मल्टीमीटर का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत सर्किट का परीक्षण करने, समस्याओं का पता लगाने और मरम्मत करने के लिए एक आवश्यक उपकरण के रूप में किया जाता है।
एनालॉग मल्टीमीटर एक सुई (needle) और एक स्केल (scale) का उपयोग करता है। यह एक गैल्वेनोमीटर पर आधारित होता है। यह विद्युत धारा, वोल्टेज और प्रतिरोध जैसी राशियों को मापने के लिए सुई की स्थिति को दर्शाता है। यह एक सस्ता और सरल उपकरण है, लेकिन इसकी रीडिंग लेने में अधिक सावधानी और अनुभव की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसमें पैमाना कई बार अस्पष्ट हो सकता है।
डिजिटल मल्टीमीटर एक एलसीडी या एलईडी डिस्प्ले का उपयोग करता है जो मापी गई राशि को सीधे संख्या के रूप में दिखाता है। यह अधिक सटीक और उपयोग में आसान होता है। अधिकांश आधुनिक मल्टीमीटर डिजिटल होते हैं, क्योंकि वे अतिरिक्त कार्य भी प्रदान करते हैं, जैसे कि कंटिन्युइटी (continuity), डायोड और ट्रांजिस्टर परीक्षण। यह अधिक विश्वसनीय और पढ़ने में आसान होता है।
ये तीनों कार्य मल्टीमीटर को इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल कार्य में एक आवश्यक उपकरण बनाते हैं।
ये तीनों कार्य मल्टीमीटर को इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल कार्य में एक आवश्यक उपकरण बनाते हैं।
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि आप सही और सुरक्षित तरीके से डीसी वोल्टेज का मापन कर सकें।
इन सावधानियों का पालन करके आप सुरक्षित रूप से और सही ढंग से मल्टीमीटर का उपयोग कर सकते हैं।
डीएमएम का उपयोग करना बहुत आसान है। आपको स्केल को पढ़ने और अनुमान लगाने की आवश्यकता नहीं है। संख्यात्मक प्रदर्शन सीधे और समझने में आसान होता है, जिससे शुरुआती लोगों के लिए यह एक आदर्श उपकरण बन जाता है।
आधुनिक डीएमएम केवल वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध को मापने तक सीमित नहीं हैं। उनमें अक्सर कई अतिरिक्त कार्य शामिल होते हैं, जैसे:
डीएमएम में कोई चलती हुई यांत्रिक भाग नहीं होती है, जिससे वे झटके और कंपन के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। यह उन्हें कार्यस्थल में अधिक टिकाऊ बनाता है।
इन सभी फायदों के कारण, डिजिटल मल्टीमीटर आज के समय में अधिकांश विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स पेशेवरों और शौकीनों द्वारा पसंद किए जाते हैं।
इन नुकसानों के बावजूद, डिजिटल मल्टीमीटर अपनी सटीकता, उपयोग में आसानी और अतिरिक्त कार्यों के कारण अधिकांश अनुप्रयोगों के लिए एक बेहतर विकल्प हैं। हालांकि, जहां सिग्नल के उतार-चढ़ाव का निरीक्षण करना महत्वपूर्ण होता है (जैसे कि कुछ ऑडियो या आरएफ सर्किट में), वहां एनालॉग मल्टीमीटर अभी भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
यह नाम इन तीन कार्यों का संक्षिप्त रूप है, जो पारंपरिक एनालॉग मल्टीमीटर के सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण कार्य थे। डिजिटल मल्टीमीटर में भले ही और भी कई कार्य होते हैं, लेकिन VOM नाम आज भी इस उपकरण के बुनियादी उद्देश्य को दर्शाता है।
अल्पतमांक, जिसे न्यूनतम मापन योग्य मान भी कहते हैं, स्केल पर सबसे छोटे डिवीजन का मान होता है।
इसे मापने के लिए, आपको निम्न सूत्र का उपयोग करना होगा: अल्पतमांक = (रेंज का मान) / (स्केल पर डिवीजनों की कुल संख्या) उदाहरण के लिए, यदि एक एनालॉग मल्टीमीटर को 10V की रेंज पर सेट किया गया है और उस स्केल पर 100 डिवीजन हैं, तो अल्पतमांक होगा: 10V / 100 divisions = 0.1V इसलिए, मल्टीमीटर की सुई 0.1V के प्रत्येक डिवीजन के लिए चलेगी। यदि आप रेंज को बदलकर 50V करते हैं, तो अल्पतमांक भी बदल जाएगा।
सही तरीके से मल्टीमीटर का उपयोग करके, आप न केवल अपने उपकरणों की सुरक्षा कर सकते हैं बल्कि अपनी खुद की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
घरेलू उपकरण: आप अपने घर में खराब हो चुके उपकरणों जैसे कि बिजली के तार, फ्यूज, और स्विच की जांच कर सकते हैं। यह पता लगाने में मदद करता है कि क्या कोई उपकरण ठीक से काम कर रहा है या नहीं।
इलेक्ट्रॉनिक्स: इलेक्ट्रॉनिक्स में, इसका उपयोग छोटे घटकों (जैसे कि प्रतिरोधक, संधारित्र, और डायोड) की जांच करने, सर्किट की निरंतरता (continuity) की जांच करने, और किसी भी खराबी का पता लगाने के लिए किया जाता है।
ऑटोमोटिव: कारों और अन्य वाहनों में, मल्टीमीटर का उपयोग बैटरी की वोल्टेज, अल्टरनेटर, और अन्य बिजली के हिस्सों की जांच करने के लिए किया जाता है। यह कार की बिजली प्रणाली में समस्या का पता लगाने में बहुत मददगार होता है।
सौर ऊर्जा: सौर पैनलों के वोल्टेज और करंट को मापने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे सही ढंग से काम कर रहे हैं, मल्टीमीटर एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
औद्योगिक रखरखाव: कारखानों और औद्योगिक सेटिंग्स में, मल्टीमीटर का उपयोग मशीनों और बिजली के पैनलों के रखरखाव और मरम्मत के लिए किया जाता है। यह संभावित विफलताओं को रोकने में मदद करता है।
सही तरीके से मल्टीमीटर का उपयोग करना, न केवल उपकरणों की मरम्मत और जांच में मदद करता है, बल्कि सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।
मल्टीमीटर का आंतरिक प्रतिरोध उसके मापने के तरीके (मोड) पर निर्भर करता है:
- वोल्टेज मापने के मोड (वोल्टमीटर): एक मल्टीमीटर जब वोल्टेज मापता है, तो उसका आंतरिक प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, आदर्श रूप से अनंत। ऐसा इसलिए है ताकि जब इसे किसी सर्किट के समानांतर जोड़ा जाए, तो यह सर्किट से बहुत कम करंट खींचे। यदि आंतरिक प्रतिरोध कम होता, तो यह सर्किट पर एक लोड डालता और मापी गई वोल्टेज की रीडिंग गलत होती। आमतौर पर, डिजिटल मल्टीमीटर का आंतरिक प्रतिरोध 10 मेगाओम (MΩ) या उससे अधिक होता है।
- करंट मापने के मोड (एमीटर): जब मल्टीमीटर करंट मापता है, तो इसका आंतरिक प्रतिरोध बहुत कम होता है, आदर्श रूप से शून्य। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब इसे सर्किट के साथ सीरीज में जोड़ा जाए, तो यह सर्किट में अतिरिक्त प्रतिरोध न जोड़े। यदि आंतरिक प्रतिरोध अधिक होता, तो यह सर्किट के कुल प्रतिरोध को बढ़ा देता और मापा गया करंट का मान कम होता।
- प्रतिरोध मापने के मोड (ओहममीटर): इस मोड में मल्टीमीटर में एक आंतरिक सेल होता है जो सर्किट में करंट भेजता है और फिर उस करंट के आधार पर प्रतिरोध की गणना करता है। इस स्थिति में आंतरिक प्रतिरोध का मान, सर्किट के प्रतिरोध के साथ मिलकर काम करता है।
डिजिटल मल्टीमीटर को एनालॉग मल्टीमीटर की तुलना में कई कारणों से अधिक पसंद किया जाता है, जिनमें मुख्य रूप से उच्च सटीकता, उपयोग में आसानी और अतिरिक्त कार्यक्षमता शामिल है।
1. उच्च सटीकता (Higher Accuracy)
डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) अपनी डिजिटल डिस्प्ले के कारण अधिक सटीक रीडिंग देते हैं। एनालॉग मल्टीमीटर में एक सुई होती है जो एक स्केल पर चलती है, जिससे रीडिंग को पढ़ने में गलती होने की संभावना रहती है। डिजिटल मल्टीमीटर में, मान सीधे अंकों में दिखाई देता है, जिससे पढ़ने में कोई त्रुटि नहीं होती।
2. उपयोग में आसानी (Ease of Use)
डिजिटल मल्टीमीटर का उपयोग करना बहुत आसान है क्योंकि:
- सीधी रीडिंग: आपको बस डिस्प्ले पर अंकों को पढ़ना होता है। एनालॉग मल्टीमीटर में, सुई की स्थिति और स्केल को सही ढंग से समझना पड़ता है, जो मुश्किल हो सकता है।
- स्वचालित रेंज (Auto-Ranging): कई डिजिटल मल्टीमीटर में ऑटो-रेंजिंग सुविधा होती है, जो माप के लिए सही रेंज का चयन अपने आप करती है। एनालॉग मल्टीमीटर में, आपको मैन्युअल रूप से रेंज सेट करनी पड़ती है।
- उच्च इनपुट प्रतिबाधा (High Input Impedance): डिजिटल मल्टीमीटर में बहुत उच्च इनपुट प्रतिबाधा होती है, जिससे वे सर्किट पर बहुत कम लोड डालते हैं। इसका मतलब है कि मापन सर्किट की रीडिंग को प्रभावित नहीं करता है।
3. अतिरिक्त कार्यक्षमता (Additional Functionality)
आधुनिक डिजिटल मल्टीमीटर में कई अतिरिक्त कार्य होते हैं जो एनालॉग मीटर में नहीं होते। इनमें से कुछ प्रमुख हैं:
- निरंतरता की जांच (Continuity Check): यह सुविधा यह बताती है कि कोई सर्किट पूरा है या नहीं। यह एक बीप ध्वनि द्वारा इंगित करता है।
- डायोड परीक्षण (Diode Test): यह डायोड की कार्यक्षमता की जांच करता है।
- कैपेसिटेंस और फ़्रीक्वेंसी मापन (Capacitance and Frequency Measurement): कई DMM कैपेसिटेंस और फ़्रीक्वेंसी को भी माप सकते हैं, जो एनालॉग मीटर में संभव नहीं है।
कुल मिलाकर,
डिजिटल मल्टीमीटर अपनी सटीकता, सुविधा और बहुमुखी प्रतिभा के कारण पेशेवरों और शौकीनों दोनों के लिए एक पसंदीदा उपकरण बन गया है।
डिजिटल मल्टीमीटर में ऑटो रेंजिंग (auto-ranging) एक ऐसी सुविधा है जो मल्टीमीटर को मापे जाने वाले मान (जैसे वोल्टेज, करंट या प्रतिरोध) के लिए स्वचालित रूप से सबसे उपयुक्त माप सीमा (range) का चयन करने देती है।
ऑटो रेंजिंग कैसे काम करती है?
जब आप एक ऑटो-रेंजिंग मल्टीमीटर को किसी सर्किट से जोड़ते हैं, तो यह शुरू में सबसे छोटी रेंज से मापना शुरू करता है। यदि रीडिंग 'OL' (ओवरलोड) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि मान मल्टीमीटर की वर्तमान रेंज से अधिक है। मल्टीमीटर तब तक स्वचालित रूप से अगली बड़ी रेंज पर स्विच करता है जब तक कि उसे एक उपयुक्त रेंज नहीं मिल जाती जो मान को माप सके। यह प्रक्रिया बहुत तेज़ी से होती है, और अंततः मल्टीमीटर सबसे सटीक रीडिंग दिखाता है, जिसमें अधिकतम दशमलव बिंदु होते हैं।
मैन्युअल रेंजिंग की तुलना में लाभ
- उपयोग में आसानी: आपको माप लेने से पहले मैन्युअल रूप से रेंज सेट करने की आवश्यकता नहीं होती है। यह शुरुआती लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक है और गलतियों की संभावना को कम करता है।
- तेजी से मापन: ऑटो-रेंजिंग मल्टीमीटर जल्दी से सही रेंज ढूंढ लेता है, जिससे आपका समय बचता है, खासकर जब आप किसी अज्ञात सर्किट पर काम कर रहे हों।
- सुरक्षा: ऑटो-रेंजिंग मल्टीमीटर गलती से गलत रेंज सेट करने पर होने वाले नुकसान से बचा सकता है। यदि आप मैन्युअल मल्टीमीटर में बहुत कम रेंज सेट करते हैं, तो यह मल्टीमीटर के फ्यूज को उड़ा सकता है या उसे नुकसान पहुंचा सकता है।
अधिकांश आधुनिक डिजिटल मल्टीमीटर में ऑटो-रेंजिंग की सुविधा होती है, जो उन्हें एनालॉग मल्टीमीटर की तुलना में अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाती है।
डिजिटल मल्टीमीटर पर OL का मतलब "ओवरलोड" (Overload) या "ओवर लिमिट" (Over Limit) होता है। इसका मतलब यह है कि जो मान आप माप रहे हैं, वह मल्टीमीटर की वर्तमान माप सीमा से अधिक है।
विभिन्न मोड में OL का मतलब
- वोल्टेज या करंट मोड: जब आप वोल्टेज या करंट मापते हैं और डिस्प्ले पर OL दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि सर्किट में मौजूद वोल्टेज या करंट आपके मल्टीमीटर की चुनी हुई रेंज से बहुत अधिक है। इस स्थिति में, आपको मल्टीमीटर की रेंज को मैन्युअल रूप से बढ़ाना चाहिए (यदि यह ऑटो-रेंजिंग नहीं है) ताकि आप सही रीडिंग प्राप्त कर सकें।
- प्रतिरोध मोड (Continuity/Diode Test): इस मोड में, OL का मतलब "ओपन सर्किट" (Open Circuit) होता है। इसका मतलब है कि सर्किट में कोई कनेक्शन या निरंतरता नहीं है, यानी सर्किट खुला है। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी तार की निरंतरता (continuity) की जांच कर रहे हैं और यह टूटा हुआ है, तो मल्टीमीटर OL दिखाएगा। यह एक सामान्य रीडिंग है जब जांच किए गए बिंदुओं के बीच कोई संबंध नहीं होता है, जैसे कि जब जांच प्रोब्स एक दूसरे को नहीं छू रहे हों।
OL एक उपयोगी चेतावनी है जो यह इंगित करती है कि आपको अपनी माप सेटिंग को समायोजित करने की आवश्यकता है।
मल्टीमीटर से कैपेसिटर की जांच करने के लिए दो मुख्य तरीके हैं: कैपेसिटेंस मोड का उपयोग करना और प्रतिरोध/निरंतरता (resistance/continuity) मोड का उपयोग करना।
1. कैपेसिटेंस मोड (Capacitance Mode) से जांच
अधिकांश आधुनिक डिजिटल मल्टीमीटर में एक समर्पित कैपेसिटेंस मोड होता है, जिसे अक्सर "C" या कैपेसिटर के प्रतीक ( capacitor symbol) से दर्शाया जाता है। यह सबसे सटीक तरीका है।
मल्टीमीटर को सेट करें: मल्टीमीटर को कैपेसिटेंस मोड पर सेट करें।
कैपेसिटर को डिस्चार्ज करें: कैपेसिटर को सर्किट से हटा दें और दोनों टर्मिनलों को आपस में शॉर्ट करके पूरी तरह से डिस्चार्ज कर दें ताकि कोई चार्ज न बचा रहे।
प्रोब्स को कनेक्ट करें: लाल प्रोब को कैपेसिटर के सकारात्मक टर्मिनल से और काले प्रोब को नकारात्मक टर्मिनल से जोड़ें।
रीडिंग लें: मल्टीमीटर कैपेसिटेंस का मान माइक्रोफैराड (µF), नैनोफैराड (nF) या पिकोफैराड (pF) में दिखाएगा।
मान की तुलना करें: इस रीडिंग की तुलना कैपेसिटर पर छपे हुए मान से करें। यदि रीडिंग निर्दिष्ट मान के 10-20% के भीतर है, तो कैपेसिटर ठीक है।
2. प्रतिरोध/निरंतरता (Resistance/Continuity) मोड से जांच
यदि आपके मल्टीमीटर में कैपेसिटेंस मोड नहीं है, तो आप प्रतिरोध मोड का उपयोग करके कैपेसिटर की स्थिति का मोटे तौर पर अंदाजा लगा सकते हैं।
- मल्टीमीटर को सेट करें: मल्टीमीटर को प्रतिरोध मोड (Ω) या निरंतरता (continuity) मोड पर सेट करें।
- प्रोब्स को कनेक्ट करें: मल्टीमीटर के प्रोब्स को कैपेसिटर के दोनों टर्मिनलों पर रखें।
-
रीडिंग को देखें:
- अच्छा कैपेसिटर: मल्टीमीटर शुरू में कम प्रतिरोध दिखाएगा (क्योंकि यह चार्ज हो रहा है) और धीरे-धीरे प्रतिरोध मान बढ़ता जाएगा जब तक कि यह 'OL' (ओवरलोड) न दिखा दे। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि कैपेसिटर चार्ज हो रहा है, जिसका अर्थ है कि यह ठीक से काम कर रहा है।
- शॉर्ट सर्किटेड कैपेसिटर: यदि मल्टीमीटर तुरंत बहुत कम प्रतिरोध या शून्य मान दिखाता है और स्थिर रहता है, तो इसका मतलब है कि कैपेसिटर शॉर्ट हो गया है और यह खराब है।
- ओपन कैपेसिटर: यदि मल्टीमीटर तुरंत 'OL' दिखाता है और कोई मान नहीं बदलता है, तो इसका मतलब है कि कैपेसिटर खुला है (ओपन सर्किट) और यह खराब है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पीसीबी (PCB) पर लगे कैपेसिटर की जांच करते समय, हमेशा उन्हें सर्किट से बाहर निकाल लेना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि सर्किट के अन्य घटक रीडिंग को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे गलत परिणाम मिल सकते हैं।
हाँ, एक मल्टीमीटर बिजली माप सकता है, लेकिन सीधे तौर पर नहीं।
मल्टीमीटर बिजली (power) को सीधे तौर पर नहीं मापता। इसके बजाय, यह तीन मुख्य विद्युत राशियों को मापता है:
वोल्टेज (Voltage): वोल्ट्स (V) में मापा जाता है।
करंट (Current): एम्प्स (A) में मापा जाता है।
प्रतिरोध (Resistance): ओह्म्स (Ω) में मापा जाता है।
इन मापी गई राशियों का उपयोग करके, आप ओम के नियम के अनुसार बिजली की गणना कर सकते हैं।
बिजली (P) की गणना करने का सबसे आम सूत्र है:
P = V \times I
जहाँ: P = पावर (वॉट्स में)
V = वोल्टेज (वोल्ट्स में)
I = करंट (एम्प्स में)
इसलिए,
यदि आप एक सर्किट में वोल्टेज और करंट को मापते हैं, तो आप इन मानों को गुणा करके उस सर्किट में खपत होने वाली बिजली की मात्रा का पता लगा सकते हैं।
मल्टीमीटर का उपयोग करके ट्रांजिस्टर की जांच करने के लिए, आप इसे डायोड या निरंतरता (diode or continuity) मोड में सेट कर सकते हैं। यह विधि ट्रांजिस्टर के अंदर के PN जंक्शनों के व्यवहार पर आधारित है, जो डायोड की तरह काम करते हैं।
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
सबसे पहले, अपने मल्टीमीटर को डायोड टेस्ट मोड (अक्सर डायोड या बीप सिंबल से दर्शाया जाता है) पर सेट करें।
NPN ट्रांजिस्टर की जांच:
एक NPN ट्रांजिस्टर को दो डायोड के रूप में सोचें, जिनके कैथोड (N-side) एक साझा आधार (base) से जुड़े होते हैं।
-
आधार-एमिटर जंक्शन: मल्टीमीटर की लाल प्रोब (positive) को ट्रांजिस्टर के आधार (base) पर और काली प्रोब (negative) को एमिटर (emitter) पर रखें।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर लगभग 0.45V से 0.9V के बीच की रीडिंग दिखाएगा (यह एक फॉरवर्ड बायस वोल्टेज ड्रॉप है)।
- खराब ट्रांजिस्टर: यदि यह OL (ओवरलोड) या 0Ω दिखाता है, तो ट्रांजिस्टर खराब है।
-
आधार-कलेक्टर जंक्शन: अब लाल प्रोब को आधार पर ही रहने दें और काली प्रोब को कलेक्टर (collector) पर रखें।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर फिर से 0.45V से 0.9V के बीच की रीडिंग दिखाएगा।
- खराब ट्रांजिस्टर: यदि यह OL या 0Ω दिखाता है, तो ट्रांजिस्टर खराब है।
- रिवर्स बायस टेस्ट: किसी भी जंक्शन (जैसे कि आधार-एमिटर) को रिवर्स बायस में जांचें (लाल प्रोब को एमिटर पर और काली प्रोब को आधार पर)।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर OL (ओवरलोड) दिखाएगा क्योंकि रिवर्स बायस में कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है। यदि कोई रीडिंग आती है, तो ट्रांजिस्टर खराब है।
PNP ट्रांजिस्टर की जांच:
PNP ट्रांजिस्टर को दो डायोड के रूप में सोचें, जिनके एनोड (P-side) एक साझा आधार (base) से जुड़े होते हैं।
- आधार-एमिटर जंक्शन: मल्टीमीटर की काली प्रोब (negative) को ट्रांजिस्टर के आधार (base) पर और लाल प्रोब (positive) को एमिटर (emitter) पर रखें।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर लगभग 0.45V से 0.9V के बीच की रीडिंग दिखाएगा।
- आधार-कलेक्टर जंक्शन: अब काली प्रोब को आधार पर ही रहने दें और लाल प्रोब को कलेक्टर (collector) पर रखें।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर फिर से 0.45V से 0.9V के बीच की रीडिंग दिखाएगा।
- रिवर्स बायस टेस्ट: किसी भी जंक्शन को रिवर्स बायस में जांचें।
- सही ट्रांजिस्टर: मल्टीमीटर OL (ओवरलोड) दिखाएगा। यदि कोई रीडिंग आती है, तो ट्रांजिस्टर खराब है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि परीक्षण के लिए ट्रांजिस्टर को सर्किट से बाहर निकालना चाहिए, ताकि अन्य घटक रीडिंग को प्रभावित न करें।
लाइव सर्किट में प्रतिरोध को मापने के कई कारण हैं। मुख्य कारण यह है कि इससे मल्टीमीटर को नुकसान हो सकता है, गलत रीडिंग मिल सकती है और शॉक लगने का खतरा होता है।
गलत रीडिंग और नुकसान
- बिजली का हस्तक्षेप: मल्टीमीटर का प्रतिरोध माप कार्य करने का तरीका यह है कि यह सर्किट में एक छोटा सा करंट भेजता है और फिर वोल्टेज ड्रॉप को मापकर प्रतिरोध की गणना करता है। लाइव सर्किट में, बाहरी वोल्टेज और करंट पहले से ही मौजूद होते हैं। यह मल्टीमीटर द्वारा भेजे गए छोटे करंट में हस्तक्षेप करता है, जिससे माप गलत हो जाती है या मल्टीमीटर को स्थायी रूप से नुकसान पहुँच सकता है।
- ओह्ममीटर का कार्य: मल्टीमीटर का प्रतिरोध मोड (ओह्ममीटर) काम करने के लिए अपनी खुद की आंतरिक बैटरी का उपयोग करता है। जब इसे किसी लाइव सर्किट से जोड़ा जाता है, तो बाहरी वोल्टेज और मल्टीमीटर की आंतरिक बैटरी का वोल्टेज आपस में टकरा सकते हैं, जिससे मल्टीमीटर के आंतरिक सर्किट में अत्यधिक करंट प्रवाहित हो सकता है और वह जल सकता है।
सुरक्षा का खतरा
- बिजली का झटका: लाइव सर्किट में प्रतिरोध मापने का प्रयास करना खतरनाक होता है। अगर प्रोब गलती से उच्च-वोल्टेज वाले हिस्सों को छू लेती है, तो आपको बिजली का झटका लग सकता है।
- शॉर्ट सर्किट: मल्टीमीटर के प्रोब के गलत तरीके से लगने पर शॉर्ट सर्किट हो सकता है, जिससे आग लग सकती है या उपकरण को नुकसान हो सकता है।
संक्षेप में,
किसी भी सर्किट में प्रतिरोध को मापने से पहले उसे पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह डी-एनर्जाइज़्ड है। यह सही और सुरक्षित माप सुनिश्चित करता है।
क्लैंप मीटर और मल्टीमीटर दोनों ही बिजली के माप उपकरण हैं, लेकिन उनके मुख्य कार्य और उपयोग में महत्वपूर्ण अंतर हैं। मल्टीमीटर को "सार्वभौमिक मीटर" कहा जाता है क्योंकि यह कई विद्युत राशियों (वोल्टेज, करंट, प्रतिरोध) को माप सकता है, जबकि क्लैंप मीटर मुख्य रूप से बड़े करंट को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
1. कार्यप्रणाली में अंतर
-
मल्टीमीटर: मल्टीमीटर का उपयोग वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है।
- करंट मापन: यह करंट मापने के लिए सर्किट के साथ सीरीज (series) में जुड़ता है, जिसका अर्थ है कि आपको सर्किट को तोड़ना पड़ता है। यह आमतौर पर कम करंट (जैसे 10 एंपियर तक) को मापने में अधिक सटीक होता है।
- अन्य मापन: यह वोल्टेज और प्रतिरोध को मापने के लिए सर्किट के समानांतर (parallel) में जुड़ता है।
-
क्लैंप मीटर: क्लैंप मीटर का उपयोग मुख्य रूप से करंट को मापने के लिए किया जाता है, खासकर उच्च करंट।
- करंट मापन: इसमें एक क्लैंप होता है जो कंडक्टर के चारों ओर बंद हो जाता है। यह बिना सर्किट को तोड़े और बिना संपर्क बनाए करंट को मापता है। यह बड़े करंट (जैसे 1000 एंपियर तक) को मापने में बहुत उपयोगी है।
- अन्य मापन: अधिकांश क्लैंप मीटर में वोल्टेज और प्रतिरोध मापने की क्षमता भी होती है, लेकिन ये आमतौर पर मल्टीमीटर जितनी सटीक नहीं होती हैं।
2. उपयोग और सटीकता में अंतर
- मल्टीमीटर: यह छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू वायरिंग, और कम वोल्टेज के सर्किट पर काम करने वाले तकनीशियनों और शौकीनों के लिए अधिक उपयोगी है। यह छोटे करंट और वोल्टेज को अधिक सटीकता से मापता है।
- क्लैंप मीटर: यह इलेक्ट्रीशियनों, बिजली के ठेकेदारों और औद्योगिक तकनीशियनों के लिए आदर्श है, जिन्हें बड़ी मशीनों, मोटर या लोड का करंट मापना होता है। यह सुरक्षा की दृष्टि से अधिक बेहतर है क्योंकि यह बिना सीधे संपर्क के मापन करता है।
संक्षेप में,
यदि आपको मुख्य रूप से सटीक वोल्टेज, प्रतिरोध, और छोटे करंट को मापना है, तो मल्टीमीटर बेहतर है। यदि आपको अक्सर उच्च करंट को मापना है, तो क्लैंप मीटर अधिक सुरक्षित और उपयुक्त है।
एनालॉग मल्टीमीटर का सिद्धांत चुंबकीय क्षेत्र में धारा के सिद्धांत पर आधारित है।
यह एक संवेदनशील गैल्वेनोमीटर का उपयोग करता है। जब मीटर से कोई विद्युत राशि (जैसे वोल्टेज, करंट या प्रतिरोध) मापी जाती है, तो वह एक छोटे डीसी करंट में बदल जाती है।
यह करंट गैल्वेनोमीटर की कॉइल से होकर गुजरता है, जिससे एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह चुंबकीय क्षेत्र, मीटर के अंदर स्थायी चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे कॉइल घूमती है।
यह कॉइल एक सुई (pointer) से जुड़ी होती है जो डायल पैनल पर घूमती है। सुई के घूमने की मात्रा सीधे करंट के प्रवाह के समानुपाती होती है, जिससे उपयोगकर्ता डायल पर रीडिंग पढ़ सकता है। विभिन्न राशियों को मापने के लिए, मीटर के अंदर अलग-अलग रेसिस्टर और सर्किट का उपयोग किया जाता है। वोल्टेज को मापने के लिए, श्रृंखला में रेसिस्टर जोड़ा जाता है (वोल्टेज विभाजक)। करंट को मापने के लिए, समानांतर में रेसिस्टर जोड़ा जाता है (शंट)। प्रतिरोध को मापने के लिए, मीटर में एक छोटी बैटरी होती है जो उस सर्किट में करंट भेजती है जिसका प्रतिरोध मापना होता है।
मल्टीमीटर में प्रोब को सही तरीके से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि प्रोब को गलत तरीके से जोड़ा जाए तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि:
- गलत रीडिंग: गलत कनेक्शन के कारण मल्टीमीटर गलत मान (गलत वोल्टेज, करंट या प्रतिरोध) दिखा सकता है, जिससे आप सर्किट के बारे में गलत निर्णय ले सकते हैं।
- मल्टीमीटर का खराब होना: यदि आप करंट मापने के लिए डिज़ाइन किए गए जैक में वोल्टेज मापते हैं या उच्च वोल्टेज सर्किट पर गलत प्रोब लगाते हैं, तो मल्टीमीटर का फ्यूज़ उड़ सकता है या आंतरिक सर्किट को स्थायी नुकसान हो सकता है।
- सुरक्षा जोखिम: गलत प्रोब कनेक्शन से आपको बिजली का झटका लग सकता है, खासकर जब आप उच्च वोल्टेज वाले सर्किट पर काम कर रहे हों।
सही कनेक्शन यह सुनिश्चित करता है कि मापी जाने वाली राशि सही और सुरक्षित तरीके से मल्टीमीटर के आंतरिक सर्किट से गुजरे।
मल्टीमीटर का उपयोग करके बैटरी की जांच करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
1. मल्टीमीटर को तैयार करें
- सही प्रोब लगाएं: काली (Black) प्रोब को मल्टीमीटर पर "COM" (common) जैक में और लाल (Red) प्रोब को "VΩmA" जैक में लगाएं।
- सही मोड चुनें: मल्टीमीटर के डायल को DC (डायरेक्ट करंट) वोल्टेज मोड पर सेट करें। बैटरी DC पावर स्रोत होती है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है।
- रेंज सेट करें: मल्टीमीटर की रेंज को बैटरी के अपेक्षित वोल्टेज से थोड़ा अधिक पर सेट करें। उदाहरण के लिए, 1.5V की बैटरी के लिए आप 2V या 20V की रेंज चुन सकते हैं। अगर आप सही रेंज नहीं जानते, तो सबसे ऊंची रेंज से शुरू करें और फिर जरूरत के अनुसार नीचे आएं।
2. बैटरी से कनेक्ट करें
- सही पोलारिटी का ध्यान रखें: लाल प्रोब को बैटरी के पॉजिटिव (+) टर्मिनल पर और काली प्रोब को बैटरी के नेगेटिव (-) टर्मिनल पर रखें। यह सुनिश्चित करें कि प्रोब टर्मिनलों से सही तरीके से संपर्क में हैं।
- रीडिंग पढ़ें: मल्टीमीटर की स्क्रीन पर वोल्टेज की रीडिंग देखें।
3. रीडिंग का मूल्यांकन करें
पूर्ण चार्ज बैटरी: एक पूर्ण चार्ज बैटरी का वोल्टेज आमतौर पर उसके अंकित वोल्टेज से थोड़ा अधिक होता है (जैसे 1.5V की बैटरी 1.5V से अधिक दिखा सकती है)।
आंशिक रूप से चार्ज या डेड बैटरी: यदि रीडिंग अंकित वोल्टेज से काफी कम है (जैसे 1.5V की बैटरी 1.2V या उससे कम दिखाती है), तो इसका मतलब है कि बैटरी आंशिक रूप से डिस्चार्ज है। यदि रीडिंग लगभग शून्य है, तो बैटरी पूरी तरह से डेड है।
आप मल्टीमीटर का उपयोग करके बिजली के बल्ब का परीक्षण कई तरीकों से कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बल्ब किस प्रकार का है।
1. प्रतिरोध (Continuity) जांच
यह सबसे आम और आसान तरीका है। यह जांचता है कि बल्ब का फिलामेंट या सर्किट टूटा तो नहीं है।
- मल्टीमीटर को कंटिन्युटी (continuity) मोड पर सेट करें। यह अक्सर एक डायोड या स्पीकर/बज़र आइकन द्वारा दर्शाया जाता है।
- मल्टीमीटर की प्रोब्स को बल्ब के दोनों टर्मिनलों पर रखें।
- यदि मल्टीमीटर बीप की आवाज़ करता है या कम प्रतिरोध (लगभग 0 ohms) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि बल्ब का फिलामेंट या सर्किट सही है।
- यदि कोई बीप नहीं होती है या मल्टीमीटर OL (ओपन लूप) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि सर्किट टूट गया है और बल्ब खराब है।
2. डायोड (Diode) जांच (केवल LED बल्ब के लिए)
यह जांच विशेष रूप से LED (लाइट एमिटिंग डायोड) बल्बों के लिए है।
- मल्टीमीटर को डायोड (diode) मोड पर सेट करें।
- लाल प्रोब को LED के पॉजिटिव (+) सिरे पर और काली प्रोब को नेगेटिव (-) सिरे पर रखें।
- यदि LED सही है, तो यह हल्की रोशनी में जलेगा और मल्टीमीटर पर कुछ वोल्टेज ड्रॉप दिखाएगा।
- यदि LED खराब है, तो वह नहीं जलेगा और कोई रीडिंग नहीं दिखाएगा।
मल्टीमीटर का उपयोग करके इलेक्ट्रिक मोटर वाइंडिंग का परीक्षण करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो मोटर की स्थिति का आकलन करने में मदद करती है। यह परीक्षण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: कंटिन्यूटी टेस्ट, रेजिस्टेंस टेस्ट और ग्राउंड फॉल्ट टेस्ट। इन परीक्षणों से पता चलता है कि क्या वाइंडिंग ओपन, शॉर्ट-सर्किट या ग्राउंडेड तो नहीं है।
1. कंटिन्यूटी (Continuity) टेस्ट
यह सबसे पहला और सरल परीक्षण है। यह जांचता है कि मोटर की वाइंडिंग खुली तो नहीं है।
- मल्टीमीटर को कंटिन्युटी (continuity) मोड पर सेट करें। यह अक्सर एक स्पीकर या डायोड आइकन द्वारा दर्शाया जाता है।
- मल्टीमीटर की प्रोब्स को मोटर वाइंडिंग के दोनों सिरों पर रखें। यदि मोटर सिंगल-फेज है, तो रनिंग और स्टार्टिंग वाइंडिंग के सिरों पर जांचें। यदि थ्री-फेज है, तो प्रत्येक दो वाइंडिंग के बीच जांचें।
- यदि मल्टीमीटर बीप की आवाज़ करता है, तो इसका मतलब है कि वाइंडिंग में कोई ब्रेक नहीं है और सर्किट पूरा है।
- यदि कोई बीप नहीं होती है या मल्टीमीटर OL (ओपन लूप) दिखाता है, तो वाइंडिंग खुली है और मोटर खराब है।
2. रेजिस्टेंस (Resistance) टेस्ट
यह परीक्षण वाइंडिंग के प्रतिरोध को मापता है और यह जांचता है कि क्या वाइंडिंग में शॉर्ट-सर्किट तो नहीं है।
- मल्टीमीटर को रेजिस्टेंस (resistance) मोड पर सेट करें, जो ओहम (Ω) आइकन द्वारा दर्शाया जाता है।
- मल्टीमीटर की प्रोब्स को मोटर वाइंडिंग के दोनों सिरों पर रखें।
- एक स्वस्थ मोटर वाइंडिंग का प्रतिरोध बहुत कम होता है (कुछ ओम में)। यदि सिंगल-फेज मोटर है, तो रनिंग और स्टार्टिंग वाइंडिंग के प्रतिरोध को मापें। यदि थ्री-फेज मोटर है, तो प्रत्येक दो वाइंडिंग के बीच प्रतिरोध को मापें।
- महत्वपूर्ण: सभी वाइंडिंग का प्रतिरोध लगभग समान होना चाहिए। यदि किसी एक वाइंडिंग का प्रतिरोध अन्य से बहुत कम है, तो यह शॉर्ट-सर्किट का संकेत है। यदि प्रतिरोध बहुत अधिक है, तो वाइंडिंग में समस्या है।
3. ग्राउंड फॉल्ट (Ground Fault) टेस्ट
यह परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि वाइंडिंग मोटर की बॉडी (फ्रेम) से तो नहीं जुड़ी हुई है।
- मल्टीमीटर को कंटिन्युटी या रेजिस्टेंस मोड पर सेट करें।
- मल्टीमीटर की एक प्रोब को मोटर वाइंडिंग के एक सिरे पर रखें और दूसरी प्रोब को मोटर के मेटल फ्रेम पर रखें।
- यदि मल्टीमीटर बीप की आवाज़ करता है या कम प्रतिरोध दिखाता है, तो इसका मतलब है कि वाइंडिंग ग्राउंडेड है, जो एक गंभीर खराबी है।
- एक अच्छी मोटर में, मल्टीमीटर को OL (ओपन लूप) दिखाना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वाइंडिंग और मोटर बॉडी के बीच कोई कनेक्शन नहीं है।
डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) में होल्ड फ़ंक्शन का उपयोग मापी गई रीडिंग को स्क्रीन पर स्थिर करने के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ता को रीडिंग को नोट करने या बाद में देखने का समय देना है, खासकर जब:
- माप लेने के बाद तुरंत रीडिंग देखना संभव नहीं होता है, जैसे कि तंग या कठिन जगहों पर।
- रीडिंग बहुत तेज़ी से बदल रही होती है और स्थिर मान को पकड़ना मुश्किल होता है।
जब आप होल्ड बटन दबाते हैं, तो मल्टीमीटर वर्तमान में मापी जा रही रीडिंग को डिस्प्ले पर लॉक कर देता है। इसके बाद, आप प्रोब्स को हटा सकते हैं और आराम से रीडिंग को देख सकते हैं, चाहे वह वोल्टेज, करंट या प्रतिरोध हो। कुछ उन्नत मल्टीमीटर में ऑटो-होल्ड फ़ंक्शन भी होता है, जो रीडिंग के स्थिर होते ही उसे स्वचालित रूप से होल्ड कर लेता है और अक्सर एक बीप ध्वनि भी देता है ताकि उपयोगकर्ता को पता चल सके कि रीडिंग लॉक हो गई है।
डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) में ट्रू आरएमएस (True RMS) एक ऐसा फ़ंक्शन है जो एसी (अल्टरनेटिंग करंट) वोल्टेज और करंट का सबसे सटीक माप प्रदान करता है।
सामान्य (एवरेज-रेस्पॉन्डिंग) मल्टीमीटर केवल शुद्ध साइन वेव (sinusoidal wave) को ही सटीक रूप से माप सकते हैं। ये मीटर औसत मान को मापते हैं और फिर एक निश्चित सूत्र का उपयोग करके आरएमएस मान का अनुमान लगाते हैं। यह विधि तब तक काम करती है जब तक कि एसी सिग्नल एक आदर्श साइन वेव हो।
हालांकि, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कि वेरिएबल स्पीड ड्राइव्स (Variable Speed Drives), कंप्यूटर और एलईडी लाइटिंग विकृत (distorted) या नॉन-साइन वेव (non-sinusoidal wave) बनाते हैं। ये वेवफ़ॉर्म अनियमित होते हैं, और सामान्य मल्टीमीटर इन्हें मापने पर गलत रीडिंग दे सकते हैं (जो वास्तविक मान से 40% तक कम या 10% तक अधिक हो सकती है)।
ट्रू आरएमएस मल्टीमीटर इन विकृत वेवफ़ॉर्म को भी सही ढंग से माप सकता है क्योंकि यह सिग्नल के वास्तविक रूट मीन स्क्वायर (Root Mean Square) मान की गणना करता है, न कि केवल औसत पर आधारित अनुमान। यह विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण है जहाँ मोटर्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य गैर-रैखिक भार शामिल होते हैं।
हाँ, हम मल्टीमीटर का उपयोग करके तापमान माप सकते हैं, लेकिन इसके लिए एक विशेष प्रकार के तापमान प्रोब की आवश्यकता होती है, जिसे अक्सर थर्मोकपल कहा जाता है। सभी मल्टीमीटर में यह सुविधा नहीं होती है।
मल्टीमीटर के साथ तापमान मापने के चरण:
- मल्टीमीटर की जांच करें: सबसे पहले, यह जांच करें कि आपके मल्टीमीटर में तापमान मापने का फ़ंक्शन है या नहीं। यह आमतौर पर सेल्सियस (°C) या फ़ारेनहाइट (°F) चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है।
- थर्मोकपल को कनेक्ट करें: मल्टीमीटर के साथ आने वाले थर्मोकपल प्रोब को उसके विशिष्ट जैक में लगाएं। यह अक्सर "TEMP" या "T" जैक होता है।
- तापमान मोड चुनें: मल्टीमीटर के डायल को तापमान मोड पर सेट करें।
- मापन करें: थर्मोकपल के सिरे को उस वस्तु या क्षेत्र के संपर्क में लाएं जिसका तापमान मापना है। कुछ ही सेकंड में, मल्टीमीटर की स्क्रीन पर तापमान की रीडिंग दिखाई देगी।
थर्मोकपल क्या है?
थर्मोकपल एक सेंसर है जो दो अलग-अलग धातुओं से बना होता है। जब इन धातुओं के जंक्शन पर तापमान बदलता है, तो यह एक छोटा वोल्टेज उत्पन्न करता है। मल्टीमीटर इसी वोल्टेज को मापकर उसे तापमान रीडिंग में बदल देता है।
मल्टीमीटर में फ्यूज एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा घटक है। यह मल्टीमीटर को अत्यधिक करंट से होने वाले नुकसान से बचाता है।
मल्टीमीटर में फ्यूज का कार्य
मल्टीमीटर के अंदर फ्यूज एक सुरक्षा वाल्व की तरह काम करता है। जब भी आप गलती से किसी ऐसे सर्किट का परीक्षण करते हैं जिसमें मल्टीमीटर की क्षमता से अधिक करंट होता है, तो फ्यूज तुरंत उड़ जाता है और सर्किट को तोड़ देता है। इससे अत्यधिक करंट को मल्टीमीटर के संवेदनशील आंतरिक घटकों जैसे कि रेसिस्टर और सर्किट बोर्ड तक पहुंचने से रोका जाता है, जिससे मल्टीमीटर को स्थायी नुकसान नहीं होता है।
फ्यूज के प्रकार और महत्व
अधिकांश मल्टीमीटर में एक या दो फ्यूज होते हैं।
- कम करंट के लिए फ्यूज: यह आमतौर पर 200mA (milliampere) रेंज के लिए होता है।
- उच्च करंट के लिए फ्यूज: यह आमतौर पर 10A (ampere) रेंज के लिए होता है।
मल्टीमीटर का उपयोग करते समय, यदि आप गलती से वोल्टेज मोड की बजाय करंट मोड में उच्च वोल्टेज स्रोत से जुड़ते हैं, तो फ्यूज आपको और आपके उपकरण दोनों को बचा सकता है। यदि फ्यूज नहीं होता, तो मल्टीमीटर के अंदर का सर्किट जल सकता था, जिससे वह बेकार हो जाता।
संक्षेप में,
फ्यूज मल्टीमीटर की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य घटक है।
डिजिटल मल्टीमीटर कभी-कभी उतार-चढ़ाव वाली रीडिंग देता है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जो मापे जा रहे सिग्नल की प्रकृति से लेकर बाहरी हस्तक्षेप तक से संबंधित होते हैं।
सिग्नल से संबंधित कारण
- अस्थिर वोल्टेज या करंट: अगर आप जिस सर्किट का माप ले रहे हैं, उसमें वोल्टेज या करंट वास्तव में अस्थिर है, तो मल्टीमीटर वही उतार-चढ़ाव दिखाएगा। उदाहरण के लिए, एक दोषपूर्ण पावर सप्लाई या एक सर्किट जिसमें भार (load) लगातार बदल रहा है, ऐसी रीडिंग दे सकता है।
- पल्सिंग डीसी सिग्नल: कुछ सर्किट में, डीसी वोल्टेज या करंट शुद्ध नहीं होता है; यह पल्स के रूप में होता है (उदाहरण के लिए, एक रेक्टिफायर के आउटपुट पर)। मल्टीमीटर इन पल्स के उतार-चढ़ाव को रीडिंग के रूप में दिखा सकता है।
- नॉइज़ (Noise): विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (Electromagnetic interference - EMI) या रेडियो फ्रीक्वेंसी हस्तक्षेप (Radio frequency interference - RFI) के कारण भी रीडिंग में उतार-चढ़ाव हो सकता है। यह अक्सर तब होता है जब मल्टीमीटर को हाई-पावर मोटर्स, स्विचिंग पावर सप्लाइज़ या पास के रेडियो ट्रांसमीटरों के पास इस्तेमाल किया जाता है।
मल्टीमीटर से संबंधित कारण
- खराब प्रोब कनेक्शन: प्रोब्स और जिस बिंदु पर आप माप ले रहे हैं, उनके बीच कमजोर या ढीला संपर्क होने पर रीडिंग अस्थिर हो सकती है। यह सुनिश्चित करें कि प्रोब्स अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।
- ऑटो-रेंजिंग फ़ंक्शन: जब मल्टीमीटर ऑटो-रेंजिंग मोड में होता है, तो वह रीडिंग के आधार पर अपनी रेंज को लगातार समायोजित कर रहा होता है। यह समायोजन कभी-कभी रीडिंग को उतार-चढ़ाव जैसा दिखा सकता है, खासकर जब सिग्नल दो रेंज के बीच हो।
- निम्न-गुणवत्ता वाले मल्टीमीटर: कुछ सस्ते मल्टीमीटर में उच्च संवेदनशीलता नहीं होती है और वे बाहरी हस्तक्षेप से आसानी से प्रभावित हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अस्थिर रीडिंग होती है।
नहीं, एक मानक मल्टीमीटर सीधे इंडक्शन (Inductance) नहीं माप सकता। इंडक्शन को मापने के लिए एक विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है जिसे एलसीआर मीटर (LCR Meter) कहा जाता है।
क्यों नहीं माप सकता
मल्टीमीटर को मुख्य रूप से प्रतिरोध (Resistance), वोल्टेज (Voltage) और करंट (Current) मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इंडक्शन का माप एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें एक ज्ञात आवृत्ति की एसी (AC) वोल्टेज को कॉइल में भेजा जाता है और फिर परिणामी प्रतिबाधा (Impedance) और चरण कोण (Phase angle) को मापा जाता है।
मल्टीमीटर के साथ इंडक्शन का पता कैसे लगाएँ
हालांकि एक मल्टीमीटर सीधे इंडक्शन नहीं माप सकता, आप इसका उपयोग करके इंडक्टर (inductor) की कंटिन्यूटी (continuity) की जांच कर सकते हैं।
- रेजिस्टेंस मोड (Resistance mode) का उपयोग करें: मल्टीमीटर को रेजिस्टेंस मोड (Ω) पर सेट करें और प्रोब्स को इंडक्टर के दोनों सिरों पर रखें।
- रीडिंग का निरीक्षण करें: यदि मल्टीमीटर बहुत कम रेजिस्टेंस (कुछ ओम) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि कॉइल जुड़ी हुई है और उसमें कोई ब्रेक नहीं है।
- यदि मल्टीमीटर OL (ओपन लूप) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि कॉइल टूट गई है और इंडक्टर खराब है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल यह बताता है कि कॉइल खुली है या नहीं, लेकिन यह इंडक्टर के वास्तविक इंडक्शन मान को नहीं मापता है।
एनालॉग मल्टीमीटर में शून्य समायोजन की आवश्यकता दो मुख्य कारणों से होती है:
1. शून्य ओहम समायोजन (Zero Ohm Adjustment)
जब आप प्रतिरोध (resistance) को मापने के लिए एनालॉग मल्टीमीटर का उपयोग करते हैं, तो आपको पहले शून्य ओहम समायोजन करना होता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मल्टीमीटर प्रतिरोध को मापने के लिए अपनी आंतरिक बैटरी का उपयोग करता है। समय के साथ, बैटरी का वोल्टेज कम हो जाता है, जिससे रीडिंग पर असर पड़ता है।
- कैसे काम करता है: प्रोब्स को एक साथ छूने पर, मल्टीमीटर की सुई को शून्य प्रतिरोध (0 ohms) पर सेट करने के लिए एक घुंडी (knob) का उपयोग किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि जब कोई प्रतिरोध नहीं है, तब भी मीटर 0 ही दिखाए।
- आवश्यकता: यदि आप यह समायोजन नहीं करते हैं, तो आपके द्वारा मापी गई प्रतिरोध रीडिंग गलत होगी, क्योंकि मीटर पहले से ही कुछ प्रतिरोध दिखा रहा होगा।
2. शून्य यांत्रिक समायोजन (Zero Mechanical Adjustment)
यह समायोजन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जब मल्टीमीटर का उपयोग नहीं हो रहा हो, तो सुई ठीक शून्य (zero) पर टिकी रहे।
- कैसे काम करता है: जब मीटर बंद होता है, तो सुई को शून्य पर लाने के लिए एक छोटे स्क्रू को समायोजित किया जाता है, जो आमतौर पर मीटर के डायल के पास स्थित होता है।
- आवश्यकता: यदि सुई शून्य पर नहीं होती है, तो वोल्टेज या करंट मापते समय भी आपकी रीडिंग गलत हो सकती है।
इन समायोजनों के बिना, एनालॉग मल्टीमीटर सटीक रीडिंग नहीं दे पाएगा।
डिजिटल मल्टीमीटर की बैटरी कम है या नहीं, इसकी पहचान करने के कई तरीके हैं:
1. लो-बैटरी आइकन (Low-Battery Icon)
अधिकांश डिजिटल मल्टीमीटर में एक बैटरी आइकन होता है जो डिस्प्ले पर दिखाई देता है जब बैटरी का वोल्टेज एक निश्चित सीमा से नीचे चला जाता है। यह सबसे स्पष्ट और सीधा संकेत है। यह आइकन आमतौर पर एक बैटरी के आकार का होता है जिसमें एक या दो बार (bars) होते हैं, जो बैटरी की बची हुई क्षमता को दर्शाते हैं।
2. अस्थिर या गलत रीडिंग (Unstable or Inaccurate Readings)
कम बैटरी वाले मल्टीमीटर की एक और सामान्य पहचान यह है कि यह अस्थिर या उतार-चढ़ाव वाली रीडिंग देने लगता है, भले ही आप एक स्थिर वोल्टेज या प्रतिरोध को माप रहे हों। कभी-कभी यह गलत रीडिंग भी दे सकता है, जो सामान्य मान से बहुत कम या अधिक हो सकती है।
3. डिस्प्ले का मंद होना (Dim Display)
जैसे-जैसे बैटरी कमजोर होती है, मल्टीमीटर की डिस्प्ले मंद (dim) होने लगती है और कभी-कभी फ्लिकर भी कर सकती है। रीडिंग को पढ़ना मुश्किल हो सकता है। यह विशेष रूप से उन मल्टीमीटर में देखा जाता है जिनमें बैकलाइट होती है। जब बैटरी कमजोर होती है, तो बैकलाइट भी ठीक से काम नहीं करती।
4. ऑटो-पावर-ऑफ फ़ंक्शन का विफल होना (Auto-Power-Off Failure)
कुछ मल्टीमीटर में ऑटो-पावर-ऑफ फ़ंक्शन होता है जो बैटरी को बचाने के लिए एक निश्चित समय के बाद मीटर को बंद कर देता है। कम बैटरी के कारण यह फ़ंक्शन अनियमित रूप से काम कर सकता है या पूरी तरह से काम करना बंद कर सकता है।
डिजिटल मल्टीमीटर का रिज़ॉल्यूशन (resolution) वह सबसे छोटा माप है जिसे मल्टीमीटर प्रदर्शित कर सकता है। इसे अक्सर डिस्प्ले पर अंकों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है, जैसे कि 3½-अंक या 4-अंक।
रिज़ॉल्यूशन का महत्व
रिज़ॉल्यूशन यह निर्धारित करता है कि मल्टीमीटर कितना बारीक माप दिखा सकता है। एक उच्च रिज़ॉल्यूशन वाला मल्टीमीटर अधिक सटीक और विस्तृत रीडिंग प्रदान कर सकता है।
- उदाहरण: एक मल्टीमीटर 2.56V की रीडिंग दिखा सकता है, जबकि दूसरा 2.564V दिखा सकता है। दूसरा मल्टीमीटर अधिक रिज़ॉल्यूशन वाला है।
अंकों की संख्या (Number of Digits)
मल्टीमीटर के रिज़ॉल्यूशन को समझने का सबसे आसान तरीका अंकों की संख्या है।
- पूरे अंक (Full digits): ये 0 से 9 तक के मान दिखा सकते हैं।
- आधे अंक (Half digits): ये केवल 0 या 1 दिखा सकते हैं।
- 3½-अंक मल्टीमीटर: इसमें तीन पूरे अंक (0-999) और एक आधा अंक (जो 0 या 1 हो सकता है) होता है। इसकी अधिकतम रीडिंग 1999 होती है।
- उदाहरण: यह 1.999V, 19.99V, या 199.9V तक माप सकता है।
- 4½-अंक मल्टीमीटर: इसमें चार पूरे अंक और एक आधा अंक होता है, जिससे अधिकतम रीडिंग 19999 तक होती है। यह अधिक सटीक होता है।
- उदाहरण: यह 1.9999V या 19.999V तक माप सकता है।
जितने अधिक अंक होंगे,
मल्टीमीटर का रिज़ॉल्यूशन उतना ही बेहतर होगा। यह खासकर तब महत्वपूर्ण होता है जब आप बहुत छोटे या बहुत संवेदनशील मानों को माप रहे हों।
डिजिटल मल्टीमीटर की सटीकता (accuracy) यह बताती है कि मापी गई रीडिंग वास्तविक मान के कितनी करीब है। इसे आमतौर पर प्रतिशत त्रुटि (%) और अंकों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
सटीकता की गणना
सटीकता को दो भागों में दर्शाया जाता है:
- प्रतिशत रीडिंग (% of reading): यह मापी गई रीडिंग का प्रतिशत होता है।
- अंतिम अंक (digits): यह डिस्प्ले पर अंतिम अंक की अनिश्चितता को दर्शाता है।
उदाहरण के लिए,
यदि एक मल्टीमीटर की सटीकता ±(0.5% + 2 digits) है और आप 100V की रीडिंग ले रहे हैं:
- 0.5% की त्रुटि: 100V का 0.5% = 0.5V
- 2 अंकों की त्रुटि: यह रीडिंग के अंतिम दो अंकों की अनिश्चितता को दर्शाता है।
इस तरह, कुल त्रुटि ±0.5V + 2 अंक हो सकती है।
सटीकता का महत्व
सटीकता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि आप अपने माप पर कितना भरोसा कर सकते हैं।
- कम सटीकता: कम सटीकता वाले मल्टीमीटर से आप केवल सामान्य माप ले सकते हैं, जैसे यह जांचना कि एक सर्किट में वोल्टेज है या नहीं।
- उच्च सटीकता: उच्च सटीकता वाले मल्टीमीटर का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, अंशांकन (calibration) और जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के निदान में किया जाता है, जहाँ सटीक रीडिंग आवश्यक होती है।
सटीकता को प्रभावित करने वाले कारक
सटीकता को कई कारक प्रभावित कर सकते हैं, जैसे:
- तापमान: मल्टीमीटर के ऑपरेटिंग तापमान से बाहर जाने पर सटीकता प्रभावित हो सकती है।
- बैटरी की स्थिति: कम बैटरी वोल्टेज मल्टीमीटर की सटीकता को कम कर सकता है।
- माप का प्रकार: एसी (AC) माप आमतौर पर डीसी (DC) माप की तुलना में कम सटीक होते हैं, क्योंकि वेवफॉर्म और आवृत्ति जैसे कारक प्रभावित करते हैं।
मल्टीमीटर में टेस्ट लीड्स (Test Leads) दो लचीले तार होते हैं, जिनके एक सिरे पर प्रोब्स (probes) और दूसरे सिरे पर कनेक्टर (connectors) होते हैं। ये मल्टीमीटर और उस सर्किट के बीच एक पुल का काम करते हैं जिसे मापा जा रहा है।
टेस्ट लीड्स के घटक
- प्रोब (Probe): यह नुकीला धातु का सिरा होता है जिसे आप सर्किट के परीक्षण बिंदुओं (test points) पर रखते हैं। ये आपको सुरक्षित रूप से घटकों और सर्किट का परीक्षण करने की अनुमति देते हैं।
- लीड वायर (Lead Wire): यह लचीला तार होता है जो प्रोब को मल्टीमीटर से जोड़ता है।
- कनेक्टर (Connector): यह सिरा मल्टीमीटर के जैक (jacks) में डाला जाता है। आमतौर पर, यह एक केला प्लग (banana plug) होता है जो जैक में मजबूती से फिट होता है।
रंग और कार्य
टेस्ट लीड्स आमतौर पर दो रंगों में आते हैं:
- काली (Black) लीड: यह कॉमन (Common) या नेगेटिव (-) लीड होती है। इसे हमेशा मल्टीमीटर के COM जैक में डाला जाता है।
- लाल (Red) लीड: यह पॉजिटिव (+) लीड होती है। इसका जैक मापी जाने वाली मात्रा (जैसे वोल्टेज, करंट या प्रतिरोध) के आधार पर बदलता है।
महत्व
सही टेस्ट लीड्स का उपयोग करना मल्टीमीटर से सटीक और सुरक्षित माप लेने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सुरक्षा: वे उपयोगकर्ता को बिजली के झटके से बचाते हैं, क्योंकि वे अच्छी तरह से इंसुलेटेड (insulated) होते हैं।
- सटीकता: अच्छी गुणवत्ता वाले लीड्स कम प्रतिरोध प्रदान करते हैं, जिससे माप की सटीकता बनी रहती है।
- लचीलापन: लीड्स के लचीले होने से तंग जगहों पर भी आसानी से काम किया जा सकता है।
मल्टीमीटर का उपयोग करके पृथ्वी की निरंतरता (continuity) की जांच करना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा माप है जो यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण का धातु का आवरण सही ढंग से पृथ्वी से जुड़ा हुआ है।
चरण 1: मल्टीमीटर तैयार करें
- मल्टीमीटर को चालू करें और इसे कंटिन्यूटी (continuity) मोड पर सेट करें। यह फ़ंक्शन आमतौर पर एक डायोड या स्पीकर/बजर आइकन द्वारा दर्शाया जाता है।
- काली (black) प्रोब को COM जैक में और लाल (red) प्रोब को VΩmA जैक में लगाएं।
चरण 2: प्रोब्स को कनेक्ट करें
- लाल प्रोब को उपकरण के धातु के आवरण (metal casing) पर रखें, जैसे कि उसके स्क्रू या किसी भी अनपेक्षित धातु के हिस्से पर।
- काली प्रोब को प्लग के पृथ्वी पिन (earth pin) पर रखें। यह पिन आमतौर पर प्लग के ऊपर और सबसे लंबा होता है।
चरण 3: रीडिंग का निरीक्षण करें
- यदि मल्टीमीटर बीप की आवाज़ करता है और बहुत कम प्रतिरोध (0 Ω के करीब) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि पृथ्वी की निरंतरता सही है। यह दर्शाता है कि पृथ्वी पिन और उपकरण के धातु के आवरण के बीच एक अच्छा विद्युत पथ है।
- यदि मल्टीमीटर कोई बीप की आवाज़ नहीं करता है और OL (ओपन लूप) दिखाता है, तो इसका मतलब है कि सर्किट टूट गया है और पृथ्वी की निरंतरता नहीं है। यह एक गंभीर सुरक्षा जोखिम है, क्योंकि यदि कोई आंतरिक दोष होता है तो बिजली का झटका लगने का खतरा होता है।
मल्टीमीटर में बैक ईएमएफ (Back EMF) कोई समस्या नहीं है, बल्कि यह एक भौतिक सिद्धांत है। बैक ईएमएफ (Back Electromotive Force) वह वोल्टेज है जो एक विद्युत सर्किट में, विशेष रूप से एक इंडक्टर (जैसे मोटर वाइंडिंग या कॉइल) में, एक बदलते चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होता है।
जब आप मल्टीमीटर को एक मोटर या किसी अन्य इंडक्टिव लोड से जोड़ते हैं, तो:
- मोटर को चालू करना या बंद करना: जब एक मोटर चालू या बंद होती है, तो उसके अंदर का चुंबकीय क्षेत्र तेजी से बदलता है। यह बदलाव वाइंडिंग में एक बैक ईएमएफ उत्पन्न करता है, जो सर्किट के वोल्टेज से अधिक हो सकता है।
- मल्टीमीटर पर प्रभाव: यह बैक ईएमएफ मल्टीमीटर को उच्च वोल्टेज स्पाइक्स (spikes) के संपर्क में लाता है। यदि मल्टीमीटर इस तरह के उच्च वोल्टेज स्पाइक्स को सहन करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है, तो यह उसके आंतरिक सर्किट को नुकसान पहुंचा सकता है या फ्यूज उड़ा सकता है।
इसलिए, बैक ईएमएफ को एक "समस्या" के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे कारक के रूप में देखा जाना चाहिए जिसके कारण मल्टीमीटर का उपयोग करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए, खासकर इंडक्टिव लोड के साथ काम करते समय।
बैक ईएमएफ से मल्टीमीटर को कैसे बचाएं
- सटीक श्रेणी (Accurate Rating) वाला मल्टीमीटर चुनें: सुनिश्चित करें कि आपका मल्टीमीटर मोटर या अन्य इंडक्टिव लोड के अधिकतम वोल्टेज और करंट को मापने में सक्षम है।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें: मोटर या सर्किट को पूरी तरह से बंद करने के बाद ही मल्टीमीटर प्रोब को जोड़ें या हटाएँ।
- सही जैक का उपयोग करें: करंट मापते समय, हमेशा सही जैक (जैसे 10A या mA) और सही फ़ंक्शन (एसी या डीसी करंट) का उपयोग करें।
एनालॉग मल्टीमीटर में लंबन त्रुटि (parallax error) तब होती है जब उपयोगकर्ता सुई को गलत कोण से देखता है। यह एक अवलोकन त्रुटि है, जो मल्टीमीटर की अंतर्निहित कमी के कारण नहीं होती।
लंबन त्रुटि का कारण
एनालॉग मल्टीमीटर की सुई और स्केल के बीच कुछ दूरी होती है। यदि उपयोगकर्ता सीधे सुई के ऊपर से देखने के बजाय किसी कोण से देखता है, तो सुई की स्थिति स्केल पर गलत रीडिंग देगी।
- त्रुटि का प्रभाव: जब आप बाईं ओर से देखते हैं, तो रीडिंग वास्तविक मान से कम दिखाई देती है।
- त्रुटि का प्रभाव: जब आप दाईं ओर से देखते हैं, तो रीडिंग वास्तविक मान से अधिक दिखाई देती है।
लंबन त्रुटि से कैसे बचें
- सीधे ऊपर से देखें: लंबन त्रुटि से बचने का सबसे अच्छा तरीका सुई को सीधे ऊपर से देखना है।
- दर्पण पट्टी (Mirror strip): कुछ उच्च-गुणवत्ता वाले एनालॉग मल्टीमीटर में स्केल के साथ एक दर्पण पट्टी होती है। जब आप माप ले रहे हों, तो अपनी आँख को इस तरह से रखें कि सुई का प्रतिबिंब उसी के पीछे छिप जाए। जब आप अपनी आँख को सही स्थिति में रखते हैं, तो आप जानते हैं कि आप सीधे ऊपर से देख रहे हैं और लंबन त्रुटि को समाप्त कर रहे हैं।
डिजिटल मल्टीमीटर कभी-कभी संकेत इसलिए दिखाता है क्योंकि यह पर्यावरण में मौजूद विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप या अन्य स्रोतों से बहुत कम वोल्टेज को भी पकड़ लेता है। यह रीडिंग आमतौर पर इतनी कम होती हैं कि वे व्यावहारिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण नहीं होतीं, लेकिन मल्टीमीटर की उच्च संवेदनशीलता के कारण दिखाई देती हैं।
संकेत दिखाने के कारण
- भूतिया वोल्टेज (Ghost Voltage): जब आप एक ऐसे तार के पास मल्टीमीटर की प्रोब रखते हैं जो किसी सक्रिय तार के पास से गुजर रहा हो, तो प्रेरण (induction) के कारण उस निष्क्रिय तार में एक बहुत कम वोल्टेज प्रेरित हो सकता है। मल्टीमीटर इस "भूतिया वोल्टेज" को माप लेता है।
- उच्च इनपुट प्रतिबाधा (High Input Impedance): डिजिटल मल्टीमीटर की इनपुट प्रतिबाधा बहुत अधिक होती है, जो इसे वोल्टेज को मापने के लिए आदर्श बनाती है क्योंकि यह सर्किट से बहुत कम करंट लेता है। हालांकि, यह इसे बहुत छोटे और अवांछित वोल्टेज संकेतों के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील बना देता है, जो अक्सर आसपास के वातावरण से आते हैं।
- स्थिर विद्युत (Static Electricity): उपयोगकर्ता या आसपास की वस्तुओं से उत्पन्न हुई स्थिर विद्युत भी मल्टीमीटर के सेंसिटिव सर्किट में वोल्टेज उत्पन्न कर सकती है, जिससे अस्थिर या उतार-चढ़ाव वाली रीडिंग दिखाई देती है।
ये संकेत आमतौर पर सर्किट में कोई वास्तविक समस्या नहीं होते हैं, बल्कि मल्टीमीटर की उच्च संवेदनशीलता का परिणाम होते हैं।
एलसीआर मीटर (LCR meter) एक इलेक्ट्रॉनिक परीक्षण उपकरण है जिसका उपयोग प्रेरकत्व (inductance), धारिता (capacitance), और प्रतिरोध (resistance) को मापने के लिए किया जाता है। इसका नाम इन तीन भौतिक राशियों के शुरुआती अक्षरों से लिया गया है: L (inductance), C (capacitance), और R (resistance). यह मीटर एक घटक को मापता है और उसके मान को डिस्प्ले पर दिखाता है।
एलसीआर मीटर कैसे काम करता है
एलसीआर मीटर एक घटक के माध्यम से एक ज्ञात प्रत्यावर्ती धारा (AC current) या प्रत्यावर्ती वोल्टेज (AC voltage) को भेजकर काम करता है। फिर यह घटक के वोल्टेज (voltage) और धारा (current) के बीच के चरण बदलाव (phase shift) को मापता है। इस माप से, यह घटक के प्रेरकत्व, धारिता, या प्रतिरोध के मान की गणना करता है।
एलसीआर मीटर के उपयोग
एलसीआर मीटर का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है, जैसे:
- इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण: यह सुनिश्चित करने के लिए कि घटक सही मानों के साथ निर्मित किए गए हैं।
- गुणवत्ता नियंत्रण: दोषपूर्ण घटकों का पता लगाने के लिए।
- अनुसंधान और विकास: नए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और उपकरणों के डिजाइन और परीक्षण में।
- मरम्मत: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत के दौरान खराब घटकों की पहचान करने के लिए।
डीएमएम (DMM) का मतलब डिजिटल मल्टीमीटर (Digital Multimeter) है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक मापक यंत्र है जिसका उपयोग विभिन्न विद्युत राशियों जैसे वोल्टेज (Voltage), करंट (Current) और प्रतिरोध (Resistance) को मापने के लिए किया जाता है।
डीएमएम के उपयोग
डीएमएम का उपयोग कई क्षेत्रों में होता है, जिनमें शामिल हैं:
- इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स: यह सर्किट में वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध को मापने के लिए सबसे आम उपकरणों में से एक है।
- ऑटोमोटिव: वाहनों में वायरिंग और सेंसर की जांच करने के लिए।
- घरेलू उपकरण: खराब उपकरणों की मरम्मत और समस्या निवारण के लिए।
- अनुसंधान और विकास: नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और प्रोटोटाइप का परीक्षण करने के लिए।
डीएमएम के मुख्य घटक
एक सामान्य डिजिटल मल्टीमीटर में कई महत्वपूर्ण घटक होते हैं:
डिस्प्ले: यह मापी गई रीडिंग को डिजिटल रूप में दिखाता है।
रोटरी स्विच: इसका उपयोग मापने के लिए वांछित फ़ंक्शन (वोल्टेज, करंट, या प्रतिरोध) और रेंज (AC या DC) का चयन करने के लिए किया जाता है।
इनपुट जैक: इसमें टेस्ट प्रोब (मापने वाले तार) लगाए जाते हैं।
एनालॉग-टू-डिजिटल कनवर्टर (ADC): यह इनपुट में प्राप्त एनालॉग सिग्नल को डिजिटल रूप में बदलता है ताकि इसे डिस्प्ले पर दिखाया जा सके।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें