper Float Switch) नीचे की ओर झुकता है, जिससे एक अलार्म सर्किट सक्रिय हो जाता है।
- उद्देश्य: यह ऑपरेटर को चेतावनी देता है कि ट्रांसफॉर्मर में कोई समस्या शुरू हो रही है, जिससे बड़ा नुकसान होने से पहले सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
2. गंभीर दोषों का पता लगाना (Detecting Severe Faults):
- खराबी (Faults): यह वाइंडिंग में इंटर-टर्न शॉर्ट सर्किट या अर्थ फॉल्ट जैसे बड़े शॉर्ट सर्किट दोषों का पता लगाता है।
- क्रियाविधि (Mechanism): गंभीर दोष के कारण अत्यधिक और अचानक गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे तेल तेजी से वाष्पीकृत होकर भारी मात्रा में गैस और एक तेज़ दबाव की लहर (pressure wave) बनाता है जिसे तेल उछाल (Oil Surge) कहते हैं।
- परिणाम (Result): तेल का यह तीव्र प्रवाह रिले के निचले हिस्से में लगे फ्लैप या निचले फ्लोट स्विच (Lower Float Switch) को हिलाता है, जिससे ट्रिप सर्किट सक्रिय हो जाता है।
- उद्देश्य: ट्रिप सर्किट तुरंत सर्किट ब्रेकर को संकेत भेजकर ट्रांसफॉर्मर को बिजली की आपूर्ति से अलग (isolate) कर देता है, जिससे उपकरण विनाशकारी क्षति से बच जाता है।
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दोष की प्रकृति
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पता लगाने का तरीका
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सक्रिय होने वाला घटक
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अंतिम कार्रवाई
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छोटा/प्रारंभिक
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तेल का धीरे-धीरे विघटन, गैस संचय।
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ऊपरी फ्लोट (Upper Float)
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अलार्म (Alarm)
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गंभीर/बड़ा
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अत्यधिक गर्मी के कारण तेल उछाल (Oil Surge)।
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निचला फ्लोट/फ्लैप (Lower Float/Vane)
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ट्रिप (Trip) / ट्रांसफॉर्मर को अलग करना
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बुचोलज़ रिले आंतरिक दोषों के लिए सबसे विश्वसनीय और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों में से एक है।
बुचोलज़ रिले के अनुप्रयोग?
निश्चित रूप से। बुचोलज़ रिले एक अत्यंत विशिष्ट और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, और इसके अनुप्रयोग मुख्य रूप से एक ही प्रकार के विद्युत उपकरण तक सीमित हैं।
बुचोलज़ रिले के अनुप्रयोग (Applications of Buchholz Relay)
बुचोलज़ रिले का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरणों को आंतरिक दोषों से बचाने के लिए किया जाता है:
1. तेल से भरे हुए पावर ट्रांसफॉर्मर (Oil-filled Power Transformers)
- मुख्य अनुप्रयोग: यह बुचोलज़ रिले का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक अनुप्रयोग है।
- स्थिति: इसका उपयोग उन ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा के लिए किया जाता है जिनमें मुख्य टैंक और तेल भंडार (कंजर्वेटर टैंक) के बीच तेल का विस्तार होता है। रिले को इन दोनों टैंकों को जोड़ने वाली पाइपलाइन में लगाया जाता है।
- रेटिंग की सीमा: आर्थिक विचारों के कारण, बुचोलज़ रिले का उपयोग आमतौर पर 500 kVA (किलोवोल्ट एम्पीयर) से अधिक रेटिंग वाले बड़े ट्रांसफॉर्मर में किया जाता है (हालांकि यह सीमा अलग-अलग मानकों के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है)। छोटे वितरण ट्रांसफॉर्मर (Distribution Transformers) में इसे अक्सर आर्थिक रूप से आवश्यक नहीं माना जाता है, और उनकी सुरक्षा के लिए अन्य सरल विधियों (जैसे फ्यूज) का उपयोग किया जाता है।
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सुरक्षित दोष: यह ट्रांसफॉर्मर के भीतर होने वाले लगभग सभी आंतरिक दोषों (Internal Faults) का पता लगाता है, जैसे:
- कोर दोष (Core Faults)
- वाइंडिंग में शॉर्ट सर्किट दोष (Winding Short-circuit Faults)
- इंसुलेशन की विफलता (Insulation Failure)
- तेल का स्तर कम होना (Low Oil Level)
- वाइंडिंग में इंटर-टर्न फॉल्ट (Inter-turn Faults)
2. तेल से भरे हुए शंट रिएक्टर (Oil-filled Shunt Reactors)
- अनुप्रयोग: ट्रांसमिशन लाइनों में उपयोग किए जाने वाले बड़े तेल से भरे शंट रिएक्टरों की सुरक्षा के लिए भी बुचोलज़ रिले का उपयोग किया जाता है।
- कारण: इन रिएक्टरों में भी एक मुख्य टैंक और एक कंजर्वेटर टैंक होता है, और ट्रांसफॉर्मर की तरह ही, आंतरिक दोष उत्पन्न होने पर ये तेल का अपघटन (Decomposition of oil) करते हैं और गैस उत्पन्न करते हैं। बुचोलज़ रिले इस गैस और तेल उछाल का पता लगाकर रिएक्टर को सुरक्षा प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaway):
बुचोलज़ रिले एक गैस-सक्रिय (Gas-actuated) सुरक्षा उपकरण है। इसका अनुप्रयोग केवल उन्हीं बड़े विद्युत उपकरणों तक सीमित है:
- जो तेल से भरे होते हैं (ताकि दोष होने पर गैस उत्पन्न हो सके)।
- जिनमें कंजर्वेटर टैंक (तेल भंडार) होता है (ताकि रिले को उनके बीच की पाइपलाइन में स्थापित किया जा सके)।
बुचोलज़ रिले किसके बीच स्थापित किया जाता है?
निश्चित रूप से। बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) की स्थापना की स्थिति इसकी कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बुचोलज़ रिले तेल से भरे ट्रांसफॉर्मर में निम्नलिखित दो मुख्य भागों के बीच स्थापित किया जाता है:
- मुख्य टैंक (Main Tank): यह ट्रांसफॉर्मर का मुख्य शरीर है जिसमें कोर और वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर तेल (Insulating Oil) में डूबे होते हैं।
- संरक्षक टैंक (Conservator Tank): यह ट्रांसफॉर्मर के ऊपर लगा हुआ तेल भंडार (Oil Reservoir) है, जो तेल के विस्तार और संकुचन (Expansion and Contraction) को समायोजित करता है।
स्थापना की सटीक स्थिति (Exact Installation Location)
बुचोलज़ रिले को मुख्य टैंक और कंजर्वेटर टैंक को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है।
प्रमुख बिंदु:
- जुड़ाव: रिले को इस पाइपलाइन के साथ इस तरह से जोड़ा जाता है कि तेल का प्रवाह मुख्य टैंक से कंजर्वेटर टैंक की ओर होते समय सबसे पहले रिले से होकर गुज़रे।
- ढलान (Slope): रिले को हमेशा क्षैतिज से थोड़ा झुकाव (लगभग 9° से 11° का कोण) पर स्थापित किया जाता है, जिसमें रिले का सिरा मुख्य टैंक की ओर थोड़ा नीचे की ओर झुका होता है।
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उद्देश्य: यह झुकाव (Slope) सुनिश्चित करता है कि:
- आंतरिक दोषों से उत्पन्न हुई गैस के बुलबुले आसानी से ऊपर की ओर उठकर रिले के चेंबर में जमा हो सकें (क्योंकि गैस तेल से हल्की होती है)।
- तेल उछाल (Oil Surge) के समय तेल का प्रवाह रिले के निचले हिस्से में लगे फ्लैप को सक्रिय कर सके।
यह स्थान रिले को ट्रांसफॉर्मर के अंदर होने वाले किसी भी दोष (जैसे गैस का धीमा संचय या अचानक तेल उछाल) को तुरंत महसूस करने की अनुमति देता है, जिससे समय पर अलार्म या ट्रिपिंग क्रिया शुरू की जा सके।
बुचोलज़ रिले किस पर आधारित है?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) मुख्य रूप से दो सिद्धांतों पर आधारित है, जिनका उपयोग तेल से भरे ट्रांसफॉर्मर के आंतरिक दोषों (Internal Faults) का पता लगाने के लिए किया जाता है:
1. गैस संचय सिद्धांत (Gas Accumulation Principle)
यह सिद्धांत छोटे या प्रारंभिक दोषों (Minor or Incipient Faults) का पता लगाता है।
- आधार: जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई छोटा दोष (जैसे इन्सुलेशन की मामूली खराबी या कोर ज़्यादा गरम होना) होता है, तो उत्पन्न ऊष्मा ट्रांसफॉर्मर के तेल (इंसुलेटिंग ऑयल) को विघटित (decompose) करती है।
- परिणाम: इस अपघटन के कारण गैस के बुलबुले (जैसे हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड) बनते हैं।
- कार्यविधि: चूँकि ये गैसें तेल से हल्की होती हैं, इसलिए वे ऊपर की ओर उठती हैं और बुचोलज़ रिले के ऊपरी हिस्से में जमा हो जाती हैं। गैस के जमा होने से रिले में तेल का स्तर गिर जाता है।
- क्रिया: तेल का स्तर गिरने पर, ऊपरी फ्लोट स्विच (Upper Float) नीचे झुकता है और अलार्म सर्किट को सक्रिय कर देता है।
2. तेल प्रवाह/उछाल सिद्धांत (Oil Flow/Surge Principle)
यह सिद्धांत गंभीर या बड़े दोषों (Severe or Major Faults) का पता लगाता है।
- आधार: जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई बड़ा दोष (जैसे भारी शॉर्ट सर्किट) होता है, तो उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा तेल को तेजी से वाष्पीकृत करती है और एक बड़ा दबाव लहर (Pressure Wave) उत्पन्न करती है।
- परिणाम: इस दबाव के कारण, तेल अचानक और तेज़ी से मुख्य टैंक से कंजर्वेटर टैंक की ओर विस्थापित होता है—जिसे तेल उछाल (Oil Surge) कहा जाता है।
- कार्यविधि: तेल का यह तीव्र प्रवाह रिले के निचले हिस्से में लगे फ्लैप (Vane) या निचले फ्लोट स्विच से टकराता है।
- क्रिया: यह फ्लैप तुरंत ट्रिप सर्किट को सक्रिय कर देता है, जो ट्रांसफॉर्मर को बिजली की आपूर्ति से अलग (isolate) कर देता है।
संक्षेप में,
बुचोलज़ रिले एक गैस-प्रेरित (Gas-Actuated) और तेल प्रवाह-प्रेरित (Oil Flow-Actuated) रिले है, जो ट्रांसफॉर्मर को आंतरिक क्षति से बचाने के लिए दोनों सिद्धांतों पर काम करता है।
कौन सा दोष बुचोलज़ रिले द्वारा नहीं पकड़ा जा सकता है?
बुचोलज़ रिले एक उत्कृष्ट सुरक्षा उपकरण है, लेकिन यह सभी प्रकार के ट्रांसफॉर्मर दोषों का पता नहीं लगा सकता है।
बुचोलज़ रिले द्वारा मुख्य रूप से बाहरी दोषों (External Faults) को नहीं पकड़ा जा सकता है।
बुचोलज़ रिले द्वारा न पकड़े जाने वाले दोष (Faults Not Detected by Buchholz Relay)
बुचोलज़ रिले आंतरिक दोषों (Internal Faults) के लिए डिज़ाइन किया गया है जो ट्रांसफॉर्मर तेल को गर्म करते हैं या उसमें दबाव डालते हैं। यह निम्नलिखित प्रमुख दोषों को नहीं पकड़ सकता है:
1. बाहरी दोष (External Faults)
ये वे दोष हैं जो ट्रांसफॉर्मर के बाहर होते हैं, लेकिन ट्रांसफॉर्मर के टर्मिनल (Terminals) से जुड़े होते हैं, जैसे:
- बस-बार दोष (Bus-bar Faults): सबस्टेशन के बस-बार में शॉर्ट सर्किट।
- लाइन-टू-अर्थ या लाइन-टू-लाइन दोष (Line-to-Earth or Line-to-Line Faults): ट्रांसमिशन लाइनों पर होने वाले शॉर्ट सर्किट।
- केबल दोष (Cable Faults): ट्रांसफॉर्मर से जुड़ी आउटगोइंग केबलों में खराबी।
कारण: ये दोष ट्रांसफॉर्मर के तेल के भीतर कोई गैस उत्पन्न नहीं करते हैं और न ही तेल उछाल (Oil Surge) पैदा करते हैं। इन दोषों से ट्रांसफॉर्मर की रक्षा के लिए अंतर रिले (Differential Relay) और अतिधारा रिले (Overcurrent Relay) जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
2. टैप-चेंजर की विफलता (Tap-Changer Failures)
- यांत्रिक विफलताएं: ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC) की गियरिंग या ड्राइविंग तंत्र में पूरी तरह से यांत्रिक विफलता जो तेल के अपघटन (Decomposition) का कारण नहीं बनती है।
3. बाहरी टर्मिनल फ्लैशओवर (External Terminal Flashovers)
- ट्रांसफॉर्मर के बुशिंग (Bushings) के बाहरी सिरे पर होने वाला फ्लैशओवर, जो ट्रांसफॉर्मर के आंतरिक टैंक में कोई प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करता है।
सारांश (Summary):
बुचोलज़ रिले की सीमा यह है कि यह केवल तेल-आधारित प्रतिक्रियाओं (Oil-based reactions) (गैस निर्माण या तेल प्रवाह) पर ही काम करता है। कोई भी दोष जो ट्रांसफॉर्मर के टैंक के बाहर होता है या जो तेल में पर्याप्त गर्मी/दबाव उत्पन्न नहीं करता है, वह बुचोलज़ रिले द्वारा नहीं पकड़ा जाएगा।
बुचोलज़ रिले द्वारा किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान की जाती है?
बुचोलज़ रिले द्वारा मुख्य रूप से तेल से भरे ट्रांसफॉर्मर को आंतरिक दोषों (Internal Faults) से सुरक्षा प्रदान की जाती है। यह दो प्राथमिक प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है: अलार्म (चेतावनी) और ट्रिपिंग (स्वतः अलगाव)।
बुचोलज़ रिले द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा के प्रकार
बुचोलज़ रिले आंतरिक खराबी की गंभीरता के आधार पर दो-चरणीय सुरक्षा प्रदान करता है:
1. अलार्म सुरक्षा (Alarm Protection - शुरुआती दोषों के लिए)
यह सुरक्षा तब सक्रिय होती है जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई छोटा, प्रारंभिक दोष (Incipient Fault) शुरू होता है।
- खराबी का प्रकार: छोटे दोष, जैसे मामूली ओवरहीटिंग (overheating), इन्सुलेशन का मामूली टूटना, या तेल का धीमा रिसाव।
- कार्यविधि: ये दोष तेल का धीमा अपघटन करते हैं, जिससे गैस के बुलबुले धीरे-धीरे जमा होते हैं। गैस के कारण रिले में तेल का स्तर गिरता है और ऊपरी फ्लोट (Upper Float) सक्रिय हो जाता है।
- परिणाम: यह तुरंत अलार्म बजाता है या नियंत्रण कक्ष में एक संकेत भेजता है।
- उद्देश्य: यह सुरक्षा ऑपरेटर को चेतावनी देती है कि ट्रांसफॉर्मर में समस्या शुरू हो गई है, जिससे वे बड़ा नुकसान होने से पहले ट्रांसफॉर्मर की जाँच कर सकें और उसे सर्विस से हटा सकें।
2. ट्रिपिंग सुरक्षा (Tripping Protection - गंभीर दोषों के लिए)
यह सुरक्षा तब सक्रिय होती है जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई बड़ा, विनाशकारी दोष (Severe Fault) होता है।
- खराबी का प्रकार: गंभीर शॉर्ट सर्किट, वाइंडिंग में इंटर-टर्न फॉल्ट, या गंभीर अर्थ फॉल्ट।
- कार्यविधि: गंभीर दोष अचानक और अत्यधिक गर्मी पैदा करते हैं, जिसके कारण तेल तेज़ी से वाष्पीकृत होता है और एक तेल उछाल (Oil Surge) उत्पन्न करता है। तेल का यह तीव्र प्रवाह निचले फ्लोट/फ्लैप (Lower Float/Vane) को सक्रिय कर देता है।
- परिणाम: यह सुरक्षा ट्रांसफॉर्मर को बिजली की आपूर्ति से तुरंत अलग (isolate) करने के लिए सर्किट ब्रेकर को एक ट्रिप सिग्नल भेजती है।
- उद्देश्य: यह ट्रांसफॉर्मर को गंभीर, स्थायी क्षति से बचाता है और आग या विस्फोट जैसे खतरों को रोकता है।
निष्कर्ष
बुचोलज़ रिले ट्रांसफॉर्मर के लिए प्राथमिक सुरक्षा उपकरणों में से एक है, जो आंतरिक दोषों को उनकी शुरुआती अवस्था (अलार्म) में ही पकड़ने और गंभीर होने पर (ट्रिपिंग) तुरंत अलग करने में सक्षम है।
बुचोलज़ रिले के बारे में?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) तेल से भरे हुए बड़े ट्रांसफॉर्मर के लिए डिज़ाइन किया गया एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। यह ट्रांसफॉर्मर के भीतर होने वाले आंतरिक दोषों (Internal Faults) का पता लगाने और उनसे सुरक्षा प्रदान करने में अग्रणी है।
यहाँ बुचोलज़ रिले के बारे में मुख्य जानकारी दी गई है:
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay): एक सिंहावलोकन
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विशेषता
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विवरण
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प्रकार
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यह एक गैस और तेल-चालित (Gas and Oil-Actuated) सुरक्षा रिले है। इसे यांत्रिक रिले (Mechanical Relay) भी कहते हैं।
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मुख्य कार्य
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ट्रांसफॉर्मर के भीतर होने वाले आंतरिक दोषों (Internal Faults) से सुरक्षा प्रदान करना।
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उपयोग
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यह मुख्य रूप से 500 kVA से अधिक रेटिंग वाले तेल में डूबे हुए पावर ट्रांसफॉर्मर और शंट रिएक्टरों में उपयोग किया जाता है।
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स्थान
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इसे ट्रांसफॉर्मर के मुख्य टैंक (Main Tank) और तेल भंडार (Conservator Tank) को जोड़ने वाली पाइपलाइन पर स्थापित किया जाता है।
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आविष्कारक
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इसका आविष्कार मैक्स बुचोलज़ ने 1921 में किया था।
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कार्यप्रणाली (Working Principle)
बुचोलज़ रिले दो सिद्धांतों पर काम करता है, जो दोष की गंभीरता के आधार पर दो-चरणीय सुरक्षा प्रदान करते हैं:
1. छोटे दोष (Minor Faults) - अलार्म सुरक्षा
- सिद्धांत: गैस संचय (Gas Accumulation) पर आधारित।
- दोष: इन्सुलेशन की मामूली विफलता, कोर का ज़्यादा गरम होना, या आंशिक निर्वहन (partial discharge)।
- क्रिया: दोष से उत्पन्न ऊष्मा तेल को विघटित (decompose) करती है और गैस के बुलबुले बनाती है। ये बुलबुले रिले के ऊपरी हिस्से में जमा होते हैं।
- परिणाम: गैस जमा होने से तेल का स्तर गिरता है और ऊपरी फ्लोट स्विच (Upper Float Switch) सक्रिय होकर अलार्म बजाता है।
2. गंभीर दोष (Major Faults) - ट्रिपिंग सुरक्षा
- सिद्धांत: तेल उछाल/तेज़ प्रवाह (Oil Surge/Rapid Flow) पर आधारित।
- दोष: भारी शॉर्ट सर्किट, वाइंडिंग में बड़ा अर्थ फॉल्ट।
- क्रिया: अत्यधिक गर्मी से अचानक बड़ी मात्रा में गैस और दबाव उत्पन्न होता है, जिससे तेल तेजी से कंजर्वेटर की ओर उछलता है।
- परिणाम: तेल का तीव्र प्रवाह निचले फ्लोट/फ्लैप (Lower Float/Vane) को सक्रिय करता है, जो तुरंत ट्रिप सिग्नल भेजकर ट्रांसफॉर्मर को बिजली आपूर्ति से अलग कर देता है।
महत्व:
बुचोलज़ रिले ट्रांसफॉर्मर के लिए सबसे विश्वसनीय सुरक्षा प्रणालियों में से एक है क्योंकि यह दोष के शुरुआती चरण में ही चेतावनी दे सकता है, जिससे बड़े और विनाशकारी नुकसान से बचा जा सकता है।
बुचोलज़ रिले क्या है? यह कहाँ है?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) एक सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग तेल से भरे बिजली ट्रांसफार्मर (Oil-filled Power Transformers) और रिएक्टरों में आंतरिक दोषों से सुरक्षा के लिए किया जाता है।
यह एक गैस-प्रेरित रिले (Gas-actuated Relay) है जो ट्रांसफार्मर के अंदर उत्पन्न होने वाली गैसों या तेल के बहाव का पता लगाकर काम करती है।
यह कहाँ स्थित होती है?
बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर के दो मुख्य भागों को जोड़ने वाले पाइप में स्थापित होती है:
- मुख्य टैंक (Main Tank): ट्रांसफार्मर का वह बड़ा हिस्सा जिसमें वाइंडिंग और तेल होता है।
- संरक्षक टैंक (Conservator Tank): मुख्य टैंक के ऊपर लगा हुआ छोटा टैंक जो तेल के विस्तार के लिए जगह प्रदान करता है।
स्थान: यह मुख्य टैंक और संरक्षक टैंक को जोड़ने वाले पाइप के बीच में लगी होती है।
इसका मुख्य कार्य क्या है?
बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर के अंदर के विभिन्न दोषों का पता लगाती है, जैसे:
- छोटे दोष (Minor Faults): जैसे वाइंडिंग या कोर का हल्का गरम होना, जिससे तेल का विघटन होता है और धीरे-धीरे गैसें बनती हैं।
- परिणाम: यह रिले अलार्म (Alarm) बजाकर ऑपरेटरों को सूचित करती है।
- गंभीर दोष (Severe Faults): जैसे शॉर्ट सर्किट या बड़ा इन्सुलेशन फेलियर, जिससे तेल का तेज़ी से वाष्पीकरण होता है और गैसों के साथ तेल का तेज बहाव होता है।
- परिणाम: यह रिले सर्किट ब्रेकर को ट्रिप (Trip) करके ट्रांसफार्मर को तुरंत बिजली आपूर्ति से अलग कर देती है, जिससे बड़ी क्षति को रोका जा सकता है।
आमतौर पर,
यह 500 kVA (किलोवोल्ट एम्पीयर) या 750 kVA से अधिक रेटिंग वाले बड़े तेल-भरे ट्रांसफार्मर में उपयोग की जाती है।
क्या बुचोलज़ रिले केवल तेल से भरे ट्रांसफार्मर में उपयोग किया जाता है?
हाँ, यह सही है।
बुचोलज़ रिले (Buchholz relay) एक सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग केवल तेल से भरे ट्रांसफार्मर (oil-filled transformers) और रिएक्टरों (reactors) पर किया जाता है जिनमें एक कन्ज़र्वेटर टैंक (conservator tank) लगा होता है।
मुख्य कारण
- गैस संवेदन (Gas Sensing): बुचोलज़ रिले ट्रांसफार्मर के आंतरिक दोषों (जैसे इन्सुलेशन विफलता, ओवरहीटिंग, या शॉर्ट सर्किट) के कारण ट्रांसफार्मर तेल (insulating oil) के अपघटन से उत्पन्न होने वाली गैस के संचय के सिद्धांत पर काम करता है।
- तेल प्रवाह संवेदन (Oil Flow Sensing): यह तेल के स्तर में गिरावट या गंभीर दोषों के कारण तेल के तेज़ बहाव का भी पता लगाता है।
- स्थापना (Installation): यह रिले मुख्य टैंक और कन्ज़र्वेटर टैंक को जोड़ने वाले पाइप में स्थापित होता है, जिससे यह तेल और गैस दोनों की गतिविधियों पर नज़र रख सकता है।
जिन ट्रांसफार्मर में तेल का उपयोग नहीं होता है (जैसे ड्राई-टाइप ट्रांसफार्मर), उनमें बुचोलज़ रिले का उपयोग नहीं किया जाता है। आमतौर पर, 500 kVA से अधिक रेटिंग वाले तेल से भरे ट्रांसफार्मर में इसका उपयोग एक अनिवार्य सुरक्षा उपाय के रूप में किया जाता है।
बुचहोल्ज़ रिले डिटेक्स्ट किस प्रकार की गलती कर सकता है?
हाँ, बुचहोल्ज़ रिले (Buchholz relay) ट्रांसफार्मर के भीतर होने वाले कई प्रकार के आंतरिक दोषों (Internal Faults) का पता लगा सकता है। यह दोषों की प्रकृति के आधार पर अलार्म या ट्रिपिंग (परिपथ को वियोजित करना) दोनों के लिए संकेत प्रदान करता है।
बुचहोल्ज़ रिले द्वारा पता लगाए जाने वाले दोष
बुचहोल्ज़ रिले दो मुख्य सिद्धांतों पर कार्य करता है: गैस संचय (छोटे दोषों के लिए) और तेल का तेज बहाव (गंभीर दोषों के लिए)।
1. धीमे विकसित होने वाले दोष (Incipient/Slow Developing Faults)
ये दोष धीरे-धीरे पनपते हैं और ट्रांसफार्मर तेल (Insulating Oil) के अपघटन (decomposition) से गैस के बुलबुले उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार के दोषों के लिए रिले ऊपरी फ्लोट का उपयोग करके अलार्म संकेत देता है।
- छोटे आंतरिक शॉर्ट सर्किट (Minor Internal Short Circuits): जैसे टर्न-टू-टर्न फॉल्ट (Turn-to-Turn Fault)।
- स्थानीय अतिताप (Localized Overheating): वाइंडिंग या कोर के हॉट स्पॉट (Hot Spots) में गर्मी के कारण तेल का अपघटन।
- इंसुलेशन की विफलता (Insulation Failure): वाइंडिंग इंसुलेशन का धीमा क्षरण।
- कम तेल स्तर (Low Oil Level): टैंक में रिसाव के कारण तेल का स्तर धीरे-धीरे गिरना। (इस स्थिति में, ऊपरी फ्लोट तेल के स्तर के साथ नीचे गिर जाता है।)
2. गंभीर/अचानक होने वाले दोष (Severe/Sudden Faults)
ये दोष अचानक होते हैं और ट्रांसफार्मर के अंदर तेज़ चाप (Arcing) या गंभीर शॉर्ट सर्किट के कारण तेल का तेज़ बहाव (Oil Surge) उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार के दोषों के लिए रिले निचले फ्लोट या वैन का उपयोग करके तुरंत ट्रिपिंग संकेत देता है।
- गंभीर आंतरिक शॉर्ट सर्किट (Major Internal Short Circuits): जैसे वाइंडिंग और अर्थ के बीच या दो वाइंडिंग के बीच शॉर्ट सर्किट।
- कोर फॉल्ट (Core Faults): कोर में गंभीर विफलता।
- तेल का तीव्र रिसाव (Rapid Oil Leakage): जिससे तेल का स्तर तेज़ी से गिर जाता है।
दोष की प्रकृति
क्रियाविधि
रिले प्रतिक्रिया
छोटे दोष (गैस संचय)
तेल अपघटन से गैस धीरे-धीरे जमा होती है।
अलार्म (उच्च फ्लोट सक्रिय होता है)
गंभीर दोष (तेल का बहाव)
चाप या शॉर्ट सर्किट से तेल तेज़ी से फैलता है।
ट्रिपिंग (निचला फ्लोट/वैन सक्रिय होता है)
बुचहोल्ज़ रिले का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रारंभिक दोषों का भी पता लगा लेता है, जिससे बड़ी विफलता होने से पहले ट्रांसफार्मर को अलग किया जा सके।
बुचोलज़ रिले के कार्य सिद्धांत की व्याख्या करें?
नमस्ते! बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) का कार्य सिद्धांत नीचे विस्तार से समझाया गया है।
बुचोलज़ रिले का कार्य सिद्धांत (Working Principle)
बुचोलज़ रिले एक गैस-चालित (Gas-Actuated) सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग तेल-निमज्जित (Oil-Immersed) पावर ट्रांसफार्मर (Power Transformer) और रिएक्टरों में आंतरिक दोषों (Internal Faults) से सुरक्षा के लिए किया जाता है।
यह रिले कंज़र्वेटर टैंक (Conservator Tank) और ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक (Main Tank) को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है। इसका कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से ट्रांसफार्मर तेल में होने वाली गैस निर्माण (Gas Generation) पर आधारित है।
1. प्रारंभिक दोष (Incipient Fault) और अलार्म (Alarm)
जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई छोटा दोष (Minor Fault) जैसे कि कोर (Core) या वाइंडिंग (Winding) में हल्की हीटिंग या इन्सुलेशन का मामूली टूटना शुरू होता है, तो:
- गैस निर्माण: यह दोष ट्रांसफार्मर के तेल को गर्म करता है, जिससे तेल विघटित होकर थोड़ी मात्रा में दहनशील गैसें (Combustible Gases) (जैसे हाइड्रोजन और हाइड्रोकार्बन) उत्पन्न करता है।
- ऊपरी फ्लोट का कार्य: ये गैस के बुलबुले ऊपर की ओर उठते हैं और बुचोलज़ रिले के शीर्ष कक्ष (Top Chamber) में जमा हो जाते हैं। गैस जमा होने से तेल का स्तर गिरता है।
- अलार्म सर्किट सक्रियण: तेल का स्तर गिरने पर, ऊपरी फ्लोट (Upper Float) नीचे की ओर झुकता है। यह एक मर्करी स्विच (Mercury Switch) को बंद करता है, जिससे अलार्म सर्किट (Alarm Circuit) सक्रिय हो जाता है। यह ऑपरेटर को संकेत देता है कि ट्रांसफार्मर के अंदर कोई समस्या शुरू हो गई है।
2. गंभीर दोष (Severe Fault) और ट्रिपिंग (Tripping)
यदि दोष गंभीर हो जाता है, जैसे कि भारी शॉर्ट सर्किट (Heavy Short Circuit) या गंभीर वाइंडिंग विफलता, तो:
- तेज गैस निर्माण: दोष के कारण तेल का विघटन बहुत तेज़ी से होता है, जिससे बड़ी मात्रा में गैस (Large volume of gas) का तेजी से निर्माण होता है।
- तेल का प्रवाह: गैस के अचानक और तेज़ निर्माण के कारण ट्रांसफार्मर तेल, कंज़र्वेटर टैंक की ओर तेज गति (High Velocity) से प्रवाहित होता है।
- निचले फ्लोट का कार्य: तेल का यह तेज़ प्रवाह रिले के अंदर स्थित निचले फ्लोट (Lower Float) पर दबाव डालता है। निचला फ्लोट इस बल के कारण अपनी स्थिति से हट जाता है।
- ट्रिप सर्किट सक्रियण: निचले फ्लोट से जुड़ा दूसरा मर्करी स्विच (Mercury Switch) बंद हो जाता है, जिससे ट्रिप सर्किट (Trip Circuit) सक्रिय हो जाता है। यह तुरंत ट्रांसफार्मर को मुख्य सर्किट ब्रेकर (Main Circuit Breaker) से डिस्कनेक्ट (यानी ट्रिप) कर देता है, जिससे बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
इस प्रकार,
बुचोलज़ रिले गैस की मात्रा (अलार्म के लिए) और तेल के प्रवाह की दर (ट्रिपिंग के लिए) दोनों का पता लगाकर ट्रांसफार्मर को सुरक्षा प्रदान करता है।
जब बुचोलज़ रिले में गैस जमा हो जाती है तो क्या होता है?
नमस्ते! जब बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) में गैस जमा हो जाती है, तो यह ट्रांसफार्मर के अंदर एक आंतरिक दोष का संकेत होता है, और रिले इस स्थिति के आधार पर दो मुख्य कार्य करता है:
अलार्म सक्रिय होना (Minor Fault)
- कारण: ट्रांसफार्मर के तेल में छोटी-मोटी खराबी (जैसे हल्का ओवरहीटिंग, आंशिक डिस्चार्ज या इन्सुलेशन का मामूली टूटना) होने पर धीमी गति से गैस (मुख्य रूप से हाइड्रोजन) उत्पन्न होती है।
- परिणाम: यह गैस ऊपर उठकर बुचोलज़ रिले के ऊपरी कक्ष में जमा हो जाती है, जिससे रिले के अंदर तेल का स्तर गिर जाता है।
- कार्यवाही: तेल का स्तर गिरने से ऊपरी फ़्लोट (float) नीचे झुक जाता है, जिससे उससे जुड़ा पारा स्विच (mercury switch) बंद हो जाता है और अलार्म बज उठता है।
यह एक चेतावनी है कि ट्रांसफार्मर के अंदर कोई समस्या विकसित हो रही है, जिससे ऑपरेटर को जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का समय मिल जाता है।
यह एक चेतावनी है कि ट्रांसफार्मर के अंदर कोई समस्या विकसित हो रही है, जिससे ऑपरेटर को जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का समय मिल जाता है।
ट्रांसफार्मर का ट्रिप होना (Major Fault)
- कारण: ट्रांसफार्मर के अंदर कोई गंभीर दोष (जैसे शॉर्ट सर्किट, वाइंडिंग का पूरी तरह टूटना) होने पर तेजी से और बड़ी मात्रा में गैस उत्पन्न होती है।
- परिणाम: गैसों का यह तेजी से उत्पादन तेज़ तेल बहाव (Oil Surge) पैदा करता है, जो रिले के माध्यम से कंज़र्वेटर टैंक की ओर जाता है।
- कार्यवाही: तेल का यह तेज़ बहाव रिले के रास्ते में लगे निचले फ़्लैप/फ़्लोट को झुका देता है, जिससे उससे जुड़ा दूसरा पारा स्विच बंद हो जाता है और यह ट्रिप सर्किट को सक्रिय कर देता है।
ट्रिप सर्किट, ट्रांसफार्मर को मुख्य सप्लाई से तुरंत अलग (isolate) कर देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
ट्रिप सर्किट, ट्रांसफार्मर को मुख्य सप्लाई से तुरंत अलग (isolate) कर देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
संक्षेप में,
बुचोलज़ रिले में गैस जमा होना ट्रांसफार्मर में दोष की शुरुआत (Minor Fault) या गंभीरता (Major Fault) को इंगित करता है, जिसके आधार पर यह अलार्म या ट्रिप सिग्नल देता है।
बुचोलज़ रिले छोटी और बड़ी खराबी पर कैसे प्रतिक्रिया करता है?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) को ट्रांसफार्मर के अंदर उत्पन्न होने वाली छोटी (Minor) और बड़ी (Major) खराबी दोनों का पता लगाने और उन पर अलग-अलग प्रतिक्रिया करने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
1. छोटी खराबी (Minor Fault) पर प्रतिक्रिया
छोटी खराबी, जैसे कि इंसुलेशन का हल्का टूटना, थोड़ा ओवरहीटिंग, या ढीले कनेक्शन, धीरे-धीरे गैस पैदा करते हैं।
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पहलू
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विवरण
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गैस संचय
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दोष के कारण उत्पन्न होने वाली गैस (जैसे हाइड्रोजन) ऊपर उठती है और बुचोलज़ रिले के ऊपरी कक्ष में धीरे-धीरे जमा हो जाती है।
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तेल का स्तर
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गैस जमा होने से रिले कक्ष में तेल का स्तर गिर जाता है, क्योंकि गैस तेल को विस्थापित करती है।
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रिले की क्रिया
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तेल का स्तर गिरने से रिले में लगा ऊपरी फ़्लोट (float) नीचे झुक जाता है।
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अंतिम परिणाम
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ऊपरी फ़्लोट एक पारा स्विच को सक्रिय करता है, जिससे अलार्म सर्किट बंद हो जाता है और एक श्रव्य अलार्म बजने लगता है।
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उद्देश्य
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यह एक चेतावनी संकेत है, जो ऑपरेटरों को यह बताता है कि ट्रांसफार्मर के अंदर कोई समस्या विकसित हो रही है। इससे ट्रांसफार्मर को गंभीर क्षति होने से पहले जांच और मरम्मत का समय मिल जाता है।
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2. बड़ी खराबी (Major Fault) पर प्रतिक्रिया
बड़ी खराबी, जैसे कि वाइंडिंग शॉर्ट सर्किट, अर्थ फ़ॉल्ट, या आर्क फ़ॉल्ट, अचानक और बड़ी मात्रा में गैस और भाप उत्पन्न करते हैं।
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पहलू
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विवरण
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तेल का बहाव
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गैस का तेजी से बनना मुख्य टैंक में अचानक दबाव वृद्धि करता है, जिससे तेल कंज़र्वेटर की ओर तेज गति से बहने लगता है (ऑयल सर्ज)।
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रिले की क्रिया
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तेल का यह तेज़ बहाव रिले के अंदर स्थित निचले फ़्लैप (vane) या फ़्लोट पर बल डालता है।
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अंतिम परिणाम
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निचले फ़्लैप से जुड़ा दूसरा पारा स्विच तुरंत सक्रिय हो जाता है, जिससे ट्रिप सर्किट बंद हो जाता है।
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उद्देश्य
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ट्रिप सर्किट, ट्रांसफार्मर को मुख्य सर्किट ब्रेकर के माध्यम से तुरंत सप्लाई से अलग (isolate) कर देता है। यह ट्रांसफार्मर को भयावह क्षति (विस्फोट या गंभीर आग) से बचाता है।
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संक्षेप में:
- छोटी खराबी = धीमा गैस संचय = अलार्म बजना (चेतावनी)
- बड़ी खराबी = तेज़ तेल बहाव = ट्रिप होकर सप्लाई काटना (सुरक्षा)
बुचोलज़ रिले द्वारा कौन सी सुरक्षा प्रदान की जाती है?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) मुख्य रूप से तेल-डूबे हुए (Oil-immersed) ट्रांसफार्मर को आंतरिक दोषों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह एक तेल और गैस-सक्रिय (Gas-actuated) सुरक्षा उपकरण है जो ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक और कंज़र्वेटर टैंक के बीच लगा होता है।
बुचोलज़ रिले द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रमुख सुरक्षा
बुचोलज़ रिले दो प्रकार के दोषों पर प्रतिक्रिया करके सुरक्षा प्रदान करता है:
1. छोटी (प्रारंभिक) खराबी का पता लगाना (Minor Fault Protection)
यह रिले ट्रांसफार्मर के अंदर धीरे-धीरे विकसित होने वाली छोटी-मोटी खराबी का पता लगाता है, जिससे एक चेतावनी अलार्म सक्रिय होता है।
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पता लगाए गए दोष:
- इंसिपिएंट वाइंडिंग दोष (Incipient Winding Faults): वाइंडिंग के इन्सुलेशन का मामूली टूटना या स्थानीय ओवरहीटिंग।
- कोर दोष (Core Faults): ट्रांसफार्मर कोर में मामूली दोष या ओवरहीटिंग।
- ढीले कनेक्शन (Loose Connections): आंतरिक कनेक्शनों का ढीला होना, जिससे स्पार्किंग (Sparking) होती है।
- तेलों का धीमी गति से अपघटन (Slow Decomposition of Oil): इन दोषों के कारण तेल धीरे-धीरे गर्म होकर गैस (जैसे हाइड्रोजन) उत्पन्न करता है।
- सुरक्षा क्रिया: यह धीमी गति से जमा होने वाली गैस के कारण ऊपरी फ़्लोट को नीचे करता है और अलार्म बजाता है।
2. बड़ी (गंभीर) खराबी से सुरक्षा (Major Fault Protection)
यह रिले ट्रांसफार्मर के अंदर अचानक उत्पन्न होने वाली गंभीर खराबी का पता लगाकर ट्रांसफार्मर को मुख्य सप्लाई से तुरंत अलग कर देता है।
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पता लगाए गए दोष:
- इंटर-टर्न शॉर्ट सर्किट (Inter-Turn Short Circuits): वाइंडिंग के दो फेरों के बीच गंभीर शॉर्ट सर्किट।
- अर्थ फ़ॉल्ट (Earth Faults): वाइंडिंग का जमीन (Ground) से सीधे संपर्क।
- तेलों का तेज़ी से अपघटन/आर्किंग (Rapid Decomposition/Arcing): गंभीर दोषों के कारण तेल का तेज़ी से वाष्पीकृत होना और गैसों का उत्पादन।
- सुरक्षा क्रिया: बड़ी खराबी से पैदा हुए तेज़ तेल बहाव (Oil Surge) के कारण निचले फ़्लैप को सक्रिय करता है और ट्रिपिंग सर्किट को बंद करके ट्रांसफार्मर को सप्लाई से हटा देता है।
संक्षेप में
यह रिले गैसों और तेल के बहाव की गति को मापकर दोष की गंभीरता को अलग-अलग पहचानता है, जिससे ट्रांसफार्मर को विनाशकारी क्षति (जैसे विस्फोट या आग) से बचाया जा सकता है।
किस प्रकार के ट्रांसफार्मर में बुचोलज़ रिले का उपयोग किया जाता है और क्यों?
नमस्ते! बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) का उपयोग मुख्य रूप से तेल-डूबे हुए ट्रांसफार्मर (Oil-immersed Transformers) में किया जाता है, जिनके ऊपर एक कंज़र्वेटर टैंक (Conservator Tank) लगा होता है।
किस प्रकार के ट्रांसफार्मर में उपयोग किया जाता है?
- तेल-डूबे हुए ट्रांसफार्मर (Oil-immersed Transformers):
- यह उन ट्रांसफार्मरों में उपयोग किया जाता है जहाँ वाइंडिंग और कोर को ठंडा करने और इन्सुलेशन प्रदान करने के लिए ट्रांसफार्मर तेल का उपयोग किया जाता है।
- कंज़र्वेटर टैंक वाले ट्रांसफार्मर:
- बुचोलज़ रिले को मुख्य ट्रांसफार्मर टैंक और कंज़र्वेटर टैंक को जोड़ने वाले पाइप में स्थापित किया जाता है।
- उच्च रेटिंग वाले ट्रांसफार्मर (High Rating Transformers):
- यह सुरक्षा युक्ति आम तौर पर 500 kVA (किलोवोल्ट एम्पीयर) या इससे अधिक रेटिंग वाले मध्यम से बड़े पावर ट्रांसफार्मर और वितरण ट्रांसफार्मर में आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी मानी जाती है।
बुचोलज़ रिले का उपयोग क्यों किया जाता है?
बुचोलज़ रिले का उपयोग इन ट्रांसफार्मरों को आंतरिक दोषों (Internal Faults) से बचाने के लिए किया जाता है जो तेल के अपघटन (decomposition) से जुड़े होते हैं।
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कारण
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दोष का प्रकार
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सुरक्षा क्रिया
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गैस निर्माण
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वाइंडिंग का हल्का ओवरहीटिंग, इन्सुलेशन का मामूली टूटना, ढीले कनेक्शन।
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दोष के कारण तेल का अपघटन होता है, जिससे गैस के बुलबुले बनते हैं। रिले इस गैस को जमा करके अलार्म सक्रिय करता है।
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तेज़ तेल बहाव
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इंटर-टर्न शॉर्ट सर्किट, अर्थ फ़ॉल्ट, या गंभीर आर्किंग।
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दोष के कारण तेल का अचानक और तेज़ी से बहाव (Oil Surge) होता है। रिले इस बहाव को भांपकर ट्रिप सर्किट सक्रिय करता है।
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तेल का रिसाव
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ट्रांसफार्मर टैंक से तेल का गंभीर रिसाव।
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तेल के स्तर में गिरावट के कारण भी अलार्म बजता है, जो तेल के गंभीर रिसाव का संकेत देता है।
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संक्षेप में,
यह रिले ट्रांसफार्मर के जीवन को बढ़ाता है और विनाशकारी क्षति (जैसे विस्फोट या आग) को रोकता है, जिससे ट्रांसफार्मर को गंभीर नुकसान होने से पहले ही सप्लाई से अलग किया जा सके।
क्या बुचोलज़ रिले बाहरी दोषों का पता लगा सकता है?
जी नहीं, बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) बाहरी दोषों (External Faults) का पता सीधे तौर पर नहीं लगा सकता है।
बुचोलज़ रिले की सीमा
बुचोलज़ रिले एक आंतरिक सुरक्षा उपकरण (Internal Protection Device) है।
- यह ट्रांसफार्मर के मुख्य तेल टैंक और कंज़र्वेटर टैंक के बीच के पाइप में लगा होता है।
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यह केवल ट्रांसफार्मर के टैंक के भीतर होने वाले दोषों के प्रभावों के प्रति संवेदनशील होता है, जैसे:
- तेल के अपघटन से उत्पन्न गैसों का संचय।
- आंतरिक शॉर्ट सर्किट या आर्किंग के कारण तेल का तेज़ बहाव (Oil Surge)।
- टैंक से तेल का रिसाव (जिससे तेल का स्तर गिर जाता है)।
बाहरी दोष और बुचोलज़ रिले
बाहरी दोष (जैसे ट्रांसमिशन लाइन पर शॉर्ट सर्किट, बुशिंग पर दोष, या ट्रांसफार्मर के टर्मिनलों से बाहर का फॉल्ट) ट्रांसफार्मर के अंदर कोई सीधा या तात्कालिक गैस उत्पादन या तेज़ तेल बहाव पैदा नहीं करते हैं।
हालांकि, कुछ स्थितियों में, यदि बाहरी दोष लंबे समय तक बना रहता है और बहुत अधिक ओवरकरंट का कारण बनता है:
- ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग बहुत अधिक गर्म हो सकती है।
- यह अत्यधिक गर्मी अंततः ट्रांसफार्मर के आंतरिक तेल को गर्म करके उसका अपघटन शुरू कर सकती है और गैस पैदा कर सकती है।
- इस स्थिति में, बुचोलज़ रिले गैस के संचय के कारण देरी से प्रतिक्रिया दे सकता है और एक अलार्म सक्रिय कर सकता है, लेकिन यह दोष के लिए प्राथमिक सुरक्षा नहीं है।
संक्षेप में:
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दोष का प्रकार
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बुचोलज़ रिले का काम
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प्राथमिक सुरक्षा उपकरण
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आंतरिक दोष
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पता लगाता है (गैस/तेल बहाव के माध्यम से)।
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बुचोलज़ रिले
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बाहरी दोष
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सीधे पता नहीं लगाता है (सिवाय ओवरकरंट से होने वाली अत्यधिक आंतरिक हीटिंग के)।
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डिफरेंशियल रिले (Differential Relay) और ओवरकरंट रिले (Overcurrent Relay)
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बुचोलज़ रिले को आंतरिक दोषों से बचाने के लिए बनाया गया है, न कि बाहरी सर्किट के दोषों से।
बुचोलज़ रिले के कार्य में संरक्षक की क्या भूमिका है?
बुचोलज़ रिले (Buchholz Relay) के कार्य में संरक्षक टैंक (Conservator Tank) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिले इसी टैंक और मुख्य टैंक के बीच जुड़ा होता है और अपनी कार्यप्रणाली के लिए तेल के बहाव और स्तर पर निर्भर करता है।
संरक्षक टैंक की भूमिका
संरक्षक टैंक, जिसे कंज़र्वेटर टैंक भी कहते हैं, ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक के ऊपर लगा एक अतिरिक्त तेल टैंक होता है। बुचोलज़ रिले के कार्य में इसकी भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
1. रिले के लिए स्थान प्रदान करना
- बुचोलज़ रिले को मुख्य ट्रांसफार्मर टैंक और संरक्षक टैंक को जोड़ने वाली पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है।
- यह स्थिति रिले को दोषों के कारण होने वाले गैस संचय और तेल बहाव (Oil Surge) दोनों के प्रति संवेदनशील बनाती है, क्योंकि दोषों से उत्पन्न गैसें प्राकृतिक रूप से ऊपर उठकर कंज़र्वेटर की ओर जाती हैं।
2. तेल बहाव को दिशा देना
- जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई गंभीर दोष (Major Fault) होता है, तो दोष के कारण तेजी से गैसें बनती हैं। यह गैस और वाष्प मुख्य टैंक में दबाव बढ़ाती हैं, जिससे तेल तेजी से संरक्षक टैंक की ओर धकेला जाता है।
- तेज़ तेल बहाव (Oil Surge) संरक्षक की ओर जाने वाली इसी पाइप से गुजरता है, जिससे बुचोलज़ रिले का निचला फ़्लैप सक्रिय हो जाता है और ट्रिप सिग्नल उत्पन्न होता है।
3. गैस संचय की अनुमति देना
- जब कोई छोटी खराबी (Minor Fault) होती है, तो धीरे-धीरे उत्पन्न होने वाली गैसें मुख्य टैंक से ऊपर उठकर संरक्षक टैंक की ओर जाने वाली पाइप में प्रवेश करती हैं।
- यह गैस बुचोलज़ रिले के ऊपरी कक्ष में जमा हो जाती है, जिससे रिले में तेल का स्तर गिर जाता है और अलार्म सक्रिय हो जाता है।
4. तेल स्तर बनाए रखना
- संरक्षक टैंक ट्रांसफार्मर में तेल के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। यदि ट्रांसफार्मर में तेल का रिसाव (Leakage) होता है, तो संरक्षक में तेल का स्तर गिर जाता है।
- यह गिरावट अंततः बुचोलज़ रिले के ऊपरी कक्ष में तेल के स्तर को कम कर सकती है, जिससे अलार्म बजता है और तेल के कम होने के बारे में चेतावनी मिलती है।
संक्षेप में, संरक्षक टैंक एक ऐसी व्यवस्था प्रदान करता है जिसके माध्यम से बुचोलज़ रिले प्रभावी ढंग से तेल और गैस से संबंधित आंतरिक दोषों का पता लगा सकता है। संरक्षक के बिना, रिले को काम करने के लिए उपयुक्त स्थान और तेल का बहाव नहीं मिल पाता।
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