इस सबस्टेशन का मुख्य कार्य उच्च वोल्टेज (High Voltage) को निचले, उपयोग योग्य वोल्टेज में स्टेप-डाउन (Step-Down) करना है ताकि इसे अंतिम उपभोक्ताओं (जैसे घरों, वाणिज्यिक भवनों और छोटे उद्योगों) तक वितरित किया जा सके।
आने वाली बिजली, जो 11 kV (11,000 वोल्ट) की होती है, वह सबस्टेशन में प्रवेश करते ही कुछ प्रमुख सुरक्षा और नियंत्रण उपकरणों से होकर गुजरती है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च वोल्टेज लाइन को सुरक्षित करना, अलग (isolate) करना, और किसी भी फॉल्ट (Fault) से बचाना है ताकि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहे और बिजली वितरण सुचारू रूप से चलता रहे।
11 kV बिजली के आगमन की प्रक्रिया और सुरक्षा घटक
11 kV की लाइन जिस संरचना (जैसे DP स्ट्रक्चर या पोल) पर आती है, उस पर ये मुख्य उपकरण लगे होते हैं:
1. लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester - LA)
- कार्य: यह सबसे पहली सुरक्षा डिवाइस है। यह आसमानी बिजली (Lightning) के झटके या अत्यधिक वोल्टेज उछाल (Surge) से सबस्टेशन के उपकरणों (विशेषकर ट्रांसफार्मर) को बचाता है।
- सुरक्षा: जैसे ही बिजली का झटका आता है, यह उसे पकड़कर तुरंत एक समर्पित अर्थिंग (Grounding) प्रणाली में भेज देता है।
2. एबी स्विच / आइसोलेटर (AB Switch / Isolator)
- कार्य: यह मुख्य रूप से सर्किट को अलग करने (Isolate) के लिए उपयोग किया जाता है। इसे ऑन-लोड (On-Load) यानी जब बिजली का प्रवाह हो रहा हो, तब नहीं खोला जाता।
- सुरक्षा: मेंटेनेंस (रखरखाव) या मरम्मत के दौरान, यह सुनिश्चित करता है कि सबस्टेशन से ट्रांसफार्मर तक बिजली का कोई प्रवाह न हो, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
3. ड्रॉप आउट फ्यूज (Drop Out Fuse - DOF)
- कार्य: यह ओवरकरंट (Overcurrent) और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करता है।
- सुरक्षा: यदि ट्रांसफार्मर में या 11 kV साइड पर कोई गंभीर फॉल्ट आता है, तो DOF का फ्यूज लिंक पिघल जाता है और उसका निचला हिस्सा नीचे लटक (ड्रॉप आउट) जाता है, जिससे सर्किट ओपन हो जाता है और बिजली का प्रवाह रुक जाता है। यह ट्रांसफार्मर को क्षति से बचाता है।
4. 11 kV स्विचगियर (Circuit Breaker या RMU)
- बड़े सबस्टेशनों या इनडोर सबस्टेशनों में, 11 kV की इनकमिंग लाइन पर वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (VCB) या रिंग मेन यूनिट (RMU) का उपयोग किया जाता है।
- कार्य: ये उपकरण फॉल्ट की स्थिति में स्वचालित रूप से और तेजी से सर्किट को तोड़ते हैं, और इन्हें ऑन-लोड पर भी ऑपरेट किया जा सकता है।
5. पिन/पोस्ट इंसुलेटर (Pin/Post Insulators)
- कार्य: 11 kV कंडक्टरों को संरचना (Structure) से अलग (Insulate) रखने के लिए इनका उपयोग किया जाता है, ताकि बिजली जमीन में प्रवाहित न हो।
सारांश में:
11 kV की आने वाली बिजली इन सुरक्षा परतों से गुजरने के बाद स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर के HT (हाई टेंशन) बुशिंग में प्रवेश करती है, जहाँ वोल्टेज को 415 V में बदला जाता है।
चरणबद्ध परिवर्तन?
11 kV / 415 V सबस्टेशन में वोल्टेज का चरणबद्ध परिवर्तन (Step-Down Transformation) एक डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर के माध्यम से होता है, जो म्यूचुअल इंडक्शन (Mutual Induction) के सिद्धांत पर काम करता है।
वोल्टेज के चरणबद्ध परिवर्तन का सिद्धांत
11 kV को 415 V में बदलने की प्रक्रिया स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर (Step-Down Transformer) का मुख्य कार्य है।
1. म्यूचुअल इंडक्शन का सिद्धांत
ट्रांसफार्मर का कार्य फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम (Faraday's Law of Electromagnetic Induction) और म्यूचुअल इंडक्शन पर आधारित है।
- जब प्राइमरी वाइंडिंग (11 kV साइड) में AC (Alternating Current) सप्लाई दी जाती है, तो यह करंट लगातार अपनी दिशा और मान बदलता रहता है।
- इस बदलते हुए करंट के कारण ट्रांसफार्मर के कोर में एक बदलता हुआ चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) उत्पन्न होता है।
- यह चुंबकीय फ्लक्स सेकेंडरी वाइंडिंग (415 V साइड) से जुड़ता है और उसमें एक वोल्टेज प्रेरित (Induce) करता है—इसे ही म्यूचुअल इंडक्शन कहते हैं।
2. स्टेप-डाउन एक्शन (वोल्टेज घटाना)
वोल्टेज को 11 kV से 415 V तक घटाने का रहस्य ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में लगे घुमावों (Turns) की संख्या के अनुपात में निहित है।
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विशेषता
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प्राइमरी वाइंडिंग (11 kV)
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सेकेंडरी वाइंडिंग (415 V)
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वोल्टेज
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उच्च (Higher)
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निम्न (Lower)
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घुमाव (Turns)
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अधिक (N_p)
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कम (N_s)
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करंट
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कम (Lower)
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अधिक (Higher)
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एक स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर में, सेकेंडरी वाइंडिंग में घुमावों की संख्या (N_s) प्राइमरी वाइंडिंग में घुमावों की संख्या (N_p) से हमेशा कम होती है।
वोल्टेज का अनुपात (Voltage Ratio) सीधे घुमावों की संख्या के अनुपात में होता है, जिसे निम्न सूत्र से दर्शाया जाता है:
{V_s}/{V_p} = {N_s}/{N_p}
जहाँ:
- V_s = सेकेंडरी वोल्टेज (415 V)
- V_p = प्राइमरी वोल्टेज (11 kV)
- N_s = सेकेंडरी घुमाव
- N_p = प्राइमरी घुमाव
क्योंकि N_s < N_p है, इसलिए V_s का मान V_p के मान से बहुत कम होता है। इस तरह, 11,000 वोल्ट घटकर सुरक्षित 415 वोल्ट बन जाता है।
3. पावर (शक्ति) का संरक्षण
ट्रांसफार्मर वोल्टेज को कम करता है, लेकिन वह शक्ति (Power) का संरक्षण करता है। इसका मतलब है कि प्राइमरी साइड की शक्ति लगभग सेकेंडरी साइड की शक्ति के बराबर होती है (आदर्श ट्रांसफार्मर के लिए):
{Power}_{{Input}} / {Power}_{{Output}}
V_p × I_p / V_s × I_s
चूंकि वोल्टेज घट जाता है (V_s कम है), इसलिए सेकेंडरी साइड का करंट (I_s) आनुपातिक रूप से बढ़ जाता है, ताकि शक्ति बराबर रहे।
कम वोल्टेज वितरण?
कम वोल्टेज वितरण (Low Voltage Distribution), जिसे LT (Low Tension) वितरण भी कहा जाता है, सबस्टेशन में 11 kV से 415 V तक वोल्टेज बदलने की प्रक्रिया के बाद का अंतिम चरण है।
कम वोल्टेज वितरण (415 V / 240 V)
यह वह प्रणाली है जिसके माध्यम से बिजली अंतिम उपयोगकर्ता (जैसे घर, दुकान और छोटे कारखाने) तक सुरक्षित रूप से पहुंचाई जाती है।
1. आउटपुट वोल्टेज
ट्रांसफार्मर से निकलने वाली कम वोल्टेज सप्लाई दो रूपों में होती है:
- थ्री-फेज (Three-Phase): यह 415 V (या 440 V) होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बड़ी मशीनों, मोटर्स और वाणिज्यिक/औद्योगिक भार (Commercial/Industrial Loads) को चलाने के लिए किया जाता है।
- सिंगल-फेज (Single-Phase): यह 240 V (या 230 V) होती है। यह थ्री-फेज सप्लाई के एक फेज और न्यूट्रल के बीच ली जाती है और इसका उपयोग सभी सामान्य घरेलू उपकरणों और प्रकाश व्यवस्था (Lighting) के लिए किया जाता है।
2. वितरण प्रणाली के घटक
ट्रांसफार्मर से कम वोल्टेज बिजली को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए इन घटकों का उपयोग किया जाता है:
- LT पैनल (Low Tension Panel): यह ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी साइड से जुड़ा होता है। इसमें MCCB (Moulded Case Circuit Breaker) या HRC फ्यूज होते हैं जो 415 V साइड पर ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- बस बार और फीडर (Bus Bar & Feeders): LT पैनल से, 415 V की सप्लाई को कई फीडरों में विभाजित किया जाता है, जो बस बार से जुड़े होते हैं। ये फीडर विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों या ग्राहकों के समूहों को बिजली वितरित करते हैं।
- डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें: बिजली या तो ओवरहेड लाइन (Overhead Lines) (खंभों पर तार) या अंडरग्राउंड केबल (Underground Cables) के माध्यम से वितरित की जाती है।
- सर्विस लाइन (Service Line): यह वह अंतिम तार है जो वितरण लाइन से निकलकर सीधे उपभोक्ता के एनर्जी मीटर (Energy Meter) तक जाता है।
3. सुरक्षा और विनियमन
कम वोल्टेज वितरण में सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण हैं:
- न्यूट्रल अर्थिंग (Neutral Earthing): ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट को जमीन से मजबूती से जोड़ा जाता है। यह 240 V सिंगल-फेज सप्लाई के लिए संदर्भ बिंदु (Reference Point) प्रदान करता है और फॉल्ट होने पर अत्यधिक वोल्टेज से सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- वोल्टेज विनियमन (Voltage Regulation): वितरण लाइन की लंबाई के कारण वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop) होता है। LT वितरण प्रणाली को इस तरह डिज़ाइन किया जाता है कि ग्राहक के परिसर में वोल्टेज निर्धारित सीमा के भीतर बना रहे।
कम वोल्टेज वितरण प्रणाली का अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च वोल्टेज को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से उपयोग-योग्य वोल्टेज में परिवर्तित करके अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाए।
काम के सिद्धांत?
11 kV / 415 V सबस्टेशन का काम का सिद्धांत मुख्य रूप से स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर (Step-Down Transformer) के इर्द-गिर्द घूमता है।
काम का मुख्य सिद्धांत: विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)
सबस्टेशन का मुख्य कार्य दो सिद्धांतों पर आधारित है:
1. फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का नियम (Faraday's Law)
यह नियम बताता है कि जब किसी चालक (Conductor) से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) समय के साथ बदलता है, तो उस चालक में एक वोल्टेज (Voltage) प्रेरित (Induce) होता है।
- ट्रांसफार्मर में, जब प्राइमरी वाइंडिंग (11 kV) को AC सप्लाई दी जाती है, तो यह एक बदलता हुआ चुंबकीय फ्लक्स पैदा करता है।
- यह फ्लक्स सेकेंडरी वाइंडिंग (415 V) को काटता है और उसमें एक नया वोल्टेज प्रेरित करता है।
2. म्यूचुअल इंडक्शन (Mutual Induction)
म्यूचुअल इंडक्शन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कॉइल (प्राथमिक वाइंडिंग) में बदलते हुए करंट के कारण उत्पन्न चुंबकीय फ्लक्स दूसरे कॉइल (द्वितीयक वाइंडिंग) में वोल्टेज प्रेरित करता है।
वोल्टेज घटाने का सिद्धांत (स्टेप-डाउन एक्शन)
11 kV को 415 V में बदलने के लिए घुमावों (Turns) का अनुपात ही निर्णायक कारक है:
स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर में, प्राइमरी वाइंडिंग में घुमावों की संख्या (N_p) सेकेंडरी वाइंडिंग में घुमावों की संख्या (N_s) से काफी अधिक होती है।
वोल्टेज का मान सीधे वाइंडिंग के घुमावों की संख्या के अनुपात में होता है:
{V_s}/{V_p} = {N_s}/{N_p}
चूँकि N_s (सेकेंडरी) का मान N_p (प्राइमरी) से बहुत कम होता है, इसलिए आउटपुट वोल्टेज V_s (415 V) इनपुट वोल्टेज V_p (11 kV) से बहुत कम हो जाता है।
शक्ति का संरक्षण (Power Conservation)
ट्रांसफार्मर केवल वोल्टेज को रूपांतरित करता है, यह शक्ति (Power) को नहीं बदलता है (क्षति को छोड़कर)।
V_p × I_p / V_s × I_s
चूँकि वोल्टेज (V) 11 kV से 415 V तक घट जाता है, इसलिए द्वितीयक वाइंडिंग में करंट (I) आनुपातिक रूप से बढ़ जाता है ताकि इनपुट और आउटपुट पावर लगभग समान रहे।
11KV / 415V Substation Single-Line Diagram
11KV / 415V सबस्टेशन क्यों?
नमस्ते! 11 kV / 415 V सबस्टेशन का उपयोग करने का मुख्य कारण वितरण (Distribution) और सुरक्षा (Safety) है।
यह सबस्टेशन जनरेशन (उत्पादन) और ट्रांसमिशन (पारेषण) के उच्च वोल्टेज को अंतिम उपयोगकर्ता (उपभोक्ता) के लिए सुरक्षित और उपयोग-योग्य वोल्टेज में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक है।
मुख्य कारण: वोल्टेज रूपांतरण और उपयोगिता
यह सबस्टेशन निम्नलिखित दो प्रमुख आवश्यकताओं को पूरा करता है:
1. उच्च दक्षता वाला पारेषण (Efficient Transmission)
- 11 kV का उपयोग: बिजली को ट्रांसमिशन सबस्टेशनों से शहरों और मोहल्लों के पास के डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन तक 11 kV जैसे अपेक्षाकृत उच्च वोल्टेज पर भेजा जाता है।
- फायदा: उच्च वोल्टेज पर बिजली भेजने से करंट (Current) कम हो जाता है। कम करंट का मतलब है लाइनों में कम शक्ति क्षय (I^2R लॉस), जिससे बिजली का पारेषण अधिक कुशल (More Efficient) और किफायती होता है। यदि हम बिजली को सीधे 415 V पर दूर तक भेजते, तो लाइन लॉस बहुत अधिक हो जाता।
2. सुरक्षित और उपयोगी उपभोग (Safe and Usable Consumption)
- 415 V की आवश्यकता: कोई भी घरेलू या छोटा औद्योगिक उपकरण सीधे 11,000 वोल्ट पर काम नहीं कर सकता। 11 kV बहुत खतरनाक और उपकरणों के लिए हानिकारक है।
-
समाधान: 11 kV / 415 V सबस्टेशन इस उच्च वोल्टेज को स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर का उपयोग करके 415 V (थ्री-फेज) या 240 V (सिंगल-फेज) में बदल देता है। यह वोल्टेज:
- सुरक्षित है (लेकिन फिर भी सावधानी आवश्यक है)।
- उपयोग-योग्य है, क्योंकि सभी घरेलू और वाणिज्यिक उपकरण इसी मानक वोल्टेज पर काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
सारांश में: ट्रांसफार्मरिंग आवश्यकता
संक्षेप में, इस सबस्टेशन की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि:
- हमें दक्षता के लिए बिजली को 11 kV पर पारेषित करना होता है।
- हमें उपयोगिता और सुरक्षा के लिए बिजली को 415 V / 240 V पर उपभोग करना होता है।
यह सबस्टेशन इन दोनों आवश्यकताओं के बीच एक अपरिहार्य कड़ी (Indispensable Link) के रूप में कार्य करता है।
वोल्टेज स्थिरता?
वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability) बिजली प्रणालियों (Power Systems) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है, खासकर वितरण (Distribution) के अंतिम चरण में।
वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability) क्या है?
वोल्टेज स्थिरता किसी बिजली प्रणाली की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह किसी भी सामान्य संचालन की स्थिति या परेशानी (Disturbance) (जैसे लोड में अचानक बदलाव, ट्रांसमिशन लाइन का ट्रिप होना) के बाद, सभी बसों (Busbars) पर वोल्टेज को स्वीकार्य सीमा के भीतर बनाए रखती है।
आसान शब्दों में कहें तो, वोल्टेज स्थिरता यह सुनिश्चित करती है कि सिस्टम क्रैश न हो या वोल्टेज इतना कम न हो जाए कि उपकरण काम करना बंद कर दें या बिजली गुल (Blackout) हो जाए।
अस्थिरता का खतरा (Voltage Instability)
वोल्टेज अस्थिरता तब होती है जब सिस्टम में अचानक और अनियंत्रित तरीके से वोल्टेज में गिरावट (Voltage Collapse) शुरू हो जाती है।
- जैसे-जैसे लोड (Load) बढ़ता है, सिस्टम को उस लोड तक बिजली पहुंचाने के लिए अधिक रिएक्टिव पावर (Reactive Power) की आवश्यकता होती है।
- यदि सिस्टम पर्याप्त रिएक्टिव पावर की आपूर्ति नहीं कर पाता, तो वोल्टेज अचानक और तेजी से गिरने लगता है, जिससे कई ग्राहक कनेक्शन खो देते हैं या उनकी मशीनरी खराब हो जाती है।
11 kV / 415 V सबस्टेशन में वोल्टेज स्थिरता
डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन (जैसे 11 kV / 415 V सबस्टेशन) के स्तर पर वोल्टेज स्थिरता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है:
1. प्रतिक्रियाशील शक्ति प्रबंधन (Reactive Power Management)
वोल्टेज को स्थिर बनाए रखने के लिए रिएक्टिव पावर (kVAr) की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
- डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन में अक्सर कैपेसिटर बैंक (Capacitor Banks) लगाए जाते हैं।
- ये कैपेसिटर बैंक रिएक्टिव पावर की आपूर्ति करके वोल्टेज को बनाए रखने में मदद करते हैं और ट्रांसमिशन लाइन पर लोड कम करते हैं।
2. टैप चेंजर (Tap Changer)
11 kV / 415 V ट्रांसफार्मर में अक्सर टैप चेंजर (Tap Changer) लगे होते हैं।
- कार्य: जब इनपुट 11 kV वोल्टेज में उतार-चढ़ाव आता है, तो टैप चेंजर ट्रांसफार्मर के टर्न रेशियो (Turn Ratio) को थोड़ा समायोजित करके आउटपुट 415 V वोल्टेज को स्थिर रखने में मदद करता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि ग्राहकों को हमेशा स्वीकार्य सीमा के भीतर वोल्टेज मिलता रहे, भले ही प्राइमरी 11 kV लाइन पर कुछ उतार-चढ़ाव हो।
3. लोड प्रबंधन (Load Management)
सबस्टेशन फीडर पर अत्यधिक लोड से बचना भी स्थिरता के लिए आवश्यक है, क्योंकि ओवरलोडिंग से लाइनों में वोल्टेज ड्रॉप बढ़ जाता है।
संक्षेप में, वोल्टेज स्थिरता एक स्वस्थ बिजली आपूर्ति की पहचान है, और 11 kV / 415 V सबस्टेशन इसे बनाए रखने में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
11 केवी / 415 वी सबस्टेशन के मुख्य घटक क्या हैं?
हाँ, 11 kV / 415 V सबस्टेशन के मुख्य घटक वे उपकरण होते हैं जो बिजली को सुरक्षित रूप से कम वोल्टेज में परिवर्तित करने और वितरित करने के लिए आवश्यक हैं।
11 kV / 415 V सबस्टेशन के मुख्य घटक
इन सबस्टेशनों को आमतौर पर पोल-माउंटेड सबस्टेशन (Pole-Mounted Substation) या वितरण सबस्टेशन (Distribution Substation) कहा जाता है। इसके प्रमुख घटक (Components) नीचे दिए गए हैं:
1. उच्च वोल्टेज (11 kV) साइड उपकरण
ये घटक 11 kV की इनकमिंग लाइन पर सुरक्षा, अलगाव और नियंत्रण प्रदान करते हैं:
- लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arresters - LA):
- कार्य: आसमानी बिजली गिरने या अचानक उच्च वोल्टेज उछाल से ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों को बचाता है। यह सर्ज (Surge) को जमीन (Ground) में भेज देता है।
- आइसोलेटर / एबी स्विच (AB Switch or Isolator):
- कार्य: रखरखाव (Maintenance) या मरम्मत के दौरान पूरे सबस्टेशन को 11 kV लाइन से अलग (Isolate) करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे हमेशा बिना लोड (Off-Load) पर ही ऑपरेट किया जाता है।
- ड्रॉप आउट फ्यूज (Drop Out Fuses - DOF):
- कार्य: 11 kV लाइन पर ओवरकरंट और शॉर्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर को सुरक्षा प्रदान करता है। फॉल्ट होने पर फ्यूज लिंक नीचे गिर जाता है।
- 11 kV बस बार और इंसुलेटर:
- कार्य: 11 kV के कंडक्टरों को संरचना से अलग करने और जोड़ने के लिए।
2. ट्रांसफॉर्मेशन उपकरण
यह सबस्टेशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है:
- स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर (Step-Down Transformer):
- कार्य: यह 11,000 वोल्ट (11 kV) को कम करके 415 वोल्ट (415 V) (थ्री-फेज) में बदलता है। इसी से 240 V (सिंगल-फेज) की सप्लाई भी प्राप्त होती है। यह सबस्टेशन के हृदय के रूप में कार्य करता है।
3. कम वोल्टेज (415 V) साइड उपकरण
ये घटक कम वोल्टेज सप्लाई को नियंत्रित और वितरित करते हैं:
- LT पैनल / सर्किट ब्रेकर (LT Panel / Circuit Breaker):
- कार्य: ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी साइड पर ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करता है। आमतौर पर MCCB (Moulded Case Circuit Breaker) या HRC फ्यूज का उपयोग किया जाता है।
- LT बस बार:
- कार्य: 415 V की सप्लाई को कई आउटगोइंग फीडरों में विभाजित करने के लिए।
- केबल / ओवरहेड लाइनें:
- कार्य: 415 V और 240 V की बिजली को अंतिम उपभोक्ताओं तक ले जाने के लिए।
4. सहायक उपकरण (Ancillary Equipment)
- अर्थिंग सिस्टम (Earthing System):
- कार्य: ट्रांसफार्मर बॉडी, न्यूट्रल पॉइंट और लाइटनिंग अरेस्टर को ग्राउंड से जोड़कर उपकरणों और व्यक्तियों को सुरक्षित रखता है।
- स्ट्रक्चर (Structure):
- कार्य: सभी उपकरणों, विशेष रूप से ट्रांसफार्मर, को सहारा देने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोल और स्टील फ्रेम।
सबस्टेशनों में सुरक्षा?
सबस्टेशनों (Substations) में सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यहाँ उच्च वोल्टेज (High Voltage) पर बिजली का काम होता है। दुर्घटनाओं से बचने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय किए जाते हैं।
यहाँ कुछ मुख्य सुरक्षा उपाय दिए गए हैं:
बुनियादी सुरक्षा उपाय
- परिधि सुरक्षित करना (Securing Perimeter Area): सबस्टेशन के चारों ओर मजबूत बाड़ लगाना और अनाधिकृत प्रवेश को रोकना।
- चेतावनी संकेत (Warning Signs): खतरनाक क्षेत्रों, जैसे उच्च वोल्टेज वाले उपकरणों के पास, स्पष्ट और visible चेतावनी संकेत लगाना।
- प्रशिक्षित कर्मी (Trained Personnel): केवल प्रशिक्षित और अधिकृत कर्मचारियों को ही सबस्टेशन के अंदर काम करने की अनुमति देना।
- व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE): कर्मचारियों के लिए आर्क-फ्लैश (Arc-Flash) से सुरक्षा वाले कपड़े, रबर के दस्ताने, हेलमेट, सुरक्षा चश्मे और स्टील-टो वाले जूते जैसे पीपीई (PPE) का उपयोग अनिवार्य करना।
कार्य प्रक्रिया सुरक्षा
- लॉकआउट/टैगआउट (LOTO - Lockout/Tagout): किसी भी उपकरण पर काम शुरू करने से पहले, यह सुनिश्चित करना कि वह पूरी तरह से डी-एनर्जाइज्ड (de-energized) है और उसे लॉक कर दिया गया है ताकि कोई गलती से उसे चालू न कर दे।
- अर्थिंग (Earthing): उपकरणों को डी-एनर्जाइज्ड करने के बाद काम शुरू करने से पहले सुरक्षित अर्थिंग (safe earthing) सुनिश्चित करना।
- सेफ्टी क्लीयरेंस (Safety Clearance): उपकरण के वोल्टेज स्तर के अनुसार लाइव भागों से सुरक्षित दूरी (safe clearance) बनाए रखना और इन दूरी को दर्शाने वाले चार्ट प्रदर्शित करना।
- कार्य परमिट प्रणाली (Permit to Work System): किसी भी मरम्मत या रखरखाव के काम के लिए परमिट-टू-वर्क (Permit-to-Work) सिस्टम का पालन करना।
आपातकालीन उपाय
- अग्निशमन उपकरण (Fire Fighting Equipment): सबस्टेशन में ट्रांसफार्मर में तेल के कारण आग लगने का खतरा होता है, इसलिए CO2 या फोम-आधारित जैसे उपयुक्त अग्निशमन यंत्र (fire extinguishers) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- प्राथमिक उपचार और बचाव किट (First Aid and Rescue Kit): बिजली के झटके और अन्य चोटों के लिए तत्काल प्राथमिक उपचार किट और बचाव उपकरण (जैसे रेस्क्यू रॉड) उपलब्ध रखना।
- आपातकालीन संपर्क (Emergency Contacts): सभी आपातकालीन संपर्क नंबर (जैसे फायर, चिकित्सा सहायता) स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना।
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