अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर ( Difference between Earthing and Neutral )

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अर्थिंग और न्यूट्रल के बीच अंतर अक्सर लोग न्यूट्रल (Neutral) और अर्थिंग (Earthing) को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही तार अंततः जमीन से जुड़े होते हैं, लेकिन बिजली के सर्किट में इन दोनों का काम बिल्कुल अलग होता है। https://dkrajwar.blogspot.com/2026/01/difference-between-earthing-and-neutral.html ​इसे आसान भाषा में समझने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को देखें: ​1. न्यूट्रल (Neutral Wire) - "वापसी का रास्ता" ​न्यूट्रल तार का मुख्य काम बिजली के सर्किट को पूरा करना है। ​ कार्य: बिजली 'फेज' (Phase) तार से आती है और अपना काम करने के बाद 'न्यूट्रल' के जरिए वापस लौटती है। ​ स्रोत: यह मुख्य रूप से बिजली के ट्रांसफार्मर से आता है। ​ महत्व: बिना न्यूट्रल के आपका कोई भी उपकरण (जैसे बल्ब या पंखा) चालू नहीं होगा क्योंकि सर्किट अधूरा रहेगा। ​ रंग: आमतौर पर इसे काले (Black) रंग के तार से पहचाना जाता है। ​2. अर्थिंग (Earthing) - "सुरक्षा कवच" ​अर्थिंग का काम बिजली के उपकरणों को चलाना नहीं, बल्कि आपको करंट लगने से बचाना है। ​ कार्य: यदि किसी खराब...

बंडल कंडक्टर की पूरी व्याख्या ( Bundle Conductor Complete Explanation )

बंडल कंडक्टर की पूरी व्याख्या

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductor) एक उच्च वोल्टेज (High Voltage) पॉवर ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। इसमें एक ही चरण (Single Phase) के लिए एक मोटे एकल कंडक्टर के बजाय, एक साथ बंधे हुए (bundled) दो या दो से अधिक पतले कंडक्टरों का उपयोग किया जाता है।

​यह व्यवस्था मुख्य रूप से 220 kV और उससे अधिक की अति-उच्च वोल्टेज (Extra High Voltage - EHV) ट्रांसमिशन लाइनों में दक्षता बढ़ाने और ऊर्जा हानि (Power Loss) को कम करने के लिए उपयोग की जाती है।

बंडल कंडक्टर की अवधारणा

​बंडल कंडक्टर में, प्रत्येक चरण (R, Y, B) के लिए दो, तीन या चार उप-कंडक्टर (sub-conductors) को स्पेसर (Spacer) नामक उपकरण की मदद से एक निश्चित ज्यामितीय दूरी पर बांधा जाता है।

मुख्य उद्देश्य (Primary Reason)

​बंडल कंडक्टर का उपयोग करने का मुख्य कारण कंडक्टर के प्रभावी व्यास (Effective Diameter) को बढ़ाना है। इससे निम्नलिखित विद्युत पैरामीटर्स (Electrical Parameters) में अनुकूल परिवर्तन आते हैं:

  • ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR - Geometric Mean Radius) बढ़ता है।
  • लाइन प्रेरकत्व (Line Inductance, L) घटता है: L (1/GMR)
  • लाइन धारिता (Line Capacitance, C) बढ़ती है: C (GMR)

बंडल कंडक्टर के फायदे (Advantages)

​बंडल कंडक्टर के उपयोग से ट्रांसमिशन लाइन के प्रदर्शन (Performance) और दक्षता (Efficiency) में सुधार होता है:

  1. कोरोना डिस्चार्ज (Corona Discharge) में कमी:
    • ​उच्च वोल्टेज पर, कंडक्टर की सतह के चारों ओर हवा आयनीकृत (ionized) हो जाती है, जिसे कोरोना डिस्चार्ज कहते हैं। इससे ऊर्जा हानि होती है।
    • ​बंडलिंग से प्रभावी व्यास बढ़ जाता है, जिससे कंडक्टर की सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) कम हो जाती है, और कोरोना हानि (Corona Loss) कम हो जाती है।
  2. प्रेरकत्व (Inductance) में कमी:
    • ​लाइन का प्रेरकत्व घटने से वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop) कम होता है और लाइन की स्थिरता सीमा (Stability Limit) में सुधार होता है।
  3. शक्ति संचरण क्षमता में वृद्धि (Increased Power Carrying Capacity):
    • ​प्रति चरण अधिक कंडक्टर होने के कारण, लाइन की कुल धारा वहन क्षमता (Current Carrying Capacity) बढ़ जाती है, जिससे अधिक शक्ति संचारित की जा सकती है।
  4. स्किन इफ़ेक्ट (Skin Effect) में कमी:
    • ​स्किन इफ़ेक्ट वह घटना है जहाँ उच्च आवृत्ति (High Frequency) पर धारा कंडक्टर की सतह के पास अधिक प्रवाहित होती है। बंडलिंग से प्रभावी रूप से पतला कंडक्टर उपयोग होता है और यह प्रभाव कम हो जाता है।
  5. रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) में कमी:
    • ​कोरोना के कम होने से आसपास के संचार माध्यमों (Communication Lines) में होने वाला रेडियो हस्तक्षेप भी कम हो जाता है।

बंडल कंडक्टर के नुकसान (Disadvantages)

  1. जटिल संरचना (Complex Structure):
    • ​सिंगल कंडक्टर की तुलना में, स्पेसर और अधिक कंडक्टर के उपयोग से ट्रांसमिशन टॉवर पर लाइन की संरचना अधिक जटिल हो जाती है।
  2. आइस लोडिंग (Ice Loading) की समस्या:
    • ​बंडल कंडक्टर पर बर्फ या नमी जमा होने की संभावना अधिक होती है, जिससे कंडक्टर का वजन बढ़ जाता है और यांत्रिक तनाव (Mechanical Stress) बढ़ सकता है।
  3. स्पेसर का उपयोग:
    • ​उप-कंडक्टरों के बीच एक समान दूरी बनाए रखने के लिए समय-समय पर स्पेसरों की आवश्यकता होती है, जो रखरखाव (Maintenance) की लागत और जटिलता को बढ़ाता है।




बंडल कंडक्टर क्या है?

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductor) एक प्रकार का चालक (Conductor) होता है जिसमें एक फेज के लिए दो या दो से अधिक उप-चालकों (Sub-conductors) को एक साथ समूहित (Bundled) किया जाता है। ये उप-चालक एक-दूसरे से एक निश्चित दूरी पर, जिसे स्पेसर (Spacer) द्वारा बनाए रखा जाता है, समानांतर (Parallel) रूप से व्यवस्थित होते हैं।

​इसका उपयोग मुख्य रूप से अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (EHV) संचरण लाइनों (जैसे 220 kV से ऊपर) में किया जाता है।

बंडल कंडक्टर का उपयोग क्यों किया जाता है?

​बंडल कंडक्टर के उपयोग के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:

कोरोना नुकसान (Corona Loss) में कमी: यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है। बंडलिंग से चालक की प्रभावी सतह का क्षेत्रफल बढ़ जाता है, जिससे चालक की सतह पर वोल्टेज प्रवणता (Voltage Gradient) कम हो जाती है। वोल्टेज प्रवणता कम होने से कोरोना डिस्चार्ज (आयनिकरण के कारण होने वाला हल्का बैंगनी चमक और शक्ति हानि) कम हो जाता है।

लाइन प्रेरकत्व (Line Inductance) में कमी: बंडलिंग से चालकों का ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (Geometric Mean Radius - GMR) बढ़ जाता है, जिससे लाइन का प्रेरकत्व घट जाता है।

L = {mu_0}{2pi} ({GMD}/{GMR})


प्रेरकत्व घटने से लाइन का अभिक्रियाशील प्रतिबाधा (Reactive Impedance) कम हो जाता है।

धारिता (Capacitance) में वृद्धि: GMR बढ़ने से लाइन की धारिता बढ़ जाती है।

संचरण क्षमता (Transmission Capacity) में वृद्धि: प्रेरकत्व कम होने से लाइन की अधिकतम शक्ति संचरण क्षमता बढ़ जाती है।

स्किन प्रभाव (Skin Effect) में कमी: बंडल कंडक्टर का उपयोग स्किन प्रभाव को कम करने में भी मदद करता है, जिससे AC प्रतिरोध और शक्ति हानि (Power Loss) में कमी आती है।

संक्षेप में,

बंडल कंडक्टर उच्च दक्षता और कम नुकसान के साथ लंबी दूरी पर अधिक शक्ति को सफलतापूर्वक संचारित करने में सहायक होते हैं।




बंडल कंडक्टर का उपयोग क्यों किया जाता है? (उद्देश्य)

बंडल कंडक्टर का उपयोग उच्च वोल्टेज (High Voltage - HV) और अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (Extra-High Voltage - EHV) संचरण लाइनों में मुख्य रूप से कोरोना प्रभाव (Corona Effect) और लाइन प्रेरकत्व (Line Inductance) को कम करने के लिए किया जाता है।

​इसके उपयोग के प्रमुख उद्देश्य (Objectives) और लाभ (Advantages) नीचे दिए गए हैं:

मुख्य उद्देश्य

​1. कोरोना प्रभाव (Corona Effect) को कम करना

​बंडल कंडक्टर का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य कोरोना हानि (Corona Loss) को कम करना है।

  • कैसे: बंडलिंग से चालक का प्रभावी व्यास (Effective Diameter) बढ़ जाता है। व्यास बढ़ने से चालक की सतह पर वोल्टेज प्रवणता (Voltage Gradient) कम हो जाती है।
  • परिणाम: वोल्टेज प्रवणता कम होने से हवा का आयनीकरण (Ionization) कम होता है, जिससे कोरोना डिस्चार्ज, उससे जुड़ी ऊर्जा हानि (Power Loss), और रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) कम हो जाता है।

​2. लाइन प्रेरकत्व (Line Inductance) को कम करना

​बंडल कंडक्टर लाइन के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरकत्व को कम करते हैं।

  • कैसे: बंडलिंग से चालकों का ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR) बढ़ जाता है। चूँकि प्रेरकत्व GMR के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए प्रेरकत्व घट जाता है।
  • परिणाम: प्रेरकत्व घटने से लाइन का अभिक्रियाशील प्रतिबाधा (Reactive Impedance) कम हो जाता है, जिससे लाइन में वोल्टेज ड्रॉप कम होता है।

अन्य महत्वपूर्ण लाभ

​3. संचरण क्षमता (Transmission Capacity) में वृद्धि

  • ​प्रेरकत्व (Inductance) में कमी से लाइन की अधिकतम शक्ति संचरण क्षमता (Maximum Power Transfer Capability) बढ़ जाती है, जिससे समान लाइन से अधिक बिजली भेजी जा सकती है।

​4. धारिता (Capacitance) में वृद्धि

  • ​बंडलिंग से लाइन की धारिता बढ़ जाती है, जो लाइन के वोल्टेज विनियमन (Voltage Regulation) को बेहतर बनाने में मदद करती है।

​5. स्किन प्रभाव (Skin Effect) में कमी

  • ​बंडलिंग से चालक में धारा (Current) का वितरण अधिक समान हो जाता है, जिससे स्किन प्रभाव (Skin Effect) कम होता है और AC प्रतिरोध के कारण होने वाली शक्ति हानि में कमी आती है।

संक्षेप में, 

बंडल कंडक्टर उच्च वोल्टेज पर अधिक बिजली को कम नुकसान और बेहतर स्थिरता के साथ संचरित करने के लिए एक आवश्यक व्यवस्था है।





कोरोना नुकसान क्या है?

कोरोना नुकसान (Corona Loss) उच्च वोल्टेज संचरण लाइनों में होने वाली विद्युत ऊर्जा की हानि है, जो कोरोना प्रभाव (Corona Effect) के कारण होती है। यह एक अवांछनीय (undesirable) घटना है जो लाइन की दक्षता (efficiency) को कम करती है।

 कोरोना नुकसान क्या है?

​जब उच्च वोल्टेज (जैसे 110 kV से ऊपर) को चालकों (conductors) के माध्यम से संचरित किया जाता है, तो चालकों के आस-पास का विद्युत क्षेत्र इतना तीव्र हो जाता है कि वह आस-पास की हवा (जो सामान्यतः कुचालक होती है) को आयनित (ionize) करना शुरू कर देता है।

  • कोरोना प्रभाव: हवा के आयनीकरण के कारण चालक के चारों ओर एक हल्की बैंगनी/नीली आभा (faint glow) दिखाई देती है, साथ ही एक सरसराहट/फुफकार (hissing or crackling) की आवाज़ आती है और ओजोन गैस (O_3) का उत्पादन होता है। इस संपूर्ण घटना को ही कोरोना प्रभाव कहा जाता है।
  • कोरोना नुकसान: इस आयनीकरण प्रक्रिया के दौरान, कुछ विद्युत ऊर्जा ऊष्मा (heat), प्रकाश (light), और ध्वनि (sound) के रूप में वायुमंडल में ** dissipated (अपव्यय)** हो जाती है। विद्युत ऊर्जा का यह अपव्यय ही कोरोना नुकसान कहलाता है।

कोरोना नुकसान को प्रभावित करने वाले कारक:

  1. लाइन वोल्टेज (V): वोल्टेज जितना अधिक होगा, कोरोना नुकसान उतना ही अधिक होगा। यह क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज (V_c) से अधिक होने पर शुरू होता है।
  2. चालक का आकार (r): चालक का व्यास जितना कम होगा, सतह पर वोल्टेज प्रवणता उतनी ही अधिक होगी, और नुकसान भी अधिक होगा (बंडल कंडक्टर का उपयोग इसे कम करता है)।
  3. वायुमंडलीय स्थितियाँ (\delta): तूफानी या आर्द्र (humid) मौसम में हवा का आयनीकरण आसान हो जाता है, जिससे कोरोना नुकसान बढ़ जाता है।
  4. चालक की सतह की स्थिति: खुरदरी, धूल भरी या नुकीली सतहों पर कोरोना जल्दी शुरू होता है।

निष्कर्ष

​यह नुकसान संचरण लाइन की दक्षता को सीधे प्रभावित करता है और इसलिए बंडल कंडक्टर जैसी तकनीकों का उपयोग करके इसे कम करना आवश्यक होता है।





बंडल कंडक्टर कोरोना हानि को कैसे कम करते हैं?

बंडल कंडक्टर कोरोना हानि (corona loss) को निम्नलिखित तरीके से कम करते हैं:

  • प्रभावी व्यास (Effective Diameter) में वृद्धि:
    • ​जब एक चरण के लिए कई कंडक्टरों (चालकों) को एक साथ बंडल किया जाता है, तो यह एकल कंडक्टर की तुलना में कंडक्टर के प्रभावी व्यास को काफी बढ़ा देता है।
  • सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) में कमी:
    • ​बढ़े हुए प्रभावी व्यास के कारण, कंडक्टर की सतह के आसपास विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कम हो जाती है।
    • ​कोरोना प्रभाव तब होता है जब कंडक्टर के पास की हवा उच्च विद्युत क्षेत्र के कारण आयनीकृत (ionized) हो जाती है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता में कमी इस आयनीकरण को रोकती है या इसे होने के लिए आवश्यक वोल्टेज को बढ़ा देती है।
  • क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज (Critical Disruptive Voltage) में वृद्धि:
    • ​कोरोना हानि तब होती है जब लाइन वोल्टेज क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज से अधिक हो जाता है।
    • ​बंडल कंडक्टर प्रभावी व्यास को बढ़ाकर क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज (V_c) को बढ़ाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च वोल्टेज पर भी, कोरोना प्रभाव शुरू नहीं होता है या बहुत कम हो जाता है।
    • ​क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज का सूत्र लगभग इस प्रकार दिया जाता है: V_c \propto r \ln(d/r), जहाँ r कंडक्टर की त्रिज्या है। बंडल कंडक्टर प्रभावी रूप से r को बढ़ाते हैं।

संक्षेप में, 

बंडल कंडक्टर कंडक्टर की सतह पर वोल्टेज ग्रेडिएंट (Voltage Gradient) को फैलाकर या कम करके कोरोना को कम करते हैं, जिससे यह हवा को आयनीकृत करने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं रहता है।




एक बंडल में कितने कंडक्टर का उपयोग किया जाता है?

उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में एक बंडल में आमतौर पर दो (2), तीन (3), या चार (4) कंडक्टर का उपयोग किया जाता है।

​एक बंडल में कंडक्टरों की संख्या मुख्य रूप से ट्रांसमिशन लाइन के वोल्टेज स्तर पर निर्भर करती है:

वोल्टेज स्तर (kV)

आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले कंडक्टर प्रति फेज

220 kV

2 कंडक्टर

400 kV

2, 3, या 4 कंडक्टर

500 kV

3 या 4 कंडक्टर

765 kV और उच्च

4, 6, या 8 कंडक्टर


बंडल कंडक्टर क्यों उपयोग किए जाते हैं?

​बंडल कंडक्टरों का उपयोग मुख्य रूप से अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन लाइनों (जैसे 220\text{ kV} और उससे ऊपर) में किया जाता है, जिसके कई फायदे हैं:

कोरोना हानि में कमी:

  • ​यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है। एक बंडल कंडक्टर एक बड़े प्रभावी व्यास के रूप में कार्य करता है, जो कंडक्टर की सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को कम करता है।
  • ​कम तीव्रता से हवा का आयनीकरण (ionization) कम होता है, जिससे कोरोना हानि और रेडियो हस्तक्षेप कम हो जाता है।

प्रेरकत्व (Inductance) में कमी:

बंडलिंग चालकों के ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR) को बढ़ाती है, जिससे लाइन का प्रेरकत्व (L) घट जाता है।

L (GMD/GMR)

धारिता (Capacitance) में वृद्धि:

बंडलिंग से लाइन की धारिता (C) बढ़ जाती है।

C / 1/(GMD/GMR)

पावर ट्रांसफर क्षमता में वृद्धि:

  • ​कम प्रेरकत्व और बढ़ी हुई धारिता के कारण, लाइन की सर्ज प्रतिबाधा (Z_c = \sqrt{L/C}) कम हो जाती है, जिससे अधिकतम पावर ट्रांसफर करने की क्षमता बढ़ जाती है।





बंडल कंडक्टर के क्या लाभ हैं?

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductors) का उपयोग मुख्य रूप से अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (Extra High Voltage - EHV) ट्रांसमिशन लाइनों में किया जाता है, और इसके कई महत्वपूर्ण लाभ हैं।

बंडल कंडक्टर के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

​1. कोरोना हानि (Corona Loss) में कमी

  • कार्यविधि: बंडल कंडक्टर, एकल कंडक्टर की तुलना में, प्रभावी व्यास (Effective Diameter) को बढ़ाते हैं। बढ़े हुए प्रभावी व्यास के कारण, कंडक्टर की सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) कम हो जाती है।
  • परिणाम: इससे क्रांतिक विघटनकारी वोल्टेज (Critical Disruptive Voltage) बढ़ जाता है, जिससे उच्च वोल्टेज पर कोरोना डिस्चार्ज (corona discharge), पावर हानि (loss) और संबंधित श्रव्य शोर (Audible Noise - AN) कम हो जाता है।

​2. प्रेरकत्व (Inductance) और धारिता (Capacitance) पर प्रभाव

  • प्रेरकत्व में कमी: बंडलिंग कंडक्टरों के ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (Geometric Mean Radius - GMR) को बढ़ाती है। चूँकि प्रेरकत्व GMR के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए लाइन का प्रेरकत्व (L) घट जाता है
  • धारिता में वृद्धि: GMR में वृद्धि के कारण, लाइन की धारिता (C) बढ़ जाती है

​3. बिजली हस्तांतरण क्षमता (Power Transfer Capacity) में वृद्धि

  • ​कम प्रेरकत्व (L) और उच्च धारिता (C) के कारण, लाइन की सर्ज प्रतिबाधा (Z_c = \sqrt{L/C}) कम हो जाती है।
  • ​सर्ज प्रतिबाधा में कमी से लाइन की सर्ज प्रतिबाधा लोडिंग (Surge Impedance Loading - SIL) बढ़ जाती है, जिससे लाइन की अधिकतम बिजली हस्तांतरण क्षमता काफी बढ़ जाती है।

​4. वोल्टेज रेगुलेशन में सुधार

  • ​कम प्रेरकत्व के कारण लाइन में प्रेरकत्व रिएक्टेंस (Inductive Reactance) कम हो जाता है।
  • ​प्रेरकत्व रिएक्टेंस में कमी से लाइन में वोल्टेज ड्रॉप कम होता है, जिससे वोल्टेज रेगुलेशन (Voltage Regulation) बेहतर होता है।

​5. रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference - RI) में कमी

  • ​कोरोना प्रभाव में कमी के कारण, ट्रांसमिशन लाइन से निकलने वाला रेडियो हस्तक्षेप (RI) और श्रव्य शोर (Audible Noise) भी कम हो जाता है, जो संचार लाइनों के लिए महत्वपूर्ण है।

​6. करंट वहन क्षमता (Current Carrying Capacity) में वृद्धि

  • ​चूंकि प्रति फेज एक से अधिक कंडक्टर का उपयोग किया जाता है, इसलिए लाइन की कुल करंट वहन क्षमता (Current Carrying Capacity) बढ़ जाती है।
  • ​इससे I^2R हानि भी कम होती है, क्योंकि कुल धारा कई कंडक्टरों में विभाजित हो जाती है।






बंडल कंडक्टर के नुकसान क्या हैं?

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductors) मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज लाइनों के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इनके उपयोग के कुछ नुकसान (Disadvantages) भी हैं:

​1. लागत में वृद्धि (Increased Cost) 

एकल कंडक्टर के बजाय, प्रति फेज कई कंडक्टरों का उपयोग किया जाता है, जिससे सामग्री की लागत बढ़ जाती है।

कंडक्टरों को उचित दूरी पर रखने के लिए स्पेसर (Spacer) और स्पेसर डैम्पर (Spacer Damper) जैसे अतिरिक्त हार्डवेयर की आवश्यकता होती है, जो लागत को और बढ़ाते हैं।

स्पेसर डैम्पर के साथ एक बंडल कंडक्टर का कॉन्फ़िगरेशन।

2. स्थापना और रखरखाव में जटिलता (Complexity in Installation and Maintenance) 

  • ​एकल कंडक्टर की तुलना में बंडल कंडक्टरों की स्थापना अधिक जटिल होती है।
  • ​कई कंडक्टरों को स्पेसर के साथ संरेखित (align) करने और बनाए रखने के लिए अधिक श्रम और समय की आवश्यकता होती है।
  • निरीक्षण (Inspection) और मरम्मत अधिक कठिन हो जाती है, खासकर जब स्पेसर या किसी व्यक्तिगत स्ट्रैंड को नुकसान होता है।

​3. वायु और बर्फ भार में वृद्धि (Increased Wind and Ice Loading) 

  • ​चूंकि बंडल कंडक्टरों का कुल क्षेत्रफल एकल कंडक्टर की तुलना में काफी अधिक होता है, इसलिए वे तेज हवा (Wind) और बर्फ (Ice) के कारण टावर संरचना पर अधिक यांत्रिक बल (Mechanical Load) डालते हैं।
  • ​इस बढ़े हुए भार को सहन करने के लिए ट्रांसमिशन टावरों को अधिक मजबूत और भारी बनाने की आवश्यकता होती है, जो निर्माण लागत को बढ़ाता है।

​4. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की संभावना (Potential for Sub-Conductor Oscillation)

  • ​हवा के कारण बंडल के भीतर व्यक्तिगत कंडक्टरों के बीच दोलन (Oscillatory motion) होने की संभावना होती है। इस घटना को सब-कंडक्टर ऑसिलेशन (Sub-Conductor Oscillation) कहा जाता है।
  • ​इसे रोकने के लिए स्पेसर डैम्पर का उपयोग करना आवश्यक है, जो फिर से लागत और जटिलता को जोड़ता है।

​5. स्किन इफेक्ट का आंशिक उपयोग (Partial Utilization of Skin Effect)

  • ​हालांकि बंडल कंडक्टर स्किन इफेक्ट (त्वचा प्रभाव) को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी कंडक्टरों की सतह का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाता है। बंडल के भीतर के स्ट्रैंड्स उतना करंट नहीं ले जाते जितना कि बाहरी स्ट्रैंड्स।

​बंडल कंडक्टरों के फायदे आमतौर पर उनके नुकसान से कहीं अधिक होते हैं, खासकर EHV/UHV सिस्टम के लिए, लेकिन इन नुकसानों को डिजाइन और लागत विश्लेषण में ध्यान में रखा जाता है।

सूत्र प्रभाव: प्रेरकत्व का सूत्र GMR के व्युत्क्रमानुपाती होता है:





लाइन पैरामीटर पर बंडल कंडक्टर का क्या प्रभाव है?

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductors) ट्रांसमिशन लाइन के तीन मुख्य विद्युत पैरामीटर—प्रेरकत्व (Inductance), धारिता (Capacitance), और प्रतिरोध (Resistance)—को प्रभावित करते हैं।

​यहाँ लाइन पैरामीटर पर बंडल कंडक्टर का प्रभाव दिया गया है:

​1. प्रेरकत्व (Inductance, L) में कमी 

​बंडल कंडक्टर का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव लाइन के प्रेरकत्व को कम करना है।

कार्यविधि: बंडल कंडक्टर का उपयोग करने से प्रति फेज कंडक्टर का ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (Geometric Mean Radius - GMR) बढ़ जाता है।

L ({GMD}/{GMR \uparrow})


GMR में वृद्धि से, प्रति फेज प्रेरकत्व (L) घट जाता है

लाभ: कम प्रेरकत्व के कारण लाइन में प्रेरकत्व रिएक्टेंस कम होता है, जिससे वोल्टेज ड्रॉप कम होता है और लाइन की वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability) बेहतर होती है।


2. धारिता (Capacitance, C) में वृद्धि 

​बंडल कंडक्टर लाइन की धारिता को बढ़ाते हैं।

कार्यविधि: बंडलिंग प्रभावी रूप से कंडक्टरों के बीच की प्रभावी दूरी को कम करती है और ग्राउंड के सापेक्ष कंडक्टर के क्षेत्रफल को बढ़ाती है।

सूत्र प्रभाव: धारिता का सूत्र GMR के समानुपाती होता है:

C {1}{({GMD}{GMR \uparrow})}


GMR में वृद्धि से, प्रति फेज धारिता (C) बढ़ जाती है

लाभ: बढ़ी हुई धारिता उच्च वोल्टेज (EHV) प्रणालियों में रिएक्टिव पावर के संचरण को बेहतर बनाने में मदद करती है।

3. सर्ज प्रतिबाधा (Surge Impedance, Z_c) में कमी 

​लाइन की सर्ज प्रतिबाधा, प्रेरकत्व और धारिता पर निर्भर करती है।

  • सूत्र प्रभाव: सर्ज प्रतिबाधा का सूत्र है: Z_c = \sqrt{L/C} चूंकि L घटता है और C बढ़ता है, इसलिए सर्ज प्रतिबाधा (Z_c) घट जाती है
  • लाभ: कम Z_c का मतलब है कि सर्ज प्रतिबाधा लोडिंग (SIL) बढ़ जाती है, जिससे लाइन की अधिकतम बिजली हस्तांतरण क्षमता में काफी सुधार होता है।

​4. प्रतिरोध (Resistance, R) पर प्रभाव (मामूली कमी)

  • ​चूंकि प्रति फेज कई कंडक्टरों का उपयोग किया जाता है, इसलिए लाइन का कुल क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्रफल बढ़ जाता है।
  • ​इससे प्रभावी प्रतिरोध थोड़ा कम हो जाता है। इसके अलावा, बंडलिंग स्किन इफ़ेक्ट (Skin Effect) को कम करने में भी मदद करती है, जो प्रतिरोध को प्रभावित करता है।



एक बंडल में उप ठेकेदारों के बीच की दूरी क्या है?

क्षमा करें, आपका प्रश्न थोड़ा अस्पष्ट है।

​"एक बंडल में उप ठेकेदारों के बीच की दूरी" वाक्यांश निर्माण या सिविल इंजीनियरिंग के संदर्भ में एक मानक या तकनीकी शब्द नहीं है।

​यदि आप निर्माण कार्य के संदर्भ में पूछ रहे हैं, तो "दूरी" या "रिक्ति" (spacing) शब्द का उपयोग आमतौर पर निम्नलिखित के बीच की दूरी को संदर्भित करने के लिए किया जाता है:

  • स्टील बार्स (सरिया): कंक्रीट संरचनाओं जैसे बीम, स्लैब, या कॉलम में सुदृढीकरण (reinforcement) स्टील के बीच की दूरी।
  • शटरिंग या फॉर्मवर्क: कंक्रीट डालने के लिए उपयोग किए जाने वाले अस्थायी साँचों (moulds) के प्लेट्स/बोर्डों के बीच की दरारें या गैप

निर्माण में सामान्य दूरियाँ/रिक्ति

​यहाँ कुछ सामान्य दूरियाँ दी गई हैं, यह मानते हुए कि आपका प्रश्न निर्माण से संबंधित है:

​1. सुदृढीकरण (सरिया) की रिक्ति

​कंक्रीट संरचनाओं में मुख्य सरिया (main reinforcement bars) और वितरण सरिया (distribution bars) की रिक्ति (spacing) डिज़ाइन विनिर्देशों पर निर्भर करती है, लेकिन आमतौर पर यह निम्नलिखित के बीच होती है:

  • 100 mm से 300 mm (4 इंच से 12 इंच)।
  • ​यह कोड (IS Codes) के अनुसार अधिकतम रिक्ति (maximum spacing) और न्यूनतम रिक्ति (minimum spacing) की सीमाओं के भीतर होनी चाहिए ताकि कंक्रीट ठीक से भर सके और संरचना मजबूत हो।

​2. शटरिंग/फॉर्मवर्क गैप

​शटरिंग के टुकड़ों के बीच का गैप जितना संभव हो उतना कम होना चाहिए। अत्यधिक गैप से कंक्रीट का सीमेंट घोल (cement slurry) बाहर निकल सकता है, जिससे छत्ते (honeycombing) जैसी संरचनात्मक कमियाँ आ सकती हैं।

  • ​एक सामान्य दिशानिर्देश है कि गैप 15.5 mm (लगभग 1/2 इंच के सातवें भाग) से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • 10 mm से अधिक गैप को अक्सर अस्वीकार्य माना जाता है।


बंडल कंडक्टर में स्पेसर क्या हैं?

​बंडल कंडक्टर में स्पेसर (Spacer) एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग ट्रांसमिशन लाइनों में किया जाता है, खासकर उच्च वोल्टेज वाली लाइनों में जहाँ बंडल कंडक्टर (एक ही फेज के लिए कई कंडक्टर) का इस्तेमाल होता है।

स्पेसर क्या हैं और उनका कार्य क्या है?

​स्पेसर एल्यूमीनियम मिश्र धातु (Aluminum Alloy) से बने होते हैं और इनका मुख्य कार्य बंडल कंडक्टर के उप-कंडक्टरों (Sub-conductors) को निश्चित दूरी पर अलग-अलग रखना है।

 स्पेसर के मुख्य उद्देश्य और कार्य निम्नलिखित हैं:

  • निश्चित रिक्ति (Fixed Spacing) बनाए रखना: स्पेसर सुनिश्चित करते हैं कि एक ही फेज के सभी उप-कंडक्टरों के बीच की दूरी हर समय और हर मौसम में बनी रहे।
  • यांत्रिक स्थिरता (Mechanical Stability): ये आंधी, तूफान या हवा के कारण होने वाले दोलन (Oscillations) और कंपन (Vibrations) को कम करते हैं।
  • शॉर्ट सर्किट रोकना: कंडक्टरों को अलग रखकर, ये हवा के कारण उन्हें आपस में टकराने या स्पार्किंग (Sparking) से रोकते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा कम होता है।
  • कोरोना प्रभाव (Corona Effect) कम करना: बंडल कंडक्टर का उपयोग कोरोना प्रभाव और उससे होने वाली ऊर्जा हानि को कम करने के लिए किया जाता है। स्पेसर इस लाभ को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • इलेक्ट्रिकल प्रदर्शन में सुधार: यह कंडक्टरों के प्रेरण (Inductance) और धारिता (Capacitance) को स्थिर रखने में मदद करता है।

स्पेसर के प्रकार

​स्पेसर मुख्य रूप से कंडक्टरों की संख्या और डिज़ाइन के आधार पर कई प्रकार के होते हैं, जैसे:

  1. कठोर स्पेसर (Rigid Spacer): ये निश्चित दूरी प्रदान करते हैं।
  2. आर्टिकुलेटेड स्पेसर (Articulated Spacer): ये लचीले होते हैं और कंडक्टरों के थोड़े से मूवमेंट को समायोजित कर सकते हैं।
  3. स्पेसर डैम्पर (Spacer Damper): ये स्पेसर और डैम्पर (कंपन को कम करने वाला उपकरण) दोनों का कार्य करते हैं।




बंडल कंडक्टर के लिए कौन सी सामग्री का उपयोग किया जाता है?

​बंडल कंडक्टर (Bundled Conductors) में मुख्य रूप से एल्यूमीनियम और एल्यूमीनियम मिश्र धातु (Aluminum Alloy) से बनी सामग्री का उपयोग किया जाता है।

उपयोग की जाने वाली मुख्य सामग्री

​बंडल कंडक्टर, जो उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में एक ही फेज (Phase) के लिए कई उप-कंडक्टरों (Sub-conductors) के रूप में उपयोग होते हैं, मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियों से बनाए जाते हैं:

​1. एल्यूमीनियम कंडक्टर स्टील रीइन्फोर्स्ड (ACSR)

  • संरचना: इसमें एल्यूमीनियम के तार बाहर की तरफ (जो धारा वहन करते हैं) और स्टील (Steel) का कोर (केन्द्रीय भाग) होता है जो यांत्रिक शक्ति (Mechanical Strength) प्रदान करता है।
  • उपयोग: यह सबसे आम प्रकार का कंडक्टर है जिसका उपयोग बंडल कंडक्टर सिस्टम में किया जाता है, खासकर लंबी दूरी की ट्रांसमिशन लाइनों में जहाँ उच्च यांत्रिक शक्ति की आवश्यकता होती है।

​2. ऑल एल्यूमीनियम अलॉय कंडक्टर (AAAC)

  • संरचना: यह पूरी तरह से एल्यूमीनियम मिश्र धातु (जैसे AA 6201 मिश्र धातु) से बना होता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहाँ ACSR की तुलना में थोड़ा कम वजन, बेहतर संक्षारण प्रतिरोध (Corrosion Resistance), और अच्छी चालकता की आवश्यकता होती है।

​3. ऑल एल्यूमीनियम कंडक्टर (AAC)

  • संरचना: यह शुद्ध एल्यूमीनियम के तारों से बना होता है।
  • उपयोग: इसमें शक्ति (Strength) कम होती है, इसलिए यह मुख्य रूप से कम और मध्यम वोल्टेज वितरण लाइनों (Distribution Lines) के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन कुछ बंडल कॉन्फ़िगरेशन में भी देखा जा सकता है।

कंडक्टर का प्रकार

चालक सामग्री

मुख्य लाभ

ACSR

एल्यूमीनियम + स्टील कोर

उच्च यांत्रिक शक्ति

AAAC

एल्यूमीनियम मिश्र धातु

अच्छा संक्षारण प्रतिरोध, हल्का वजन

AAC

शुद्ध एल्यूमीनियम

उत्कृष्ट चालकता


एल्यूमीनियम को क्यों चुना जाता है?

​एल्यूमीनियम और उसके मिश्र धातुओं को बंडल कंडक्टर के लिए चुनने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • कम लागत (Low Cost): समान विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) वाले कॉपर (तांबे) कंडक्टर की तुलना में यह बहुत सस्ता होता है।
  • हल्का वजन (Light Weight): एल्यूमीनियम तांबे की तुलना में काफी हल्का होता है। यह वजन में कमी टावरों (Towers) पर भार को कम करती है, जिससे निर्माण लागत में कमी आती है।
  • कोरोना प्रभाव (Corona Effect) में कमी: बंडल कंडक्टर का उपयोग मुख्य रूप से कंडक्टर का प्रभावी व्यास (Effective Diameter) बढ़ाने और कोरोना प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। एल्यूमीनियम के हल्केपन के कारण, बड़े व्यास वाले कंडक्टरों को आसानी से उपयोग किया जा सकता है।




सिंगल और बंडल कंडक्टर के बीच क्या अंतर है?

सिंगल कंडक्टर (Single Conductor) और बंडल कंडक्टर (Bundled Conductor) के बीच मुख्य अंतर उनकी बनावट और उपयोग के उद्देश्य में है, खासकर उच्च वोल्टेज (High Voltage) पावर ट्रांसमिशन लाइनों में।

सिंगल और बंडल कंडक्टर में मुख्य अंतर


विशेषता

सिंगल कंडक्टर (Single Conductor)

बंडल कंडक्टर (Bundled Conductor)

परिभाषा

प्रति फेज़ (Per Phase) केवल एक चालक का उपयोग किया जाता है।

प्रति फेज़ दो या दो से अधिक उप-चालकों (Sub-conductors) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें स्पेसर (Spacers) द्वारा अलग रखा जाता है।

उपयोग

आमतौर पर कम और मध्यम वोल्टेज (जैसे 132 \text{ kV} से नीचे) संचरण लाइनों में।

मुख्य रूप से उच्च और अति उच्च वोल्टेज (जैसे 220 \text{ kV}, 400 \text{ kV}, 765 \text{ kV} और उससे ऊपर) संचरण लाइनों में।

कोरोना प्रभाव

उच्च वोल्टेज पर अधिक होता है, जिससे पावर लॉस और रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) बढ़ता है।

प्रभावी व्यास बढ़ने के कारण बहुत कम होता है। यही इसका सबसे बड़ा लाभ है।

प्रेरकत्व (Inductance) (L)

अधिक होता है।

कम होता है, क्योंकि ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR) बढ़ जाता है।

धारिता (Capacitance) (C)

कम होती है।

अधिक होती है।

सर्ज प्रतिबाधा (Surge Impedance) (Z_c = \sqrt{L/C})

अधिक होती है।

कम होती है।

पावर संचरण क्षमता

कम होती है।

अधिक होती है (क्योंकि सर्ज प्रतिबाधा लोडिंग (SIL) बढ़ जाती है)।

स्किन इफ़ेक्ट

अधिक करंट के लिए अधिक होता है।

कम होता है, जिससे धारा वहन क्षमता (Current Carrying Capacity) बढ़ जाती है।


 बंडल कंडक्टर का उपयोग क्यों किया जाता है?

​बंडल कंडक्टर का उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (HV) और अति उच्च वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन में होने वाली समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है:

  1. कोरोना लॉस में कमी (Reduction in Corona Loss): उच्च वोल्टेज पर सिंगल कंडक्टर के चारों ओर विद्युत क्षेत्र (Electric Field) का तनाव बहुत अधिक होता है, जिससे हवा का आयनीकरण (Ionization) होता है (जिसे कोरोना प्रभाव कहते हैं)। बंडल कंडक्टर प्रभावी व्यास को बढ़ाकर इस तनाव (Voltage Gradient) को कम कर देते हैं, जिससे कोरोना लॉस और उससे होने वाला शोर कम हो जाता है।
  2. प्रेरकत्व और संचरण क्षमता में सुधार: बंडलिंग से लाइन का प्रेरकत्व (L) कम हो जाता है और धारिता (C) बढ़ जाती है। इससे ट्रांसमिशन लाइन की अधिकतम पावर संचरण क्षमता (Maximum Power Transfer Capability) में काफी सुधार होता है।
  3. धारा वहन क्षमता में वृद्धि: बंडल कंडक्टर की कुल सतह क्षेत्र (Surface Area) बढ़ जाती है, जिससे कूलिंग बेहतर होती है और यह अधिक धारा को वहन कर पाता है।



एक बंडल के बजाय एक बहुत मोटी कंडक्टर का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?

​एक बंडल (Bundled) के बजाय एक बहुत मोटी सिंगल कंडक्टर का उपयोग न करने के मुख्य कारण विद्युत प्रदर्शन (Electrical Performance) और यांत्रिक सीमाएं (Mechanical Limitations) हैं, खासकर उच्च वोल्टेज (High Voltage) संचरण लाइनों में।

मुख्य कारण: कोरोना प्रभाव (Corona Effect)

​सबसे महत्वपूर्ण कारण कोरोना प्रभाव को नियंत्रित करना है।

  • सतह का विद्युत क्षेत्र तनाव (Surface Electric Field Stress): उच्च वोल्टेज पर, कंडक्टर की सतह के चारों ओर विद्युत क्षेत्र का तनाव बहुत अधिक हो जाता है। जब यह तनाव हवा की परावैद्युत शक्ति (Dielectric Strength) से अधिक हो जाता है, तो हवा आयनित (Ionized) हो जाती है। यह घटना कोरोना कहलाती है।
  • सिंगल मोटी कंडक्टर में समस्या: यदि आप समान क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्र (Cross-sectional Area) और संचरण क्षमता प्राप्त करने के लिए बस एक बहुत मोटी सिंगल कंडक्टर का उपयोग करते हैं, तो भी उसकी सतह पर वोल्टेज ग्रेडिएंट बहुत अधिक रहता है।
  • बंडल कंडक्टर समाधान: बंडल कंडक्टर में, उप-कंडक्टरों को फैलाकर एक बड़ा प्रभावी व्यास (Effective Diameter) बनाया जाता है।  यह बड़ा प्रभावी व्यास कंडक्टर की सतह पर विद्युत क्षेत्र के तनाव को नाटकीय रूप से कम कर देता है।
    • परिणाम: कोरोना लॉस (पावर लॉस) और रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) कम हो जाता है, जिससे लाइन की दक्षता बढ़ जाती है।

अन्य विद्युत और यांत्रिक अंतर

​बहुत मोटी सिंगल कंडक्टर के बजाय बंडल कंडक्टर का उपयोग करने के अन्य फायदे निम्नलिखित हैं:

कारक

सिंगल मोटी कंडक्टर

बंडल कंडक्टर

प्रेरकत्व (Inductance, L)

उच्च GMR (Geometric Mean Radius) के बावजूद भी अपेक्षाकृत अधिक होता है।

प्रभावी GMR काफी बढ़ जाता है, जिससे प्रेरकत्व (L) कम हो जाता है।

धारिता (Capacitance, C)

कम होती है।

बढ़ जाती है।

संचरण क्षमता (Power Transfer)

उच्च प्रेरकत्व के कारण सीमित होती है।

कम प्रेरकत्व और उच्च धारिता के कारण बहुत अधिक होती है।

स्किन इफ़ेक्ट (Skin Effect)

बहुत मोटी कंडक्टर में AC धारा मुख्य रूप से बाहरी सतह पर प्रवाहित होती है, जिससे आंतरिक भाग का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाता और AC प्रतिरोध (Resistance) बढ़ जाता है।

कई छोटे कंडक्टरों के कारण स्किन इफ़ेक्ट कम हो जाता है, जिससे सभी कंडक्टरों का अधिक कुशलता से उपयोग होता है।

यांत्रिक व्यवहार

बहुत भारी और कठोर (Rigid) होता है, जिससे उसे उठाना (Support करना) और स्थापित करना कठिन हो जाता है।

हल्का और अधिक लचीला (Flexible) होता है, जिससे इसे स्थापित करना और पवन-जनित दोलनों (Wind-induced Oscillations) को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।


संक्षेप में,

बंडल कंडक्टर एक ही भौतिक आकार के मोटी सिंगल कंडक्टर की तुलना में बेहतर विद्युत गुण (कम कोरोना लॉस, कम प्रेरकत्व, उच्च संचरण क्षमता) प्रदान करते हैं, जो उन्हें उच्च वोल्टेज संचरण के लिए अधिक कुशल और आर्थिक बनाते हैं।





टावर के यांत्रिक डिजाइन पर बंडल कंडक्टर का क्या प्रभाव है?

​बंडल कंडक्टर (Bundled Conductors) का टावर के यांत्रिक डिजाइन (Mechanical Design of Tower) पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव मुख्य रूप से वजन, हवा के भार, और दोलन से संबंधित है।

टावर के यांत्रिक डिजाइन पर बंडल कंडक्टर के प्रभाव

​बंडल कंडक्टर का उपयोग उच्च वोल्टेज लाइनों में होता है, और वे टावर पर निम्नलिखित यांत्रिक प्रभाव डालते हैं:

​1. टावर पर बढ़ा हुआ कुल भार (Increased Total Load)

  • वजन में वृद्धि: एक बंडल कंडक्टर में प्रति फेज़ दो, तीन या चार उप-कंडक्टर (Sub-conductors) होते हैं। भले ही व्यक्तिगत कंडक्टर हल्के हों, लेकिन एक सिंगल मोटे कंडक्टर के बजाय कई कंडक्टरों का उपयोग करने से प्रति फेज़ कुल वजन बढ़ जाता है।
  • स्पेसर का भार: कंडक्टरों को एक निश्चित दूरी पर रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले स्पेसर (Spacers) भी अतिरिक्त भार डालते हैं।
  • डिज़ाइन पर प्रभाव: इस बढ़े हुए कुल भार को सहारा देने के लिए टावर के फाउंडेशन (Foundation) और संरचनात्मक सदस्यों (Structural Members) को अधिक मजबूत और मजबूत जालीदार (Lattice) स्टील का डिज़ाइन करना पड़ता है।

​2. हवा के भार में वृद्धि (Increased Wind Load)

  • बढ़ी हुई सतह का क्षेत्रफल: बंडल कंडक्टर कई उप-कंडक्टरों के कारण हवा के संपर्क में आने वाला कुल सतह क्षेत्र (Total Surface Area) बढ़ा देते हैं।
  • पवन बल (Wind Force): बढ़े हुए सतह क्षेत्र पर हवा का बल अधिक लगता है। यह बल टावर पर क्षैतिज भार (Horizontal Load) बढ़ाता है, विशेष रूप से मजबूत हवाओं या तूफानों के दौरान।
  • डिज़ाइन पर प्रभाव: टावर को इस बढ़े हुए ट्रांसवर्स (अनुप्रस्थ) भार का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए, जिसका अर्थ है कि टावर की चौड़ाई (Cross-arm length) और उसकी समग्र कठोरता (Stiffness) को बढ़ाना पड़ सकता है।

​3. दोलन नियंत्रण (Oscillation Control)

  • गैलोपिंग और फ़्लटर: बंडल कंडक्टर हवा के कारण होने वाले दोलन (Oscillations) और गैलोपिंग (Galloping - बड़े आयाम का कम आवृत्ति वाला दोलन) के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।
  • स्पेसर डैम्पर: इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए, नियमित स्पेसर के बजाय स्पेसर डैम्पर (Spacer Dampers) का उपयोग किया जाता है। ये उपकरण कंपन ऊर्जा को अवशोषित करते हैं।
  • डिज़ाइन पर प्रभाव: स्पेसर डैम्पर का उपयोग यांत्रिक स्थिरता प्रदान करता है, जिससे टावर पर अतिरिक्त गतिशील भार (Dynamic Loads) कम हो जाता है, जिससे टावर को केवल स्थैतिक भार (Static Loads) के लिए डिज़ाइन करने में मदद मिलती है।

​4. क्रॉस-आर्म डिज़ाइन (Cross-arm Design)

क्रॉस-आर्म की लंबाई: बंडल कंडक्टर में उप-कंडक्टरों को फैलाकर रखा जाता है। इससे प्रत्येक फेज़ के लिए आवश्यक चौड़ाई बढ़ जाती है।

फेज़-से-फेज़ दूरी: हालांकि बंडलिंग मुख्य रूप से विद्युत कारणों से की जाती है, लेकिन यह फेज़-से-फेज़ (Phase-to-Phase) रिक्ति को बनाए रखने के लिए भी क्रॉस-आर्म की लंबाई को प्रभावित करता है ताकि क्लीयरेंस (Clearance) बना रहे।

 डिज़ाइन पर प्रभाव: इसका परिणाम लम्बे और मजबूत क्रॉस-आर्म के रूप में होता है, जिससे टावर की सामग्री की आवश्यकता और निर्माण लागत बढ़ जाती है।






बंडल कंडक्टर का उपयोग कहां किया जाता है?

बंडल कंडक्टरों (Bundled Conductors) का उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज ओवरहेड संचरण लाइनों (High Voltage Overhead Transmission Lines) में किया जाता है, विशेष रूप से 220 kV और उससे अधिक के अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (Extra High Voltage - EHV) और अति उच्च वोल्टेज (Ultra High Voltage - UHV) सिस्टम में।

मुख्य अनुप्रयोग क्षेत्र

​बंडल कंडक्टरों का उपयोग निम्नलिखित कारणों और लाभों के लिए किया जाता है:

​1. उच्च वोल्टेज संचरण (High Voltage Transmission)

बंडल कंडक्टरों का उपयोग आमतौर पर 220 kV, 400 kV, 500 kV, 765 kV और उससे अधिक वोल्टेज स्तरों की ट्रांसमिशन लाइनों में किया जाता है।

उच्च वोल्टेज पर, एक ही फेज के लिए एक से अधिक उप-चालकों (sub-conductors) का उपयोग करने से ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR) बढ़ जाता है।

2. कोरोना प्रभाव को कम करना (Reducing Corona Effect)

  • ​यह बंडल कंडक्टरों के उपयोग का प्राथमिक कारण है।
  • ​उच्च वोल्टेज पर, कंडक्टरों के आसपास की हवा आयनित होकर कोरोना निर्वहन (Corona Discharge) उत्पन्न करती है, जिससे बिजली का नुकसान होता है और रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) होता है।
  • ​बंडल कंडक्टर प्रभावी रूप से चालक की सतह पर वोल्टेज प्रवणता (Voltage Gradient) को कम कर देते हैं, जिससे कोरोना हानि (Corona Loss) और रेडियो हस्तक्षेप कम हो जाता है।

​3. प्रेरकत्व को कम करना (Reducing Inductance)

  • ​बंडलिंग से चालक का GMR बढ़ता है, जिससे लाइन का प्रेरकत्व (L) कम हो जाता है।
  • ​कम प्रेरकत्व का अर्थ है कम प्रेरक प्रतिघात (X_L) और इसलिए लाइन में वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop) कम होता है। इससे वोल्टेज नियमन (Voltage Regulation) में सुधार होता है।

​4. शक्ति संचरण क्षमता बढ़ाना (Increasing Power Transfer Capability)

  • ​प्रेरकत्व घटने और धारिता (C) बढ़ने से लाइन की सर्ज प्रतिबाधा (Z_c = \sqrt{L/C}) घट जाती है।
  • ​सर्ज प्रतिबाधा में कमी के कारण लाइन की अधिकतम शक्ति संचरण क्षमता (Maximum Power Transfer Capability) बढ़ जाती है।
  • ​एक ही फेज के लिए कई कंडक्टरों का उपयोग करने से कुल धारा वहन क्षमता (Current Carrying Capacity) भी बढ़ जाती है।

​5. I²R हानियों को कम करना (Reducing I²R Losses)

  • ​एकल बड़े कंडक्टर के बजाय कई पतले कंडक्टरों का उपयोग करने से त्वचा प्रभाव (Skin Effect) कम होता है। त्वचा प्रभाव में, AC करंट कंडक्टर की सतह की ओर केंद्रित हो जाता है, जिससे प्रभावी प्रतिरोध बढ़ जाता है।
  • ​त्वचा प्रभाव में कमी के कारण प्रभावी AC प्रतिरोध कम हो जाता है, जिससे I^2R तांबा हानि (Copper Loss) कम हो जाती है।



भारत में प्रयुक्त बंडल कंडक्टरों का वास्तविक जीवन उदाहरण?

भारत में बंडल कंडक्टरों का उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (HV) और अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन लाइनों, यानी 220 kV और उससे ऊपर की लाइनों में किया जाता है।

यह उपयोग मुख्य रूप से कोरोना प्रभाव (Corona Effect) को कम करने और शक्ति संचरण क्षमता (Power Transfer Capability) को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

भारत में प्रयुक्त वास्तविक जीवन के उदाहरण

​भारत की प्रमुख ट्रांसमिशन उपयोगिता, जैसे पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (POWERGRID), अपनी हाई-वोल्टेज लाइनों के लिए बंडल कंडक्टरों का व्यापक रूप से उपयोग करती है।

वोल्टेज स्तर

बंडल व्यवस्था (प्रति फेज)

विशिष्ट कंडक्टर प्रकार

220 kV

2-कंडक्टर बंडल (Twin Bundle)

ACSR 'ज़ेबरा' या 'मूस' (Zebra or Moose)

400 kV

2-कंडक्टर बंडल (Twin Bundle)

ACSR 'मूस' (Moose) या 'पेंथर' (Panther)

765 kV

4-कंडक्टर बंडल (Quad Bundle)

ACSR 'क्वाड बंडल' (Quad Bundle)

HVDC लाइन्स

2 या 3-कंडक्टर बंडल

ACSR या उच्च तापमान वाले कंडक्टर

1. 400 kV ट्रांसमिशन लाइनें (Twin Bundle)

  • ​यह भारत में EHV संचरण का सबसे आम स्तर है।
  • ​इन लाइनों में प्रति फेज दो उप-चालकों (Two sub-conductors) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें लगभग 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर स्पेसर (Spacer) द्वारा अलग रखा जाता है।
  • उदाहरण: 400 kV लाइनें आमतौर पर 'ट्विन मूस' (Twin Moose) ACSR (एल्युमिनियम कंडक्टर स्टील रीइनफोर्स्ड) कंडक्टर का उपयोग करती हैं।

​2. 765 kV ट्रांसमिशन लाइनें (Quad Bundle)

  • ​यह भारत की अति उच्च वोल्टेज (UHV) संचरण लाइनों में से एक है।
  • ​इन लाइनों में प्रति फेज चार उप-चालकों (Four sub-conductors) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें एक वर्ग (Square) विन्यास में व्यवस्थित किया जाता है।
  • उपयोग: इन लाइनों में बड़े पैमाने पर बिजली के संचरण और कोरोना हानि को न्यूनतम रखने के लिए यह 'क्वाड' व्यवस्था आवश्यक है।

​3. कंडक्टर का प्रकार (ACSR)

  • ​उपयोग किए जाने वाले अधिकांश बंडल कंडक्टर ACSR (Aluminum Conductor Steel Reinforced) प्रकार के होते हैं।
  • ​बाहरी एल्युमिनियम स्ट्रैंड्स उच्च चालकता प्रदान करते हैं, जबकि अंदर के स्टील कोर यार्न को आवश्यक यांत्रिक शक्ति (Mechanical Strength) प्रदान करते हैं ताकि वे बड़े अंतराल (Long spans) और ऊँचे टावरों पर लटके रह सकें।

प्रमुख घटक: स्पेसर (Spacer)

​वास्तविक जीवन में, बंडल कंडक्टरों को टावर के बीच में एक साथ बांधा नहीं जाता है, बल्कि उन्हें एक दूसरे से निश्चित दूरी पर रखने के लिए हर 30 से 100 मीटर के अंतराल पर विशेष स्पेसर डैम्पर्स (Spacer Dampers) का उपयोग किया जाता है। यह स्पेसर:

  1. ​कंडक्टरों के बीच निश्चित दूरी बनाए रखते हैं।
  2. ​तेज हवा या शॉर्ट सर्किट के दौरान कंडक्टरों को आपस में टकराने (Clashing) से रोकते हैं।
  3. ​कंडक्टरों में कंपन (Vibration) को अवशोषित करते हैं।


बंडल कंडक्टर का सारांश यहाँ दिया गया है, जिसे याद रखना आसान है:?

बंडल कंडक्टर: आसान सारांश

विशेषता

विवरण

फायदा (क्यों इस्तेमाल करें)

क्या है?

एक ही फेज के लिए दो या दो से अधिक पतले कंडक्टरों का समूह।

बड़ी मात्रा में बिजली ले जा सकता है।

कहाँ उपयोग?

उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन्स (220 kV और उससे ऊपर)। भारत में 400 kV (ट्विन बंडल) और 765 kV (क्वाड बंडल) में मुख्य रूप से।

उच्च वोल्टेज पर होने वाली समस्याओं से बचाता है।

मुख्य लक्ष्य

कोरोना प्रभाव (Corona Effect) को कम करना।

बिजली का नुकसान कम होता है, रेडियो हस्तक्षेप कम होता है।

तकनीकी लाभ 1

चालक की प्रभावी त्रिज्या बढ़ जाती है।

कोरोना डिस्चार्ज कम होता है।

तकनीकी लाभ 2

लाइन का प्रेरकत्व (L) घट जाता है।

वोल्टेज ड्रॉप कम होता है और वोल्टेज नियमन बेहतर होता है।

तकनीकी लाभ 3

लाइन की धारिता (C) बढ़ जाती है।

सर्ज प्रतिबाधा कम होती है, जिससे शक्ति संचरण क्षमता बढ़ती है।

याद रखने के लिए

कंडक्टरों को एक निश्चित दूरी पर रखने के लिए स्पेसर (Spacers) का उपयोग किया जाता है।

कंडक्टरों को आपस में टकराने से रोकता है।


निष्कर्ष

​बंडल कंडक्टर उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के सुपरहीरो हैं, जो कोरोना को कम करने और अधिक शक्ति को कुशलता से भेजने के लिए उपयोग किए जाते हैं।




बंडल कंडक्टरों की अंतिम अवधारणा?

बंडल कंडक्टरों की अंतिम अवधारणा को संक्षेप में समझना उच्च वोल्टेज संचरण प्रणाली (High Voltage Transmission System) के लिए उनके महत्व और कार्य को स्पष्ट करता है।

बंडल कंडक्टरों की अंतिम अवधारणा (Final Concept of Bundled Conductors)

​बंडल कंडक्टरों की अवधारणा का अंतिम उद्देश्य एकल कंडक्टर के सभी दोषों को दूर करते हुए उच्च वोल्टेज पर बिजली को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से संचारित करना है।

​1. परिभाषा और संरचना (Definition & Structure)

अवधारणा: बंडल कंडक्टर का अर्थ है कि ट्रांसमिशन लाइन में प्रत्येक फेज के लिए एक मोटे कंडक्टर के बजाय, दो या दो से अधिक उप-चालकों (Sub-conductors) का उपयोग किया जाता है।

व्यवस्था: इन उप-चालकों को एक दूसरे से एक निश्चित, छोटी दूरी (आमतौर पर 30 से 45 सेंटीमीटर) पर रखा जाता है और इस दूरी को बनाए रखने के लिए स्पेसर (Spacer) का उपयोग किया जाता है।

 

2. मुख्य उद्देश्य (The Core Goal)

​बंडल कंडक्टरों को मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज (HV, EHV, UHV) संचरण (Transmission) के लिए डिज़ाइन किया गया है, और उनके तीन प्राथमिक लक्ष्य हैं:

​ A. कोरोना प्रभाव को कम करना (To Mitigate Corona Effect)

  • कार्य: बंडलिंग से कंडक्टर का प्रभावी व्यास (Effective Diameter) बढ़ जाता है।
  • परिणाम: यह कंडक्टर की सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) या वोल्टेज प्रवणता (Voltage Gradient) को कम करता है।
  • अंतिम लाभ: कोरोना डिस्चार्ज, जिसके कारण बिजली की हानि होती है और रेडियो हस्तक्षेप (Radio Interference) होता है, न्यूनतम हो जाता है।

​ B. प्रेरकत्व को कम करना (To Reduce Inductance - L)

  • कार्य: कंडक्टर का ज्यामितीय माध्य त्रिज्या (GMR) बढ़ जाता है।
  • परिणाम: लाइन का प्रेरकत्व (L) घट जाता है।
  • अंतिम लाभ: लाइन का वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop) कम होता है, जिससे लाइन की दक्षता और वोल्टेज नियमन (Voltage Regulation) बेहतर होता है।

​ C. संचरण क्षमता बढ़ाना (To Increase Power Transfer Capability)

  • कार्य: कम L और बढ़ी हुई धारिता (C) के कारण, लाइन की सर्ज प्रतिबाधा (Z_c = \sqrt{L/C}) घट जाती है।
  • परिणाम: लाइन की अधिकतम शक्ति संचरण क्षमता (Maximum Power Transfer Capability) बढ़ जाती है।
  • अंतिम लाभ: एक ही टावर और राइट-ऑफ-वे (Right-of-Way) का उपयोग करके अधिक बिजली को लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है।

सारांश में अंतिम अवधारणा

​बंडल कंडक्टर शक्ति संचरण लाइनों का एक आवश्यक विकास है जो उच्च वोल्टेज पर दक्षता, विश्वसनीयता और पर्यावरण के अनुकूल संचालन सुनिश्चित करता है। वे महंगे टावर संरचनाओं में मामूली वृद्धि के साथ, लाइन की क्षमता और प्रदर्शन में बड़ा सुधार प्रदान करते हैं।

  • मूल मंत्र: कम कोरोना, कम प्रेरकत्व, अधिक शक्ति संचरण




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